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                <title>Census - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Census RSS Feed</description>
                
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                <title>Census Training: तहसील मुख्यालय पर दूसरे दिन भी दिया जनगणना का प्रशिक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[20 अप्रैल से चार मई की अवधि में कुल 596 प्रगणक व सुपरवाइजर लेंगे प्रशिक्षण 22 मई से 20 जून तक चलेगा प्रथम चरण की जनगणना का कार्य कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana Census Training: तहसील मुख्यालय पर स्थित सभागार कक्ष में दूसरे दिन भी जनगणना का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें प्रशिक्षकों ने प्रगणकों व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/census-training-was-given-on-the-second-day-also-at-kairana-tehsil-headquarters/article-83682"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/kairana-6.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">20 अप्रैल से चार मई की अवधि में कुल 596 प्रगणक व सुपरवाइजर लेंगे प्रशिक्षण</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>22 मई से 20 जून तक चलेगा प्रथम चरण की जनगणना का कार्य</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैराना (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Kairana Census Training: तहसील मुख्यालय पर स्थित सभागार कक्ष में दूसरे दिन भी जनगणना का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें प्रशिक्षकों ने प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को त्रुटिरहित जनगणना के तौर-तरीकों के बारे में समझाया। तहसील मुख्यालय पर जनगणना-2027 के लिए प्रशिक्षण का दौर चल रहा है, जिसमें प्रशिक्षकों द्वारा प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को प्रथम चरण की जनगणना का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंगलवार को भी तीन बैचों में शामिल 148 प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को लगातार दूसरे दिन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें प्रथम चरण की जनगणना के तौर-तरीकों के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया। वहीं, तहसीलदार अर्जुन चौहान ने बताया कि चार मई तक जनगणना के प्रथम चरण का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मंगलवार को प्रशिक्षण का दूसरा दिन था। प्रथम चरण की जनगणना हेतु तहसील क्षेत्र में कुल 596 प्रगणक व सुपरवाइजर तैनात किए गए है। Kairana</p>
<p style="text-align:justify;">इन प्रगणकों व सुपरवाइजर्स के कुल 12 बैच बनाए गए है। तीन-तीन बैचों के चार ग्रुप बनाए गए है। एक ग्रुप के तीन बैचों को लगातार तीन दिन तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि 22 मई से 20 जून तक प्रथम चरण की जनगणना का कार्य चलेगा, जिसमें मकानों की गणना होगी। तहसील क्षेत्र में कुल 481 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक(एचएलबी) है। इसके अलावा, 07 मई से 21 मई तक प्रत्येक व्यक्ति को स्वगणना का अधिकार है। इस अवधि में व्यक्ति पोर्टल पर जाकर स्वयं से सम्बंधित जानकारियां फीड कर सकता है। तहसीलदार ने बताया कि प्रगणकों व सुपरवाइजर्स में शिक्षा, पंचायत, कृषि व राजस्व समेत विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण में शामिल होने आए प्रगणकों व सुपरवाइजर्स के लिए ब्रेक फ़ास्ट, लंच व चाय का बेहतर बंदोबस्त किया गया है, जिसमें पौष्टिक व लजीज व्यंजन शामिल किए गए है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैराना क्षेत्र में जनगणना हेतु नियुक्त किये गए है 10 प्रशिक्षक | Kairana</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन की ओर से कैराना क्षेत्र के जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक व निर्विघ्न सम्पन्न कराने हेतु 10 प्रशिक्षक नियुक्त किये गए है, जिसमें से चार प्रशिक्षक नगर में जनगणना करने वाले प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जबकि छह प्रशिक्षकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के जनगणनाकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें प्रदीप कुमार, आनंद कुमार, अनिल कुमार, मनोज कुमार पांडेय, जितेंद्र कुमार, नवनीत गुप्ता, सुशील कुमार रवि, लालचन्द, प्रशांत कुमार व अशोक कुमार के नाम शामिल है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Yamunanagar Police: यमुनानगर पुलिस ने शातिर चोर हीरा पहाड़ी किया काबू, लिया रिमांड पर" href="https://www.sachkahoon.com/yamunanagar-police-arrested-notorious-thief-hira-pahadi/">Yamunanagar Police: यमुनानगर पुलिस ने शातिर चोर हीरा पहाड़ी किया काबू, लिया रिमांड पर</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/census-training-was-given-on-the-second-day-also-at-kairana-tehsil-headquarters/article-83682</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:17:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अप्रैल 2026 से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण हरियाणा के निदेशक ललित जैन ने ली जिला के अधिकारियों की बैठक, दिए आवश्यक दिशा निर्देश कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Kaithal News: आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसको लेकर बुधवार को जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण हरियाणा के निदेशक ललित जैन ने लोक निर्माण विभाग के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kaithal/lalit-jain-director-census-operations-and-civil-registration-haryana-chaired-a-meeting-of-district-officials/article-77781"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/kaithal-news-4.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण हरियाणा के निदेशक ललित जैन ने ली जिला के अधिकारियों की बैठक, दिए आवश्यक दिशा निर्देश</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> Kaithal News: आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसको लेकर बुधवार को जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण हरियाणा के निदेशक ललित जैन ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली, जिसमें उन्होंने जनगणना के सफल संचालन के लिए आवश्यक निर्देश दिए और विस्तृत गाइडलाइन साझा की। इस मौके पर जिले के जनगणना नोडल अधिकारी एवं सीटीएम गुरविंदर सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">निदेशक ललित जैन ने बैठक में अधिकारियों को अवगत कराया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह से ऑनलाइन और ऐप आधारित होगी। यह एक बड़ा बदलाव है, जो प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और त्वरित बनाएगा। अधिकारियों को नई तकनीक और प्रक्रियाओं को समझने और लागू करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। इस अवसर पर जिला सांख्यिकी अधिकारी निर्मल, सुपरवाइजर ज्योति राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहला चरण अप्रैल 2026 में | Kaithal News</h3>
<p style="text-align:justify;">निदेशक ललित जैन ने बताया कि जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 में शुरू होने की संभावना है। सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों इस महत्वपूर्ण चरण के लिए अपनी-अपनी जिम्मेदारियां समय पर पूरी करें। पहले चरण में प्रमुख रूप से मकानों की सूची बनाना और नागरिक रजिस्टर को अपडेट करना शामिल हो सकता है। वहीं दूसरा चरण फ़रवरी-मार्च 2027 से शुरू होगा। जिसमें नागरिक स्वयं भी अपनी जानकारी भर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर किए जाएंगे आयोजित</h3>
<p style="text-align:justify;">निदेशक ललित जैन ने बताया कि सभी तहसीलदार, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी व सचिव चार्ज ऑफिसर होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि जनगणना कार्य में लगने वाले सभी कर्मचारियों का व्यापक और गहन प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए, खासकर ऑनलाइन और ऐप-आधारित डेटा संग्रह पर। जनगणना के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में आई सी ई (सूचना, संचार और शिक्षा) गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Mongolia: मंगोलिया में फंसे यात्रियों को लेकर दिल्ली लौटी एयर इंडिया की विशेष उड़ान" href="http://10.0.0.122:1245/air-india-flight-carrying-passengers-stranded-in-mongolia-returns-to-delhi/">Mongolia: मंगोलिया में फंसे यात्रियों को लेकर दिल्ली लौटी एयर इंडिया की विशेष उड़ान</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कैथल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 18:53:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Caste Census: देश में इस बार होगी जातिगत जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया बड़ा फैसला नई दिल्ली (एजेंसी)। Caste Census: बिहार विधानसभा चुनावों से पहले सरकार ने राजनीतिक महत्व का एक बड़ा कदम उठाते हुए देश में आम जनगणना में जातियों की गणना कराने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/this-time-there-will-be-caste-census-in-the-country/article-70304"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/caste-census.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पीएम मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया बड़ा फैसला</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>Caste Census: बिहार विधानसभा चुनावों से पहले सरकार ने राजनीतिक महत्व का एक बड़ा कदम उठाते हुए देश में आम जनगणना में जातियों की गणना कराने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। Caste Based Census</p>
<p style="text-align:justify;">रेल, सूचना प्रसारण, इलैक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज फैसला किया है कि जाति गणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए।’’ जनगणना इस साल सितंबर से शुरू की जा सकती है। इसे पूरा होने में एक साल लगेगा। ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरूआत में आएंगे। हालांकि जनगणना कब से शुरू होगी, इसके बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा है। बता दें कि वर्ष 2021 में कोविड महामारी के चलते जनगणना को टाल दिया गया था। आमतौर पर ये प्रत्येक 10 साल में होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने आज तक जाति जनगणना का विरोध किया है। आजादी के बाद की सभी जनगणनाओं में जातियों की गणना नहीं की गई। वर्ष 2010 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि जाति जनगणना पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा। तत्पश्चात एक मंत्रिमण्डल समूह का भी गठन किया गया था, जिसमें अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति आधारित जनगणना की संस्तुति की थी। इसके बावजूद कांग्रेस की सरकार ने जाति जनगणना के बजाय, एक सर्वे कराना ही उचित समझा जिसे एसईसीसी के नाम से जाना जाता है। इस सब के बावजूद कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दलों ने जाति जनगणना के विषय को केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग किया। Caste Based Census</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि जनगणना का विषय संविधान के अनुच्छेद 246 की केंद्रीय सूची की क्रम संख्या 69 पर अंकित है और यह केंद्र का विषय है। हालांकि, कई राज्यों ने सर्वे के माध्यम से जातियों की जनगणना की है। जहां कुछ राज्यों में यह कार्य सूचारू रूप से संपन्न हुआ है, वहीं कुछ अन्य राज्यों ने राजनीतिक दृष्टि से और गैरपारदर्शी ढंग से सर्वे किया है। इस प्रकार के सर्वे से समाज में भ्रांति फैली है। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए और यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारा सामाजिक ताना बाना राजनीति के दबाव में न आए, जातियों की गणना एक सर्वे के स्थान पर मूल जनगणना में ही सम्मिलित होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे यह सुनिश्चित होगा कि समाज आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत होगा और देश की भी प्रगति निर्बाध होती रहेगी। उल्लेखनीय है कि सरकार के इस फैसले का बिहार विधानसभा के सितंबर अक्टूबर में होने वाले चुनाव की दृष्टि से देखा जा रहा है जहां विपक्षी इंडी गठबंधन द्वारा उठाई गई जातीय जनगणना कराने की मांग जोर पकड़ रही है। केन्द्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार के इस फैसले को बिहार की राजनीति में उलटफेर करने वाला निर्णय माना जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किस पार्टी का क्या रुख रहा | Caste Based Census</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>विपक्ष<br />
</strong>कांग्रेस सहित बीजू जनता दल, समाजवादी पार्टी, राष्टÑीय जनता दल, बहुजन समाज पार्टी, एनसीपी शरद पवार देश में जातिगत जनगणना की मांग कर रही हैं। हालांकि तृणमूल का रुख अभी साफ नहीं है। राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका दौरे पर भी जातिगत जनगणना को सही बताया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सत्ता पक्ष</strong><br />
पहले भाजपा जाति जनगणना के पक्ष में नहीं थी और विपक्ष पर जातिगत जनगणना के जरिए देश को बांटने की कोशिश का आरोप लगा रही थी। हालांकि बिहार में भाजपा ने ही जातिगत जनगणना का सपोर्ट किया था। बिहार ने अक्टूबर 2023 में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी किए थे। जो ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसने क्या कहा?</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जाति जनगणना का फैसला दर्शाता है कि सरकार देश और समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध है: केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय</li>
<li style="text-align:justify;">यह फैसला हमारी जीत है। हमारी बात सरकार को माननी पड़ी : तेजस्वी यादव</li>
<li style="text-align:justify;">यह कांग्रेस की जीत है। आखिरकार मोदी सरकार को जाति जनगणना करानी पड़ रही है: उदित राज</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">कानून में करना होगा संशोधन</h3>
<p style="text-align:justify;">जनगणना एक्ट 1948 में एससी-एसटी की गणना का प्रावधान है। ओबीसी की गणना के लिए इसमें संशोधन करना होगा। इससे ओबीसी की 2,650 जातियों के आंकड़े सामने आएंगे। 2011 की जनगणना के अनुसार, मार्च 2023 तक 1,270 एससी, 748 एसटी जातियां हैं। 2011 में एससी आबादी 16.6% और एसटी 8.6% थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अंग्रेजों के जमाने में होती थी जातिगत जनगणना</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">1881 में देश में पहली बार अंग्रेज शासकों ने जनगणना के साथ जातिगत जनगणना करवाई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">1931 तक चलता रहा ये सिलसिला</li>
<li style="text-align:justify;">वर्ष 1941 में जातिगत जनगणना तो हुई लेकिन आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए।</li>
<li style="text-align:justify;">संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता के बाद जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, बी.आर. अंबेडकर और मौलाना आजाद जैसे नेताओं वाली देश की पहली कैबिनेट ने समाज में विभाजनकारी असर की आशंका के चलते जातिगत जनगणना न करवाने का निर्णय लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">स्वतंत्रता के पश्चात 1951 में पहली जनगणना हुई लेकिन उसमें सिर्फ एससी-एसटी की गणना हुई। ये भी इसलिए क्योंकि संविधान में आरक्षण की बाध्यता थी। Caste Based Census</li>
</ul>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जानलेवा हमले के आरोप में पिता-पुत्र गिरफ्तार, जेल रवाना" href="http://10.0.0.122:1245/father-and-son-arrested-on-charges-of-murderous-attack/">जानलेवा हमले के आरोप में पिता-पुत्र गिरफ्तार, जेल रवाना</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/this-time-there-will-be-caste-census-in-the-country/article-70304</link>
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                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 20:45:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांग्लादेश में 50 सालों में हिंदुओं की संख्या 75 लाख तक घटी :जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[ढाका (एजेंसी)। बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती जा रही है। पिछले 50 सालों में देश की कुल जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, लेकिन हिंदुओं की संख्या में लगभग 75 लाख तक की गिरावट आ चुकी है। हिंदुओं के अलावा बौद्ध, ईसाई और अन्य धर्म के लोगों की संख्या कमोबेश स्थिर रही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/hindu-population-in-bangladesh-reduced-by-7-5-million-in-50-years-census/article-28389"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/bangladesh-population.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका (एजेंसी)।</strong> बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती जा रही है। पिछले 50 सालों में देश की कुल जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, लेकिन हिंदुओं की संख्या में लगभग 75 लाख तक की गिरावट आ चुकी है। हिंदुओं के अलावा बौद्ध, ईसाई और अन्य धर्म के लोगों की संख्या कमोबेश स्थिर रही है। आजाद बांग्लादेश में पहली जनगणना 1974 में हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उस वक्त हिंदुओं की जनसंख्या 13.5 फीसदी थी। इसके बाद बाद चार और जनगणना की गई। साल 2011 में की गई जनगणना से पता चला कि बंगलादेश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 8.5 फीसदी है। साल 2011 के लिए बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (बीबीएस) ने जनसंख्या और आवास जनगणना की अपनी रिपोर्ट में देश में हिंदुओं की आबादी में कमी के दो कारण बताए थे। इनमें से एक हिंदुओं का देश छोड़कर चले जाना है और दूसरी वजह हिंदुओं में कुल प्रजनन दर का तुलनात्मक रूप से कम होना है, मतलब हिंदुओं के घरों में अपेक्षाकृत कम बच्चे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बांग्लादेश में डायरिया की बीमारी के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र ने दो और संगठनों के साथ मिलकर देश के एक छोटे से हिस्से में एक अध्ययन किया और पाया कि हिंदुओं के पलायन और प्रजनन दर कम होने के अलावा इस समुदाय में शिशुओं की मृत्यु दर तुलनात्मक रूप से अधिक होने की वजह से इनकी जनसंख्या कम होती जा रही है। राजनीतिक नेता, समाज के जानकार, हिंदू समुदाय के नेता और शोधकर्ता कमोबेश इस बात पर सहमत हैं कि हिंदुओं का बाहरी देशों में पलायन देश में उनकी आबादी में कमी होने का मुख्य कारण है। इस पलायन के पीछे एक ऐतिहासिक प्रवृत्ति रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हिंदू पलायन क्यों कर रहे हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">ढाका विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अबुल बरकत तीन दशकों से अधिक समय से अल्पसंख्यकों के देश छोड़ने के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारणों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर बात करते हुए कहा, ”कोई भी अपनी मातृभूमि, अपने घर को छोड़कर किसी और देश में नहीं जाना चाहता। यह उत्पीड़न ही है, जिसकी वजह से हिंदू पलायन कर रहे हैं और उनकी संख्या तेजी से घट रही है।” उन्होंने बताया, ”कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें शत्रु संपत्ति अधिनियम (निहित) की वजह से अपना सब कुछ गंवाना पड़ा है और उन्होंने देश छोड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा अधिकतर गांव के कमजोर हिंदू परिवारों के साथ होता होता है तथा इसके अलावा और भी कारण हैं। इस साल दुर्गा पूजा के दौरान पवित्र कुरान को अपवित्र किए जाने की घटना के बाद हिंदुओं के पूजा मंडप और मंदिर नष्ट कर दिए गए, उनके घरों और उनकी दुकानों में आग लगा दी गई । इस दौरान अनेक लोगों की मौत भी हुई ।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:24:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा में उठी जातिगत जनगणना की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राज्यसभा में दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों ने जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग करते हुए बुधवार को कहा कि इसके बगैर आंकड़ों के अभाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है। अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) जातियों की सूची बनाने का अधिकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राज्यसभा में दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों ने जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग करते हुए बुधवार को कहा कि इसके बगैर आंकड़ों के अभाव में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है। अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) जातियों की सूची बनाने का अधिकार राज्यों को देने से संबंधित संविधान के 105वें संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने कहा कि जातिगत जनगणना से यह पता चल सकेगा कि लोगों की वास्तविक स्थिति क्या है और किसी जाति की कितनी आबादी है तथा वे किस पेशे से जुड़े है। उनकी शिक्षा और आर्थिक स्थिति क्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने लोकसभा से पारित इस विधेयक को सदन में पेश किया और कहा कि इसका पूर्व संविधान (127 वें संशोधन) विधेयक के नाम को बदल कर संविधान (105वां संशोधन) विधेयक किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से राज्यों को ओबीसी की सूची बनाने का अधिकार दिया जा रहा है। इससे मेडिकल दाखिला में ओबीसी के लिए चार हजार सीटें बढ़ जाएगी। इस विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंधवी ने कहा कि जातिगत जनगणना के बगैर ओबीसी को पूरा आरक्षण नहीं मिल सकता है। अभी इस वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण है लेकिन उसको अभी मात्र 22 फीसदी ही आरक्षण मिल रहा है। यदि जागतिगत जनगणना होगी तो ओबीसी की आबादी 45 प्रतिशत से अधिक होगी और तब उसको वास्तविक आरक्षण का लाभ मिलेगा। वर्ष 2011 में जातिगत जनगणना करायी गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के सुशील कुमार मोदी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा इस सरकार ने दिया है और अब ओबीसी को आरक्षण को पूरा लाभ देने के लिए यह संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वर्ष 2018 में ओबीसी से जुड़ा एक विधेयक लाया गया था</h4>
<p style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने भी जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए अधिकांश विधेयकों को पारित किए जाने के तत्काल बाद संशोधन की आवश्यकता आ रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी से जुड़े विधेयकों में अब तक कितने संशोधन किए जा चुके हैं। इसी तरह से वर्ष 2018 में ओबीसी से जुड़ा एक विधेयक लाया गया था और उसमें की गयी लापरवाही के कारण आज फिर से इस संशोधन को लाना पड़ा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जातिगत जनगणना की बहुत जरूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने भी जातिगत जनगणना की मांग करते हुए कहा कि इसके बैगर किसी भी जाति को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वह बिहार का प्रतिनिधित्व करते हैं और वहां जातिगत जनगणना की बहुत जरूरत है। इससे यह पता चल सकेगा कि देश में किस किस जाति की कितनी आबादी है और किस पेशे में है। उनकी आर्थिक सामाजिक स्थिति क्या है। चर्चा में बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य, द्रमुक के तिरूची शिवा, तेलंगना राष्ट्र समिति के डॉ़ बंदा प्रकाश, अन्नाद्रमुक के ए नवनीतकृष्णन और वाईएसआर कांग्रेस के सुभाष चंद्र पिल्लै ने भी भाग लिया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/demand-for-caste-census-raised-in-rajya-sabha/article-25955</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 16:18:36 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनपीआर के बिना जातिगत जनगणना असंभव : नायडू</title>
                                    <description><![CDATA[जदयू सदस्य रामनाथ ठाकुर ने उठाई थी मांग |  Caste census नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के बगैर जातिगत जनगणना (Caste census) संभव नहीं है। यह बात राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सदन में की। नायडू ने शून्यकाल के दौरान यह टिप्पणी की। उस समय जदयू के रामनाथ ठाकुर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/caste-census-impossible-without-npr-naidu/article-12947"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/caste-census-not-possibe-without-npr.jpg" alt=""></a><br /><h2>जदयू सदस्य रामनाथ ठाकुर ने उठाई थी मांग |  Caste census</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के बगैर जातिगत जनगणना (Caste census) संभव नहीं है। यह बात राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को सदन में की। नायडू ने शून्यकाल के दौरान यह टिप्पणी की। उस समय जदयू के रामनाथ ठाकुर ने वर्ष 2021 में जनगणना के साथ ही जातिगत गणना करने की भी सरकार से मांग की। ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1931 में ब्रिटिश काल में जातिगत गणना किया गया था। इसके बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने वर्ष 2010 में भी जातिगत गणना की। लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। जातिगत गणना नहीं होने के कारण पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को विकास कार्यों का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी कई बार इसकी मांग कर चुके हैं।</p>
<ul>
<li><strong>रामनाथ ठाकुर ने 2021 में जनगणना के साथ ही जातिगत गणना की मांग की</strong></li>
<li><strong>वर्ष 1931 में ब्रिटिश काल में जातिगत गणना का दिया हवाला। </strong></li>
<li><strong>2010 में जातिगत गणना रह गई थी अधूरी</strong></li>
<li><strong>पिछड़े वर्ग, अजा, जजा को विकास कार्यों का समुचित लाभ न मिलने का लगाया आरोप</strong></li>
<li><strong>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उठा चुके हैं मांग</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/caste-census-impossible-without-npr-naidu/article-12947</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2020 13:18:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना से इंकार तो तीन साल की जेल</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय जनगणना अधिनियम के मुताबिक, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को अपने इलाके में जनगणना के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना अनिवार्य है, जिनमें प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिला एवं उप-जिला जनगणना अधिकारी, पर्यवेक्षक और प्रगणक शामिल हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/three-years-in-jail-if-census-is-denied/article-12223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/census.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">राज्य सरकार के कर्मचारी नियमों में बंधे</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राज्य सरकार और स्थानीय निकाय कर्मी जनगणना <strong>(Census )</strong> और एनपीआर के आंकड़े जुटाने से इंकार नहीं कर सकेंगे। यदि वे ऐसा करते हैं तो उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है। क्योंकि वे सेंसस आफ इंडिया एक्ट, 1948 और सिटिजनशिपर रूल्स, 2003 से बाध्य होंगे। हालांकि इस दायरे में सिर्फ वही अधिकारी और कर्मी आएंगे, जिन्हें जनगणना आयुक्त और रजिस्ट्रार जनरल आॅफ सिटिजन रजिस्ट्रेशन को क्रमश: जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया में मदद करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बाध्यता एनपीआर आंकड़ा जुटाते वक्त मकानों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों और जनगणना अधिकारियों, दोनों के लिए है। भारतीय जनगणना अधिनियम के मुताबिक, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को अपने इलाके में जनगणना के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना अनिवार्य है, जिनमें प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिला एवं उप-जिला जनगणना अधिकारी, पर्यवेक्षक और प्रगणक शामिल हैं। इस अधिनियम की धारा 11 के तहत जनगणना प्रक्रिया में हिस्सा लेने से इनकार करने वाले सरकारी या अन्य कर्मचारियों को तीन साल की जेल या जुर्माने या जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारियां  | Census</h3>
<p style="text-align:justify;">गृह विभाग ने जनगणना के लिए संभागायुक्त से लेकर जोन कमिश्नर तक को अलग-अलग जिम्मेदारी बांट दी है। संभागायुक्त राजस्व संभाग की सीमाओं के भीतर संभागीय जनगणना अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं जिला कलेक्टरों को जिला जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इनके अलावा जिला योजना एवं सांख्यिकीय अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार, अतिरिक्त व नायब तहसीलदार, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर निगम के आयुक्त, जोन कमिश्नर (जहां लागू हो) और विशेष क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी को संबंधित क्षेत्रों की सीमाओं की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सेंसस आफ इंडिया एक्ट, 1948 और सिटिजनशिपर रूल्स, 2003 के तहत कर्मी बाध्य</strong></li>
<li><strong>2021 में अप्रैल से सितंबर के बीच होगी मकानों की गणना</strong></li>
<li><strong>मकान गणना के साथ जुटाए जाएंगे एनपीआर के आंकडे</strong></li>
<li><strong>जनगणना में ड्यूटी से इंकार पर सिटिजनशिप रूप के नियम 17 में एक हजार रुपये जुर्माना संभव</strong></li>
</ul>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/three-years-in-jail-if-census-is-denied/article-12223</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Jan 2020 15:25:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर मोदी कैबिनेट की मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[गृह मंत्रालय के तहत आने वाली आॅफिस आॅफ द रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर की वेबसाइट के मुताबिक यह देश में रहने वाले लोगों की जानकारी का एक रजिस्टर होगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/modi-cabinets-seal-on-national-population-register/article-11967"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/national-population.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">2021 की जनगणना को भी मिली मंजूरी (National population)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>कैबिनेट: चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) को मंजूरी, सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होगा</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मोदी कैबिनेट ने सुरक्षा मामलों की समिति ने चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद सर्जित करने ,उसकी भूमिका , नियमों, चार्टर को और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंगलवार को मंजूरी दे दी। इसके तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। इसका इस्तेमाल सरकार अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए करती है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसलों से रू-ब-रू करवाते सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि एनपीआर में कोई प्रूफ, कोई डॉक्युमेंट और बायोमीट्रिक की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिक जो भी सूचना देंगे, वह सही मान ली जाएगी। जावड़ेकर ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस बार जनगणना का कार्य अंग्रेजों के जमाने से हो रहा है। भारत में अब तक 15 बार जनगणना का काम हुआ है। आजादी से पहले अंग्रेजों ने भारत की आठ बार जनगणना करवाई थी, फिर आजादी के बाद सात जनगणना हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अब 16वीं जनगणना का काम बेहद आसान कर दिया गया है। इस बार तकनीकी की मदद ली जाएगी। एक ऐप लॉन्च होगा जिसमें नागरिक जो भी जानकारी देंगे, उन्हें बिल्कुल सही मान लिया जाएगा। इसके साथ ही 2021 में होने वाली जनगणना को भी मंजूरी दे दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">छह हजार करोड़ रुपए की लागत से अटल जल मिशन को मंजूरी, हरियाणा को भी मिलेगा लाभ</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने सात राज्यों में भूजल के प्रबंधन एवं पानी के किफायती उपयोग के एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘अटल जल’ शुरू करने को मंगलवार को स्वीकृति दी। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि इस कार्यक्रम के लिए सरकार 6000 करोड़ रुपए देगी और 6000 करोड़ रुपए विश्व बैंक से आएंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और हरियाणा में 8350 गांवों में लोगों एवं किसानों को साथ में लेकर उनके सहयोग से इस कार्यक्रम को क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांवों में पेयजल की 85 प्रतिशत आपूर्ति भूजल से होती है और देश में 62 प्रतिशत सिंचाई भी भूजल से होती है। इसलिए भूजल का प्रबंधन करना जरूरी है। इस कार्यक्रम के तहत जनजागृति, जल सुरक्षा, पानी का किफायती इस्तेमाल तथा इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के उपाय किए जाएंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री गत 15 अगस्त को सीडीएस के पद की घोषणा की थी</h3>
<p style="text-align:justify;">सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सीडीएस सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होगा और वह चार स्टार के रैंक वाला जनरल होगा। सीडीएस का वेतन सेनाओं के प्रमुखों के समान होगा। वह रक्षा मंत्रालय के तहत बनाये जाने वाले सैन्य मामलों के विभाग का प्रमुख होगा। सीडीएस इस विभाग का सचिव भी होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 15 अगस्त को सीडीएस के पद की घोषणा की थी।</p>
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<li style="text-align:justify;">सीडीएस सरकार को रक्षा मामलों में सलाह देने वाला विभाग होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">कारगिल लड़ाई के बाद समीक्षा समिति ने इस पद के सजृन की सिफारिश की थी।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जानें, क्या है एनपीआर</h3>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-एनपीआर यानि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर, वो रजिस्टर जिसमें देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पूरी जानकारी होगी। एक ऐसा रजिस्टर जिसमें देश के निवासियों की पहचान से जुड़ी हर तरह की सूचना होगी। गृह मंत्रालय के तहत आने वाली आॅफिस आॅफ द रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर की वेबसाइट के मुताबिक यह देश में रहने वाले लोगों की जानकारी का एक रजिस्टर होगा।</strong> </em></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसके लिए लोगों से नाम, पता, पेशा, शिक्षा जैसी 15 जानकारियां मांगी जाएंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">लोगों की फोटो, फिंगर प्रिंट, रेटिना की भी जानकारी ली जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">5 साल से अधिक उम्र के निवासियों से जुड़ी हर सूचना होगी।</li>
<li style="text-align:justify;">सेंसस आॅफ इंडिया की वेबसाइट के होमपेज पर नेशनल रजिस्टर आॅफ इंडियन सिटिजन्स का लिंक है</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके अंदर नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का जिक्र है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके मुताबिक नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का उद्देश्य देश में रहने वाले प्रत्येक शख्स की पहचान का डेटाबेस तैयार करना है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके लिए लोगों की भौगोलिक और शरीर से जुड़ी बाहरी और भीतरी जानकारी रखी जाएगी।</li>
</ul>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 17:31:15 +0530</pubDate>
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