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                <title>water conservation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>water conservation RSS Feed</description>
                
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                <title>Water Conservation: नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों की बहाली क्यों है जरूरी? जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[ नदियाँ, झीलें और आर्द्रभूमियाँ केवल पानी के भंडार नहीं हैं, ये हमारी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा, जैवविविधता और सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं। वे जल चक्र को संतुलित करतीं हैं, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखतीं हैं, सूखा और बाढ़ दोनों के प्रभाव को कम करती हैं और करोड़ों लोगों को निवाला, रोजगार और आवास उपलब्ध कराती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/water-conservation-why-restoration-of-rivers-lakes-and-wetlands-is/article-86728"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-06/water-conservation.jpg" alt=""></a><br /><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-06/sandeep-singhmar.jpg" alt="Sandeep-Singhmar" width="104" height="140"></img>
डॉ. संदीप सिंहमार

<p style="text-align:justify;">Freshwater Ecosystem Restoration: नदियाँ, झीलें और आर्द्रभूमियाँ केवल पानी के भंडार नहीं हैं, ये हमारी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा, जैवविविधता और सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं। वे जल चक्र को संतुलित करतीं हैं, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखतीं हैं, सूखा और बाढ़ दोनों के प्रभाव को कम करती हैं और करोड़ों लोगों को निवाला, रोजगार और आवास उपलब्ध कराती हैं। फिर भी आज हमारे देश की कई नदियाँ, झीलें और आर्द्रभूमियाँ प्रदूषण, अतिकेयानी उपयोग और जलवायु संकट की चपेट में हैं। Water Conservation</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हमने अब न देखा न संभाला, तो इन पारिस्थितिक तंत्रों के टूटने का मूल्य हम सबको चुकाना होगा आर्थिक रूप से, पर्यावरणीय रूप से और सामाजिक रूप से। औद्योगिक और घरेलू सीवेज का अपव्यवस्थित निर्वहन, असंयमित कृषि रसायनों और पोषक तत्वों का बहाव, खनन-प्रवृत्तियाँ, और बांधों तथा जलविभाजन के कारण नदियों की प्राकृतिक धारा और तल बदल रहे हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन से चरम घटनाओं की आवृत्ति बढ़ने पर सूखे और अचानक बाढ़ का चक्र अधिक तीव्र हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप जलग्रहण-क्षमता घट रही है, जलीय जैव विविधता खतरे में है और तटीय-आधारित आजीविकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। शहरीकरण के साथ कई प्राकृतिक आर्द्रभूमियाँ भर दी जाती हैं या उनके किनारे निर्माण हो जाता है, जिससे वे बहुत कम हो कर बचाव के कमजोर ढांचे बनकर रह जाती हैं। मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली केवल संरक्षण तक सीमित नहीं हो सकती; यह बहुआयामी रणनीति मांगती है, जिसमें नीति, वित्त, स्थानीय भागीदारी और वैज्ञानिक निगरानी एक साथ हों।  स्रोत-से-समुद्र तक दृष्टिकोण अपनाएँ। नदी बेसिनों की बहाली के लिए समग्र जल प्रबंधन लेना होगा धाराएँ, उपवाहक, तटवर्ती आर्द्रभूमियाँ और जलाधार सभी का एकीकृत प्रबंधन करना आवश्यक है। प्रदूषण पर जीरो टॉलरेंस पर लाने के लिए काम करना होगा। </p>
<p style="text-align:justify;">शहरी क्षेत्रों में सीवेज का उपचार और री-यूज औद्योगिक और कृषि प्रयोजनों के लिए अनिवार्य करें। जल निकासी प्रणालियों के साथ सुदृढ़ निगरानी और नियमन रखें। कृषि-पद्धतियों में बदलाव प्रोत्साहित करें। नियंत्रित उर्वरक और कीटनाशक उपयोग, नाइट्रोजन-फिक्सिंग फसलें, रैर-फार्मिंग और जैविक खेती से पोषक तत्वों का जल में बहाव कम होगा। काश्त के पानी के कुशल उपयोग के लिए ड्रिप/स्प्रिंकलर जैसी प्रणालियाँ सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आक्रामक विदेशी प्रजातियों का हटाना और स्थानीय प्रजातियों का पुनरोपण। क्षतिग्रस्त तटों और आर्द्रभूमियों से आक्रामक उपद्रवियों को हटाकर प्राकृतिक वनस्पति की बहाली से पारिस्थितिक समतुल्य और भोजन-श्रृंखला बहाल हो सकती है।  Water Conservation</p>
<p style="text-align:justify;">शहरी नियोजन में 'नीला-हरा' इंटिग्रेशन। शहरों में प्राकृतिक जलाशयों, एसाइटेज बेसिनों और हरे-भरे गलियारों को संरक्षित करके बाढ़ नियंत्रण और शहरी ताप को कम किया जा सकता है। बारिश के पानी का स्थानीय संचयन और स्वच्छ वाटर रीचार्ज जरूरी है। समुदाय-आधारित निगरानी और स्वामित्व। स्थानीय किसान, जल उपयोगकर्ता समूह और नागरिक समाज को निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने पर बहाली अधिक टिकाऊ होती है। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्साह का सशक्त उपयोग परियोजनाओं की सफलता के लिए निर्णायक है। विज्ञान-आधारित लक्ष्य और नियमित निगरानी। जल गुणवत्ता, जल प्रवाह, जैव विविधता सूचकांक और अर्थतंत्रिक लाभों का मानकीकृत मापन होना चाहिए, ताकि निर्गम लक्ष्यों की प्रगति मापी जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल सेंसर, सैटेलाइट निगरानी और नागरिक विज्ञान के संयोजन से लागत प्रभावी निगरानी संभव है। वित्तपोषण के नवीन मॉडल अपनाने पर जोर देना होगा। सार्वजनिक-निजी भागीदारी, हरित बॉन्ड, और प्रदूषणकर्ता-भुगतान सिद्धांत पर आधारित कर या शुल्क से बहाली के लिए लगातार वित्त सुनिश्चित करें। छोटे किसानों और स्थानीय उद्यमों को लक्षित अनुदान और तकनीकी सहायता दें। 2030 तक क्षतिग्रस्त जल तंत्रों की बहाली को तेज करने के लिए देशों का फ्रेशवॉटर चैलेंज एक उपयुक्त और समयबद्ध पहल हो सकती है। भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह अपने जल-आधारों की बहाली में वैश्विक सहयोग और निजी निवेश को आकर्षित करे। पर यह केवल बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं होना चाहिए। घरेलू नीति सुधार, सख्त अनुवर्तन और स्थानीय भागीदारी ही निर्णायक होंगे। चैलेंज के तहत लक्ष्य निर्धारण पारदर्शी, स्थानीय-प्रासंगिक और विज्ञान-आधारित होने चाहिए, ताकि हर नदी, झील और आर्द्रभूमि की विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप योजनाएँ बन सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">बहाली की नीतियाँ तब ही कामयाब होंगी जब स्थानिक स्तर पर व्यवहारिक समाधान लागू हों। उदाहरण के तौर पर छोटे-बड़े जलाशयों और तालाबों का नवीनीकरण, किनारे पर स्थानीय प्रजातियों की पुनर्स्थापना, सीवेज उपचार प्लांट का संचालन और समुदाय-आधारित पालन-पोषण मॉनिटरिंग- ये सभी परियोजनाएँ त्वरित, सस्ती और प्रभावी साबित हुई हैं। हर सफल स्थानीय परियोजना अन्य क्षेत्रों के लिए एक प्रयोगशाला बन सकती है, जहां से सीख और मॉडल आसानी से प्रतिलिपि किए जा सकें। समस्या की गहराई इतनी है कि सिर्फ नीति बहस या रिपोर्टों से काम नहीं चलेगा। सरकारों, नगर निगमों, उद्योगों और नागरिक समाज को मिल कर तात्कालिक, मध्यकालीन और दीर्घकालिक कार्रवाई की रूपरेखा बनानी होगी। Water Conservation</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:11:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Dera में पूज्य गुरू जी ने कैसे बचाया पानी, रेगिस्तान में उगा दिए बाग || Water Conservation</title>
                                    <description><![CDATA[पूज्य गुरू जी ने पृथ्वी पर बढ़ते जल संकट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए फरमाया (Baba Ram Rahim) कि आज सबसे ज्यादा पानी को बचाने पर फोकस करने की जरूरत है। आओ हम उस पानी को बचाएं, जो जीवन देता है, शरीर में जिसकी सबसे ज्यादा मात्रा है। आज के बाद आप जब भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/water-conservation-baba-ram-rahim/article-41986"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/msg-1-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने पृथ्वी पर बढ़ते जल संकट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए फरमाया (<strong>Baba Ram Rahim</strong>) कि आज सबसे ज्यादा पानी को बचाने पर फोकस करने की जरूरत है। आओ हम उस पानी को बचाएं, जो जीवन देता है, शरीर में जिसकी सबसे ज्यादा मात्रा है। आज के बाद आप जब भी पानी बर्बाद करोगे तो सोचोगे जरूर कि गुरू जी ने रोका हुआ है। तो हमें लगता है कि अगर हमारे छह करोड़ बच्चे भी ये पहल कर लेंगे तो सृष्टि के लिए बहुत-बहुत बड़ी पहल होगी। इस पर देश-विदेश में आॅनलाइन बैठी साध-संगत ने एक साथ हाथ खड़े करके पानी को बचाने का संकल्प लिया। इस पर पूज्य गुरू जी ने साध-संगत को अपने आशीर्वाद से नवाजा। आपजी ने फरमाया कि आज जो प्रण किया है, कोशिश करें कि इसको एक मुहिम का रूप दे दें, इसका एक नाम देंगे। पानी बचाने के लिए अपने पूरा जोर लगाएंगे, पूरे वर्ल्ड में संदेश भिजवाएंगे, हर तरीके से कोशिश करेंगे, सबकी मदद लेंगे चाहे वो किसी भी रूप में दें और हम पानी बचाने के लिए एक आंदोलन चलाएं कि पानी को बचाया जा सके। आज आपने जल बचाने का जो संकल्प लिया है तो हम परमपिता परमात्मा से दुआ, प्रार्थना करते हैं कि पानी भी आपको बचाए, आपके लिए पानी ही दवा का काम कर जाए, सुमिरन करके, भक्ति-इबादत करके आप शुद्ध पानी पीजिये और मालिक के गुण गाइये। कम से कम चार-पाँच लीटर तो जरूर पिया करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आइयें सुनते हैं पूज्य गुरु जी ने कैसे बचाया पानी….</strong></h3>
<p><iframe title="Dera में पूज्य गुरू जी ने कैसे बचाया पानी, रेगिस्तान में उगा दिए बाग || Water Conservation || DSS" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/z3bWJyuvYxM?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आमजन से सहयोग की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने आगे फरमाया कि जितने भी सुनने वाले हैं, आप उलट-पुलट तो बोलते रहते हैं, कोई बात नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता, कम से कम हमारी तरफ से आप लोगों से प्रार्थना है कि आप भी इसमें सहयोग करें, क्योंकि आप लोगों के सहयोग से जन-जन में जागृति आएगी और ये पानी अगर बच गया तो आप भी बचेंगे और सारी सृष्टि बच जाएगी, हो सकता है राम जी कृपा करें और फिर से ये स्वर्ग, स्वर्ग का रूप धारण कर जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जल प्रदूषण की ओर दिलाया ध्यान </strong><strong>| Baba Ram Rahim</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने फरमाया कि पानी का खात्मा हो रहा है, पानी में जहर डाल रहे हैं आप। ये जहर पानी में मिलकर धरती में जा रहे हैं। जितनी फैक्ट्रियां हैं उनमें कोई अच्छा फिल्टैÑशन किया जा सकता है, लेकिन नहीं करते, थोड़े से खर्चे को बचाने के लिए पूरी मानवता की जिंदगी को दांव पर लगाए बैठे हैं। साइंटिस्टों से हमारी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि ये जो जहर, चाहे शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं, चमड़ा बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं, वो चमड़े को धोती हैं, या खाद, स्प्रे, कैमिकल बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं उनका जो वेस्टेज है, वेस्टेज जो निकल रहा है, वो जो धरती में जाता है, वो हमारे धरती वाले पानी को प्रदूषित कर रहा है। अरे आप एटम बनाने की सोच रहे हैं, आप फलां चीज बनाने की सोच रहे हैं, कुछ सोचने की जरूरत नहीं है। आप इस पानी का शुद्धिकरण करने की सोच लें तो सारी मानवता बच सकती है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि वैज्ञानिक सच कहते हैं, वो झूठ नहीं बोलते, क्योंकि हमें भी आभास होता है उन चीजों का, वो राम जी करवाते हैं कि अगर आने वाले टाइम में पानी खत्म हो गया तो होगा क्या? यहीं तक सीमित नहीं है, ये डीजल-पेट्रोल, कोयला कब तक। अगर यूं ही जनसंख्या बढ़ती चली गई तो इसके लिए भी ज्यादा समय नहीं बचना है खत्म होने में, फिर क्या होगा? ताकि आने वाली</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रलय-महाप्रलय से बच सकें | Baba Ram Rahim</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि बेपरवाह जी ने जो कहा- ‘‘दो घड़ी तू बैठके बंदे, राम नाम गुण गा।’’ शायद वो राम-नाम गुण बेपरवाह जी इस बॉडी में खुद ही गवा (बुलवा) रहे हैं, आप लोग गा रहे हैं, अखंड सुमिरन कर रहे हैं, उसी की तरंगें हैं, जो हमारे अंदर आकर बेपरवाह जी गवा (बुलवा) रहे हैं कि ये काम करना बंद हो जाए, ये काम करना शुरू कर दो। ताकि मानवता का भला हो, आने वाली प्रलय-महाप्रलय से बचा जा सके। बाकी राम जाने, वो अपने कर्म अपने हिसाब से करता है, उसके नियम हैं। हर कोई मर्जी का मालिक है तो वो (भगवान) भी तो मर्जी का मालिक है। आदमी की मर्जी को बदला जा सकता है, पर उस राम, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरू, गॉड, खुदा, रब्ब की मर्जी को कौन बदलेगा, कौन रोकेगा। हाँ, उसके आगे दीनता, नम्रता, प्रार्थना करके, उसकी बनाई हुई चीजों को फिर से उसी तरह से हम लगाके, जैसे हमने बताया पानी बचाना शुरू कर दें, पेड़ों की संभाल कर दे तो हो सकता है वो इन चीजों से खुश होकर अपना इरादा बदल दे। तो मर्जी का मालिक है भई वो (भगवान)। तो इसलिए सभी से हमारी प्रार्थना है कि आप जरूर दुनिया को सचेत करें, पानी के बारे में, पेड़-पौधों के बारे में, प्रकृति के बारे में।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jan 2023 12:54:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनिका श्योकंद बनीं हरियाणा की जल संरक्षण अभियान की गुडविल अम्बेसडर</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। फेमिना मिस ग्रैंड इंडिया-2021 मनिका श्योकंद को हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण अभियान का गुडविल अम्बेसडर नियुक्त किया है। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को यहां एक कार्यक्रम में सुश्री श्योकंद को इस सम्बंध में नियुक्ति पत्र और एग्रीमेंट सौंपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जल संरक्षण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/manika-shyokand-becomes-goodwill-ambassador-of-haryanas-water-conservation-campaign/article-26963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/manika-shyokand.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> फेमिना मिस ग्रैंड इंडिया-2021 मनिका श्योकंद को हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण अभियान का गुडविल अम्बेसडर नियुक्त किया है। राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को यहां एक कार्यक्रम में सुश्री श्योकंद को इस सम्बंध में नियुक्ति पत्र और एग्रीमेंट सौंपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना समय की मांग है। जल के बिना जीवन सम्भव नहीं है। जैसे समय को कीमती माना जाता है उसी तरह जल भी बेहद कीमती है। उन्होंने मनिका को इस अभियान के लिए आगे आने पर बधाई दी। साथ ही उन्होंने मनिका को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुश्री श्योकंद हरियाणा के जींद जिले के उचाना की मूल निवासी हैं और उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। सुश्री श्योकंद ने कहा, ‘मुझे जल संरक्षण अभियान का गुडविल एंबेसडर नियुक्त किया जाना, मेरे लिए गर्व का विषय है। मैं हमेशा से पर्यावरण संरक्षण की समर्थक रही हूं। हरियाणा सरकार ने मुझे जल संरक्षण अभियान के लिए नियुक्त किया, इसके लिए मैं मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती हूं। उन्होंने कहा, ‘मैं किसान की बेटी हूं और जल संरक्षण के महत्व को समझती हूँ। वह हरियाणा सरकार की जल संरक्षण की योजनाओं से बेहद प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री की अन्य विरासतों की तरह जल को भी एक विरासत के रूप में मानने की सोच ने मुझे बेहद प्रभावित किया है। सरकार की इसी सोच से प्रभावित होकर उन्होंने इस नेक काम मे सहयोग करने के लिए एम्बेसडर के रूप में काम करने का ऑफर दिया था। इस अवसर पर मनिका के माता-पिता भी मौजूद रहे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Sep 2021 19:41:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>उम्मीद है सरकार जल संरक्षण को एक क्रांति का रूप देगी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य नदियों के पानी के लिए कानूनी लड़ाई तो लड़ रहे हैं लेकिन इन राज्यों में पानी की बचत को लेकर जागरूकता मुहिम नाम की कोई चीज ही नहीं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/hopefully-the-government-will-make-water-conservation-a-revolution/article-11998"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/hopefully-the-government-w.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एनआरसी, सीएए के विरोध के बीच एक अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने अटल भूमी-जल योजना की शुरूआत की है, जिसके लिए 6000 करोड़ रूपये मंजूर किए हैं। योजना का उद्देश्य देश में भू-जल के संकट को दूर करना है। यह योजना बढ़ रही जनसंख्या और कृषि जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। यह तथ्य हैं कि देश में भू-जल का संकट निरंतर बढ़ता जा रहा है। इसके साथ कृषि लागत खर्च भी बढ़े हैं और लोगों को पीने वाले पानी के लिए भी कड़ी मशक्कत के साथ-साथ भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बावजूद देश के कई राज्यों में गर्मियों के समय जीवित रहने के लिए पानी प्राप्त करना भी चुनौती बन जाता है। गत वर्षों में महाराष्टÑ के लातूर क्षेत्र और उतर प्रदेश के बुंदेलखंड में ट्रेनों पर पानी पहुंचाया जाता रहा है। पंजाब जैसे राज्यों में भू-जल लगातार गहरा होता जा रहा है। यह योजना भले ही जल संकट से निजात दिलवाने के लिए है लेकिन इसका लाभ अनाज की आवश्यकताओं व आर्थिकता से जुड़ा हुआ है। जल संकट गंभीर समस्या है, जिन क्षेत्रों में यह संकट बढ़ रहा है वहां पानी का दुरुपयोग भी होता रहा है। पानी के प्रयोग संबंधी हमारे देश में कोई पैमाना ही नहीं। एक साइकिल धोने के लिए एक ट्रक धोने जितना पानी बहा दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक व्यक्ति नहाते वक्त मोटर चलाकर 20 व्यक्तियों के बराबर पानी का इस्तेमाल करता है। इसी तरह इस्तेमाल किए गए पानी की पुन:प्रयोग की तकनीक पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य नदियों के पानी के लिए कानूनी लड़ाई तो लड़ रहे हैं लेकिन इन राज्यों में पानी की बचत को लेकर जागरूकता मुहिम नाम की कोई चीज ही नहीं। जल ही जीवन जैसे नारे तो बोले जाते हैं लेकिन अमल नहीं हो रहा। पाकिस्तान को जा रहे पानी को रोकने से ज्यादा जरूरी है मौजूद पानी की संभाल की जाए। उम्मीद करनी चाहिए कि केंद्र सरकार जल संकट के समाधान के लिए काम करेगी और इसे एक क्रांति का रूप देगी।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2019 20:49:19 +0530</pubDate>
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