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                <title>Chandrayaan-3 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Chandrayaan-3: वैज्ञानिक समुदाय के लिए जारी किया गया चंद्रयान-3 का डेटा</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3:  चेन्नई (एजेंसी)। भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का विज्ञान डेटा वैज्ञानिक समुदाय के लिए जारी किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि डेटा केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर नयी दिल्ली में जारी किया गया, जिसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-data-released-for-scientific-community/article-61494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/chandrayaan-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Chandrayaan-3:  चेन्नई (एजेंसी)।</strong> भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का विज्ञान डेटा वैज्ञानिक समुदाय के लिए जारी किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि डेटा केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर नयी दिल्ली में जारी किया गया, जिसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चंद्रयान-3 मिशन में विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) शामिल हैं। लैंडर ने 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी उच्च अक्षांशों पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी। लैंडिंग के बाद, रोवर लैंडिंग साइट के चारों ओर घूमा और 101 मीटर की दूरी तय की। लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल पर सभी पेलोड संचालित किए गए और लैंडिंग क्षेत्र की भूकंपीयता, ताप-भौतिक गुणों, प्लाज्मा पर्यावरण और मौलिक संरचना से संबंधित इन-सीटू डेटा एकत्र किया गया। गौरतलब है कि भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान डेटा केंद्र (आईएसएसडीसी) इसरो के ग्रहीय मिशनों के डेटा को संग्रहित करने का नोडल केंद्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-3 डेटा प्लैनेटरी डेटा सिस्टम-4 (पीडीएस4) मानक में उपलब्ध है और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय और आम जनता के साथ साझा करने के लिए सहकर्मी समीक्षा की गई है। चंद्रयान-3 डेटासेट अब प्रदान (नीति आधारित डेटा पुनर्प्राप्ति, विश्लेषण, प्रसार और अधिसूचना प्रणाली) पर उपलब्ध हैं, जो एक ब्राउज और प्रसार वेब एप्लिकेशन है। इसे आईएसएसडीसी द्वारा वैज्ञानिक समुदाय को चंद्रयान डेटा प्रसारित करने के लिए डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिक डेटा के उपयोगकर्ता खुद को पंजीकृत कर सकते हैं और आईएसएसडीसी के प्रदान पोर्टल से डेटा तक पहुँच सकते हैं और ब्राउज कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 10:57:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Chandrayaan 3 Update: इंडिया के लिए बड़ी खुशखबरी! प्रज्ञान ने की कमाल की खोज !</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Update: नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत की उपलब्धि में एक और नई उपलब्धि जुड़ गई है, चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चांद की सतह के बारे में एक महत्वपूर्ण खोज की है, यह विशेष जानकारी इसके प्रज्ञान रोवर के अन्वेषण से प्राप्त डेटा के नए विश्लेषण से मिली है। चंद्रयान 3 की यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/great-news-for-india-pragyan-made-an-amazing-discovery/article-59338"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/chandrayaan-3-update.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Chandrayaan 3 Update: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> भारत की उपलब्धि में एक और नई उपलब्धि जुड़ गई है, चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चांद की सतह के बारे में एक महत्वपूर्ण खोज की है, यह विशेष जानकारी इसके प्रज्ञान रोवर के अन्वेषण से प्राप्त डेटा के नए विश्लेषण से मिली है। चंद्रयान 3 की यह खोज, जो क्षेत्र में चट्टान के टुकड़ों के वितरण और उत्पत्ति पर प्रकाश डालती हैं, चंद्र भूविज्ञान की हमारी समझ में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा पर उतरने के बाद विक्रम लैंडर द्वारा तैनात प्रज्ञान रोवर ने एक चंद्र दिवस के दौरान चंद्र सतह पर 103 मीटर की दूरी तय की। निष्कर्षों के अनुसार, जब प्रज्ञान रोवर लैंडिंग साइट, शिव शक्ति बिंदु – जिसे पीएम नरेंद्र मोदी ने चंद्रयान-3 के लैंडिंग क्षेत्र का नाम दिया था, के पश्चिम की ओर 39 मीटर की दूरी तय की, तो चट्टान के टुकड़ों की संख्या और आकार में वृद्धि हुई। रोवर की यात्रा नेक्टरियन मैदानी क्षेत्र में मैनजिÞनस और बोगुस्लावस्की क्रेटर के बीच थी – एक ऐसा क्षेत्र जो वैज्ञानिकों के लिए विशेष रुचि का है। ये टुकड़े छोटे क्रेटरों के रिम्स, दीवार ढलानों और फर्श के आसपास बिखरे हुए पाए गए, जिनमें से प्रत्येक का व्यास 2 मीटर से बड़ा नहीं था। <strong>Chandrayaan 3 Update</strong></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-your-hair-is-turning-grey-at-a-young-age-then-use-bottle-gourd-in-this-way/">Premature White Hair: कम उम्र में हो रहे है बाल सफेद, तो इस तरह करें लौकी का इस्तेमाल, पड़ोसी भी पूछेंगे ब्लैक बालों का राज…</a></p>
<p style="text-align:justify;">2024 की शुरूआत में ग्रहों, एक्सोप्लैनेट्स और हैबिटेबिलिटी पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए नए निष्कर्ष एक दिलचस्प प्रवृत्ति दिखाते हैं: रोवर के अपने लैंडिंग स्थल से लगभग 39 मीटर पश्चिम की ओर बढ़ने पर चट्टान के टुकड़ों की संख्या और आकार दोनों में वृद्धि हुई। चंद्रयान मिशन के दौरान खोजे गए दो चट्टान के टुकड़ों में गिरावट के संकेत मिले, जो दर्शाता है कि वे अंतरिक्ष अपक्षय से गुजरे हैं। इससे निष्कर्ष निकलता है कि पिछले अध्ययनों का समर्थन करते हैं जिन्होंने चंद्र रेगोलिथ के भीतर चट्टान के टुकड़ों के धीरे-धीरे मोटे होने का सुझाव दिया है। नई खोज चंद्रमा पर संभावित संसाधन उपयोग के लिए रणनीतियों को सूचित करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-3 मिशन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया तथा सोवियत संघ, अमेरिका और चीन के बाद चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान की सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन गया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 12:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Chandrayaan-3 Landing Update: उम्मीदों का रिसर्च: चंद्रयान-3 के लिए वैकल्पिक लैंडिंग साइट में हो सकते है नए प्रयोग</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. संदीप सिंहमार। Chandrayaan-3 Landing Update: चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन के चंद्रयान 3 मिशन के कामयाब ने के बाद भी इसकी लैंडिंग की वैकल्पिक जगह पर भविष्य में अब नए प्रयोग किए जा सकते हैं। ऐसी उम्मीद अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के एक नए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-experiments-can-be-done-in-the-alternative-landing-site-for-chandrayaan-3/article-56514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/chandaryan-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3 Landing Update: चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन के चंद्रयान 3 मिशन के कामयाब ने के बाद भी इसकी लैंडिंग की वैकल्पिक जगह पर भविष्य में अब नए प्रयोग किए जा सकते हैं। ऐसी उम्मीद अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के एक नए रिसर्च में में सामने आया है। पिछले सप्ताह करंट साइंस जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में पीआरएल के शोधकर्ताओं ने पिछले साल भारत के तीसरे चंद्रमा मिशन के लिए चुने गए वैकल्पिक स्थल की भू-आकृति विज्ञान, संरचना और तापमान का विस्तृत विश्लेषण किया है। यहाँ भविष्य में होने वाले प्रयोगों की भी बात कही गई है। Chandrayaan-3</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस बात पर उभारा कि भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों के लिए इन-सीटू वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देने के लिए यह साइट बड़ी ही “दिलचस्प” होगी।पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज ने बताया कि “चंद्रयान-3 लैंडर की पार्किंग के लिए दो लैंडिंग साइटें चुनी थी।” इसरो की योजना के अनुसार यदि विक्रम लैंडर प्राथमिक स्थल पर लैंडिंग करने में असमर्थ होता है, तो इसरो दो दिनों के बाद वैकल्पिक स्थल पर फिर से लैंडिंग का प्रयास करेगा। पर भारतीय वैज्ञानिकों ने पहले प्रयास में चन्द्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करा दी थी। भारद्वाज ने कहा, हमने इसरो को पूरी तस्वीर देने और मिशन को अंजाम देने में मदद करने के लिए प्राथमिक और वैकल्पिक दोनों साइटों का गहन विश्लेषण किया है। साइट का यह विश्लेषण भारत के नियोजित भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशन के लिए दावेदार बना सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रमा पर मानव भेजने का मिशन</h3>
<p style="text-align:justify;">ज्ञात रहे कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य रखा है कि 2040 तक एक भारतीय चंद्रमा पर उतरेगा। इस विषय पर भी रिसर्च चल रहा है। सिर्फ भारत ही नहीं, यहां तक ​​कि अन्य देश भी अपने भविष्य के चंद्र मिशन की योजना बनाने के लिए हमारे विश्लेषण से मिली जानकारी का उपयोग कर सकते हैं।”</p>
<h3 style="text-align:justify;">तब रचा था इतिहास | Chandrayaan-3</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल 23 अगस्त को इसरो ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाली दुनिया की पहली अंतरिक्ष एजेंसी बनकर इतिहास रचा था। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के साथ, भारत उन तीन अन्य देशों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गया जो चंद्रमा पर उतरने में कामयाब रहे हैं। भारत से पहले केवल पूर्व यूएसएसआर,अमेरिका और चीन ने ही यह उपलब्धि हासिल की थी। तब भारत का पूरी दुनिया में डंका बजा था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एम क्रेटर के बीच हुई थी सॉफ्ट लैंडिंग</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने यान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से लगभग 600 किमी दूर मंज़ियस यू और बोगुस्लावस्की एम क्रेटर के बीच उतारा था। इस स्थल का नाम अब शिव-शक्ति प्वाइंट रखा गया है। इसरो वैज्ञानिकों ने कहा कि लैंडिंग के बाद 14 दिनों तक विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने महत्वपूर्ण प्रयोग किए,जो भारत के भविष्य के चंद्र मिशन का आधार बनेंगे। प्रज्ञान रोवर ने विश्व को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसी है वैकल्पिक साइट | Chandrayaan-3</h3>
<p style="text-align:justify;">नवीनतम पीआरएल अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि चंद्रयान -3 के लिए वैकल्पिक लैंडिंग साइट की स्थानीय भू-आकृति विज्ञान विविधताएं अपेक्षाकृत ऊंचे केंद्रीय भाग और लगभग 216 मीटर की औसत ऊंचाई के साथ चिकनी स्थलाकृति की विशेषता थीं। विश्लेषण से पता चलता है कि वैकल्पिक साइट, जो मोरेटस क्रेटर के पश्चिम में स्थित है, को मुख्य रूप से ताजा क्रेटर वितरण और संबंधित बोल्डर घनत्व के आधार पर दो अलग-अलग भू-आकृतिक इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दिलचस्प है वैकल्पिक साइट</h3>
<p style="text-align:justify;">इस अध्ययन के अनुसार वैकल्पिक लैंडिंग साइट, एक छोटा क्षेत्र होने के बावजूद, महत्वपूर्ण तापमान परिवर्तनशीलता दर्ज करती है। दिलचस्प बात यह है कि शोधकर्ताओं ने क्षेत्र की सतह के तापमान में लगभग 40 केल्विन का अंतर देखा। यह भी पाया गया कि टाइको, जिसे चंद्रमा पर सबसे कम उम्र के क्रेटर में से एक माना जाता है, इस साइट के उत्तर में स्थित था। इसका मतलब यह है कि इसे टाइको क्रेटर से प्रमुख दृश्यमान इजेक्टा किरणें प्राप्त होती हैं। यह भविष्य के लैंडिंग मिशनों के लिए क्रेटर संरचना का नमूना लेने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है, जो चंद्र भूमध्य रेखा से एकत्र किए गए अपोलो चट्टानों से बहुत अलग होने की संभावना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वित्त पोषित अनुसंधान संस्थान है पीआरएल</h3>
<p style="text-align:justify;">पीआरएल केंद्र सरकार के अंतरिक्ष विभाग द्वारा वित्त पोषित एक अनुसंधान संस्थान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को उसके अंतरिक्ष और ग्रह अन्वेषण मिशनों में समर्थन देता रहा है। Chandrayaan-3</p>
<p><a title="Lok Sabha Election 2024: मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें, 21 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में मतदान शांतिपूर्ण जारी" href="http://10.0.0.122:1245/long-queues-of-voters-at-polling-stations/">Lok Sabha Election 2024: मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें, 21 राज्यों और केन्द्रशासित …</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/new-experiments-can-be-done-in-the-alternative-landing-site-for-chandrayaan-3/article-56514</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Apr 2024 14:44:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO: चंद्रयान मिशन-3 की कामयाबी के 8 माह बाद वैज्ञानिकों को मिला बड़ा सरप्राइज&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ISRO: डॉ. संदीप सिंहमार। चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग का डंका आठ महीने बाद भी पूरे विश्व में बज रहा है। टेक्नोलॉजी में माहिर जापान अमेरिका रूस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की सोच को सलाम करते आए हैं। यही एक वजह है कि 8 महीने बाद भारत की चंद्रयान-3 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/8-months-after-the-success-of-chandrayaan-mission-3-scientists-got-a-big-surprise/article-56263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/isro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ISRO: <strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong> चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग का डंका आठ महीने बाद भी पूरे विश्व में बज रहा है। टेक्नोलॉजी में माहिर जापान अमेरिका रूस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों की सोच को सलाम करते आए हैं। यही एक वजह है कि 8 महीने बाद भारत की चंद्रयान-3 मिशन टीम को अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित 2024 जॉन एल जैक स्विगरट जुनियर पुरस्कार से नवाजा गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलोरोडो में वार्षिक अंतरिक्ष कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत डीसी मंजूनाथ ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के वैज्ञानिकों को मिले इस अवॉर्ड से इसरो का कद पूरे विश्व में एक बार फिर बढ़ा है। स्पेस फाउंडेशन में एक विशेष प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाले पहले देश के रूप में भारत इसरो द्वारा विकसित मिशन चंद्रयान-3 मानवता की अंतरिक्ष अन्वेषण आकांक्षाओं को समझ और सहयोग के लिए नए क्षेत्रों तक विस्तारित करता है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/another-good-news-after-increase-in-central-employees-and-stuck-da/">8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़ोतरी और अटका डीए के बाद एक और खुशखबरी, पढ़े पूरी खबर</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">हीदर पिंगल ने जनवरी में की थी अवॉर्ड की घोषणा | ISRO</h3>
<p style="text-align:justify;">स्पेस फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीदर पिंगल ने जनवरी में इस पुरस्कार की घोषणा की थी। तब उन्होंने अपनी घोषणा के समय कहा था कि अंतरिक्ष में भारत का नेतृत्व दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा संपूर्ण चंद्रयान 3 टीम के अग्रणी कार्य ने अंतरिक्ष खोज के स्तर को फिर से बढ़ा दिया है उनकी उल्लेखनीय चंद्र लैंडिंग हम सभी के लिए एक मॉडल है। उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि हम यह देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकते कि आप आगे क्या करते हैं ? ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष अगस्त में भारत के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मिशन चंद्रयान-3 के तहत चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था। दुनिया में पहली बार हुआ था इससे पहले साउथ पोल पर कोई भी देश सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/8-months-after-the-success-of-chandrayaan-mission-3-scientists-got-a-big-surprise/article-56263</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Apr 2024 17:17:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 को लेकर इसरों ने किया बड़ा खुलासा, पूरी दुनिया सकते में&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-made-a-big-revelation-regarding-chandrayaan-3-the-whole-world-is-shocked/article-54216"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan-3: 23 अगस्त का वो दिन जब चंद्रयान-3 ने संसार में इतिहास रच दिया था। वहीं आज इसरों ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया है कि जब 23 अगस्त को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, तो उसने चंद्रमा की धूल और चट्टानों का एक गुच्छा उड़ा दिया था, जिससे लैंडर के चारों ओर एक उज्ज्वल क्षेत्र बन गया, जैसा कि अपेक्षित था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/dont-throw-away-onion-peels-considering-them-as-garbage-make-onion-shampoo-and-toner-your-hair-will-become-long-till-knees/">Hair Growth: कचरा समझ कर न फेके प्याज के छिलके…बनाए Onion Shampoo और Toner, घुटनों तक हो जाएंगे लंबे बाल</a></p>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही विक्रम नीचे उतरा और बाद में चंद्रमा की सतह पर उतरा, उसने अपने अवतरण चरण के थ्रस्टर्स को सक्रिय कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पर्याप्त मात्रा में चंद्र सतही एपि-रेगोलिथ (चंद्र मिट्टी या रेजोलिथ) सामग्री का उत्सर्जन हुआ, जिससे निर्माण हुआ। जिसे वैज्ञानिक अब “परावर्तन विसंगति” या ‘इजेक्टा हेलो’ कह रहे हैं। इसरो ने शुक्रवार को कहा कि ‘23 अगस्त को उतरते समय, चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल ने चंद्र सामग्री का एक शानदार ‘इजेक्टा हेलो’ उत्पन्न किया। एनआरएससी (नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर) के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 2.06 टन चंद्र एपि-रेजोलिथ को लैंडिंग साइट के आसपास 108.4 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विस्थापित और विस्थापित किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Results:<br />
On August 23, 2023, as it descended, the Chandrayaan-3 Lander Module generated a spectacular ‘ejecta halo’ of lunar material.</p>
<p>Scientists from NRSC/ISRO estimate that about 2.06 tonnes of lunar epiregolith were ejected and displaced over an area of 108.4 m²…</p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1717797476403646918?ref_src=twsrc%5Etfw">October 27, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/this-vegetable-will-solve-your-uric-acid-problem-in-a-jiffy/">How To Reduce Uric Acid: ये सब्जी चुटकियों में दूर कर देगी आपकी यूरिक एसिड की समस्या!</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना की जांच करने के लिए, वैज्ञानिकों ने चंद्रयान -2 आॅर्बिटर पर आॅर्बिटर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) का रुख किया। उन्होंने विक्रम की लैंडिंग से कुछ घंटे पहले और बाद में प्राप्त उच्च-रिजॉल्यूशन पंचक्रोमैटिक इमेजरी की तुलना की। परिणाम ‘इजेक्टा हेलो’ का एक विस्तृत लक्षण वर्णन था, जो लैंडर को घेरने वाले एक अनियमित उज्ज्वल पैच के रूप में दिखाई दिया। यह खोज ऐसी घटनाओं के दौरान चंद्र सामग्रियों के व्यवहार पर प्रकाश डालती है और चंद्र भूविज्ञान पर शोध और समझ के लिए नए रास्ते खोलती है। इसके अलावा, अनुभवजन्य संबंधों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लैंडिंग घटना के दौरान लगभग 2.06 टन चंद्र एपिरेगोलिथ को बाहर निकाला गया था। यह जानकारी चंद्र लैंडिंग में शामिल बलों और गतिशीलता और चंद्र सतह पर उनके प्रभाव के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/cardamom-is-very-beneficial-in-controlling-high-blood-pressure-know-its-benefits/">High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी फायदेमंद है यह मसाला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2023 16:20:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Gaganyaan Mission: प्रधानमंत्री ने मानव को चंद्रमा पर 2040 तक भेजने का रखा लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें आने वाले समय में अंतरिक्ष में खोज के भारत के प्रयासों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत 2035 तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/prime-minister-sets-a-target-of-sending-humans-to-the-moon-by-two-thousand-forty/article-53791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/gaganyaan-mission.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा की, जिसमें आने वाले समय में अंतरिक्ष में खोज के भारत के प्रयासों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारत 2035 तक अंतरिक्ष में अपना स्टेशन (केन्द्र) स्थापित करेगा और 2040 तक चंद्रमा पर मानव को पहुंचाएगा। भारत इस समय मंगल और शुक्र ग्रहों के अध्ययन के अभियान में भी लगा हुआ है। Gaganyaan Mission</p>
<p style="text-align:justify;">आज की समीक्षा बैठक में अंतरिक्ष विभाग ने प्रधानमंत्री के समक्ष गगनयान मिशन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। विभाग ने इस दिशा में अब तक विभिन्न नयी प्रौद्योगिकियों के विकास में हुयी प्रगति की जानकारी दी। मनुष्य को अंतरिक्ष में ले जाने वाले में प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण वाहनों की प्रौद्योगिकी और उपयुक्त प्रणालियों के विकास में प्रगति शामिल है। बैठक में बताया गया कि अंतरिक्ष में मानव भेजने के तैयारियों के सिलसिले में बड़े परीक्षण किए जाएंगे, जिनमें तीन परीक्षण मनुष्यों की अंतरिक्ष यात्रा के लिए उपयुक्त प्रक्षेपणयान (एचएलवीएम3) के प्रक्षेपण की योजना है। एचएलवीएम3 के तीन अभियान मानवरहित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में भारत की अब तक की सफलताओं की नींव पर अब देश को नये महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए, उन्होंने इसी सन्दर्भ में 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चाँद पर भारत का पहला मानव मिशन भेजने का लक्ष्य रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि भारत ने चंद्रयान तीन मिशन और आदित्य एल वन मिशन के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में लम्बी छलांग लगाई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के इस सपने को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष विभाग चन्द्रमा पर खोज कार्यों के लिए वृहद् योजना तैयार करेगा, इसके तहत कई चंद्रयान मिशन शुरू किये जाएंगे, एक नयी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) विकसित किया जरएगा, एक नया प्रक्षेपण मंच का निर्माण किया जाएगा और मानव केंद्रित प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी तथा उनसे जुड़ी प्रौद्योगिकी का विकास किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों को शुक्र की परिक्रमा करने वाले उपग्रह और मंगल पर उतरने वाले यंत्र ‘मार्स लैंडर’ की तैयारी करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं पर विश्वास जताया और कहा कि भारत इस दिशा में नयी ऊचाइंयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चौकी प्रभारी ने परखी बैंक शाखा की सुरक्षा-व्यवस्था" href="http://10.0.0.122:1245/outpost-incharge-examined-the-security-arrangements-of-the-bank-branch/">चौकी प्रभारी ने परखी बैंक शाखा की सुरक्षा-व्यवस्था</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 18:22:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रयान 3 को लेकर पीएम मोदी ने दी ये खुशखबरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने आज देशवासियों से चंद्रयान 3 महाक्विज में भाग लेने की अपील करते हुये कहा कि अब इसमें 15 लाख से अधिक लोग हिस्सा ले चुके हैं। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 105 वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-gave-this-good-news-regarding-chandrayaan-3/article-52792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने आज देशवासियों से चंद्रयान 3 महाक्विज में भाग लेने की अपील करते हुये कहा कि अब इसमें 15 लाख से अधिक लोग हिस्सा ले चुके हैं। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 105 वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा ‘मन की बात’ के एक और एपिसोड में मुझे आप सभी के साथ देश की सफलता को, देशवासियों की सफलता को, उनकी प्रोत्साहित करने वाली जीवन यात्रा को साझा करने का अवसर मिला है। इन दिनों सबसे ज्यादा पत्र, सन्देश,जो उन्हें मिले हैं वो दो विषयों पर बहुत अधिक है। पहला विषय है, चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और दूसरा विषय है दिल्ली में जी 20 का सफल आयोजन।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से से, समाज के हर वर्ग से, हर उम्र के लोगों के, उन्हें अनगिनत पत्र मिले हैं। जब चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा पर उतरने वाला था, तब करोड़ों लोग अलग-अलग माध्यमों के जरिए एक साथ इस घटना के पल-पल के साक्षी बन रहे थे। इसरो के यूट्यूब लाइव चैनल पर 80 लाख से ज्यादा लोगों ने इस घटना को देखा जो अपने आप में ही एक रिकार्ड है। इससे पता चलता है कि चंद्रयान-3 से करोड़ों भारतीयों का कितना गहरा लगाव है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान की इस सफलता पर देश में इन दिनों एक बहुत ही शानदार चंद्रयान 3 महाक्विज प्रतियोगिता भी चल रही है। मायगोव पोर्टल पर हो रही इस प्रतियोगिता में अब तक 15 लाख से ज्यादा लोग हिस्सा ले चुके हैं। मायगोव की शुरूआत के बाद यह किसी भी क्विज में सबसे बड़ी भागीदारी है। उन्होंने कहा, ‘मैं तो आपसे भी कहूँगा कि अगर आपने अब तक इसमें हिस्सा नहीं लिया है तो अब देर मत करिए, अभी इसमें, छ: दिन और बचे हैं। इस क्विज में जरुर हिस्सा लीजिये।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="नोएडा में कुत्ते का पोस्टर हटाना पड़ा युवक को बड़ा भारी, महिला ने कॉलर पकड़ा, थप्पड़ जड़े" href="http://10.0.0.122:1245/young-man-had-to-bear-heavy-burden-to-remove-dog-poster-in-noida-woman-caught-him-by-collar-slapped-him/">नोएडा में कुत्ते का पोस्टर हटाना पड़ा युवक को बड़ा भारी, महिला ने कॉलर पकड़ा, थप्पड़ जड़े</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2023 16:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CHANDRAYAAN 3 मिशन में अहम भूमिका निभाने वालीं ISRO की वैज्ञानिक वलारमथी का दिल का दौरा पड़ने से निधन</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई (एजेंसी)। चंद्रयान 3 में अपनी आवाज देने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक वलारमथी का दिल का दौरा पड़ने से चेन्नई में निधन हो गया। वह 64 साल की थीं। वैज्ञानिक वलारमथी ने श्रीहरिकोटा में रॉकेट लॉन्च की उलटी गिनती के लिए अपनी आवाज थी। लॉन्चिंग के करीब दो महीने बाद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-scientist-valaramathi-who-played-a-key-role-in-chandrayaan-3-mission-dies-of-heart-attack/article-51946"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई (एजेंसी)।</strong> चंद्रयान 3 में अपनी आवाज देने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक वलारमथी का दिल का दौरा पड़ने से चेन्नई में निधन हो गया। वह 64 साल की थीं। वैज्ञानिक वलारमथी ने श्रीहरिकोटा में रॉकेट लॉन्च की उलटी गिनती के लिए अपनी आवाज थी। लॉन्चिंग के करीब दो महीने बाद उनका शनिवार रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। CHANDRAYAAN 3</p>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक वलारमथी का जन्म तमिलनाडु के अरियालुर में 31 जुलाई, 1959 को हुआ था। उन्होंने कोयंबटूर में गवर्नमेंट कॉलेज आॅफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में स्नातक करने से पहले निर्मला गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की। सुश्री वलारमथी 1984 में इसरो में शामिल हुईं और उन्होंने अपने पद पर कार्यरत रहते हुए, कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ट्वीट किया, ‘एन वलारमथी जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ, जो चंद्रयान 3 सहित कई इसरो लॉन्च काउंटडाउन के पीछे की आवाज थीं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं।’ शांति।’</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि 14 जुलाई को चंद्रयान-3 श्रीहरिकोटा से सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से लॉन्च किया गया था और 23 अगस्त को इसका लैंडर मॉड्यूल (एलएम) चंद्रमा की सतह पर उतरा। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने चंद्रयान-3 को चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिग करवाई।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 16:32:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Chandrayaan 3: इसरो को मिली बड़ी सफलता, अब चांद पर इन्सान को भेज सकेगा! लैंडर ने कर दिया खेल</title>
                                    <description><![CDATA[Lander Vikram Lift Off On Moon: इसरो ने बहुत बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि चंद्रयान 3 के तहत चांद पर उतारे गए लैंडर विक्रम ने एक सफल प्रयोग किया है। आपको बता दें कि लैंडर ने कमांड पर अपना इंजन चालू करके लिफ्ट आॅफ किया व कुछ दूरी पर सफलतापूर्वक लैंड कर लिया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/isro-gets-big-success-now-it-will-be-able-to-send-man-to-the-moon/article-51931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Lander Vikram Lift Off On Moon: इसरो ने बहुत बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि चंद्रयान 3 के तहत चांद पर उतारे गए लैंडर विक्रम ने एक सफल प्रयोग किया है। आपको बता दें कि लैंडर ने कमांड पर अपना इंजन चालू करके लिफ्ट आॅफ किया व कुछ दूरी पर सफलतापूर्वक लैंड कर लिया है। Chandrayaan 3</p>
<p style="text-align:justify;">इससे साफ हो गया है कि इसरो को इंसान भेजने की दिशा में यह बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। इसरों ने कहा कि विक्रम लैंडर अपने मिशन उद्देश्यों से आगे निकल गया है। इसने सफलतापूर्वक हॉप एक्सपेरीमेंट (उछाल मारना) पूरा किया। इसरो ने बताया कि आदेश मिलने पर, इसने इंजन चालू कर दिए, उम्मीद के मुताबिक खुद को लगभग 40 सेमी ऊपर उठाया और 30-40 सेमी की दूरी पर सुरक्षित रूप से उतर गया।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-5-best-courses-will-change-your-life-good-job-earning-in-lakhs/">Career Tips: ये 5 बेस्ट कोर्स आपके जीवन को बदल देगी, अच्छी नौकरी, कमाई लाखों में..!</a></p>
<h4>14 दिन बाद चंद्रमा पर छा जाएगा अंधेरा | Chandrayaan 3</h4>
<p style="text-align:justify;">चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक नया इतिहास रच दिया, जिसका पूरा देश जश्न मना रहा है। 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थीं। जिसके बाद से ही विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान अपने काम में जुटे हुए हैं। बता दें कि इसरो ने इन्हें 14 दिन के मिशन पर भेजा है तो ऐसे में ये सवाल खड़ा होता है कि 14 दिन बाद लैंडर और रोवर का क्या होगा, क्या ये चौदह दिन बाद धरती पर आ जाएंगे तो इसका जवाब है नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इसका कनेक्शन सूरज की रोशनी से है, चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है, यानी 14 दिन तक सूरज उगता रहेगा। बता दें कि जिस वक्त चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थी उस वक्त चंद्रमा पर दिन था और सूरज उग रहा था। इसके पीछे इसरो की प्लानिंग थी कि चंद्रमा के जिस हिस्से पर चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर उतर रहे हैं उस जगह पर अगले 14-15 दिनों तक सूरज की रोशनी आती रहे। Chandrayaan 3</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर में सोलर पैनल लगे हुए वे सूरज से ऊर्जा लेकर खुद को चार्ज कर रहें हैं और इन्हीं पैनल्स के जरिए उन्हें ऊर्जा मिल रही है जब तक उन्हें सूरज की रोशनी मिलती रहेंगी उनकी बैट्री चार्ज होती रहेगी और वो काम करते रहेंगे। 14 दिन बाद चंद्रमा पर अंधेरा हो जाएगा जिसके बाद इनको ऊर्जा मिलनी बंद हो जाएंगी। और इनकी बैट्री चार्ज नहीं होंगी। और इस स्थिति में ये काम करना बंद कर देंगे। अंधेरा होने के बाद वे कुछ घंटों तक ही काम कर सकते हैं ये भी उनकी बैट्री पर निर्भर करता है कि उनकी बैट्री कितनी चार्ज है।</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जा रहा है कि अंधेरा होने के बाद वे फिर कुछ दिन सूरज निकलने का इंतजार करेंगे लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।14 दिनों के क्या फिर से लेंटर और रोवर काम करेंगे इसपर इसरो प्रमुख डॉ एस सोमनाथ ने बताया कि सूरज ढलने के साथ ही सब कुछ अंधेरे में डूब जाएगा। तापमान माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा, ऐसे में इस तापमान पर इन सिस्टम का सुरक्षित बने रहना संभव नहीं है। उनका कहना है कि इस तापमान पर इनके सुरक्षित बचें रहने की संभावनाएं काफी कम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अगर यह सिस्टम सुरक्षित बने रहते हैं तो बहुत ही खुशी होगी। अगर ये दोबारा सक्रिय हो जाते हैं तो वे इनके साथ एक बार फिर काम शुरू कर पाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि ऐसा ही हो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 12:36:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Rover News: प्रज्ञान रोवर ने चांद की सतह पर कर दिया कमाल, अभी-अभी इसरो का आया ताजा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Rover News: चांद से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। इसरो ने ट्वीट कर बताया है कि रोवर ने चांद की सतह पर सेंचुरी लगाते हुए अब तक 100 मीटर की दूरी तय कर ली है। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के प्रज्ञान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-rover-news/article-51857"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-rover-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Rover News: चांद से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। इसरो ने ट्वीट कर बताया है कि रोवर ने चांद की सतह पर सेंचुरी लगाते हुए अब तक 100 मीटर की दूरी तय कर ली है। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के प्रज्ञान का शतक पूरा हो चुका है, ये चंद्रमा के ऊपर अब तक 100 मीटर से अधिक दूरी तय कर चुका है और सफर जारी है। ISRO Chandrayaan 3 Mission</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:</p>
<p>🏏Pragyan 100*</p>
<p>Meanwhile, over the Moon, Pragan Rover has traversed over 100 meters and continuing. <a href="https://t.co/J1jR3rP6CZ">pic.twitter.com/J1jR3rP6CZ</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1697881823391711684?ref_src=twsrc%5Etfw">September 2, 2023</a></p></blockquote>
<p style="text-align:justify;"></p>
<h4 style="text-align:justify;">चंद्रयान-3: पहली चुनौती में खरा उतरा</h4>
<p style="text-align:justify;">इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">14 दिन बाद चंद्रमा पर छा जाएगा अंधेरा, जानिए विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान का फिर क्या होगा</h4>
<p style="text-align:justify;">चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक नया इतिहास रच दिया, जिसका पूरा देश जश्न मना रहा है। 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थीं। जिसके बाद से ही विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान अपने काम में जुटे हुए हैं। बता दें कि इसरो ने इन्हें 14 दिन के मिशन पर भेजा है तो ऐसे में ये सवाल खड़ा होता है कि 14 दिन बाद लैंडर और रोवर का क्या होगा, क्या ये चौदह दिन बाद धरती पर आ जाएंगे तो इसका जवाब है नहीं। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इसका कनेक्शन सूरज की रोशनी से है, चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है, यानी 14 दिन तक सूरज उगता रहेगा। बता दें कि जिस वक्त चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थी उस वक्त चंद्रमा पर दिन था और सूरज उग रहा था। इसके पीछे इसरो की प्लानिंग थी कि चंद्रमा के जिस हिस्से पर चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर उतर रहे हैं उस जगह पर अगले 14-15 दिनों तक सूरज की रोशनी आती रहे। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर में सोलर पैनल लगे हुए वे सूरज से ऊर्जा लेकर खुद को चार्ज कर रहें हैं और इन्हीं पैनल्स के जरिए उन्हें ऊर्जा मिल रही है जब तक उन्हें सूरज की रोशनी मिलती रहेंगी उनकी बैट्री चार्ज होती रहेगी और वो काम करते रहेंगे। 14 दिन बाद चंद्रमा पर अंधेरा हो जाएगा जिसके बाद इनको ऊर्जा मिलनी बंद हो जाएंगी। और इनकी बैट्री चार्ज नहीं होंगी। और इस स्थिति में ये काम करना बंद कर देंगे। अंधेरा होने के बाद वे कुछ घंटों तक ही काम कर सकते हैं ये भी उनकी बैट्री पर निर्भर करता है कि उनकी बैट्री कितनी चार्ज है। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जा रहा है कि अंधेरा होने के बाद वे फिर कुछ दिन सूरज निकलने का इंतजार करेंगे लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।14 दिनों के क्या फिर से लेंटर और रोवर काम करेंगे इसपर इसरो प्रमुख डॉ एस सोमनाथ ने बताया कि सूरज ढलने के साथ ही सब कुछ अंधेरे में डूब जाएगा। तापमान माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा, ऐसे में इस तापमान पर इन सिस्टम का सुरक्षित बने रहना संभव नहीं है। उनका कहना है कि इस तापमान पर इनके सुरक्षित बचें रहने की संभावनाएं काफी कम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अगर यह सिस्टम सुरक्षित बने रहते हैं तो बहुत ही खुशी होगी। अगर ये दोबारा सक्रिय हो जाते हैं तो वे इनके साथ एक बार फिर काम शुरू कर पाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि ऐसा ही हो।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/know-the-power-of-that-great-rocket-which-will-send-aditya-towards-the-sun/">Aditya-L1 Solar Mission: जानें, उस बेहतरीन रॉकेट की ताकत…जो आदित्य को करेगा सूर्य की ओर रवाना</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-rover-news/article-51857</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 16:07:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Aditya-L1 Solar Mission: जानें, उस बेहतरीन रॉकेट की ताकत&amp;#8230;जो आदित्य को करेगा सूर्य की ओर रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[Aditya-L1 Solar Mission: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है, अब देश के साथ-साथ विश्व देश की निगाहें इसरो के सूर्य मिशन यानी आदित्य – L 1 पर टिकी है । श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से इसरो के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/know-the-power-of-that-great-rocket-which-will-send-aditya-towards-the-sun/article-51851"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/aditya-l1-solar-mission-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Aditya-L1 Solar Mission: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है, अब देश के साथ-साथ विश्व देश की निगाहें इसरो के सूर्य मिशन यानी आदित्य – L 1 पर टिकी है । श्रीहरिकोटा के लॉन्चिंग सेंटर से इसरो के सूर्य मिशन आदित्य एल – 1 मिशन को आज 11.50 बजे लॉन्च कर दिया गया आदित्य एल – 1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी और सूर्य के बीच की एक फीसदी दूरी तय करके L – 1 पॉइंट पर पहुंचा देगा। लॉन्चिंग के ठीक 127 दिन बाद ही यह अपने पॉइंट L-1 तक पहुंचेगी। इस पॉइंट पर पहुंचने के बाद आदित्य एल – 1 बेहद अहम डेटा भेजना शुरू कर देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल Aditya -L 1 को PSLV-XL रॉकेट अंतरिक्ष में छोड़ेगा। यह पीएसएलवी की 59वीं उड़ान है। एक्सएल वैरिएंट की 25वीं उड़ान है। लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 2 से हो रही है। रह रॉकेट 145.62 फीट ऊंचा है। लॉन्च के समय इसका वजन 321 टन रहता है। जानकारी के लिए बता दें कि यह चार स्टेज का रॉकेट है।<br />
यह रॉकेट Aditya -L 1 को धरती की निकली कक्षा में छोड़ेगा जिसकी पेरिजी 235 किलोमीटर और एपोजी 19500 किलोमीटर रहेगी। पेरोजी यानी धरती से नजदीकी दूरी और एपोजी अधिकतम दूरी। Aditya -L 1 का वजन 1480.7 किलोग्राम है। लॉन्च के क़रीब 63 मिनट बाद रॉकेट से Aditya -L 1 स्पेसक्राफ्ट अलग हो जाएगा। Aditya-L1 Solar Mission</p>
<p style="text-align:justify;">पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट वैसे तो आदित्य को 25 मिनट में ही आदित्य को तय की गई कक्षा में पहुंचा देगा। यह इस रॉकेट की सबसे लंबी उड़ानों में से एक है, यानी सबसे ज्यादा समय की इससे पहले इतनी लंबी यात्रा साल 2021 में ब्राजील के अमेजोनिया समेत 18 सैटेलाइट उड़ान थी।‌ उसमें एक घंटा 55 मिनट लगा था। उससे पहले सितंबर 2016 मैं इस रॉकेट ने 2 घंटे 15 मिनट की उड़ान भरी थी तब उसने 8 सेटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ा था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रॉकेट के लिए खास पेरिजी की व्यवस्था की गई | Aditya-L1 Solar Mission</h4>
<p style="text-align:justify;">इसरो के एक साइंटिस्ट ने बताया कि इस रॉकेट के लिए खास अरेंजमेंट ऑफ पेरिजी की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसलिए इस रॉकेट का चौथा स्टेज एक बार में आदित्य को तय ऑर्बिट में नहीं पहुंचाएगा ।‌पहले 30 सेकंड के लिए ऑन होगा जब तक आदित्य है यह तय AsOP हासिल नहीं कर लेता चौथ स्टेज उसे छोड़ेगा नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">लैरेंज‌ प्वाइंट यानी L 1 पर किसी यान को पहुंचाना कठिन है लेकिन उससे फायदा ये है कि हम लगातार सूरज की तरफ बिना किसी बाधा के देख सकते हैं, यह एक हैलो ऑर्बिट होता है और इसरो को Aditya -L 1 का सारा डाटा रियल टाइम में मिलता रहेगा। और इससे यह भी फायदा होगा कि ईश्वर लगातार सूरज की वजह से बदलने वाले अंतरिक्ष के मौसम पर नजर रख पाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के लिए बता दे की Aditya -L 1 मिशन लॉन्च के बाद 16 दिनों तक धरती के चारों तरफ चक्कर लगता रहेगा। इस दौरान पांच ऑर्बिट मैन्यूवर होंगे। ताकि सही गति मिल सकें। इसके बाद Aditya -L 1 का ट्रांस-लैरेंजियन 1 इंसर्शन होगा। फिर यहां से शुरू होगी उसकी 109 दिन की यात्रा, और जैसे ही Aditya -L 1 पर पहुंचेगा, वह वहां पर एक ऑर्बिट मैन्यूवर करेगा ताकि, L1 प्वाइंट के चारों तरफ चक्कर लगा सके।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 15:31:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Chandrayaan 3 &amp;#8216;चंदा मामा दूर के&amp;#8217; जम्मू के व्यवसायी, शिक्षाविद् ने चंद्रमा पर भूखंड खरीदा</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू (सच कहूँ न्यूज)। Chandrayaan 3: केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में जम्मू एक प्रमुख व्यवसायी और शिक्षाविद् रुपेश मैसन ने ‘चंद्रयान-3’ के सफल प्रक्षेपण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ‘चंदा मामा बस एक दूर के’ को उद्धृत करते हुए और चंद्रमा मिशन से प्रेरित होकर चांद पर जमीन खरीदी है। जम्मू-कश्मीर और लेह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chanda-mama-toor-jammu-businessman-educationist-buys-plot-on-moon/article-51819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जम्मू (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Chandrayaan 3: केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में जम्मू एक प्रमुख व्यवसायी और शिक्षाविद् रुपेश मैसन ने ‘चंद्रयान-3’ के सफल प्रक्षेपण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ‘चंदा मामा बस एक दूर के’ को उद्धृत करते हुए और चंद्रमा मिशन से प्रेरित होकर चांद पर जमीन खरीदी है। जम्मू-कश्मीर और लेह के लिए यूसीएमएएस के क्षेत्रीय निदेशक श्री मैसन ने लूना अर्थ के चंद्रमा, ट्रैक्ट 55-पार्सल 10772 पर भूखंड खरीदा है, जिसे लैकस फेलिसिटाटिस ”लेक आॅफ हैप्पीनेस” के रूप में जाना जाता है, जो 18.72डिग्री उत्तरी अक्षांश, एवं 5.02 पूर्व देशांतर पर स्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ”जमीन न्यूयॉर्क शहर में लूनर रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी गई थी और 25 अगस्त, 2023 को प्रमाणित की गई थी।” उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर एक भूखंड या तो भविष्य में आशा का प्रतीक है जब चंद्रमा पर भूखंडों का अर्थ होगा या जलवायु परिवर्तन, बीमारी और यहां घर की बढ़ती कमी के भविष्य का सामना करने वाले व्यक्ति के लिए एक लागत प्रभावी मनोवैज्ञानिक पलायन है। उन्होंने कहा, ”एक अलग भविष्य के साथ एक ठोस संबंध बनाकर, इस तरह की खरीदारी एक अलग भविष्य के लिए कुछ हद तक तैयारियों की आवश्यकता को संतुष्ट कर रही है।” Chandrayaan 3</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों सहित लगभग 675 प्रसिद्ध हस्तियां, अब अलौकिक संपत्ति के मालिक हैं और चंद्रमा की अचल संपत्ति के मालिक हैं, जिसने उन्हें भूखंड को पंजीकृत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मूल स्टार ट्रेक श्रृंखला के साथ-साथ भावी पीढ़ी और वोयाजर श्रृंखला के लगभग 15 मुख्य कलाकारों के अलावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, जिमी कार्टर और रोनाल्ड रीगन चंद्रमा पर जमीन के मालिकों में से हैं। उन्होंने कहा ”दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने भी साल 2018 में चंद्रमा पर ‘सी आॅफ मस्कॉवी’ में जमीन खरीदी थी, जबकि राजीव वी बागड़ी ने 2003 में चन्द्रमा पर भूखंड खरीदा था और अभिनेता शाहरुख खान को भी जमीन उपहार में दी गई थी। Chandrayaan 3</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/nasas-helicopter-flew-on-mars-nasa-sent-video-see/">NASA Helicopter Flying On Mars: मंगल ग्रह पर उड़ा नासा का हेलीकॉप्टर, नासा ने दी जानकारी, देखें…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 13:09:11 +0530</pubDate>
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