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                <title>गैर जिम्मेवार हो विश्वसनीयता खो रहा मीडिया</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले माह पंजाब की एक प्रसिद्ध निजी यूनिवर्सिटी में किसी छात्रा के साथ दुराचार होने व पीड़िता के खुदकशी की अफवाह उड़ गई।
 लेकिन किसी शव के बिना कैसे खबर चली कि किसी ने खुदकुशी की है?
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/peoples-trust-in-media-channels-ends/article-12240"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/media.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जब एक निजी टीवी चैनल का एंकर पूरे जोश से बोलता है, ‘अब तक की सबसे बड़ी खबर’ फिर आश्चर्यजनक हैडिंग फ्लेश होते हैं तब दर्शक उत्सुक होकर टीवी पर अपनी टकटकी लगा लेता है लेकिन वहां कोई बड़ी खबर या ब्रेकिंग न्यूज नहीं होती। केवल रुटीन के किसी मुकदमे की सुनवाई की बात होती है। दर्शक परेशान होता है और मीडिया को कोसता है। यही हाल आज मीडिया के उस हिस्से का हो गया है, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल तमाशा बनाकर रख दिया है और बिना आधार के खबर चलाना और आधारहीन मुद्दे पर बहस करवाने की परंपरा भी जोरों पर है। संवेदनशीलता के साथ-साथ लज्जा भी खत्म होती जा रही है, पता नहीं कितनी याचिकाएं अदालतों में लगाई जाती हैं जिनका किसी मामले से कोई सम्बन्ध नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">कितनी याचिकाएं खारिज होती हैं रुटीन के कार्यों को राष्ट्रीय मुद्दे की तरह पेश करना सस्ती शोहरत व टीआरपी हासिल करने से ज्यादा कुछ भी नहीं। बहस सार्थक होनी चाहिए। फिजूल व बेबुनियाद बहस से लोग ऊब चुके हैं और मीडिया की विश्वसनीय खत्म हो रही है। पिछले माह पंजाब की एक प्रसिद्ध निजी यूनिवर्सिटी में किसी छात्रा के साथ दुराचार होने व पीड़िता के खुदकशी की अफवाह उड़ गई। लेकिन किसी शव के बिना कैसे खबर चली कि किसी ने खुदकुशी की है? एवं न ही कोई पीड़ित ही सामने आई जिससे पुष्टि हो कि कोई दुराचार हुआ? फिर भी दिनभर मीडिया चक्करों में पड़ा रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना तथ्यों के समाचार प्रकाशित करने व दिखाने का चलन समाज के लिए घातक है। पहले जल्दबाजी में खबर टीवी चैनल पर चला दी जाती है, साथ ही लिखा जाता है कि चैनल वीडियो की पुष्टि नहीं करता। गलत सूचना देने से तो अच्छा है कि उसे न तो दिखाया जाए और न छापा जाए। पत्रकारिता व्यवसाय या राजनीति नहीं, पत्रकारिता एक जिम्मेवार संस्था है। खबर को सहजता व सत्यता से पेश करना चाहिए। लोग समाचार सुनने के इच्छुक हैं भले ही देरी हो, ऊंचा बोलने से कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। आवाज को हंगामा न बनाया जाए। खबर में खबर जरूर होनी चाहिए और बहस में कोई मुद्दा होना चाहिए। बहस के लिए बहस का क्या औचित्य? भ्रष्ट राजनीति में विरोध के लिए विरोध होता है। मीडिया को राजनीति की नकल नहीं उतारनी चाहिए। मीडिया लोगों के लिए है मीडिया लोगों को अपने हिसाब से चलाने की गलती कर अपना अस्तित्व खो रहा है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 04 Jan 2020 20:31:36 +0530</pubDate>
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