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                <title>Cost - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमत पर हो राष्ट्रीय बहस</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में आम आदमी पर मंहगाई का बोझ बढ़ेगा ये तय है। लेकिन पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर जिस तरह की सियासत हो रही है, उससे न तो कीमतें कम होंगी और न ही आम आदमी को कोई राहत पहुंचेगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/national-debate-at-the-cost-of-petrol-and-diesel/article-5934"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/fdsxdsxd-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में आम आदमी पर मंहगाई का बोझ बढ़ेगा ये तय है। लेकिन पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर जिस तरह की सियासत हो रही है, उससे न तो कीमतें कम होंगी और न ही आम आदमी को कोई राहत पहुंचेगी। उलटा भारत बंद के नाम पर देश के खजाने को चूना और आम आदमी को परेशानी जरूरत हुई। अगर बंद करने से कीमतों का समाधान होना होता तो यह देश काफी समय पहले ही तमाम चीजोें पर काबू पा लेता। बीते 10 सितंबर को जिस कांग्रेस के नेतृत्व में भारत बंद का आह्वान किया गया है और उसके 18 सहयोगी दलों ने भी समर्थन किया है, उसके बाद पेट्रोल-डीजल एक पैसा भी सस्ते नहीं हुए, उल्टा बढ़ोत्तरी जरूर हुई है। यह भी नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व की केंद्र सरकार के दौरान पेट्रोलियम पदार्थ महंगे नहीं हुए। आज दाम 80-90 रुपए के बीच हैं, तो तब भी 70 रुपए के करीब रहे। बल्कि एक दौर में तो पेट्रोल 83 रुपए लीटर तक बिका। दरअसल बंद विरोध प्रदर्शन के बजाय शक्ति प्रदर्शन ज्यादा है। कांग्रेस इस भारत बंद के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहती थी और विपक्ष की गोलबंदी भी साफ करना चाहती थी, लेकिन दरारें स्पष्ट रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जमीन पर साथ और सहयोग में गहरे फासले सामने आए। बंद के दौरान जो हिंसात्मक घटनाएं प्रकाश में आई वो शर्मनाक हैं। वास्तव में पेट्रोल की कीमत का 25 फीसदी केंद्र सरकार और 21 फीसदी राज्य सरकारें टैक्स लगाती रही हैं। डीजल पर केंद्र 22 फीसदी कर वसूलता है। पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने का अधिकार यूपीए सरकार के दौरान तेल कंपनियों को ही दिया गया था। केंद्र सरकार का इतना ही दखल है कि वह कंपनियों से अनुरोध ही कर सकती है कि दामों पर पुनर्विचार किया जाए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल के दाम हमारे रोजाना के दामों को प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित नहीं करते, क्योंकि उनमें वैट, उत्पाद कर, बेसिक और एडीशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल सेनवेट ड्यूटी और प्रदूषण अधिभार आदि शामिल किए जाते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने एक्साइज टैक्स कम करने से इनकार किया है। उनका सवाल है कि फिर विकास कार्य और विभिन्न लाभ कैसे दिए जा सकते हैं? बहरहाल ये दाम बढ़ने का एक अर्थशास्त्र यह भी है कि हमारे वित्तीय और चालू खाते के घाटे बेहद बढ़ गए हैं, लिहाजा सरकार घाटों की पूर्ति के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के पक्ष में है। बीती 16 अगस्त से ये दाम रोजाना बढ़े हैं या स्थिर रहे हैं, लेकिन घटे नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2018 में ही अभी तक पेट्रोल 15 फीसदी महंगा हो चुका है। कच्चे तेल की कीमतें भी करीब 125 फीसदी बढ़ी हैं। अहम सवाल यह भी है कि देश में हिंसात्मक आग लगाने के बाद क्या अब तेल की कीमतें घटेंगी? बंद, बवाल, विरोध और अमानवीय प्रदर्शनों के बाद क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे? ऐसा बिलकुल नहीं होगा, क्योंकि मोदी सरकार ने इनकार कर दिया है, बल्कि अपनी असमर्थता जता दी है। दरअसल पेट्रोल-डीजल की अर्थव्यवस्था क्या है और केंद्र-राज्यों के राजस्व में उनकी कितनी हिस्सेदारी है, यह हम अपने पिछले संपादकीय में विस्तार से स्पष्ट कर चुके हैं। इसे विडंबना या विवशता ही मानेंगे कि सरकार को तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं और विपक्ष को आंदोलन करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकृत तौर पर प्राप्त आंकड़ों ने भी ये बात स्पष्ट कर दी है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से केन्द्र और राज्यों का भंडार लबालब हो गया है। ऐसे में जब केन्द्र सरकार कर घटाने पर अपनी कमाई कम होने का तर्क देती है तब वह ये तथ्य छिपा लेती है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले कर प्रति लिटर के हिसाब से न होकर प्रतिशत के आधार पर हैं। इसलिए जब दाम बढ़ते हैं तब उसी अनुपात में कर की राशि भी बढ़ जाती है। वहीं यदि केन्द्र व राज्य ये तय कर दें कि एक्साईज तथा वैट आदि की राशि प्रति लिटर निश्चित रहेगी तब उपभोक्ता दोहरी मार से बच जायेगा। इस दृष्टि से देखें तो विकास कार्य रुक जाने का बहाना गले नहीं उतरता लेकिन सरकार चाहे केन्द्र की हो या राज्यों की, दोनों अपना आर्थिक प्रबंधन सुधारने की बजाय आम जनता को निचोड़ने पर आमादा हैं। इन तमाम बिंदुओं के मद्देनजर कहा जा सकता है कि भारत बंद कोई समाधान नहीं है। जनता सड़कों पर बिछा दी जाएगी, तो उससे क्या होगा? बेहतर यह होगा कि विभिन्न विपक्षी दलों को जिला और राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बहस का आगाज करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">और फिर वह बहस मीडिया में जाए। यदि कांग्रेस पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने के ठोस सुझाव देती है और मोदी सरकार अपने फैसलों पर अड़ी रहती है, तो फिर अनशन किए जाएं, विरोध-प्रदर्शन किए जाएं। यह ऐसा मुद्दा है, जिससे आम आदमी भी सीधा प्रभावित है। वह ऐसी बहस को गंभीरता से ग्रहण करेगा और अपने चुनावी फैसले भी ले सकता है। रुपये की विनिमय दर में निरंतर गिरावट तथा पेट्रोल-डीजल की अनियंत्रित होती कीमतों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कारण निरूसंदेह जिम्मेदार हैं परन्तु जिस तरह प्राकृतिक आपदाएं रोकना अपने बस में नहीं होने पर भी सरकार प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के हरसंभव प्रयास करती है ठीक वैसे ही आर्थिक विपदाओं के समय भी कोई आपदा प्रबंधन तो होना ही चाहिए। शकील सिद्दीकी</p>
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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 20:17:57 +0530</pubDate>
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                <title>रुपये में गिरावट: 72.32 पर पहुंची 1 डॉलर की कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली((एजेंसी)। सोमवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और गहरा गई। सुबह के 10 बजकर 15 मिनट पर डॉलर के मुकाबले रुपया 72.32 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि शुक्रवार के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 71.73 पर बंद हुआ था। केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/decrease-in-rupees-cost-of-1-dollar-reached-72-32/article-5853"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rupesh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली((एजेंसी)।</strong> सोमवार के कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और गहरा गई। सुबह के 10 बजकर 15 मिनट पर डॉलर के मुकाबले रुपया 72.32 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि शुक्रवार के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 71.73 पर बंद हुआ था। केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया ने बताया कि रुपये की स्थिति अभी भी चिंताजनक है। अगर सितंबर तिमाही की बात करें तो रुपया 73.67 से 74 की रेंज में कारोबार करता नजर आ सकता है। वहीं अगर साल 2018 की बात करें तो रुपया 75 का स्तर भी छू सकता है।</p>
<h2>रुपये में गिरावट के बड़े कारण:</h2>
<ul>
<li>कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च हेड डॉ रवि सिंह ने बताया कि रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण निम्न हैं..</li>
<li>चीन और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वॉर से डॉलर मजबूत हो रहा है जो कि सीधे तौर पर रुपये पर असर डाल रहा है।</li>
<li>आरबीआई अभी तक करीब 22 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल कर चुका है ताकि रुपये की स्थिति संभले लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं।</li>
<li>स्टॉक मार्केट में भी तेजी जारी है जिससे एफआईआई प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं और बाजार से डॉलर खींच रहे हैं।</li>
<li>क्रूड की बढ़ती कीमतें भी रुपये की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को थामने के लिए क्या कुछ कुछ कर सकती है सरकार:</h2>
<p style="text-align:justify;">अगर तुरंत प्रभाव से कोई एक्शन लेना हो तो सरकार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में जमा डॉलर की निकासी कर सकती है और रुपये की ढहती स्थिति को थोड़ा सहारा दे सकती है।सरकार एनआरआई डिपॉजिट स्कीम शुरु कर सकती है, जिससे कि एनआरआई अपने पास जमा डॉलर को डिपॉजिट करना शुरू कर देंगे और भारत में डॉलर आ जाएगा। इससे भी रुपया सुधर सकता है।सरकार इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ा सकती है। हमारे देश में गोल्ड, रिफाइनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स का ज्यादा आयात होता है। इन पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से इन उत्पादों का आयात कम होगा लिहाजा देश से डॉलर कम निकलेगा।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Sep 2018 10:45:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने के लिए चुकानी होगी कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[वयस्क यात्री से प्रति घंटे दस रुपये और 5-12 वर्ष के बच्चों से पांच रुपये वसूले जाएंगे नई दिल्ली (एजेंसी)। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने के लिए भी अब जेब ढीली करनी पड़ेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सुविधा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर शुरू की जा रही है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-cost-to-pay-for-waiting-for-the-train-at-the-railway-station/article-5018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/train-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">वयस्क यात्री से प्रति घंटे दस रुपये और 5-12 वर्ष के बच्चों से पांच रुपये वसूले जाएंगे</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने के लिए भी अब जेब ढीली करनी पड़ेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सुविधा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर शुरू की जा रही है। वातानुकूलित (एसी) प्रतीक्षालय में ही शुल्क चुकाना होगा। सामान्य प्रतीक्षालय में यात्रियों से शुल्क नहीं वसूला जाएगा। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर रेलवे स्टेशनों के प्रतीक्षालयों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। इसकी शुरुआत नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर एसी प्रतीक्षालय से होगी। निजी हाथों में सौंपे जाने के बाद यहां के एसी प्रतीक्षालय में बैठकर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को जेब ढीली करनी होगी। ट्रेन जितनी लेट होगी शुक्ल भी उतना बढ़ता जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वयस्क यात्री से प्रति घंटे दस रुपये और 5-12 वर्ष के बच्चों से पांच रुपये वसूले जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ट्रेन जितनी लेट होगी शुक्ल भी उतना बढ़ता जाएगा</h2>
<p style="text-align:justify;">वहीं रेलवे कर्मचारी पहले एक घंटे तक बिना किसी शुल्क के वेटिंग रूम में रह सकते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें शुल्क चुकाना होगा। प्रतीक्षालय को ठेके पर देने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। ठेकेदार प्रतीक्षालय का रखरखाव करेगा। प्रत्येक आधे घंटे बाद पूरे प्रतीक्षालय की सफाई की जाएगी। महिलाओं के बैठने के लिए अलग से स्थान होगा। यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जाएगा। सामान्य प्रतीक्षालय भी निजी हाथों में दिए जा सकते हैं।</p>
<h2>रेलवे पैसेंजर ट्रेनों में सोलर पैनल लगाने की तैयारी</h2>
<p style="text-align:justify;">धीमी गति से चलने वाली पैंसेंजर ट्रेनों में बैट्री चार्ज नहीं होने की वजह से अक्सर यात्री पंखे नहीं चलने की शिकायत करते हैं। रात में कई बार कोच में अंधेरा रहता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए रेलवे पैसेंजर ट्रेनों में सोलर पैनल लगाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में रेलवे बोर्ड के सदस्य (चल स्टॉक) रविंद्र गुप्ता ने सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर गैर वातानुकूलित यात्री कोच का उद्घाटन किया। जिसकी छत पर फ्लेक्सिबल सौर पीवी पैनल लगाए गए हैं। इससे कोच के पंखे, लाइटें और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट चलाए जाएंगे। कोच में सौर ऊर्जा से 15 से 20 यूनिट बिजली मिलेगी। इंडियन रेलवे आर्गनाइजेशन फॉर अल्टरनेट फ्यूल्स (आइआरओएएफ) ने सोलर पैनल विकसित किए हैं। पिछले साल रेवाड़ी-सीतापुर डीएमयू में सोलर पैनल लगाए गए थे।</p>
<h2>पैसेंजर ट्रेनों में इसे लगाने की योजना</h2>
<p style="text-align:justify;">इसकी सफलता के बाद अन्य पैसेंजर ट्रेनों में इसे लगाने की योजना है। जल्द ही लखनऊ-वाराणसी पैसेंजर (54255/54256), लखनऊ-वाराणसी पैसेंजर (54334/54333) और वाराणसी-लखनऊ इंटरसिटी (14203/04) में भी सोलर पैनल लगेंगे। इससे प्रत्येक कोच से उनकी 25 वर्षों की आयु में तीन करोड़ रुपये का डीजल बचेगा। 1350 टन कार्बन डाइ आक्साइड का उत्सर्जन भी रुकेगा।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Jul 2018 05:50:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नये गुरुग्राम को पुराने गुरुग्राम से जोड़ेगी मैट्रो</title>
                                    <description><![CDATA[योजना पर 3739 करोड़ रुपए की आएगी लागत चण्डीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। नये गुरुग्राम शहर को पुराने गुरुग्राम शहर के साथ मैट्रो के माध्यम से जोड़ने व्यावहारिक रिपोर्ट तैयार कर दी गई है। गुरुग्राम शहर में हुडा सिटी सैंटर से रेलवे स्टेशन को जोड़ा जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल व केन्द्रीय आवास एवं शहरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/gurugram-connect-with-old-gurugram-by-metro/article-2105"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/metro.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">योजना पर 3739 करोड़ रुपए की आएगी लागत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चण्डीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नये गुरुग्राम शहर को पुराने गुरुग्राम शहर के साथ मैट्रो के माध्यम से जोड़ने व्यावहारिक रिपोर्ट तैयार कर दी गई है। गुरुग्राम शहर में हुडा सिटी सैंटर से रेलवे स्टेशन को जोड़ा जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल व केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों की एक बैठक में दी गई। बैठक में बताया गया कि दिल्ली मैट्रो रेल कार्पोरेशन ने व्यवहार्यता रिपोर्ट के तहत हुडा सिटी सैंटर से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक बनाए जाने वाले मैट्रो कोरिडोर की कुल लम्बाई 17.11 किलोमीटर बताई है, जिस पर 15 स्टेशन होंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के अधिकारियों की सहमति</h2>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि इसे तैयार करने में 3739 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बैठक में रियल एस्टेट रैगुलेशन एक्ट (रेरा) के प्रावधानों पर भी चर्चा की गई और कुछ मुद्दों पर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के अधिकारियों की सहमति भी बनी। बैठक में बताया गया कि रेरा में केन्द्रीय एक्ट की भावना के साथ तालमेल बैठाया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही इन नियमों को मंत्रिमण्डल में पास करके लागू कर देंगे। प्राकृतिक संरक्षण जोन के सम्बन्ध में भी मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को आश्वासन दिया कि राज्य के सतत् विकास के लिए हम कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण किया जा रहा है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न विकास कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए एनसीआर योजना बोर्ड को और प्रस्ताव भेजे जाएंगे। बैठक में केन्द्रीय शहरी आवास और योजना मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव रंजन मिश्रा तथा निदेशक एसपी सिंह, केन्द्रीय शहरी, आवास एवं योजना मंत्रालय के लीगल एडवाइजर नागेन्द्र गोयल, हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, एनसीआर योजना बोर्ड के उपनिदेशक अभिजीत समंता और पारथा प्रतिमनाथ सहित केन्द्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 09:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आलमवाला डिस्ट्रीब्यूट्री बनने से खेतों तक पहुंचेगा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[4.88 करोड़ की लागत से नहर को पक्का किया नहर की क्षमता 59.03 क्यूसिक श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)। राज्य सरकार द्वारा आलमवाला डिस्ट्रीब्यूट्री के नवीनीकरण से जिले के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के खेतों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। डीसी डॉ. सुमीत जांरगल ने बताया कि 4.88 करोड़ रुपये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/water-will-reach-the-fields-by-distributor/article-798"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/muktsar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">4.88 करोड़ की लागत से नहर को पक्का किया</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नहर की क्षमता 59.03 क्यूसिक</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राज्य सरकार द्वारा आलमवाला डिस्ट्रीब्यूट्री के नवीनीकरण से जिले के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के खेतों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा।<br />
डीसी डॉ. सुमीत जांरगल ने बताया कि 4.88 करोड़ रुपये की लागत से इस नहर को कंक्रीट से पक्का किया जाएगा। यह नहर गांव सोथा से शुरू होती है तथा गांव भुलेरियां, शेरगढ़ व गांव खाने की ढाब में इस नहर की टेलें है। इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य तेजी के साथ जारी है तथा काफी काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से संबंधित गांव में सिंचाई क्षमता 195 फीसद हो जाएगी। डीसी ने कहा कि इस नहर की क्षमता 59.03 क्यूसिक है। इसकी कुल लंबाई 15.35 किलोमीटर है तथा इस के साथ 5744 हेक्टेयर रकबे की सिंचाई होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पानी का धरती में नहीं होगा रिसाव</h3>
<p style="text-align:justify;">सिंचाई विभाग के कार्यकारी इंजीनियर गुलशन नागपाल ने बताया कि आलमवाला डिस्ट्रीब्यूटरी की कंक्रीट से लाइनिंग की जा रही है। जिसका 80 फीसदी काम मुकम्मल हो चुका है। उन्होंने बताया कि कंक्रीट से पक्की करने में नहर से पानी का धरती नीचे रिसाव नहीं होगा। इस नहर के नवीनीकरण से गांव सोथा, लक्कड़वाला, भुलेरिया, चक्क दूहेवाला, मेहराजवाला, शेरगढ़, रूपाणा, धिंगाणा, चक्क तामकोट, खाने की ढाब, फूलेवाला तथा रामकोट के खेतों को भरपूर पानी मिल सकेगा। किसानों को इस नहर के नवीनीकरण करने से खुशी पाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 07:44:39 +0530</pubDate>
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                <title>गैर सब्सिडी वाला सिलेंडर 78.50 रुपये सस्ता</title>
                                    <description><![CDATA[सब्सिडी वाला सिलेंडर 3.88 रूपये महंगा नई दिल्ली। गैर सब्सिडी वाले रसोई गैस के 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 78.50 रुपये की भारी कमी की गई है और यह दिल्ली में अब 552.50 रुपये का मिलेगा। नयी दरें वीरवार रात से लागू हो गर्इं। तेल वितरण क्षेत्र की अग्रणीय कंपनी इंडियन आॅयल के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/non-subsidized-cylinders-cost-cheap-rs-78-50/article-750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/cylender.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सब्सिडी वाला सिलेंडर 3.88 रूपये महंगा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> गैर सब्सिडी वाले रसोई गैस के 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 78.50 रुपये की भारी कमी की गई है और यह दिल्ली में अब 552.50 रुपये का मिलेगा। नयी दरें वीरवार रात से लागू हो गर्इं। तेल वितरण क्षेत्र की अग्रणीय कंपनी इंडियन आॅयल के अनुसार सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में तीन रुपये 88 पैसे प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में इसका दाम अब 446.65 रुपये हो जाएगा। सरकार रसोई गैस उपभोक्ता को वित्त वर्ष के दौरान 12 सिलेंडर सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराती है। 12 से अधिक सिलेंडर लेने पर उपभोक्ता को गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत देनी होती है।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2017 05:46:53 +0530</pubDate>
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