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                <title>Vikram Lander - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Vikram Lander RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Rover News: प्रज्ञान रोवर ने चांद की सतह पर कर दिया कमाल, अभी-अभी इसरो का आया ताजा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Rover News: चांद से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। इसरो ने ट्वीट कर बताया है कि रोवर ने चांद की सतह पर सेंचुरी लगाते हुए अब तक 100 मीटर की दूरी तय कर ली है। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के प्रज्ञान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-rover-news/article-51857"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-rover-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Rover News: चांद से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। इसरो ने ट्वीट कर बताया है कि रोवर ने चांद की सतह पर सेंचुरी लगाते हुए अब तक 100 मीटर की दूरी तय कर ली है। इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के प्रज्ञान का शतक पूरा हो चुका है, ये चंद्रमा के ऊपर अब तक 100 मीटर से अधिक दूरी तय कर चुका है और सफर जारी है। ISRO Chandrayaan 3 Mission</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:</p>
<p>🏏Pragyan 100*</p>
<p>Meanwhile, over the Moon, Pragan Rover has traversed over 100 meters and continuing. <a href="https://t.co/J1jR3rP6CZ">pic.twitter.com/J1jR3rP6CZ</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1697881823391711684?ref_src=twsrc%5Etfw">September 2, 2023</a></p></blockquote>
<p style="text-align:justify;"></p>
<h4 style="text-align:justify;">चंद्रयान-3: पहली चुनौती में खरा उतरा</h4>
<p style="text-align:justify;">इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">14 दिन बाद चंद्रमा पर छा जाएगा अंधेरा, जानिए विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान का फिर क्या होगा</h4>
<p style="text-align:justify;">चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक नया इतिहास रच दिया, जिसका पूरा देश जश्न मना रहा है। 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थीं। जिसके बाद से ही विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान अपने काम में जुटे हुए हैं। बता दें कि इसरो ने इन्हें 14 दिन के मिशन पर भेजा है तो ऐसे में ये सवाल खड़ा होता है कि 14 दिन बाद लैंडर और रोवर का क्या होगा, क्या ये चौदह दिन बाद धरती पर आ जाएंगे तो इसका जवाब है नहीं। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इसका कनेक्शन सूरज की रोशनी से है, चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है, यानी 14 दिन तक सूरज उगता रहेगा। बता दें कि जिस वक्त चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थी उस वक्त चंद्रमा पर दिन था और सूरज उग रहा था। इसके पीछे इसरो की प्लानिंग थी कि चंद्रमा के जिस हिस्से पर चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर उतर रहे हैं उस जगह पर अगले 14-15 दिनों तक सूरज की रोशनी आती रहे। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर में सोलर पैनल लगे हुए वे सूरज से ऊर्जा लेकर खुद को चार्ज कर रहें हैं और इन्हीं पैनल्स के जरिए उन्हें ऊर्जा मिल रही है जब तक उन्हें सूरज की रोशनी मिलती रहेंगी उनकी बैट्री चार्ज होती रहेगी और वो काम करते रहेंगे। 14 दिन बाद चंद्रमा पर अंधेरा हो जाएगा जिसके बाद इनको ऊर्जा मिलनी बंद हो जाएंगी। और इनकी बैट्री चार्ज नहीं होंगी। और इस स्थिति में ये काम करना बंद कर देंगे। अंधेरा होने के बाद वे कुछ घंटों तक ही काम कर सकते हैं ये भी उनकी बैट्री पर निर्भर करता है कि उनकी बैट्री कितनी चार्ज है। India On The Moon</p>
<p style="text-align:justify;">कहा जा रहा है कि अंधेरा होने के बाद वे फिर कुछ दिन सूरज निकलने का इंतजार करेंगे लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।14 दिनों के क्या फिर से लेंटर और रोवर काम करेंगे इसपर इसरो प्रमुख डॉ एस सोमनाथ ने बताया कि सूरज ढलने के साथ ही सब कुछ अंधेरे में डूब जाएगा। तापमान माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा, ऐसे में इस तापमान पर इन सिस्टम का सुरक्षित बने रहना संभव नहीं है। उनका कहना है कि इस तापमान पर इनके सुरक्षित बचें रहने की संभावनाएं काफी कम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अगर यह सिस्टम सुरक्षित बने रहते हैं तो बहुत ही खुशी होगी। अगर ये दोबारा सक्रिय हो जाते हैं तो वे इनके साथ एक बार फिर काम शुरू कर पाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि ऐसा ही हो।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/know-the-power-of-that-great-rocket-which-will-send-aditya-towards-the-sun/">Aditya-L1 Solar Mission: जानें, उस बेहतरीन रॉकेट की ताकत…जो आदित्य को करेगा सूर्य की ओर रवाना</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-rover-news/article-51857</link>
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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 16:07:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Update: चांद पर इसरो को मिली बड़ी सफलता, दुनिया में मची खलबली</title>
                                    <description><![CDATA[India Moon Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है। चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे हुए रेडियो एनाटॉमी आॅफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर- लैंगमुइर प्रोब (रंभा-एलपी) पेलोड ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3s-rambha-payload-found-rarefied-plasma-on-the-moon/article-51809"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chandrayaan-3-update.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Moon Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में प्लाज्मा का पता लगाया है, जो अपेक्षाकृत विरल है। चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे हुए रेडियो एनाटॉमी आॅफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव लोनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर- लैंगमुइर प्रोब (रंभा-एलपी) पेलोड ने दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के ऊपर सतह के निकट चंद्र प्लाज्मा वातावरण का पहली बार माप किया है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिला है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है। ये मात्रात्मक माप संभावित रूप से उस शोर को कम करने में सहायता करते हैं जो चंद्र प्लाज्मा रेडियो तरंग संचार के दौरान उत्पन्न होते है। Chandrayaan 3 Update</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:<br />
In-situ Scientific Experiments</p>
<p>Radio Anatomy of Moon Bound Hypersensitive Ionosphere and Atmosphere – Langmuir Probe (RAMBHA-LP) payload onboard Chandrayaan-3 Lander has made first-ever measurements of the near-surface Lunar plasma environment over the… <a href="https://t.co/n8ifIEr83h">pic.twitter.com/n8ifIEr83h</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1697193322367136042?ref_src=twsrc%5Etfw">August 31, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि इसके अलावा, वे भविष्य में चंद्र आगंतुकों के लिए उन्नत डिजाइन में योगदान दे सकते हैं। रंभा-एलपी पेलोड एक लैंगमुइर प्रोब है जिसे तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) द्वारा विकसित किया गया है। यह चंद्रयान-3 लैंडर पर लगा है, जो 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा है। रंभा-एलपी पेलोड को चंद्र प्लाज्मा वातावरण के इन-सीटू माप करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जो चंद्रमा की सतह के सबसे समीप है और जहां चंद्र प्लाज्मा सबसे घना है। रंभा-एलपी पेलोड चंद्र प्लाज्मा वातावरण में इलेक्ट्रॉन घनत्व, तापमान और विद्युत क्षेत्र की माप करेगा। रंभा-एलपी पेलोड के आंकड़ों के प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि चंद्रमा की सतह के पास प्लाज्मा अपेक्षाकृत विरल है। Chandrayaan 3 Update</p>
<p>Chandrayaan-3: चांद की सतह पर मूनडांस, इसरो ने जारी किया वीडियो, देखें….</p>
<p style="text-align:justify;">इसका मतलब है कि अंतरिक्ष के इस क्षेत्र में ज्यादा इलेक्ट्रॉन नहीं हैं। चंद्र प्लाज्मा की विरलता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसी तरीके से प्रभावित करता है जिस तरीके से रेडियो तरंगें अंतरिक्ष के माध्यम से फैलती हैं। रम्भा-एलपी पेलोड द्वारा किया गया माप वैज्ञानिकों को चंद्र प्लाज्मा वातावरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इसरो ने यह भी घोषणा किया कि चंद्रयान-3 इन-सीटू वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि लैंडर पर चंद्र भूकंपीय गतिविधि (आईएलएसए) पेलोड – पहला माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) प्रौद्योगिकी- चंद्रमा पर आधारित उपकरण – ने रोवर और अन्य पेलोड गतिविधियों को रिकॉर्ड किया है। आईएलएसए पेलोड को एलईओएस, बैंगलोर द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे यूआरएससी, बेंगलुरु द्वारा विकसित किया गया है। Chandrayaan 3 Update</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 10:35:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Mission: चंद्रयान-3 के रोवर ने अभी अभी भेजी हैरान करने वाली तस्वीरें, दुनिया में मचा तहलका, इसरों हैरान&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Mission: चांद से बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। अभी-अभी इसरों ने ट्वीट कर ये तस्वीरें जारी की हैं। इसरों ने ट्वीट कर कहा कि रोवर प्रज्ञान ने आज सुबह विक्रम लैंडर की तस्वीर क्लिक की। ये तस्वीरें प्रज्ञान में लगे रोवर कैमरे से क्लिक की गई है। इससे पहले इसरों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-rover-just-sent-a-surprising-photo-it-created-a-stir-in-the-world-isro-was-shocked/article-51769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-mission-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Mission: चांद से बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। अभी-अभी इसरों ने ट्वीट कर ये तस्वीरें जारी की हैं। इसरों ने ट्वीट कर कहा कि रोवर प्रज्ञान ने आज सुबह विक्रम लैंडर की तस्वीर क्लिक की। ये तस्वीरें प्रज्ञान में लगे रोवर कैमरे से क्लिक की गई है। इससे पहले इसरों ने दावा किया था कि रोवर ने दक्षिणी धु्रव पर चंद्रमा की सतह में ऑक्सीजन की खोज की है और वह हाइड्रोजन की खोज कर रहा है। आपको बता दें कि हाइड्रोजन की खोज होते ही चांद पर पानी की उपस्थिति का पता चल जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो ये क्रांतिकारी कदम होगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:</p>
<p>Smile, please📸!</p>
<p>Pragyan Rover clicked an image of Vikram Lander this morning.</p>
<p>The ‘image of the mission’ was taken by the Navigation Camera onboard the Rover (NavCam).</p>
<p>NavCams for the Chandrayaan-3 Mission are developed by the Laboratory for… <a href="https://t.co/Oece2bi6zE">pic.twitter.com/Oece2bi6zE</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1696792992718442558?ref_src=twsrc%5Etfw">August 30, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<h3>चंद्रयान-3: पहली चुनौती में खरा उतरा | Chandrayaan 3 Mission</h3>
<p style="text-align:justify;">इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 15:04:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3: क्या चंद्रयान-3 को चांद पर एलियन्स होने के मिले सबूत? आइये जानते हैं&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3: वर्ष 1960 को चांद पर पहली बार ह्मूमन क्रू पहुंचा और इसके बाद 5 और अमेरिकी अभियान चांद पर भेजे गए। वर्ष 1972 के बाद यह सिलसिला थम गया और तब से कोई भी इन्सान चंद्रमा की धरती पर नहीं उतरा। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए। इस बीच […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/did-chandrayaan-3-find-evidence-of-aliens-on-the-moon-lets-know/article-51725"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3: वर्ष 1960 को चांद पर पहली बार ह्मूमन क्रू पहुंचा और इसके बाद 5 और अमेरिकी अभियान चांद पर भेजे गए। वर्ष 1972 के बाद यह सिलसिला थम गया और तब से कोई भी इन्सान चंद्रमा की धरती पर नहीं उतरा। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए। इस बीच अपोलो 11 मिशन यानी चंद्रमा पर सबसे पहले इन्सानों के पहुंचने की रिकॉर्डिंग गायब हो गई। इन रील्स में मूनवॉक से लेकर वापसी की वीडियो थी। aliens</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं कहा जाता है कि इन्हीं टेप्स के गायब होने के बाद कहा गया कि शायद ये टेप में कुछ ऐसा था जो चंद्रमा की असलियत थी। शायद चांद पर बहुत कुछ अलग था या शायद वहां एलियन्स रहते हों। यहां तक कि मूनवॉक करने वाले व्यक्तियों की उनसे मुलाकात हुई। क्योंकि उस दौरान किसी भी चीज का लाइव टेलीकास्ट नहीं होता था, रॉ को ही एडिट करके दिखाया जाता था। यही कारण है कि अमेरिका ने असल टेप छिपाकर उतना ही दिखाया, जितना जरूरी लगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जानें विशेषज्ञों की राय</h4>
<p style="text-align:justify;">साइंटिस्ट व यूएफओ विशेषज्ञ स्कॉट वेरिंग ने दावा किया कि चांद के भीतर जो विशालकाय गड्ढे हैं उन्हीं में एलियन्स की बस्तियां होंगी। उन्होंने अपनी बात को साबित करने के लिए वेरिंग ने कई रॉ वीडियोज का सहरा लिया। आपको बता दें कि बाद में वो वीडियो भी गायब हो गए थे। उनका मानना था कि वर्ष 1972 में आखिरी बार चांद पर जाने के दौरान एलियन्स ने अमेरिका को चेतावनी दी होगी या फिर कुछ ऐसा हुआ होगा जिसके बाद टेप गायब हुए और फिर दोबारा वहां पर नहीं गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या चंद्रयान 3 ने एलियन्स की खोज निकाल पाएगा | Chandrayaan 3</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने एक नया इतिहास रच दिया, जिसका पूरा देश जश्न मना रहा है। 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराईं गई थीं। जिसके बाद से ही विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान अपने काम में जुटे हुए हैं। चंद्रयान 3 हर रोज खोज अभियान चला रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर कुछ दावे किए जा रहे हैं कि चंद्रयान 3 ने एलियन्स के ठिकानों को खोज निकाला है। आपको बता दें कि अभी तक इस तरह की कोई खबर नहीं। अगर कोई भी इस तरह की खबर आती है तो इसरो मीडिया पर आकर ब्रीफ करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंद्रयान-3: पहली चुनौती में खरा उतरा, देखें इसरो की जारी की गई तस्वीरें</h3>
<p style="text-align:justify;">इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/the-first-moon-burial-was-that-of-dr-eugene-shoemaker/">दुनिया में एक व्यक्ति जिसकी कब्र है चांद पर, जानें, अब तक कितने लोग पहुंचे चंद्रमा पर</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 11:50:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Mission: चंद्रयान-3 ने भेजी हैरान करने वाली तस्वीरें, जल्दी देखें</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Mission: इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sro-chandrayaan-3-rover-photo/article-51704"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-mission-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Mission: इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपनी पहली चुनौती में खरा उतरा है। इसरो के अनुसार रविवार (27 अगस्त) को रोवर प्रज्ञान एक बड़े गड्ढे के पास पहुंच गया था। लेकिन पहले ही खतरे को भांप कर ये वापस सुरक्षित लौट आया। इसरो ने सोमवार को रोवर प्रज्ञान की कुछ और झलकियां साझा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने अब एक्स पर फोटो शेयर करते हुए बताया, ‘चंद्रयान-3 मिशन का रोवर प्रज्ञान 27 अगस्त को अपने स्थान से 3 मीटर आगे एक 4 मीटर व्यास वाले क्रेटर के पास पहुंचा। बाद में इसरो द्वारा रोवर को वापस लौटने की कमांड दी गई, जिससे ये सुरक्षित एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।’ Chandrayaan 3 Mission</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को इसरो ने तापमान भिन्नता का एक ग्राफ जारी किया था जोकि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे चेस्ट पेलोड के चांद की सतह का था। इसरो की ओर से जारी किए गए ग्राफ में चांद की सतह का तापमान -10 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक दिखाई दे रहा है। इसरो के अनुसार पेलोड में तापमान जांचने का यंत्र फिट किया गया है जोकि सतह के नीचे 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हुए हैं। ISRO</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Chandrayaan-3 Mission:</p>
<p>On August 27, 2023, the Rover came across a 4-meter diameter crater positioned 3 meters ahead of its location.<br />
The Rover was commanded to retrace the path.</p>
<p>It’s now safely heading on a new path.<a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan_3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Chandrayaan_3</a><a href="https://twitter.com/hashtag/Ch3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Ch3</a> <a href="https://t.co/QfOmqDYvSF">pic.twitter.com/QfOmqDYvSF</a></p>
<p>— ISRO (@isro) <a href="https://twitter.com/isro/status/1696117102393081997?ref_src=twsrc%5Etfw">August 28, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sro-chandrayaan-3-rover-photo/article-51704</link>
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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 18:38:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Chandrayaan 3 Moon Landing Update: लैंडर आज होगा चंद्रमा के और नजदीक, 23 अगस्त को करेगा लैंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Chandrayaan 3 Moon Landing Update: इसरो ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि शुक्रवार शाम को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर को निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा, इसके लिए स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार धीमी करनी होगी, जोकि 20 अगस्त को भी होगी। इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। दूरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lander-will-be-closer-to-the-moon-today/article-51330"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Chandrayaan 3 Moon Landing Update: इसरो ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि शुक्रवार शाम को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर को निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा, इसके लिए स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार धीमी करनी होगी, जोकि 20 अगस्त को भी होगी। इसके बाद लैंडर की चंद्रमा से न्यूनतम दूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। दूरी सबसे कम होने के कारण 23 अगस्त को ही शाम को सॉफ्ट लैंडिंग होगी। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के अनुसार चंद्रयान-3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल लैंडर-रोवर से अलग किया गया था। इस बीच लैंडर ने प्रोपल्शन मॉड्यूल से कहा- ‘थैक्स फॉर द राइड मेट’। प्रोपल्शन मॉड्यूल वर्तमान कक्षा में रहकर धरती से आने वाले रेडिएशन्स का महीनों या वर्षों तक अध्ययन कर सकता है। जबकि प्रोपल्शन मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल का स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन करने और पृथ्वी पर बादलों से ध्रुवीकरण से भिन्नता मापने के लिए 14 दिन तक पानी की खोज सहित अन्य प्रयोग करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जानकारी के लिए बताया जा रहा है कि चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर, रोवर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल शामिल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर 14 दिनों तक प्रयोग करेंगे। वहीं प्रॉपल्शन मॉड्लूय चांद की कक्षा में ही रहकर चांद की सतह से आने वाले रेडिएशंस का अध्ययन करेगा। इस मिशन के जरिए इसरो चांद की सतह पर यह भी जानेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं। Chandrayaan-3 Updates</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Zero Shadow Day 2023: जब परछाई भी छोड़ गई साथ, जानिए कैसे बनते हैं ऐसे हालात?" href="http://10.0.0.122:1245/when-even-the-shadow-left-you-know-how-such-situations-happen/">Zero Shadow Day 2023: जब परछाई भी छोड़ गई साथ, जानिए कैसे बनते हैं ऐसे हालात?</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lander-will-be-closer-to-the-moon-today/article-51330</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2023 15:01:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>50 की बजाय 400 डिग्री घूम गया था ‘विक्रम’</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रयान-2 मिशन को लेकर नया खुलासा नई दिल्ली (एजेंसी)। चंद्रयान-2 मिशन के असफल होने को लेकर एक और नया खुलासा हुआ है। दअसल जिस वक्त लैंडर विक्रम (Vikram Lander) को चांद की सतह पर उतरने वाला था तभी उसे 50 डिग्री कोण पर घुमाने का प्रयास किया था। लेकिन दुर्भाग्यवश तेज गति होने के चलते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/vikram-lander-fell-at-410-degrees-instead-of-50/article-12285"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/vikram-lander-fell.jpg" alt=""></a><br /><h2>चंद्रयान-2 मिशन को लेकर नया खुलासा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> चंद्रयान-2 मिशन के असफल होने को लेकर एक और नया खुलासा हुआ है। दअसल जिस वक्त लैंडर विक्रम (<span lang="en" xml:lang="en">Vikram Lander</span>) को चांद की सतह पर उतरने वाला था तभी उसे 50 डिग्री कोण पर घुमाने का प्रयास किया था। लेकिन दुर्भाग्यवश तेज गति होने के चलते यह 410 डिग्री तक घूम गया। इसके बाद कलाबाजी खाते हुए चन्द्रमा की सतह पर धड़ाम से गिरा। विशेषज्ञ समिति ने कुछ समय पहले अंतरिक्ष आयोग को अंतिम रिपोर्ट सौंपी है। बता दें कि पिछले साल 07 सितंबर की ‘विक्रम’ लैंडर चांद की सतह पर उतरने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार चांद से करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर ‘विक्रम’ आर्बिटर से अलग हुआ। उस वक्त उसकी गति 1680 मीटर प्रति सेकेंड थी। इसमें चार इंजन लगे थे। इन्हें बेंगलुरु स्थित इसरो से नियंत्रित किया जा रहा था। लैंडर जब चांद के सात किलोमीटर निकट तक पहुंचा। तब तक और सब तो ठीक था। लेकिन इसकी गति पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं किया जा सका।</p>
<h3>ये थी दुर्घटना की वजह  | <span lang="en" xml:lang="en">Vikram Lander</span></h3>
<ul>
<li><strong>विक्रम चांद के दक्षिणी ध्रुव के निर्धारित स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर था।</strong></li>
<li><strong>इसकी गति कम होकर 146 मीटर प्रति सेंकेंड यानि 500 किमी. प्रति घंटा आ गई।</strong></li>
<li><strong>यह रफ्तार लैंडिंग के हिसाब से बेहद अधिक थी ।</strong></li>
<li><strong>तय योजना के अनुसार गति को कम होनी चाहिए थी।</strong></li>
<li><strong>इसे कम करने के काफी प्रयास किए गए।</strong></li>
<li><strong>विक्रम टेढ़ा हो गया था, जिसे 50 डिग्री घुमाने की जरूरत थी ।</strong></li>
<li><strong>तभी ये सतह पर खड़ा हो पाता। </strong></li>
<li><strong>तेज गति में जब 50 डिग्री घुमाया गया ।</strong></li>
<li><strong>अनियंत्रित होकर विक्रम 410 डिग्री घूम गया। </strong></li>
<li><strong>तभी ये चांद की सतह पर जाकर गिर गया।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/vikram-lander-fell-at-410-degrees-instead-of-50/article-12285</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2020 12:23:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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