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                <title>दो करोड़ की हेरोइन सहित दो तस्कर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[35 करोड़ की हेरोइन मामले में वांछित मोस्टवांटेड तस्कर बूटासिंह भी काबू सूरतगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पुलिस की सीआईडी (अपराध शाखा) ने जिले के (Suratgarh News) में अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य लगभग 2 करोड़ रुपए की 450 ग्राम हेरोइन सहित दो तस्करों को पकड़ा है। इसके साथ ही सूरतगढ़ इलाके में ही एक मोस्ट वांटेड तस्कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-smugglers-arrested-with-heroin-worth-two-crores/article-47127"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/suratgarh.jpg" alt=""></a><br /><h3>35 करोड़ की हेरोइन मामले में वांछित मोस्टवांटेड तस्कर बूटासिंह भी काबू</h3>
<p><strong>सूरतगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पुलिस की सीआईडी (अपराध शाखा) ने जिले के (Suratgarh News) में अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य लगभग 2 करोड़ रुपए की 450 ग्राम हेरोइन सहित दो तस्करों को पकड़ा है। इसके साथ ही सूरतगढ़ इलाके में ही एक मोस्ट वांटेड तस्कर बूटासिंह भी पकड़ में आया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गुरुद्वारा साहिब के बाहर चली गोली, एक शख्स की मौत" href="http://10.0.0.122:1245/bullet-fired-outside-gurdwara-sahib-one-person-died/">गुरुद्वारा साहिब के बाहर चली गोली, एक शख्स की मौत</a></p>
<p>बूटासिंह की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) (Suratgarh News) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) सहित केंद्रीय तथा राज्य सरकार की एजेंसियों को कई दिनों से जैसलमेर इलाके में 35 करोड़ मूल्य की हेरोइन बरामदगी के मामले में तलाश थी। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) दिनेश एमएन ने बताया कि कुछ दिनों से लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर एक विशेष टीम को सूरतगढ़ इलाके में भेजा गया। इस टीम ने खेतसिंह राजपूत (32) पुत्र रुघसिंह निवासी चक 1-आरएम थाना और सुनील कंबोज (31) पुत्र देशराज निवासी आरडी 820 थाना पूगल, जिला बीकानेर को सूरतगढ़ में रामदेव मंदिर रोड पर मॉडर्न स्कूल के पास काबू कर लिया। इनके पास 450 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इनके खिलाफ सूरतगढ़ सिटी थाना में कल देर रात को एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।</p>
<h3>हेरोइन के बारे में पूछताछ की जारी</h3>
<p>पुलिस ने बताया कि इन तस्करों से बरामद हुई 450 ग्राम हेरोइन पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में पहुंचाई गई हेरोइन की एक बड़ी खेप का हिस्सा है। बाकी हेरोइन के बारे में इनसे पूछताछ की जा रही है। इनके खिलाफ दर्ज हुए एनडीपीएस एक्ट मामले की आगे जांच राजियासर थाना प्रभारी सत्यनारायण गोदारा को दी गई है। दोनों तस्करों को आज अदालत में पेश करने पर पूछताछ के लिए रिमांड मिला है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) दिनेश एमएन ने बताया कि सूरतगढ़ इलाके से ही बूटासिंह उर्फ प्रेमसिंह राजपूत (45) पुत्र खेतसिंह निवासी नरसिंगार थाना गडरा रोड जिला बाड़मेर को गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<h3>पाकिस्तानी तस्करों ने ड्रोन के जरिए पहुंचाई थी हेरोइन | Suratgarh News</h3>
<p>बूटासिंह की गिरफ्तारी के लिए गठित की गई एक विशेष पुलिस टीम उपमहानिरीक्षक (अपराध) राहुल प्रकाश के सुपरविजन में कई दिनों से सूरतगढ़ इलाके में सक्रिय थी। प्रदेश के जैसलमेर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में विगत 10 अप्रैल को 35 करोड़ की हेरोइन बरामद हुई थी। यह हेरोइन ड्रोन के जरिए पाकिस्तानी तस्करों ने भारतीय क्षेत्र में पहुंचाई थी। लगभग 9 किलो हीरोइन की इस बरामदगी में तब जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र में सूरतगढ़ इलाका निवासी अमरलाल भादू और सुथार मंडी रोड निवासी रामचंद्र बिश्नोई थाना कोतवाली में बटोडा निवासी जोगिंदरसिंह और म्लयजलार निवासी तस्कर माधोसिंह पकड़े गए थे। इनमें एक का ताल्लुक श्रीगंगानगर जिले के रावला इलाके से भी है।</p>
<p>अमरलाल भादू और रामचंद्र बिश्नोई के कब्जे से 500-500 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। बाकी 8 किलो हेरोइन जोगेंद्र सिंह के घर से बरामद हुई। जोगेंद्र सिंह की सूचना पर माधोसिंह को गिरफ्तार किया गया। इसी मामले में मोस्ट वांटेड बूटा सिंह की तब से तलाश की जा रही थी। खेतसिंह, सुनील और बूटा सिंह की गिरफ्तारी में सीआईडी (सीबी) की टीम के साथ श्रीगंगानगर जिला पुलिस के विशेष दल (डीएसटी) के प्रभारी सब इंस्पेक्टर कश्यपसिंह, हवलदार जयविंदर सिंह, सिपाही अजयप्रताप सिंह, मुकेश कुमार और कालूराम की अहम भूमिका रही। सूरतगढ़ सिटी थाना में सिपाही नयामत अली, जयसिंह और ड्राइवर कांस्टेबल आत्माराम का भी इसमें योगदान रहा।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 May 2023 21:10:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएसआई घोटाला: सीआईडी ने प्रियांक खड़गे को थमाया एक और नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु (एजेंसी)। पुलिस उप निरीक्षक (पीएसआई) भर्ती घोटाले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने कांग्रेस विधायक एवं कर्नाटक के पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री प्रियांक खड़गे को दो दिन के भीतर जांच दल के समक्ष पेश होने के लिए एक और नोटिस जारी किया है। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/psi-scam-cid-issues-another-notice-to-priyank-kharge/article-32977"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/psi-scam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong> पुलिस उप निरीक्षक (पीएसआई) भर्ती घोटाले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने कांग्रेस विधायक एवं कर्नाटक के पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री प्रियांक खड़गे को दो दिन के भीतर जांच दल के समक्ष पेश होने के लिए एक और नोटिस जारी किया है। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा, ‘‘पीएसआई भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने प्रियांक खड़गे को पूछताछ के लिए पेश होने हेतु नोटिस जारी किया है। मैं उनसे सीआईडी की मदद करने की अपील करता हूं।’’ राज्य की जांच एजेंसी ने खड़गे को कलबुर्गी में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मीडिया के सामने रखे दस्तावेज और सबूत पेश करने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल को कांग्रेस नेता ने एक आॅडियो क्लिप जारी किया था, जिसमें दो लोगों को कथित तौर पर यह बात करते हुए सुना गया था कि मोटी रिश्वत देकर परीक्षा अधिक अंक कैसे के साथ परीक्षा कैसे पास करें। इसके अगले दिन जांच दल ने खड़गे को तलब किया और उनसे अपने पास मौजूद जानकारी साझा करने को कहा। ज्ञानेंद्र ने कहा कि सरकार ने इस मामले में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के साथ चर्चा करने के बाद घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं, ताकि उन असली उम्मीदवारों को न्याय दिया जा सके, जिन्होंने ईमानदारी से अपनी परीक्षा दी और कुछ उम्मीदवारों के अनियमितताओं में लिप्त होने के कारण चयनित नहीं हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने आरोप लगाया कि जांच आगे नहीं बढ़ रही है, इसलिए सीआईडी ने घोटाले से ध्यान हटाने के लिए नोटिस जारी किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच दल के समक्ष पेश होने की उनकी कोई बाध्यता नहीं है और वह लिखित में जवाब दे सकते हैं। पीएसआई भर्ती परीक्षा में लगभग 545 पदों के लिए 54,000 से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 11:14:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पालघर हत्या मामला: सीआईडी जांच पर फिलहाल रोक लगाने से इन्कार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट तलब की नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गयी हत्या की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से करायी जा रही जांच पर फिलहाल रोक लगाने से शुक्रवार को इन्कार कर दिया तथा राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/palghar-murder-case-cid-investigation-currently-refused-to-be-stopped/article-14923"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट तलब की</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गयी हत्या की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से करायी जा रही जांच पर फिलहाल रोक लगाने से शुक्रवार को इन्कार कर दिया तथा राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट तलब की। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा की दलीलें सुनने के बाद उन्हें याचिका की एक प्रति महाराष्ट्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने, हालांकि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच पर फिलहाल रोक से इन्कार कर दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला:</h3>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि 16 अप्रैल को, मुंबई से सूरत जाने वाले दो साधुओं की कार को 200 से अधिक लोगों की भीड़ द्वारा रोका गया था। इस भीड़ ने कार पर हमला कर दिया और पत्थर एवं डंडों से हमला किया जिसके परिणामस्वरूप दोनों संतों की मृत्यु हो गई।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2020 17:49:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पूर्व में भी मुख्यमंत्रियों के पास रही है सीआईडी : खट्टर</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम ने साफ कहा कि सीआईडी पूर्व में भी मुख्यमंत्रियों के पास ही रही है
और इस बार आई तकनीकी अड़चन को भी दूर कर लिया जाएगा। सीएम पंचकुला में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cid-has-also-been-with-the-chief-ministers-in-the-past/article-12391"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/manohar-lal-khattar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">मामला बढ़ता हुआ सीएम और गृह मंत्री के बीच पेंच बन गया ( Manohar Lal Khattar)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> लगता है ‘सीआईडी के बॉस’ मामले जल्द ही पटाक्षेप हो सकता है। जिस प्रकार ‘सच कहूँ’ ने इस मामले में रिपोर्ट छापी थी कि बेशक गृह मंत्रालय अनिल विज के पास है, लेकिन सीआईडी के असली बास मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ही ( Manohar Lal Khattar) हैं। इस बात पर आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी मोहर लगा दी है। सीएम ने साफ कहा कि सीआईडी पूर्व में भी मुख्यमंत्रियों के पास ही रही है और इस बार आई तकनीकी अड़चन को भी दूर कर लिया जाएगा। सीएम पंचकुला में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। सीआईडी मामले पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि सीआईडी पहले भी मुख्यमंत्री के पास रही है। चाहे देवी लाल हों या बंसी लाल इन मुख्यमंत्रियों के काल में गृह मंत्री कोई और था, लेकिन सीआईडी और इंटेलिजेंस सीएम के पास ही था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वहीं उन्होंने कहा कि ये एक टेक्निकल विषय है।</li>
<li style="text-align:justify;">जल्द ही ये औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">इस विषय में हमारी बात हो चुकी है।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां सीएम का बातचीत से अभिप्राय गृह मंत्री अनिल विज से बातचीत को लेकर रहा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">अनिल विज ने माँगी थी सीआईडी रिपोर्ट, जिसके बाद बढ़ा मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि दिसम्बर माह में प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने कुछ जानकारियां सीआईडी से मांगी थी, लेकिन जानकारियां मिलने में देरी हुई, जिस कारण अनिल विज नाराज हुए और इस पर स्पष्टीकरण माँग लिया गया। मामला बढ़ता हुआ सीएम और गृह मंत्री के बीच पेंच बन गया। जिसमें आए दिन इस बाबत खबरें प्रकाशित हो रही हैं। मामला बढ़ता देख सीएम कई दफा साफ कर चुके हैं कि सीआईडी के असली बॉस वही हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हालाँकि अनिल विज भी इस से पीछे हटने को तैयार नहीं नजर आते।</li>
<li style="text-align:justify;">वे कहते हैं कि सीआईडी तो गृह विभाग के अंडर आता है इस लिए वे ही सीआईडी के बॉस हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सीएम अपने अधिकार में ले सकते हैं विभाग, लेकिन उसकी एक कानूनी प्रक्रिया</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं इस पर गृह मंत्री ने अनिल विज ने साफ कर दिया है कि कानून के हिसाब से सीआईडी विभाग गृह मंत्रालय का अभिन्न अंग है। विज ने कहा कि वेबसाइट से नाम हटाने और लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन जिस व्यक्ति ने भी इस वेबसाइट से छेड़छाड़ की है, उसकी जांच होनी चाहिए और उसपर कार्रवाई भी होनी चाहिए। अनिल विज ने ये भी कहा कि किसी विभाग को अलग करना मुख्यमंत्री का अधिकार है, लेकिन ऐसा करने के लिए मुख्यमंत्री को पहले कैबिनेट से मंजूरी लेनी होती है और उसके बाद विधानसभा में इसे पास कराना होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><span lang="en" xml:lang="en"><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।


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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 19:52:52 +0530</pubDate>
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                <title>अनिल विज ही सीआईडी के मुखिया</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के राज्यपाल द्वारा जारी किए गए पोर्टफोलियो अलॉटमेंट के अनुसार गृह मंत्री अनिल विज ही सीआईडी विभाग के भी मुखिया हैं। सीआईडी के उच्च अधिकारियों को अनिल विज को बतौर विभागी मंत्री रिपोर्ट देनी पड़ेगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/anil-vij-is-the-head-of-cid/article-12390"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/anil-vij-is-the-head-of-cid.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">राज्यपाल द्वारा पोर्टफोलियो अलॉटमेंट में नहीं दिखाया गया अलग विभाग (Anil Vij)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सलाह पर राज्यपाल के आदेश पर जारी हुआ था नोटिफिकेशन</h3>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3> पोर्टफोलियो के अलॉटमेंट अनुसार गृह विभाग का ही हिस्सा है सीआईडी विभाग</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अश्वनी चावला चंडीगढ़।</strong> सीआईडी विभाग को लेकर चल रहे विवाद में हर कोई सिर्फ सरकारी वेबसाइट की तरफ नजर दौड़ा रहा है। जबकि सरकारी वेबसाइट की तरफ से पोर्टफोलियो के अलॉटमेंट नहीं होती है। पोर्टफोलियो की अलॉटमेंट करने का एकाधिकार हरियाणा के राज्यपाल के पास ही आरक्षित है। हरियाणा के राज्यपाल द्वारा जारी किए गए पोर्टफोलियो अलॉटमेंट के अनुसार (Anil Vij ) गृह मंत्री अनिल विज ही सीआईडी विभाग के भी मुखिया हैं। सीआईडी के उच्च अधिकारियों को अनिल विज को बतौर विभागी मंत्री रिपोर्ट देनी पड़ेगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">राज्यपाल द्वारा किए गए विभागों की अलॉटमेंट के समय में सीआईडी विभाग को अलग नहीं दिखाया गया है</li>
<li style="text-align:justify;">इस हिसाब से सीआईडी आज भी गृह विभाग के ही अधीन चलते हुए गृह विभाग के मंत्री को रिपोर्ट करेगा।</li>
</ul>
<h3> किसी भी विभाग में तब्दीली करने से पहले राज्यपाल की इजाजत जरूरी (Anil Vij )</h3>
<p style="text-align:justify;"> किसी भी विभाग की अलॉटमेंट करने का सिर्फ राज्यपाल को ही एकाधिकार है और इस मामले में मुख्यमंत्री द्वारा सिफारिश की जाती है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सिफारिश पहुंचने के उपरांत ही राज्यपाल की तरफ से 14 नवंबर 2019 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए विभागों के अलॉटमेंट की गई थी। जिसके तहत अनिल विज को मिले 7 विभागों में से गृह विभाग पहले नंबर पर रखा गया था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसी के साथ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अलॉटमेंट किए गए विभागों के आदेश में कहीं पर भी ।</li>
<li style="text-align:justify;">अलग से क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट का जिक्र नहीं किया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">आजकल सीआईडी विभाग को लेकर पिछले कुछ दिनों से माहौल गर्म हुआ पड़ा है।</li>
</ul>
<h3>किसी भी विभाग में कोई नहीं कर सकता तब्दीली</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के मंत्रियों को अलॉट हुए विभागों में किसी भी तरह की कोई भी फेरबदल राजनीतिक या फिर अधिकारियों के स्तर पर नहीं की जा सकती है। क्योंकि इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लिखित रूप में राज्यपाल को सिफारिश भेजनी होगी और उसी सिफारिश को मंजूर करने के पश्चात ही अलॉटमेंट हुए विभागों में किसी तरह का फेरबदल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से पूर्व चाहे राज्य सरकार या विधानसभा की वेबसाइट सहित किसी भी वेबसाइट या अन्य जगहों पर सीआईडी विभाग किसी अन्य मंत्री के साथ लिखने से विभाग के अलॉटमेंट नहीं हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एडिशनल मुख्य सचिव गृह को रिपोर्ट करते हैं सीआईडी चीफ</h3>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग की तरह ही क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विभाग राज्य सरकार के स्तर पर किसी भी तरह की फाइल को पास करवाने या आदेशों को लेने के लिए एडिशनल मुख्य सचिव गृह विभाग के जरिए ही सारी कार्रवाई करते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एडिशनल मुख्य सचिव गृह विभाग को ही सीआईडी चीफ रिपोर्ट करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">गृह विभाग के मंत्री अनिल विज के अधीन होने के चलते क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विभाग उनके अधीन ही रहेगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">आज तक नहीं हुआ सीआईडी अलग विभाग</h3>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार व हरियाणा विधानसभा के दस्तावेज में आज तक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विभाग कभी भी अलग विभाग नहीं बनाया गया है। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विभाग राज्य पुलिस के अधीन ही रहता है। सीआईडी में अभी तक पिछले समय दौरान एडीजीपी रैंक का अधिकारी ही मुखिया बनता है और सीआईडी के एडीजीपी को राज्य की सभी तरह की खुफिया रिपोर्ट से विभाग के प्रमुख डायरेक्टर जनरल पुलिस (डीजीपी) को समय-समय पर अवगत करवाना होता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसके साथ ही इस विभाग के मुखिया को भी जानकारी देनी होती है।</li>
<li style="text-align:justify;">पहले समय के दौरान मुख्यमंत्री ही अपने पास गृह विभाग रखते आए हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते सीधा मुख्यमंत्री को खुफिया रिपोर्ट भेजी जाती थी।</li>
<li style="text-align:justify;">परंतु अब गृह विभाग का मंत्री अलग होने के चलते खुफिया रिपोर्ट को भेजने को लेकर विवाद पनपा हुआ है।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 19:35:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>हरियाणा में सीआईडी के बॉस पर संशय बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[इसलिए विज सीआईडी से तमाम तरह की सूचनाएं मांगते रहते हैं। जिस बाबत सीआईडी डीजीपी अनिल राव के साथ उनकी खटपट भी जगजाहिर है। वहीं मुख्यमंत्री सीआईडी के असली बॉस हैं यह बात गृह मंत्री होने के नाते अनिल विज पचा नहीं पा रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-ministers-of-council-is-under-cid-cm/article-12312"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/haryana-ministers.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">हरियाणा मिनिस्टर्स आफ काउंसिल में सीआईडी है मुख्यमंत्री के अधीन (CID)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अनिल कक्कड़/सच कहूँ चंडीगढ़।</strong> मंगलवार को उस समय मीडिया के साथ-साथ (CID) सरकार में भी बड़ी चर्चा हो चली, जब एक मीडिया प्लैटफार्म पर खबर चली कि क्रिमीनल इनवेस्टीगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) विभाग मुख्यमंत्री ने फिर से अपने अधीन ले लिया है। इस बाबत विधानसभा की वैबसाइट पर मौजूद काउंसिल आॅफ मिनिस्टर्स की सूची में मंत्रियों को अलॉट विभागों का हवाला दिया गया। वहीं इस बाबत उच्च स्तरीय सूत्रों ने यह भी कन्फर्म किया कि सीआईडी के मुखिया कभी गृह मंत्री अनिल विज थे ही नहीं। बतौर नियम यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। बता दें कि कई दिनों से सीआईडी को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और अनिल विज के बीच खींचतान बताई जा रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मुख्यतौर पर क्या  करती है सीआईडी</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सीआईडी मुख्यतौर पर तीन कार्य करती है।</li>
<li style="text-align:justify;">नंबर एक-जानकारियां एकत्र करना, सुरक्षा संबंधी जानकारियां एकत्र करना और विभिन्न केसों की तह तक जाकर जांच करना।</li>
<li style="text-align:justify;">सीआईडी द्वारा की गई रोजाना की कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्यमंंत्री, चीफ सेके्रटरी और गृह मंत्री और गृह सचिव को जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसे मुख्य तौर पर देखने के बाद वहीं नष्ट कर दिया जाता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">सीआईडी हमेशा सीएम के अंडर ही रही</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं एक उच्च स्तरीय अधिकारी ने <strong>सच कहूँ</strong> से बातचीत में बताया कि सीआईडी का अलग से कोई विभाग नहीं है। यह होम के साथ अटैच जरूर है, लेकिन यह रिपोर्ट सीधा सीएम को करती रही है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इससे पूर्व जितने भी मुख्यमंत्री रहे हैं, उन्होंने मुख्यतौर पर सीआईडी विभाग को खुद के पास ही रखा है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं 1987 में जब लोकदल की सरकार बनी तो सीएम देवी लाल ने जब संपत सिंह को गृह मंत्री बनाया, लेकिन सीआईडी खुद के पास रखा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">विज और खट्टर में खींचतान क्यों?</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि रिपोर्ट्स पर गौर करें तो मुख्यमंत्री खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज के बीच इस बाबत काफी खींचतान की बातें हवा में उड़ती रही हैं। लेकिन यह भी सच्चाई है कि प्रदेश के गृहमंत्री होने के नाते प्रदेश की हर छोटी-बड़ी गतिविधि से गृह मंत्री को वाकिफ होना लाज़मी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">विज सीआईडी से तमाम तरह की सूचनाएं मांगते रहते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जिस बाबत सीआईडी डीजीपी अनिल राव के साथ उनकी खटपट भी जगजाहिर है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं मुख्यमंत्री सीआईडी के असली बॉस हैं</li>
<li style="text-align:justify;">यह बात गृह मंत्री होने के नाते अनिल विज पचा नहीं पा रहे हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">इस सरकार में राजनैतिक लोगों की फोन टैपिंग लगभग शून्य!</h3>
<p style="text-align:justify;">एक उच्च स्तरीय सूत्र के अनुसार इस सरकार में राजनैतिक स्तर पर सीआईडी द्वारा फोन टैपिंग के मामले या अन्य सर्विलांस के मामले लगभग शून्य हैं। हालांकि यह भी सच है</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> विपक्षी नेता की हर प्रेस वार्ता या पत्रकारों से बातचीत पर सीआईडी अधिकारियों की कड़ी नज़र होती है।</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन उच्च अधिकारी इन सीआईडी अधिकारियों की रिपोर्टिंग को प्रभावशाली नहीं मानते।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">गृहमंत्री अनिल विज बिजनस आॅफ द हरियाणा गवर्नमेंट के रूल्स का दे रहे हवाला</h3>
<p style="text-align:justify;">गृहमंत्री होने के नाते अनिल विज दावा करते हैं कि बिजनस आॅफ द हरियाणा गवर्नमेंट के रूल्स में साफ-साफ लिखा है कि सीआईडी होम डिपार्टमेंट के पास होती है। हालांकि इसी बिजनस आॅफ रूल्स में पेज 30 पर रूल नं. पांच में साफ लिखा है कि ‘महत्वपूर्ण केस चीफ सेके्रटरी से होकर गुजरेंगे।’</p>
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</span></span></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2020 20:36:44 +0530</pubDate>
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