<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/sc/tag-156" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>SC - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/156/rss</link>
                <description>SC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को राहत, SC-ST संशोधन एक्ट को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून-2018 पर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-approves-sc-st-amendment-act/article-12973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/caa-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><h2>शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और गिरफ्तारी होगी।</h2>
<p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संशोधन कानून-2018<strong> (SC-ST Amendment Act)</strong> पर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस अरूण मिश्र, जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस रवीन्द्र भट्ट की बेंच ने एससी-एसटी संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अब एससी-एसटी संशोधन कानून के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होगी और गिरफ्तारी होगी। इस मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कोर्ट सिर्फ उन्हीं मामलों में अग्रिम जमानत दे सकती है जहां पहली नजर में केस नहीं बनता दिख रहा है।</p>
<h2>एफआईआर से पहले प्राथमिक जांच की जरूरत नहीं |SC-ST Amendment Act</h2>
<p>जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में एक बेंच ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच जरूरी नहीं है। इसके अलावा इस कानून में एफआईआर दर्ज करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सहमति जरूरी नहीं है। हालांकि इसी बेंच के एक दूसरे जज जस्टिस रविंद्र भट ने कहा कि देश के सभी नागरिकों को समान भाव से देखा जाना चाहिए ताकि भाई चारे की भावना विकसित हो सके। जस्टिस भट ने कहा कि अदालत एक एफआईआर को रद्द कर सकती है अगर एसटी-एसटी एक्ट के तहत पहली नजर में केस बनता नहीं दिख रहा है।</p>
<h2>ये है मामला| SC-ST Amendment Act</h2>
<ul>
<li><strong> अनुसूचित जनजाति अधिनियम-1989 के हो रहे दुरूपयोग के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने  एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। </strong></li>
<li><strong>इसके बाद संसद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए कानून में संशोधन किया गया था।</strong></li>
<li><strong> इसे भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। </strong></li>
<li><strong>अब पहले के मुताबिक ही एफआईआर दर्ज करने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या नियुक्ति प्राधिकरण से अनुमति जरूरी नहीं होगी।</strong></li>
<li><strong> बता दें कि एससी-एसटी एक्ट के मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।</strong></li>
<li><strong> न्यायालय असाधारण परिस्थितियों में एफआईआर को रद्द कर सकते हैं।</strong></li>
</ul>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-approves-sc-st-amendment-act/article-12973</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-approves-sc-st-amendment-act/article-12973</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Feb 2020 13:32:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/caa-supreme-court.jpg"                         length="10449"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईएनएक्स मीडिया मामला: चिदम्बरम की याचिका पर ED को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[आईएनएक्स मीडिया केस मामले में 18 अक्टूबर को सीबीआई ने पी चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी दो कंपनियों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-notice-to-ed/article-11205"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/supreme-court-notice-to-ed.jpg" alt=""></a><br /><h1>​नोटिस जारी कर सोमवार तक मांगा जवाब |<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">INX Media Case</span></span></h1>
<p><strong>Edited By Vijay Sharma</strong></p>
<p><strong>नेशनल डेस्क</strong>: आईएनएक्स  मीडिया मामले <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">INX Media Case</span></span>)</strong> में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को ​नोटिस जारी कर सोमवार तक जवाब मांगा है। दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की याचिका को खारिज कर दिया था जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>बता दें कि आईएनएक्स मीडिया केस मामले में 18 अक्टूबर को सीबीआई ने पी चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति चिदंबरम और उनकी दो कंपनियों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि इस मामले में भ्रष्टाचार की जांच जारी है। ऐसे में उन्हें जमानत न दी जाए।</p>
<p>CBI ने जो जमानत याचिका दायर की थी उसमें दावा किया गया था कि इंद्राणी मुखर्जी ने पी चिदंबरम को रिश्वत के तौर पर 35.5 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए। ये पैसे सिंगापुर, मॉरीशस, बरमूदा, इंग्लैंड और स्विटजरलैंड में दिए गए. ये आरोप पत्र विशेष न्यायाधीश लाल सिंह के समक्ष दायर किया गया।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-notice-to-ed/article-11205</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-notice-to-ed/article-11205</guid>
                <pubDate>Wed, 20 Nov 2019 11:30:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-11/supreme-court-notice-to-ed.jpg"                         length="122333"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीबीआइ घमासान: वर्मा ने सील बंद लिफाफे में SC को सौंपा अपना जवाब, आज होगी अहम सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली,(एजेंसी)। भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की ओर से दायर रिपोर्ट पर सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सील बंद लिफाफे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इससे पहले सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ और वक्त की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/alok-verma-submitted-his-reply-to-the-sc-today-will-be-the-important-hearing/article-6663"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/alok-verma.jpg" alt=""></a><br /><p>न<strong>ई दिल्ली,(एजेंसी)।</strong> भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की ओर से दायर रिपोर्ट पर सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सील बंद लिफाफे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया। इससे पहले सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कुछ और वक्त की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए वर्मा को आज ही जवाब देने को कहा था। बता दें इस मामले पर आज अहम सुनवाई होनी है।</p>
<h2>सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को सीवीसी से फिलहाल पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली</h2>
<p>गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को सीवीसी से फिलहाल पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिली है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने वर्मा पर लगे आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जांच रिपोर्ट में कुछ पहलुओं पर आगे जांच की जरूरत बताई है, जिसके लिए और समय की मांग की है।</p>
<p>सीवीसी ने रिपोर्ट में कुछ पहलुओं पर सराहना और कुछ की निंदा की है। जिसके बाद कोर्ट ने सीवीसी रिपोर्ट की प्रति आलोक वर्मा को देने का आदेश दिया था और उनसे रिपोर्ट पर सीलबंद लिफाफे में सोमवार दोपहर तक जवाब मांगा था। अब वर्मा का कहना है कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए और समय चाहिए।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/alok-verma-submitted-his-reply-to-the-sc-today-will-be-the-important-hearing/article-6663</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/alok-verma-submitted-his-reply-to-the-sc-today-will-be-the-important-hearing/article-6663</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Nov 2018 08:33:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-11/alok-verma.jpg"                         length="67018"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी-एसटी एक्ट के विरोध में राष्ट्रपति को खून से  लिखा पत्र, मांगी इच्छामृत्यु</title>
                                    <description><![CDATA[अलीगढ़(सच कहूँ)। एससी-एसटी एक्ट में ताजा संशोधन के विरोध में अखिल भारत हिंदू महासभा भी अब खुलकर सामने आ गई। संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने अपने खून से आठ पेज का पत्र लिखकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार वोटों की खातिर हिंदू समाज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act/article-5937"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/sc-st-act.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अलीगढ़(सच कहूँ)।</strong> एससी-एसटी एक्ट में ताजा संशोधन के विरोध में अखिल भारत हिंदू महासभा भी अब खुलकर सामने आ गई। संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने अपने खून से आठ पेज का पत्र लिखकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार वोटों की खातिर हिंदू समाज को विभाजित कर रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय पत्रकार  वार्ता</h2>
<p style="text-align:justify;">इस कानून से समानता के अधिकार का उल्लंघन तो हो ही रहा है, देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। उनके साथ 15 अन्य पदाधिकारियों ने भी अपना खून निकाल इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर व अंगूठा लगाया। डॉ. पांडेय ने इस मौके पर पत्रकारों से भी वार्ता की। पूजा कुछ दिन पहले मेरठ में ‘हिंदू न्यायपीठ’ की जज बनाए जाने को लेकर चर्चा में आई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने पत्रकारों के समक्ष सिरिंज से खून निकालकर राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में लिखा कि हिंदू विभाजक, समाज विभाजक इस काले कानून का केवल दुरुपयोग रोक कर सुप्रीम कोर्ट ने इसको दुष्प्रभावी होने से बचाया था, लेकिन इस संशोधन के बाद सवर्ण और ओबीसी अब फिर डरकर जी रहा है। भविष्य में जाने-अनजाने इस विधेयक का शिकार होकर इन वर्गों के लोग आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। लिहाजा इस कानून पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएं अन्यथा उन्हें महासभा के कार्यकर्ताओं के साथ इच्छा मृत्यु की अनुमति दें।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act/article-5937</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/sc-st-act/article-5937</guid>
                <pubDate>Sat, 15 Sep 2018 08:34:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-09/sc-st-act.jpg"                         length="44508"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देशव्यापी समस्या बन रहा कूड़ा निपटान</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम लोगों की कॉलोनियों के पास कूड़ा डंप बनाने की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए संबंधित अथॉरिटी को फटकार लगाई है। अदालत ने सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि क्यों नहीं उप राज्यपाल के भवन के सामने कूड़Þा डंप बना दिया जाए। नि:संदेह इस टिप्पणी से सिर्फ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/countrywide-problem-is-the-waste/article-5235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आम लोगों की कॉलोनियों के पास कूड़ा डंप बनाने की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए संबंधित अथॉरिटी को फटकार लगाई है। अदालत ने सख्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि क्यों नहीं उप राज्यपाल के भवन के सामने कूड़Þा डंप बना दिया जाए। नि:संदेह इस टिप्पणी से सिर्फ दिल्ली के ही नहीं बल्कि पूरे देश के मध्य वर्गीय व गरीबों का दर्द झलकता है। महानगरों से लेकर छोटे-बड़Þे शहरों में कूड़ा समस्या की बजाए आफत बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में कूड़े के पहाड़ बनाए जा रहे हैं फिर भी मामले का हल नहीं हो सका। अथॉरिटी ने अपने सिर से बोझ उतारने के लिए कूड़ा डंप आम लोगों की आबादी के नजदीक बना दिए, जिसका लोगों ने विरोध किया। यही हाल पूरे देश का है। प्रशासन कूड़Þा डंप के लिए ऐसी जगह चुनता है जो पास के क्षेत्र से दूर होती है लेकिन नजदीक रहने वाले लोग अधिकारियों को नजर नहीं आते। सत्ता तक पहुंच वाले लोगों से प्रशासन को डर रहता है। आम लोग जिनके पास अपनी रोजी-रोटी से ही फुर्सत नहीं का भी हल नहीं वह धरना-प्रदर्शन के लिए कहां से समय निकाल सकते हैं, अगर विरोध कर जेल चले जाएं तो परिवार को रोटी के लाले पड़ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन इन लोगों की लाचारी का फायदा उठाकर मनमानी करता है। फिर यह मजबूर लोग कूड़े का कहर भयानक बीमारियों के रूप में झेलते हैं। सर गंगा राम अस्पताल के एक सर्वेक्षण मुताबिक दिल्ली की 50 फीसदी आबादी को कैंसर का खतरा है चाहे वह बीड़ी-सिगरेट का सेवन न भी करते हों। राजधानी जो खूबसूरती व सफाई की मिसाल होनी चाहिए वह कूड़े की समस्या से दो-चार हो रही है। पूरे देश के लिए कूड़े के निपटारे संबंधी स्पष्ट व ठोस नीति होनी चाहिए ताकि कोई प्रॉजैक्ट समय पर पूरा हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन की जल्दबाजी के कारण व सही नीतियां न होने के कारण प्रॉजैक्ट विवादों में आ जाते हैं, जिस कारण 6 महीनों में होने वाला कार्य 2-4 वर्ष के लिए लटक जाता है। दिल्ली जैसे महानगरों के लिए ऐसे प्रॉजैक्ट में देरी घातक सिद्ध होगी। छोटे-बड़े शहरों में कूड़ा डंप का विरोध हो रहा है। कहीं न कहीं यह मामले चुनावी मुद्दे बनने लगे हैं। सफाई किसी देश के विकास व तंदरूस्ती की पहली शर्त है व इसके लिए लोगों के स्वास्थ्य व हितों की बलि नहीं ली जा सकती। सरकारें अपनी जिम्मेवारी निभाएं व जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। कुछ लोगों का कूड़ा किसी अन्य के लिए बीमारी न बनने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की नसीहत से शिक्षा लेनी चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/countrywide-problem-is-the-waste/article-5235</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/countrywide-problem-is-the-waste/article-5235</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Aug 2018 20:45:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion1.jpg"                         length="238847"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा में एसटी-एससी संसोधन बिल पास</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में लगभग छह घंटे तक चली चर्चा नई दिल्ली (सच कहूँ)। लोकसभा ने आज एसटी-एससी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी। सरकार ने जोर दिया कि भाजपा नीत सरकार हमेशा आरक्षण की पक्षधर रही है और कार्य योजना बनाकर दलितों के सशक्तीकरण के लिये काम कर रही है। लोकसभा में लगभग छह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/st-sc-amendment-bill-passed-in-lok-sabha/article-5205"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/lok-sabha1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">लोकसभा में लगभग छह घंटे तक चली चर्चा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)।</strong> लोकसभा ने आज एसटी-एससी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी। सरकार ने जोर दिया कि भाजपा नीत सरकार हमेशा आरक्षण की पक्षधर रही है और कार्य योजना बनाकर दलितों के सशक्तीकरण के लिये काम कर रही है। लोकसभा में लगभग छह घंटे तक चली चर्चा के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को नकारते हुए ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा, ‘‘हमने अनेक अवसरों पर स्पष्ट किया है, फिर स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम आरक्षण के पक्षधर थे, पक्षधर हैं और आगे भी रहेंगे।’’ उन्होंने कहा कि चाहे हम राज्यों में सरकार में रहे हो, या केंद में अवसर मिला हो, हमने यह सुनिश्वित किया है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मंत्री गहलोत ने विपक्ष पर साधा निशाना</h1>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंत्री गहलोत ने कहा कि जो हम पर विधेयक देरी से लाने का आरोप लगा रहे हैं, वे जवाब दें कि 1989 में कानून आने के बाद अब तक उसमें संशोधन करके उसे मजबूत क्यों नहीं बनाया गया। कांग्रेस पर वोट बैंक के लिये दलित वर्ग का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि हमारी नीति और नियत अच्छी है और हम डा. भीमराव अंबेडकर की सोच को चरितार्थ कर रहे हैं। इसलिये हम इस बार पहले से भी मजबूत प्रावधानों वाला विधेयक लाये हैं। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि कई निर्णयों में दंड विधि शास्त्र के सिद्धांतों और दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 41 से यह परिणाम निकलता है कि एक बार जब अन्वेषक अधिकारी के पास यह संदेह करने का कारण है कि कोई अपराध किया गया है तो वह अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकता है। अन्वेषक अधिकारी से गिरफ्तार करने या गिरफ्तार न करने का यह विनिश्चय नहीं छीना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दृष्टि से लोकहित में यह उपयुक्त है कि यथास्थिति किसी अपराध के किये जाने के संबंध में प्रथम इत्तिला रिपोर्ट के पंजीकरण या किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की बाबत किसी प्रारंभिक जांच या किसी प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के उपबंध लागू किये जाएं। विधेयक के 18क में कहा गया है कि जिसके विरूद्ध इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिये किए जाने का अभियोग लगाया गया है और इस अधिनियम या संहिता के अधीन उपबंधित प्रक्रिया से भिन्न कोई प्रक्रिया लागू नहीं होगी। इसमें कहा गया है कि किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश या निदेश के होते हुए भी संहिता की धारा 438 के उपबंध इस अधिनियम के अधीन किसी मामले पर लागू नहीं होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/st-sc-amendment-bill-passed-in-lok-sabha/article-5205</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/st-sc-amendment-bill-passed-in-lok-sabha/article-5205</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Aug 2018 09:54:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-08/lok-sabha1.jpg"                         length="79351"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी/एसटी एक्ट पर पलटा जाएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी कैबिनेट ने संशोधन को दी मंजूरी नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से कमजोर हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार (निवारण) कानून को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इसमें जरूरी बदलाव करने का निर्णय लिया है और इससे संबंधित विधेयक को बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-preparation-to-overturn-supreme-court-verdict-on-sc-st-act/article-5094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">मोदी कैबिनेट ने संशोधन को दी <code>मंजूरी</code></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सरकार ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से कमजोर हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार (निवारण) कानून को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इसमें जरूरी बदलाव करने का निर्णय लिया है और इससे संबंधित विधेयक को बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। केन्द्रीय मंत्री एवं लोक जन शक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि विधेयक दो- तीन दिन में संसद में पेश कर दिया जायेगा। पासवान के अनुसार बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कानून के प्रावधानों को और कड़ा किया जायेगा।</p>
<h1 style="text-align:center;">सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को कुछ सख्त प्रावधानों को हटा दिया था</h1>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने गत 20 मार्च को इस कानून के कुछ सख्त प्रावधानों को हटा दिया था जिससे इससे जुडेÞ मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लग गयी थी। इसके अलावा आरोपी को अंतरिम जमानत लेने की अनुमति भी मिल गई थी। दलित संगठनों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए आगामी 9 अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया था। सरकार में शामिल लोक जन शक्ति पार्टी से संबद्ध दलित सेना ने सरकार से 9 अगस्त से पहले कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए विधेयक पारित करवाने या अध्यादेश लाने की मांग की थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-preparation-to-overturn-supreme-court-verdict-on-sc-st-act/article-5094</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/national-preparation-to-overturn-supreme-court-verdict-on-sc-st-act/article-5094</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Aug 2018 14:58:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-08/no-discrimination-with-women-on-the-name-of-religion.jpg"                         length="238847"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी एसटी मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार : प्रसाद</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता)। अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले से पिछले एक सप्ताह से उठे विवाद के बीच विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज स्पष्ट किया कि सरकार शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। श्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-st-case-reconsideration-petition-government-parshad/article-3671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/ravi-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता)। </strong>अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले से पिछले एक सप्ताह से उठे विवाद के बीच विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज स्पष्ट किया कि सरकार शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। श्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में लिये गये फैसलों के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि यह फैसला काफी दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार ने इसका संज्ञान लिया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय से शीर्ष अदालत के आदेश का अध्ययन कर इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले दिनों यह आदेश दिया था कि अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के क्रियान्वयन के मामले में आरोपी को तुरंत सीधे गिरफ्तार करने और आपराधिक मामले दर्ज करने की बजाय पहले मामले की प्राथमिक जाँच की जाये और सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही गिरफ्तारी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बुधवार को लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी (ए) के प्रमुख एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने भी सरकार की ओर से एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर कहा था कि कानून मंत्रालय न्यायालय के फैसले का अध्ययन करा रहा है और जल्दी ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। बुधवार को ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े मंत्रियों और सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी। प्रतिनिधििमंडल में श्री पासवान और श्री आठवले के साथ ही केन्द्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, जुएल उरांव, अर्जुन राम मेघवाल, विजय टमटा, विजय सांपला तथा कई अन्य सांसद शामिल थे।  विपक्षी नेताओं ने भी बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-st-case-reconsideration-petition-government-parshad/article-3671</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-st-case-reconsideration-petition-government-parshad/article-3671</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Mar 2018 03:40:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-03/ravi-1.jpg"                         length="37415"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरकॉम सम्पत्ति बिक्री मामला : यथास्थिति बनाये रखने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यु्निकेशन (आरकॉम) की सम्पत्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो से बेचे जाने के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आज आदेश दिया। बैंकों के परिसंघ की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने, हालांकि फिलहाल आरकॉम की संपत्ति बेचने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यु्निकेशन (आरकॉम) की सम्पत्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो से बेचे जाने के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आज आदेश दिया। बैंकों के परिसंघ की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने, हालांकि फिलहाल आरकॉम की संपत्ति बेचने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक हटाने से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति ए के गोयल, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने कहा कि उसके अंतिम निर्णय के बाद ही बिक्री के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकता है। न्यायालय इस मामले की सुनवाई पांच अप्रैल को करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को कल शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें स्वीडन की कंपनी एरिक्सन को आरकॉम की सम्पत्तियों पर दावा जताने की अनुमति दी थी। गत वर्ष 28 दिसंबर को कर्ज के बोझ तले डूबी आरकॉम ने घोषणा की थी कि वह अपना वायरलेस स्पे क्ट्रकम, आवर, फाइबर और मीडिया कंवर्जेंस नोड (एमसीएन) एसेट्स रिलायंस जियो को बेच रही है। आरकॉम इसके जरिये अपना कर्ज 39,000 करोड़ रुपये कम करना चाहती थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गत आठ मार्च को बिना पूर्व अनुमति के आरकॉम की सम्पत्ति की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय का यह आदेश एरिक्सन की याचिका पर सुनवाई करते हुए आया था। एरिक्सन का आरकॉम पर 1,012 करोड़ रुपये बकाया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-orders-status-guo-on-sale-of-rcom-property/article-3632</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-orders-status-guo-on-sale-of-rcom-property/article-3632</guid>
                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 06:31:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एससी/एसटी अधिनियम के तहत गिरफ्तारी से पहले होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आज व्यवस्था दी कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बगैर उच्चाधिकारी की अनुमति के अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपों की प्रारम्भिक जांच जरूरी है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pre-investigation-must-before-arresting-under-sc-st-act/article-3617"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/sc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता) </strong>उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आज व्यवस्था दी कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बगैर उच्चाधिकारी की अनुमति के अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपों की प्रारम्भिक जांच जरूरी है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी से पहले जमानत भी मंजूर की जा सकती है। न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम 1989 के संबंध में नये दिशानिर्देश जारी किये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने गिरफ्तारी से पहले मंजूर होने वाली जमानत में रुकावट को भी खत्म कर दिया है। ऐसे में अब दुर्भावना के तहत दर्ज कराये गये मामलों में अग्रिम जमानत भी मंजूर हो सकेगी। न्यायालय ने माना है कि एससी/एसटी अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है। पीठ ने नये दिशानिर्देश के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने से पहले पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) स्तर का अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा। किसी सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी। महाराष्ट्र की एक याचिका पर न्यायालय ने यह अहम फैसला सुनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने केंद्र सरकार और न्याय मित्र अमरेंद्र शरण की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने इस दौरान कुछ सवाल भी उठाये थे कि क्या एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय किये जा सकते हैं ताकि बाहरी तरीकों का इस्तेमाल न हो? क्या किसी भी एकतरफा आरोप के कारण आधिकारिक क्षमता में अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है और यदि इस तरह के आरोपों को झूठा माना जाये तो ऐसे दुरुपयोगों के खिलाफ क्या सुरक्षा उपलब्ध है? क्या अग्रिम जमानत मंजूर न होने की वर्तमान प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित प्रक्रिया है?</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pre-investigation-must-before-arresting-under-sc-st-act/article-3617</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pre-investigation-must-before-arresting-under-sc-st-act/article-3617</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Mar 2018 05:19:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-03/sc.jpg"                         length="72307"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन तलाक गैरकानूनी, सरकार बनाए कानून: SC</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-pronounce-judgement-on-triple-talaq/article-3300"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sc-12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे। चीफ जस्टिस खेहर ने कहा तलाक-ए-बिद्दत संविधान के आर्टिकल 14, 15, 21 और 25 का वॉयलेशन नहीं करता।तीन तलाक पर सभी पार्टियां मिलकर फैसला लें। लेकिन मसले से राजनीति को दूर रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">सीजेआई ने ये भी कहा, तलाक-ए-बिद्दत सुन्नी कम्युनिटी का अहम हिस्सा है। ये परंपरा एक हजार साल से चली आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर 6 महीने में कानून नहीं बन पाता तो हम फिर दखल देंगे। तीन तलाक कई मुस्लिम देशों में नहीं है तो फिर ये आजाद भारत में खत्म क्यों नहीं हो सकता? मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से केस लड़ने वाली वकील चंद्रा राजन ने कहा, तीन तलाक का जिक्र कुरान में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हम शुक्रगुजार हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">2016 में दायर हुई थी पिटीशन</h1>
<p style="text-align:justify;">फरवरी 2016 में उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो (38) वो पहली महिला बनीं, जिन्होंने ट्रिपल तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला पर बैन लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की। शायरा को भी उनके पति ने तीन तलाक दिया था। ट्रिपल तलाक यानी पति तीन बार ‘तलाक’ लफ्ज बोलकर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">निकाह हलाला यानी पहले शौहर के पास लौटने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रॉसेस। इसके तहत महिला को अपने पहले पति के पास लौटने से पहले किसी और से शादी करनी होती है और उसे तलाक देना होता है। सेपरेशन के वक्त को इद्दत कहते हैं। बहुविवाह यानी एक से ज्यादा पत्नियां रखना। कई मामले ऐसे भी आए, जिसमें पति ने वॉट्सऐप या मैसेज भेजकर पत्नी को तीन तलाक दे दिया।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-pronounce-judgement-on-triple-talaq/article-3300</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-pronounce-judgement-on-triple-talaq/article-3300</guid>
                <pubDate>Tue, 22 Aug 2017 00:44:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/sc-12.jpg"                         length="91518"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पनामागेट कांड में नवाज दोषी करार, पाक SC ने PM पद से दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली । पनामा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शरीफ को दोषी करार दिया है। जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। पनामा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली ।</strong> पनामा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शरीफ को दोषी करार दिया है। जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। पनामा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी।</p>
<h3></h3>
<p>पांच जजों की बेंच में जस्टिस आसिफ सईद खोसा, जस्टिस एजाज अफजल खान, जस्टिस गुलजार अहमद, जस्टिस शेख अजमद सईद और जस्टिस इजाजुल अहसान शामिल थे। शरीफ के खिलाफ यह फैसला सुप्रीम कोर्ट रूम नं. 1 में सुनाया गया।</p>
<ul>
<li>तनाव की आशंका देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आसपास सिक्युरिटी टाइट कर दी गई है।</li>
<li>इस्लामाबाद पुलिस और पंजाब रेंजर्स समेत अन्य फोर्सेज के करीब 3 हजार जवान तैनात किए गए हैं।</li>
</ul>
<h3>कैसे हुआ था खुलासा</h3>
<p>2013 में इंटरनैशनल कन्सॉर्टियम ऑफ इन्वैस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आई.सी.आई.जे.) ने पनामा पेपर्स के नाम से बड़ा खुलासा किया। उत्तरी व दक्षिणी अमरीका को भूमार्ग से जोड़ने वाले देश पनामा की एक कानूनी फर्म ‘मोसेक फोंसेका’ के सर्वर को 2013 में हैक करने के बाद ये खुलासे किए और कहा कि फर्जी कंपनियों और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अरबों रुपये विदेशी बैंकों में जमा कराए गए।</p>
<h3>इंटेरिमपीएम पद की रेस</h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स में पीएमएल-एन के एक लीडर के हवाले से बताया जा रहा है कि शाहबाज के उप-चुनाव में पीएम चुने जाने तक 45 दिनों के लिए अंतरिम पीएम के रूप में डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ, स्पीकर अयाज सादिक, बिजनेसमैन शाहिद अब्बासी के नाम रेस में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/nawaz-sharif-decision-on-future/article-2660</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/nawaz-sharif-decision-on-future/article-2660</guid>
                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 01:56:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        