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                <title>artists - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>हरियाणा के 24 कलाकारों को ब्लैक लिस्ट करने का पत्र बना पहेली</title>
                                    <description><![CDATA[कलाकार कला परिषद से नाराज परिषद ने ऐसे किसी पत्र से झाड़ा पल्ला सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। हरियाणा के 24 कलाकारों(Artists) को हरियाणा कला परिषद की ओर से ब्लैक लिस्ट किया गया है। इस तरह का एक पत्र इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। हरियाणा कला परिषद की इस तरह की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कलाकार कला परिषद से नाराज</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>परिषद ने ऐसे किसी पत्र से झाड़ा पल्ला</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम।</strong> हरियाणा के 24 कलाकारों(Artists) को हरियाणा कला परिषद की ओर से ब्लैक लिस्ट किया गया है। इस तरह का एक पत्र इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। हरियाणा कला परिषद की इस तरह की कार्यशैली से हरियाणा के कलाकारों में नाराजगी है। वहीं इस बारे में हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने साफ किया है कि उनकी तरफ से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि हरियाणा के 24 कलाकारों की एक सूची बनाकर कला परिषद इलाहाबाद और पटियाला में भेजा गया। सूची में कलाकारों के बारे में लिखा गया कि हरियाणा में इन कलाकारों को सरकार के खिलाफ काम करने पर ब्लैक लिस्ट किया गया है। इसलिए इन कलाकारों को कोई काम न दिया जाए। इस पत्र पर तुरंत संज्ञान लेते हुए दोनों कला परिषद ने हरियाणा के 24 कलाकारों को काम देने पर प्रतिबंध लगा दिया। जैसे ही इस बारे में हरियाणा के कलाकारों को पता चला तो उनमें रोष व्याप्त हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कलाकारों को काम मिलना हुआ बंद : त्रिखा</h4>
<p style="text-align:justify;">मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर कुरुक्षेत्र के पूर्व उप-निदेशक एवं प्रसिद्ध रंगकर्मी विश्वदीपक त्रिखा ने कहा कि देश के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हकीकत में यह दिन कलाकारों के लिए काले दिन के रूप में सामने आया है। पहले से कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। अब उन्हें ब्लैक लिस्ट करने से उन्हें काम मिलना बंद हो गया है। उन्होंने इस ब्लैक लिस्ट के बारे में हरियाणा कला परिषद रोहतक जोन के अतिरिक्त निदेशक एवं मुख्यमंत्री हरियाणा के ओएसडी पब्लिसिटी गजेंद्र फौगाट से जानकारी ली तो उन्होंने ऐसे किसी पत्र की जानकारी नहीं होने की बात कही। सांस्कृतिक विभाग हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डी. सुरेश ने भी ऐसा कोई पत्र जारी करने की बात से साफ इंकार किया। विश्वदीपक त्रिखा के मुताबिक दो नवम्बर 2021 को भेजे गए इस पत्र को लेकर अब सीएम विंडो पर शिकायत दी गई है। क्योंकि पत्र पर हस्ताक्षर भी हैं, जबकि इस सरकारी पत्र की पुष्टि नहीं हो पा रही। इसलिए सरकार इस पत्र की जांच कराए कि आखिर किसने यह पत्र जारी किया या फिर यह किसी ने फर्जीवाड़ा किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं भेजा : संजय भसीन</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने कहा कि वे कला और कलाकारों के हित के लिए काम करते हैं। कलाकारों को ब्लैक लिस्ट करने जैसा काम उन्होंने नहीं किया। उन्होंने तो गीता जयंती और हरियाणा दिवस पर भी अनेक कलाकारों को काम देकर आगे बढ़ाया है। संजय भसीन ने इस सूची के बारे में कहा कि उनके किसी ने जाली हस्ताक्षर करके यह सूची जारी की है। इलाहाबाद व पटियाला में दोनों विभागों को उन्होंने पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि इस पत्र को निराधार माना जाए। इस पत्र की जांच की जा रही है। कमेटी बना दी गई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/letter-to-blacklist-24-artists-of-haryana-became-a-puzzle/article-30119</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Jan 2022 19:12:43 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक लाख कलाकार लॉकडाउन से भुखमरी की कगार पर</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। देश में कोरोना महामारी के कारण लागू लॉकडाउन से न केवल फिल्मी कलाकार और रंगकर्मी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं बल्कि संगीत से जुड़े लोगों की भी हालत बहुत खस्ता हो गई है और छोटे कलाकारों का जीना मुहाल हो गया है और उनके खाने के लाले पड़ गए हैं। सुप्रसिद्ध संगीत विशेषज्ञ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-lakh-artists-on-the-verge-of-starvation-from-lockdown/article-16081"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/artists-in-lockdown.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> देश में कोरोना महामारी के कारण लागू लॉकडाउन से न केवल फिल्मी कलाकार और रंगकर्मी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं बल्कि संगीत से जुड़े लोगों की भी हालत बहुत खस्ता हो गई है और छोटे कलाकारों का जीना मुहाल हो गया है और उनके खाने के लाले पड़ गए हैं। सुप्रसिद्ध संगीत विशेषज्ञ एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ मुकेश गर्ग ने कहा कि इस लॉकडाउन से संगीत से जुड़े करीब एक लाख छोटे कलाकारों के लिए आजीविका का सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि लॉकडाउन के कारण पिछले करीब तीन महीने में देश भर में संगीत का एक भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका और मोहल्लों में संगीत सिखाने के जितने स्कूल खुले हुए थे, वे सब पूरी तरह बंद हो गए तथा जो कलाकार संगीत का ट्यूशन कर अपनी आजीविका चलाते थे उनके लिए भी जीना मुहाल हो गया है ।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब 35 साल तक ‘संगीत’ नामक पत्रिका के सम्पादन से जुड़े डॉ. गर्ग ने कहा कि इस लॉकडाउन में देश के किसी बड़े कलाकार, चाहे वे विश्वमोहन भट्ट हो या अमजद अली खान, का एक भी कॉन्सर्ट नही हो पाया है और न ही कोई संगीत समारोह हो सका। इतना ही नहीं दिल्ली शहर में आए दिन कहीं न कहीं संगीत के कार्यक्रम होते रहते थे, वे सारे कार्यक्रम ठप हो गए हैं और इवेंट आयोजित करने वाली कंपनियां भी खस्ता हालत में आ गई हैं। इतना ही नहीं बड़े कलाकारों के साथ काम करने वाले संगतकार भी बहुत ही मुश्किल की जिंदगी जी रहे हैं। देश में करीब दस हज़ार संगतकार होंगे जो किसी बड़े कलाकार के साथ तबला हारमोनियम पखावज आदि बजाते थे ,उनकी रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2020 09:54:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉकडाउन में छलका कलाकारों का दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कोरोना वैश्विक महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन से जनजीवन भले ही ठप हो गया हो लेकिन सोशल मीडिया पर देश के जाने माने कलाकार अपनी कला के जरिये इस संकट को व्यक्त कर रहे हैं और उनके वीडियो वायरल हो रहे है जिसे लाखों लोग देख और सुन रहे हैं। इन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/artists-worried-in-lockdown/article-15360"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/lockdown.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कोरोना वैश्विक महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन से जनजीवन भले ही ठप हो गया हो लेकिन सोशल मीडिया पर देश के जाने माने कलाकार अपनी कला के जरिये इस संकट को व्यक्त कर रहे हैं और उनके वीडियो वायरल हो रहे है जिसे लाखों लोग देख और सुन रहे हैं। इन कलाकारों में फ़िल्म अभिनेता से लेकर रंगकर्मी नृत्यांगना लेखक और चित्रकार भी हैं जो कोरोना से लड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं और सैकड़ो किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर जाने वाले गरीबों का दर्द उनकी कला में छलक रहा है । वे तरह तरह के वीडियो बनाकर सरकार के प्रति अपने आक्रोश को भी व्यक्त कर रहे हैं। कोई कलाकार नृत्य के जरिये तो कोई नाटक के जरिये तो कोई चित्र तो कोई कविता के माध्यम से इस दुख दर्द को बयां कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लॉक डाउन के तीन चरण पूरे हो गए और सोमवार से चौथा चरण शुरू हो रहा है। इन तीन चरणों में मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन , मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ,अभिनेता राजगोपाल यादव, आयुष्मान खुराना , कार्तिकेयन , राजेन्द्र गुप्ता , कीर्ति सेनन ,भजन सम्राट अनूप जलोटा , ग़ज़ल गायक चंदन दास , गायिका जसपिंदर नरूला, निजामी ब्रदर्स ,लोकगायिका शारदा सिन्हा से लेकर प्रख्यात लेखक एवं संस्कृति कर्मी अशोक वाजपयी ,नरेश सक्सेना , साहित्य अकेडमी पुरस्कार प्राप्त कवि राजेश जोशी ,मंगलेश डबराल के अलावा पदम् श्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध नृत्यांगना ,शोभना नारायण ,चर्चित नर्तकी स्वप्नसुंदरी , जाने माने रंगकर्मी राम गोपाल बजाज , रंजीत कपूर आदि ने अपनी आवाज़ में अपने वीडियो पेश किए।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2020 11:46:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय कलाकारों की दुर्दशा क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[यह भी बात नहीं कि देश में कला की संभाल के लिए कोई मार्गदर्शक इतिहास नहीं है। प्राचीन से लेकर मध्यकाल तक कलाकारों/साहित्यकारों को समय के शासकों द्वारा जागीरें देकर सम्मान देने की परंपरा रही है तब पुरुस्कार कम व आवश्यकता की वस्तु जैसे पैसे व जायदाद को अधिक महत्व दिया जाता था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/why-the-plight-of-national-artists/article-12367"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/national-artists.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश में यह कहावत बन गई है कि जीवित व्यक्ति को कोई पूछता नहीं लेकिन मरने के बाद वाहवाही जरूर होती है। विशेष रूप से कला और साहित्य के मामले में कुछ ज्यादा ही दुर्दशा है। वरिष्ठ लेखकों व गायकों, जिन्होंने देश की संस्कृति की सेवा की वे अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी का जुगाड़ तक नहीं कर सके। कई तो इलाज के अभाव में अपने प्राण त्याग गए। ताजा मामला ईदू शरीफ का है जिन्होंने पारंपरिक गायकी को अपना जीवन समर्पित किया और प्रसिद्ध गायकों की भांति ईदू को सरकारों ने खूब पुरुस्कार व सम्मान भी दिए, लेकिन अपेक्षित आर्थिक मदद व रोजगार नहीं दिया गया ताकि वे अपने कला के शौंक व परिवार की जिम्मेवारी को बराबर चला सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें भारतीय-संगीत व नाटक अकादमी के राष्ट्रीय पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया है लेकिन उनके अपने राज्य ने ही उनकी सुध नहीं ली। ईदू की गायकी का जादू ऐसा था कि मरहूम प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने डेढ़ घंटे तक उसकी गायकी का आनंद लिया था। यूं भी गायकों/लेखकों को भी जुनून है कि उन्होंने कला की विरासत को संभालने के लिए अपनी, आवश्यकताओं की भी परवाह नहीं की। यह भी बात नहीं कि देश में कला की संभाल के लिए कोई मार्गदर्शक इतिहास नहीं है। प्राचीन से लेकर मध्यकाल तक कलाकारों/साहित्यकारों को समय के शासकों द्वारा जागीरें देकर सम्मान देने की परंपरा रही है तब पुरुस्कार कम व आवश्यकता की वस्तु जैसे पैसे व जायदाद को अधिक महत्व दिया जाता था। आज पुरुस्कार के नाम तो बड़े हो गए हैं और सम्मान भी सरकारों के मंत्री देते हैं, लेकिन सुखद जीवन व्यत्तीत के लिए अपेक्षित मदद आवश्यकता अनुसार नहीं दी जाती। कई बार तो पुरुस्कार हर साल देने की बजाय 4-5 वर्षों के बाद ही इकठ्ठे दिए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारों के पास पुरुस्कार देने के लिए 2 घंटों का समय नहीं होता दूसरी तरफ नेताओं के 10-20 मिनटों के समारोह पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। देश की विरासत को बचाने के लिए राजनीतिक पार्टियां कई मोर्चों पर अप्रत्यक्ष लड़ाई तो लड़ रही हैं लेकिन विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने वाले सेवकों का अपमान हो रहा है। केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर कला क्षेत्र के लिए ठोस नीति तैयार करनी चाहिए जिसके अंतर्गत कलाकार को वेतन व बुढापा पैंशन व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2020 20:23:24 +0530</pubDate>
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