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                <title>Youth - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Drug Prevention : नशीली दवाओं की रोकथाम पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में पंजाब में 66 किलो अफीम की बरामदगी समाज और सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है। बेशक पुलिस ने खेप को बरामद कर लिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि पुलिस के नशा विरोधी अभियान के बावजूद नशा तस्करों का नेटवर्क और इरादे बरकरार हैं। पुलिस ने बड़े तस्करों का तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/drug-prevention/article-59223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/price-of-essential-medicines.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाल ही में पंजाब में 66 किलो अफीम की बरामदगी समाज और सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है। बेशक पुलिस ने खेप को बरामद कर लिया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि पुलिस के नशा विरोधी अभियान के बावजूद नशा तस्करों का नेटवर्क और इरादे बरकरार हैं। पुलिस ने बड़े तस्करों का तो पर्दाफाश कर दिया, लेकिन न जाने कितने छुटपुट तस्कर बिना किसी भय के नशे का धंधा कर रहे हैं। नशे का सेवन करने से युवाओं की मौतें होना यह सिद्ध करता है कि पुलिस की मुस्तैदी के बावजूद बड़ी मात्रा में नशा बिक रहा है। पुलिस के अंतरराज्यीय संपर्क के बावजूद नशीली दवाओं की तस्करी और नशीली दवाओं (Drug Prevention) का सेवन जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में, नशे की समस्या को केवल पुलिस प्रबंधों तक सीमित कर देने से समाधान नहीं होगा। नशे से सामाजिक, शारीरिक व स्वास्थ्य सरोकार भी जुड़े हैं। नशाग्रस्त युवक को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मुहैया करवाई जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल नदारद है। यदि युवा नशा करना ही बंद कर दें, तो कोई भी नशा तस्करों से नशा ही नहीं खरीदेगा। युवाओं को नशे की लत से मुक्ति दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय होना होगा। नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन नशे को रोकने का यही एकमात्र उपाय नहीं है। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाए गए अभियान से लाखों युवक अब तक नशा छोड़ चुके हैं। नशे से छुटकारा पाने के लिए युवाओं की मानसिकता को बदलना जरूरी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 30 Jun 2024 12:37:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Youth : बच्चे देश का भविष्य हैं तो युवा निकट भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे देश का भविष्य हैं तो युवा निकट भविष्यगत दशकों में जिन युवाओं (Youth) द्वारा राजनीति में प्रभावी प्रवेश लिया गया था, वे अब लगभग उम्रदराज होते जा रहे हैं। वर्तमान दौर के अधिकांश स्थापित राजनीतिज्ञ बीते समय में युवा नेता के रूप में राजनीति में वर्चस्व स्थापित किए हुए थे। समय की धारा का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/youth-are-the-near-future/article-58494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/whatsapp-image-2024-06-09-at-10.48.38-am.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बच्चे देश का भविष्य हैं तो युवा निकट भविष्यगत दशकों में जिन युवाओं (Youth) द्वारा राजनीति में प्रभावी प्रवेश लिया गया था, वे अब लगभग उम्रदराज होते जा रहे हैं। वर्तमान दौर के अधिकांश स्थापित राजनीतिज्ञ बीते समय में युवा नेता के रूप में राजनीति में वर्चस्व स्थापित किए हुए थे। समय की धारा का प्रवाह निरंतर गतिमान होता है। इस आधार पर इन दिनों राजनीति में नए स्वरूप में युवाओं की एक नई पौध आकार लेती दिखाई देती है। यही नहीं अपितु इस पौध को व्यापक रूप से जनमत के बहुमत द्वारा स्वीकार भी किया गया है। ऐसी स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि बुजुर्गवार नेता सत्ता और संगठन में अपने वर्चस्व का परित्याग करना नहीं चाहते। इसके चलते बहुत स्वाभाविक है कि विभिन्न राजनीतिक दलो में आंतरिक रूप से वर्चस्व की लड़ाई दिखाई दे। इस संदर्भ में राजनीतिक दलों का निर्णायक कदम, समय की मांग है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भी राजनीति में सत्ता का रसास्वादन कर लेने के उपरांत कोई भी राजनेता इससे वंचित नहीं होना चाहता। यह भी एक मनोविज्ञान है कि राजनीति में एक दूसरे को धकेल कर अपनी जगह बनाने की मनोवृति दिखाई देती है। राजनीति में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं बढ़ती उम्र के साथ-साथ कम नहीं होती, अपितु बढ़ती ही चली जाती है। इन दिनों विशेष रूप से हिंदी भाषी राज्यों में उक्त परिस्थितियां राजनीतिक उलटफेर का कारण बनते हुए नजर आती है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति केवल कांग्रेस में ही है। दरअसल किसी न किसी रूप में हर किसी दल के समक्ष उक्त स्थिति निर्मित होना अवश्यंभावी है। बेहतर हो यदि विभिन्न राजनीतिक दल इन तमाम संदर्भों में अपना अभिमत ऐसा कोई संकट आने के पूर्व ही स्पष्ट रूप से घोषित कर देवें।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक योग्यता का प्रश्न है, पुरानी और नई पीढ़ी के पक्ष विपक्ष में अलग-अलग तर्कसम्मत दृष्टिकोण व्यक्त किए जा सकते हैं। लेकिन कुल मिलाकर किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। दरअसल दोनों ही वर्ग में बेहतरीन तालमेल ही श्रेयस्कर होगा। इस संदर्भ में एक कदम आगे बढ़कर विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय राजनीति की अधिकतम आयु सीमा सुनिश्चित कर देनी चाहिए। यही नहीं अपितु सत्ता में भागीदारी होने पर भी पृथक रूप से एक निश्चित आयु सीमा निर्धारित कर देनी चाहिए। रहा सवाल वनवास का, तो वरिष्ठ नेताओं को दिशा निर्देशक के रूप में स्थापित किया जा सकता है । नए दौर में नई सोच की आज देश प्रदेश को जरूरत है। बीते दौर की राजनीति के पट्टी पहाड़े भी अब अप्रासंगिक सिद्ध हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में समय रहते राजनीतिक दलों को संज्ञान ले लेना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भी इस समय देश प्रदेश में युवा वर्ग की स्थानीय से लेकर शीर्ष स्तर तक राजनीति में सक्रिय भागीदारी नए आयाम स्थापित कर रही है। ऐसे में यदि सत्ता या संगठन का दामन संभाले बुजुर्गवार युवाओं के लिए स्थान रिक्त नहीं करेंगे, तो असंतोष तो पनपेगा ही। इस संदर्भ में यह गौर करने लायक है कि कल के युवा नेता आज वृद्धावस्था को प्राप्त करते जा रहे हैं लेकिन पदलिप्सा से उबरना नहीं चाहते। दरअसल इन्हें अपना मनोविज्ञान बदलने की जरूरत है। बेहतर हो यदि सक्रिय राजनीति में आयुबंधन हो न हो, लेकिन पदासीन होने की स्थिति में आयु बंधन का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। राजनीति में यह प्रयोग काफी हद तक सफल सिद्ध हो सकता है। सक्रिय राजनीति से विदाई का तरीका सम्मानजनक भी तो हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय देश-प्रदेश में युवा वर्ग की प्रधानता है। युवा मतदाता का स्वाभाविक रुझान युवा प्रत्याशी पर ही अधिक रहता है। हालांकि राजनीतिक प्रतिबद्धता भी अपनी जगह महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है। जैसे-जैसे शिक्षा का विस्तार होता जा रहा है, वैसे-वैसे युवा वर्ग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के परिपालन में सक्षम सिद्ध हो रहे हैं। यही नहीं अपितु निरंतर परिवर्तित दौर में राजनीति के तौर-तरीकों में भी व्यापक बदलाव आया है। कहीं-कहीं तो ऐसा प्रतीत होता है कि जहां अनुभव घुटने टेक देता है, वहां नई सोच कैसी भी परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम सिद्ध होती है। निश्चित रूप से तकनीकी दुनिया में युवाओं की बौद्धिक क्षमता में भी आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं। विषयों को समझने की गहरी समझ युवा रखने लगे हैं। बावजूद इस सबके अनुभव के महत्व को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सामंजस्य ही अंतिम समाधान हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर वर्तमान संदर्भों के चलते विभिन्न राजनीतिक दलों को उक्त विषय के बारे में स्पष्ट नीति घोषित कर देनी चाहिए। माना कि यह सब इतना आसान भी नहीं होगा लेकिन वर्तमान नेतृत्व को इस संदर्भ में दृढ़निश्चय करना जरूरी है। अन्यथा जो कुछ घटनाक्रम आज कांग्रेस में चलता दिखाई दे रहा है ,उसकी अन्य दलों में पुनरावृति होने की संभावना से एकदम इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में बेहतर यही रहेगा कि दोनों ही वर्ग को परस्पर एक दूसरे के पूरक के रूप में सक्रिय रखा जाए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Sun, 09 Jun 2024 11:12:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Youth Unemployment : आखिर कब दूर होगी युवाओं की उदासीनता </title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव और युवा : आत्महत्या करने वालों में आर्थिक रूप से वंचित 75 प्रतिशत युवा हैं शामिल || Youth Unemployment Youth Unemployment: भारत के विदेश मंत्री ने हाल ही में एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र में लिखा कि यह अमृतकाल अर्थात एक सशक्त और समावेशी अर्थव्यवस्था का पहला आम चुनाव है और हमारे युवाओं को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/youth-unemployment-in-india/article-57480"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/employment-crisis-in-punjab-unemployment-rate-7.4.gif" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<h3 style="text-align:center;"><strong>चुनाव और युवा : आत्महत्या करने वालों में आर्थिक रूप से वंचित 75 प्रतिशत युवा हैं शामिल || Youth Unemployment</strong></h3>
<p>Youth Unemployment: भारत के विदेश मंत्री ने हाल ही में एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र में लिखा कि यह अमृतकाल अर्थात एक सशक्त और समावेशी अर्थव्यवस्था का पहला आम चुनाव है और हमारे युवाओं को इसके महत्व को समझना चाहिए। इसका तात्पर्य क्या है, यह वर्तमान सरकार को समझना होगा किंतु युवाओं के लिए यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि शिक्षित या अशिक्षित वर्गों द्वारा इसके प्रभाव को पूर्णत: नहीं समझा गया। सरकार मानव संसाधनों को पोषित कर रही है और जीवन की जरूरतों की आसानी तथा उद्यमिता को बढावा दे रही है किंतु क्या यह पीढ़ी मानती है कि शब्दों और कार्यों में समानता नहीं है।</p>
<p>सामाजिक विश्लेषकों और युवा नेताओं के विचारों में यह चिंता स्पष्टत: दिखायी देती है कि दुर्भाग्य से सरकार समस्या के आयामों से अवगत नहीं है। हालांकि युवा जनसंख्या का सर्वाधिक गतिशील वर्ग माना जाता है। भारत में विश्व की सर्वाधिक युवा जनसंख्या है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के जनसंख्या आकलन के संबंध में प्रतिनिधि समूह की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 25 से 29 आयु वर्ग के युवाओं की संख्या 2021 में कुल जनसंख्या का 27.2 प्रतिशत था 2036 तक इनकी संख्या कम होकर 22.7 प्रतिशत रह जाएगी किंतु संख्या की दृष्टि से यह अभी काफी अधिक 34.5 करोड है। किंतु यह दु:खद तथ्य है कि आम युवा चुनावी प्रक्रिया में रूचि नहीं लेता है और यह उसे अपनी आवाज को सुनाने के साधन के रूप में नहीं मानता।</p>
<p>सकल घरेलू उत्पाद की उच्च वृद्धि दर के माध्यम से इस बात को न्यायसंगत ठहराने का प्रयास किया जाता है किंतु ग्रामीण युवा कृषि को अलाभप्रद मान रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे रोजगार (Youth Unemployment) उपलब्ध नहीं है। जेन नेक्सट में हताशा और निराशा है हालांकि इन विषयों पर इन चुनावों में चर्चा हो रही है किंतु इससे युवाओं में आशा नहीं जगी है कि नई सरकार उनके मुद्दों का निराकरण करेगी और इसका कारण भारत में बेरोजगारी के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की हालिया रिपोर्ट है जिसमें पाया गया है कि भारत में कुल बेरोजगारों में 83 प्रतिशत युवा हैं। इन बेरोजगार लोगों में युवाओं की संख्या 66 प्रतिशत है।</p>
<p>वस्तुत: विश्व में भारत में सर्वाधिक बेरोजगारी दर है। यहां पर हेडलाइन दर 23 प्रतिशत है। जिसके चलते भारत यमन, ईरान, लेबनान, सीरिया और ऐसे अन्य देशों की श्रेणी में आ गया है किंतु ये देश एक तेजी से बढ रही अर्थव्यवस्था या पांचवीं सबसे बडी का दावा नहीं करते हैं। हमारे छोटे पड़ोसी बंगलादेश में यह मात्र 12 प्रतिशत है। 20 से 24 वर्ष के आयु वर्ग मे बेरोजगारी दर 44 प्रतिशत है। इसलिए इस बात पर हैरानी नहीं होती है कि जिन लोगों का भविष्य दांव पर लगा है उनकी मतदान में कोई रूचि नहीं है।</p>
<p>वर्ष 2024 के चुनावों में लगभग 38 युवा मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कम संख्या में लोग मतदाता के रूप में पंजीकृत हो रहे हैं। एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया के बारे में युवाओं में संशय है। उनमें उदासीनता का कारण यह है कि अधिकतर राजनीतिक दलों में पर्याप्त युवा नेता नहीं है। राजनीतिक नेतृत्व उभरती सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के बारे में चिंता प्रदर्शित नहीं करते हैं। बिहार में युवा मतदाताओं की कम संख्या के बारे में एक्शन फोर अकाउंटेबल गवर्नेस के राजीव कुमार का कहना है कि हालांकि बिहार में राजनीतिक जागरूकता है किंतु युवाओं में राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिबद्धता के बारे में हताशा और निराशा है। इसलिए राजनीतिक दलों की गारंटी या वायदे से युवा पीढी प्रभावित नहीं हो रही है क्योंकि वे वास्तविक इरादों पर आधारित नहीं है।</p>
<p>सरकार द्वारा भ्रष्टाचार का मुकाबला करने की बातें की जाती हैं और इससे युवा पीढी इस सबंध में ठोस कार्यवाही के बजाय इसे एक नारे के रूप में देखती है। प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया है कि पिछले एक दशक में विभिन्न विकास नीतियों कार्यान्वयन पर 30 लाख करोड रूपए खर्च किए गए और लाभार्थियों को सीधे उनके खातों में पैसे दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के शासन से अलग है जिसने कभी दावा किया था कि यदि दिल्ली से एक रूपया भेजा जाता है तो गंतव्य तक केवल 1 पैसा पहुंचता है। आप कल्पना कीजिए कि यदि उनके नियंत्रण में 30 लाख करोड रूपए होंगे तो इसके क्या परिणाम होंगे। जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार यथावत है। क्या युवा इससे खुश होंगे? इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि कारपोरेट जगत आटोमेशन की दिशा में बढ रहा है जिसके कारण रोजगार के अवसरों में और कटौती होगी।</p>
<p>राजनीतिक दलों को इस बारे में विचार करना चाहिए कि देश के प्रतिभाशाली युवा अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग क्यों नहीं कर रहे हैं। इसका एकमात्र उपाय यह है कि ऐसी रणनीति या योजना बनाए जो उन्हें प्रेरित करे और युवा पीढी लाभप्रद कार्यो में संलिप्त हो जिससे सामंजस्यपूर्ण सामाजिक आर्थिक विकास होगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि रिक्त पडे सरकारी पदों को भरने के अलावा निजी सेक्टर में भी पर्याप्त पदों में भर्ती करे और अपनी श्रम शक्ति से अत्यधिक कार्य न करवाए।</p>
<p>जैसा कि कुछ अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया है कि देश में बेरोजगारी (Youth Unemployment) भत्ता शुरू किया जाना चाहिए। जब बड़ी परियोजनाएं जिनके लाभार्थी युवा होते हैं, वे चलाई जा रही हैं तो फिर गरीब या आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भत्ते के कार्यान्वयन में कोई समस्या नहीं हो सकती है और इसके लिए यदि आवश्यक हुआ तो अत्यधिक धनी वर्ग पर 1 प्रतिशत कर लगाया जाना चाहिए। किसी राष्ट्र की प्रगति उसकी युवा पीढ़ी पर निर्भर करती है। अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है कि वह युवा पीढ़ी की आवश्यकताओं की ओर ध्यान दे क्योंकि यही वह वर्ग है जो देश के भावी विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-धुर्जति मुखर्जी (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 10:37:05 +0530</pubDate>
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                <title>युवाओं पर रहम करें राजनेता एवं कलाकार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रसिद्ध गायक शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने न केवल पंजाब के लोगों बल्कि देश-विदेश में बैठे भारतीयों को भी झकझोर दिया है। सिद्धू के संस्कार के वक्त गमगीन लोगों और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, जो हर किसी का कलेजा चीर रहा था। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर हर कोई पिघल रहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/politicians-and-artists-have-mercy-on-the-youth/article-34059"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/sidhu-moose-wala-funeral.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रसिद्ध गायक शुभदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने न केवल पंजाब के लोगों बल्कि देश-विदेश में बैठे भारतीयों को भी झकझोर दिया है। सिद्धू के संस्कार के वक्त गमगीन लोगों और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, जो हर किसी का कलेजा चीर रहा था। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर हर कोई पिघल रहा था और गमगीन चेहरे बिना बोले ही बहुत कुछ कह रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मिनटों में किसी की हत्या करने वाले गैंगस्टर कैसे पैदा हो जाते हैं? इसका उत्तर मिल सकता है पिछले दिनों की राजनीति को देखें। कई दशकों से बुद्धिजीवी और समाजशास्त्री यही दुहाई दे रहे थे कि राजनेता विकास की बात नहीं कर रहे और युवाओं को बुरी तरह दरकिनार कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों ने युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए कुछ करना तो दूर वो अपने-अपने यूथ विंग बनाकर राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यूथ विंग तरक्की की बात करने की बजाय चुनावों में हिंसा करती है, जिनका मुख्य उद्देश्य पोलिंग बूथों पर जाकर दहशत फैलाना रहता है। यूं भी यूथ विंग के अध्यक्ष अमीर घरों के बनते रहे हैं, आम युवाओं का पार्टी के यूथ विंग के साथ संबंध कम ही रहा है। रही-सही कसर राजनीतिक पार्टियों ने भटके युवाओं को चुनावों के लिए हिंसा में इस्तेमाल कर निकाल दी। भटकते युवा गैंगस्टरों के नाम पर प्रसिद्ध होने लगे। जिन हाथों में पुस्तकें होनी चाहिए थीं, उन हाथों में हथियार पकड़ा दिए गए। जेलें बुरी तरह से बदनाम हो चुकी हैं। सरकारों ने युवाओं की खुशहाली के लिए कुछ करने की बजाय केवल ब्यानबाजी के पैंतरे ही चले। समाज में दूरियां बढ़तीं गई। पैसे की लूटपाट, फिरौतियां और धमकियां देना समाज का आम व्यवहार बनतीं गई। गैंगस्टरों के ग्रुप बढ़ते गए। किसी नेता या पार्टी ने गैंगस्टरोें को हिंसा त्यागने के लिए न तो प्रेरित किया और न ही कोई नीति बनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ इतिहास यह है कि जब सरकारों ने चाहा था तब फूलण देवी, मोहर सिंह जैसे डाकू हथियार डालकर आमजन के हितों की बात करने लगे, उन्होंने चुनाव भी लड़े और समाज सुधार के कार्यों में जुट गए। नि:संदेह सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए लेकिन हिंसा की समस्या की जड़ को भी काटना होगा। समाज में ऐसा आर्थिक और राजनीतिक ढांचा स्थापित करना होगा कि युवा हिंसा की तरफ न जाएं। रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ भटक रहे युवाओं को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए सामाजिक रूप से भी प्रयास करने होंगे, क्योंकि यह मामला राजनीतिक ही नहीं बल्कि इसके सामाजिक पहलू भी हैं। सरकारों और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर हिंसा के रास्ते पर चलने वाले युवाओं को समझाना होगा। राजनेता हर बार चुनाव जीतने की आदत छोड़ लोगों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जेलों को सुधारने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेलों को नशे और अपराधों का अड्डा बनने से रोकना होगा। पूर्व जेल मंत्री पंजाब सुखजिंदर सिंह रंधावा पांच साल तक दावा करते रहे कि जेलों में बहुत सुधार कर दिया गया है अफसोस उनके होते हुए भी जेलों में मोबाइल फोन और नशा मिलता रहा। इसके अलावा लड़ाई-झगड़े और हत्याएं तक होती रहीं। फिर भी पूर्व मंत्री का यही बयान आता है कि जेलों में सुधार किया है। सुधार महज कागजों तक सीमित न हों बल्कि वास्तविक रूप में भी नजर आए। जेलें सुधार गृह बनें न कि गैंगस्टरों के अड्डे। साथ ही सिद्धू की हत्या से नौजवान गायकों को अब हिंसक गीतों, गन कल्चर की तुकबंदी बंद कर देनी चाहिए। संस्कृति में प्यार, खुशहाली, मौसम-बहारें, बचपन, जवानी, आपसी रिश्ते बहुत कुछ है। गाने के लिए अब उन्हें गाया जाए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 09:30:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>युवाओं के पुरूषार्थ से ही बनेगा भविष्य का समाज : नायडू</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की दी शुभकामनाएं नई दिल्ली (एजेंसी)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ने और समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है। नायडू ने वीरवार को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यहां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/future-society-will-be-formed-by-the-efforts-of-youth-naidu/article-25982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/naidu.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की दी शुभकामनाएं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ने और समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है। नायडू ने वीरवार को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यहां कहा कि भविष्य का समाज युवाओं के पुरूषार्थ से ही बनेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं! नया समाज, भविष्य के लिए आपके नई दृष्टि और आपके असीम पुरुषार्थ से ही बनेगा। जातिवाद, लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक रुढ़ियों को तोड़ें, समाज से भ्रष्टाचार, अशिक्षा, गरीबी को दूर करने के लिए आगे आएं।’ उन्होंने कहा, ‘खेल और अध्ययन दोनों क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करें, स्वस्थ रहें, जीवन में योग अपनाएं, ‘सेवा और सद्भाव’ भारत के उदार सनातन जीवन दर्शन को अपनाएं, जीवन के हर क्षेत्र में भारतीयता को अपनाएं, राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करें, पर्यावरण की प्रदूषण से रक्षा करें।’</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Aug 2021 11:36:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधुनिक सुविधाओं में उलझा आज का युवा</title>
                                    <description><![CDATA[लेट नाइट तक जागना आज का युवा रात्रि में अगर फ्री है तो अपने आई पैड, मोबाइल, लैपटॉप पर बिजी रहता है। घंटों चेटिंग में व्यस्त रहने के कारण या इंटरनेट पर सर्च करने में उन्हें समय का पता नहीं लगता। लेट सोकर प्रात: भी देर से उठने की आदत बन जाती है जिससे उठते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/today-youth-entangled-in-modern-facilities/article-14425"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/modern-facilities.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">लेट नाइट तक जागना</h3>
<p style="text-align:justify;">आज का युवा रात्रि में अगर फ्री है तो अपने आई पैड, मोबाइल, लैपटॉप पर बिजी रहता है। घंटों चेटिंग में व्यस्त रहने के कारण या इंटरनेट पर सर्च करने में उन्हें समय का पता नहीं लगता। लेट सोकर प्रात: भी देर से उठने की आदत बन जाती है जिससे उठते ही उनके शरीर में दर्द महसूस होता है, सिर भारी रहता है और देर से उठने के कारण काम पूरा नहीं हो सकता जिसका तनाव भी उनपर बना रहता है। अगर नींद पूरी न हो तो दिन भर दिमाग अशांत रहता है, इसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हद से ज्यादा बोलना नुकसानदायक, कम बोले, अच्छा बोलें</h3>
<p style="text-align:justify;">जितना हम इंटरनेट से पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं, हम सबको शौक होता है कि अपना ज्ञान दूसरों के साथ शेयर करें। इस आदत के पड़ने से हमें ज्यादा बोलने की आदत पड़ जाती है जो दिमाग को बिना कोई ठोस कार्य किए थका देती है। लड़कियों में वैसे ही अधिक गप्पें मारने की आदत होती है। इसी प्रकार सेल्समेन या मार्केटिंग वाले युवाओं को भी बहुत बोलने की आदत पड़ जाती है जो बिना वजह भी बोलना पसंद करते हैं चाहे सामने वाला बोर क्यों न हो रहा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादा बोलने से आप कभी कभी ऐसा कुछ भी बोल जाते हैं जो दूसरों को हर्ट कर सकता है जिससे रिश्तों में दरार आ जाती है। कई बार एक दूसरे की बात दूसरे के सामने रख देते हैं जो ठीक नहीं होता और कभी-कभी अपने सीके्रट भी खुल जाते हैं। इससे एनर्जी व्यर्थ जाती है। अपनी ऊर्जा को बचा कर रखने के लिए कम बोलना हर हाल में आपके लिए लाभप्रद होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तेज म्यूजिक सुनना युवाओं का बना शौक</h3>
<p style="text-align:justify;">आज के युवा कानों में ईयर प्लग लगाकर तेज आवाज में म्यूजिक सुनना अपनी शान समझते हैं। उन्हें लगता है वे रिलैक्स महसूस कर रहे हैं जबकि लगातार तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, वो भी ईयर प्लग के साथ उनके कान और दिल दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। आज का म्यूजिक बहुत अजीबो गरीब आवाजों वाला होता है जो नुकसान अधिक पहुंचाता है, रिलेक्सेशन कम। लगातार उत्तेजित करने वाला म्यूजिक दिमाग में संतुलन की समस्या ला सकता हे। अगर आप म्यूजिक के शौकीन हैं तो धीमी आवाज में दिमाग को रिलैक्स करने वाला साफ्ट म्यूजिक सुनें जो आपके दिमाग को शांत बनाएगा। शांत दिमाग ही सही काम करने लायक होता है। इससे आपके कान और दिल दोनों को राहत महसूस होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फास्ट फूड का अधिक सेवन</h3>
<p style="text-align:justify;">आज के युवा ने खाने पीने की आदतों को एकदम बदल दिया है। दूसरे देशों के फास्ट फूड को अपने खान-पान का अहम हिस्सा बना लिया है और अपने भारतीय व्यंजन उन्हें रास नहीं आते। आज के युवा वर्ग के नौकरी के घंटे भी भिन्न हैं। रात्रि में भी आफिस खुला रहता है। लेट ईवनिंग तक तो सभी प्राइवेट आफिस खुले रहते हैं। ऐसे में भूख मिटाने के लिए जंकफूड का सहारा लेना उनके लिए मजबूरी भी बन जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">फास्ट फूड आउटलेट और काफी शाप्स और पिज्जा बर्गर की होम डिलिवरी के कारण युवाओं का जब मन करता है तो फोन पर आर्डर कर मंगवा लेते हैं और पेट की भूख को शांत करते हैं। जंक फूड में बैड फैट्स और कार्बोहाइडेÑटस की मात्र अधिक होने से मोटापा बढ़ता है, दिमाग की सक्रि यता कम होती है, असमय खाना खाने की आदत बनती है जो पेट और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>आज की युवा पीढ़ी आधुनिक सुविधाओं से इतनी लैस हो चुकी है कि उनकी दिनचर्या उसी के चारों तरफ उलझ कर रह गई हैैं। जिसका परिणाम है उनकी सेहत और संस्कारों का सत्यानाश। वैसे युवा पीढ़ी काफी स्मार्ट ओर तेज बुद्धि वाली है। बहुत से युवा तो इन सुविधाओं का प्रयोग अपनी सहूलियत और जरूरत के लिए करते हैं लेकिन कुछ उनकी अति करके अपना नुकसान कर लेते हैं। इसी विषय को लेकर आज समाज में ज्ञान का दीपक जलाने वाली शिक्षका सुनीता इन्सां ने अपने विचार सच कहूँ के माध्यम से रखे। जिसका युवा पीढ़ी अनुसरण करे तो वह अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं। जो उनके भविष्य के लिये काफी सार्थक सिद्ध हो सकते हैं। </strong><br />
<strong>                                                                                                            सुनीता इन्सा, शिक्षका</strong></h6>
<p> </p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/education-employement/today-youth-entangled-in-modern-facilities/article-14425</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2020 13:07:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में नियंत्रित रहा वित्तीय घाटा : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार वित्तीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम का सम्मान करती है इसलिए उनकी सरकार को यह सफलता हासिल हुई है। बेरोजगारी को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए हर सुलभ कदम उठाए हैं और विभिन्न योजनाओं के तहत युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/employment-opportunities-were-created-for-the-youth-under-various-schemes/article-12981"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirmala-sitharaman-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">विभिन्न योजनाओं के तहत युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Nirmala Sitharaman)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में देश का वित्तीय घाटा नियंत्रण में है और प्राथमिक घाटा एक प्रतिशत से नीचे बना हुआ है जबकि कांग्रेस सरकार इसे नियंत्रित करने में असफल रही। श्रीमती सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2020-21 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को 2014-15 से अब तक वित्तीय घाटे में कमी लाने का प्रयास किया और सफलता हासिल की है जबकि ‘सक्षम डाक्टर’ के नेतृत्ववाली कांग्रेस सरकार इस पर नियंत्रण नहीं पा सकी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> प्राथमिक घाटे के स्तर पर भी मोदी सरकार ने कीर्तिमान हासिल किया</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि 2014-15 में वित्तीय घाटा 4.1 प्रतिशत, 2015-16 तथा 2016-17 में 3.5 प्रतिशत, 2017-18 में 3.4 प्रतिशत, 2019-20 में 3.3 प्रतिशत और अब 2020-21 में 3.5 प्रतिशत रहने की संभावना है लेकिन 2009-10 में यह 6.4 प्रतिशत , 2010-11 में 6.6 प्रतिशत, 2012-13 में 5.9 प्रतिशत तथा 2013-14 में 5.8 प्रतिशत रहा। वित्त मंत्री ने कहा कि इसी तरह से प्राथमिक घाटे के स्तर पर भी मोदी सरकार ने कीर्तिमान हासिल किया और पांच साल में इसे एक प्रतिशत से नीचे रखने में सक्षम रही जबकि पहले यह इस तरह से नियंत्रण में नहीं था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उनकी सरकार वित्तीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम का सम्मान करती है</li>
<li style="text-align:justify;">इसलिए उनकी सरकार को यह सफलता हासिल हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">बेरोजगारी को लेकर  कहा कि सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए हर सुलभ कदम उठाए हैं</li>
<li style="text-align:justify;">विभिन्न योजनाओं के तहत युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था में दिखने लगे हैं सुधार के संकेत</h3>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने निजी तथा सरकारी निवेश, उपभोग और निर्यात बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं जिसके कारण अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट पर लोकसभा में करीब 12 घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विदेशी निवेश बढ़ा है,  विनिर्माण क्षेत्र ने गति पकड़ी है, दो महीने गिरने के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार वृ़द्धि हुई है  और शेयर बाजार का ग्राफ ऊपर की तरफ जा रहा है।  सभी संकेतक अर्थव्यवस्था में सुधार की ओर इशारा कर रहे हैं।</p>
<p> </p>
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</div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/employment-opportunities-were-created-for-the-youth-under-various-schemes/article-12981</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2020 17:19:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी चुप्पी ले रही बेरोजगार युवाओं की जान!</title>
                                    <description><![CDATA[जो समय के अनुरूप होता नजर आता नहीं। पूर्ण बहुमत की सरकार के अपवाद भी हैं। कुछ राज्य ऐसे भी हैं। जहां पर पूरा एक दशक से अधिक समय बीत गए एक ही सरकार के सत्ता में रहने के।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/unemployed-youth/article-12515"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/unemployed-youth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज का युवा सड़कों पर उतर आया है। तो उसके पीछे ठोस कारण है। हालिया नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े यह दर्शाते हैं, कि देश के युवाओं का दुर्दिन चल रहा है। तभी तो बेरोजगार युवा अवसाद में आकर मौत को गले लगा रहा। लेकिन दुर्भाग्य देखिए लोकतांत्रिक परिपाटी का। सबसे बड़े संवैधानिक देश में युवा एक अदद नौकरी न मिलने के कारण अवसादग्रस्त हो रहे और सियासी व्यवस्था उन्हें सियासत की कठपुतली बना सर्कस में नचा रही है। इतना ही नहीं हमारे देश की युवा जमात भी सियासतदानों के बनाए मौत के कुएं में चक्कर भी तो काट रही। अगर ऐसा न होता तो वह एनआरसी और सीएए के पक्ष या विपक्ष में ही नारे बुलंद न कर रहा होता। अब तो लगता कुछ यूं है, युवाओं को भी अपने मुद्दों का भान नहीं रहा। तभी तो वे राजनीति के भंवर में कठपुतली बन नाच रहे और सियासी दल उनका लाभ उठा रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">आज युवाओं की सबसे बड़ी जरूरत क्या है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। ताकि उन्हें मौत को गले न लगाना पड़े, लेकिन लगता ऐसा कि हमारे देश के युवा भी गुमराह हो गए हैं। तभी तो वे कश्मीर की आजादी, एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों की सिर्फ बात कर रहे हैं। आज का युवा हर मायने में राजनीतिक दल का काम करने लगा है और राजनीतिक दल उनके कंधे पर सवार होकर चैन की बंशी बजा रहे। जो कतई उचित नहीं। अरे भई! युवाओं की पहली प्राथमिकता शिक्षा और नौकरी है। फिर आप उस मुद्दे को लेकर आंदोलित न होकर राजनीतिक दलों का काम आसान कर रहे। लोकतंत्र गवाह है, कोई भी दल हो वह सिर्फ युवाओं की बात करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में औसतन प्रतिदिन 36 बेरोजगार युवाओं ने खुदकुशी की। जो किसान आत्महत्या से भी ज्यादा है। यह उस दौर में हुआ। जब देश के प्रधानसेवक भारत को न्यू इंडिया बनाने का दिवास्वप्न दिखा रहे थे। विश्वगुरु बनने की दिशा में बातों ही बातों में गोता लगाया जा रहा था। देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन बनाने का संकल्प रोजाना दोहराया जा रहा था। छप्पन इंच की छाती पर गुमां यह कहकर किया जा रहा था, कि भारत एक महाशक्ति बनने जा रहा। ऐसे में जब इक्कीसवीं सदी के भारत में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसे ढेरों सरकारी कार्यक्रम चल रहे। उस दौर में अगर मुंबई की 40 वर्षीय डिंपल वाडीलाल ने बेरोजगारी से तंग आकर 3 जनवरी को इमारत से कूदकर जान दे दी। फिर सरकारी नीतियों और उनकी नीयत पर सवालिया निशान खड़े होना वाजिब भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे यहां एक बात स्पष्ट हो बेरोजगारी से तंग आकर जान देने में सिर्फ डिंपल वाडीलाल का नाम ही नहीं शामिल। एनसीआरबी के आँकड़े के मुताबिक वर्ष 2018 में ऐसे मौत को गले लगाने वाले बेरोजगार हताश युवाओं की संख्या 12,936 रही। यानी औसतन हर 2 घंटों में 3 लोगों की जान बेरोजगारी ने ली। ऐसे में यह कहीं न कहीं संविधान के अनुच्छेद- 21 में मिले जीवन जीने की स्वतंत्रता का हनन करना है और इसके लिए दोषी कोई एक दल या सरकार नहीं पूरा का पूरा राजनीतिक परिवेश है। ऐसा इस कारण से, क्योंकि बेरोजगारी देश में कोई एक दिन में नहीं बढ़ी। मौलिक अधिकारों की बात संविधान में बड़े जोर शोर से की गई है। हम भारत के लोग से हमारे देश के संविधान की प्रस्तावना शुरू होती। फिर भी आजादी के इतने वर्षों बाद देश का युवा वर्ग हाशिए पर क्यों? क्यों आजादी के सात दशकों बाद भी गरीबी और बेरोजगारी की अवस्था जस की तस बनी हुई है? इसका जवाब कौन तलाशेगा? ऐसा तो है नहीं, कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने किसी दल की सरकार न देखी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर बात चाहे भगवाधारी पार्टी भाजपा की हो। या हाथ के पंजे वाली कांग्रेस की। शासन तो सभी ने बारी- बारी से किया। फिर क्यों आज युवा रोजगार के लिए मौत को गले लगा रहा? इसका उत्तर इन दलों को ढूंढना होगा और देश की अवाम के सामने रखना होगा। अब बात सिर्फ युवाओं का जिक्र करके पीठ थपथपाने से नहीं बनने वाली। आज जब हम आर्थिक स्तर पर रसातल में जा रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर सवाल यही हमारी व्यवस्था कुछ समय पहले तक अर्थव्यवस्था को लेकर हवाई किला बना रही थी। फिर आज वह धड़ाम क्यों हो रहा है? इसके साथ-साथ सवाल यह भी कि कहीं हमारे देश मे संसाधनों की कमी तो नहीं? या फिर हमारे नीति-नियंताओं की नियत में ही खोट है? प्रथम दृष्टया देखें तो पता यही चलेगा, खोट तो सियासत के शूरवीरों की नियत में ही है वरना संसाधनों की कमी तो है नहीं देश में। बस कमी मालूम पड़ती है तो व्यापक सोच और सुनियोजित तरीके से उसके उपयोग की। वरना कम संसाधनों में इज्ररायल, जापान, चीन और जर्मनी जैसे देश कहाँ से कहाँ आज पहुँच गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रोजगार-विहीन विकास रिपोर्ट 2018 में कहा गया है कि भारत में हर साल 81 लाख नए रोजगार सृजित करने की नितांत आवश्यकता है और इतने रोजगार तभी पैदा होंगे। जब देश की विकास दर को 18 फीसद तक बढ़ाया जाए। ऐसे में अगर हाल- फिलहाल में देश की विकास दर 5 फीसदी से भी कम पर आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे 18 फीसद तक पहुंचने में लम्बा वक्त लगेगा। वह भी तब जब देश में एक दल की पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो। जो आर्थिक क्षेत्र में बगैर किसी दबाव के कड़े फैसले ले और उन्हें ईमानदारी से लागू कर सके। जो समय के अनुरूप होता नजर आता नहीं। पूर्ण बहुमत की सरकार के अपवाद भी हैं। कुछ राज्य ऐसे भी हैं। जहां पर पूरा एक दशक से अधिक समय बीत गए एक ही सरकार के सत्ता में रहने के। फिर भी न विकास दर काफी बढ़ी और न बेरोजगारी कम हुई। अलबत्ता बेरोजगारी का आलम भले बढ़ गया। कृषि प्रधान देश तो हम हैं, लेकिन कृषि की अहमियत को हम और हमारी व्यवस्था आजतक नहीं समझ पाई है। ऐसे में जिस दिन हम कृषि क्षेत्र में नवाचार को अपना लेंगे और देश मे खाली पड़ी जमीनों पर युवाओं को उन्नत खेती करने लायक माहौल दे पाएं। साथ ही साथ जनसंख्या नियंत्रण का कानून लागू हो जाएगा। बेरोजगारी जैसी समस्या स्वत: छूमंतर होने लगेंगी।<br />
<em><strong>-महेश तिवारी</strong></em></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/unemployed-youth/article-12515</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 20:05:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Arrested: 5.30 करोड़ की हेरोइन सहित युवक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[तलाशी लिए जाने पर एक किलो 35 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जिसके बाद चालक को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार पकड़ी गई हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग पांच करोड़ 30 लाख रुपये आंकी गई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/youth-with-heroin-worth-5-30-crore-arrested/article-12443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/arrested-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">आरोपी को तीन दिन की हिरासत में भेजा (Arrested)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जींद (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिले के झांझ कलां गांव के निकट एक किलो 35 ग्राम हेरोइन के साथ (Arrested)  पकड़े गए एक आरोपी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश अदालत ने दिया है। पुलिस ने बताया कि बलविंद्र को सदर थाना पुलिस ने रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। जहां से उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार विशेष कार्य बल (एसटीएफ), रोहतक को सूचना मिली थी कि एक अर्टिगा गाड़ी में हेरोइन दिल्ली से नरवाना ले जाई जा रही है। पुलिस ने झांझ कलां के निकट गाड़ी को रुकवा लिया। तलाशी लिए जाने पर एक किलो 35 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जिसके बाद चालक को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार पकड़ी गई हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग पांच करोड़ 30 लाख रुपये आंकी गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jan 2020 20:22:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएए को लेकर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं विपक्षी दल : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[युवाओं को समझाना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन कानून किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं है बल्कि नागरिकता देने के लिए है। यह कानून नगारिकता कानून में केवल एक बदलाव है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/opposition-parties-are-misleading-youth-about-caa-modi/article-12427"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/modi-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> यह कानून नगारिकता कानून में केवल एक बदलाव (Modi)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेलूर (एजेंसी)।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को  (Modi) लेकर युवाओं को ‘गुमराह’ करने का विपक्षी दलों पर रविवार को आरोप लगाया। मोदी ने पश्चिम बंगाल के बेलूर में रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में अपने संबोधन के दौरान कहा,‘कई सारे युवाओं के पास अभी भी सीएए के बारे में गलत जानकारी है। राजनीतिक गेम खेल रहे लोगों ने सीएए को समझने से जानबूझकर इनकार कर दिया है। युवाओं को समझाना हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नागरिकता संशोधन कानून किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं है बल्कि नागरिकता देने के लिए है। यह कानून नगारिकता कानून में केवल एक बदलाव है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि सीएए नागरिकता लेने के लिए नहीं बल्कि देने के लिए है।</li>
<li style="text-align:justify;">स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम रातोंरात यह कानून लेकर नहीं आ गये हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">‘सीएए के कारण अब लोग पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले उत्पीड़न से अवगत हैं।</li>
</ul>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/opposition-parties-are-misleading-youth-about-caa-modi/article-12427</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jan 2020 15:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सशक्तिकरण में युवाओं की भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[उसे स्व्यं से प्रश्न करना होगा कि भारतीय खेती और खेतिहर की आज दुर्दशा क्यों है ? उसे मंथन करना होगा कि यदि खेती सचमुच घाटे का सौदा है, तो फिर कई कंपनियां खेती के काम में क्यों उतर रही हैं ? कमी हमारी खेती में है या विपणन व्यवस्था में ? ऊंची पसंद वाले देसी, जैविक और हर्बल को अन्य से उत्तम समझ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/empowerment-in-the-role-of-youth/article-12415"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/role-of-youth.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सशक्तिकरण का असल मायने</h1>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-भारत के गांव असल में भौतिक से ज्यादा, एक सांस्कृतिक इकाई ही हैं। इस दृष्टि से भी भारतीय गांव पूर्व की तुलना में अशक्त हुए हैं। इन्हे सशक्तिकरण की सख्त आवश्यकता है। सशक्तिकरण का मूल सिद्धांतानुसार, किसी भी संज्ञा या सर्वनाम के मूल गुणों को उभारकर शक्ति प्रदान करना ही उसका असल सशक्तिरण है। गांवों को शहर में तब्दील कर देना अथवा उसे शहरी सुविधाओं से भर देना, गांवों का असल सशक्तिकरण नहीं है। यदि गांवों का असल सशक्तिकरण और उसमें युवाओं की असल भूमिका को चिन्हित करना हो, तो ह में सबसे पहले भारतीय गांव नामक इकाई के मौलिक गुणों को चिन्हित करना होगा।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में सड़क, दुकान, बिजली, प्राथमिक स्कूल, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र और थानायुक्त गांवों की संख्या बढ़ रही है। गांवों में पक्के मकानों की संख्या बढ़ी है। मकानों में मशीनी सुविधाओं की संख्या बढ़ी है, शौचालय बढ़े हैं। मोबाइल फोन, मोटरसाइकिल और ट्रेक्टर बढ़े हैं। ऊंची डिग्री व नौकरी करने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय और क्रय शक्ति में भी बढ़ोत्तरी हुई है। मजदूरी और दहेज की राशि बढ़ी है। ग्राम पंचायतों व ग्राम आधारित योजनाओं में शासन की ओर से धन का आवंटन बढ़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या बढ़ोत्तरी के उक्त ग्राफ को सामने रखकर हम कह सकते हैं कि भारत के गांव सशक्त हुए हैं? यदि हम भारतीय गांवों को सिर्फ एक भौतिक इकाई मानें, तो कह सकते हैं कि हां, पूर्व की तुलना में भारतीय गांव आज ज्यादा सशक्त हैं। भौतिक इकाई के तौर पर भी यदि हम भारतीय गांवों की मिट्टी, पानी, हवा, प्रकाश, वनस्पति, मवेशी और इंसानी शरीर की गुणवत्ता को आधार माने, तो कहना होगा कि पूर्व की तुलना में भारतीय गांव अशक्त हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? क्योंकि अधिक अस्पताल, अधिक स्कूल, अधिक दुकानें, अधिक पैसा और अधिक थाने क्रमश: ज्यादा अच्छी सेहत, अधिक ज्ञान, अधिक स्वावलंबन, अधिक समृद्धि और कम अपराध की निशानी नहीं है। वर्ष 1947 की तुलना में आज कृषि उत्पादन नि:संदेह बढ़ा है, किन्तु वहीं तब के अनुपात में आज भारत में उतरते पानी वाले गांव, बीमार पानी वाले गांव, बंजर होते गांव, रोगियों की बढ़ती संख्या वाले गांव तथा ग्रामीण बेरोजगारों की संख्या कई गुना बढ़ी है। गांव की रसोई में कांस्य, पीतल और तांबे वाले अधिक मंहगे बर्तनों तथा जौ, चना, मक्का जैसे मंहगे अनाज, शुद्ध पुष्ट दूध तथा देसी घी की जगह आज क्रमश: सस्ते स्टील, सस्ते गेहूं, पानी मिले दूध तथा वनस्पति घी ने ले ली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारतीय गांव के मौलिक गुण:</h3>
<p style="text-align:justify;">यह जगजािहर फर्क है कि नगर का निर्माण सुविधाओं के लिए होता है और प्रत्येक गांव तब बसता है, जब आपसी रिश्ते वाले कुछ परिवार एक साथ रहना चाहते हैं। ये रिश्ते खून के भी हो सकते हैं और परंपरागत जजमानी अथवा सामुदायिक काम-काज के भी। लेन-देन में साझे का सातत्य और ईमानदारी किसी भी रिश्ते के बने रहने की बुनियादी शर्तें होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दृष्टि से एक गांव में रहने वाले सभी निवासियों के बीच रिश्ते की मौजूदगी पहला और एक ऐसा जरूरी मौलिक गुण है, जिसकी अनुपस्थिति वाली किसी भी भारतीय बसावट को गांव कहना अनुचित मानना चाहिए। साधन का सामुदायिक स्वावलंबन, आचार-विचार में सादगी तथा आबोहवा व खान-पान में शुद्धता को आप गांव के अन्य तीन आवश्यक मौलिक गुण मान सकते हैं। कृषि, मवेशी पालन व परंपरागत कारीगरी…तीन ऐसे आवश्यक पेशे हैं, जिन्हे भारतीय गांवों की आर्थिकी व संस्कृति की रीढ़ कह सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मौलिक गुणों की शक्ति :</h3>
<p style="text-align:justify;">ये ही वे गुण हैं, जिनकी मौजूदगी के कारण कभी प्रख्यात यूरोपीय विद्वान ई.वी. हैवल ने भारत के गांवों को प्रजातंत्र की आधारशिला बताया था। प्रसिद्ध पर्यटक ट्रैवनियर ने कहा था कि भारत में प्रत्येक गांव अपने आप में एक छोटा सा संसार है। बाहर की घटनाओं का उनके ग्राम्य जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इन्हीं मौलिक गुणों की समृद्धि के परिणामस्वरूप, भारत कभी सोने की चिड़िया कहलाया। इन्ही मौलिक गुणों के आधार पर भारत के गांवों में कभी खेती को उत्तम, व्यापार को मध्यम और नौकरी को निकृष्ट कहा जाता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ग्राम्य सशक्तिकरण की चुनौतियां:</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण सशक्तिकरण के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज हमारे गांव, गांव बने रहने की बजाय, कुछ और हो जाने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ही सशक्तिकरण मान रहे हैं; जबकि ऐसे सशक्तिकरण के कारण भविष्य में भारत के गांव न गांव रह पायेंगे और न ही नगर हो पायेंगे। वे अधकचरे होकर रह जायेंगे। यह चित्र कैसे उलटे? गांव अपने मौलिक गुणों को पुन: कैसे हासिल करे ? यह अब युवा तन-मन के भरोसे ही संभव है। भारत के गांव प्रतीक्षा में हैं कि गांवों का यौवन पुन: बली हो। उसकी मुट्ठियां पुन: बंधें।</p>
<p style="text-align:justify;">युवा चेतना पुन: ग्रामीण समुदाय के सशक्तिकरण में लगे। किंतु यह तभी संभव है, जब ग्रामीण युवा यह समझने को तैयार हो कि उसके गांव ने जो कुछ खोया है, वह मौलिक गुणों के खो जाने का ही परिणाम है। उसे समझना होगा कि रिश्ते की लगातार कमजोर पड़ती डोर के कारण साझे के जरूरी काम नहीं हो पा रहे। सामुदायिक भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित प्रबंधन नहीं हो पा रहा। इसी कारण भारत में बेपानी व प्रदूषित पानी वाले गांवों की संख्या बढ़ रही है। इसी कारण साझे खेत व खेती लगातार घट रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सोच बदलने से बदलेगी दुनिया:</h3>
<p style="text-align:justify;">आई.ए.एस की नौकरी छोड़ने वाले बंकर रॉय का तिलोनिया स्थित बेयरफुट कॉलेज, जलपुरुष राजेन्द्र सिंह के साथ-साथ अलवर का उत्थान चित्र, हिवरे बाजार के पोपटराव पवार की सरपंची की विख्यात दास्तान, भारत की पहली एम.बी.ए. डिग्रीधारी महिला संरपंच होने के नाते चर्चा में आई राजस्थान के जिला टोंक की छवि रजावत…. ऐसे जाने कितने उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि गांव में रहकर भी बेहतर आय, बेहतर रोजगार, बेहतर सम्मान और शहर से अधिक आनंदमयी जीवन संभव है। किंतु इसके लिए ग्रामीण युवा को सबसे पहले अपनी मानसिकता व प्राथमिकता बदलनी होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संभावनाओं का खुला आकाश:</h3>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>शिक्षा :</strong></em> उसे यह भी समझना होगा कि सिर्फ डिग्री और नौकरी के लिए पढ़ने-पढ़ाने से गांवों का सशक्तिकरण असंभव है। ग्रामीण युवाओं को ऐसे ज्ञान की चाहत को प्राथमिकता बनाना होगा, जो उन्हे खेतीबाड़ी, मवेशी और स्थानीय संसाधन आधारित कारीगरी तथा विपणन का सर्वश्रेष्ठ व स्वावलंबी नमूना प्रस्तुत करने में सक्षम बनाये। ऐसा कुशल ग्राम अर्थशास्त्री बनना होगा ताकि गांव को आर्थिक उत्थान के लिए नगर की ओर ताकना न पड़े। गांवों में प्राइवेट उच्चतर माध्यमिक स्कूलों व स्नातकोत्तर कॉलेजों की बाढ़ आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामुदायिक व सहकारी आधार पर संचालित कृषि, मवेशी, जल, भूमि, आयुष, पारंपरिक कौशल उन्नयन तथा समग्र ग्राम प्रबंधन सिखाने वाली अच्छी तकनीकी व प्रबंधन पाठशालाओं का भारतीय गांवों में अभी भी अभाव है। बस, कुछ थोड़े से संजीदा युवा साथी एक बार यह तय कर लें, तो वे यह कर सकते हैं। कुश्ती, दौड़, निशानेबाजी, तैराकी जैसे ग्राम अनुकूल खेलों की नर्सरी बनाकर भी हमारे ग्रामीण युवा ग्रामोदय से भारतोदय की सक्षमता हासिल कर सकते हैं। ग्रामीण युवा को ऐसे ग्राम समाज का निर्माण करना होगा, जहां हम भिन्न जाति, संप्रदाय, वर्ग होते हुए भी पहले एक गांव हों। बंधुआ व बाल मजदूरी के दागों को पूरी तरह मिटाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>पंचायत:</strong></em> उसे ग्रामसभा की ऐसी उत्प्रेरक शक्ति बनना पड़ेगा, जो खुद सक्रिय हो और पंचायतीराज संस्थान की त्रिस्तरीय इकाइयों को सतत सक्रिय, कर्मठ तथा ईमानदार बनाये रखने में सक्षम हो। ‘ग्राम विकास योजना’ की धनराशि गांव-गांव पहुंचने लगी है। प्रत्येक ग्रामीण युवा चाहे, तो ग्रामसभा सदस्य की हैसियत से उचित ग्राम योजना निर्माण, मंजूरी तथा क्रियान्वयन में एक नायक की भूमिका निभाकर अपना युवा होना सार्थक कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>कृषि :</strong></em> यह सिर्फ दुर्योग ही है कि बहकावे में आकर ग्रामीण युवा ने भी खेती को निकृष्ट मान लिया है। उसे स्व्यं से प्रश्न करना होगा कि भारतीय खेती और खेतिहर की आज दुर्दशा क्यों है ? उसे मंथन करना होगा कि यदि खेती सचमुच घाटे का सौदा है, तो फिर कई कंपनियां खेती के काम में क्यों उतर रही हैं ? कमी हमारी खेती में है या विपणन व्यवस्था में ? ऊंची पसंद वाले देसी, जैविक और हर्बल को अन्य से उत्तम समझ रहे हैं। बाजार भी इन्हे उत्तम बताकर मंहगे दाम पर बेच रहा है। पतंजलि उत्पादों का बढ़ता ग्राफ प्रमाण है कि ग्राहकों की दुनिया देशी बीज, योग और आयुर्वेदिक पर जान छिड़क रही है। समाधान यहां है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>स्वच्छता :</strong></em> गांवों ने शहरी खान-पान, रहन-सहन व पॉलीपैक उत्पाद तो अपना लिए, लेकिन शहर जैसा स्वच्छता तंत्र गांव के पास नहीं है, लिहाजा, भारतीय गांव, अब गंदगी और बीमारी के नये अड्डे बनने की दिशा में अग्रसर हैं। काली-पीली पन्नियां, बजबजाती नालियां और अन्य गंदगी के ढेर नई पहचान बनते जा रहे हैं। भारतीय गांवों की यह नई पहचान, किसी भी गांव के सशक्तिकरण के प्रतिकूल है। प्रतिकूलता के इन निशानों को मिटाना भी गांव का सशक्तिकरण ही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-अरुण तिवारी</strong></em></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2020 20:22:34 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power रोहतक (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/youth-power-plays-an-important-role-in-nation-building-chief-minister/article-12055"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/youth-power.jpg" alt=""></a><br /><h2>12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया जाएगा। एक साथ युवा शक्ति (Youth power) नए संकल्प व सकारात्मक ऊर्जा के साथ मैराथन में भागीदार बनेगी। साथ ही राष्ट्र हित की दिशा में बेहतर करने का संकल्प लेगी। मुख्यमंत्री शनिवार को बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 51वें प्रांत अधिवेशन में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका है।</p>
<h3>शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं में संस्कारों का समावेश करते हुए अपना दायित्व बखूबी निभा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थाएं जहां युवा वर्ग को शैक्षणिक माहौल प्रदान कर रहे हैं। वहीं एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी हैं। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार की ओर से जल्द ही वोलेंटिरिजम कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये भी बोले सीएम</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>युवा वर्ग के साथ हर वर्ग सामाजिक जिम्मेवारी स्वयंसेवक के रूप में निभाए </strong></li>
<li><strong>बिना लोभ, लालच के कोई भी व्यक्ति राष्ट्र हित की योजनाओं में सुझाव दे। </strong></li>
<li><strong> बेटियों के हितों को सुरक्षित व उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए उठाए जा रहे कदम </strong></li>
<li><strong>सभी छात्र संगठन यदि अनुशासनात्मक स्वरूप के साथ आगे बढ़ें</strong></li>
<li><strong> एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जोश के साथ होश भी रखें युवा : बालक नाथ</h3>
<p style="text-align:justify;">बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं अलवर से सांसद महंत बाबा बालक नाथ ने भी युवाओं को पूरे जोश के साथ होश रखते हुए सामाजिक रूप से अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। एबीवीपी की राष्ट्र महामंत्री निधि त्रिपाठी ने हरियाणा सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की। इस अवसर पर सांसद डॉ. अरविंद शर्मा, मेयर मनमोहन गोयल, सांसद संजय भाटिया, संगठन मंत्री सुरेश भट्ट, भूपेंद्र मलिक, राजेंद्र धीमान, सुमित जागलान, डा.लखविंद लोहानी, सीताराम व्यास, एलपीएस बोसार्ड के चेयरमैन राजेश जैन, विजय, डॉ. लाकेश शेखावत, राजेश गहलावत, डा.रीटा शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 07:00:43 +0530</pubDate>
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