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                <title>जी एंटरटेनमेंट के शेयरधारकों ने सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के साथ विलय को मंजूरी दी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जेडईईएल) ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी के शेयरधारकों ने जीईईएल और बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड का कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया) के साथ प्रस्तावित विलय को मंजूरी दे दी है। एंटरटेनमेंट फर्म ने एक बयान में कहा कि उसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/zee-entertainment-shareholders-approve-merger-with-sony-pictures-networks/article-38996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/zee-entertainment-sony-pictures.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जेडईईएल) ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी के शेयरधारकों ने जीईईएल और बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड का कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया) के साथ प्रस्तावित विलय को मंजूरी दे दी है। एंटरटेनमेंट फर्म ने एक बयान में कहा कि उसके 99.99 प्रतिशत इक्विटी शेयरधारकों ने प्रस्तावित समग्र योजना व्यवस्था को मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी ने कहा है कि विलय की पूर्णता प्रक्रिया में अनुमोदन एक और दृढ़ और सकारात्मक कदम है। बयान में कहा गया है,”माननीय नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी), मुंबई बेंच, दिनांक 24 अगस्त 2022 के आदेश के अनुसार, कंपनी ने प्रस्तावित विलय के लिए अनुमोदन लेने के लिए 14 अक्टूबर 2022 को अपने इक्विटी शेयरधारकों की बैठक बुलाई। प्रस्तावित विलय सेल संबंधित बैठक के दौरान जेईईएल के 99.99% इक्विटी शेयरधारकों ने इस योजना का समर्थन किया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Oct 2022 09:13:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>खिलाड़ियों की आय से हिस्सा मांगा जाना नहीं उचित</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा सरकार ने पेशेवर खिलाड़ियों से उनको हुई विज्ञापन व निजी कार्यक्रमों की आय से एक तिहाई हिस्सा मांगा है, हालांकि खिलाड़ियों व मीडिया से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने से फिलहाल अधिसूचना को रोक लिया गया है। परंतु यहां सरकार की नीति पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। कुछ सवाल खिलाड़ियों की ओर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार ने पेशेवर खिलाड़ियों से उनको हुई विज्ञापन व निजी कार्यक्रमों की आय से एक तिहाई हिस्सा मांगा है, हालांकि खिलाड़ियों व मीडिया से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने से फिलहाल अधिसूचना को रोक लिया गया है। परंतु यहां सरकार की नीति पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। कुछ सवाल खिलाड़ियों की ओर से हैं कुछ आमजन के भी हैं। निश्चित ही राज्य सरकार से भूल हुई है। भारत में क्रिकेट के सिवाय अन्य खेलों के खिलाड़ी कोई बहुत ज्यादा अमीर नहीं हैं। चंद खिलाड़ी हैं जिन्हें अंतराष्टÑीय प्रतिस्पर्धाएं जीतने पर एक आध करोड़ या आमजन से 20-50 लाख रुपये की पुरुस्कार स्वरूप आय हुई है, जो कि बहुत ज्यादा नहीं मानी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारें व्यापारी वर्ग को जो कर छूट देती हैं, या कच्चे माल पर जो सब्सिडी देती हैं या भूमि आवंटन में दरियादिली दिखाती हैं वह खिलाड़ियों की आय की तुलना में बहुत ज्यादा है। फिर भी अगर सरकार खिलाड़ियों की आय से भी कुछ हिस्सा वसूलती है तब वह कोई अधिक बड़ी राशि नहीं होगी। एक वर्ष में यही कोई 2 या 4 करोड़ रूपये की आय ही सरकार को होगी जबकि इससे अधिक तो राज्य सरकारें अपने सरकारी कार्यक्रमों या चाय-पानी में उद्घाटन समारोहों पर ही खर्च कर डालती हैं। सरकार को सलाह देने वाले अफसरों को निश्चित ही वास्तविकता का कोई अहसास नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारी शायद किसी खिलाड़ी के संघर्ष से वाकिफ नहीं हैं। अन्यथा यह कैसे हो सकता है कि एक तरफ राज्य सरकार खिलाड़ियों की जीत पर उन्हें लाखों-करोंड़ों के पुरस्कार बांट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी थोड़ी सी कमाई में से खेल परिषदें के लिए हिस्सा मांग रही है। फिर तो सामाजिक कल्याण के लिए राजनीतिकों से भी हिस्सा राशि ली जानी चाहिए, क्योंकि ये भी भारी वेतन, पैंशन लेते हैं, जबकि ये नेता तो चुनावों पर भी करोड़ों खर्च करने की कूव्वत रखते हैं। खेल परिषदें का विकास करना सरकार का दायित्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को पूरा प्रदेश टैक्स चुकाता है, जिनमें ये खिलाड़ी भी हैं जो आमजन की तरह हर तरह से टैक्स चुकाते हैं। हिस्सा राशि मांगने की बजाए सरकार को चैरिटी खेल आयोजनों का कार्यक्रम करवाना चाहिए, जिसमें ये खिलाड़ी भी उत्साह व सर्मपण से भाग लेंगे, ऐसे कार्यक्रमों की पूरी आय नए खिलाड़ी पैदा करने व खेल परिषदें के विकास पर खर्च की जाए। इसके अलावा प्रदेश में बहुत से उद्योगपति, सामाजिक संगठन भी तलाशे जा सकते हैं जो एक-एक खेल की परिषद् को गोद लेकर राज्य सरकार को सहयोग कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/players-earnings-should-not-be-sought-from-the-share/article-4047</link>
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                <pubDate>Sat, 09 Jun 2018 10:16:05 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली प्रदूषण मामले में साझा कार्यक्रम की जानकारी देने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली प्रदूषण मामले में केन्द्र और दिल्ली सरकार को ठोस साझा न्यूनतम कार्यक्रम की जानकारी शीर्ष अदालत को देने के लिए गुरुवार तक का समय दिया है । मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने आज सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-directed-to-share-information-for-tackle-delhi-pollution/article-268"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/sc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली:</strong>  उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली प्रदूषण मामले में केन्द्र और दिल्ली सरकार को ठोस साझा न्यूनतम कार्यक्रम की जानकारी शीर्ष अदालत को देने के लिए गुरुवार तक का समय दिया है ।<br />
मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने आज सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई की अगली तिथि 10 नवम्बर तय करते हुए उस दिन तक ठोस साझा न्यूनतम कार्यक्रम शीर्ष अदालत को बताने का केन्द्र और राज्य सरकार को आदेश दिया ।<br />
न्यायालय ने सभी पक्षों को आगाह किया कि इस मामले में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।<em> (वार्ता) </em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 09:00:02 +0530</pubDate>
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