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                <title>liberal Islam - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>उदारवादी इस्लाम के पक्ष में हैं तारिक फतेह</title>
                                    <description><![CDATA[होटल के अंदर और बाहर सुरक्षाकर्मियों का पहरेदारी हो गई। मुझे आदेश मिला था कि मैं बिना किसी सुरक्षाकर्मी के बाहर न निकलूं और न ही किसी सार्वजनिक समारोह में भाग लूं। तब मैंने सोचा कि ऐसा क्या कर दिया मैंने जो इतना बवाल कट गया। लेकिन उसके बाद ऐसे वाक्या होते ही गए, इसलिए अब मैं आदी हो चुका हूं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/tarek-fatah-is-in-favor-of-liberal-islam/article-12446"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/tarek-fatah.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>-पाकिस्तानी लेखक तारिक फतह जब भी बोलते हैं बखेड़ा खड़ा हो जाता है। उनकी बातें सबसे ज्यादा मुसलमानों को चुभती हैं। चुभती इसलिए हैं क्योंकि वह इस्लामी अतिवाद के विरूद्व जमकर प्रहार करते हैं। वह उदारवादी इस्लाम के पक्ष को बढ़ावा देना चाहते हैं पर कोई भी मुसलमान उनकी बातों पर इत्तेफाक नहीं रखता। वह मुसलमानों को जनसंख्या नियंत्रण की सलाह देते हैं। इन नसीहतें के बाद वह हिंदुस्तानी अल्पसंख्यकों के निशाने पर हैं। वहीं, पाकिस्तान में तो कई बार इनके सिर कलम का आदेश भी हो चुका है। कुल मिलाकर तारिक फतह विवादों का दूसरा नाम हैं। कई मसलों पर तारिक फतह से डॉ0 रमेश ठाकुर ने उनसे बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।</em></strong></p>
<h2 style="text-align:justify;"> आप बोलते हो उसका विरोध न सिर्फ पाकिस्तान में,बल्कि हिंदुस्तान में भी होता है। वाकिफ हैं आप?</h2>
<p style="text-align:justify;">बिल्कुल वाकिफ हूं, फोन पर गालियां भी देते हैं दोनों तरफ के लोग। हिंदुस्तान के मुसलमान मुझे देखते ही सरेआम गालियां देने लगते हैं। आप मुझे बताओं मैं गलत क्या कहता हूं। एक से ज्यादा शादियां करने से और बाल विवाह जैसे सामाजिक कृत्य से बचने की मेरी सलाह को पाकिस्तान-हिंदुस्तान के मुसलमान गलत तरीके से लेते हैं। ऐसे लोगों को मैं हमेशा से काफिर कहता आया हूं आगे भी कहता रहूंगा। मेरी आधुनिक सोच को कट्टरपंथी मुसलमान हजम नहीं कर पा रहे तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं? मुझे जहां तक लगता है, पाकिस्तान की युवा पीढ़ी थोड़ी समझदार है लेकिन एक बड़ा वर्ग आज भी मूर्ख है। वह असल सच्चाई को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;"> आपसे लोगों की नफरत की एक तस्वीर मैंने खुद देखी थी। जश्न-ए-रेखता कार्यक्रम में आपके साथ लोगों ने जमकर दुर्व्यवहार किया था?</h2>
<p style="text-align:justify;">हां जी काफी हंगामा हुआ था। दोस्त इस युग में अच्ची बातों के ग्राहक नहीं मिलते, नफरत के सौदागरों की कमी नहीं? मैं प्रत्येक बात को तथ्यात्मक रूप से पेश करता हूं। बावजूद इसके कुछ लोगों को नागवार गुजरती है। जिस कार्यक्रम की आप बात कर रहे हो, दरअसल, वहां कार्यक्रम खत्म होने के बाद कुछ नवयुवक मेरे साथ बातचीत करने लगे, शायद पत्रकार ही थे। लेकिन तभी कुछ बंदे पीछे से आए और मुझे गद्दार-गद्दार बोलने लगे। शुक्र कहो उन सुरक्षाकर्मियों का जो मौके पर पहुंच गए, मोर्चा संभाल लिया। नहीं तो खुदा जाने क्या होता।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> उसके बाद सरकार ने आपके आने-जाने पर रोक भी लगा दी थी?</h2>
<p style="text-align:justify;">हां। घटना के कई दिनों तक मैं अपने होटल में कैदी की तरह कैद रहा। होटल के अंदर और बाहर सुरक्षाकर्मियों का पहरेदारी हो गई। मुझे आदेश मिला था कि मैं बिना किसी सुरक्षाकर्मी के बाहर न निकलूं और न ही किसी सार्वजनिक समारोह में भाग लूं। तब मैंने सोचा कि ऐसा क्या कर दिया मैंने जो इतना बवाल कट गया। लेकिन उसके बाद ऐसे वाक्या होते ही गए, इसलिए अब मैं आदी हो चुका हूं। फर्क नहीं पड़ता। इंसान को बस इतना समझ लेना चाहिए, विचारधारा किसी जंजीर या बेड़ियों में कैद नहीं होती, और न उसे कैद की जा सकती है। मौका मिलते ही ज्चालामुखी की तरह अपने आप फट जाती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> आपकी विचारधारा से तो लोग कंफ्यूज हैं। वह समझ ही नहीं पाते कि आप किस विचारधारा से जुड़े हो?</h2>
<p style="text-align:justify;">अजीब सवाल है आपका। कंफ्यूज होने की बात ही नहीं? मेरी सोच को समझना बहुत आसान है। मैं सर्वसम्मान की बात करता हूं। मैं चाहता हूं कि हिंदु-मुसलमान के अलावा सभी धर्मों की सोच एक जैसी हो। हंदुस्तान जो सोचता है वैसा नजरिया दूसरे मुल्कों का नहीं है। कट्टर इस्लामिक लोग हिंदुस्तान को खत्म करने की बात करते हैं। मैं कहता हूं अगर ऐसा हुआ तो दुनिया का वजूद मिट जाएगा। हिंदुस्तान है, तो दुनिया है। पाकिस्तान ने हर कदम पर भारत की मुखालफत की है। बावजूद इसके भारत की इमेज पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ा। ग्लोबल स्तर पर आज भारत का डंका बज रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> आप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफदारी के आरोप लगते हैं?</h2>
<p style="text-align:justify;">बाला साहेब ठाकरे के बाद मैं मोदी को अच्छे नेता की उपाधि देता हूं। तुलनात्मक दोनों की सोच एक जैसी है। वतन की खैरियत के लिए सोचते हैं। मैं खुलकर कहता हूं। धारा 370 और 35ए को हटाना दूसरे नेताओं के बस की बात नहीं थी। इन धाराओं को हटाना तो दूर, छेड़ने की भी कुव्वत नहीं थी। बाला साहेब ने हमेशा हिंदुत्व की रक्षा की, जो उनका अधिकार भी था। घर में रहने का पहले घर के सदस्यों का हक होता है, न कि दूसरे लोगों का। मेरे हिसाब से ऐसे मसलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। एकजुटता का परिचय देना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सीएए और एनआरसी का आप समर्थक करते हो?</h2>
<p style="text-align:justify;">सौ फीसदी। इन दोनों काूननों का इस्तेमाल करना किसी भी हुकूमत का मूल दायित्व होता है। यूरोपियन देशों में समय-समय पर देश में रहने वालों की गणना होती है। उनमें जो बहारी पाया जाता है उसे तत्काल खदेड़ दिया जाता है। भारत सरकार भी अगर ऐसा करती है तो उसमें किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। दिक्कत उन्हीं को होगी जो इस कानून के चपेट में आएंगे। सीएए को लेकर इतनी बड़ी हिंसा हुई जिसे देखकर रूहें खड़ी हो गईं। ऐसा नहीं होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-रमेश ठाकुर</em></strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 12 Jan 2020 20:35:29 +0530</pubDate>
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