<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/lohri/tag-15777" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Lohri - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/15777/rss</link>
                <description>Lohri RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Lohri: खुशियों का संदेशवाहक पर्व है लोहड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत का अनूठा पर्व और उसकी परंपराओं का महत्व बताता है लोहड़ी पर्व | Lohri Festival Lohri 2025: लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व साल की ठंड के मौसम में गर्माहट और उत्साह का प्रतीक है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lohri-is-a-festival-that-brings-happiness/article-66365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/lohri-festival.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">भारत का अनूठा पर्व और उसकी परंपराओं का महत्व बताता है लोहड़ी पर्व | Lohri Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">Lohri 2025: लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व साल की ठंड के मौसम में गर्माहट और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एकत्रित होते हैं। लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाबी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन धीरे-धीरे यह अन्य क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो गया है। इसे नई फसलों की कटाई और ठंड के अंत का उत्सव माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी पर्व (Lohri Festival) से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी दुल्ला भट्टी से जुड़ी है। दुल्ला भट्टी को ‘पंजाबी रॉबिनहुड’ के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसा वीर था, जो अमीरों से धन लूटकर गरीबों में बांटता था। उसकी बहादुरी और न्यायप्रियता के किस्से आज भी लोहड़ी के गीतों में गाए जाते हैं। कहा जाता है कि उसने एक ब्राह्मण कन्या सुंदरी की जबरन शादी को रोकते हुए उसे अपनी बेटी मानकर एक योग्य युवक से विवाह करवाया। इस घटना की याद में लोग अलाव जलाकर जश्न मनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी का मुख्य आकर्षण अलाव जलाने की परंपरा है। लोग लकड़ियां और उपले इकट्ठा कर रात के समय आग जलाते हैं। इस अलाव के इर्द-गिर्द नाचते-गाते हुए मूंगफली, तिल, गुड़ और रेवड़ी की आहुति दी जाती है। इस दौरान दुल्ला भट्टी के गीत। सुंदर-मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो…,</p>
<p style="text-align:justify;">दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी, ईशर आ दरिद्र जा दरिद्र की जड़ चूल्हे पा इत्यादि गाने गाए जाते हैं। यह परंपरा न केवल सर्दी से बचने का एक तरीका है, बल्कि अग्नि को पवित्र मानकर सुख-समृद्धि और शांति की कामना भी की जाती है। इस पर्व पर बच्चों की भूमिका भी खास होती है। वे घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते हैं और “लोहड़ी दो” कहकर तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी इकट्ठा करते हैं। हालांकि, यह परंपरा समय के साथ घटती जा रही है। अब लोग बाजार से लकड़ियां और अन्य सामग्री खरीदते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी (Lohri) का महत्व उन परिवारों के लिए और भी बढ़ जाता है, जहां नई शादी हुई हो, संतान का जन्म हुआ हो, या शादी की पहली वर्षगांठ हो। ऐसे घरों में उत्सव का माहौल होता है। रिश्तेदार और पड़ोसी इकट्ठा होकर इस पर्व का आनंद लेते हैं। हरियाणा और पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में लोहड़ी विशेष धूमधाम से मनाई जाती है। यहां का भांगड़ा और गिद्धा नृत्य इस पर्व को और भी मनोरंजक बना देता है। यह पर्व नई फसलों की कटाई का प्रतीक भी है। खेतों में खड़ी गन्ने, गेहूं और मक्का की फसलों की खुशहाली के लिए किसान सूर्यदेव का धन्यवाद करते हैं। इस दिन लोग सूर्य की पूजा कर यह प्रार्थना करते हैं कि उसकी किरणें धरती को इतनी ऊर्जा प्रदान करें कि ठंड से होने वाली समस्याएं समाप्त हो जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी के दिन बनने वाले खास व्यंजन भी इस पर्व को यादगार बनाते हैं। तिल और गुड़ से बने लड्डू, गजक, मूंगफली और मक्की की रोटी के साथ सरसों का साग इस दिन के विशेष पकवान हैं। इन व्यंजनों का सेवन करने से शरीर को गर्माहट मिलती है, जो ठंड के मौसम में अत्यंत आवश्यक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी (Lohri) पर गाए जाने वाले गीतों में खुशी और उत्साह के साथ-साथ सामाजिक एकता और न्याय का संदेश भी छिपा होता है। दुल्ला भट्टी की कहानी का जिक्र करते हुए ये गीत हमें यह सिखाते हैं कि मुश्किल परिस्थितियों में भी साहस और भाईचारे का परिचय देना चाहिए। हालांकि, शहरीकरण और आधुनिकता ने लोहड़ी के कई पारंपरिक पहलुओं को बदल दिया है, लेकिन इस त्योहार का उत्साह और महत्व आज भी बना हुआ है। लोग अपने-अपने घरों में अलाव जलाते हैं, पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। लोहड़ी समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे का प्रतीक है। यह त्योहार हमें यह संदेश देता है कि एकजुटता और साझेदारी से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है। यह पर्व न केवल ठंड के मौसम में गर्माहट लाता है, बल्कि दिलों में भी उत्साह और उमंग भर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी (Lohri) का यह पावन पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक एकता और मानवीय संबंधों को भी मजबूत करता है। यह पर्व हमें हमारे पारंपरिक मूल्यों की याद दिलाता है और यह सिखाता है कि जीवन में खुशियों के छोटे-छोटे पलों को कैसे मनाया जाए। इस त्योहार को मनाते हुए हम अपनी संस्कृति, समाज और पर्यावरण के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। लोहड़ी का यह पवित्र पर्व हर किसी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए, यही कामना है।                                                 -योगेश कुमार गोयल<strong> (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Holiday News: राजस्थान के इस शहर में 13 जनवरी को रहेगा अवकाश, जानिये…" href="http://10.0.0.122:1245/there-will-be-a-holiday-on-thirteen-january-in-this-city-of-rajasthan/">Holiday News: राजस्थान के इस शहर में 13 जनवरी को रहेगा अवकाश, जानिये…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/lohri-is-a-festival-that-brings-happiness/article-66365</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/lohri-is-a-festival-that-brings-happiness/article-66365</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Jan 2025 21:19:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-01/lohri-festival.jpg"                         length="67508"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शाह सतनाम जी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में धूमधाम से मनाया लोहड़ी पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय त्यौहार आपस में भाईचारे, प्रेम और सहयोग से रहने की देते है प्रेरणा: प्राचार्या सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शाह सतनाम जी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शुक्रवार को लोहड़ी का पर्व बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज प्राचार्या डॉ. रजनी बाला द्वारा किया गया। इस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-celebrated-with-pomp-in-shah-satnam-ji-college-of-education/article-42316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/shah-satnam-ji-college-of-education.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">भारतीय त्यौहार आपस में भाईचारे, प्रेम और सहयोग से रहने की देते है प्रेरणा: प्राचार्या</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शाह सतनाम जी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शुक्रवार को लोहड़ी का पर्व बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज प्राचार्या डॉ. रजनी बाला द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्राचार्या, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों द्वारा उपले व लकड़ियां जलाकर, मूंगफली व तिल डालने की रस्म अदा की गई। लोहड़ी पर्व पर प्राचार्या डॉ. रजनी बाला ने छात्रों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय त्यौहार आपस में भाईचारे, प्रेम और सहयोग से रहने की प्रेरणा देते है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और भारत में हर पर्व बहुत ही हर्षोल्लास और उत्साह से मनाएं जाते है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी पर्व के साथ एक पारंपरिक कथा भी जुड़ी हुई है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात में यह त्यौहार मनाया जाता है। विशेष रूप से शरद ऋतु के समापन पर इस पर्व को मनाने का प्रचलन है। इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ. मोना सिवाच, डॉ.मीनाक्षी, संदीप सिंह, सुरेश दहिया, सुश्री अंजू, करिंदर पाल,गुरजोत कौर, मेवा राम, अजय मोर, सुखबीर सिंह उपस्थित रहे।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-celebrated-with-pomp-in-shah-satnam-ji-college-of-education/article-42316</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-celebrated-with-pomp-in-shah-satnam-ji-college-of-education/article-42316</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 18:54:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-01/shah-satnam-ji-college-of-education.jpg"                         length="39561"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानिए कब है लोहड़ी और क्यों मनाया जाता है ये त्योहार?</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (एमके शायना) । नववर्ष 2023 का आगाज हो (Lohri 2023) चुका है। इसके साथ ही साल के त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लोहड़ी साल के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस साल लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। भारत में, लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lohri-2023/article-42214"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/happy-lohri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (एमके शायना) ।</strong> नववर्ष 2023 का आगाज हो (Lohri 2023) चुका है। इसके साथ ही साल के त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लोहड़ी साल के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस साल लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। भारत में, लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और जम्मू में मनाया जाता है। इस प्रसिद्ध त्यौहार को सर्दी के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन आग जलाई जाती है और तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली आग में चढ़ाई जाती है। लोग आग की परिक्रमा करते हैं और एक दूसरे को दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग लोहड़ी मनाने के लिए दूर-दूर से अपने घर वापस आते हैं। यह त्योहार सिखों के लिए खास होता है, इसलिए पंजाब में लोहड़ी को लेकर काफी उत्साह देखा जाता है। पंजाब में विशेष लोहड़ी मनाई जाती है। लोहड़ी के दिन लोग इकट्ठा होते हैं और शाम को ढोल नगाड़ों के साथ गाते और नाचते हैं। लोहड़ी पर्व पर मूंगफली, रेवड़ी और गजक बांटने की परंपरा है। इस पर्व पर दोस्तों और रिश्तेदारों को एक साथ मिलकर या मोबाइल फोन के जरिए बधाई और शुभकामनाएं दी जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">क्यों मनाते हैं लोहड़ी: लोहड़ी पारंपरिक रूप से फसलों की बुवाई और कटाई से जुड़ा त्योहार माना जाता है। लोहड़ी शब्द ‘लोई’ (संत कबीर की पत्नी) से लिया गया माना जाता है। हालांकि, कुछ लोग यह भी कहते हैं कि लोहड़ी ‘तिलोड़ी’ से बना शब्द है। इसके अलावा लोहड़ी के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह शब्द ‘लोहे’ से आया है। कहा जाता है कि कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोहड़ी में आग पोह की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह जलाई जाती है। यह भी माना जाता है कि लोहड़ी की आग जलाने से ठंड कम होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी की पौराणिक कथा : इस पर्व से जुड़ी एक कहानी भी है जो दुल्ला भट्टी से जुड़ी है। यह कहानी अकबर के शासनकाल की है, जब दुल्ला भट्टी पंजाब प्रांत का सरदार था। उन दिनों लड़कियों का बाजार था। कहा जाता है कि उस समय लड़कियों को जबरन ले जाया जाता था और अमीर व्यापारियों को बेच दिया जाता था। जिसका दुल्ला भट्टी ने विरोध किया और सभी लड़कियों को बचाकर उनकी शादी करा दी। तभी से लोहड़ी के दिन दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने और सुनाने का रिवाज है। दुल्ला भट्टी को उनके समाज में नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। दुल्ला भट्टी की कहानी हर साल लोहड़ी के मौके पर सुनाई जाती है। कहानी इस तरह चलती है – सुंदर मुंदरीए ……………… हो , तेरा कौन बेचारा ……………….. हो, दुल्ला भट्टी वाला ……………… हो, दुल्ला धी ब्याही ……………… हो, सेर शकर पाई ………….हो, लड़की दे बोझे पाई…………हो, सालु कोन समेटे…………….हो, चाचा गली देसे………हो, चाचा चूरी कुट्टी………………हो, जमींदारां लूटी, हो…</p>
<p style="text-align:justify;">लोहड़ी पर्व के लिए एक और कहानी यह है कि लोहड़ी और होलिका दोनों बहनें थीं। जिसमें लोहड़ी का व्यवहार तो अच्छा था लेकिन होलिका का नहीं। आग में होलिका जल गई और लोहड़ी बच गई। इसके बाद पंजाब में उनकी पूजा की जाती है और उनके नाम पर लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नवविवाहित जोड़ों के लिए भी खास:</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">नवविवाहित जोड़ों के लिए यह पर्व खास माना जाता है और इस दिन ये लोग अग्नि भेंट कर अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। इस दिन लड़के घरों के बाहर लोहड़ी जलाने के बाद भांगड़ा करते हैं और लड़कियां आग के पास गिद्दा करके नाचती हैं। इस तरह लोग नाचते-गाते हैं और एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाई देते हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/lohri-2023/article-42214</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/lohri-2023/article-42214</guid>
                <pubDate>Wed, 11 Jan 2023 17:20:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-01/happy-lohri.jpg"                         length="32366"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lohri festival : जानें क्यों जलाई जाती है आग और कौन था ‘दुल्ला भट्टी’</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ परिवार अपने सभी पाठकों को लोहड़ी पर्व (Lohri festival ) की शुभकामनाएं देता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-is-a-major-festival-of-punjab-and-haryana/article-12451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/happy-lohri.jpg" alt=""></a><br /><h3>नवविवाहित दंपति और नवजात शिशु के लिए के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है लोहड़ी पर्व | Lohri festival</h3>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ डेस्क।</strong> सबसे पहले तो सच कहूँ परिवार अपने सभी पाठकों को लोहड़ी पर्व <strong>(Lohri festival )</strong> की शुभकामनाएं देता है। सच कहूँ डेस्क आज पाठकों को  इस पर्व की महत्वता और इतिहास क्या है इसके बारे में बतायेगा। लोहड़ी पंजाब और हरियाणा का प्रमुख त्योहार है। हर साल 13 जनवरी को देशभर में धूमधाम से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। यह फसल से जुड़ा हुआ त्योहार है और इस दिन सिख लोग फसल पकने की खुशी मनाते हैं। यह त्योहार नवविवाहित दंपति और घर आए नवजात शिशु के लिए के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन शाम को लकड़ियों की ढेरी पर लोहड़ी जलाई जाती है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में नववधू और बच्चे की पहली लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इस दिन अग्नि के चारों ओर खड़े होकर लोकगीत गाए जाते हैं और नए धान के साथ खील, मक्का, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अग्नि में अर्पित की जाती हैं। अग्नि के चारों तरफ परिक्रमा भी की जाती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दुल्ला भट्टी से जुड़ी ये लोककथा है प्रचलित</h2>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो लोहड़ी को लेकर दक्ष और भगवान कृष्ण से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। लेकिन एक और मान्यता है जो अकबर के शासन काल के दौरान की है। कहा जाता है कि अकबर के शासन काल में दुल्ला भट्टी नाम का एक शख्स था जो कि पंजाब प्रांत में रहता था। दुल्ला भट्टी बहादुर योद्धा था। संदलबार नाम की एक जगह थी जहां गरीब घर की लड़कियों को अमीरों को बेच दिया जाता था। यह जगह अब पाकिस्तान में है। यहां एक किसान सुंदरदास रहता था जिसकी दो बेटियां सुंदरी और मुंदरी थीं। गांव का ठेकेदार जो कि मुगल था, सुंदरदास को खुद से बेटियों की शादी कराने के लिए धमाकता है। जब यह बात दुल्ला भट्टी को पता चली तो उसने ठेकेदार के खेत जला दिए और सुंदरी और मुंदरी की शादियां वहां करवाई जहां उनका पिता चाहता था। तभी से लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लोहड़ी पर क्यों जलाते हैं आग ?</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह आग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>निराश होकर सती ने पिता से पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ में निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उनसे अपने पति का अपमान देखा नहीं गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तब से माता सती की याद में आग जलाने की परंपरा है।</strong></li>
</ul>
<p><strong>पौराणिक कथा अनुसार</strong></p>
<h2 style="text-align:justify;"><strong>लोहड़ी का पावन लोक गीत </strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो,<br />
दुल्ला भट्ठी वाला हो, दुल्ले दी धी व्याही हो,<br />
सेर शक्कर पाई हो, कुड़ी दे जेबे पाई हो,<br />
कुड़ी दा लाल पटाका हो, कुड़ी दा सालू पाटा हो,<br />
सालू कौन समेटे हो, चाचे चूरी कुट्टी हो,<br />
जमीदारां लुट्टी हो, जमीदारां सदाए हो,<br />
गिन-गिन पोले लाए हो, इक पोला घट गया,<br />
जमींदार वोहटी ले के नस गया, इक पोला होर आया,<br />
जमींदार वोहटी ले के दौड़ आया,<br />
सिपाही फेर के लै गया, सिपाही नूं मारी इट्ट, भावें रो ते भावें पिट्ट,<br />
साहनूं दे लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी..</p>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-is-a-major-festival-of-punjab-and-haryana/article-12451</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lohri-festival-is-a-major-festival-of-punjab-and-haryana/article-12451</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 12:27:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/happy-lohri.jpg"                         length="43604"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        