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                <title>Delhi High Court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Delhi High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Telegram Ban Update: टेलीग्राम पर बरकरार रहेगा अस्थायी बैन, सही है केंद्र सरकार का फैसला: दिल्ली हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ नीट री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर सरकार के अस्थायी बैन के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अस्थायी बैन के खिलाफ दायर टेलीग्राम की याचिका को भी खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर अपना फैसला दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/telegram-ban-update-temporary-ban-on-telegram-will-remain-intact/article-86544"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/delhi-high-court-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Telegram Ban Update: नई दिल्ली। नीट री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर सरकार केबैन के फैसले को सही ठहराया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अस्थायी बैन के खिलाफ दायर टेलीग्राम की याचिका को भी खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को टेलीग्राम की याचिका पर अपना फैसला दिया। जस्टिस तेजस करिया ने कहा, "सरकार का आदेश सही है। आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत किसी प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया जा सकता है।" Telegram News</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों से जुड़े मामलों की आशंका के चलते टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया है। चिंताएं थीं कि नीट-यूजी विवाद में शामिल संगठित नकल करने वाले नेटवर्क इसका इस्तेमाल कर रहे थे। बड़े पैमाने पर पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों के बाद मूल नीट परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार ने इस पर बैन का फैसला लिया। साथ ही, 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा भी बंद करने का आदेश दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">ये पाबंदियां नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत जारी निर्देशों के आधार पर लगाई गई थीं। हालांकि, टेलीग्राम ने सरकार के फैसले का विरोध किया और इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। Telegram News</p>
<p style="text-align:justify;">टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून इस तरह के भेद का प्रावधान नहीं करता। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि टेलीग्राम के आर्किटेक्चर और परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में इसके बार-बार गलत इस्तेमाल के कारण अधिकारियों के पास इमरजेंसी ब्लॉकिंग शक्तियों का इस्तेमाल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक हलफनामे में केंद्र ने कहा, "यह फैसला दूसरे सभी विकल्पों को आजमाने के बाद ही लिया गया, जिसमें गैर-कानूनी कंटेंट को खास तौर पर हटाने के बार-बार किए गए अनुरोध भी शामिल थे, जो नाकाफी पाए गए।" दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा और टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी। Telegram News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:33:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाई कोर्ट ने जारी किया अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं को अवमानना नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज सहित कई नेताओं के विरुद्ध अवमानना प्रकरण में नोटिस जारी किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/high-court-issued-contempt-notice-to-many-leaders-including-arvind/article-85074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/toolkit-case-delhi-police-should-not-leak-sensitive-information-in-media-delhi-high-court.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज सहित कई नेताओं के विरुद्ध अवमानना प्रकरण में नोटिस जारी किया। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त के लिए निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान संबंधित नेताओं की ओर से कोई भी प्रतिनिधि न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया से संबंधित सभी सामग्री और अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं तथा उन्हें न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए एक एमिकस क्यूरी नियुक्त किया जाएगा। इससे पहले अदालत ने 14 मई को इस प्रकरण में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ करने का आदेश दिया था। न्यायालय का मत था कि आबकारी नीति मामले से संबंधित सुनवाई को लेकर न्यायपालिका की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि कुछ सार्वजनिक बयान, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट निष्पक्ष आलोचना की सीमा से आगे बढ़कर न्यायालय की गरिमा को प्रभावित करने वाले प्रतीत हुए। विस्तृत आदेश में न्यायालय ने उल्लेख किया कि यदि किसी पक्ष को अदालत के निर्णय या प्रक्रिया पर आपत्ति थी, तो वह उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके स्थान पर सार्वजनिक मंचों के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए गए, जिससे न्यायपालिका के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास का वातावरण लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसी क्रम में संबंधित न्यायाधीश ने बाद में आबकारी नीति मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:28:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Rs 200 Crores Extortion Case: 200 करोड़ ठगी मामले में लीना मारिया पॉलोज की जमानत को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला </title>
                                    <description><![CDATA[200 करोड़ की ठगी से जुड़े मकोका मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉलोज को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने के इनकार कर दिया है। लेकिन, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद पूरा केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/big-decision-of-high-court-regarding-the-bail-of-leena/article-84279"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/toolkit-case-delhi-police-should-not-leak-sensitive-information-in-media-delhi-high-court.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Rs 200 Crores Extortion Case: नई दिल्ली। 200 करोड़ की ठगी से जुड़े मकोका मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉलोज को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने के इनकार कर दिया है। लेकिन, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद पूरा केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Delhi High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले की शुरुआत साल 2021 में हुई थी, जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने लीना पॉलोज को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि वह एक बड़े ठगी नेटवर्क का हिस्सा थीं, जिसमें करीब 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हेराफेरी की गई थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया, जिसके बाद से वह लगातार जेल में हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लीना पॉलोज की तरफ से यह दलील दी गई कि इस अपराध में अधिकतम सजा सात साल तक हो सकती है और वह अब तक लगभग साढ़े चार साल जेल में बिता चुकी हैं। उनके वकील ने कहा कि इतने लंबे समय तक हिरासत में रहना काफी है और अब उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने मकोका मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। लेकिन दूसरी तरफ, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत दे दी गई। Delhi High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट में लीना पॉलोज ने कहा कि उनका सुकेश चंद्रशेखर के साथ संबंध अब ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुकेश का किसी दूसरी महिला के साथ संबंध हैं। जब अदालत ने पूछा कि वह दूसरी महिला कौन है, तो लीना के वकील ने फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का नाम लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे केस की बात करें तो, जांच एजेंसियों का कहना है कि फर्जी कंपनियों, हवाला नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन के जरिए भारी मात्रा में पैसों का इस्तेमाल लग्जरी लाइफस्टाइल, विदेश यात्राओं और कई प्रभावशाली लोगों को प्रभावित करने के लिए किया गया। लीना पॉलोज पर आरोप है कि वह इस पूरे नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा थीं और उन्होंने पैसों को अलग-अलग खातों और कंपनियों के जरिए घुमाने में भूमिका निभाई। वहीं, सुकेश चंद्रशेखर को इस पूरे कथित रैकेट का मुख्य चेहरा बताया जाता है, जो पहले से ही कई मामलों में जेल में बंद है। Delhi High Court News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 16:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sanjay Kapoor Property Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय कपूर की संपत्ति बेचने पर लगाई रोक, करिश्मा कपूर को मिली राहत </title>
                                    <description><![CDATA[जय कपूर की संपत्ति मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके बच्चों समायरा और कियान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-court-bans-sale-of-sanjay-kapoors-property/article-84047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/karisma-kapoor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> Sanjay Kapoor Property Case: संजय कपूर की संपत्ति मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके बच्चों समायरा और कियान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर मामले का निपटारा नहीं होता है, तब भी संजय कपूर की संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता।  </p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की जानकारी भी कोर्ट को देनी होगी और इसकी जिम्मेदारी प्रिया कपूर की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रिया कपूर संजीव कपूर की संपत्ति को बेच नहीं सकती। प्रिया कपूर को बच्चों द्वारा वसीयत की प्रमाणिकता पर उठाए गए शक को दूर करना चाहिए। अब प्रिया कपूर किसी भी प्रॉपर्टी को न तो बेच सकती हैं और न ही ट्रांसफर कर सकती हैं। मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा, "संपत्ति को खत्म नहीं किया जाना चाहिए। संपत्ति को बचाकर रखने की जरूरत है।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने बैंक अकाउंट्स के ऑपरेशन पर रोक लगा दी है। संजय कपूर के बैंक अकाउंट्स फ्रीज करने के आदेश भी दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि अगर ट्रायल स्टेज पर वसीयत जाली साबित होती है, तो यह समायरा और कियान के साथ अन्याय होगा। हाईकोर्ट ने कहा, करिश्मा कपूर और संजय कपूर की मां ने संजय की छोड़ी हुई वसीयत की वैलिडिटी और असली होने पर शक जताया है और इसलिए अब उन शकों को दूर करने की जिम्मेदारी प्रिया कपूर पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि वसीयत कितनी असली है, यह अब ट्रायल का मामला है और इस बीच वसीयत करने वाले (संजय कपूर) की संपत्ति को सुरक्षित रखने की जरूरत है। कोर्ट ने प्रिया कपूर को भारतीय कंपनियों की इक्विटी या शेयरहोल्डिंग को अलग करने, ट्रांसफर करने, गिरवी रखने और बदलने से रोक लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने संजय कपूर के बैंक खातों पर भी निगरानी रखने की बात कही हैं। कोर्ट ने संजय कपूर के विदेशी बैंक अकाउंट और क्रिप्टो करेंसी के ऑपरेशन पर भी रोक लगा दी है। मतलब प्रिया संपत्ति के साथ क्रिप्टो करेंसी को भी नहीं बेच पाएंगी।<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/karisma-kapoor.jpg" alt="Karisma Kapoor" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-court-bans-sale-of-sanjay-kapoors-property/article-84047</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:04:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Arvind Kejriwal News: बढ़ सकती हैं केजरीवाल की मुश्किलें? दिल्ली हाईकोर्ट का अरविंद केजरीवाल को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[ईडी समन अवहेलना मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया। राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को ईडी ने दी चुनौती, अगली सुनवाई जुलाई में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/delhi-high-court-issues-notice-to-arvind-kejriwal-on-eds/article-83995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/ak-dhc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Delhi High Court: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। यह मामला ईडी के समन की कथित अवहेलना से जुड़ा हुआ है। अदालत ने अगली सुनवाई जुलाई माह में निर्धारित की है। ईडी ने अपनी याचिका में कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जांच एजेंसी द्वारा विभिन्न तिथियों पर भेजे गए समनों का पालन नहीं किया। एजेंसी का तर्क है कि सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की अनदेखी व्यवस्था और कानून की मर्यादा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। Arvind Kejriwal</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, राउज एवेन्यू न्यायालय ने इस प्रकरण में केजरीवाल को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। न्यायालय का मत था कि उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यह निर्णय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल द्वारा दिया गया था। इसी आदेश को ईडी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। ईडी का यह भी कहना है कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद केजरीवाल जांच में सम्मिलित नहीं हुए और उन्होंने उपस्थिति से बचने के लिए विभिन्न कारण प्रस्तुत किए। एजेंसी ने इसे गंभीर विषय बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जुड़े एक अन्य मामले में अरविंद केजरीवाल तथा मनीष सिसोदिया के विरुद्ध भी सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने कुछ पक्षकारों द्वारा उत्तर प्रस्तुत न किए जाने पर सुनवाई को 4 मई तक स्थगित कर दिया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि शेष पक्षकार निर्धारित समय में अपना पक्ष प्रस्तुत करें, ताकि आगामी सुनवाई में मामले की विस्तृत समीक्षा की जा सके। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि ट्रायल कोर्ट का अभिलेख मंगाकर अगली सुनवाई से नियमित कार्यवाही आरंभ की जाएगी। Arvind Kejriwal</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/ak-dhc.jpg" alt="AK-DHC" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:32:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi Liquor Policy Case: केजरीवाल को कोर्ट से मिली राहत या नहीं, कौन जज करेगा सुनवाई, जानिये कोर्ट का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-liquor-policy-case-justice-swarna-kanta-sharma-to-hear-the-matter-kejriwals-petition-dismissed/article-83651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/delhi-liquor-policy-case-1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। </strong>दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब भी जस्टिस शर्मा ही करेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न्यायिक निष्पक्षता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी | Delhi Liquor Policy Case</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैसला सुनाते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बिना सुनवाई किए खुद को मामले से अलग कर लेना आसान रास्ता हो सकता था, लेकिन उन्होंने संस्थागत अखंडता को प्राथमिकता देते हुए तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ठोस सबूतों से किसी न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल सिद्ध न हो जाए, तब तक उसे निष्पक्ष माना जाता है। केवल आशंकाओं या व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर किसी जज को मामले से अलग नहीं किया जा सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">“न्याय दबाव में नहीं झुकता”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने संविधान के प्रति शपथ ली है और वह बिना किसी डर या भेदभाव के न्याय करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत “धारणाओं का मंच” नहीं बन सकती और यदि ऐसे आधारों पर जजों को हटाया जाने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘कैच-22’ स्थिति का जिक्र</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने इस स्थिति को “Catch-22” बताया। उन्होंने कहा कि अगर वे खुद को मामले से अलग कर लेतीं, तो यह माना जाता कि आरोप सही थे, और अगर वे नहीं हटतीं तथा भविष्य में राहत नहीं मिलती, तो पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, तो इससे “जज चुनने” की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जो न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केजरीवाल के आरोप और तर्क</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जस्टिस शर्मा के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल काउंसल के रूप में कार्यरत हैं, और इससे “हितों के टकराव” की संभावना बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरटीआई और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह तर्क रखा कि जज के परिवार के सदस्यों को बड़ी संख्या में सरकारी मामले आवंटित हुए हैं, जिससे सरकार के साथ उनके पेशेवर संबंध का संकेत मिलता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अदालत ने आरोपों को बताया “अनुमान”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इनमें किसी ठोस सबूत का अभाव है और ये केवल “अनुमान और संकेत” पर आधारित हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो किसी प्रकार का स्पष्ट हितों का टकराव सामने आया है और न ही ऐसा कोई कारण, जिससे जज को खुद को अलग करना पड़े। इस फैसले के साथ अदालत ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि है और यह केवल तथ्यों और कानून के आधार पर ही संभव है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने परिषद की सीट रिक्त घोषित करने के आईसीएआई के निर्णय को किया रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा क्षेत्रीय परिषद की एक सीट को रिक्त घोषित करने के निर्णय को रद्द कर दिया और कहा कि बैठकों के आयोजन में प्रक्रियात्मक खामियों का उपयोग स्वत: अयोग्यता के लिए नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-sets-aside-icais-decision-declaring-council-seat-vacant/article-82443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/delhi-high-court.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा क्षेत्रीय परिषद की एक सीट को रिक्त घोषित करने के निर्णय को रद्द कर दिया और कहा कि बैठकों के आयोजन में प्रक्रियात्मक खामियों का उपयोग स्वत: अयोग्यता के लिए नहीं किया जा सकता है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2025-2029 कार्यकाल के लिए उत्तरी भारत क्षेत्रीय परिषद के निर्वाचित सदस्य गौरव अग्रवाल को छह नवंबर, 2025 को सूचित किया गया कि उन्होंने अपनी सीट खो दी है। आईसीएआई ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स विनियम, 1988 के विनियम 135(3) का हवाला दिया जिसमें यह अनिवार्य है कि अगर कोई सदस्य बिना अवकाश लिए हुए लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसका पद स्वत: खाली माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अग्रवाल ने इस कदम को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि उनकी अनुपस्थिति का आधार बताने वाली अप्रैल और मई 2025 की अवधि में हुई कई बैठकें प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण थीं। मूल मुद्दा यह था कि क्या वे बैठकें नोटिस संबंधी नियमों के अनुपालन में की गई थीं। न्यायालय ने माना कि यह नियम एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जिसे उसने “मान्यता प्राप्त काल्पनिक स्थिति” बताया, जिसका मतलब है कि रिक्ति स्वत: हो जाती है और इसके लिए पहले से सुनवाई या निर्णय की कोई आवश्यकता नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा कि पद की स्वत: रिक्ति किसी निर्णय पर निर्भर नहीं है और इस तर्क को खारिज कर दिया कि सुनवाई न होने से कार्रवाई अमान्य हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया कि वैध रूप से आयोजित बैठकों से ही स्वत: परिणाम निकल सकते हैं। नियम 142 की जांच करते हुए, न्यायालय ने दोहराया कि परिषद की बैठकों के लिए कम से कम चौदह दिन का नोटिस देना अनिवार्य है और किसी भी परिवर्तन के लिए निर्दिष्ट सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है जिसमें प्रमुख पदाधिकारियों की स्वीकृति या सदस्यों की सहमति शामिल है। इस मामले में, अदालत ने पाया कि उन सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया। 15 अप्रैल, 2025 को आयोजित 70वीं बैठक कम समय के नोटिस पर और पर्याप्त अनुमोदन के बिना बुलाई गई थी। अठारह सदस्यों में से केवल आठ ने सहमति दी थी जो आवश्यक संख्या से कम थी। परिणामस्वरूप, बैठक ही अमान्य हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति कौरव ने कहा, “दिनांक 15.04.2025 को आयोजित 70वीं बैठक को उचित सूचना के बिना आयोजित घोषित किया जाता है।” उन्होंने आगे निष्कर्ष निकाला कि अग्रवाल की सीट रिक्त घोषित करने वाला आईसीएआई का पत्र और उसी दिन जारी किया गया बैठक का नोटिस कानून के दृष्टिकोण से मान्य नहीं है। अदालत ने पाया कि यह अमान्य बैठक लगातार तीन अनुपस्थितियों को स्थापित करने के लिए किए जाने वाले सिलसिले का हिस्सा थी, इसलिए स्वत:अवकाश लागू करने का मूल आधार ही अपने आप समाप्त हो जाता है। अंतत: उच्च न्यायालय ने आईसीएआई के फैसले को रद्द कर दिया, जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि भले ही नियमों में स्वचालित परिणामों का प्रावधान हो उन परिणामों का आधार प्रक्रियात्मक रूप से सुदृढ़ होना चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PRTC New Buses: पीआरटीसी के बेड़े में जल्द शामिल होंगी 659 नई बसें, मिलेगी सुविधा" href="http://10.0.0.122:1245/six-hundred-fifty-nine-new-buses-will-soon-be-added-to-the-prtc-fleet/">PRTC New Buses: पीआरटीसी के बेड़े में जल्द शामिल होंगी 659 नई बसें, मिलेगी सुविधा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-sets-aside-icais-decision-declaring-council-seat-vacant/article-82443</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 15:06:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया के पूर्व कुलपति इकबाल हुसैन का निलंबन रद्द किया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इकबाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-delhi-high-court-has-revoked-the-suspension-of-former-jamia-vice-chancellor-iqbal-hussain/article-80911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/delhi-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इकबाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड पीठ ने प्रोफेसर हुसैन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उनके निलंबन को चुनौती दी गयी थी। जेएमआई विश्वविद्यालय ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उसने छह सितंबर 2024 के निलंबन आदेश को पहले ही वापस ले लिया है और इसके लिए 20 जनवरी 2026 को एक नया आदेश जारी किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने इसी बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रोफेसर हुसैन को उनकी अकादमिक और शैक्षिक जिम्मेदारियां फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी। साथ ही न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जब तक अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे एस्टेट आॅफिसर के तौर पर काम नहीं करेंगे। न्यायालय ने कहा कि विभागीय जांच डेढ़ साल से ज्यादा समय से लंबित थी और माना कि इतनी लंबी जांच से बेवजह परेशानी होती है। इसलिए, पीठ ने विश्वविद्यालय को छह हफ़्ते के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला जेएमआई की कार्यकारी परिषद के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें विधि संकाय के पूर्व डीन और सेवा न्यायशास्त्र के जाने-माने विशेषज्ञ प्रोफेसर हुसैन से विश्वविद्यालय के जमीन खरीदने के पहले अधिकार के बारे में राय देने को कहा गया था। प्रोफेसर हुसैन ने जमीन खरीदने के खिलाफ सलाह देते हुए सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को अपनी मौजूदा जमीन का सही इस्तेमाल करना चाहिए और मेडिकल कॉलेज एवं दूसरे अकादमिक विकास जैसी जरूरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बचाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके विचार का कार्यकारी परिषद के ज्यादातर सदस्यों ने समर्थन किया, जिसके बाद यह तय हुआ कि विश्वविद्यालय जमीन नहीं खरीदेगा। प्रोफेसर हुसैन ने परिषद के निर्देश पर काम करते हुए औपचारिक रूप से जमीन मालिक को फैसले की जानकारी दी और कहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। प्रोफेसर हुसैन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अद्वैत घोष ने अधिवक्ता अंकुर चिब्बर के साथ मिलकर कहा कि कार्यकारी परिषद के फैसले के मुताबिक काम करने के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर द्वेष की वजह से प्रोफेसर को निलंबित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रोफेसर हुसैन पर कोई गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अपील का निपटारा करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही को समय पर पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया और संबंधित विश्वविद्यालय अधिकारियों को तुरंत आदेश की जानकारी देने का निर्देश दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Unnao Rape Case Update: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीड़िता ने जताई खुशी, कहा -कुलदीप सेंगर को फांसी दिलवाऊंगी</title>
                                    <description><![CDATA[Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/supreme-order.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर पीड़ित परिवार ने संतोष और खुशी व्यक्त की है। Unnao Rape Case Update</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से उन्हें न्याय की अनुभूति हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे भी न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी। पीड़िता का कहना है कि वह इस संघर्ष को अंतिम परिणाम तक जारी रखेंगी और जब तक दोषी को कठोरतम सजा नहीं मिलती, तब तक उनके परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन समय में उनका साथ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता की मां ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनके पति की हत्या की, उन्हें सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, न्याय तभी पूरा होगा जब दोषियों को उनके अपराध का उचित दंड मिलेगा।</p>
<h3>किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता हेमंत कुमार मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित परिवार को अब भी धमकियां मिल रही हैं, इसके बावजूद उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने को तैयार है। अब अदालत ने औपचारिक रूप से जमानत पर रोक का आदेश पारित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने पीड़िता को स्वयं भी हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अवसर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर तत्काल रोक लगा दी और आगे की सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Delhi HC: सुनील गावस्कर पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली HC का 7 दिनों में कार्रवाई करने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[Sunil Gavaskar Personality Rights: नई दिल्ली। बॉलीवुड के कई कलाकार-सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन-के बाद अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और ऑनलाइन मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे गावस्कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-hc-directs-action-on-sunil-gavaskars-personality-rights-within-7-days/article-79108"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/sunil-vs-delhi-hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sunil Gavaskar Personality Rights: नई दिल्ली। बॉलीवुड के कई कलाकार-सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन-के बाद अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और ऑनलाइन मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे गावस्कर की याचिका पर सात दिनों के भीतर आवश्यक कदम उठाएँ। गावस्कर ने अदालत से आग्रह किया था कि विभिन्न संस्थाओं को उनके नाम, चित्र, व्यक्तित्व या उससे मिलते-जुलते किसी भी तत्व का उपयोग बिना पूर्व अनुमति के करने से रोका जाए। Delhi HC News</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में सुनवाई के लिए प्रस्तुत की गई। पूर्व क्रिकेटर ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि कई संस्थाएँ उनकी पहचान और छवि का उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए कर रही हैं, जो उनके व्यक्तित्व अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सलमान खान की याचिका पर भी कोर्ट का निर्देश | Delhi HC News</h3>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सलमान खान द्वारा दायर व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामले पर भी सुनवाई की थी। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को तीन दिनों के भीतर अभिनेता की शिकायत पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी डिजिटल इंटरमीडियरीज़ को निर्देश दिया कि वे शिकायतों की जाँच सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अनुसार करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्तित्व अधिकारों से संबंधित कई बड़े मामलों—अमिताभ बच्चन, सलमान खान, अनिल कपूर और कंटेंट क्रिएटर राज शामानी—पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। अदालत का मानना है कि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान, छवि और व्यक्तित्व के व्यावसायिक उपयोग पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए, विशेष रूप से ऐसे समय में जब डीपफेक और एआई-निर्मित सामग्री तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना अनुमति किसी की नकल करना या उनकी छवि का उपयोग करना न केवल पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन है, बल्कि यह व्यक्ति की निजता और गरिमा पर भी आघात पहुँचाता है। हालाँकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविधान द्वारा संरक्षित क्षेत्र—जैसे कलात्मक अभिव्यक्ति, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और टिप्पणी—इन आदेशों से अप्रभावित रहेंगे। Delhi HC News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:49:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Salman Khan: सलमान खान के पर्सनैलिटी राइट्स केस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने ये आदेश किये जारी</title>
                                    <description><![CDATA[Salman Khan Personality Rights: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने अभिनेता सलमान खान द्वारा दायर उन याचिकाओं पर गुरुवार को प्रारम्भिक सुनवाई की, जिनमें उन्होंने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की सुरक्षा की मांग की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में हुई। सलमान खान की ओर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-issues-orders-in-salman-khans-personality-rights-case/article-79073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/salmaannn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Salman Khan Personality Rights: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने अभिनेता सलमान खान द्वारा दायर उन याचिकाओं पर गुरुवार को प्रारम्भिक सुनवाई की, जिनमें उन्होंने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की सुरक्षा की मांग की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में हुई। सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी उपस्थित हुए और उन्होंने संदिग्ध व्यक्तियों की एक सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। Salman Khan News</p>
<p style="text-align:justify;">लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति अरोड़ा ने अपने पूर्व निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत के हस्तक्षेप से पहले सोशल मीडिया मंचों (इंटरमीडियरी प्लेटफ़ॉर्म) से संपर्क करना आवश्यक है। उन्होंने अजय देवगन और एन.टी. रामाराव से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए यही प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में भी इसी पद्धति पर विचार किया जाएगा—सलमान खान को संबंधित ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों को सूचना देने का निर्देश दिया जाएगा और यदि एक सप्ताह के भीतर आपत्तिजनक सामग्री या गतिविधियाँ बंद नहीं होतीं, तो अदालत सम्मिलित आदेश जारी कर सकती है। Salman Khan News</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता सेठी ने इस व्यवस्था से सहमति जताई, किन्तु यह भी कहा कि गैर-इंटरमीडियरी पक्षों—जैसे कुछ ई-मार्केटप्लेस और ऐसी संस्थाओं—के विरुद्ध भी कार्रवाई आवश्यक है, जो कथित रूप से बिना अनुमति सामान बेच रहे हैं या अभिनेता की छवि का दुरुपयोग कर रहे हैं। न्यायालय ने इन संस्थाओं से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।</p>
<h3>किसी व्यक्ति के नाम और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग केवल उसकी अनुमति से ही हो सकता है</h3>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली उच्च न्यायालय व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामलों में एक प्रमुख मंच के रूप में उभर रहा है। इससे पूर्व न्यायालय अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, नागार्जुन, अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और कंटेंट क्रिएटर राज शामानी जैसी कई जानी-मानी हस्तियों को उनके नाम, चित्र और पहचान के अनाधिकृत उपयोग के विरुद्ध सशक्त संरक्षण दे चुका है। न्यायालय का मत है कि किसी व्यक्ति के नाम और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग केवल उसकी अनुमति से ही हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, अदालत एआई-निर्मित वीडियो, डीपफेक और डिजिटल रूप से बदले हुए कंटेंट जैसी उभरती चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि ये साधन किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजता को क्षति पहुँचा सकते हैं। न्यायाधीशों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की छेड़छाड़ व्यक्तिगत गरिमा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। हालाँकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक कलात्मक अभिव्यक्ति, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और उचित टिप्पणी संवैधानिक दायरे में होने पर संरक्षित रहेंगे। Salman Khan News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 12:53:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhurandhar: फिल्म &amp;#8216;धुरंधर&amp;#8217; पर तत्काल रोक लगे, मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता का दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय सेना के वीर अधिकारी मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अभिनेता रणवीर सिंह अभिनीत और निर्देशक आदित्य धर द्वारा बनाई जा रही आगामी फ़िल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। Dhurandhar याचिकाकर्ताओं का कहना है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/major-mohit-sharmas-parents-have-approached-the-delhi-high-court-seeking-a-ban-on-the-film-dhurandhar/article-78691"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/ranveer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारतीय सेना के वीर अधिकारी मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अभिनेता रणवीर सिंह अभिनीत और निर्देशक आदित्य धर द्वारा बनाई जा रही आगामी फ़िल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फ़िल्म मेजर मोहित शर्मा के गुप्त सैन्य अभियानों और शहादत से मेल खाती प्रतीत होती है, विशेष रूप से कश्मीर में उनके अंडरकवर मिशन से संबंधित घटनाओं से। उनका आरोप है कि न तो परिवार से और न ही भारतीय सेना से इस विषय में पूर्व अनुमति ली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका के अनुसार, फ़िल्म के ट्रेलर और प्रचार सामग्री में दिखाए गए कई दृश्य वास्तविक घटनाओं से साम्य रखते हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि शहीद अधिकारी के जीवन को व्यावसायिक लाभ का साधन बनाया गया है। परिवार ने कहा कि यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत शहीद के मरणोपरांत व्यक्तित्व अधिकारों, तथा परिवार के सम्मान और निजता के अधिकारों का उल्लंघन है। Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">परिजनों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि फ़िल्म में संवेदनशील सैन्य रणनीतियाँ, घुसपैठ की योजनाएँ तथा ऑपरेशन से जुड़ी तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को संभावित खतरा हो सकता है। उनका कहना है कि फ़िल्म निर्माताओं ने संबंधित अधिकृत सैन्य विभाग, जैसे ADGPI, से अनुमति लेने का कोई प्रयास नहीं किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फ़िल्म निर्माताओं का पक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि ‘धुरंधर’ का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह काल्पनिक कथा पर आधारित है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा है कि फ़िल्म को किसी भी वास्तविक व्यक्ति की जीवन-कथा से जोड़कर देखना उचित नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">“हाय, सर – हमारी फिल्म धुरंधर बहादुर मेजर मोहित शर्मा AC(P) SM की ज़िंदगी पर आधारित नहीं है। यह एक ऑफिशियल क्लैरिफिकेशन है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं आपको भरोसा दिलाता हूं, अगर हम भविष्य में मोहित सर पर बायोपिक बनाते हैं, तो हम इसे पूरी सहमति और परिवार से पूरी सलाह-मशविरा करके बनाएंगे, और इस तरह से करेंगे जो देश के लिए उनके बलिदान और हम सभी के लिए छोड़ी गई विरासत का सच में सम्मान करे।” Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 17:04:13 +0530</pubDate>
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