<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/delhi-high-court/tag-15780" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Delhi High Court - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/15780/rss</link>
                <description>Delhi High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Delhi Liquor Policy Case: केजरीवाल को कोर्ट से मिली राहत या नहीं, कौन जज करेगा सुनवाई, जानिये कोर्ट का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-liquor-policy-case-justice-swarna-kanta-sharma-to-hear-the-matter-kejriwals-petition-dismissed/article-83651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-04/delhi-liquor-policy-case-1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>Delhi Liquor Policy Case: नई दिल्ली। </strong>दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका देते हुए अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब भी जस्टिस शर्मा ही करेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न्यायिक निष्पक्षता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी | Delhi Liquor Policy Case</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैसला सुनाते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बिना सुनवाई किए खुद को मामले से अलग कर लेना आसान रास्ता हो सकता था, लेकिन उन्होंने संस्थागत अखंडता को प्राथमिकता देते हुए तथ्यों और कानून के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक ठोस सबूतों से किसी न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल सिद्ध न हो जाए, तब तक उसे निष्पक्ष माना जाता है। केवल आशंकाओं या व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर किसी जज को मामले से अलग नहीं किया जा सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">“न्याय दबाव में नहीं झुकता”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने संविधान के प्रति शपथ ली है और वह बिना किसी डर या भेदभाव के न्याय करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत “धारणाओं का मंच” नहीं बन सकती और यदि ऐसे आधारों पर जजों को हटाया जाने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘कैच-22’ स्थिति का जिक्र</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने इस स्थिति को “Catch-22” बताया। उन्होंने कहा कि अगर वे खुद को मामले से अलग कर लेतीं, तो यह माना जाता कि आरोप सही थे, और अगर वे नहीं हटतीं तथा भविष्य में राहत नहीं मिलती, तो पूर्वाग्रह का आरोप लगाया जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, तो इससे “जज चुनने” की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जो न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केजरीवाल के आरोप और तर्क</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अरविंद केजरीवाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जस्टिस शर्मा के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल काउंसल के रूप में कार्यरत हैं, और इससे “हितों के टकराव” की संभावना बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरटीआई और सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह तर्क रखा कि जज के परिवार के सदस्यों को बड़ी संख्या में सरकारी मामले आवंटित हुए हैं, जिससे सरकार के साथ उनके पेशेवर संबंध का संकेत मिलता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अदालत ने आरोपों को बताया “अनुमान”</h3>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इनमें किसी ठोस सबूत का अभाव है और ये केवल “अनुमान और संकेत” पर आधारित हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो किसी प्रकार का स्पष्ट हितों का टकराव सामने आया है और न ही ऐसा कोई कारण, जिससे जज को खुद को अलग करना पड़े। इस फैसले के साथ अदालत ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोपरि है और यह केवल तथ्यों और कानून के आधार पर ही संभव है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-liquor-policy-case-justice-swarna-kanta-sharma-to-hear-the-matter-kejriwals-petition-dismissed/article-83651</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-liquor-policy-case-justice-swarna-kanta-sharma-to-hear-the-matter-kejriwals-petition-dismissed/article-83651</guid>
                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:28:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-04/delhi-liquor-policy-case-1.jpg"                         length="43911"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने परिषद की सीट रिक्त घोषित करने के आईसीएआई के निर्णय को किया रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा क्षेत्रीय परिषद की एक सीट को रिक्त घोषित करने के निर्णय को रद्द कर दिया और कहा कि बैठकों के आयोजन में प्रक्रियात्मक खामियों का उपयोग स्वत: अयोग्यता के लिए नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-sets-aside-icais-decision-declaring-council-seat-vacant/article-82443"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/delhi-high-court.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा क्षेत्रीय परिषद की एक सीट को रिक्त घोषित करने के निर्णय को रद्द कर दिया और कहा कि बैठकों के आयोजन में प्रक्रियात्मक खामियों का उपयोग स्वत: अयोग्यता के लिए नहीं किया जा सकता है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2025-2029 कार्यकाल के लिए उत्तरी भारत क्षेत्रीय परिषद के निर्वाचित सदस्य गौरव अग्रवाल को छह नवंबर, 2025 को सूचित किया गया कि उन्होंने अपनी सीट खो दी है। आईसीएआई ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स विनियम, 1988 के विनियम 135(3) का हवाला दिया जिसमें यह अनिवार्य है कि अगर कोई सदस्य बिना अवकाश लिए हुए लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसका पद स्वत: खाली माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अग्रवाल ने इस कदम को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि उनकी अनुपस्थिति का आधार बताने वाली अप्रैल और मई 2025 की अवधि में हुई कई बैठकें प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण थीं। मूल मुद्दा यह था कि क्या वे बैठकें नोटिस संबंधी नियमों के अनुपालन में की गई थीं। न्यायालय ने माना कि यह नियम एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जिसे उसने “मान्यता प्राप्त काल्पनिक स्थिति” बताया, जिसका मतलब है कि रिक्ति स्वत: हो जाती है और इसके लिए पहले से सुनवाई या निर्णय की कोई आवश्यकता नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा कि पद की स्वत: रिक्ति किसी निर्णय पर निर्भर नहीं है और इस तर्क को खारिज कर दिया कि सुनवाई न होने से कार्रवाई अमान्य हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया कि वैध रूप से आयोजित बैठकों से ही स्वत: परिणाम निकल सकते हैं। नियम 142 की जांच करते हुए, न्यायालय ने दोहराया कि परिषद की बैठकों के लिए कम से कम चौदह दिन का नोटिस देना अनिवार्य है और किसी भी परिवर्तन के लिए निर्दिष्ट सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है जिसमें प्रमुख पदाधिकारियों की स्वीकृति या सदस्यों की सहमति शामिल है। इस मामले में, अदालत ने पाया कि उन सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया। 15 अप्रैल, 2025 को आयोजित 70वीं बैठक कम समय के नोटिस पर और पर्याप्त अनुमोदन के बिना बुलाई गई थी। अठारह सदस्यों में से केवल आठ ने सहमति दी थी जो आवश्यक संख्या से कम थी। परिणामस्वरूप, बैठक ही अमान्य हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति कौरव ने कहा, “दिनांक 15.04.2025 को आयोजित 70वीं बैठक को उचित सूचना के बिना आयोजित घोषित किया जाता है।” उन्होंने आगे निष्कर्ष निकाला कि अग्रवाल की सीट रिक्त घोषित करने वाला आईसीएआई का पत्र और उसी दिन जारी किया गया बैठक का नोटिस कानून के दृष्टिकोण से मान्य नहीं है। अदालत ने पाया कि यह अमान्य बैठक लगातार तीन अनुपस्थितियों को स्थापित करने के लिए किए जाने वाले सिलसिले का हिस्सा थी, इसलिए स्वत:अवकाश लागू करने का मूल आधार ही अपने आप समाप्त हो जाता है। अंतत: उच्च न्यायालय ने आईसीएआई के फैसले को रद्द कर दिया, जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि भले ही नियमों में स्वचालित परिणामों का प्रावधान हो उन परिणामों का आधार प्रक्रियात्मक रूप से सुदृढ़ होना चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PRTC New Buses: पीआरटीसी के बेड़े में जल्द शामिल होंगी 659 नई बसें, मिलेगी सुविधा" href="http://10.0.0.122:1245/six-hundred-fifty-nine-new-buses-will-soon-be-added-to-the-prtc-fleet/">PRTC New Buses: पीआरटीसी के बेड़े में जल्द शामिल होंगी 659 नई बसें, मिलेगी सुविधा</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-sets-aside-icais-decision-declaring-council-seat-vacant/article-82443</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-sets-aside-icais-decision-declaring-council-seat-vacant/article-82443</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 15:06:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-03/delhi-high-court.jpeg"                         length="92006"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया के पूर्व कुलपति इकबाल हुसैन का निलंबन रद्द किया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इकबाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-delhi-high-court-has-revoked-the-suspension-of-former-jamia-vice-chancellor-iqbal-hussain/article-80911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/delhi-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> दिल्ली उच्च न्यायाललय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर इकबाल हुसैन के निलंबन को निरस्त करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ चलायी गयी अनुशासनात्मक कार्रवाई न तो उनके पक्ष में थी और न ही संस्थान के पक्ष में। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंड पीठ ने प्रोफेसर हुसैन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उनके निलंबन को चुनौती दी गयी थी। जेएमआई विश्वविद्यालय ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उसने छह सितंबर 2024 के निलंबन आदेश को पहले ही वापस ले लिया है और इसके लिए 20 जनवरी 2026 को एक नया आदेश जारी किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने इसी बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रोफेसर हुसैन को उनकी अकादमिक और शैक्षिक जिम्मेदारियां फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी। साथ ही न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जब तक अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे एस्टेट आॅफिसर के तौर पर काम नहीं करेंगे। न्यायालय ने कहा कि विभागीय जांच डेढ़ साल से ज्यादा समय से लंबित थी और माना कि इतनी लंबी जांच से बेवजह परेशानी होती है। इसलिए, पीठ ने विश्वविद्यालय को छह हफ़्ते के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला जेएमआई की कार्यकारी परिषद के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें विधि संकाय के पूर्व डीन और सेवा न्यायशास्त्र के जाने-माने विशेषज्ञ प्रोफेसर हुसैन से विश्वविद्यालय के जमीन खरीदने के पहले अधिकार के बारे में राय देने को कहा गया था। प्रोफेसर हुसैन ने जमीन खरीदने के खिलाफ सलाह देते हुए सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को अपनी मौजूदा जमीन का सही इस्तेमाल करना चाहिए और मेडिकल कॉलेज एवं दूसरे अकादमिक विकास जैसी जरूरी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन बचाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके विचार का कार्यकारी परिषद के ज्यादातर सदस्यों ने समर्थन किया, जिसके बाद यह तय हुआ कि विश्वविद्यालय जमीन नहीं खरीदेगा। प्रोफेसर हुसैन ने परिषद के निर्देश पर काम करते हुए औपचारिक रूप से जमीन मालिक को फैसले की जानकारी दी और कहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। प्रोफेसर हुसैन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अद्वैत घोष ने अधिवक्ता अंकुर चिब्बर के साथ मिलकर कहा कि कार्यकारी परिषद के फैसले के मुताबिक काम करने के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर द्वेष की वजह से प्रोफेसर को निलंबित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रोफेसर हुसैन पर कोई गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अपील का निपटारा करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही को समय पर पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया और संबंधित विश्वविद्यालय अधिकारियों को तुरंत आदेश की जानकारी देने का निर्देश दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-delhi-high-court-has-revoked-the-suspension-of-former-jamia-vice-chancellor-iqbal-hussain/article-80911</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/the-delhi-high-court-has-revoked-the-suspension-of-former-jamia-vice-chancellor-iqbal-hussain/article-80911</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:56:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/delhi-high-court.jpg"                         length="39720"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Unnao Rape Case Update: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीड़िता ने जताई खुशी, कहा -कुलदीप सेंगर को फांसी दिलवाऊंगी</title>
                                    <description><![CDATA[Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/supreme-order.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kuldeep Sengar Bail: नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण में दोषसिद्ध पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सेंगर को नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर पीड़ित परिवार ने संतोष और खुशी व्यक्त की है। Unnao Rape Case Update</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से उन्हें न्याय की अनुभूति हुई है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे भी न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी। पीड़िता का कहना है कि वह इस संघर्ष को अंतिम परिणाम तक जारी रखेंगी और जब तक दोषी को कठोरतम सजा नहीं मिलती, तब तक उनके परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन समय में उनका साथ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता की मां ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनके पति की हत्या की, उन्हें सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, न्याय तभी पूरा होगा जब दोषियों को उनके अपराध का उचित दंड मिलेगा।</p>
<h3>किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता हेमंत कुमार मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी परिस्थिति में कुलदीप सिंह सेंगर को जेल से बाहर नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित परिवार को अब भी धमकियां मिल रही हैं, इसके बावजूद उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने को तैयार है। अब अदालत ने औपचारिक रूप से जमानत पर रोक का आदेश पारित कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने पीड़िता को स्वयं भी हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अवसर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर तत्काल रोक लगा दी और आगे की सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unnao-rape-case-update-the-victim-expressed-happiness-over-the-supreme-courts-decision/article-79789</guid>
                <pubDate>Mon, 29 Dec 2025 16:07:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-12/supreme-order.jpg"                         length="20126"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi HC: सुनील गावस्कर पर्सनैलिटी राइट्स पर दिल्ली HC का 7 दिनों में कार्रवाई करने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[Sunil Gavaskar Personality Rights: नई दिल्ली। बॉलीवुड के कई कलाकार-सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन-के बाद अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और ऑनलाइन मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे गावस्कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-hc-directs-action-on-sunil-gavaskars-personality-rights-within-7-days/article-79108"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/sunil-vs-delhi-hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sunil Gavaskar Personality Rights: नई दिल्ली। बॉलीवुड के कई कलाकार-सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन-के बाद अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। शुक्रवार को अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और ऑनलाइन मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे गावस्कर की याचिका पर सात दिनों के भीतर आवश्यक कदम उठाएँ। गावस्कर ने अदालत से आग्रह किया था कि विभिन्न संस्थाओं को उनके नाम, चित्र, व्यक्तित्व या उससे मिलते-जुलते किसी भी तत्व का उपयोग बिना पूर्व अनुमति के करने से रोका जाए। Delhi HC News</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में सुनवाई के लिए प्रस्तुत की गई। पूर्व क्रिकेटर ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि कई संस्थाएँ उनकी पहचान और छवि का उपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए कर रही हैं, जो उनके व्यक्तित्व अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सलमान खान की याचिका पर भी कोर्ट का निर्देश | Delhi HC News</h3>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सलमान खान द्वारा दायर व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामले पर भी सुनवाई की थी। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को तीन दिनों के भीतर अभिनेता की शिकायत पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने सभी डिजिटल इंटरमीडियरीज़ को निर्देश दिया कि वे शिकायतों की जाँच सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अनुसार करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्तित्व अधिकारों से संबंधित कई बड़े मामलों—अमिताभ बच्चन, सलमान खान, अनिल कपूर और कंटेंट क्रिएटर राज शामानी—पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। अदालत का मानना है कि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान, छवि और व्यक्तित्व के व्यावसायिक उपयोग पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए, विशेष रूप से ऐसे समय में जब डीपफेक और एआई-निर्मित सामग्री तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना अनुमति किसी की नकल करना या उनकी छवि का उपयोग करना न केवल पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन है, बल्कि यह व्यक्ति की निजता और गरिमा पर भी आघात पहुँचाता है। हालाँकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविधान द्वारा संरक्षित क्षेत्र—जैसे कलात्मक अभिव्यक्ति, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और टिप्पणी—इन आदेशों से अप्रभावित रहेंगे। Delhi HC News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-hc-directs-action-on-sunil-gavaskars-personality-rights-within-7-days/article-79108</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-hc-directs-action-on-sunil-gavaskars-personality-rights-within-7-days/article-79108</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:49:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-12/sunil-vs-delhi-hc.jpg"                         length="44668"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Salman Khan: सलमान खान के पर्सनैलिटी राइट्स केस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने ये आदेश किये जारी</title>
                                    <description><![CDATA[Salman Khan Personality Rights: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने अभिनेता सलमान खान द्वारा दायर उन याचिकाओं पर गुरुवार को प्रारम्भिक सुनवाई की, जिनमें उन्होंने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की सुरक्षा की मांग की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में हुई। सलमान खान की ओर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-issues-orders-in-salman-khans-personality-rights-case/article-79073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/salmaannn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Salman Khan Personality Rights: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने अभिनेता सलमान खान द्वारा दायर उन याचिकाओं पर गुरुवार को प्रारम्भिक सुनवाई की, जिनमें उन्होंने अपने व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की सुरक्षा की मांग की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अदालत में हुई। सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी उपस्थित हुए और उन्होंने संदिग्ध व्यक्तियों की एक सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। Salman Khan News</p>
<p style="text-align:justify;">लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति अरोड़ा ने अपने पूर्व निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत के हस्तक्षेप से पहले सोशल मीडिया मंचों (इंटरमीडियरी प्लेटफ़ॉर्म) से संपर्क करना आवश्यक है। उन्होंने अजय देवगन और एन.टी. रामाराव से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए यही प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में भी इसी पद्धति पर विचार किया जाएगा—सलमान खान को संबंधित ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों को सूचना देने का निर्देश दिया जाएगा और यदि एक सप्ताह के भीतर आपत्तिजनक सामग्री या गतिविधियाँ बंद नहीं होतीं, तो अदालत सम्मिलित आदेश जारी कर सकती है। Salman Khan News</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता सेठी ने इस व्यवस्था से सहमति जताई, किन्तु यह भी कहा कि गैर-इंटरमीडियरी पक्षों—जैसे कुछ ई-मार्केटप्लेस और ऐसी संस्थाओं—के विरुद्ध भी कार्रवाई आवश्यक है, जो कथित रूप से बिना अनुमति सामान बेच रहे हैं या अभिनेता की छवि का दुरुपयोग कर रहे हैं। न्यायालय ने इन संस्थाओं से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।</p>
<h3>किसी व्यक्ति के नाम और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग केवल उसकी अनुमति से ही हो सकता है</h3>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली उच्च न्यायालय व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े मामलों में एक प्रमुख मंच के रूप में उभर रहा है। इससे पूर्व न्यायालय अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, नागार्जुन, अनिल कपूर, अभिषेक बच्चन और कंटेंट क्रिएटर राज शामानी जैसी कई जानी-मानी हस्तियों को उनके नाम, चित्र और पहचान के अनाधिकृत उपयोग के विरुद्ध सशक्त संरक्षण दे चुका है। न्यायालय का मत है कि किसी व्यक्ति के नाम और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग केवल उसकी अनुमति से ही हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, अदालत एआई-निर्मित वीडियो, डीपफेक और डिजिटल रूप से बदले हुए कंटेंट जैसी उभरती चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि ये साधन किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजता को क्षति पहुँचा सकते हैं। न्यायाधीशों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की छेड़छाड़ व्यक्तिगत गरिमा पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। हालाँकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक कलात्मक अभिव्यक्ति, व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग और उचित टिप्पणी संवैधानिक दायरे में होने पर संरक्षित रहेंगे। Salman Khan News</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-issues-orders-in-salman-khans-personality-rights-case/article-79073</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-issues-orders-in-salman-khans-personality-rights-case/article-79073</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 12:53:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-12/salmaannn.jpg"                         length="24682"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Dhurandhar: फिल्म &amp;#8216;धुरंधर&amp;#8217; पर तत्काल रोक लगे, मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता का दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय सेना के वीर अधिकारी मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अभिनेता रणवीर सिंह अभिनीत और निर्देशक आदित्य धर द्वारा बनाई जा रही आगामी फ़िल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। Dhurandhar याचिकाकर्ताओं का कहना है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/major-mohit-sharmas-parents-have-approached-the-delhi-high-court-seeking-a-ban-on-the-film-dhurandhar/article-78691"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/ranveer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारतीय सेना के वीर अधिकारी मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अभिनेता रणवीर सिंह अभिनीत और निर्देशक आदित्य धर द्वारा बनाई जा रही आगामी फ़िल्म ‘धुरंधर’ की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फ़िल्म मेजर मोहित शर्मा के गुप्त सैन्य अभियानों और शहादत से मेल खाती प्रतीत होती है, विशेष रूप से कश्मीर में उनके अंडरकवर मिशन से संबंधित घटनाओं से। उनका आरोप है कि न तो परिवार से और न ही भारतीय सेना से इस विषय में पूर्व अनुमति ली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका के अनुसार, फ़िल्म के ट्रेलर और प्रचार सामग्री में दिखाए गए कई दृश्य वास्तविक घटनाओं से साम्य रखते हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि शहीद अधिकारी के जीवन को व्यावसायिक लाभ का साधन बनाया गया है। परिवार ने कहा कि यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत शहीद के मरणोपरांत व्यक्तित्व अधिकारों, तथा परिवार के सम्मान और निजता के अधिकारों का उल्लंघन है। Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">परिजनों ने यह भी आशंका व्यक्त की कि फ़िल्म में संवेदनशील सैन्य रणनीतियाँ, घुसपैठ की योजनाएँ तथा ऑपरेशन से जुड़ी तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को संभावित खतरा हो सकता है। उनका कहना है कि फ़िल्म निर्माताओं ने संबंधित अधिकृत सैन्य विभाग, जैसे ADGPI, से अनुमति लेने का कोई प्रयास नहीं किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फ़िल्म निर्माताओं का पक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि ‘धुरंधर’ का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह काल्पनिक कथा पर आधारित है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा है कि फ़िल्म को किसी भी वास्तविक व्यक्ति की जीवन-कथा से जोड़कर देखना उचित नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">“हाय, सर – हमारी फिल्म धुरंधर बहादुर मेजर मोहित शर्मा AC(P) SM की ज़िंदगी पर आधारित नहीं है। यह एक ऑफिशियल क्लैरिफिकेशन है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं आपको भरोसा दिलाता हूं, अगर हम भविष्य में मोहित सर पर बायोपिक बनाते हैं, तो हम इसे पूरी सहमति और परिवार से पूरी सलाह-मशविरा करके बनाएंगे, और इस तरह से करेंगे जो देश के लिए उनके बलिदान और हम सभी के लिए छोड़ी गई विरासत का सच में सम्मान करे।” Dhurandhar</p>
<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/major-mohit-sharmas-parents-have-approached-the-delhi-high-court-seeking-a-ban-on-the-film-dhurandhar/article-78691</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/major-mohit-sharmas-parents-have-approached-the-delhi-high-court-seeking-a-ban-on-the-film-dhurandhar/article-78691</guid>
                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 17:04:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-11/ranveer.jpg"                         length="33283"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gautam Gambhir: गौतम गंभीर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत!</title>
                                    <description><![CDATA[Gautam Gambhir Court Case: नई दिल्ली। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच तथा पूर्व सांसद गौतम गंभीर को शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई। अदालत ने कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं के कथित अवैध भंडारण और बिना लाइसेंस वितरण से जुड़ी सभी कार्यवाही को समाप्त कर दिया। न्यायालय ने कहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/gautam-gambhir-gets-relief-from-delhi-high-court/article-78400"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/high-court-gambhir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Gautam Gambhir Court Case: नई दिल्ली। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच तथा पूर्व सांसद गौतम गंभीर को शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई। अदालत ने कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं के कथित अवैध भंडारण और बिना लाइसेंस वितरण से जुड़ी सभी कार्यवाही को समाप्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह सिद्ध करे कि गंभीर अथवा उनके फाउंडेशन ने दवाओं के वितरण में किसी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि की थी। Gautam Gambhir</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति नीना बसंल कृष्णा ने आदेश पारित करते हुए आपराधिक शिकायत को रद्द कर दिया। यह शिकायत उस समय दर्ज की गई थी जब दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग ने गंभीर, उनके स्वयंसेवी संगठन, संगठन की सीईओ अपराजिता सिंह, गंभीर की माता सीमा गंभीर तथा पत्नी नताशा गंभीर के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18(सी) और 27(बी)(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कराया था। संबंधित प्रावधान बिना मान्यता दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाते हैं तथा इसके लिए सजा और दण्ड का प्रावधान भी निर्धारित करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दस्तावेजों के अनुसार, इस प्रकरण में शामिल सभी पक्षों को नोटिस भेजा गया था। सितंबर 2021 में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। आगे चलकर दी गई दलीलों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद अप्रैल 2024 में स्थगन आदेश हटाया गया। औषधि नियंत्रण विभाग ने यह तर्क दिया था कि गंभीर को सीधे उच्च न्यायालय आने के बजाय सत्र न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए था तथा फाउंडेशन द्वारा बिना लाइसेंस दवाएं वितरित करने की बात स्वीकार की गई है, भले ही बिक्री नहीं की गई हो। किंतु न्यायालय ने विभाग की इन सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंततः शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया। Gautam Gambhir</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/gautam-gambhir-gets-relief-from-delhi-high-court/article-78400</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/sports/gautam-gambhir-gets-relief-from-delhi-high-court/article-78400</guid>
                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 16:41:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-11/high-court-gambhir.jpg"                         length="32583"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Arvind Kejriwal: अरविंद केजरीवाल को लेकर आई बड़ी खबर! दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र ने दिया ये आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को शीघ्र ही सरकारी आवास आवंटित किया जा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-arvind-kejriwal-the-centre-has-given-this-assurance-in-the-delhi-high-court/article-76164"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/court-kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को शीघ्र ही सरकारी आवास आवंटित किया जा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि निर्धारित नियमों के अनुसार अगले दस दिनों के भीतर उन्हें आवास उपलब्ध करा दिया जाएगा। Arvind Kejriwal News</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान आप की ओर से अधिवक्ता ने यह आग्रह किया कि केजरीवाल को टाइप-7 या टाइप-8 श्रेणी का आवास आवंटित किया जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “आम आदमी टाइप-8 आवास के लिए संघर्ष नहीं करता।” अदालत ने सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को अभिलेख पर लिया और इस विषय पर निर्णय सुरक्षित रख लिया।</p>
<h3>आवास मंत्रालय की कार्यप्रणाली पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए</h3>
<p style="text-align:justify;">उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आवास मंत्रालय की कार्यप्रणाली केवल जनप्रतिनिधियों ही नहीं, बल्कि अन्य पात्र व्यक्तियों के लिए भी पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए। इससे पूर्व हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि आवास आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट और निष्पक्ष होनी चाहिए। साथ ही, अगली सुनवाई में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और संपदा निदेशालय के निदेशक की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी लगातार यह मांग कर रही है कि अरविन्द केजरीवाल को एक आधिकारिक आवास दिया जाए। याचिका में यह तर्क रखा गया कि किसी भी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को राजधानी दिल्ली में सरकारी आवास का अधिकार है, यदि उनके पास निजी मकान नहीं है अथवा उन्हें अन्य किसी पदनाम के अंतर्गत आवास आवंटित नहीं किया गया है। Arvind Kejriwal News</p>
<p><a title="Narendra Modi in Uttar Pradesh: भारत को अब दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं, चिप से शिप तक सब कुछ भारत में बनाना है : प्रधानमंत्री मोदी" href="http://10.0.0.122:1245/uttar-pradesh-international-trade-exhibition-2025/">Narendra Modi in Uttar Pradesh: भारत को अब दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं, चिप से शिप तक सब कुछ भारत में बनाना है : प्रधानमंत्री मोदी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-arvind-kejriwal-the-centre-has-given-this-assurance-in-the-delhi-high-court/article-76164</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-arvind-kejriwal-the-centre-has-given-this-assurance-in-the-delhi-high-court/article-76164</guid>
                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 12:44:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-09/court-kejriwal.jpg"                         length="73206"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>High Court: प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का आया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Delhi High Court News: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्रियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विश्वविद्यालयों से डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का कोई कानूनी आधार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-courts-decision-on-prime-minister-modi-degree/article-75060"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/new-delhi-14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Delhi High Court News: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्रियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विश्वविद्यालयों से डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का कोई कानूनी आधार नहीं है जब तक कि इससे जनहित में कोई स्पष्ट कारण न हो। High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला तब उठा जब सूचना के अधिकार (सीआईसी के तहत एक याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी मांगी थी। सीआईसी ने 2016 में आदेश दिया था कि प्रधानमंत्री की डिग्रियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। इस आदेश को गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय ने अदालत में चुनौती दी थी। दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीआईसी के इस आदेश को चुनौती दी थी, जिस पर जनवरी 2017 में पहली सुनवाई के दिन रोक लगा दी गई थी। High Court News</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की शैक्षणिक जानकारी उसकी निजी जानकारी के अंतर्गत आती है, और बिना उचित कारण के उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरटीआई का दायरा असीमित नहीं है और निजता के अधिकार का भी सम्मान किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर वर्षों से राजनीतिक बहस होती रही है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी पहले ही उनकी बीए और एमए की डिग्रियों की प्रतियां सार्वजनिक कर चुकी है। फिर भी इस मुद्दे पर कई बार आरटीआई याचिकाएं दायर होती रही हैं। इस फैसले के बाद अब प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़ी जानकारी आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी, जब तक कि कोई ठोस सार्वजनिक हित न हो। अदालत के इस निर्णय को निजता के अधिकार की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है। High Court News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana: बहुत जल्द बदल जाएगी हरियाणा के इस हल्के की तस्वीर, 27 सड़कों का होगा कायाकल्प" href="http://10.0.0.122:1245/twenty-seven-roads-of-haryana-will-be-rejuvenated/">Haryana: बहुत जल्द बदल जाएगी हरियाणा के इस हल्के की तस्वीर, 27 सड़कों का होगा कायाकल्प</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-courts-decision-on-prime-minister-modi-degree/article-75060</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-courts-decision-on-prime-minister-modi-degree/article-75060</guid>
                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 17:22:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-08/new-delhi-14.jpg"                         length="73309"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय में 6 नए न्यायाधीशों सहित कुल संख्या हुई 40</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को छह नव नियुक्त न्यायाधीशों ने शपथ ग्रहण की। इस शपथ समारोह के पश्चात उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 40 हो गई है। मुख्य न्यायाधीश श्री देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सभी नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। Delhi High Court news नव नियुक्त न्यायाधीशों में निम्नलिखित नाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/total-strength-of-delhi-high-court-rises-to-40-with-6-new-judges/article-73664"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/high-court-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में सोमवार को छह नव नियुक्त न्यायाधीशों ने शपथ ग्रहण की। इस शपथ समारोह के पश्चात उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 40 हो गई है। मुख्य न्यायाधीश श्री देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सभी नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। Delhi High Court news</p>
<h3 style="text-align:justify;">नव नियुक्त न्यायाधीशों में निम्नलिखित नाम सम्मिलित हैं:</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति विवेक चौधरी</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति अरुण कुमार मोंगा</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला</li>
<li style="text-align:justify;">ये सभी न्यायाधीश देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से स्थानांतरित होकर दिल्ली उच्च न्यायालय में आए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति साम्ब्रे मुंबई उच्च न्यायालय से</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति चौधरी एवं न्यायमूर्ति शुक्ला इलाहाबाद उच्च न्यायालय से</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति क्षेत्रपाल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से</li>
<li style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति मोंगा राजस्थान उच्च न्यायालय से</li>
<li style="text-align:justify;">जबकि न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव कर्नाटक उच्च न्यायालय से पुनः दिल्ली लौटे हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इन नियुक्तियों को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा 14 जुलाई को अधिसूचित किया गया था। शपथ ग्रहण समारोह दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में प्रातः 10 बजे आयोजित किया गया। यद्यपि दिल्ली उच्च न्यायालय में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 60 है, वर्तमान में यह संख्या 40 तक पहुँची है। बढ़ते न्यायिक बोझ को देखते हुए इन नियुक्तियों को समयोचित कदम माना जा रहा है। जून माह में जारी आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगभग 1.25 लाख है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन नियुक्तियों के पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय के कॉलेजियम का पुनर्गठन भी किया गया है। पहले कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय, न्यायमूर्ति विभु बाखरु एवं न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह शामिल थे। न्यायमूर्ति बाखरु के कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरण के उपरांत, अब कॉलेजियम में न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे को सम्मिलित किया गया है, क्योंकि वरिष्ठता क्रम में वे न्यायमूर्ति सिंह से ऊपर हैं। Delhi High Court news</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/total-strength-of-delhi-high-court-rises-to-40-with-6-new-judges/article-73664</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/total-strength-of-delhi-high-court-rises-to-40-with-6-new-judges/article-73664</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 09:35:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-07/high-court-delhi.jpg"                         length="46920"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Terror funding Case Update: आतंकी फंडिंग मामले में शब्बीर शाह को दिल्ली हाईकोर्ट का झटका</title>
                                    <description><![CDATA[खारिज की जमानत याचिका Terror funding Case Update: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने आतंकी वित्तपोषण मामले में आरोपित अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने 28 मई को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब घोषित करते हुए शाह को जमानत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-court-gives-a-jolt-to-shabir-shah-in-terror-funding-case/article-72068"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/toolkit-case-delhi-police-should-not-leak-sensitive-information-in-media-delhi-high-court.gif" alt=""></a><br /><h3 class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">खारिज की जमानत याचिका</h3>
<p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">Terror funding Case Update: नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने आतंकी वित्तपोषण मामले में आरोपित अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने 28 मई को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब घोषित करते हुए शाह को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है। शब्बीर शाह पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और हवाला माध्यम से आतंकवाद के लिए धन एकत्रित करने का गंभीर आरोप है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उन्हें 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया था। Terror funding Case</p>
<p class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार, शाह के संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से रहे हैं, जिनमें हिज़बुल मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज़ सईद, और इफ्तिखार हैदर राणा जैसे नाम शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि शब्बीर शाह ने हवाला के माध्यम से आतंकियों के लिए धन भेजा और राज्य में अशांति फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई।</p>
<p class="ai-optimize-9" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बताया कि शब्बीर शाह की आयु 74 वर्ष है और वह पिछले छह वर्षों से हिरासत में हैं। यह भी कहा गया कि उनके विरुद्ध अब तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। उनके विरुद्ध दर्ज मामले में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी तक 15 की ही गवाही हो पाई है।</p>
<p class="ai-optimize-10" style="text-align:justify;">हालांकि, न्यायालय ने इन तर्कों को अस्वीकार कर जमानत देने से इनकार कर दिया। यह मामला जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद से संबंधित गंभीर जांच का हिस्सा है, जिस पर एनआईए लगातार कार्य कर रही है। गौरतलब है कि शब्बीर शाह तिहाड़ जेल में निरुद्ध हैं और अब उनके विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। न्यायालय के इस निर्णय से जांच एजेंसी के रुख को बल मिला है। Terror funding Case</p>
<p class="ai-optimize-13"><a title="Delhi Weather: दिल्ली वालों के लिए मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट!" href="http://10.0.0.122:1245/meteorological-department-has-issued-red-alert-for-delhiites/">Delhi Weather: दिल्ली वालों के लिए मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-court-gives-a-jolt-to-shabir-shah-in-terror-funding-case/article-72068</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-high-court-gives-a-jolt-to-shabir-shah-in-terror-funding-case/article-72068</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Jun 2025 13:19:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-06/toolkit-case-delhi-police-should-not-leak-sensitive-information-in-media-delhi-high-court.gif"                         length="127564"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        