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                <title>पाकिस्तानी मूल की नीता कंवर बनी सरपंच</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार लॉटरी में नटवाड़ा सीट सामान्य हुई तो ससुर ने इन्हें चुनाव में उतारने का फैसला किया। स्थानीय नागरिकों ने भी उस पर भरोसा जताया और अब वह सरपंच बन गयी है। जीतने के बाद वह कहती है,- गांव का विकास मेरी प्राथमिकता है, शिक्षा और स्वास्थ्य की दिशा में काम करने की बहुत जरूरत है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/nita-kanwar-of-pakistani-origin-becomes-sarpanch/article-12577"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nita-kanwar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">अब नीता कंवर की जिंदगी में नया मोड़ आया है (Nita Kanwar)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोंक (एजेंसी)।</strong> राजस्थान में कल हुए पंचायत राज के प्रथम चरण के चुनाव में पाकिस्तान से आई नीता कंवर (Nita Kanwar) सरपंच निर्वाचित हुई है। नामांकन पत्र भरने के बाद चर्चा में आई नीता कंवर टोंक जिले के नटवाड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गयी। उसने 362 मतों से जीत हासिल की। नीता कंवर मूल रूप से पाकिस्तान की नागरिक थी। वह वर्ष 2001 में भारत मे शिक्षा हासिल करने राजस्थान में जोधपुर में अपने चाचा के पास पाकिस्तान से भारत आई थी। यहां सोफिया कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उसका विवाह नटवाड़ा राज परिवार के ठाकुर लक्ष्मण कंवर के बेटे पुण्य प्रताप कंवर से 2011 में हुआ, लेकिन उसे देश की नागरिकता हासिल करने में आठ वर्ष इंतजार करना पड़ा और सितम्बर 2019 में उसे भारतीय नागरिकता मिल गयी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जनता ने उसे राजनीति की एक नई पारी शुरू करने का मौका दिया है</h3>
<p style="text-align:justify;">नीता कंवर के ससुर ठाकुर लक्ष्मण सिंह कंवर इस क्षेत्र से तीन बार सरपंच रह चुके हैं, लिहाजा उसे शुरू से ही राजनीतिक माहौल मिला। इस बार लॉटरी में नटवाड़ा सीट सामान्य हुई तो ससुर ने इन्हें चुनाव में उतारने का फैसला किया। स्थानीय नागरिकों ने भी उस पर भरोसा जताया और अब वह सरपंच बन गयी है। जीतने के बाद वह कहती है,- गांव का विकास मेरी प्राथमिकता है, शिक्षा और स्वास्थ्य की दिशा में काम करने की बहुत जरूरत है। अब नीता कंवर की जिंदगी में नया मोड़ आया है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उसके जीवन की नयी इबारत की शुरूआत हो गयी है।</li>
<li style="text-align:justify;">शिक्षा हासिल करने भारत आयी नीता ने शायद इस सब के बारे में सोचा भी नहीं होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां जनता ने उसे राजनीति की एक नई पारी शुरू करने का मौका दिया है ।</li>
<li style="text-align:justify;">आगे वह कितना रास्ता तय करती है यह वक्त बतायेगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2020 17:25:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रमेश कुमार इन्सां बने 11वें शरीरदानी</title>
                                    <description><![CDATA[शरीरदानी रमेश कुमार इन्सां की मृत देह को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए प्रधान तेली राम लहरी व अन्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ramesh-kumar-becomes-11th-body-donation/article-12511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/ramesh-kumar-becomes-11th-b.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मेडीकल रिसर्च के काम आएगी रमेश कुमार इन्सां की मृत देह</h1>
<h1 style="text-align:center;">(Body Donation)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>पुशपिन्दर सिंह  बठिंडा/पक्का कलां।</strong> ब्लाक रामां नसीबपुरा में आते रामां मंडी के एक डेरा श्रद्धालु परिवार ने पारिवारिक सदस्य के मरणोंपरांत उसका अंतिम संस्कार करने की बजाय मैडीकल रिसर्च के लिए दान कर डेरा सच्चा सौदा की ओर से चलाए जा रहे 134 मानवता भलाई कार्यों को आगे बढ़ाया है। (Body Donation) रमेश कुमार इन्सां के रिश्तेदार संजीव कुमार ने बताया कि रमेश कुमार इन्सां की पत्नी सुनीता रानी नेत्रहीन है और वह दोनों पति-पत्नी हमीरगढ़ जिला संगरूर से आकर यहां रह रहे थे। बीते दिनों रमेश कुमार इन्सां पुत्र सूरज भान अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करते हुए सचखंड कुल मालिक के चरणों में जा बिराजे। उनकी अंतिम इच्छा अनुसार उनकी पत्नी सुनीता रानी व अन्य पारिवारिक सदस्यों ने उसकी मृत देह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ मैडीकल विज्ञान ग्रेटर नोयडा को मैडीकल रिसर्च के लिए दान कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्लॉक रामां नसीबपुरा की साध-संगत, गांववासियों, रिश्तेदार और शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों ने शरीरदानी रमेश कुमार इन्सां के निवास स्थान से काफिले के रूप में मुख्य बाजार में से होते हुए ‘रमेश कुमार इन्सां अमर रहे’ के नारों के साथ उनको अंतिम विदाई दी। मृत देह लेजाने वाली गाड़ी को रामां मंडी के समाजसेवी प्रधान तेली राम लहरी एमसी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।  इस मौके ब्लॉक समिति के 25 मैंबर भोला इन्सां, मैंबर पवन इन्सां, बलकौर इन्सां, हरदीप इन्सां, गुरप्रीत, हरजीत इन्सां, भंगीदास परमजीत इन्सां, रिश्तेदार मदन लाल, राज कुमार, विकास गोयल, बबीता रानी और शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के सेवादार बहन-भाई उपस्थित थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मरणोंपरांत शरीरदान करना प्रशंसनीय प्रयास : अध्यक्ष तेली राम लहरी</h3>
<p style="text-align:justify;">समाजसेवी अध्यक्ष तेली राम लहरी एमसी ने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी की ओर से चलाए जा रहे 134 मानवता भलाई कार्यों की प्रशंसा करते कहा कि धन्य हैं ऐसे डेरा श्रद्धालु जो अपने पूज्य गुरू जी के वचनों पर चलते हुए ऐसे शरीरदान जैसे मानवता भलाई के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस के साथ मैडीकल क्षेत्र में विद्यार्थियों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।</p>
<p> </p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 18:18:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>भीख मांगने वाले बच्चों का सहारा बना पुलिसवाला</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है, ताकि उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/policeman-becomes-a-support-for-begging-children/article-12488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/rescue.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">जीवन में भर रहा शिक्षा का उजियारा (Police Rescue)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>स्वयं के खर्चे पर पार्क में पाठ्य सामग्री का प्रबंध</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजेंद्र दहिया/सच कहूँ  फरीदाबाद।</strong> कहते हैं कि अगर मन में कुछ अच्छा करने दृढ़ इच्छा है तो इस कार्य को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहे हैं हरियाणा पुलिस में एएसआई अमर सिंह। हरियाणा (Police Rescue) पुलिस के इस जवान की ड्यूटी ऐसे बच्चों का रेस्क्यू करने में लगी हुई है, जो छोटी उम्र में कूड़ा और भीख मांगते नजर आते हैं। लेकिन इस जवान ने उन बच्चों को न केवल रेस्क्यू किया बल्कि मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उन्हें स्वयं खर्च वहन कर पढ़ा भी रहा है।  कूड़ा बीनते और भीख मांगते वक्त रेस्क्यू किए गए बच्चों को सेक्टर 25 के पार्क में दोपहर 2:00 से सायं 5:00 बजे तक स्टेट क्राइम ब्रांच में एएसआई अमर सिंह स्वयं भी पढ़ाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमर सिंह का कहना है कि कई बार उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया है, लेकिन उसके बावजूद भी बच्चे दोबारा से उसी काम पर जुड़ जाते हैं। इसके बाद इन बच्चों को प्रोत्साहित किया गया और इनके लिए अलग से पढ़ाई के लिए पाठ्य और लेखन सामग्री का बंदोबस्त करते हुए बच्चों के लिए पार्क में क्लास लगाई है। ताकि इन बच्चों को शिक्षा मिले और यह मुख्यधारा में जुड़ जाएं और इन्हें अच्छे-बुरे की पहचान हो सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अमर सिंह कहते हैं कि रेस्क्यू करना ही समस्या का समाधान नहीं है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है ।</li>
<li style="text-align:justify;">उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं बच्चों को पढ़ाने वाले एक अन्य अध्यापक पवन शर्मा का कहना है ।</li>
<li style="text-align:justify;">उनको भी अमर सिंह को देखकर ही बहुत अच्छा लगा और वह भी इस काम में जुटे हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">करीब 40 से 50 बच्चे हैं, जिन्हें वे पढ़ा रहे हैं।</li>
</ul>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 20:32:34 +0530</pubDate>
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