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                <title>sales - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>महंगी कारों की बिक्री सस्ती कारों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[मुम्बई। दो साल में महंगी कारों की बिक्री (Sales of Expensive Cars) सस्ती कारों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है। घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च के मुताबिक, एंट्री लेवल कारों के मुकाबले 10 लाख रु. से ज्यादा कीमत वाली कारें तेजी से बिकने की मुख्य वजह दोनों सेगमेंट के ग्राहकों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sales-of-expensive-cars-grew-faster-than-cheap-cars/article-33570"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/sales-of-expensive-cars.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुम्बई।</strong> दो साल में महंगी कारों की बिक्री (Sales of Expensive Cars) सस्ती कारों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है। घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च के मुताबिक, एंट्री लेवल कारों के मुकाबले 10 लाख रु. से ज्यादा कीमत वाली कारें तेजी से बिकने की मुख्य वजह दोनों सेगमेंट के ग्राहकों की आमदनी में अंतर है। 2021-22 में प्रीमियम सेगमेंट यानी 10 लाख रुपए से अधिक कीमत वाली कारें सस्ती कारों की तुलना में 5 गुना तेजी से बिकी।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट बताती है कि प्रीमियम सेगमेंट की कारों की बिक्री सालाना 38 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। जबकि, सस्ती कारों की बिक्री सालाना 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इससे 2021-22 में प्रीमियम कारों का मार्केट शेयर 25 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया। 2018-19 में मारुति की अल्टो, स्विफ्ट, बलेनो, विटारा ब्रेजा, सेलेरियो और डिजायर और हुंडई की आई10 और आई20 की कम कीमत वाली कारों की बिक्री में हिस्सेदारी 56 प्रतिशत थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते तीन साल इसमें तेजी से गिरावट आई। वर्ष 2015-16 में बाजार में कम कीमत वाले 54 मॉडल थे, जबकि 2021-22 में इसकी संख्या 39 रह गई। 2019-20 के बाद कम कीमत वाली कारों के सेगमेंट में नई कारें भी कम आई हैं। 2021-22 में इनकी हिस्सेदारी महज 15 प्रतिशत रही। महंगी कारों की बात करें तो 2018-19 में हुंडई की क्रेटा, मारुति की अर्टिगा, सियाज, महिंद्रा की बोलेरो, स्कॉर्पियो, होंडा सिटी, फोर्ड इकोस्पोर्ट और टोयोटा इनोवा की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत थी। 2019 के बाद इसमें गिरावट आई, लेकिन इसकी भरपाई इस सेगमेंट में हुई नई लॉन्चिंग ने कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">दोपहिया सेगमेंट की बात करें तो 5-6 साल में 70 हजार रुपए से अधिक कीमत वाली गाड़ियों की बिक्री (Sales of Expensive Cars) कम कीमत वाले स्कूटरों से अधिक रही। दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां अधिक कीमत वाले सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। 2014-15 में लोअर-प्राइस सेगमेंट में 29 मॉडल थे। अब इनकी संख्या 12 है। हायर-प्राइस सेगमेंट में दोपहिया मॉडलों की संख्या 2014-15 में 71 थी, जो अब बढ़कर 93 पर पहुंच गई है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 19:53:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री बढ़ी, दुपहिया, तिपहिया में गिरावट जारी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री सितंबर में 9.81 प्रतिशत बढ़ी जबकि वाणिज्यिक वाहनों के साथ ही दुपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावट जारी रही। ऑटो मोबाइल डीलर संगठनों के महासंघ (फाडा) द्वारा गुरुवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर में कुल 1,95,665 यात्री वाहन बिके जबकि पिछले साल इसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/retail-sales-of-passenger-vehicles-increased-two-wheelers-three-wheelers-continue-to-decline/article-19062"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/car.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री सितंबर में 9.81 प्रतिशत बढ़ी जबकि वाणिज्यिक वाहनों के साथ ही दुपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावट जारी रही। ऑटो मोबाइल डीलर संगठनों के महासंघ (फाडा) द्वारा गुरुवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर में कुल 1,95,665 यात्री वाहन बिके जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आँकड़ा 1,78,189 इकाई रहा था। ट्रैक्टरों की बिक्री भी 80.39 प्रतिशत बढ़कर 38,008 इकाई पर पहुँच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य श्रेणियों में हालाँकि गिरावट जारी रहने से देश में वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 10.24 प्रतिशत घटकर 13,44,866 इकाई रह गई। तिपहिया वाहनों की बिक्री में सबसे अधिक 56.86 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल सितंबर में जहाँ 58,485 तिपहिया वाहन बिके थे, वहीं इस वर्ष सितंबर में यह आँकड़ा घटकर 24,060 इकाई पर आ गया। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 33.65 प्रतिशत कम होकर 39,600 रह गई। दुपहिया वाहनों की बिक्री का आँकड़ा भी 11,63,918 से 12.62 प्रतिशत घटकर 10,16,977 पर आ गया।</p>
<p> </p>
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                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Oct 2020 12:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरियाणा : ‘नरकों की नानी’ को बेचने पर पाबंदी लगाने को तैयार 704 पंचायतें</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार ने प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से शराब के ठेके बंद करने संबंधी अर्जियां मांगी थी। सरकार ने कहा था कि जिन गांवों में आपसी सहमति से ग्राम पंचायत यह चाहती है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/704-panchayats-ready-to-ban-liquor-sales/article-12514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/manohar-lal-khattar1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से 704 गांवों में शराब के ठेके बंद करेगी सरकार (704 panchayats )</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> धार्मिक गंरथों एव संतों महापुरुषों ने शराब को ‘नरकों की नानी’ की संज्ञा दी है। संत अक्सर अपने संबोधन में फरमाते हैं कि गंभीर पापों की जड़ में शराब होती है। यह इंसान को नरकों में ले जाने के लिए मां की मां यानि नानी का काम करती है। वहीं संत-फकीरों, प्रदेश की महिलाओं और सामाजिक संस्थाओं कोशिशें रंग लाती नजर आ रही हैं। हरियाणा प्रदेश (704 panchayats ) की 704 ग्राम पंचायतें अपने गांवों से शराब के ठेके बंद करने को राज़ी हो गई हैं। इन 704 ग्राम पंचायतों ने राज्य सरकार को लिखित में शराब के ठेके बंद करने की अपील की है। वहीं सरकार पंचायतों द्वारा की गई इस मांग को जल्द पूरा करने के संबंध में कदम उठाने शुरू कर दिए गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा : ‘नरकों की नानी’….</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बाबत जानकारी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दी। बता दें कि प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार ने प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से शराब के ठेके बंद करने संबंधी अर्जियां मांगी थी। सरकार ने कहा था कि जिन गांवों में आपसी सहमति से ग्राम पंचायत यह चाहती है कि गांव में शराब के ठेके बंद हों, वे सरकार को लिखित में दें। इस प्रक्रिया में प्रदेश की 704 ग्राम पंचायतों ने सरकार से अपने-अपने गांव में शराब के ठेके बंद करने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दुष्यंत चौटाला ने अपनी माता को दिया श्रेय</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रदेश की 704 ग्राम पंचायतों द्वारा शराब की ब्रिकी बंद करने के प्रस्ताव पर मोहर लगाने की श्रेय दुष्यंत चौटाला ने अपनी माता नैना चौटाला को दिया। उन्होंने कहा कि ‘‘आप सब हरियाणवी लोगों ने प्रदेश में शराब की बिक्री को ग्राम पंचायत और सामाजिक भागीदारी से निर्धारित करने के लिए सैकड़ों बार ‘हरी चुनरी चौपाल’ के माध्यम से मेरी माताजी श्रीमती नैना चौटाला जी के समक्ष अपनी भावना रखी थी। इसलिए इस बार आप सब की सोच को सर्वोपरी मानकर हरियाणा सरकार शराब के ठेकों में आपकी इच्छा अनुसार कमी करने जा रही है।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">रोहतक और मेवात में एक भी पंचायत ने ठेके बंद करने की अर्जी नहीं दी</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रदेश के रोहतक और मेवात जिलों में एक भी पंचायत ऐसी नहीं मिली जो कहे कि शराब के ठेके बंद होने चाहिए। बता दें कि दोनों जिले प्रदेश में अहम स्थान रखते हैं लेकिन महिलाओं के लिए आवाज उठाने वाले लोगों की कमी के चलते एक भी ग्राम पंचायत ठेके बंद करने का साहस नहीं दिखा पाई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महिलाएं भोगती हैं नर्क</h3>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण आंचल में शराब के सेवन के बाद पुरुषों के आतंक से घरेलु महिलाएं जीवित रहते नरक भोगती हैं। पैसा और स्वास्थ्य की बर्बादी के साथ-साथ सामाजिक तौर पर भी शराबी इंसान की इज्जत तार-तार होती रहती है। ऐसे में घर की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा पीड़ित होती हैं, उनके साथ शराब के नशे में पुरुष मार-पीट करते हैं, असामाजिक व्यवहार करते हैं। ऐसे में महिलाओं के सम्मान और उन्हें इज्जत की जिंदगी जीने देने के लिए शराब के ठेकों की बंदी जरूरी है। ऐसे में सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को 704 ग्राम पंचायतों ने स्वीकार किया है और अब इन गांवों में शराब नहीं बेची जाएगी। जिससे खास तौर पर महिलाओं के जीवन स्तर में काफी सुधार होने की संभावना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा भिवानी में ग्राम पंचायतों ने कहा बंद करो ठेके</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार को प्राप्त हुई अर्जियों में सबसे ज्यादा 122 अर्जियां भिवानी जिले की ग्राम पंचायतों ने दी हैं। इसके बाद जींद जिले की 90 व रेवाड़ी की 85 ग्राम पंचायतें ठेके बंद करने की अर्जी दे चुकी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जिला ठेके बंद करवाने वाली पंचायतें (704 panchayats )</h3>
<p style="text-align:justify;">1. अंबाला 11<br />
2. भिवानी 22<br />
3. फरीदाबाद 8<br />
4. फतेहाबाद 30<br />
5. गुरुग्राम(ईस्ट) 2<br />
6.गुुरुग्राम (वैस्ट) 23<br />
7. हिसार 56<br />
8. जगाधरी 20<br />
9. झज्जर 34<br />
10. जींद 90 11. कैथल 27<br />
12. करनाल 64<br />
13. कुरुक्षेत्र 7<br />
14. मेवात 0<br />
15. नारनौल 69<br />
16. पलवल 34<br />
17. पंचकूला 3<br />
18. पानीपत 50<br />
19. रेवाड़ी 85<br />
20. रोहतक 0<br />
21. सिरसा 11<br />
22. सोनीपत 37</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2020 19:57:06 +0530</pubDate>
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