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                <title>Better Decisions - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>CBSE का सराहनीय फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हो गए हैं, ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक स्कूल शिक्षा (CBSE) बोर्ड ने मैरिट सूची न जारी करने का सराहनीय निर्णय लिया, जो समय की आवश्यकता है। किसी भी परीक्षा में रैकिंग अच्छा माहौल पैदा कर सकती है लेकिन बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक शिक्षा में मेरिट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/commendable-decision-of-cbse/article-47603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/cbse.jpg" alt=""></a><br /><p>12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हो गए हैं, ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक स्कूल शिक्षा (CBSE) बोर्ड ने मैरिट सूची न जारी करने का सराहनीय निर्णय लिया, जो समय की आवश्यकता है। किसी भी परीक्षा में रैकिंग अच्छा माहौल पैदा कर सकती है लेकिन बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक शिक्षा में मेरिट और अच्छे नंबरों का दबाव स्टूडेंट्स पर इतना बढ़ चुका है कि वे मानसिक रूप से उबर नहीं पा रहे हैं। इसी दबाव की नीति में स्टूडेंट हताश और तनावग्रस्त हो जाता है और आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है।</p>
<p>कोचिंग संस्थानों को अपनी व्यवस्था में परिवर्तन लाना चाहिए। जब छात्रों (CBSE) पर पढ़ाई के दबाव की बात आती है तो प्राय: उस मानसिक तनाव की ही चर्चा होती है जिससे वे प्राय: जूझते हैं। मगर इस पर कम ही लोग ध्यान देते हैं कि जिन बच्चों पर पढ़ाई और प्रदर्शन का दबाव होता है, उनकी शारीरिक गतिविधियां भी कम हो जाती हैं। आजकल जो छात्र सातवीं-आठवीं क्लास से ही डॉक्टरी-इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग क्लास में दाखिला ले रहे हैं, उन पर अच्छा परिणाम लाने का इतना दबाव होता है कि वह खेलने-कूदने तक के लिए समय नहीं निकाल पाते।</p>
<p>अब सोचने वाली बात यह है कि जिस पीढ़ी के लोग अपने बचपन और जवानी में (CBSE) खूब खेले हैं, चले-दौड़े हैं, वह भी 45-50 साल की उम्र में बढ़ते वजन, घुटने के दर्द और सर्वाइकल जैसी बीमारियों से परेशान हो जाते हैं। ऐसे में जो बच्चे बचपन से शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, चिकित्सकों का कहना है कि उनके जल्दी बीमार होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। दरअसल, प्रतियोगिता परीक्षाओं में 12वीं के अंकों की बजाए ज्ञान की समझ को प्रमुख माना जाता है। यही कारण है कि एनडीए/एनए/नीट जेईई मेन्स परीक्षाओं को कई विद्यार्थी बिना किसी कोचिंग के घर में बैठकर तैयारी कर पास कर लेते हैं। यह सब ज्ञान की बदौलत है न कि रट्टे लगाना। विद्यार्थियों के मन पर किसी भी प्रकार की परीक्षा का बोझ न डाला जाए और न ही परिणाम वाले दिन बच्चे अभिभावकों से छुपते रहें, इसीलिए आवश्यक है कि शिक्षा का मनोविज्ञान, समाज विज्ञान से टूटा नाता जोड़ा जाए।</p>
<p>आइंस्टीन ने कहा था, ‘यदि कोई मछली पेड़ पर नहीं चढ़ सकती तो इसका मतलब (CBSE) यह नहीं कि वह स्मार्ट नहीं है। उसकी अपनी अलग कुछ खूबी है।’ इस बात पर छात्रों और युवाओं को थोड़ा सोचने की जरूरत है। युवा और छात्र भी समझें कि कोई भी परीक्षा, समस्या या दबाव इतना बड़ा नहीं है कि उसमें असफलता से घबराना चाहिए। स्कूल में शिक्षा व रोजगार में एक पुल स्थापित किया जाए। विद्यार्थियों को छोटी कक्षाओं में ही उसकी रूचि के अनुसार किसी पेशे की शिक्षा के साथ जोड़ा जाए ताकि जब वह स्कूल छोड़े तब किसी रोजगार के समर्थ हो। सरकार को चाहिए कि शिक्षा नीति को और मजबूत बनाए। इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों पर भी मंथन किया जाए। शिक्षा को जितना व्यवहारिक बनाया जाएगा, विद्यार्थी उतनी लगन से पढ़ाई करेंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong><a title="Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने के बीच भारतीय ओलंपिक संघ का बड़ा फैसला, उठाए ये बड़े कदम" href="http://10.0.0.122:1245/indian-olympic-associations-big-decision/">Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने के बीच भारतीय ओलंपिक संघ का बड़ा फैसला, उठाए ये बड़े कदम</a></p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 May 2023 09:42:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>इस तरह लें बेहतर फैसले</title>
                                    <description><![CDATA[Take Better Decisions मौजूदा हालात और विकल्पों पर ढंग से गौर करें। भेड़चाल में न फंसें। अपने मूल्यों और पसंद-नापसंद को तथा दिल की भी सुनें। अपने अहं को परे रख दूसरों के नजरिये को सुनें और समझें। अपने फैसलों पर लगातार सोचें। गलती सुधारने पर ध्यान दें। गलती होने पर न अड़ें, न ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/take-better-decisions-like-this/article-12694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/better-decisions.jpg" alt=""></a><br /><h2>Take Better Decisions</h2>
<ul>
<li><strong>मौजूदा हालात और विकल्पों पर ढंग से गौर करें। </strong></li>
<li><strong>भेड़चाल में न फंसें। अपने मूल्यों और पसंद-नापसंद को तथा दिल की भी सुनें। </strong></li>
<li><strong>अपने अहं को परे रख दूसरों के नजरिये को सुनें और समझें। </strong></li>
<li><strong>अपने फैसलों पर लगातार सोचें। गलती सुधारने पर ध्यान दें। </strong></li>
<li><strong>गलती होने पर न अड़ें, न ही दूसरों को दोष दें। </strong></li>
<li><strong>जिन फैसलों में दूसरे भी शामिल हैं, उसमें उनसे भी राय लें। </strong></li>
<li><strong>अपने सही-गलत अनुभवों से जरूर सीखें। </strong></li>
<li><strong>हर बात पर खुद को साबित करने का दबाव न रखें।</strong></li>
</ul>
<h3>मत बनें फैसलों के गुलाम</h3>
<p style="text-align:justify;">हर फैसला एक खास समय, स्थिति और समझ के आधार पर लिया जाता है। एक दौर या हालात में लिया गया फैसला हर दौर में सही ही होगा, ऐसा नहीं होता। हर बात को भीष्म प्रतिज्ञा का रूप दे देना सही नहीं होता। ऐसा करना हमें अपने फैसलों का गुलाम बना देता है। गुलामी कोई भी हो, हमें आगे बढ़ने से रोकती है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 12:43:16 +0530</pubDate>
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