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                <title>Mid-day-meal - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Mid day Meal: बच्चों को मिलेगा बेहतर मिड डे मील? हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[मिड-डे-मील का बजट 58 फीसदी बढ़ा 14,409 प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को परोसा जाता है भोजन भोजन की पौष्टिकता व स्वच्छता सुनिश्चित करें अधिकारी : मुख्य सचिव चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री (Mid day Meal) पोषण शक्ति निर्माण (पीएमपीओएसएचएएन) के तहत 14,409 प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिड डे मील उपलब्ध कराने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mid-day-meal/article-45721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/now-workers-will-be-kept-for-60-years-to-make-mid-day-meal.gif" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">मिड-डे-मील का बजट 58 फीसदी बढ़ा</li>
<li style="text-align:justify;">14,409 प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को परोसा जाता है भोजन</li>
<li style="text-align:justify;">भोजन की पौष्टिकता व स्वच्छता सुनिश्चित करें अधिकारी : मुख्य सचिव</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री (Mid day Meal) पोषण शक्ति निर्माण (पीएमपीओएसएचएएन) के तहत 14,409 प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिड डे मील उपलब्ध कराने के लिए बजट में लगभग 58 प्रतिशत की वृद्धि की है। पिछले साल के 384 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान 661 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव संजीव कौशल मिड-डे-मील योजना के लिए राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कौशल ने अधिकारियों निर्देश दिए कि भोजन में अतिरिक्त पोषण मानदंड बढ़ाने के संबंध में विभिन्न खण्डों में अध्ययन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता सुनिश्चित करने और भोजन के पोषण मानकों को पूरा करने के अलावा इसे स्वच्छ परिस्थितियों में पकाने के लिए भी निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने अधिकारियों को छात्रों को भोजन उपलब्ध (Mid day Meal) कराने की समय-सारिणी निश्चित करने के निर्देश दिये ताकि भोजन की गुणवत्ता की जांच और निरीक्षण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्रदान किए जाने वाले भोजन में फोर्टिफाइड आटा, चावल और बाजरा पर आधारित विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को सप्ताह में कम से कम 3 दिन मिड-डे-मील के साथ 200 एमएल 5 फ्लेवर्ड फोर्टिफाइड दूध भी उपलब्ध कराया जाता है। कौशल ने अधिकारियों को मिड-डे-मील में और अधिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की योजना को शामिल करने के निर्देश दिए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Apr 2023 18:41:53 +0530</pubDate>
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                <title>अब सीधे जीएसटी खाताधारक के खाते में जाएंगे मिड-डे-मील के पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक नियम शुरू किया हैं। अब मिड-डे-मील का जो सामान खरीदा जाएगा उसका भुगतान स्कूल के खाते की बजाय सीधा विक्रेता के खाते में होगा। इसके लिए राशन विक्रेताओं के जीएसटी नंबर मांगे गए हैं। शिक्षकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mid-day-meal-money-will-go-directly-to-the-account-of-the-gst-account-holder/article-33803"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mid-day-meal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शिक्षा विभाग की ओर से मिड-डे-मील (Mid-Day Meal) वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक नियम शुरू किया हैं। अब मिड-डे-मील का जो सामान खरीदा जाएगा उसका भुगतान स्कूल के खाते की बजाय सीधा विक्रेता के खाते में होगा। इसके लिए राशन विक्रेताओं के जीएसटी नंबर मांगे गए हैं। शिक्षकों को विक्रेताओं से जीएसटी नंबर लेकर विभाग को देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">नियम के अनुसार उसी दुकानदार से राशन खरीदा जाएगा जिसके पास जीएसटी नंबर होगा। आदेशों में बताया गया है कि फंड मैनेजमेंट सिस्टम में दुकानदार का नाम जीएसटी नंबर समेत अपलोड किया जाना है। जो बिल दुकानदार राशन के बदले देगा, उसको बीईओ की ओर से प्रमाणित किया जाएगा। ताकि राशन की खरीदारी में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। बीईओ से साइन होने के बाद बिल डीईईओ के पास जाएगा। उसके बाद ही वित्त शाखा से संबंधित दुकानदार के खाते में बिल की राशि डाली जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मिड-डे-मील के नोडल अधिकारी संजय मोंगा ने कहा कि यह मामला प्रगति में हैं। इसके अनुसार वेंडर बनाए जाएंगे, जिनसे सामान खरीदा जाएगा। यह एक उसी प्रकार की प्रक्रिया जैसे एक घर के साथ राशन वाला जुड़ा होता है। हम घर का सारा राशन वहीं से लेते हैं। ठीक उसी प्रकार अब राशन वाले को सीधा स्कूल के साथ जोड़ा जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 20:53:03 +0530</pubDate>
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                <title>मिड-डे-मील के लिए 300 टन आलू खरीदेगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[मार्कफैड के अधिकारियों को दिए निर्देश चडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के संकट में घिरे आलू उत्पादकों को मदद मुहैया करवाने के लिए मार्कफैड को स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए तुंरत 300 टन आलू खरीदने के निर्देश दिये है। मुख्यमंत्री ने एशिया की सबसे बड़ी मार्किटिंग सहकारी फैडरेशन मार्कफैड को ‘ना मुनाफा ना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/government-will-buy-300-tonnes-potatoes-for-mid-day-meal/article-2578"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mid-day-meal.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मार्कफैड के अधिकारियों को दिए निर्देश</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चडीगढ़।</strong> मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के संकट में घिरे आलू उत्पादकों को मदद मुहैया करवाने के लिए मार्कफैड को स्कूलों में मिड-डे-मील के लिए तुंरत 300 टन आलू खरीदने के निर्देश दिये है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने एशिया की सबसे बड़ी मार्किटिंग सहकारी फैडरेशन मार्कफैड को ‘ना मुनाफा ना घाटा’ के आधार पर आलू खरीदने के लिए कहा है ताकि आलू उत्पादकों को मौजूदा संकट में से बाहर निकाला जा सके। आलूओं की कम कीमत के फलस्वरूप राज्य भर के किसानों को इस समय अनेकों समस्याएं पेश आ रही है।</p>
<h2>कैदियों को खिलाएं ज्यादा आलू</h2>
<p style="text-align:justify;">कृषि विभाग ने जेलों और शिक्षा विभागों को पहले ही एक सलाह जारी करके उनको मिड डे मील स्कीम और जेलों में कैदियों के लिए आलूओं की अधिक से अधिक खपत यकीनी बनाने के लिए कहा है क्योकि आलूओं में काफी पौष्टिक तत्व है। इसके अतिरिक्त राज्य में आलूओं की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संस्थानों को भी निर्देश जारी किये गये है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रवक्ता ने बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मार्कफैड और पंजाब एग्रो जैसी राज्यीय एंजेसियों को निर्देश जारी करके आलू उत्पादकों को मंडी समर्थन मुहैया करवाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने के लिए कहा है ताकि आलू उत्पादकों को उचित मूल्य और अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2017 05:41:57 +0530</pubDate>
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                <title>कल्याणकारी योजनाओं में आधार का पेंच</title>
                                    <description><![CDATA[2007 में शुरू की गई मिड डे मील भारत की सबसे सफल सामाजिक नीतियों में से एक है, जिससे होने वाले लाभों को हम स्कूलों में बच्चों कि उपस्थिति, बाल पोषण के रूप में देख सकते हैं। आज मिड डे मील स्कीम के तहत देश में 12 लाख स्कूलों के 12 करोड़ बच्चों को दोपहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/screw-of-base-in-welfare-schemes/article-775"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/aadhar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2007 में शुरू की गई मिड डे मील भारत की सबसे सफल सामाजिक नीतियों में से एक है, जिससे होने वाले लाभों को हम स्कूलों में बच्चों कि उपस्थिति, बाल पोषण के रूप में देख सकते हैं। आज मिड डे मील स्कीम के तहत देश में 12 लाख स्कूलों के 12 करोड़ बच्चों को दोपहर का खाना दिया जाता है। इस योजना पर सरकार सालाना करीब साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये खर्च करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">28 फरवरी, 2017 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मिड डे मील से जुड़ी एक अधिसूचना जारी की गयी जिसमें कहा गया था कि मिड डे मील योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य होगा ,जिनके पास आधार नंबर नहीं है उन्हें आधार कार्ड बनवाने के लिए 30 जून तक का समय है उसके बाद आधार कार्ड नहीं होने की स्थिति में मिड डे मील लेने के लिए आधार कार्ड की रजिस्ट्रेशन स्लिप दिखानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने इस कदम को लेकर मंत्रालय का तर्क है कि आधार कार्ड कि अनिवार्यता से इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी साथ ही इसका लाभ लेने वालों को आसानी होगी। इस अधिसूचना पर हंगामा होने के बाद सरकार द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें कहा गया कि यह सुनिश्चित किया गया है कि आधार न होने के कारण किसी को भी लाभ से वंचित न किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर किसी बच्चे के पास आधार नहीं है तो अधिकारी उसे आधार नामांकन सुविधा उपलब्ध करायेंगें जब तक ऐसा न हो लाभार्थियों को मिल रहे लाभ जारी रहेंगे। हालांकि बाद में जारी प्रेस विज्ञप्ति में नियमों में किसी किस्म की ढील नहीं दी गई है यहाँ बस शब्दों की हेरा फेरी ही की गयी है,</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस विज्ञप्ति के बाद भी 28 फरवरी, 2017 को जारी की गई अधिसूचना का सारा ज्यों का तयों बना हुआ है जिसमें कहा गया था कि कि देश के 14 करोड़ बच्चों को आधार कार्ड उपलब्ध कराने पर ही भोजन कराया जाएगा और अगर उनके पास आधार कार्ड नहीं है तो उसे बनवाना ही पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकार बताते हैं कि मिड डे मील जैसी योजनाओं में आधार कि अनिवार्यता का नकारात्मक असर पड़ सकता है और इससे देश के सबसे गरीब और जरूरतमंद प्रभावित होंगें। योजना में “फर्जीवाड़ा रोकने के लिये भी यह कोई प्रभावकारी तरीका नहीं है। इसके लिये सरकार को आधार अनिवार्य करने के बजाए योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने पर ध्यान देना चाहिए चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे इनमें लोगों की भागेदारी बढ़े, दुनिया भर के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं को लागू करने में लोगों कि सहभागिता और जन निगरानी बहुत अच्छे उपाय साबित हुए हैं इससे गड़बड़ी होंने की गुंजाइश ना के बराबर रह जाती है । कल्याणकारी योजनाओं में आधार की अनिवार्यता को को लेकर कई गंभीर सवाल हैं, एक तो इसमें फिंगर प्रिंट मैच करने कि समस्याएँ हैं</p>
<p style="text-align:justify;">और दूसरी इस बात बात की आशंका है कि आधार कि बहाने सरकार लोगों की निगरानी करना चाहती है, निजता को लेकर भी सवाल हैं पिछले दिनों आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी द्वारा महेंद्र सिंह धोनी जैसे हाई प्रोफाइल क्रिकेटर की निजी जानकारी सोशल नेटवर्किंग साइट पर लीक कर देने का मामला सामने आ चुका है ऐसे में आधार कार्ड की वजह से देश के करोड़ों लोगों की निजता कैसे बनी रहेगे इसकी गया गारंटी है, आधार कार्ड का पूरा डाटाबेस कोई भी अपने फायदे के लिए उपयोग कर सकता है या उसकी जानकारी लीक कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">निजता और निगरानी का मसाला लोगों के मौलिक अधिकारों से जुड़ता है शायद इसी वजह से आधार नंबर को अनिवार्य बनाए जाने को लेकर कई जानकार और सामाजिक कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि सबकुछ आधार से जोड़ देने से आधार कार्ड धारकों की निजी जानकारियां चुराने, आर्थिक घपले करने, पहचान का दुरुपयोग करने और तमाम सूचनाओं का गलत इस्तेमाल करने का खतरा बढ़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मिड डे मील के मामले में तो मसला बाल अधिकारों से भी जुड़ता है इस तरह से सरकार देश के बच्चों को एक तरह से जबरदस्ती एक ऐसे काम के लिये मजबूर कर रही है जिसमें इन नाबालिगों की कोई रजामंदी नहीं है। सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए आधार की अनिवार्यता को लेकर हमेशा से ही विवाद रहा है, आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकायें कई साल से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है इस बीच अदालत द्वारा समय-समय पर अंतरिम निर्णय भी सुनाये गए हैं, जैसे 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था</p>
<p style="text-align:justify;">कि रसोई गैस सब्सिडी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं किया जा सकता इसी तरह से 2015 में भी अदालत ने मनरेगा, पेंशन, भविष्य निधि, प्रधानमंत्री जनधन योजना आदि को आधार कार्ड से जोड़ने की इजाजत तो दी, पर साथ में ही यह भी कहा कि यह स्वैच्छिक होना चाहिए, अनिवार्य नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक बार फिर स्पष्ट किया गया है कि सरकार और उसकी एजेंसियां समाज कल्याण योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं कर सकती हंै और सिर्फ आधार न होने की वजह से किसी व्यक्ति को किसी भी सरकारी योजना के फायदे से महरूम नहीं रखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इन सबके बावजूद सरकार लगातार आधार की अनिवार्यता बढ़ाती जा रही है मध्यान्ह भोजन योजना इस सूची में एक नयी कड़ी है जिसे रोजी रोटी अधिकार अभियान सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन बताया है जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड लोगों को मिलने वाली किसी भी सेवा के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">अभियान का कहना है कि कि मिड डे मील भारतीय बच्चों का एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कानूनी तौर पर और साथ ही साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लागू किया गया है, सरकार के इस कदम को मिड डे मील योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं में रुकावट पैदा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष शांता सिन्हा द्वारा सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आधार को अनिवार्य करने पर अंतरिम रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कि गयी थी जिसमें केंद्र सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य करने पर अंतरिम रोक लगाने कि मांग की गयी है ।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 27 जून को सुनवाई करेगा, सरकार ने सरकारी योजनाओं में आधार की अनिवार्यता के लिये 30 जून की डेडलाइन भी रखी है इसलिए 27 जून की सुनवाई बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि केन्द्र सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है उसने तो 27 जून को याचिका पर होने वाली सुनवाई का भी विरोध करते हुए कहा है कि 30 जून की समय सीमा को अब और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">
इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के राशन के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता लागू करने के आदेश पर रोक लगा देने से उम्मीदें बढ़ी हैं दरअसल राजस्थान सरकार ने 24 मार्च 2017 को सूबे में राशन सामग्री के वितरण के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया था । उम्मीद है राजस्थान सरकार को मिले इस झटके से दिल्ली सरकार कोई सबक सीखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong>जावेद अनीस</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 00:01:26 +0530</pubDate>
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