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                <title>Shah Satnam Ji - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Shah Satnam Ji RSS Feed</description>
                
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;हर व्यक्ति यहाँ का अधिकारी नहीं, यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है’&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/only-those-who-receive-orders-from-above-are-granted-a-place-here/article-81750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-mahroom1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: शाम को जुलूस की वापसी पर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्वयं गेट के बाहर खड़े होकर आप जी का और शहनशाही जुलूस का स्वागत किया और साध-संगत के बीच खड़े होकर यह वचन भी फरमाया कि हरबंस सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को आज ‘आत्मा से परमात्मा’ कर दिया है। यह इनकी बहुत बड़ी कुर्बानी है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी को नए-नए नोटों के हार पहनाकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी स्वयं अपने साथ तेरावास में लेकर गए। तीन मंजिला तेरावास पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी की ही हवेली के मलबे अर्थात ईंटें, लकड़ी-बालों, गार्डरों आदि का उपयोग कर और स्वयं मिस्त्रियों के पास खड़े रहकर अपने निर्देशन में पूरी मजबूती से बनवाया था। पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने 28 फरवरी 1960 को जुलूस के बाद सुंदर तेरावास आप जी को उपहार स्वरूप भेंट की और इस संबंधी वचन फरमाए, ‘सतगुरु के हुक्म से यह गोल तेरावास बनाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सतनाम सिंह जी को पुरस्कार स्वरूप दी गई है।’ साथ ही फिर से स्पष्ट करते हुए फरमाया, ‘सतनाम सिंह जी का नाम पहले सरदार हरबंस सिंह जी था। यह ईश्वरी शक्ति श्री जलालआणा साहिब, जिला सरसा की रहने वाली है। राम-नाम को हासिल करने के लिए इन्होंने अपना घर-मकान तोड़ा। इसलिए यह तेरावास इन्हें इनाम में मिला है। हर व्यक्ति यहाँ स्थान लेने का अधिकारी नहीं है और यहाँ उसी को स्थान मिलता है, जिसे ऊपर से हुक्म होता है।’ MSG Maha Rahmokaram Month</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 09:38:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है&amp;#8221;!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/every-child-in-the-city-should-also-know-what-a-huge-sacrifice-satnam-singh-ji-has-made/article-81711"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-purpul-11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>Param Pita Shah Satnam Ji: सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) से घर-बार तुड़वाकर और सारा सामान साध-संगत में बंटवा देने के कुछ ही दिनों बाद पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा, सरसा (हरि.) के पंडाल में तीन मंजिला एक अत्यंत सुंदर गोल तेरावास तैयार करवाया। इस तेरावास के निर्माण में आप जी द्वारा लाया गया सारा सामान, जैसे ईंटें, गार्डर आदि का ही उपयोग किया गया। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने विशेष संदेश भेजकर पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा से साध-संगत को 28 फरवरी 1960 के दिन डेरा सच्चा सौदा, सरसा बुला लिया। इसके बाद उसी दिन पूजनीय बेपरवाह जी के हुक्मानुसार आप जी को सिर से पांव तक सौ-सौ रुपये के नोटों के हार पहनाए गए। एक अत्यंत सुंदर बिना छत वाली जीप मंगवाई गई, जो चारों ओर से खूब सजाई गई थी।</p>
<h3>”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है”</h3>
<p>उस गाड़ी के अंदर एक सजी हुई आकर्षक कुर्सी पर आप जी को बिठाकर पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने साध-संगत के मुखातिब होकर फरमाया, ”सतनाम सिंह जी बहुत ही बहादुर हैं। इन्होंने इस मस्ताना गरीब के हुक्म को माना है और बहुत बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है। आज से हमने इनको अपना वारिस, कुल मालिक बना दिया है। सारे शहर की हर गली व मोहल्ले में शोभा यात्रा निकालनी है, ताकि शहर के बच्चे-बच्चे को पता चल जाए कि सतनाम सिंह जी ने गरीब मस्ताने के लिए इतनी जबरदस्त कुर्बानी दी है और इनको सच्चे सौदे का वारिस बना दिया गया है।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह जी ने डेरे में आई हुई समस्त साध-संगत को शोभा यात्रा के साथ जाने की आज्ञा देते हुए वचन फरमाया, ”भाई, इस यात्रा में ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा जोर-शोर से लगाते हुए यह भी बताना है कि आज से साईं सावन शाह जी के हुक्म से सरदार सतनाम सिंह जी श्री जलालआणा साहिब वालों को डेरा सच्चा सौदा का गद्दीनशीन बना दिया गया है।”  जारी… MSG Maha Rahmokaram Month</p>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 09:34:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: पूजनीय सतगुरु जी की &amp;#8216;अनूठी लीला&amp;#8217;!</title>
                                    <description><![CDATA[सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/unique-leela-of-revered-satguru-ji/article-81676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-feild2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहले वाला नाम) ने शनिवार रात डेरे के बाहर रखे सामान की निगरानी भी की। अगले दिन रविवार को पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सत्संग फरमाया। सत्संग में दूर-दूर से साध-संगत बड़ी संख्या में उपस्थित हुई। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के आदेशानुसार आपजी ने वह समस्त सामान अपने पवित्र कर-कमलों से एक-एक करके साध-संगत में वितरित कर दिया। किसी को मोटरसाइकिल दी गई, किसी को ऊंट की काठी, किसी को पानी की टंकी। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार दरियां, खेस, कंबल, गद्दे, सिरहाने, बिस्तर, कोट, जर्सियां, स्वेटर, ट्रंक-पेटियां, संदूक तथा घरेलू और कृषि कार्य में उपयोगी अन्य सामग्री भी प्रेमपूर्वक बांट दी। यह दृश्य अत्यंत भावविभोर कर देने वाला था। अपने पूजनीय सतगुरु जी की इस अनूठी लीला को उनका समस्त परिवार श्रद्धा और प्रेमभाव से निहारता रहा। अपने प्यारे सतगुरु पूजनीय बेपरवाह जी के आदेश पर अपना सर्वस्व अर्पित कर वे उनकी असीम कृपा के अधिकारी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इस महान बलिदान को देखकर पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज अत्यंत प्रसन्न हुए और करुणा से परिपूर्ण वचन फरमाए, ‘सरदार हरबंस सिंह जी ने अपने सतगुरु के नाम पर इतनी बड़ी कुर्बानी दी है, इनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। इसके उपरांत पूजनीय बेपरवाह जी ने एक दर्जी से आप जी के लिए एक अत्यंत सुंदर कोट मंगवाया और स्वयं अपने हाथों से पहनाया। सतगुरु जी ने फरमाया ‘देखो भाई! सरदार हरबंस सिंह जी कितने सुंदर लगते हैं…’ जारी…..MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:43:46 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो&amp;#8230;&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/it-is-impossible-to-find-such-an-example-of-obedience-to-the-beloved-satguru-ji/article-81639"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी और ठंडी हवाएँ चल रही थीं। ऐसे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूजनीय माता जी सहित पूरे परिवार ने पूरी रात सामान की निगरानी के लिए खुले आसमान के नीचे बिताई। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<h3>प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव</h3>
<p>अपने प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव है। परीक्षा और सख्त हो गई। सुबह सूरज निकलने के समय पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने तेरावास से बाहर आते ही पूछा, ”भाई श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी कहाँ हैं?” साध-संगत ने बताया, ”साईं जी, वे तो आपजी के हुक्मानुसार अपने सामान के पास बाहर बैठे हैं।”</p>
<p>पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी को अपने पास बुलाकर फरमाया, ”भाई, यह सामान किसका है?” पूरा परिवार अपने प्यारे सतगुरु जी के चरणों में हाथ जोड़कर इस अलौकिक लीला को देख रहा था। सभी ने नम्रता से विनती की, ”साईं जी, यह सब आपका ही है।” तब पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने हुक्म फरमाया, ”यदि पूरे परिवार में से किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो सतगुरु इस सामान को स्वीकार नहीं करेंगे।”<br />
<strong>क्रमश:  स्रोत: भाग-2 सच्चे रूहानी रहबर | MSG Maha Rahmokaram Month</strong></p>
</div>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 09:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: सतगुरु जी का खेल!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Shah Mastana Ji Maharaj) सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को गुरुगद्दी की बख्शीश के लिए परीक्षा ले रहे थे। साईं जी ने आदेश दिया कि आपने अपनी सारी जमीन बेचनी है। इस पर आप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/satguru-jis-game/article-81569"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: सच्चे साईं शाह मस्ताना जी महाराज (Shah Mastana Ji Maharaj) सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) को गुरुगद्दी की बख्शीश के लिए परीक्षा ले रहे थे। साईं जी ने आदेश दिया कि आपने अपनी सारी जमीन बेचनी है। इस पर आप जी ने अति नम्रतापूर्वक विनती की, “साईं जी! आप जी किसी अन्य प्रेमी को गाँव श्री जलालआणा साहिब भेज दीजिए, वो ही सौदा कर आएगा। हमने तो केवल अपने हस्ताक्षर ही करने हैं।” बेपरवाह जी ने आप जी की विनती को स्वीकार करते हुए एक प्रेमी को यह आदेश देकर गाँव श्री जलालआणा साहिब भेजा कि वह गाँव की हर गली में यह मुनादी कर दे कि सरदार हरबंस सिंह जी की जमीन बिकाऊ है। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<h3>”जमीन कोई भी खरीद सकता है”</h3>
<p style="text-align:justify;">जमीन कोई भी खरीद सकता है। पूजनीय बेपरवाह जी के आदेशानुसार उस प्रेमी ने श्री जलालआणा साहिब गाँव में जाकर यह मुनादी करवा दी, परन्तु जमीन का कोई भी ग्राहक नहीं आया। उस प्रेमी ने जब यह बात बेपरवाह जी को बताई तो पूजनीय बेपरवाह जी एकदम जोश में बोले, “तुमने कीमत ज्यादा बताई होगी। अब दोबारा जाओ और सारे गाँव वालों को बताओ कि सरदार हरबंस सिंह की जमीन जो भी रेट है उससे आधी कीमत में दी जाएगी, जो कोई खरीदना चाहता है खरीद सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">’’जब प्रेमी ने जमीन को उस कीमत पर बेचने की मुनादी करवाई तो गाँव के समस्त लोग एकत्रित हो गए और उक्त प्रेमी से कहने लगे कि हम जमीन नहीं खरीदेंगे। सरदार हरबंस सिंह जी का परिवार व बच्चे क्या खाएंगे? अत: प्रेमी के बार-बार कहने पर भी आप जी की जमीन को खरीदने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ। असल में यह तो सतगुरु जी का खेल था। जब प्रेमी ने इस घटना का उल्लेख पूजनीय बेपरवाह जी के सम्मुख किया तो पूजनीय साईं जी अत्यधिक प्रसन्न हुए और फरमाया, “भाई, सतगुरु जो करता है, भले के लिए ही करता है। ठीक है, इनकी जमीन भी छोड़ो और इनका ट्रैक्टर-ट्राली भी छोड़ो। जमीन को जोतने व सामान आदि ढोने के लिए परिवार को ट्रैक्टर-ट्राली की भी तो जरूरत पड़ेगी। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/satguru-jis-game/article-81569</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 09:33:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: जब बेपरवाह साईं जी ने एक कंकर की कीमत लाखों रुपये से भी अनमोल बताई!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन हुक्मानुसार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना हवेलीनुमा घर गिरा दिया। घर में मौजूद सारा सामान रेडियो, घड़ी, पानी की टंकी, गाड़ी, कपड़ों से भरी पेटियां, संदूक, बिस्तर, मोटरसाइकिल, फर्नीचर तथा अन्य सभी वस्तुएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/when-beparwah-sai-ji-declared-the-value-of-a-pebble-to-be-more-precious-than-lakhs-of-rupees/article-81538"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-jil-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन हुक्मानुसार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपना हवेलीनुमा घर गिरा दिया। घर में मौजूद सारा सामान रेडियो, घड़ी, पानी की टंकी, गाड़ी, कपड़ों से भरी पेटियां, संदूक, बिस्तर, मोटरसाइकिल, फर्नीचर तथा अन्य सभी वस्तुएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा ले आए। उस समय नई ईंटों की कीमत 28 रुपये प्रति हजार थी, लेकिन ट्रक चालक श्री जलालआणा साहिब से सरसा तक ईंटों की ढुलाई के लिए 20 रुपये प्रति हजार किराया मांग रहे थे। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर आप जी ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन चरण कमलों में अर्ज की, ‘‘साईं जी! यदि आप जी की आज्ञा हो तो पुरानी ईंटें गांव में ही किसी को दे दें और यहाँ नई र्ईंटें मंगवा लेते हैं।’’ यह सुनकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने फरमाया, ‘‘नहीं भाई! नहीं, तेरे मकान का तो एक कंकर भी एक लाख रुपये में किसी को नहीं दिया जाएगा। सारी ईंटें यहाँ डेरे में ही लेकर आओ।’’इस प्रकार अपने प्यारे सतगुरु जी के हुक्म को सर्वोपरि मानते हुए आप जी अपने मकान का सारा मलबा, र्ईंटें, गार्डर और लकड़ी के बड़े-बड़े शहतीर आदि सब कुछ ट्रकों और ट्रॉलियों में भरकर डेरा सच्चा सौदा, सरसा ले आए। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 09:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: जब साईं जी ने अपनी नूरी-नजर से सत्संगियों के दिलों में रूहानी किरणें छोड़ीं&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के समय एक दिन, हमेशा की तरह ईश्वर की भक्ति के भजन गाए जा रहे थे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपनी नूरे-नजर से सत्संगियों के दिलों में ऐसी प्रेमपूर्ण रूहानी किरणें छोड़ीं कि सभी मस्ती में भाव-विभोर होकर नाचने लगे। उसी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/when-sai-ji-with-his-luminous-glance-released-spiritual-rays-into-the-hearts-of-his-devotees/article-81450"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-aashirwad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के समय एक दिन, हमेशा की तरह ईश्वर की भक्ति के भजन गाए जा रहे थे। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपनी नूरे-नजर से सत्संगियों के दिलों में ऐसी प्रेमपूर्ण रूहानी किरणें छोड़ीं कि सभी मस्ती में भाव-विभोर होकर नाचने लगे। उसी समय पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने अपने भावी गद्दीनशीन (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज) की ओर अपनी पवित्र दृष्टि डालते हुए वचन फरमाया, ये स्टेज पर बैठकर अंदर से ऐसी मस्ती छोड़ा करेंगे कि इनके आगे सौ-सौ साल के बुजुर्ग भी नाचा करेंगे। इसी संबंध में एक बार पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने यह भी वचन फरमाए, ‘तुम्हारे सामने तो झोटे भी नाचा करेंगे, अर्थात भारी शरीर वाले लोग भी नाचने लगेंगे।’ पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के उपरोक्त वचन सौ प्रतिशत सच साबित हुए और हो रहे हैं। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 09:27:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: ‘‘कहां हैं भाई!’’ वो जलालआणे वाले लंबे सरदार जी?</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज लगभग तीन सालों तक पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज के सत्संगों को सुनते रहे। 14 मार्च सन् 1954 की बात है, उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव धूकांवाली (जिला सरसा) में था। अपने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का शुभ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/where-is-he-brother-that-tall-sardar-from-jalalanas/article-81410"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज लगभग तीन सालों तक पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज के सत्संगों को सुनते रहे। 14 मार्च सन् 1954 की बात है, उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव धूकांवाली (जिला सरसा) में था। अपने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का शुभ संदेश पाकर आप जी अपनी पूजनीय माता माता जी को साथ लेकर गांव धूकांवाली पहुंच गए। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">सत्संग के पश्चात जब शाह मस्ताना जी नाम शब्द देने के लिए जाने लगे तो आप जी को चबूतरे पर खड़ा देखकर दूर से ऊंची आवाज में फरमाया, ‘‘हरबंस सिंह! आप भी अंदर चलकर हमारे मूढ़े के पास बैठ जाओ। आज रात आपको भी दाता सावण शाह जी के हुक्म से नाम की दीक्षा मिलेगी।’’ आप जी उसी समय अपने सतगुरु जी की आज्ञानुसार अंदर चले गए और मूढ़े के पास स्थान खाली न होने के कारण आप जी पीछे बैठ गए।’’</p>
<p style="text-align:justify;">इतने में पूजनीय शाह मस्ताना जी कमरे के अंदर आ गए और मूढ़े पर बैठते ही, आप जी को मूढ़े के पास बैठा हुआ न देखकर बोले ‘‘कहां हैं भाई!’’ वो जलालआणे वाले लंबे सरदार जी? क्या नाम है उनका… हरबंस सिंह।’’इस पर आप जी ने खड़े होकर प्रार्थना की कि, ‘‘साई जी! मैं यहां बैठा हूं।’’ तब पूजनीय शाह मस्ताना जी ने मधुर वाणी से फरमाया, ‘‘नहीं भाई, यहां पर आगे आकर हमारे मूढ़े के पास बैठो।’’ आप जी को अपने पास बैठाते हुए पूजनीय मस्ताना जी ने यथार्थ को प्रकट करते हुए फरमाया, ‘‘आपको इसलिए बैठा कर नाम देते है कि आपसे कोई काम लेना है, आपको जिंदाराम का लीडर बनाएंगे। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/where-is-he-brother-that-tall-sardar-from-jalalanas/article-81410</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 09:48:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: &amp;#8221;आपको काल नहीं बुलाएगा, आप सत्संग में आते रहो’’</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के सत्संग (गुरुगद्दी से पहले) लगातार सुनते रहे। नाम शब्द प्राप्त करने के उद्देश्य से जब भी आप जी ‘नाम’ के अभिलाषी लोगों की कतार में बैठते, तो पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/death-will-not-call-you-you-should-keep-coming-to-satsang/article-81366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज, पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के सत्संग (गुरुगद्दी से पहले) लगातार सुनते रहे। नाम शब्द प्राप्त करने के उद्देश्य से जब भी आप जी ‘नाम’ के अभिलाषी लोगों की कतार में बैठते, तो पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज हर बार यह कहकर आप जी को वहाँ से उठा देते, ‘‘भाई! अभी आपको नाम का हुक्म नहीं हुआ। आपको काल नहीं बुलाएगा, आप सत्संग में आते रहो।’’  MSG Maha Rahmokaram Month</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">एक बार जब पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज गांव गदराना में सत्संग फरमाने आए, तब आप जी की पूजनीय माता जी ने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज जी के पावन चरण कमलों में अरदास की, ‘‘पूजनीय दयालु दातार साईं जी! आप हजारों लोगों का उद्धार करते हो, मेरे इकलौते पुत्र को भी ‘नाम’ दान बख्श दो जी।’’  पूजनीय माता जी की इस अरदास पर पूजनीय बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘बेटा! सावन शाही मौज के हुक्म से इन्हें स्वयं बुलाकर नाम देंगे। अभी हुक्म नहीं हुआ।’’ MSG Maha Rahmokaram Month</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 09:30:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: सरसा के इस गांव में बेपरवाह जी बड़े पदचिह्न को देखकर अचानक रुक गए</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: यह घटना दिसंबर माह, सन् 1953 की है। एक दिन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज (गुरुगद्दी से पहले) अपने एक रिश्तेदार सरदार करतार सिंह जी से मिलने उनके गांव गदराना गए हुए थे। उन दिनों पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज भी गांव गदराना में ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/beparwah-mastana-ji-maharaj-showed-gods-feet-in-gadrana-village-of-sirsa/article-81336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-feild.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: यह घटना दिसंबर माह, सन् 1953 की है। एक दिन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज (गुरुगद्दी से पहले) अपने एक रिश्तेदार सरदार करतार सिंह जी से मिलने उनके गांव गदराना गए हुए थे। उन दिनों पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज भी गांव गदराना में ही स. नाहर सिंह जी के घर ठहरे हुए थे। पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने आठ दिन गदराना में रहकर सत्संग फरमाया। एक दिन गांव में भ्रमण करते हुए वे उस स्थान पर पहुंचे, जहाँ मिट्टी पर एक बड़े आकार का पैर का निशान (पदचिह्न) बना हुआ था। उस समय साईं जी के साथ कई सत्संगी भी उपस्थित थे। MSG Maha Rahmokaram Month</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">उस बड़े पदचिह्न को देखकर पूजनीय बेपरवाह साईं जी अचानक रुक गए। आप जी ने अपनी लाठी से उस निशान के चारों ओर गोल घेरा बना दिया और साध-संगत को संबोधित करते हुए जोश में फरमाया, ‘देखो भाई! यह रब की पैड़ है, यहाँ से स्वयं ईश्वर गुजरा है।’जब पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज साध-संगत का ध्यान उस पदचिह्न की ओर आकर्षित करते हुए फरमा रहे थे, तभी सरदार करतार सिंह भी वहाँ पहुंच गए।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया, ‘‘बाबा जी! यह तो हमारे रिश्तेदार श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी (जो पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम था) के पैरों के निशान हैं। जिन्हें मैं अभी-अभी विदा करके आया हूँ। हम दोनों पैदल इसी रास्ते से होकर गए हैं।’’ इस पर पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने अपने वचनों पर पुन: जोर देते हुए फरमाया, ‘‘इस मस्ताना सेवाधारी को नहीं मालूम कौन किसका रिश्तेदार है, पर यह जरूर ही ईश्वर के चरणों के निशान हैं।’’ MSG Maha Rahmokaram Month</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 09:36:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज साईं जी के दर्शन करने चोरमार पहुँचे!</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार की बात है कि पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज डेरा सच्चा सौदा की शाखा गांव चोरमार, जिला सिरसा में पधारे हुए थे। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज (गुरुगद्दी से पहले) अपने परिवार सहित पूजनीय साईं बेपरवाह जी के दर्शन करने चोरमार पहुँचे। उस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/shah-satnam-ji-remained-steadfast-even-in-bad-weather-to-have-darshan-of-sai-ji/article-81300"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-mahroom.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: एक बार की बात है कि पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज डेरा सच्चा सौदा की शाखा गांव चोरमार, जिला सिरसा में पधारे हुए थे। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज (गुरुगद्दी से पहले) अपने परिवार सहित पूजनीय साईं बेपरवाह जी के दर्शन करने चोरमार पहुँचे। उस समय कुछ अन्य लोग भी वहाँ आए हुए थे। अचानक मौसम खराब हो गया। आँधी आ गई और बादल गरजने लगे। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
<p style="text-align:justify;">मौसम में बदलाव देखकर अधिकतर लोग पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन किए बिना ही वापस चले गए। लेकिन आप जी और आपका परिवार मौसम की परवाह किए बिना अपने प्यारे सतगुरु जी के दर्शन के लिए वहीं रुके रहे। जब पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज तेरा वास से बाहर आए, तो आप जी पर अपनी पवित्र दृष्टि डालते हुए फरमाया- ‘देखो भाई, मक्खियां-मक्खियां उड़ गईं, शहद-शहद रह गया।’ MSG Maha Rahmokaram Month<br />
<strong>स्त्रोत: सच्चे रूहानी रहबर, भाग-2</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 14:36:18 +0530</pubDate>
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                <title>MSG Maha Rahmokaram Month: ‘‘पता नहीं साध-संगत कब से हमारा इन्तजार कर रही होगी&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[Param Pita Shah Satnam Ji: बात 1984 की है, उत्तर प्रदेश में हुए एक सत्संग के दौरान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने बताया ‘‘26वें सत्संग पर हमारा गला बैठ गया और बुखार भी था फिर भी हमने उसी तरह सत्संग किया। शरीर भी साथ नहीं दे रहा था लेकिन साथ की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/shah-satnam-singh-ji-maharaj-delivered-a-spiritual-discourse-even-while-suffering-from-a-104-degree-fever/article-81014"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/param-pita-ji-shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Param Pita Shah Satnam Ji: बात 1984 की है, उत्तर प्रदेश में हुए एक सत्संग के दौरान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने बताया ‘‘26वें सत्संग पर हमारा गला बैठ गया और बुखार भी था फिर भी हमने उसी तरह सत्संग किया। शरीर भी साथ नहीं दे रहा था लेकिन साथ की साथ हम यह सोचकर मलोट सत्संग करने चले गए कि यदि हम सत्संग करने ना गए तो संगत निराश होकर वापिस चली जायेगी।’’ आप जी ने 104 डिग्री बुखार होने के बावजूद सत्संग फरमाया। आप जी साध-संगत की सेवा के लिए अपनी सेहत की परवाह ना करते। कई बार सेवादार अर्ज करते कि आप जी सत्संग रद्द कर दें तो आप जी फरमाते, ‘‘पता नहीं साध-संगत कब से हमारा इन्तजार कर रही होगी और हम नहीं पहुँचे तो उनका दिल टूट जायेगा’’। MSG Maha Rahmokaram Month</p>
]]></content:encoded>
                
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                                            <category>आध्यात्मिक</category>
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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 09:32:57 +0530</pubDate>
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