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                <title>सीएसआर में औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भागीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान में देश में उपलब्ध जल स्रोत का एक प्रतिशत ही जल होने और दो तिहाई हिस्सा रेगिस्तानी होने से प्रदेशवासियों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती रही है। पहले से ही पानी की कम उपलब्धता के बावजूद पानी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/participation-of-industrial-establishments-in-csr/article-4397"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/crs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान में देश में उपलब्ध जल स्रोत का एक प्रतिशत ही जल होने और दो तिहाई हिस्सा रेगिस्तानी होने से प्रदेशवासियों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती रही है। पहले से ही पानी की कम उपलब्धता के बावजूद पानी के अत्यधिक दोहन से भूमिगत जल स्तर में निरंतर गिरावट के कारण प्रदेश का अधिकांश हिस्सा डार्क जोन में आया हुआ है। हांलाकि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तीन चरणों में जिस तरह से जल संरक्षण के योजनावद्ध प्रयास किए गए हैं उनके सकारात्मक प्रयास सामने आने लगे हैं। इन्द्रा गांधी नहर के साथ ही नर्मदा और यमुना का जल राजस्थान में लाने के ठोस प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में पानी की उपलब्धता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अच्छी बात है कि जल संरक्षण और प्रदेशवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मुहिम में प्रदेश के औद्योगिक प्रतिष्ठान आगे आए हैं और सोशल कारपोरेट रेस्पांब्लिटी निभाते हुए अपने कार्यक्षेत्र व आसपास के इलाकों में पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराने में सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर भागीदार बन रहे हैं। इस पुनीत कार्य को अमली जामा पहनाने में राजस्थान का उद्योग एवं सीएसआर विभाग समन्वयक की भूमिका निभाते हुए उत्प्रेरक का कार्य कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री श्री राजपाल सिंह शेखावत समय-समय पर औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सीधा संवाद कायम करते हुए सीएसआर गतिविधियों को विस्तारित कराने का प्रयास करते रहे हैं। राज्य सरकार के सीएसआर विभाग द्वारा दो सीएसआर समिटों का आयोजन कर औद्योगिक घरानों की सीएसआर में हिस्सेदारी बढ़ाने के सकारात्मक प्रयास किए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरुप और आयुक्त उद्योग व सीएसआर कृष्ण कुणाल द्वारा सीएसआर गतिविधियों को और अधिक विस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं इससे राज्य में सीएसआर गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर समिट के दौरान सीएसआर में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कंपनियों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने के साथ ही परस्पर समन्वय और सहयोग का वातावरण तैयार किया गया है। राज्य में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने व जल संरक्षण कार्यों में केयर्न इण्डिया, अंबुजा सीमेंट, बॉस्क, जेके टायर, राजस्थान स्पिनिंग व विविंग मिल्स, हिन्दुस्तान जिंक, इण्डिया सीमेंट, इनटेक फार्मा, न्यूक्लियर पावर, इण्डियन आॅयल सहित कई औद्योगिक संस्थाआें द्वारा अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए उल्लेखनीय योगदान दिया जा रहा है। केयर्न इण्डिया द्वारा तो बाड़मेर जिले में करीब 100 करोड़ की लागत की 2022 तक संचालित होने वाली परियोजना का संचालन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन अमृृत परियोजना: जल स्तर का अत्यधिक नीचे होना और उपलब्ध पानी में 3000 तक टीडीएस होने के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पानी की स्थिति में बाड़मेर जिले के नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए केयर्न इण्डिया आगे आई है। राज्य सरकार के सहयोग व समन्वय के साथ केयर्न इण्डिया जनवरी, 15 से मार्च 22 तक की 100 करोड़ की लागत की परियोजना पर काम करते हुए जीवन अमृृत योजना का संचालन कर रही है। जीवन अमृत योजना का मुख्य उद्देश्य जिले के वाशिंदों को उनके निवास के एक किमी के दायरें में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाड़मेर जिला बड़ा होने और दूर-दूर ढ़ाणियों में आबादी बसे होने से जल की उपलब्धता अधिक चुनौती पूर्ण होने के बावजूद बाड़मेर के 800 गांव ढ़ाणियों में रहने वाले लोगों तक शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। 330 आरओ प्लांट लगाकर पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही जल रथ के माध्यम से भी पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इनका संचालन भी स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन अमृत प्रोजेक्ट के माध्यम से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के साथ ही जलजनित बीमारियों की रोकथाम संभव हो पाई है। बाड़मेर जिले के नागरिकों के लिए जीवन अमृृत परियोजना वरदान सिद्ध हो रही है। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा उदयपुर में सीपीटी लगाने के साथ ही उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, चितोडगढ़ आदि जिलों में वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चरों के निर्माण के साथ ही एनिकटों का निर्माण कराकर पेयजल की उपलब्धता सुनिष्चित करने का कार्य किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरओ प्लांट: जयपुर के आसपास सांगानेर व बस्सी तहसील के फ््लोराइड प्रभावित गांवों में बॉस्क कंपनी द्वारा आरओ प्लांटस लगाने की पहल की गई है। बॉस्क द्वारा पहला आरओ प्लांट गोनेर में लगाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर के तहत बॉस्क द्वारा गोनेर के बाद श्रीराम की नांगल, सिरोली, भूरथल, मोहनपुरा, वाटिका, विधानी, अषवाला, मुहाना और सांभरिया मं आरओ प्लांट के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। करीब डेढ़ करोड़ की परियोजना में 50 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है। इंटेक फार्मा द्वारा पाली के बर पुलिस चैकी और कस्तूर बा रेजिडेंषियल स्कूल में आरओ सिस्टम उपलब्ध कराया है। इण्डियन आॅयल कॉरपोरेशन द्वारा सीएसआर के तहत जयपुर के सेठ आनंदी लाल मूक बधिर विद्यालय में बोरबेल लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन आॅफ इण्डिया द्वारा चितोडगढ़ के जुझाला, लसाना, रतनपुरा, मंडेसरा, खलगांव, चेनपुरा, बहेलिया, कोलपुरा, नाली, फूटपाल, डांगडमउ खुर्द, गणेशपुरा और दूध तलाई आदि गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर टेंक, वोरवैल, पंपिंग व्यवस्थाएं सुनिष्चित की गई है। इसी तरह से बांसवाड़ा के तलवारा ब्लाक के नोखला में फ्लोरिस के दुष्प्रवाह से रोकने के लिए पेयजल और अवेयरनेस कार्यक्रम चलाया गया है। बांसवाड़ा के ही घाटोल, थाना, हुरडा सेजा आदि गांवों में राजस्थान स्पिनिंग एवं विविंग मिल्स द्वारा अन्य कार्यों के साथ ही पेयजल की उपलब्धता सुनिष्चित की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंबूजा सीमेंट राजस्थान में एसीएफ द्वारा सषक्त जल प्रबंधन अभियान में पाली के राबड़ियावास, नागौर के मारवाड़ मूंडवा और झुंझुंनू के चिडावा इलाके के 150 गांवों में अभियान चलाया जा रहा है। एसीएफ द्वारा चलाए जा रहे अभियान से लाखों किसानों को पीने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्धता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेके टायर एण्ड इण्डस्ट्रीज सेवा मंदिर के तहत पंचायत सचिव, सरपंच, अध्यापकों और ग्रामीणों से समन्वय बनाते हुए वाटर टेंक, हैण्डपंपों की रिपेयरिंग, जल वितरण के लिए पाइप लाइन व्यवस्था आदि में सहयोग किया जा रहा है। देश के अन्य हिस्सों में भी जल संरक्षण व शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में औद्योगिक प्रतिष्ठानों को आगे आने की पहल करनी होगी ताकि सबको शुद्ध पेयजल मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 08:09:05 +0530</pubDate>
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                <title>अर्थव्यवस्था में जमीनी समस्याओं का हो समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[अर्थव्यवस्था के तीन अंग हैं- प्राथमिक, औद्योगिक एवं सर्विस या सेवा क्षेत्र। ये तीनों अंग आपस में इंटरएक्ट करते हैं। प्राथमिक क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र सर्विस क्षेत्र को। इसी भांति सर्विस सेक्टर भी औद्योगिक क्षेत्र एवं प्राथमिक क्षेत्र को प्रभावित करता है। तीनों का एकरूप और सबल रूप, अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/solution-for-ground-problems/article-776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था के तीन अंग हैं- प्राथमिक, औद्योगिक एवं सर्विस या सेवा क्षेत्र। ये तीनों अंग आपस में इंटरएक्ट करते हैं। प्राथमिक क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र सर्विस क्षेत्र को। इसी भांति सर्विस सेक्टर भी औद्योगिक क्षेत्र एवं प्राथमिक क्षेत्र को प्रभावित करता है। तीनों का एकरूप और सबल रूप, अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राथमिक सेक्टर कृषि है। कृषि उद्योगों पर आधारित है तो उद्योग कृषि पर आधारित, सेवा क्षेत्र (ट्रांसपोर्टेशन, संचार माल ढुलाई, जल-थल-वायु परिवहन, बैकिंग आदि) इन सबको गति देता है। अगर यह क्षेत्र मजबूत नहीं है तो अर्थव्यवस्था को गति पकड़ने में मुश्किल होगी। भ्रष्ट सत्ता और भ्रष्ट प्रशासन अर्थव्यवस्था के लिए दीमक रूप हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं के सहारे समानांतर अर्थव्यवस्था रूप लेती है। सत्ता और प्रशासन इस व्यवस्था के निर्माता हैं। भ्रष्टाचार आम आदमी की मुश्किलें बढ़ाता है। उद्योग तो अपने उत्पादनों की कीमत बढ़ा लेते हैं। मूल्य बढ़ने से आम आदमी परेशान हो जाता है। अर्थव्यवस्था हीन स्थिति में आ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक विकास की पहली शर्त देश में शांति और व्यवस्था का स्थायी होना है। अगर देश शांत नहीं है तो इसका खामियाजा अर्थतंत्र भुगतेगा और आम आदमी भी। भारत बहुत बड़ा है, इसमें कश्मीर भी है, छत्तीसगढ़ और बंगाल तथा पंजाब भी हैं। आर्थिक विकास के लिए देश की सम स्थिति बड़ा योगदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक नाकेबंदी और अशांति अर्थव्यवस्था की सांसें रोकती है, आतंकवाद का असर सत्ता नहीं, अर्थव्यवस्था और आम आदमी भुगतता है। अर्थशास्त्री अर्थव्यवस्था के दृष्टा हैं। वे उसके अंगों की पड़ताल करते हैं एवं कमजोर अंगों को गति देने हेतु उचित दवा इंजेक्ट करते हैं। प्रशासनिक तंत्र को दिशा दिखाते हैं, सत्ता को अर्थव्यवस्था दिखाकर, उसके अंगों की स्थिति से वाकिफ कराते हैं तथा विकास कार्य गति पर लाने के उपाय बताते हैं। उनके प्रभावों से वाकिफ कराते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था में यह स्थिति अधिक स्पष्ट हुई है। उपभोक्तावाद ने कृषि सेक्टर को अत्यधिक प्रभावित किया है। किसान अपनी आवश्यकता की चीजों की निर्धारित कीमत देता है, लेकिन उसे अपनी उत्पादित चीजों की बाजार द्वारा निर्धारित कीमत ही मिलती है। मंडी व्यवस्था में उसकी उत्पादित वस्तुएं सड़क पर पड़ी रहती हैं, ग्राहक नहीं मिलते।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्टे बरसात उसकी मेहनत को बीच सड़क पर मार देती है। देश का प्राथमिक क्षेत्र कृषि चतुराई के हाथों चित हुआ कराह रहा है। जान-बूझकर कृषि उपज को बर्बाद किया जाता है, लागत मूल्य भी नहीं दिया जाता। किसान आत्महत्या जन्म लेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हावी उद्योग व्यवस्था और पूंजीपतियों की विषैली भावनाएं कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को खा जाती है, मंडी में कीमत गिरकर जमीन पर आ जाती है, किसान लुट जाता है और उपभोक्ता मंडी के 10 रुपये किलो अनाज का अपने क्षेत्र में 26-27 रुपए देता है। माल पुराना, नई कीमतें। मंडी में 26-27 रुपये किलो भाव उत्पादकों के लिए नहीं है, बेचने वालों के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्तातंत्र अपनी मौज में है प्रशासन को सत्ता तंत्र की चिंता है, उपभोक्ताओं की नहीं। खाद्य उत्पादन एवं आपूर्ति मंत्री अपनी कोठी में बैठा अंगूर और मेवे खाता है, अर्थव्यवस्था का अर्थ उपभोक्ता की लूट नहीं है, न आर्थिक विकास की ऐसी परिभाषा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग इस नीति को देखता है और चुप हो जाता है। अर्थव्यवस्था के अंग जमीन से जुड़े हैं। कृषि (प्राथमिक) क्षेत्र भी और औद्योगिक व सेवा क्षेत्र भी। इनके रूप भी जमीन पर तैयार होते हैं, इन्हें अर्थव्यवस्था की जमीन और जमीन के आदमी को देखकर तैयार किए जाना चाहिए। उत्पादकों को देखकर तैयार की जानी चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong>बी.एल. माली </strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 00:07:13 +0530</pubDate>
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