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                <title>महंगाई का हल आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई ने आम आदमी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जनवरी में महंगाई की दर 7.59 फीसदी दर्ज की गई है। दिसंबर 2019 में यह 7.35 फीसदी स्तर पर रही थी। बड़ी हैरानी की बात है कि दिसंबर में ही इस बात का अनुमान लग गया था कि जनवरी में महंगाई 8 फीसदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/solution-of-inflation-is-necessary/article-13036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/solution-of-inflation.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">महंगाई ने आम आदमी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जनवरी में महंगाई की दर 7.59 फीसदी दर्ज की गई है। दिसंबर 2019 में यह 7.35 फीसदी स्तर पर रही थी। बड़ी हैरानी की बात है कि दिसंबर में ही इस बात का अनुमान लग गया था कि जनवरी में महंगाई 8 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर महंगाई को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसका परिणाम है कि महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। (Solution of inflation)</h4>
<h4 style="text-align:justify;">आर्थिक विशेषज्ञों की ओर से सलाह देने व सावधान करने के बावजूूद हालातों में कोई सुधार न होना यह चिंतनीय है। समस्या आ जाती है लेकिन लम्बे समय तक समस्या का हल न होना, बड़ा मुद्दा है। आमजन में भी यह धारणा बनने लगी है कि महंगाई का कोई हल नहीं। बेरोजगारी व आर्थिक सुस्ती की स्थिति में महंगाई की चुभन और भी तीखी हो जाती है। महंगाई के आंकड़ों को झुठलाया नहीं जा सकता क्योंकि यह आंकड़े सरकार का अपना विभाग (केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय) ही जारी करता है। अगर देखा जाए तो विगत वर्ष नवंबर में सावधान होने की सख्त जरूरत थी जब महंगाई 5.54 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने 4 फीसदी दर से ऊपर महंगाई तय की हुई है। मौजूदा हालातों में यह तय आंकड़े को पार कर दो गुणा के करीब के जा पहुंची है। सही में विकास की परिभाषा तब ही सम्पूर्ण होती है जब आवश्यक वस्तुएं आम आदमी की पहुंच में होती हैं। नि:संदेह जनवरी में प्याज सहित अन्य सब्जियों के भावों में कमी आई है लेकिन दालों व अन्य अनाज की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। (Solution of inflation)</h4>
<h4 style="text-align:justify;">महंगाई को रोकने के लिए केवल तुरंत प्रभाव से लिए निर्णय ही काफी नहीं होते बल्कि आर्थिक नीतियों व कार्यक्रमों को लोकहितैषी बनाने की बहुत ही आवश्यकता है। अभी तक सरकारों के अधिकतर निर्णय विपक्ष में ही रहे हैं। एक तरफ लोक भलाई की योजनाएं चलाई जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ किसी न किसी तरीके से जनता पर बोझ डाला जा रहा है। महंगाई को रोकने के लिए विभिन्न मंत्रालयों की सांझी समिति गठित करने की सख्त आवश्यकता है क्योंकि महंगाई बढ़ने का कारण किसी विभाग से संबंधित नहीं है। सभी मंत्रालयों को संतुलित नीतियां अपनाकर पूरी वचनबद्धता के साथ काम करना होगा।</h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2020 11:54:45 +0530</pubDate>
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                <title>समर्थन मूल्य बढ़ाना संकट का हल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/increasing-support-costs-is-not-a-crisis-solution/article-4762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/dhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने खरीफ की फसलों के खासकर धान के भाव में 200 रुपये का रिकार्ड वृद्धि कर किसानों को खुश करने का प्रयास किया है। बेशक यह दुरुस्त कदम है पर ऐसे कदम पहले ही उठाए जाने की जरूरत थी। पिछले वर्षों में मोदी सरकार ने फसलों के न्यूनतम भावों में मामूली सी बढ़ोत्तरी की थी। भले ही इस बढ़े भाव के पीछे अगले लोकसभा चुनाव मुख्य कारण हंै फि र भी इसे कृषि संकट का हल नहीं माना जा सकता। यह भी तथ्य हैं कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने से भी कृषि संकट हल नहीं होता। कमिशन की सिफारिशें खर्चे व मुनाफे पर आधारित हैं। आज का संकट सिर्फ कृषि का घाटा होने तक ही सीमित नहीं बल्कि कृषि का अस्तित्व खत्म होने का है। यदि किसान को धान का भाव ज्यादा मिल भी गया तो वह भूजल के खत्म होने की हालत में कृषि कैसे करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">धान की कीमत बढ़ने से किसान के लिए फायदेमंद हो या ना हो लेकिन यह भूजल के संकट को और अधिक गंभीर करेगा। केंद्र सरकार ने भाव तय करते समय फसली विभिन्नता को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया है। धान के साथ-साथ मक्की तथा अन्य फसलों की बिजाई बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। जहां तक कृषि लागत खर्चों की बात है डीजल का रेट लगातार बढ़ रहा है, जिससे धान के रेट में बढ़ोत्तरी किसानों के लिए कोई बड़ी राहत नहीं है। खादों पर सब्सिडी लगातार घटाई जा रही है। बीज, कृषि के औजार मंहगे हो रहे हैं। इसलिए कृषि का संकट महज कम खरीद मूल्य की देन नहीं बल्कि जमीन की सेहत तथा पानी की शुद्धता की आवश्यक उपलब्धता पर भी निर्भर है। देश का भला किसानों की आर्थिक खुशहाली के साथ भविष्य में धरती पर पानी की बचत में है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल कृषि संबंधी नीतियां राजनीतिक चुनावी मत्था पच्ची में घिर गई हैं। खेती विशेषज्ञों की रिपोर्टों को पढ़ा तक नहीं जाता। कहीं ऐसा ना हो कि कृषि की एक कमी को दूर करने के लिए कोई दूसरी गलती हो जाए। स्वामीनाथन की सिफारिशें जायज हैं, जिन्हें पूरा करने के साथ-साथ मौजूदा परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा जो आज की वास्तविकता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jul 2018 06:14:56 +0530</pubDate>
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                <title>कश्मीर के हल के लिए बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र की मोदी सरकार ने अटल बिहारी बाजपेयी के फार्मूले पर वापिसी करते बातचीत द्वारा कश्मीर मसले को हल करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस संबंधी नारा दे चुके हैं, ‘न गोली से, न गाली से, गले मिलने से हल निकलेगा’। इस कार्य के लिए पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/negotiation-for-solution-of-kashmir/article-3451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केन्द्र की मोदी सरकार ने अटल बिहारी बाजपेयी के फार्मूले पर वापिसी करते बातचीत द्वारा कश्मीर मसले को हल करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस संबंधी नारा दे चुके हैं, ‘न गोली से, न गाली से, गले मिलने से हल निकलेगा’। इस कार्य के लिए पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बातचीत का रास्ता लोकतंत्र व सद्भावना से जुड़ा है। अगर इस तरीके से बात किसी सही दिशा में चलती है तो यह सरकार की उपलब्धि होगी, लेकिन जहां तक पिछले तर्जुबे की बात है वह कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है। पहले भी विभिन्न पार्टियों के सीनीयर नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर पहुंचा था लेकिन सैयद अली शाह गिलानी जैसे नेताओं ने घर के दरवाजे ही बंद कर दिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह यूपीए सरकार के समय भी बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया, जिसकी बातचीत तो सद्भावना भरे माहौल में हुई लेकिन मसले के हल के लिए शुरुआत तक न हो सकी। दरअसल कश्मीर मसले में कई पेचीदगीयां आ गई हैं। सख्ती और बातचीत दोनों तरफ से जरूरी है। आतंकवाद से निपटने के लिए सख्त एक्शन लिए बिना गुजारा नहीं है। दूसरी तरफ जनता की सुरक्षा की बात है। पिछले वर्ष सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की घटनाएं ही बड़ी चुनौती बन गई थी। बुरहान वानी जैसे आंतकवादी के मारे जाने के बाद प्रदर्शन भी होते रहे। आम जनता को गुमराह होने से बचाने के लिए सेना व जनता के बीच के रिश्ते को मजबूत करना होगा। जनता को आतंकवाद के खिलाफ खड़ा करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">युवा पीढ़ी को रोजगार व कल्याणकारी कार्यांे की तरफ लाने की मुख्य जरुरत है। जनता व अलगाववादिओं के मसले अलग-अलग हैं। अलगाववादी सीधे तौर पर पाकिस्तान की जय-जयकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता के मसले सुरक्षा बलों व प्रशासन से संबंधित हैं। यह बात भी विचार योग्य है कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग पक्षों से बातचीत कर कोई सांझी राय तैयार कर सकेगा। वैसे केन्द्र द्वारा यह छूट दी गई है कि दिनेश्वर जिससे भी चाहें उससे बातचीत कर सकते हैं। नाजुक बने हुए हालातों को ठीक करने के लिए बातचीत का कोई भी प्रयास ठोस साबित हो तो मिशन की सार्थकता बनेगी। किसी भी उठाए गए कदम से सिर्फ समय की बर्बादी न हो, इसलिए दृढ़ इच्छा शक्ति को बरकरार रखना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2017 04:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संतुलित विकास ही मुश्किलों का समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई में एक रेलवे स्टेशन के पुल पर भगदड़ से 27 मौतें होना दु:खद हादसा है। भले ही रेलवे व राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा कर दी है लेकिन हादसे ने जो गहरे घाव दिए हैं उसे अब समय ही भर सकता है। दरअसल हादसे का कारण संतुलित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">मुंबई में एक रेलवे स्टेशन के पुल पर भगदड़ से 27 मौतें होना दु:खद हादसा है। भले ही रेलवे व राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा कर दी है लेकिन हादसे ने जो गहरे घाव दिए हैं उसे अब समय ही भर सकता है। दरअसल हादसे का कारण संतुलित विकास न होना है। देश में कुछ प्रोजेक्ट ऐसे चल रहे हैं जहां हजारों करोड़ों रुपए खर्च किए जाने हैं। यह महंगे प्रोजैक्ट भी जरूरी हैं लेकिन दूसरी तरफ भी ध्यान देना जरूरी है, जहां हालात दर्दनाक बने हुए हैं। मुंबई का यह पुल बहुत पुराना था जबकि पुल की मियाद मुताबिक जनसंख्या बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। शिवसेना ने दो साल पहले भी पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र लिखकर पुल चौड़ा करने की मांग की। रेल मंत्री ने अनुदान की कमी की दुहाई देते हुए खुद को इस काम के लिए बेबस बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुल कोई इतना बड़ा प्रोजेक्ट नहीं था। कुछ करोड़ों की ही मार थी। केंद्र सरकार ने देश में कई जगह लंबे चौड़े पुलों पर सुरंगों का निर्माण किया, जिन पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन देश में मुंबई की तरह सैकड़ों पुराने पुल हैं जहां बहुत भीड़ रहती है। विशेष तौर पर एशिया के सबसे बड़े रेल जंक्शन भटिंडा में भीड़ बढ़ने के कारण यहां का ओवरब्रिज बहुत छोटा पड़ गया है। यहां यात्री पुल की सीढ़ियों से पहले कतारों में लगते नजर आते हैं। मुंबई के हादसे से सबक लेकर भटिंडा व अन्य शहरों में पुल चौड़े करने चाहिए। अनुदान की कमी उस समय बेतुकी बात लगती है, जब देश में और स्थानों पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हों। मानव रहित फाटकों की समस्या भी पिछले 70 सालों से अनुदान की कमी के कारण लटक रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब सरकार रेल को हाईटेक करने की बात करती है, तंग व पुराने पुल और मानव रहित फाटक सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। कोई भी काम हादसों के इंतजार के बिना होना चाहिए। देरी नुकसानदेय है। विश्व की सबसे बड़ी चौथी अर्थव्यवस्था वाले देश में अनुदान की कमी के कारण लोगों का आए दिन रहना, वह भी तब, जब दुर्घटना सरकार की लापरवाही से घटित हुई हो, चिंता का विषय है। सरकार प्रत्येक क्षेत्र को बराबर पहल दे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Sep 2017 04:07:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ ने कहा 2022 तक आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ: राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 2022 तक कश्मीर, आतंकवाद, नक्सलवाद और नॉर्थ-ईस्ट में जारी विद्रोह का खात्मा हो जाएगा। इस अवसर पर राजनाथ ने सभी को भारत को स्वच्छ, गरीबी, भ्रष्टाचा, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद से मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई। मोदी ने स्वच्छता जन आंदोलन बनाया शाह ने कहा मैं प्रधानमंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rajnath-saying-solution-to-terror-will-be-found-by-2022/article-3223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/rajnath.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ: </strong>राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 2022 तक कश्मीर, आतंकवाद, नक्सलवाद और नॉर्थ-ईस्ट में जारी विद्रोह का खात्मा हो जाएगा। इस अवसर पर राजनाथ ने सभी को भारत को स्वच्छ, गरीबी, भ्रष्टाचा, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद से मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मोदी ने स्वच्छता जन आंदोलन बनाया</h1>
<p style="text-align:justify;">शाह ने कहा मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले ‘न्यू इंडिया’ को साकार करने का वादा किया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता के महत्व पहचाना और इसे एक अभियान का रूप दिया था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे एक जन आंदोलन बनाया है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">संकल्प से सब मुमकिन</h1>
<p style="text-align:justify;">राजनाथ ने कहा 1857 में आजादी की पहली लड़ाई से अब तक 85 साल में भारत ने देश की ताकत को पहचाना और इसे एकजुट रखा।1942 में जब महात्मा गांधी ने कहा- करो या मरो, पूरा देश उनके साथ एकजुट होकर खड़ा था…यह संकल्प का ही नतीजा था, जिसकी वजह से पांच साल बात इसका नतीजा मिला। अगर भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किए जाने के पांच साल बाद देश आजाद हो सकता है तो 2017 में न्यू इंडिया का संकल्प लेकर इसे 2022 तक पूरा क्यों नहीं किया जा सकता?  राजनाथ ने कहा कि पांडवों ने भी उनके संकल्प और दृढ़ता की वजह से ही महाभारत में जीत हासिल की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/rajnath-saying-solution-to-terror-will-be-found-by-2022/article-3223</link>
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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 22:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>औपचारिकता नहीं, समस्या का समाधान चाहिए: धनखड़</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि मंत्री ने परिवेदना समिति की बैठक में निपटाई शिकायतें रोहतक (सच कहूूँ न्यूज)। प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें शिकायतों के संबंध में उत्तर की औपचारिकता नहीं बल्कि समाधान चाहिए। धनखड़ शनिवार को विकास सदन में जिला लोकसम्पर्क एवं परिवेदना समिति की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/no-formalities-solution-needs-to-resolved-dhankar/article-3083"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/dhankar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">कृषि मंत्री ने परिवेदना समिति की बैठक में निपटाई शिकायतें</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूूँ न्यूज)।</strong> प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें शिकायतों के संबंध में उत्तर की औपचारिकता नहीं बल्कि समाधान चाहिए। धनखड़ शनिवार को विकास सदन में जिला लोकसम्पर्क एवं परिवेदना समिति की मासिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कुल 12 शिकायतें रखीं गई जिनमें से सात शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि शेष पांच शिकायतों को अगली बैठक के लिए लंबित रखा गया। बाबा मस्तनाथ नगर, गढ़ी बोहर की शिकायत के संबंध में बिजली निगम के अधिकारियों ने कृषि मंत्री को बताया कि कॉलोनी में नये कनैक्शन देने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है और जल्द ही सभी उपभोक्ताओं को बिजली कनैक्शन जारी कर दिया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश</h2>
<p style="text-align:justify;">गांव सांपला के वार्ड नम्बर 11 की निवासी शंकुलता की शिकायत पर कृषि मंत्री ने फोन करके स्वयं पूछा की क्या उनकी शौचालय बनाने की शिकायत का समाधान हो गया है। इस पर शिकायतकर्ता महिला ने जवाब दिया कि शौचालय निर्माण की पहली व दूसरी किस्त जारी हो चुकी है और शौचालय का निर्माण पूरा हो गया है। लाखनमाजरा निवासी सरपंच सोनिया व अन्य की पेयजल संबंधी शिकायत के संबंध में कृषि मंत्री ने जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं महम निवासी बलजीत सिंह की कर्ज लेने संबंधी शिकायत को गम्भीरता से लिया और इस संदर्भ में चंडीगढ स्थित उच्च अधिकारियों से टेलीफोन पर बात कर निर्देश दिये कि मधुमक्खी पालन के लिए कर्ज न देने वाले बैंक अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करके उसे आगामी कार्यवाही के लिए भेजा जाए। बैठक में उपायुक्त अतुल कुमार, पुलिस अधीक्षक पंकज नैन, अतिरिक्त उपायुक्त अजय कुमार, एसडीएम अरविंद मल्हाण, नगराधीश महेंद्रपाल, एसडीएम महम निर्मल नागर, हुडा सम्पदा अधिकारी अमित गुलिया, एमडी शुगर मिल रोहतक प्रदीप अहलावत, तहसीलदार गुलाब सिंह मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/no-formalities-solution-needs-to-resolved-dhankar/article-3083</link>
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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 08:49:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सद्भावना से हो राम मंदिर के मुद्दे का समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण करने के मामले में सभी राजनीतिक दलों को तीन माह में मामला सुलझाने के लिए कह दिया है। परिस्थितियों के अनुसार अदालत का फैसला न केवल ठीक है बल्कि यह देश की सद्भावनापूर्ण संस्कृति पर केंद्रित है। 1992 में बाबरी मस्जिद गिराने के बाद देश में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/solution-to-the-issue-of-ram-temple-by-goodwill/article-3065"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ram-mandir2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण करने के मामले में सभी राजनीतिक दलों को तीन माह में मामला सुलझाने के लिए कह दिया है। परिस्थितियों के अनुसार अदालत का फैसला न केवल ठीक है बल्कि यह देश की सद्भावनापूर्ण संस्कृति पर केंद्रित है।</p>
<p style="text-align:justify;">1992 में बाबरी मस्जिद गिराने के बाद देश में बड़े स्तर पर सांप्रदायिक दंगे हुए लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता गया देश की जनता ने शांतिपूर्वक समाधान निकालने पर जोर दिया। भले यह मुद्दा राजनैतिक रंगत ले चुका है फिर भी इससे जुड़े कुछ दल इस बात के लिए राजी थे कि धार्मिक स्थानों के नाम पर देश में तनावपूर्ण परिस्थितियां पैदा करना ठीक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह काफी कष्टपूर्ण है कि बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के मुद्दे पर सभी पार्टियों के नेता आपसी बातचीत से हल निकालने की जहमत भी नहीं उठा रहे। अदालती कैंपस में यह नेता इकठ्ठे बैठकर चाय-पानी भी पीते रहे। बाबरी मस्जिद के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी के निधन पर हिंदू नेताओं ने भी दु:ख प्रकट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि इस सद्भावना को देखा जाए तो अदालत से बाहर बातचीत से ही इस मामले को सुलझा लेना चाहिए, इसमें कोई रूकावट नहीं होनी चाहिए। राजनैतिक व सामाजिक तौर पर भी वर्तमान समय में मंदिर के मुद्दे पर कोई सार्वजनिक विरोध नहीं है। पिछले कुछ सालों में देश के कई क्षेत्रों में हिंदू-सिखों ने मस्जिदों के निर्माण में मुस्लिम भाईचारे का सहयोग किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में देश के बंटवारे दौरान बंद पड़ी एक मस्जिद को हिंदू-सिखों ने मुकम्मल करवाया है। राजनीतिक दल इस मामले में नाजायज लाभ लेने से भी संकोच कर रहे हैं। अब भी हालात यह हैं कि कुछ मुस्लिम संगठन अयोध्या-बाबरी मस्जिद वाली जगह पर राम मंदिर बनाने के लिए सहमत हैं। इस मुद्दे पर लंबे समय तक संघर्ष करने वाली भाजपा भी मंदिर के निर्माण हेतु सहमति पर जोर दे रही है। ‘</p>
<p style="text-align:justify;">अब मंदिर वहीं बनाएंगे’ की जगह पर ‘मंदिर जरुर बनाएंगे’ से सहमति की सुर और समझ सुनाई पड़ रही है। अदालत द्वारा दिए गए समय और सोच का लाभ उठाकर मुद्दे को सुलझाने में देरी नहीं की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/solution-to-the-issue-of-ram-temple-by-goodwill/article-3065</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2017 23:34:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़कों के गड्ढ़े बने राहगीरों के लिए मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार व विभाग को जन हित की समस्याओं का रखना चाहिए ध्यान: ग्रामीण गड्ढ़ों में जमा बरसाती पानी के कारण रोजाना घटित हो रहे हैं सड़क हादसे दूषित पानी के कारण बीमारियों फैलने की आशंका लोगों ने की समाधान की मांग अमलोह(अनिल)। अमलोह से बुग्गा को जाने वाले मुख्य मार्ग में जगह-जगह बने बड़े -बड़े […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/people-demand-a-solution-to-the-problem/article-2118"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/road-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सरकार व विभाग को जन हित की समस्याओं का रखना चाहिए ध्यान: ग्रामीण</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गड्ढ़ों में जमा बरसाती पानी के कारण रोजाना घटित हो रहे हैं सड़क हादसे </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दूषित पानी के कारण बीमारियों फैलने की आशंका </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोगों ने की समाधान की मांग </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमलोह(अनिल)।</strong> अमलोह से बुग्गा को जाने वाले मुख्य मार्ग में जगह-जगह बने बड़े -बड़े गड्ढे जहां रोजमर्रा की ही हादसों का कारण बन रहे हैं वहीं इस इलाके के कई गांवों में सड़कों पर जमा बरसात का पानी लोगों के लिए बड़ी सरदर्दी बना हुआ है क्योंकि टूटी हुई सड़कों के गड्ढों में जमा हुए बरसात के पानी के कारण राहगीरों को इन सड़कों पर से गुजरना बहुत मुश्किल हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिक्रयोग है कि गांव टिब्बी से राईयेवाल को जाने वाली सड़क पर पिछले कई दिनों से जमा हुए पानी के कारण आम लोगों को अपने काम-काज के लिए जाने और स्कूलों के विद्यार्थियों को भी रोजमर्रा आने-जाने में अनेकों दिक्कतें पेश आ रही हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं इस दूषित पानी में कई भयानक बीमारियां फैलाने वाले मच्छर भी पैदा हो रहे हैं और बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने संबंधित विभाग से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। साथ ही गांव चैहलां से लक्खा सिंह वाला को जाने वाली निर्माणाधीन सड़क का निर्माण कार्य धीमी गति के साथ चलने के कारण लोगों को इस सड़क के ऊपर से गुजरना मुश्किल हो गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सड़क निर्माण के समय नियमों का पालन जरूरी: गांववासी</h2>
<p style="text-align:justify;">इस बारे में बातचीत करते हुए गांव लक्खा सिंह वाला के काका सिंह और अमलोह के राजीव कृष्ण शर्मा,हरजीत सिंह ने कहा कि गांवों में टूटीं हुई सड़कों का निर्माण पहल के आधार पर होना चाहिए और सड़क बनाने समय पूरे नियमों की पालना की जानी चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे सड़कों के आस-पास पैदल चलने के लिए बने रास्ते से नीची सड़कें पर पानी इकट्ठा न हो सके। इलाका निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों का पुनर्निमाण तेज गति के साथ करवाया जाये।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पारदर्शी ढंग से बनाई जाती हैं सड़कें : एसडीओ</h2>
<p style="text-align:justify;">इस बारे में संपर्क करने पर लोक निर्माण विभाग के एसडीओ महिंद्र गर्ग ने कहा कि विभाग की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत ही पूरे पारदर्शी ढ़ंग के साथ सड़कें बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि लक्खा सिंह वाला को जाने वाली सड़क के निर्माण का काम तेज गति के साथ करवाया जा रहा है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/people-demand-a-solution-to-the-problem/article-2118</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 01:04:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंडर ब्रिज में जमा पानी ने बढ़ाई समस्याएं</title>
                                    <description><![CDATA[समस्या: वार्ड नंबर 14 के निवासियों को बीमारियां फैलने का बना डर समस्या के जल्द समाधान की मांग ट्रैफिक व्यवस्था गड़बड़ाई मानसा (सुखजीत मान)। स्थानीय शहर के अंडरब्रिज में से पानी की निकासी न होने के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बहुत ही गड़बड़ाई हुई है। इससे पहले अंडर ब्रिज चलता होने के कारण कुछ वाहन उधर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/demand-for-solution-of-problem/article-1992"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/under-bridge.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">समस्या: वार्ड नंबर 14 के निवासियों को बीमारियां फैलने का बना डर</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>समस्या के जल्द समाधान की मांग</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>ट्रैफिक व्यवस्था गड़बड़ाई</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसा (सुखजीत मान)।</strong> स्थानीय शहर के अंडरब्रिज में से पानी की निकासी न होने के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बहुत ही गड़बड़ाई हुई है। इससे पहले अंडर ब्रिज चलता होने के कारण कुछ वाहन उधर की गुजर जाते थे परन्तु अब ऐसा नहीं हो रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">बस स्टैंड से मुख्य बाजार व गौशाला रोड को जाती सड़क पर तो वाहन कछुआ की चाल चलते हैं वहीं टूटी सड़क पर वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण कारण सारा दिन जाम जैसी स्थिति बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमर शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला चौंक के पास नाली की सफाई करने के लिए उस ऊपर से उठाईं गई लोहे की जालियों के कारण भी ट्रैफिक व्यवस्था में गड़बड़ा गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब हालात यह बने हुए हैं कि आम दिनों में यहां ट्रैफिक पुलिस की अधिक जरूरत नहीं पड़ती परन्तु गतदिवस एक ट्रैफिक कर्मचारी यहीं अपनी ड्यूटी देता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर में रेलवे फाटक वाली सड़क के रास्ते से बड़े वाहन लेजाने पर रोक लगी हुई है परन्तु अंडर ब्रिज में पानी होने के कारण लोग इधर से बड़े वाहनों को ले जाने में प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसे संभालना ट्रैफिक कर्मचारियों के लिए चुनौती बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">चौंक के पास के दुकानदारों का कहना था कि जाम अधिक होने के कारण उनकी दुकानदारी भी प्रभावित होने लगी है। दुकानों के सामने वाहनों की लम्बी कतारें लगी होने के कारण ग्राहक दुकानों तक कम पहुंचते हैं। ट्रैफिक को सुचारू ढंग से चलाने में व्यस्त कर्मचारी का कहना था कि आम तौर पर इतनी समस्या नहीं आती परन्तु बरसात होने से अंडर ब्रिज वाला रास्ता बंद होने के कारण समस्या बढ़ गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">प्रबंधों में लगे हुए हैं : अधिकारी</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी नगर कौंसिल के अधिकारियों का तर्क है कि बरसात ही इतनी अधिक थी कि प्रबंधों के बावजूद पानी की निकासी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कौंसिल द्वारा पूरी तेजी इस्तेमाल की जा रही है और जल्द ही अंडर ब्रिज में से पानी निकाल दिया जाएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">शहर का नहीं कोई जिम्मेवार</h2>
<p style="text-align:justify;">मानसा नगर कौंसिल की अध्यक्षता के विवाद के चलते होने के कारण शहर का कोई जिम्मेवार नहीं है। प्रधान के अलावा सीनियर उप प्रधान और वाइस प्रधान के पद भी रिक्त पड़े हंै। कौंसिल के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि प्रधान का पद रिक्त पड़ा होने के कारण भी समस्याएं आ रही हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अंडर ब्रिज में भरे पानी को जल्द निकालने की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">अंडर ब्रिज के पास के वार्ड नंबर 14 के पूर्व एमसी भगवान सिंह काला ने कहा कि उन के वार्ड के पास तो पहले ही हड्डरोड़ी मुख्य समस्या बनी हुई थी परन्तु अब अंडर ब्रिज में भरा बरसात का पानी भी समस्या बन कर ठहर गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उनके वार्ड सहित पूरे शहर की बड़ी समस्या अंडर ब्रिज बना हुआ है क्योंकि अंडर ब्रिज में से बरसात का पानी न निकलने के कारण लोग ट्रैफिक समस्या के साथ जूझ रहे हैं। अंडर ब्रिज में भरा पानी भी बदबूदार हो गया है, जिस कारण ब्रिज के पास के वार्ड निवासियों को बीमारियों का डर सताने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने मांग की है कि अंडर ब्रिज में भरे गंदे पानी को जल्दी निकाला जाये जिससे ट्रैफिक समस्या से निजात मिलने साथ-साथ बीमारियों से भी लोगों का बचाव हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/demand-for-solution-of-problem/article-1992</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 00:27:03 +0530</pubDate>
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                <title>विकास कार्यों के लिए नहीं रहेगी धन की कमी: बराला</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने समस्याओं का किया समाधान टोहाना(सच कहूँ न्यूज)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने शनिवार को अपने आवास पर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ गांवों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपनी पंचायतों द्वारा गांवों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bjps-president-made-a-solution-to-the-problems/article-1863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/barala.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">भाजपा के प्रदेश<strong> अध्यक्ष ने समस्याओं का किया समाधान</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोहाना(सच कहूँ न्यूज)।</strong> भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने शनिवार को अपने आवास पर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ गांवों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपनी पंचायतों द्वारा गांवों के आगामी विकास कार्यों का खाका भी तैयार करवाकर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर उन्होने हर विभाग के अधिकारियों व समस्या को लेकर पहुंचे लोगों को आमने-सामने बैठाकर समाधान करवाया। बराला ने सक्ष्त हिदायत भी दी कि यदि कोई अधिकारी लोगों की समस्याओं की अनदेखी करेगा उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। बराला ने कहा कि हलका के प्रत्येक गांव में विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गांवों में गलियां, जोहड़ों की रिटर्निंग वॉल, गंदे पानी की निकासी के लिए नाले सहित सभी विकास कार्यों का खाका जन प्रतिनिधियों से तैयार करवाया गया है और उसी के अनुसार विकास कार्यों को गति दी जाएगी। इस अवसर पर सुभाष बराला के अलावा जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खोथ, डीएसपी शमशेर दहिया, तहसीलदार नवदीप नैन, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रविन्द्र दलाल, नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार सहित अन्य मौजूद थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अन्य विभागों का होगा निरीक्षण</h2>
<p style="text-align:justify;">बिजली विभाग में औचक छापेमारी के बाद बराला अभी कई विभागों का औचक निरीक्षण करने वाले हैं। ये बात उन्होंने प्रैसवार्ता में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कही। बराला ने कहा कि कर्मचारियों के समय पर न पंहुचने तथा कार्य न करने की शिकायतें लगातार मिल रही थी जिस को लेकर उन्होने शुक्रवार को सुबह बिजली विभाग का निरीक्षण किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली की ढीली तारे व अन्य समस्याएं थी जिसको लेकर अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैें। इस अवसर पर निजी सचिव कृष्ण नैन, जिले सिंह बराला, जयदीप बराला, जयवीर मूंड, कुलदीप मूंड सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 00:57:30 +0530</pubDate>
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                <title>जल्द सुलझे ‘नीट’ मामला, ताकि एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो</title>
                                    <description><![CDATA[नीट, यानी नेशनल इलिजिबिलिटी एंड इंट्रेंस टेस्ट, 2017 परीक्षा परिणाम की घोषणा का मार्ग प्रशस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को स्थगित कर दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक परीक्षा परिणाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/soon-solution-neat-case-so-that-admission-process-is-complete/article-1231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/neat-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीट, यानी नेशनल इलिजिबिलिटी एंड इंट्रेंस टेस्ट, 2017 परीक्षा परिणाम की घोषणा का मार्ग प्रशस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को स्थगित कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक परीक्षा परिणाम का एलान, काउंसिलिंग और दाखिला करें। न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2011 में दिए उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें यह निर्धारित किया गया था</p>
<p style="text-align:justify;">कि ‘‘मेडिकल परीक्षा शेड्यूल को हाई कोर्ट नजरअंदाज नहीं कर सकता।’’ मौजूदा शेड्यूल के तहत सीबीएसई को 24 जून के पहले रिजल्ट जारी करना है। पीठ का इस बारे में साफ कहना था कि ‘‘मद्रास हाई कोर्ट का अंतरिम निर्णय आशीष रंजन मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए आदेश के विपरीत है। लिहाजा वह इस अंतरिम आदेश को स्थगित करती है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">अलबत्ता परीक्षा परिणाम की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसिलिंग और दाखिला न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा। यानी काउंसलिंग और दाखिला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। इसके साथ ही अदालत ने देश के सभी 24 हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वे नीट परीक्षा 2017 से संबंधित किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है कि अदालत का हालिया आदेश, परीक्षा में शामिल हुए देश भर के 12 लाख अभ्यर्थियों के लिये राहत बनकर आया है। ये छात्र, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। फैसले के बाद उम्मीद बंधी है कि सीबीएसई दो हफ्ते के अंदर रिजल्ट जारी कर देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने नीट परीक्षा में समान प्रश्न पत्र नहीं दिये जाने और अंग्रेजी तथा तमिल भाषाओं के प्रश्न-पत्र अलग-अलग होने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पिछले महीने 24 मई को अपने एक फैसले में एमबीबीएस और बीडीएस पाठयक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली नीट परीक्षा परिणाम की घोषणा पर अंतरिम स्थगन लगा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में उसने सीबीएसई को रिजल्ट का ऐलान नहीं करने का निर्देश दिया था। इस फैसले को सीबीएसई ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। अदालत में इस आदेश के खिलाफ सीबीएसई ने अपना पक्ष रखते हुए दलील दी कि ‘‘मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश की वजह से परीक्षा परिणाम घोषित करने और उसके बाद दाखिले की प्रक्रिया रूक गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही यह आदेश, उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले तय प्रक्रिया के साथ टकराव की स्थिति में है।’’ इस दलील को सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया। उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हम सिर्फ एक आधार पर उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन लगा रहे हैं। यह आदेश, परोक्ष तौर पर उच्चतम न्यायालय द्वारा तय कार्यक्रम को कमजोर कर रहा हैं।’’बहरहाल ग्रीष्मावकाश के बाद मामले में अगली सुनवायी होगी, जिसमें यह तय होगा कि कौन सही है और कौन गलत ?</p>
<p style="text-align:justify;">नीट का आयोजन मेडिकल, डेंटल कॉलेज, आयुष और वेटेरिनरी में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस संयुक्त प्रवेश परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल आॅफ इंडिया और डेंटल कांउसिल आॅफ इंडिया द्वारा संचालित किए जाते हैं। इससे पहले यह परीक्षा आॅल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) कहलाती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह परीक्षा भी देश भर में एक साथ आयोजित होती थी। इस परीक्षा में आए अंकों के आधार पर ही छात्रों को केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मेडिकल संस्थानों में प्रवेश दिया जाता था। सर्वोच्च न्यायालय के एक अहम् फैसले के बाद सरकार ने पिछले साल ही पारदर्शिता व मेडिकल शिक्षा में उच्च मानक स्थापित करने और छात्रों को कई परीक्षाओं के बोझ से बचाने के लिए, देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक परीक्षा ‘नीट’ आयोजित कराने का फैसला लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल 7 मई को देश भर के करीब 104 शहरों में पहली बार यह परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें पूरे देश से तकरीबन 11 लाख 39 हजार छात्रों ने नीट की परीक्षा दी। इस साल नीट का इम्तिहान हिंदी और अंग्रेजी के अलावा दीगर 8 भारतीय भाषाओं में भी हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा पूरी तरह से पारदर्शी हो, इसके लिए सीबीएसई ने कड़े नियम बनाए, जिसमें ड्रेस कोड से लेकर पेन, पेंसिल को लेकर तक कई नियम शामिल थे। सीबीएसई की यह सख्ती काम आई और इतनी बड़ी परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुर्ई। लेकिन बाद में कुछ विवाद पैदा हो गए। मसलन कुछ लोगों का कहना था कि परीक्षा होने से पहले पेपर लीक हो गया था। वहीं दूसरा विवाद, स्थानीय भाषा में पेपर को लेकर था।</p>
<p style="text-align:justify;">मद्रास हाई कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट में कुछ छात्रों ने अलग-अलग याचिका दाखिल कर कई सवाल उठाए। इन याचिकाओं में यह बात कही गई कि स्थानीय भाषाओं तमिल और गुजराती में पूछे गए सवाल अंग्रेजी के मुकाबले कठिन थे और उनके साथ नाइंसाफी हुई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि एक ही परीक्षा के अलग-अलग प्रश्नपत्र बनाकर सीबीएसई ने संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत छात्रों के समानता के अधिकार का उल्लंघन किया है। नीट के तहत यह चयन, समान कौशल का परीक्षण नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा अदालत, नीट 2017 को रद्द कर, एक समान प्रश्नपत्र के साथ नए सिरे से परीक्षा आयोजित कराए। जब मामला ज्यादा बढ़ गया और इस संबंध में मद्रास हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा परिणाम की घोषणा पर अंतरिम स्थगन लगा दिया, तो सीबीएसई हरकत में आई और उसने सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाई।</p>
<p style="text-align:justify;">अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग पेपर को लेकर जो विवाद है, उसके संबंध में सीबीएसई का कहना है कि सभी पेपरों को मडरेटरों ने तय करके एक ही लेवल का निकाला था और सभी भाषाओं में पेपर का डिफिकल्टी लेवल एक जैसा ही था। यही नहीं स्थानीय भाषाओं में पेपर का अनुवाद करने से ज्यादा लोग पूरी प्रक्रिया में जुड़ेंगे और इससे पेपर लीक होने की संभावना बढ जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा उसने स्थानीय भाषा में अलग पेपर बनवाए। सीबीएसई की इन बातों में दम भी है। इस साल नीट के इम्तिहान में सिर्फ 9.25 फीसदी छात्रों ने ही स्थानीय भाषा में परीक्षा दी, बाकी छात्र हिंदी और अंग्रेजी भाषा के साथ परीक्षा में बैठे। अगर स्थानीय भाषा का कोई पेपर लीक भी हो जाता, तो ऐसी स्थिति में अन्य 90 फीसदी छात्रों की दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल सर्वोच्च न्यायालय, सीबीएसई की इन दलीलों से कितना सहमत होता है, यह तो अगली सुनवाई में ही तय होगा। पर उसके हालिया आदेश से उन लाखों छात्रों ने जरूर राहत की सांस ली है, जो परीक्षा देने के बाद से ही रिजल्ट का इंतजार दिन-रात कर रहे थे। नीट परीक्षा से पचास हजार छात्रोंं का भविष्य जुड़ा हुआ है। जितनी जल्दी ये मामला सुलझेगा, उतनी ही जल्दी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया पूरी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-जाहिद खान</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2017 23:20:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अर्थव्यवस्था में जमीनी समस्याओं का हो समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[अर्थव्यवस्था के तीन अंग हैं- प्राथमिक, औद्योगिक एवं सर्विस या सेवा क्षेत्र। ये तीनों अंग आपस में इंटरएक्ट करते हैं। प्राथमिक क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र सर्विस क्षेत्र को। इसी भांति सर्विस सेक्टर भी औद्योगिक क्षेत्र एवं प्राथमिक क्षेत्र को प्रभावित करता है। तीनों का एकरूप और सबल रूप, अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/solution-for-ground-problems/article-776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था के तीन अंग हैं- प्राथमिक, औद्योगिक एवं सर्विस या सेवा क्षेत्र। ये तीनों अंग आपस में इंटरएक्ट करते हैं। प्राथमिक क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र सर्विस क्षेत्र को। इसी भांति सर्विस सेक्टर भी औद्योगिक क्षेत्र एवं प्राथमिक क्षेत्र को प्रभावित करता है। तीनों का एकरूप और सबल रूप, अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राथमिक सेक्टर कृषि है। कृषि उद्योगों पर आधारित है तो उद्योग कृषि पर आधारित, सेवा क्षेत्र (ट्रांसपोर्टेशन, संचार माल ढुलाई, जल-थल-वायु परिवहन, बैकिंग आदि) इन सबको गति देता है। अगर यह क्षेत्र मजबूत नहीं है तो अर्थव्यवस्था को गति पकड़ने में मुश्किल होगी। भ्रष्ट सत्ता और भ्रष्ट प्रशासन अर्थव्यवस्था के लिए दीमक रूप हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं के सहारे समानांतर अर्थव्यवस्था रूप लेती है। सत्ता और प्रशासन इस व्यवस्था के निर्माता हैं। भ्रष्टाचार आम आदमी की मुश्किलें बढ़ाता है। उद्योग तो अपने उत्पादनों की कीमत बढ़ा लेते हैं। मूल्य बढ़ने से आम आदमी परेशान हो जाता है। अर्थव्यवस्था हीन स्थिति में आ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक विकास की पहली शर्त देश में शांति और व्यवस्था का स्थायी होना है। अगर देश शांत नहीं है तो इसका खामियाजा अर्थतंत्र भुगतेगा और आम आदमी भी। भारत बहुत बड़ा है, इसमें कश्मीर भी है, छत्तीसगढ़ और बंगाल तथा पंजाब भी हैं। आर्थिक विकास के लिए देश की सम स्थिति बड़ा योगदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक नाकेबंदी और अशांति अर्थव्यवस्था की सांसें रोकती है, आतंकवाद का असर सत्ता नहीं, अर्थव्यवस्था और आम आदमी भुगतता है। अर्थशास्त्री अर्थव्यवस्था के दृष्टा हैं। वे उसके अंगों की पड़ताल करते हैं एवं कमजोर अंगों को गति देने हेतु उचित दवा इंजेक्ट करते हैं। प्रशासनिक तंत्र को दिशा दिखाते हैं, सत्ता को अर्थव्यवस्था दिखाकर, उसके अंगों की स्थिति से वाकिफ कराते हैं तथा विकास कार्य गति पर लाने के उपाय बताते हैं। उनके प्रभावों से वाकिफ कराते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था में यह स्थिति अधिक स्पष्ट हुई है। उपभोक्तावाद ने कृषि सेक्टर को अत्यधिक प्रभावित किया है। किसान अपनी आवश्यकता की चीजों की निर्धारित कीमत देता है, लेकिन उसे अपनी उत्पादित चीजों की बाजार द्वारा निर्धारित कीमत ही मिलती है। मंडी व्यवस्था में उसकी उत्पादित वस्तुएं सड़क पर पड़ी रहती हैं, ग्राहक नहीं मिलते।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्टे बरसात उसकी मेहनत को बीच सड़क पर मार देती है। देश का प्राथमिक क्षेत्र कृषि चतुराई के हाथों चित हुआ कराह रहा है। जान-बूझकर कृषि उपज को बर्बाद किया जाता है, लागत मूल्य भी नहीं दिया जाता। किसान आत्महत्या जन्म लेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हावी उद्योग व्यवस्था और पूंजीपतियों की विषैली भावनाएं कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को खा जाती है, मंडी में कीमत गिरकर जमीन पर आ जाती है, किसान लुट जाता है और उपभोक्ता मंडी के 10 रुपये किलो अनाज का अपने क्षेत्र में 26-27 रुपए देता है। माल पुराना, नई कीमतें। मंडी में 26-27 रुपये किलो भाव उत्पादकों के लिए नहीं है, बेचने वालों के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्तातंत्र अपनी मौज में है प्रशासन को सत्ता तंत्र की चिंता है, उपभोक्ताओं की नहीं। खाद्य उत्पादन एवं आपूर्ति मंत्री अपनी कोठी में बैठा अंगूर और मेवे खाता है, अर्थव्यवस्था का अर्थ उपभोक्ता की लूट नहीं है, न आर्थिक विकास की ऐसी परिभाषा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग इस नीति को देखता है और चुप हो जाता है। अर्थव्यवस्था के अंग जमीन से जुड़े हैं। कृषि (प्राथमिक) क्षेत्र भी और औद्योगिक व सेवा क्षेत्र भी। इनके रूप भी जमीन पर तैयार होते हैं, इन्हें अर्थव्यवस्था की जमीन और जमीन के आदमी को देखकर तैयार किए जाना चाहिए। उत्पादकों को देखकर तैयार की जानी चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong>बी.एल. माली </strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/solution-for-ground-problems/article-776</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 00:07:13 +0530</pubDate>
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