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                <title>circumstances - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>फर्श से अर्श पर पहुंची राज मिस्त्री की बेटी</title>
                                    <description><![CDATA[आभूषण और कीमती पत्थरों के काम को उसने तल्लीनता से सीखा और काबुल आकर इसी विधा में कारोबार शुरू कर दिया। सादत बानु जेम्स एंड ज्वेलरी तथा सादत बानु हैंडीक्राफ्ट्स की सीईओ शहला सादत के पास तीस महिला कारीगरों का स्टाफ काम कर रहा है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/afghan-girl-did-not-give-up-the-struggle-and-courage-in-difficult-circumstances/article-12895"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/afghani-maiden.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मुश्किल हालातों में अफगानी युवती ने संघर्ष और हिम्मत का नहीं छोड़ा दामन</h1>
<h1 style="text-align:center;">(Afghani maiden)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> युवा उद्यमी ने दो साल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित की कंपनी</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद (राजेन्द्र दहिया/सच कहूँ)।</strong> विषम परिस्थितियों में रह कर भी एक लड़क़ी फर्श से अर्श तक पहुंच सकती है, इसका एक जीवंत उदाहरण है अफगानिस्तान के काबुल शहर से आई शहला सादत। (Afghani maiden)एक राजमिस्त्री के साधारण से घर में जन्म लेने वाली शहला तालिबानी कुंठित मानसिकता वाले देश में अपनी खुद की ज्वैलरी और हैंडलूम कंपनी का न केवल सफलतापूर्वक संचालन कर रही है, अपितु अपने वतन की गुरबत झेल रही महिलाओं की मदद भी कर रही है। शहला का जन्म अफगानिस्तान की उसी धरती बोहमिया में हुआ है, जहां कभी तालिबानी आतंकवादियों ने शांति और मानवता को अपने प्रेम से सींचने वाले महात्मा बुद्घ की विशालकाय प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया था। जान अली और निखबा के घर में 26 दिसंबर, 1995 को जन्मी शहला सादत छ: भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चीन में सीखी जुमोलॉजी, अब बनी उद्यमी</h3>
<p style="text-align:justify;">शहला ने वर्ष 2017 में काबुल की हयात युनिवर्सिटी से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद माता-पिता के प्रोत्साहन से वह चीन में चंचा शहर चली गई। वहां एक साल तक शहला ने जुमोलॉजी सीखी। आभूषण और कीमती पत्थरों के काम को उसने तल्लीनता से सीखा और काबुल आकर इसी विधा में कारोबार शुरू कर दिया। सादत बानु जेम्स एंड ज्वेलरी तथा सादत बानु हैंडीक्राफ्ट्स की सीईओ शहला सादत के पास तीस महिला कारीगरों का स्टाफ काम कर रहा है और लगभग दो सौ से अधिक महिलाएं उसके साथ हैंडलूम के व्यवसाय में जुड़ी हुई हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कई देशों में फैलाया कारोबार</h3>
<p style="text-align:justify;">हिंदुस्तान पहली बार आई शहला ने सूरजकुंड में स्टाल लगाने का प्रथम अनुभव प्राप्त कर रही है। वह इससे पहले दुबई इंटरनेशनल फेयर में स्टाल लगा चुकी है। एक आधुनिक एवं प्रगतिशील मुस्लिम उद्यमी ने दो साल में ही चीन, भारत, दुबई, कजाकिस्तान तक अपने व्यापार को फैला लिया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अलग सोच से बढ़ी आगे, घर का बनी सहारा</h3>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं उसकी दो बड़ी बहनें जहां 17-18 साल की उम्र में घर बसा चुकी थी, वहीं 26 साल की शहला अभी अपने विवाह के बारे में सोच-विचार कर रही हैं। उसकी सोच यहीं तक सीमित नहीं है। घर में उसके पिता बीमार है। इस परिस्थिति से ना घबराकर वह अपने तीन भाईयों, 17 वर्षीय मोहम्मद रिजा को स्वीडन, 19 वर्षीय मो. अली को फ्रांस एवं 21 वर्षीय मो. दाउत को जर्मनी देश में पढ़ा रही है। घर व भाईयों का व्यय वह खुद वहन करती है। उसे अफगानिस्तान के राष्टÑपति मोहम्मद गनी की पत्नी बीबी गुल व उप उपराष्टÑपति अब्दुल्ला अब्दुल्ला सम्मानित कर चुके हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत एक शांतिप्रिय देश</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारत देश की सभ्यता एवं संस्कृति से प्रभावित शहला कहती है।</li>
<li style="text-align:justify;">अफगानिस्तान में करीब 27 करोड़ की आबादी आपस में लड़ती रहती है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहां खून-खराबा मचा रखा है। जबकि भारत में कितनी शांति है ।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां के नागरिक किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में कोई दखल नहीं देते, चाहे वह किसी धर्म या जाति का हो।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">इस्लाम की गलत तस्वीर की जा रही पेश</h3>
<ul>
<li>पांचों वक्त नमाज अता करने वाली शहला सादत का कहना है।</li>
<li>इस्लाम एक शांतिप्रिय धर्म है।</li>
<li>किंतु जेहाद के नाम पर उसके धर्म की जालिम तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत की जा रही है।</li>
<li>इस्लाम में कहीं भी महिलाओं को तरक्की ना करने देने का जिक्र नहीं है।</li>
<li>इसके बावजूद यदि वह अफगानिस्तान के किसी सीमा प्रांत में होती तो शायद उसका हश्र बुरा होता।</li>
<li>शहला को परिवार नियोजन पर भी कोई आपत्ति नहीं है और वह खुद चाहती है ।</li>
<li>शादी करने के बाद संतान दो तक ही सीमित रखे।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 20:28:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्राकृति पशु एवं मनुष्यता</title>
                                    <description><![CDATA[प्राकृति मनुष्य व हर जीव प्राणी को जीवन जीने की परिस्थितियां उपलब्ध करवाती है। किसी जीव से उसका जीवन छीन लेने का मनुष्य को कोई अधिकार नहीं है। पशु एवं पंक्षी भी इस प्रकृति की सुंदरता हैं। फिर जो पशु पक्षी मनुष्य के लिए वरदान जैसे हों, उनकी हत्या करना अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">प्राकृति मनुष्य व हर जीव प्राणी को जीवन जीने की परिस्थितियां उपलब्ध करवाती है। किसी जीव से उसका जीवन छीन लेने का मनुष्य को कोई अधिकार नहीं है। पशु एवं पंक्षी भी इस प्रकृति की सुंदरता हैं। फिर जो पशु पक्षी मनुष्य के लिए वरदान जैसे हों, उनकी हत्या करना अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान उच्च न्यायालय ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर जोर दिया है। देश की आबादी का एक बड़ा भाग गाय को बेहद सम्मान देता है। देश की संस्कृति ही ऐसी है कि उपयोगी पशुओं को आम जन अपने परिवारिक सदस्यों की तरह रखते हैं। बैल के मर जाने पर भी किसान उसे कसाई अथवा चर्मकारों को नहीं देते थे, बल्कि उन्हें मानवीय शरीर की तरह सम्मान देकर दफनाया जाता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में गौहत्या के खिलाफ जोरदार लहर है, लेकिन केरल में कुछ सिरफिरे कांग्रेसी वर्कर्स ने सार्वजनिक तौर पर एक बछड़े का वध कर अपने आपको असभ्य प्रदर्शित किया। जबकि कांग्रेस की नीति तो महात्मा गांधी की शिक्षाओं को मानने वाली है, जिन्होंने इस देश में अहिंसा का पाठ पढ़ाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने बुद्धिमानी का परिचय दिया कि ऐसे स्वार्थी वर्कर्स से अपना पिंड छुÞडवा लिया और उन्हें बर्खास्त कर दिया। देश के बड़े राष्ट्रीय दल गौहत्या के खिलाफ हैं। हालांकि कई गौरक्षक दलों की हिंसा व लूटपाट की घटनाएं निंदाजनक भी हैं,लेकिन सार्वजनिक तौर पर गौरक्षकों का विरोध गौवध करके नहीं किया जाना चाहिए। गाय को किसी धर्म विशेष के साथ जोड़ कर देखना अज्ञानता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गाय के बारे में चिकित्सा विज्ञान के बहुत से शोध हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि गाय का दूध-मूत्र बेहद उपयोगी हंै। गाय का रूदन व खून बेहद हानिकारक हंै। गौरक्षा के साथ-साथ देश में हर तरह के जीवों की रक्षा की जाए। वर्तमान समय में मनुष्य के अतिरिक्त सब जीवों का अस्तित्व खतरें में है। प्रति वर्ष सैंकड़े प्रजातियां इस पृथ्वी से लुप्त हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: प्राकृतिक संतुलन की दृष्टि से भी जीवों की रक्षा किया जाना अब जरूरी हो गया है। अत: पशुओं पर राजनीति न हो। पशु अर्थव्यवस्था को भी चलाते हैं। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पशु राष्ट्र के लिए उपयोगी हैं। अत: उन्हें धर्म, जाति से ऊपर उठकर बचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/nature-animals-humanities/article-777</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 00:11:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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