<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/govt/tag-1640" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>govt - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/1640/rss</link>
                <description>govt RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Inflation, Unemployment : महंगाई, बेरोजगारी व असंतोष पर पाना होगा काबू</title>
                                    <description><![CDATA[Inflation and Unemployment ललित गर्ग। अठाहरवीं लोकसभा चुनाव के नतीजे भले ही अपने अंदर कई संदेशों को समेटे हुए हैं, भले ही भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला हो, भले ही इंडिया गठबंधन एक चुनौती के रूप में खड़ा हुआ हो, फिर भी तीसरी बार नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनते हुए नये […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/inflation-and-unemployment/article-58457"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/inflation.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>Inflation and Unemployment</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ललित गर्ग।</strong> अठाहरवीं लोकसभा चुनाव के नतीजे भले ही अपने अंदर कई संदेशों को समेटे हुए हैं, भले ही भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला हो, भले ही इंडिया गठबंधन एक चुनौती के रूप में खड़ा हुआ हो, फिर भी तीसरी बार नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनते हुए नये भारत एवं सशक्त भारत को निर्मित करने के लिये वे पहले दो कार्यकाल से अधिक शक्ति, संकल्प एवं जिजीविषा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सीटों के लिहाज से भाजपा को भले ही नुकसान हुआ, लेकिन लगातार तीसरी बार वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। ओडिशा और तेलंगाना में पार्टी ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबको चौंकाया है। ओडिशा में लोकसभा ही नहीं, विधानसभा में भी पार्टी ने बीजू जनता दल का 24 साल से चला आ रहा वर्चस्व तोड़ा। अरुणाचल प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में 54 प्रतिशत मत और 46 सीटों के प्रचंड बहुमत के बल पर भाजपा सरकार बनाने में सफल हुई है। वहीं, गुजरात, छतीसगढ़ और मध्य प्रदेश भाजपा के गढ़ बने हुए हैं, जबकि देश की राजनीति में अब भी मोदी सबसे बड़े एवं वर्चस्वी नेता है। वे अब भी अपने चौंकाने वाले एवं आश्चर्य में डालने वाले विलक्षण एवं अनूठे फैसलों से राष्ट्र को विकास की नई उड़ान देते रहेंगे। भाजपा को कम सीटें मिले कारणों की समीक्षा एवं मंथन करते हुए अपनी हार के कारणों को सहजता एवं उदारता से स्वीकारना चाहिए एवं जिन गलतियों के कारण कम सीटें मिली, उन्हें दूर करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार के चुनाव को नियोजित एवं प्रभावी तरीके से सम्पन्न करने में चुनाव आयोग की भूमिका सराहनीय रही। भले ही इंडिया गठबंधन ने ईवीएम और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाकर देश एवं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कलंकित किया था। लेकिन चुनाव परिणाम ने न केवल इस प्रकार के भ्रामक, गुमराह करने वाली बातों एवं मिथकों को तोड़ दिया, बल्कि इसने भारत के जीवंत, बहुलतावादी, पंथनिरपेक्षी और स्वस्थ लोकतांत्रिक छवि को पुनर्स्थापित किया है। प्रधानमंत्री मोदी का अंधविरोध करने वाला वाम-जिहादी-सम्प्रदायवादी राजनीतिक समूह अपने इस वाहियात प्रलाप एवं राष्ट्र-विरोधी षड़यंत्र में कोई कमी नहीं छोड़ी। बावजूद इसके इंडिया गठबंधन के घटक दलों के लिये चुनाव परिणाम अनेक अर्थों में संतोषजनक रहे हैं। कांग्रेस के लिये यह चुनाव नये जीवन का वाहक बना हैं। वैसे भी एक आदर्श लोकतंत्र के लिये सशक्त विपक्ष का होना जरूरी है, यही लोकतंत्र को खूबसूरती देता है। भारतीय मतदाताओं ने इंडिया गठबंधन को विपक्षी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने का संदेश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार के चुनाव परिणाम अनेक राजनीतिक दलों के सामने भी अनेक प्रश्न खड़े किए हैं। कौन जेल में रहेगा, इसका फैसला अदालतें करती हैं। परंतु दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस चुनाव को अपने जेल के अंदर रहने या बाहर रहने का अधिकार मतदाताओं को सौंपा था, जिसका नतीजा यह रहा कि उनके शासित वाले दिल्ली में ‘आप’ का खाता तक नहीं खुला, तो वहीं उनकी पार्टी पंजाब में विधानसभा चुनाव-2022 का चमत्कार दोहराने में विफल हो गई और 13 में से केवल 3 सीटें ही जीत पाई। शरद पवार का राजनीतिक वारिस कौन और असली शिवसेना किसकी? क्या माया और ममता अब भी ताकतवर हैं? यह चुनाव ऐसे ही कई सवालों के साथ शुरू हुआ था। इनमें से कुछ के जवाब मिल गए हैं और कुछ के बाकी हैं। जिस तरह के नतीजे आए हैं, उससे यह संदेह भी पैदा हुआ है कि क्या देश में आर्थिक सुधार जारी रहेंगे? क्या देश विकास के पथ पर अग्रसर होता रहेगा? नीतिगत स्थिरता का क्या होगा? शायद इसी संदेह की वजह से शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। लेकिन नरेन्द्र मोदी के पहले भाजपा मुख्यालय में दिये उद्बोधन एवं गठबंधन दलों के साथ हुई बैठक में इन सवालों के जवाब काफी हद तक मिल गए, जिससे शेयर बाजार ने भी तेजी पकड़ी है एवं भाजपा एवं सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन सरकारों के कुछ सकारात्मक पक्ष होते हैं तो कुछ नकारात्मक पक्ष भी। गठबंधन सरकारों का नेतृत्व करने वाले को घटक दलों से समन्वय के साथ चलना होता है। इसमें समस्या तब आती है, जब घटक दल अनुचित मांगें मनवाने लगते हैं अथवा सौदेबाजी करने की कोशिश करते हैं या फिर अपने संकीर्ण हितों की पूर्ति के लिए दबाव की राजनीति करने लगते हैं। इन स्थितियों से निबटने के लिये मोदी सरकार पहले ही अन्य निर्दलयी सांसदों एवं अन्य राजनीतिक दलों को अपने साथ जोड़ने का उपक्रम कर रही है। सहयोगी दल अनुचित मांग एवं दबाव की बजाय अपने राज्य के राजनीतिक एवं आर्थिक हितों की चिंता करें, लेकिन ऐसा करते समय उन्हें राष्ट्रीय हितों को ओझल नहीं करना चाहिए। यह उन्हें भी सुनिश्चित करना चाहिए कि गठबंधन सरकार सुगम तरीके से चले।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित ही मोदी सरकार के सामने चुनौतीपूर्ण स्थितियां हैं, जिस तरह महाभारत युद्ध में पांडवों के सामने जटिल स्थितियां थी। आज द्रोण नहीं तुष्टिकरण है, कृपाचार्य नहीं भ्रष्टाचार है, अश्वत्थामा नहीं आतंकवाद है, दुर्याेधन नहीं महत्वाकांक्षा एवं अनैतिकता है, शकुनि नहीं आंतरिक और वैश्विक षड्यंत्र है, राष्ट्रवाद नहीं समस्त प्रकार की विघटनकारी शक्तियां-भाषावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद, स्वार्थवाद आदि हैं और कर्ण नहीं कट्टरवाद है। साथ में महंगाई, बेरोजगारी, असंतोष आदि की अत्यंत जटिल समस्याएं भी हैं और अब भी भारत इनमें फंसा हुआ है। नरेन्द्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में इन सबसे कैसे निपटेंगे यह तो समय ही बताएगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/inflation-and-unemployment/article-58457</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/news-brief/inflation-and-unemployment/article-58457</guid>
                <pubDate>Sat, 08 Jun 2024 10:45:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-06/inflation.jpg"                         length="16813"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Online Gaming Rules : बचपन बचाने के लिए बने नीति</title>
                                    <description><![CDATA[– Online Gaming Rules – Online Gaming Rules : ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बन रही है। इन गेम्स ने बच्चों की मानसिकता को बिगाड़ दिया है, जिसके कारण बच्चे गंभीर अपराध करने से संकोच नहीं करते। बच्चों में गुस्सा, ईर्ष्या और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इन काल्पनिक गेम्स […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/online-gaming-rules/article-56399"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/online-game.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Online Gaming Rules –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>Online Gaming Rules : </strong>ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बन रही है। इन गेम्स ने बच्चों की मानसिकता को बिगाड़ दिया है, जिसके कारण बच्चे गंभीर अपराध करने से संकोच नहीं करते। बच्चों में गुस्सा, ईर्ष्या और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इन काल्पनिक गेम्स के कारण कई बच्चों ने अपने माता-पिता के बैंक खातों से 50-50 लाख रुपये तक भी साफ कर दिए। मनोरंजन के नाम पर शुरू हुई गेम्स खेल नहीं हो सकती। खेलों और लोकप्रिय ऑनलाइन गेम्स के बीच कोई संबंध नहीं है। खेल से प्रेम, भाईचारा, सहनशीलता, साहस जैसे गुण पैदा होते हैं, वहीं दूसरी तरफखेल पर कोई टैक्स नहीं लगता। खेल बिल्कुल फ्री होती हैं, लेकिन गेम्स पर सरकारों को टैक्स देना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी याद रखना चाहिए कि सरकार भले ही नकारात्मक प्रभाव वाले खेलों से कितनी भी कमाई कर ले, लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने जिन खेलों पर प्रतिबंध लगाया है, वे बचपन के लिए खतरा बन गए हैं। यह इस देश के हित में नहीं है। केंद्र सरकार ने खेलों के बुरे प्रभावों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की बात कही थी, लेकिन अब लोकसभा चुनाव के कारण इस मुद्दे को नई सरकार के गठन तक के लिए टाल दिया गया है। यदि ऑनलाइन गेम्स को नियमों अधीन लाकर इसे बच्चों की बेहतरी और सामाजिक विकास के लिए प्रयोग किया जाए तो यह एक अच्छा कदम होगा। बेहतर होगा यदि नई सरकार ऑनलाइन तकनीक का उचित उपयोग कर बच्चों में अच्छे गुण विकसित करने वाले गेम्स को तैयार करे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/online-gaming-rules/article-56399</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/online-gaming-rules/article-56399</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 10:37:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-04/online-game.jpg"                         length="16970"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी संस्थाओं का तैयार होगा डेटाबेस</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिसम्बर से पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया होगी शुरू हनुमानगढ़। भारत सरकार की ओर से सभी सरकारी संस्थाओं का डेटाबेस तैयार करवाया जा रहा है। सरकारी संस्थाओं का डाटाबेस उपलब्ध होने से उनके संबंध में नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन में सहायता उपलब्ध होगी। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए तैयार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/database-of-government-institutions-will-be-ready/article-40153"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/database-of-govt-institutions.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>एक दिसम्बर से पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया होगी शुरू</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़।</strong> भारत सरकार की ओर से सभी सरकारी संस्थाओं का डेटाबेस तैयार करवाया जा रहा है। सरकारी संस्थाओं का डाटाबेस उपलब्ध होने से उनके संबंध में नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन में सहायता उपलब्ध होगी। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए तैयार करवाए जा रहे डाटाबेस के अंतर्गत एक दिसम्बर से पोर्टल पर डाटा अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू होगी जो 45 दिन तक चलेगी। डाटाबेस तैयार करने के लिए गुरुवार को हनुमानगढ़ केन्द्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड की 12 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण जंक्शन स्थित हनुमानगढ़ केन्द्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के मुख्य कार्यालय में दिया गया। यह व्यवस्थापक अपनी-अपनी शाखाओं में शेष सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों को डाटाबेस के बारे में प्रशिक्षण देंगे और तय समय सीमा 45 दिन में डाटा अपलोड करवाने का कार्य पूर्ण करवाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हनुमानगढ़ केन्द्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक दीपक कुक्कड़ ने बताया कि भारत सरकार की ओर से सभी सरकारी संस्थाओं का डाटाबेस तैयार करवाया जा रहा है। इसके लिए विशेष रूप से पोर्टल तैयार किया गया है। इस पोर्टल पर एक दिसम्बर से लेकर आगामी 45 दिन के अन्दर डाटा अपलोड किया जाएगा। भारत सरकार की ओर से इसके लिए राज्य स्तर, खण्ड स्तर और जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी लगाए गए हैं। जिला स्तर पर उपरजिस्ट्रार को प्रभारी अधिकारी व एचकेएसबी के सहायक अधिशासी अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी लगाया गया है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/database-of-government-institutions-will-be-ready/article-40153</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/database-of-government-institutions-will-be-ready/article-40153</guid>
                <pubDate>Thu, 24 Nov 2022 15:33:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-11/database-of-govt-institutions.jpeg"                         length="77542"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार के खिलाफ लिखने वाला डॉक्टर आनंद राय दिल्ली से गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल (एजेंसी)। इंदौर के एक अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर आनंद राय को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा डॉ. राय को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर उनका मुख्यालय रीवा निर्धारित किया है। सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणियां लिखने और कार्यालय से अनुपस्थित रहने के चलते निलंबित किए गए डॉ. राय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/doctor-anand-rai-who-wrote-against-the-government-arrested-from-delhi/article-32197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/dr-anand-rai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल (एजेंसी)।</strong> इंदौर के एक अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर आनंद राय को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा डॉ. राय को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर उनका मुख्यालय रीवा निर्धारित किया है। सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणियां लिखने और कार्यालय से अनुपस्थित रहने के चलते निलंबित किए गए डॉ. राय का मुख्यालय रीवा निर्धारित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राय को अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामले में रात गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक अधिकारी ने मामला दर्ज करवाया है। राय सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और हाल ही में उन्होंने एक भर्ती परीक्षा से संबंधित पेपर लीक होने का आरोप लगाया था। इसी मामले में उनके और एक कांग्रेस नेता के खिलाफ हाल ही में यहां अजाक थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार भोपाल पुलिस ने यह गिरफ्तारी इसी आपराधिक मामले में कई है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/doctor-anand-rai-who-wrote-against-the-government-arrested-from-delhi/article-32197</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/doctor-anand-rai-who-wrote-against-the-government-arrested-from-delhi/article-32197</guid>
                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 11:34:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-04/dr-anand-rai.jpg"                         length="31288"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढोतरी का निर्णय लिया है जिससे महंगाई भत्ते की दर बढकर 31 प्रतिशत हो गई है। यह बढ़ोतरी गत एक जनवरी से लागू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/3-hike-in-dearness-allowance-of-central-employees/article-31918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/modi-1-e16456914208533.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढोतरी का निर्णय लिया है जिससे महंगाई भत्ते की दर बढकर 31 प्रतिशत हो गई है। यह बढ़ोतरी गत एक जनवरी से लागू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (डीआर) की अतिरिक्त किस्त जारी करने की मंजूरी दी गयी है जो गत एक जनवरी से प्रभावी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें मूल वेतन/पेंशन के 31 प्रतिशत की मौजूदा दर में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है, ताकि मूल्य वृद्धि की भरपाई की जा सके। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि स्वीकृत नियम के अनुसार है, जो सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के कारण राजकोष पर संयुक्त रूप से 9,544.50 करोड़ रुपए का असर पड़ेगा। इससे केंद्र सरकार के लगभग 47.68 लाख कर्मचारियों और 68.62 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/3-hike-in-dearness-allowance-of-central-employees/article-31918</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/3-hike-in-dearness-allowance-of-central-employees/article-31918</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 16:54:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-03/modi-1-e16456914208533.jpg"                         length="71591"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची केरल सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य विधानसभा में कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास | Against CAA राज्यपाल बोले-प्रस्ताव की कानूनी और संवैधानिक वैधता नहीं नई दिल्ली (एजेंसी)। केरल ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऐसा करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है। केरल ने शीर्ष न्यायालय में दी याचिका में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kerala-govt-moves-sc-against-caa/article-12469"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/caa-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><h2>राज्य विधानसभा में कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास | Against CAA</h2>
<h3>राज्यपाल बोले-प्रस्ताव की कानूनी और संवैधानिक वैधता नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केरल ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऐसा करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है। केरल ने शीर्ष न्यायालय में दी याचिका में इस कानून को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। इससे पूर्व राज्य विधानसभा में सीएए लागू नहीं करने का प्रस्ताव पास किया गया। ऐसा करने वाला भी केरल देश का एकमात्र राज्य है। केरल में पिनराई विजयन की वामपंथी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है। केरल सरकार ने सीएए के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाने के बाद अखबारों में विज्ञापन भी छपवाया। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसकी आलोचना की। उनका कहना है कि भारतीय संसद में पास कानून के खिलाफ विज्ञापन प्रकाशित करने पर राज्य का संसाधन खर्च करना गलत है। राज्यपाल ने कहा कि केरल सरकार के प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्यों है विरोध</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीएए में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और इसाई शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>विपक्षी दलों का कहना है कि इसमें मुसलमानों को नहीं रखा गया है, जो धार्मिक आधार पर भेदभाव का मामला है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यह संविधान धार्मिक आधार पर भेदभाव की इजाजत नहीं देता है।</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">केंद्र का तर्क</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>चूंकि तीनों पड़ोसी देशों में गैर-मुस्लिमों के साथ धार्मिक आधार पर ही उत्पीड़न होते हैं</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसलिए उन्हें नागरिकता देने का विशेष प्रबंध किया गया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसमें विदेशी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता नहीं देने का कहीं उल्लेख नहीं है।</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/kerala-govt-moves-sc-against-caa/article-12469</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/kerala-govt-moves-sc-against-caa/article-12469</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 11:19:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/caa-supreme-court.jpg"                         length="12628"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन से सटी सीमा पर 44 सड़कें बनाएगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी)। भारत सरकार चीन से सटी सीमा के पास 44 सड़कें बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किमी लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण करेगी। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी। सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/govt-44-strategically-important-roads-along-india-china-border/article-7344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/china-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> भारत सरकार चीन से सटी सीमा के पास 44 सड़कें बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा सरकार पाकिस्तान से लगे पंजाब और राजस्थान के इलाकों में 2100 किमी लंबे मुख्य और संपर्क मार्ग का भी निर्माण करेगी। ये सड़कें भारत के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम होंगी।</p>
<h2>सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट में सड़कें बनाए जाने की बात</h2>
<p>केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन सीमा पर रणनीतिक तौर पर अहम 44 सड़कों को बनाने के लिए कहा गया है, जिससे संघर्ष की स्थिति में सेना की तुरंत तैनाती हो सके। भारत और चीन के बीच करीब 4,000 किमी की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के इलाकों से गुजरती है। सीपीडब्ल्यूडी की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब चीन भारत से सटे इलाकों में विभिन्न परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा।</p>
<h2>4 सड़कों को बनाने में करीब 21 हजार करोड़ की लागत आएगी</h2>
<p>पिछले साल डोकलाम में सड़क निर्माण को लेकर भारत और चीन के सैनिक आमने सामने आ गए थे। 73 दिनों चला यह विवाद 28 अगस्त को समझौते के बाद खत्म हुआ था। इसके बाद चीन ने यहां सड़क निर्माण का काम रोक दिया था।रिपोर्ट के मुताबिक, 44 सड़कों को बनाने में करीब 21 हजार करोड़ की लागत आएगी। ये सड़कें पांच राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में बनेंगी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीएसएस) से मंजूरी मिलना बाकी है।</p>
<p>सीपीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान और पंजाब में 5,400 करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। राजस्थान में 945 किलोमीटर मुख्य और 533 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे। जबकि पंजाब में 482 किलोमीटर मुख्य और 219 किलोमीटर संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/govt-44-strategically-important-roads-along-india-china-border/article-7344</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/govt-44-strategically-important-roads-along-india-china-border/article-7344</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Jan 2019 01:20:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-01/china-india.jpg"                         length="0"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा से बड़ी हुई पद की लालसा</title>
                                    <description><![CDATA[कभी समय था जब पार्टी की ओर से गुरमुख सिंह मुसाफिर को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया लेकिन मुसाफिर यह पद लेने से पीछे हट गए। बड़ी मुश्किल से उनके साथी नेताओं ने उन्हें मनाया। अब हालात यह हैं कि पद के लिए पार्टी ही तोड़ दी जाती है। पद व राजनीति […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-desire-for-position-became-greater-than-service/article-5149"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/chair-is-more-important-then-service-for-govt-employee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी समय था जब पार्टी की ओर से गुरमुख सिंह मुसाफिर को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया लेकिन मुसाफिर यह पद लेने से पीछे हट गए। बड़ी मुश्किल से उनके साथी नेताओं ने उन्हें मनाया। अब हालात यह हैं कि पद के लिए पार्टी ही तोड़ दी जाती है। पद व राजनीति एक दूसरे में इतने घुलमिल गए हैं कि पद शब्द एक तरफ कर दें तो राजनीति शब्द का कोई अर्थ नहीं रह जाता। ताजा मिसाल आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैहरा की है। खैहरा ने बठिंडा के अपने 7 विधायकों के सहयोग से कनवैंशन कर ली हालांकि उनके साथ दो अन्य विधायक तो इस कनवैंशन में नहीं आए। लोगों को एकत्रित करने के लिए जोर लगाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे वह किसी लोक मामले में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हों। कनवैंशन का बड़ा मुद्दा यह था कि खैहरा को उनसे छीना गया विपक्ष के नेता का पद वापिस किया जाए। कनवैंशन में पहुंचे विधायकों ने भी मांग पर जोर दिया। इस घटना से शुरु से ही विवादों में उलझी आम आदमी पार्टी और भी घिर गई है। पार्टी के अंदर लोकतंत्र नहीं है क्योंकि नेता विपक्ष को बदलने के लिए विधायकों की बैंठकें नहीं हुई, फिर नेताओं को अनुशासन पसंद नहीं क्यों वह मीडिया में जाने की बजाए पार्टी मंच पर अपनी बात नहीं रख सके। खास पदों की दौड़ में आदर्श भटकते नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जनता के हितों की बात करने की बजाए सभी राज्यों की लीडरशिप को पद की लालसा ने अपनी चपेट में ले लिया है। कांग्रेस व अकाली-भाजपा दलों को ‘आप’ की दुर्दशा फायदेमंद साबित होगी। इस पार्टी के राष्टÑीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनते समय लोगों के सामने आदर्श रखा था कि वह सरकारी बंगला नहीं लेंगे। खैहरा की ओर से सरकारी कोेठी खाली करवाने के लिए कु छ दिनों की मोहलत मांगी गई थी। पंंजाब को इस समय जरूरत है सार्वजनिक मुद्दों की आवाज उठाने वाले नेताओं व पार्टियों की।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू हैं जो भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए अपनी ही पार्टी के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इस तरह भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सिद्धू की लड़ाई सरकार के साथ हो रही है। नवजोत सिद्धू के परिवार ने विरोध होने के कारण सरकार में दो अहम पद भी ठुÞकरा दिए। पदों के त्याग के लिए सिद्धू पूरे पंजाब के लिए मिसाल बन चुके हैं। राजनीति को सेवा मानना बड़ी बात है जो कहीं-कहीं पूरी होती भी दिख रही है। सिद्धू व खैहरा की मिसाल राजनीति के दो पहलुओं को प्रदर्शित करती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-desire-for-position-became-greater-than-service/article-5149</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-desire-for-position-became-greater-than-service/article-5149</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Aug 2018 10:33:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-08/chair-is-more-important-then-service-for-govt-employee.jpg"                         length="11967"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों का फूट रहा गुस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[01 जून से अगली 10 जून तक किसानों ने गांव बंद की घोषणा कर दी है, आखिर किसानों का गुस्सा फिर से फूट पड़ा है, मार्च मेंं भी किसान सड़कों पर उतरे थे। तक महाराष्टÑ व मध्यप्रदेश तक ही आन्दोलन सीमित रहा था। लेकिन अब पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व यूपी भी इसमें शामिल हो गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protest-of-farmers-against-govt/article-3904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/farmer1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">01 जून से अगली 10 जून तक किसानों ने गांव बंद की घोषणा कर दी है, आखिर किसानों का गुस्सा फिर से फूट पड़ा है, मार्च मेंं भी किसान सड़कों पर उतरे थे। तक महाराष्टÑ व मध्यप्रदेश तक ही आन्दोलन सीमित रहा था। लेकिन अब पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व यूपी भी इसमें शामिल हो गया है। शुक्रवार को आन्दोलन का पहला दिन था, किसानों ने दूध व सब्जी की सप्लाई ही नहीं रोकी बल्कि अनाज बेचने से भी एक-दूसरे किसानों को रोका, अधिकतर किसान अब एकजुट नजर आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों ने बंद को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। किसान आखिर करें भी तो क्या? किसान की फसल जब पककर बाजार में पहुंचती है कोई उसे खरीदना नहीं चाहता, ऐसा नहीं कि मांग नहीं बस दलाल किसान को परेशान कर फिर वही फसल कौड़ियों के भाव खरीद लेते हैं। किसान को डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक हर चीज का मूल्य बहुत अधिक चुकाना पड़ रहा है। स्वामीनाथन आयोग ने किसानों की समस्याओं को बहुत ही गंभीरता से परखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">तब इस आयोग ने सिफ ारिश की है कि किसानों को लागत मूल्य पूरा कर पचास फीसदी मुनाफा दिया जाए जो कि नहीं हो रहा। किसान पर कर्ज दिन ब दिन बढ़ रहा है लेकिन राज्य व केन्द्र कोई सरकार इस कर्ज के बोझ को घटाने के लिए चिंतित नजर नहीं आ रही। दूसरी ओर कार्पोरेट घरानों को खुले हाथों से कर्ज बांटा जाता है, वसूली की भी फिक्र नहीं कोई बिना चुकाये भाग गया तब भी कोई कार्रवाई नहीं। टैक्स में छूट कच्चे माल में दी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्योगों का प्रदूषण भी किसानों को पीना पड़ रहा है, शहरी आबादी का पूरा मलमूत्र ग्रामीण क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है। कोई वाटर ट्रीटमेंट नहीं, शहरी सीवरेज पर कोई नियंत्रण नहीं ऐसे में अगर किसान अब लम्बा आंदोलन छेड़ रहा है तब इस सबके लिए सरकार व उसकी नीतियां जिम्मेवार हैं। पूरे देश का किसान अपनी फसलें भी बदल-बदल कर देख चुका है लेकिन वह व्यापारी के रहमोंकर्म पर ही निर्भर है। व्यापारी बाजार व कृषि में जब तक सरकार संतुलित नीतियां नहीं लाती तब तक यह संघर्ष बढ़ता ही जाना है। भारत 80 करोड़ किसानों का घर है यदि संघर्ष नहीं रोका गया तब यह देश के लिए बहुत घातक साबित होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protest-of-farmers-against-govt/article-3904</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protest-of-farmers-against-govt/article-3904</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Jun 2018 08:28:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/farmer1.jpg"                         length="97754"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कानून से ऊपर नहीं कोई भी नेता</title>
                                    <description><![CDATA[आधार कार्ड मोबाइल फोन से लिंक करवाने के मामले में पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के तेवर उनकी सुर्खियां बटोरने की राजनीति का हिस्सा है। ममता ने आधार कार्ड लिंक न करने की खुलकर चुनौती दी थी जिसका सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नोटिस लिया है। कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाई है कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/no-leader-above-law/article-3475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/aadhar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आधार कार्ड मोबाइल फोन से लिंक करवाने के मामले में पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के तेवर उनकी सुर्खियां बटोरने की राजनीति का हिस्सा है। ममता ने आधार कार्ड लिंक न करने की खुलकर चुनौती दी थी जिसका सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नोटिस लिया है। कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाई है कि कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा बनाए कानूनों को चुनौती नहीं दे सकता। नि:संदेह कोई व्यक्ति किसी भी कानून की खामियों पर सवाल कर सकता है और उसमें सुधार की मांग भी की जा सकती है, परंतु यह सारा कुछ संवैधानिक तरीके से होना चाहिए, न कि अराजक तरीके से झगड़ा शुरू कर देना चाहिए। ममता की राजनीति का तरीका ही ऐसा रहा है कि वह जोशीले व बगावती अंदाज में विरोध करती है। इससे उनका राष्ट्रीय राजनीति व मीडिया में चर्चित हो जाना आम बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी पैंतरेबाजी सरकारी कानूनों व योजनाओं के साकारतमक परिणामों के रास्ते में रुकावट बनती है। इसमें कोई शक नहीं कि आधार कार्ड ने भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक रोक लगाने के साथ-साथ असल लाभपात्रियों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। रसोई गैस व पैंशन जैसी योजनाआें में करोड़ों की संख्या में फर्जी लाभपात्री छू मंत्र हो गए। इससे सरकारी खजाने को भी लाभ हुआ। ममता बैनर्जी को अड़ियल रवैया छोड़कर खुले दिमाग से सोचने की जरूरत है। ममता अपने निजी स्वभाव को सरकारी कार्य में हावी न होने देें। विरोध व अराजक रवैया अलग-अलग चीजें है। संवैधानिक पदों पर बिराजमान नेताओं को किसी भी कानून संबंधी कोई भी टिप्पणी सोच समझकर पूरी संयम से करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनैतिक स्वार्थों के लिए संवैधानिक व्यवस्था पर बयानबाजी चिंताजनक है। व्यवस्था में किसी परिवर्तन का विरोध बगावती तरीके से नहीं होना चाहिए। कानून प्रति सम्मान की भावना की सबसे पहली मिसाल राजनैतिक नेताओं को पेश करनी चाहिए ताकि अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा ले सकें। कोई भी व्यक्ति देश के कानून से ऊपर नहीं हो सकता। कानून बनाने वाले ही कानून का पालन नहीं करेंगे, तो सुधार की उम्मीद नहीं कर सकते।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/no-leader-above-law/article-3475</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/no-leader-above-law/article-3475</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Nov 2017 06:24:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-11/aadhar.jpg"                         length="75509"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंचकूला हिंसा में मारे गए डेरा प्रेमियों के परिजनों को मुआवज़ा दे सरकार : हुड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[रोहतक। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को हुई एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश की सरकार से मांग की कि पंचकूला हिंसा में मारे गए डेरा प्रेमियों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए। हुड्डा ने कहा कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार पहले धारा 144 लगाती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/govt-to-compensate-families-of-dera-followers-killed-in-panchkula-violence-hooda/article-3425"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/hooda.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक।</strong> प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को हुई एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश की सरकार से मांग की कि पंचकूला हिंसा में मारे गए डेरा प्रेमियों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए। हुड्डा ने कहा कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार पहले धारा 144 लगाती है और कहती है कि डेरा श्रद्धालुओं को पूरी तरह जांचने के बाद ही पंचकूला में जाने दिया जा रहा है। इस बात की गहनता से जांच की गई है कि कोई भी व्यक्ति कोई घातक हथियार अंदर न ले जा सके। वहीं जब अदालत का फैसला आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो सरकार गोली चलवा कर निहत्थे लोगों को मरवा देती है और दलील देती है कि शांति स्थापित करने के लिए गोली चलाई गई क्योंकि वहां लोगों के पास घातक हथियार थे। सवाल यह है कि जब सरकार ने एक डंडा तक पंचकूला के अंदर नहीं आने दिया गया तो वहां निहत्थे लोगों के पास घातक हथियार कहां से आ गए? पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग रखी कि सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और 25 अगस्त को हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा राशि देनी चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी कर चुके हैं मुआवजे की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि कुछ रोज़ पहले प्रदेश के खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी अनौपचारिक कैबिनेट बैठक में पंचकूला हिंसा के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग कर चुके हैं। वहीं दबी जुबान में कैबिनेट के कई अन्य मंत्री भी इस मांग को सीएम के सामने रख रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/govt-to-compensate-families-of-dera-followers-killed-in-panchkula-violence-hooda/article-3425</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/govt-to-compensate-families-of-dera-followers-killed-in-panchkula-violence-hooda/article-3425</guid>
                <pubDate>Sat, 21 Oct 2017 04:09:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-10/hooda.jpg"                         length="18725"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्ज माफी की डींगें व कृषि की हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[देश की आधा दर्जन सरकारों द्वारा किसानों के कर्ज माफी के दावे व अपनी-अपनी पीठ थपथपाने का रूझान हैरानी भरा है। दरअसल यह बात सरकारों की न तो कोई उपलब्धि है और न ही किसी मामले के हल की समझ है। मामला सुलझाना तो दूर की बात है। दरअसल कर्ज माफी के ऐलान वोटों से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/realities-of-agriculture/article-3350"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/farmer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की आधा दर्जन सरकारों द्वारा किसानों के कर्ज माफी के दावे व अपनी-अपनी पीठ थपथपाने का रूझान हैरानी भरा है। दरअसल यह बात सरकारों की न तो कोई उपलब्धि है और न ही किसी मामले के हल की समझ है। मामला सुलझाना तो दूर की बात है। दरअसल कर्ज माफी के ऐलान वोटों से जुड़ गए हैं। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने चुनाव इस वायदे को लेकर लड़ा थी कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार बनने पर कांग्रेस ने अपना किया वायदा निभाने की तरफ कदम उठाया और 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया। इस तरह पंजाब देश का सबसे अधिक कर्ज माफी करने वाला राज्य बन गया। पंजाब सरकार के इस ऐलान पर अमली जामा पहनाना अभी बाकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन सच्चाई यही है कि चाहे पंजाब सरकार इस वायद को पूरा क्यों न कर दे, लेकिन यह कोई कृषि संकट का हल नहीं है। यह तो चुनावों में वोट हासिल करने का वायदा ही पूरा करना है। दरअसल कृषि संकट के हल के लिए कृषि नीतियों में बदलाव जरूरी है, जिस संबंधी सरकारें न तो गंभीर हैं और न ही चिंताजनक।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों से हमदर्दी रखने वाला देश का हर अर्थशास्त्री कर्ज माफी के हक में नहीं है। अर्थशास्त्री कृषि नीतियों में सुधार की सलाह देते हैं, ताकि किसान की आमदन बढ़े और वह अपना कर्ज वापिस कर सके। देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक सरदारा सिंह जौहल का दावा है कि कर्ज तो किसान को लेना ही पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी दलील है कि इस संंबंधी नीति बनाने की जरूरत है कि किसान को कर्ज कितना व कैसे दिया जाए, ताकि वह समय रहते कर्ज वापिस कर सके। जौहल ने सरकारों पर करारी चोट करते कहा कि सरकारें कृषि विशेषज्ञों की सुनती ही नहीं है और न ही उन्हें कृषि विशेषज्ञों की जरूरत है। बिना किसी संदेह जौहल की बातें सिर्फ दमदार ही नहीं, हकीकत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक पार्टियां अपनी नीतियां वोट बैंक को मुख्य रखकर बनाती हैं। कृषि संबंधी फैसला वह राजनेता लेते हैं, जिन्हें न तो कृषि संकट की इतनी समझ होती है और न ही इसके हल की चिंता होती है। यह तो वही बात हुई ‘दर्द घुटनों में, दवा पेट दर्द की’। राजनेता हर मामले के विशेषज्ञ बनने की बजाए, कृषि संकट का हल कृषि विशेषज्ञों से पूछने व कृषि नीतियां उनकी सलाह से बनाएं। कृषि के संकट को अर्थ शास्त्र की दृष्टि से व कृषि के हालातों की समझ से ही हल किया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/realities-of-agriculture/article-3350</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/realities-of-agriculture/article-3350</guid>
                <pubDate>Thu, 28 Sep 2017 05:27:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-09/farmer.jpg"                         length="51702"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        