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                <title>आपत्तिजनक विज्ञापन अधिनियम-1954 का संशोधन</title>
                                    <description><![CDATA[भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा अब उठाए जाने वाले कदम सराहनीय हैं। सांवली त्वचा से पाएं छुटकारा, पायें निखरी-निखरी गोरी त्वचा या आप अपने छोटे कद को लेकर कुठिंत हैं? या पौरूष बढ़ाने की दवा पर बड़े-बड़े दावों की दुकानों को अब बंद हो जाना चाहिए। यह सरकार की गफलत ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/amendment-of-offensive-advertising-act-1954/article-12953"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/advertising-act-1954.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा अब उठाए जाने वाले कदम सराहनीय हैं। सांवली त्वचा से पाएं छुटकारा, पायें निखरी-निखरी गोरी त्वचा या आप अपने छोटे कद को लेकर कुठिंत हैं? या पौरूष बढ़ाने की दवा पर बड़े-बड़े दावों की दुकानों को अब बंद हो जाना चाहिए। यह सरकार की गफलत ही रही है कि दशकों से धूर्त व्यापारी लोग देश की एक बहुत बड़ी आबादी को बिना कोई बीमारी के भी बीमार बताकर अपना धंधा चमकाकर बैठे हैं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">भारत गर्म जलवायु का देश है, फिर यहां दुनियाभर के कई क्षेत्रों से लोगों ने आकर अपना घर भी बनाया है, जो कि गोरे-काले, भूरे-पीले या लाल रंग के रहे हैं। इतना ही नहीं देश के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी-पानी, धूप के चलते भी लोगों का रंग रूप भिन्न-भिन्न है। परंतु कुछ लोगों ने इसी रंग रूप में काले व सांवले रंग को अपने कारोबार का आधार बना लिया और आज देश में अरबों रूपयों का महज गोरा करने का कारोबार हो रहा है, जिसका कभी भी चमत्कार संभव नहीं, परंतु भोले भाले लोगों को मूर्ख बनाकर कंपनियां अपना घर भर रही हैं। ठीक ऐसे ही पुरूषों को भी चिर यौवन का झांसा देकर ये कंपनियां अपना धन्धा कर रही हैं। यह सब ऐसे लोगों के साथ हो रहा है जो अनभिज्ञ हैं या जिन्हें प्रकृति पर भी शंका रहती है या उन्हें शंकालु बना दिया गया है। कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">मानव का नैसर्गिक रंग भी उनमें से एक है। फार्मा के अलावा भी देश में विदेश भेजने एवं जल्द अमीर होने के विज्ञापनों की भरमार है, जिनमें भी लोगों को जमकर ठगा जा रहा है। भ्रम फैलाने वाले विज्ञापनों एवं ऐसे कृत्यों पर कठोर पाबंदी लगाना सरकार का दायित्व है। लेकिन हमारे देश का शासन-प्रशासन सदैव तब उठता है जब पानी सिर के ऊपर हो जाता है। आमजन को भी हालांकि पहली नजर में समझ आ रही होती है कि चमत्कारिक दवाओं, तंत्र-मंत्र, व धनवान बनाने के अधिकतर दावे झूठे व ठगने वाले हैं, फिर भी लोग इनमें फंस रहे हैं। लेगों को जागरूक बनना होगा चूंकि देश में यूं तो अनेकाएक कानून हैं परंतु उनकी कार्यशीलता शिथिल होने के चलते ऐसा आभास रहता है कि देश में कोई नियम-कानून ही नहीं है। फिर भ्रष्टाचार का बोलबाला होने के चलते प्रभावशाली लोग नियम कायदों की बिना परवाह किए अपना गोरखधंधा चलाए रखते हैं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">अत: यह आमजन का नैतिक कर्तव्य भी है कि वह अपने बारे में, प्रकृति के बारे में एवं साधारण कानून कायदों का जो ज्ञान है उस पर विश्वास करें न कि उन लोगों का विश्वास करें जो कि स्वस्थ या सुविधा सम्पन्न व्यक्ति को भी बीमार या कमजोर बताकर कोई सब्जबाग दिखाते हैं एवं बिना जरूरत का खरीददार बनाकर जेब काट अपना कारोबार कर रहे हैं।</h4>
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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2020 22:00:27 +0530</pubDate>
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