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                <title>परहित में आनंद</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/pleasure-in-selfless-service/article-12975"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/selfless.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">गुलाब का फूल पूरे उपवन में अपनी खूबसूरती और खुशबू के लि विख्यात था। जो भी उसके पास से गुजरता, उसे एकटक निहारे बगैर नहीं रह पाता। उसकी खुशबू तो ऐसी कि लोग अपनी सुध-बुध भूल जाएँ। इसकी खुशबू और खूबसूरती से प्रभावित होकर लोग इन फूलों को तोड़कर अपने साथ ले जाने लगे। इससे बेचारा गुलाब बेहद दुखी रहने लगा। पौधे की शाखाओं पर गुलाब के साथी निंरतर घटते जा रहे थे और वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। आखिरकार गुलाब अपनी परेशानी लेकर एक जानकार शख्स के पास पहुँचा। उस शख्स ने गुलाब की समस्या को ध्यान से सुना। इसके बाद उसने गुलाब से कहा- ‘इस दुनियां की रीत यही है कि जो आपके साथ जैसा व्यवहार करता हैं, आपको भी उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">दुर्जनों के साथ दुष्टता करना ही उचित नीति है। यदि तुमने ऐसा नहीं किया यह संसार तुम्हारा अस्तित्व मिटा देगा।’ गुलाब ने उस व्यक्ति की सलाह गांठ बाँध ली। उसने लौटकर आने के बाद अपनी सुरक्षा के लिए अपनी डालियों पर काँटे पैदा करना आरंभ कर दिया। अब जो कोई भी उसकी ओर हाथ बढ़ाता, वह कांटों से उसे छलनी कर देता। इससे लोगों का उसकी ओर आना कम हो गया। कुछ दिनों बाद गुलाब के उस पौधे को एक साधु से सत्संग का भी अवसर मिल गया। साधु ने उसे बताया- ‘यदि अपने जरिए किसी का भला होता है तो उससे अच्छी बात और क्या हो सकती है।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">परोपकार में अपने जीवन को खपाने वाले से बढ़कर सम्मानीय दुनिया में और कोई नहीं होता।’ गुलाब को अपनी खूबसूरती और सुवास बिखेरने में खुशी मिलने लगी। आज गुलाब ने दुनिया में जो सम्मान पाया है, वह अपने कांटों के बल पर नहीं, वरन् अपने पुष्पों के सौंदर्य-सौरभ के बल पर अर्जित किया है।</h4>
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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2020 21:31:19 +0530</pubDate>
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