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                <title>Precious words - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>अनमोल वचन : परमात्मा से कभी मुंह न मोड़ो: पूज्य गुरू जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि उस प्रभु को अपना साथी बनाना है तो यह जरूरी है कि इन्सान नेकी-भलाई के रास्ते पर चले, उस परमात्मा का नाम जपे। तड़प कर उस अल्लाह, मालिक को अपना बना लो और एक बार जब वह आपका हो गया तो कभी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/never-turn-your-back-on-god/article-27236"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि उस प्रभु को अपना साथी बनाना है तो यह जरूरी है कि इन्सान नेकी-भलाई के रास्ते पर चले, उस परमात्मा का नाम जपे। तड़प कर उस अल्लाह, मालिक को अपना बना लो और एक बार जब वह आपका हो गया तो कभी भी वह बिछोड़ा नहीं करता। इसलिए आप ऐसा साथी बनाओ जो पक्का हो। जिसे आप साथी समझ बैठते हैं उसके बारे में तो भगवान जानता है कि किसको, कितने श्वास दिए हैं। इसलिए उसको साथी बनाओ जो श्वास देता है। जब वो आपका अपना हो जाएगा तो आप दुनिया में बहार की तरह जीवन गुजारेंगे वरना पतझड़ का मौसम आ जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि दुनिया के प्यार की शुरुआत स्वार्थ से होती है। दुनियादारी में लोग खो जाते हैं और अल्लाह, मालिक, राम, कायदे-कानून सब भूल जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि जब उस राम की मार पड़ती है तो आदमी को कोई रास्ता नजर नहीं आता। इसलिए सेवा-सुमिरन करो, भक्ति की चाह करो। उससे सब कुछ मांगो और वो देगा, अंदर-बाहर से मालामाल कर देगा। इसलिए उस परमात्मा से कभी भी मुंह न मोड़ो। मालिक का सुमिरन, भक्ति-इबादत करते रहो तो अंदर-बाहर से लबरेज हो जाओगे।</p>
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                <pubDate>Mon, 27 Sep 2021 05:05:18 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : कलियुग में सेवा व भक्ति करना बेमिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में सेवा करना, भक्ति-इबादत करना अपने आप में बेमिसाल है। हर इन्सान यह नहीं कर पाता। कभी मन हावी हो जाता है, मन शांत होता है तो कहीं न कहीं मनमते लोगों की सोहब्बत हो जाती है और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/doing-service-and-devotion-in-kaliyuga-is-unmatched/article-27114"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में सेवा करना, भक्ति-इबादत करना अपने आप में बेमिसाल है। हर इन्सान यह नहीं कर पाता। कभी मन हावी हो जाता है, मन शांत होता है तो कहीं न कहीं मनमते लोगों की सोहब्बत हो जाती है और फिर से मन इन्सान को दबा देता है। जो इन्सान सत्संगी हो और अल्लाह, वाहेगुरु की चर्चा करे तो उसकी ही सोहब्बत करो। इस संसार में दिखने में बहुत से लोग अल्लाह, वाहेगुरु को याद करते हैं। उन्हें देखकर यूं लगता है कि इनके अलावा मालिक से अधिक प्यार करने वाला और कोई नहीं है लेकिन यह जरूरी नहीं कि जो दिखता है वही होता है। आज के युग में अधिकतर लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। लोगों को बुद्धू बना देते हैं, धीरे-धीरे बातों ही बातों में इन्सान को गुमराह कर देते हैं। तो ऐसे लोगों से बचो, सेवा करो व सुमिरन करो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि किसी भी जीव को अपनी गलतियां, अपनी कमियां नजर नहीं आती बल्कि अधिकतर लोग अपनी कमियों को नजरअंदाज करके अल्लाह, वाहेगुरु, राम में कमी निकालते रहते हैं और एक न एक दिन उनका हश्र बुरा होना ही होता है। इन्सान अपनी कमियां नहीं निकालता। हमने बहुतों को देखा है, उनको अपनी कमी नजर नहीं आती। वह केवल उस मालिक की बुराइयां करने में लगा रहता है। मालिक ने ऐसा क्यों किया, मालिक ने वैसा क्यों किया इत्यादि।</p>
<p style="text-align:justify;">अरे भाई, मालिक के भक्त, मालिक के संत, पीर-फकीर तो बताते रहते हैं कि ऐसा करो, वैसा करो लेकिन इन्सान वैसा न करे तो फकीरों का इसमें क्या कसूर। उनका काम तो सबको सच्ची शिक्षा देना व अल्लाह, वाहेगुरु के रास्ते पर चलाना है, लेकिन अगर इन्सान ही उनके दिखाए रास्ते पर न चले, मनमते करता रहे व अपनी मनमर्जी करता रहे तो आने वाले समय में दु:ख या परेशानियां आए व आपको बोझ उठाने पड़े तो दोष संतों पर लगाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संतों ने कुछ कहना थोड़े ही है। पता नहीं कितने ही लोग ऐसे हैं जिन्होंने खुद कुछ नहीं करना और अपना आरोप मालिक पर लगा देता है। लोग अपने आप में कोई सुधार करते नहीं लेकिन उस अल्लाह, वाहेगुरु, संत, पीर-फकीर को दोष देते रहते हैं। तो इन्सान कैसे भक्ति में अव्वल होगा, उस पर कैसे मालिक की कृपा होगी। इसलिए भाई, अपने अंदर की कमियों को निकालो। तभी आप मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बनोगे व तभी आप पर मालिक का रहमो-करम बरसेगा।</p>
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                <pubDate>Thu, 23 Sep 2021 09:53:46 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : हर जगह फैला है मालिक का नूर</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान कण-कण में है, कोई जगह उससे खाली नहीं है तो उसकी बनाई नियामतें कैसे हर जगह नहीं होंगी और मनुष्य शरीर उस मालिक द्वारा बनाया गया सर्वोत्तम व सर्वश्रेष्ठ शरीर है। उस परमपिता परमात्मा ने जो ब्रह्मंड में बनाया, वो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/the-masters-light-is-spread-everywhere/article-27079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान कण-कण में है, कोई जगह उससे खाली नहीं है तो उसकी बनाई नियामतें कैसे हर जगह नहीं होंगी और मनुष्य शरीर उस मालिक द्वारा बनाया गया सर्वोत्तम व सर्वश्रेष्ठ शरीर है। उस परमपिता परमात्मा ने जो ब्रह्मंड में बनाया, वो मनुष्य शरीर में भी भर दिया। यानि सब कुछ है आपके अंदर। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि सब कुछ है मनुष्य के अंदर।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इन्सान उसको ढूढंने के लिए जंगल, पहाड़ में घूमता रहता है। वो परवरदिगार अंदर बैठा है, वो रहमोकर्म का मालिक अंदर बैठा है और उसको पाने के लिए जिसने तड़प बनानी है, वो आत्मा भी सबके अंदर है। आत्मा भी अंदर और परमात्मा भी अंदर। जब दोनों अंदर हैं तो इन्सान बाहर किसको ढूंढता है। सच्चे दिल से, तड़प कर, पुकार कर अंत:करण की आवाज को सुनकर अगर इन्सान मालिक का नाम जपे, भक्ति, इबादत करे तो परमात्मा को पा सकता है, वैराग्य से। कोई दिखावा करने की जरूरत नहीं है। अगर आपके अंदर की भावना शुद्ध हो गई, वैराग्य में होगी, तो वो जानता है कि आप शुद्ध हृदय से उसे पुकार रहे हैं। उसके लिए तड़प रहे हैं, तो वो आप पर रहमतें, नियामतें बरसा देगा और अपने दर्श-दिदार से निहाल, मालामाल कर देगा।</p>
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                <pubDate>Wed, 22 Sep 2021 06:05:45 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : परमार्थ के लिए आते हैं संत</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर इस संसार में हर किसी का भला करने के लिए आते हैं। दुनिया में ज्यादातर लोग अपने लिए, अपने गर्ज के लिए समय गुजारते हैं, परन्तु संत परमार्थ के लिए समय लगाते हैं। दूसरों का दु:ख अपना दु:ख मानते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/saints-come-for-charity/article-27008"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर इस संसार में हर किसी का भला करने के लिए आते हैं। दुनिया में ज्यादातर लोग अपने लिए, अपने गर्ज के लिए समय गुजारते हैं, परन्तु संत परमार्थ के लिए समय लगाते हैं। दूसरों का दु:ख अपना दु:ख मानते हैं और अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब से दुआ करके उनके दु:ख दूर करने की कोशिश करते हैं। अगर जीव संतों के वचन मान ले तो उसके दु:ख दूर हो जाते हैं और वचन न माने तो उसे अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संतों का काम शिक्षा देना है। जिस प्रकार टीचर, लेक्चरार कक्षा में जाकर विद्यार्थियों को लेक्चर देते हैं, अपने तरीके से सिखाते हैं। फिर विद्यार्थियों पर निर्भर होता है कि वो टीचर की बातों को कितना मानते हैं। जो बच्चे मानते हैं, सिखाए गए का अनुसरण करते हैं, उन्हें मेरिट हासिल होती है। कुछ फर्स्ट डिविजन में आते हैं और आगे तरक्की करते हैं। कुछ ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो टीचर की बातों की तरफ ध्यान नहीं देते। वो सिर्फ टाइम पास करने के लिए स्कूल, कॉलेज में जाते हैं। तो वो नेचुरली फेल ही होंगे। इसी तरह संत, पीर-फकीर सभी को समझाते हैं। जो सुनकर अमल कर लेते हैं, वो दोनों जहान की खुशियों के काबिल बन जाता है। अगर पूरा अमल कर लेते हैं तो परमात्मा के दर्शन भी कर लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जो थोड़ा अमल करते हैं, उन्हें भी कभी-कभार दर्श-दीदार हो जाते हैं। आप जी फरमाते हैं कि संतों का काम परमार्थ, परहित के लिए समय लगाना है। वो किसी से डरते नहीं, किसी को डराते नहीं। वो किसी से डरते इसलिए नहीं क्योंकि वो उस निर्भय अल्लाह, वाहेगुरु, राम से प्यार करते हैं। वो ईश्वर निर्भय, निरवैर है तो उसका संत, जो उससे प्यार-मोहब्बत करता है वो भी निर्भय, निरवैर होता है। उनका किसी से कोई वैर-विरोध नहीं होता। संतों का काम सभी को सच्ची शिक्षा देना है, अल्लाह, वाहेगुरु, मालिक से जोड़ना है। जो सुनकर अमल कर लेते हैं उनका बेड़ा पार हो जाता है। इसलिए सुनकर अमल करो ताकि मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बन सकें।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Sep 2021 05:17:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनमोल वचन : मन की ना सुनो: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक, सतगुरु, परमात्मा जिस पर दया-मेहर करता है और वह संभालने वाला उसे संभाल लेता है तो उसके मुकाबले में दुनिया में कोई भी इन्सान सुखी नहीं होता। मालिक अपनी दया-मेहर, रहमत बरसाता है पर आदमी का मन जालिम हर चीज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/guru-sant-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan-7/article-26974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/the-name-of-allah-waheguru-makes-the-house-heaven-pujya-guru-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक, सतगुरु, परमात्मा जिस पर दया-मेहर करता है और वह संभालने वाला उसे संभाल लेता है तो उसके मुकाबले में दुनिया में कोई भी इन्सान सुखी नहीं होता। मालिक अपनी दया-मेहर, रहमत बरसाता है पर आदमी का मन जालिम हर चीज से खासकर मालिक के प्यार, मोहब्बत से उकता जाता है। मन खुशियों से गुमराह कर देता है। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि ऐसा समय था जब लोग सैकड़ों साल भक्ति-इबादत करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">तब जाकर परमात्मा के दर्श-दीदार होते थे। आज घोर कलियुग है, इतने साल भक्ति-इबादत करने की जरूरत नहीं है। दृढ़ विश्वास हो, थोड़ा सुमिरन करें, सेवा करें तो सतगुरु, मौला, अल्लाह, राम, वाहेगुरु दर्श-दीदार से नवाज देता है। पर जिस तरह दुनिया में कोई सामान महंगे मोल बिकता है तो लोग उसकी कद्र करते हैं और सोचते हैं कि यह बहुत चलेगा उसी तरह मालिक की दया-मेहर, रहमत किसी को सस्ते में बिना कोई दु:ख-तकलीफ के मिल जाती है तो उसे वह दया-मेहर, रहमत सस्ती लगने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसका मन उसे हवा देने लगता है, तरह-तरह के विचार देकर गुमराह करता है, परेशान करता है। फिर काल मनमते लोगों के द्वारा अपना दांव चलाता है, उसकी भक्ति भंग करना चाहता है। कोई उसके पास आकर बैठता है और वह निंदा चुगली करता है, बुरा बोलता है। पहले तो इन्सान उनकी बात नहीं सुनता लेकिन उनकी लगातार सोहबत उसे गुमराह कर देती है। फिर वह पूरा इंटरेस्ट (ध्यान) लेकर सुनता है। सुनते-सुनते वह गुमराह हो जाता है और मन के हत्थे चढ़कर ऐसी बातें करने लगता है, जो अल्लाह, मालिक के लिए सही नहीं होती। फिर खुशियां चली जाती हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Sep 2021 06:05:13 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : सच्चा मित्र वही जो आपका भला करे</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जहां तक इन्सान की निगाह देखती है, वहां वो परमपिता परमात्मा रहता है और जहां निगाह नहीं जाती, वहां भी वो हमेशा होता है। इन्सान की आंखें वो नहीं देख पाती, जो मालिक ने सब कुछ बनाया है। मालिक को देखना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/true-friend-is-the-one-who-does-you-good/article-26943"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg3.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जहां तक इन्सान की निगाह देखती है, वहां वो परमपिता परमात्मा रहता है और जहां निगाह नहीं जाती, वहां भी वो हमेशा होता है। इन्सान की आंखें वो नहीं देख पाती, जो मालिक ने सब कुछ बनाया है। मालिक को देखना तो दूर की बात है, मालिक की सृष्टि में सूक्ष्म जीव हैं, कारण जीव हैं, जल्दी से आदमी खुली आंखों से उन्हें भी नहीं देख पाता। अस्थूल काय, जिसमें मनुष्य, पशु, पक्षी के शरीर आते हैं, जिनको इन्सान देखता रहता है और इसी को सारी दुनिया माने बैठा है।</p>
<p style="text-align:justify;">या फिर लोगों के दिलो-दिमाग में त्रिलोकी के बारे में होता है, आसमान है, धरती है और पाताल है, ये तीन लोक हैं, ये त्रिलोकी है! ये गलत है, यह सही नहीं है। त्रिलोकी इसको नहीं कहा जाता, बल्कि त्रिलोकी जहां अस्थूल काय यानि जो शरीर दिखते हों, सूक्ष्म काय यानि जो शरीर नहीं दिखते, कारण काय यानि जो देवी-देवताओं के शरीर होते हैं, ये तीन तरह के शरीर जहां रहते हैं, उन्हें त्रिलोकी कहा जाता है। तो ऐसी सैकड़ों त्रिलोकियां हैं, जो हर जगह खंडोंं, ब्रह्मंडों में मालिक ने बना रखी हैं। सुमिरन, भक्ति के द्वारा जब आत्मिक शक्तियां बढ़ती हैं, आत्मा ऊपर उठने लगती है तो वो मालिक के नजारे नजर आने लगते हैं, मालिक की दया-मेहर, रहमत बरसने लगती है और इन्सान आगे बढ़ता जाता है, तो यूं नहीं लगता कि आत्मा आगे बढ़ रही है,</p>
<p style="text-align:justify;">बल्कि ऐसा लगता है कि इन्सान आगे बढ़ रहा है। तब मालिक रहमत करें, तो वो त्रिलोकियों को भी दिखा देता है।<br />
आप जी फरमाते हैं कि आदमी को सुमिरन करना चाहिए और बुरी आदतों को छोड़ देना चाहिए। यार, दोस्त, मित्र वही होता है, जो आपका भला करता है। जो आपको बहला-फुसला कर राम-नाम से दूर ले जाए, दलदल में फंसाए, बेपरवाह जी फरमाया करते कि ऐसे दोस्त हों, तो दुश्मनों की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वो ही ऐसी दुश्मनी करते हैं, जैसे मन है। मन आदमी के साथ रहता है, पता नहीं चलने देता लेकिन दोस्त बनकर धोखा देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को कहता है कि वो काम कर ले, कोई हर्ज नहीं। ऐसा कहता रहता है, लेकिन इन्सान को सुखी नहीं होने देता। इन्सान को काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया रूपी दलदल में फंसा देता है, उनमें डुबो देता है। उसी तरह मनमते लोग होते हैं, जो इन्सान को गुमराह करते हैं। आदमी की अक्ल निकाल लेते हैं और आदमी को ऐसे लगता है कि जो हो रहा है, सही हो रहा है। कई बार मन उचाट हो जाता है और कहते हैं कि ‘बिगड़ा मन गुरू का न पीर का।’ जब मन बिगड़ जाता है, तो किसी गुरू, पीर-फकीर की बात को नहीं मानता। तो मन को रोकने के लिए एकमात्र उपाय सुमिरन, से ही है। मन काबू में आ सकता है, अगर आप सेवा, सुमिरन, परमार्थ करो और मनमते लोगों का संग छोड़ दो।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Sep 2021 06:05:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनमोल वचन : मन को सीधा करना ही असल गैरत: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक इंसान जब भी राम-नाम छोड़ देता है तो उसके अंदर की भावना बुरी तरह से मर जाती है। इंसानियत को भूला हुआ इंसान शैतान बन जाता है। वह अपने दिमाग के तंग दायरे में इस तरह कैद हो जाता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/straightening-the-mind-is-the-only-real-thing/article-26903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-by-saint-dr.-msg2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि एक इंसान जब भी राम-नाम छोड़ देता है तो उसके अंदर की भावना बुरी तरह से मर जाती है। इंसानियत को भूला हुआ इंसान शैतान बन जाता है। वह अपने दिमाग के तंग दायरे में इस तरह कैद हो जाता है कि उसे किसी की भी बात अच्छी नहीं लगती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि जब मन बुराई पर आता है तो वह सारे दरवाजे बंद कर देता है, जिससे इंसान को रास्ता न मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">समझाने वाले समझाते हैं, लेकिन जिस तरह से औंधे घड़े पर पानी का लेश मात्र असर नहीं होता उसी तरह से मन के मारों का भी यही हाल होता है। कई लोगों को यह पता नहीं होता कि गैरत, अणख किसे कहते हैं? इंसान सोचता है कि मैं बड़ा गैरतमंद हूं, मैं जिस बात पर अड़ गया पता नहीं मैं कितना अच्छा हूं। अणख-गैरत है तो मन को सीधा करके दिखा, बुराई से हटकर दिखा। अणख-गैरत है तो इस कलियुग में अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम पर चलकर दिखा और नेक-भले कर्म करके दिखा। इसे अणख कहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मन के पीछे लगकर संतों के वचनों को काटते रहना अणख नहीं बल्कि अहंकार होता है। आप जी फरमाते हैं कि अहंकार और अणख में दिन-रात का अंतर होता है। अणख और अहंकार दो अलग-अलग चीजें हैं, जो अहंकार को अणख-गैरत समझ लेते हैं वो जिंदगी में खज्जल-ख्वार होते रहते हैं। इसलिए अपने अंदर की आवाज को पहचानो। संतों के सामने ज्यादा अहंकार न करो क्योंकि अहंकार आपको ले डूबेगा, उनका कुछ नहीं जाएगा। संत मन से रोकते हैं, मनमते न बनो, मनमते लोगों का संग न करो। कई लोगों को मनमते लोगों का संग ही अच्छा लगता है और रूहानियत का संग अच्छा नहीं लगता। यह इंसान की मर्जी है, लेकिन सच यह है कि गैरत है तो मन को सीधा करो, अपने बुरे विचारों से लड़ो। इसके अलावा सब अहंंकार है।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Sep 2021 06:05:06 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : ‘आत्म शुद्धिकरण के लिए राम नाम का जाप जरूरी’</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं परमपिता परमात्मा का नाम एक आलौकिक शक्ति है, एक परमानंद है, जिसे महसूस किया जा सकता है पर उसके लिए अपने आप को साधना पड़ता है, अपने अंदर के विचारों को शुद्ध करना पड़ता है। इसके लिए प्रभु का नाम एक मात्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/for-self-purification-chanting-of-rams-name-is-necessary/article-26876"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं परमपिता परमात्मा का नाम एक आलौकिक शक्ति है, एक परमानंद है, जिसे महसूस किया जा सकता है पर उसके लिए अपने आप को साधना पड़ता है, अपने अंदर के विचारों को शुद्ध करना पड़ता है। इसके लिए प्रभु का नाम एक मात्र रास्ता है। जिससे इन्सान के अंदर भावना पैदा होती है और उस भावना के तहत इन्सान पर हित के लिए सेवा करता है। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि इन्सान जैसे-जैसे तन-मन-धन से दीन-दुखियों की मदद करता है, सृष्टि की संभाल करता है। वैसे-वैसे इन्सान परमपिता परमात्मा के रहमो कर्म का हकदार बनता चला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि मन या मनमते लोगों से इन्सान जितना दूर रहे, उतना ही अच्छा है। जैसा गुरू, पीर-फकीर कहे, उस पर अमल करना। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि वो मालिक हर जगह है, हर पल, हर क्षण वो हर किसी को देखता है। सारी दुनिया खत्म हो सकती है, खंड-ब्रह्मंड सब कुछ खत्म हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पर मालिक हर जगह है यह सच, न तो प्रलय में कभी खत्म हुआ और न ही महाप्रलय में। मालिक का नाम सच था, सच है और सच ही रहेगा। वो हर जगह है, हर क्षण, हर किसी को देखता है, अगर इन्सान यह बात दिमाग में बैठा ले तो शायद जिंदगी में कभी कोई बुरा कर्म न करे और मालिक की कृपा दृष्टि के काबिल बनता चला जाए।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Sep 2021 05:06:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनमोल वचन : मन से लड़ने का एकमात्र उपाय राम-नाम</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/ram-naam-is-the-only-way-to-fight-with-the-mind/article-26802"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/guru-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मालिक का नाम लेना बड़ा मुश्किल है। मन और मनमते लोग रोकते-टोकते हैं। इन्सान प्रभु का नाम लेना भी चाहे तो मन तरह-तरह की परेशानी खड़ी कर देता है। आप सुमिरन करने लगते हैं, कुछ देर ही सुमिरन कर पाते हैं और बाद में होश ही नहीं रहता कि मन आपको कहां से कहां ले गया। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव पर हैं। मन इन्सान को सुमिरन नहीं करने देता, मालिक की तरफ नहीं चलने देता। जहां मालिक की चर्चा होती हो, वहां मीन-मेख (कमियां) निकालता रहता है, हालांकि उसकी खुद की कमियों का कोई अंदाजा ही नहीं होता। आप जी फरमाते हैं कि मन बड़ा ही जालिम, शातिर है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जब तक सुमिरन नहीं करेंगे, यह काबू में नहीं आएगा। सुमिरन करने से मन काबू में आता है। अगर सुमिरन, भक्ति-इबादत की जाए तो मन काबू में आ सकता है अन्यथा मन बढ़ता चला जाता है और जीव गुमराह हो जाता है। जैसे टायर में हवा भरते हैं तो वह फूलता चला जाता है उसी तरह मन गंदे, बुरे विचारों की हवा देता है और इन्सान फूलता चला जाता है। उसमें अहंकार, घमंड अपने आप आने लगता है। उसे पीर-फकीर के वचन अच्छे नहीं लगते। उसे सिर्फ अपनी बातें सही लगती हैं और दूसरे सभी गलत लगते हैं। इस तरह से मन इन्सान को भटकाता, गुमराह करता है, मालिक से दूर करता है।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Sep 2021 05:05:16 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : खुशियों का खजाना है सेवा-सुमिरन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन इन्सान को वह तमाम खुशियां दिला देते हैं, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अकसर यह कहा जाता है कि जो भाग्य में है वो मिलता है, जो मिलना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/guru-sant-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan-6/article-26768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-ok.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सेवा और सुमिरन इन्सान को वह तमाम खुशियां दिला देते हैं, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अकसर यह कहा जाता है कि जो भाग्य में है वो मिलता है, जो मिलना है वह मालिक ने लिख दिया है। इसका मतलब यह नहीं होता कि आप हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाओ। आप जी फरमाते हैं कि सभी धर्मों में लिखा है कि इन्सान कर्म योगी व ज्ञान योगी है। इसलिए ज्ञानयोगी बनो और उसके अनुसार कर्म योगी भी बने, तो इन्सान अपनी तकदीर को बदल सकता है। ये खुद मुखत्यार है, सर्वोत्तम जून है।</p>
<p style="text-align:justify;">पशु, पक्षी, परिंदे जैसा कर्मों में लिखा है वे वैसा भोगते हैं। पर मनुष्य को मालिक ने खुदमुखत्यारी दी है, शक्ति दी है, जिससे यह परमपिता परमात्मा का नाम लेकर अपनी तकदीरों को बदल सकता है, अपने अंदर आत्मशक्ति पैदा करके बुलंदियों को छू सकता है। आप जी फरमाते हैं कि जिस प्रकार इन्सान सुबह, दोपहर, शाम अपने शरीर के लिए खुराक लेता है। उसी तरह आत्मा को भी खुराक चाहिए जिससे आत्मबल बढ़े।</p>
<p style="text-align:justify;">धर्मों के अनुसार आत्मा की खुराक तो हमारे अंदर है। प्रभु, अल्लाह, वाहेगुरु, राम के नाम की भक्ति करो तो आत्मबल बढ़ता है और जिनके अंदर आत्मबल होता है सफलता उनके कदम जरूर चुमा करती है। नासा साइंस केंद्र अमेरिका भी यह कहता है कि अगर आपको विल पॉवर चाहिए तो आप लगातार ईश्वर का नाम जपो। अगर जल्दी भगवान से आत्मबल चाहते हो तो सुबह 2 से 5 का समय है इसमें उठकर मेडिटेशन (गुरुमंत्र का जाप) करो, क्योंकि इसमें आक्सीजन ज्यादा व शुद्ध होती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Sep 2021 05:04:46 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : इन्सान समय की कद्र करना सीखे: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान समय की कद्र करता है तो समय जरूर साथ देता है। समय कभी किसी के रोके रुकता नहीं, समय चलता चला जाता है, और इन्सान बहुत पीछे रह जाता है। समय की कद्र करो, जो समय की कद्र करते हैं, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/learn-to-value-time-pujya-guruji/article-26732"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/satguru-is-the-source-of-rahmo-karam-puyjya-guru-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान समय की कद्र करता है तो समय जरूर साथ देता है। समय कभी किसी के रोके रुकता नहीं, समय चलता चला जाता है, और इन्सान बहुत पीछे रह जाता है। समय की कद्र करो, जो समय की कद्र करते हैं, समय के अनुसार हर कार्य करते हैं वो मालिक की खुशियों के हकदार जरूर बनते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आलस्य एक ऐसी बीमारी है, जो डॉक्टरी हिसाब से बीमारी नहीं , लेकिन बहुत सारी बीमारियों की मां है। आलस्य इंसान को कहीं का नहीं छोड़ता, आलस्य जब इंसान पर छा जाता है कुछ भी अच्छा नहीं लगता सिवाए आलस्य के। इसलिए आलस्य में पड़ के अपने परम पिता परमात्मा की याद से दूर मत होईए । पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि हमेशा उसे याद कीजिए, हमेशा उसकी भक्ति इबादत कीजिए, ताकि उसकी दया मेहर रहमत के लायक आप बनते चले जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपजी ने फरमाया कि हर सैकेंड, मिनट, घण्टा, दिन, महीना, साल जो जिंदगी का गुजर रहा है, वो आपको आपके आखिरी समय के नजदीक ले जा रहा है। अगर यूं ही समय गुजरता गया और आपने मालिक की भक्ति न की तो आप गमों, दु:खों में परेशान होते रहेंगे, खुशियों से खाली हो जाएंगे। पूज्य गुरुजी ने फरमाया कि लोग समय की कद्र नहीं करते। संत हर समय समझाते हैं, हर समय सिखाते हैं राम का नाम जपो और उसकी बनाई सृष्टि से बेगर्ज-नि:स्वार्थ भावना से प्यार करो।</p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Sun, 12 Sep 2021 05:05:05 +0530</pubDate>
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                <title>अनमोल वचन : सुमिरन से दूर होती हैं बुराइयां : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस संसार में वो लोग भाग्यशाली हैं जो संतों की बात सुनकर उस पर अमल कर लिया करते हैं। आज मनमते लोग अपने-अपने काम-धंधों में लगे हुए हैं और अपनी ही वजह से दुखी हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/evils-are-removed-from-sumiran/article-26646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/msg.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस संसार में वो लोग भाग्यशाली हैं जो संतों की बात सुनकर उस पर अमल कर लिया करते हैं। आज मनमते लोग अपने-अपने काम-धंधों में लगे हुए हैं और अपनी ही वजह से दुखी हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दूसरों को दोष देना सही नहीं है। आप कोई ऐसे कर्म कर बैठते हैं, कार्य में लीन हो जाते हैं जो गुनाह बन जाता है और जब उसका फल भुगतना पड़ता है तब आप सोचते हैं कि मैंने यह कर्म नहीं किया, मैंने तो ऐसा सोचकर नहीं किया था। आपके सोचने से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि आपने कैसा कर्म किया है, यह देखने वाली बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए इन्सान को बुरे कर्म नहीं करने चाहिए। आप जी फरमाते हैं कि संत, पीर-फकीर समझाते हैं, माफ करते हैं लेकिन आगे तो अल्लाह, राम के हाथ में होता है। संत ने तो दुआ करनी होती है, वो कबूल करता है या नहीं, यह उसकी मर्जी है। इसलिए आप उस परमात्मा का सुमिरन करते रहो। अपने आपको बुराइयों से बचाकर रखो। अगर बुराई के हाथों में अपना दामन दे दिया तो तड़पने के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं होगा। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आप जानते हैं कि अच्छाई क्या है और बुराई क्या है। इसलिए जितना हो सके उतना बुराई से दूर रहो और यह संभव है क्योंकि हमारे संस्कार ऐसे ही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हम एक धार्मिक देश में रहते हैं। यहां धर्म का लालन-पालन होता है। इसलिए और कुछ नहीं तो संस्कारों का तो पता चलता ही है। इसलिए बुराई को छोड़कर रखो। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को इस तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए कि कौन, कैसा कर रहा है। इससे आपको क्या मतलब? बस, आप अपने आप को सुधार कर रखो। जो अपनी जगह पर सही है वो ही मालिक की खुशियां प्राप्त करता है। इस संसार से सभी ने एक दिन जाना है। जो अल्लाह, वाहेगुरु, राम का नाम लेकर जाते हैं वो दोनों जहान में अमर हो जाते हैं और जो पाप-कर्म करके जाते हैं उनका कोई नाम तक लेना पसंद नहीं करता। इसलिए इन्सान को बुराई नहीं करनी चाहिए क्योंकि बुराई इन्सान को दोनों जहान में डूबो देती है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                            <category>अनमोल वचन</category>
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                <pubDate>Thu, 09 Sep 2021 05:05:49 +0530</pubDate>
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