<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/india-government/tag-16551" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>India Government - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/16551/rss</link>
                <description>India Government RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>India Government: वानुआतु को पांच लाख डॉलर की सहायता देगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[India Government: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत ने गत 17 दिसंबर को दक्षिणी प्रशांत महासागर में आए विनाशकारी भूकंप में बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान से त्रस्त द्वीपीय देश वानुआतु को पांच लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने आज यहां एक बयान में कहा कि गत 17 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-will-give-assistance-of-five-lakh-dollars-to-vanuatu/article-66000"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-01/india-government.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India Government: नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत ने गत 17 दिसंबर को दक्षिणी प्रशांत महासागर में आए विनाशकारी भूकंप में बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान से त्रस्त द्वीपीय देश वानुआतु को पांच लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय ने आज यहां एक बयान में कहा कि गत 17 दिसंबर को दक्षिण प्रशांत महासागर में वानुआतु के तट के पास 7.4 तीव्रता का भूकंप आया जिससे बड़ी तबाही हुई और जानमाल की हानि हुई। भारत ने इस अभूतपूर्व आपदा से हुए नुकसान और विनाश के लिए वानुआतु सरकार और लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और कठिनाई के इस समय में हर संभव समर्थन और सहायता देने की अपनी तत्परता से अवगत कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय ने कहा कि फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोआॅपरेशन (फिपिक) के तहत एक करीबी दोस्त और भागीदार के रूप में और वानुआतु के मैत्रीपूर्ण लोगों के साथ एकजुटता के संकेत के रूप में भारत सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग करने के लिए पांच लाख अमेरिकी डॉलर की राहत सहायता प्रदान करती है। उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई कठिनाई और तबाही के दौरान भारत वानुआतु के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित भारत की इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (आईपीओआई) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन है। भारत मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए प्रतिबद्ध है और इस क्षेत्र में एक जिम्मेदार और दृढ़ सहयोगी बना हुआ है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/india-will-give-assistance-of-five-lakh-dollars-to-vanuatu/article-66000</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/india-will-give-assistance-of-five-lakh-dollars-to-vanuatu/article-66000</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jan 2025 13:14:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-01/india-government.jpg"                         length="28789"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कनाडा में रह रहे भारतीय छात्रों के लिए आई बड़ी खबर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Canada की सरकार ने देश में रह रहे करीब 700 भारतीय छात्रों (Indian Students) के आव्रजन दस्तावेजों में कमी होने के मामले में व्यवहारिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनशीलता के आधार पर बढ़ने का भरोसा दिया है। सूत्रों के अनुसार भारत इस मामले को कनाडा के अधिकारियों के साथ ओटावा में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-indian-students-living-in-canada/article-48715"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/canada.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Canada की सरकार ने देश में रह रहे करीब 700 भारतीय छात्रों (Indian Students) के आव्रजन दस्तावेजों में कमी होने के मामले में व्यवहारिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनशीलता के आधार पर बढ़ने का भरोसा दिया है। सूत्रों के अनुसार भारत इस मामले को कनाडा के अधिकारियों के साथ ओटावा में भारतीय उच्चायोग ( india government ) के माध्यम से और नयी दिल्ली में कनाडा उच्चायोग के जरिए लगातार उठाता रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने कनाडाई समकक्ष से भी इस मामले पर बात की। Canada</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) सौरभ कुमार ने इस वर्ष अप्रैल में अपनी कनाडा यात्रा के दौरान इसे उठाया था। टोरंटो में भारतीय वाणिज्य दूतावास में भारतीय छात्रों के एक समूह ने उनसे मुलाकात की थी। सूत्रों का कहना है कि कनाडाई अधिकारियों से बार-बार निष्पक्ष रहने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया गया क्योंकि छात्रों की गलती नहीं थी। Canada</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी बताया गया कि कनाडा शासनतंत्र में कुछ खामियों और असावधानी के कारण छात्रों को वीजा मिल गया और उन्हें कनाडा में प्रवेश करने की अनुमति भी मिल गई। सूत्रों के अनुसार तब से, कनाडा के राजनीतिक दलों एवं उनके सांसदों ने छात्रों के समर्थन में बात की है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में आप्रवासन मंत्री शॉन फ्रेजिÞयर ने संकेत दिया है कि कनाडा अनिश्चितता का सामना कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सक्रिय रूप से एक समाधान का प्रयास कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी छात्रों के साथ उचित व्यवहार की आवश्यकता को स्वीकार किया है। हाल ही में कुछ छात्रों को उनके निर्वासन नोटिस पर स्थगन आदेश प्राप्त हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि यह स्वागत योग्य है कि भारत सरकार के लगातार प्रयासों के फलस्वरूप कनाडा सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और छात्रों के दृष्टिकोण को स्वीकार करने का फैसला किया है। Canada</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-indian-students-living-in-canada/article-48715</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/big-news-for-indian-students-living-in-canada/article-48715</guid>
                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 13:10:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-06/canada.jpg"                         length="44443"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश की बेहाली पर सुप्रीम कोर्ट का दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[इतना ही नहीं यहां उच्चतम न्यायरलय तब भी बेबस नजर आया है, जब न्यायालय के आदेश राजनीतिक पार्टियों से उनके दागी सांसदों, विधायकों का ब्यौरा मांगते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/supreme-courts-pain-on-the-countrys-misery/article-13086"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/supreme-courts-pain-on-the-countrys-misery.jpeg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">देश में कोई आदेश या कानून कितना लागू हो पाता है, यह सब सुप्रीम कार्ट के न्यायधीशों के दर्द से अच्छी तरह समझा जा सकता है। अक्सर ही माननीय न्यायालय को अपने आदेशों, निर्देशों को लागू करवाने के लिए केन्द्र या राज्य सरकारों की डांट-फटकार करनी पड़ती है, लेकिन इस शुक्रवार को हद तब हो गई जब सुप्रीम कार्ट के माननीय न्यायाधीश ने एक विवाद में यहां तक कह दिया कि इस न्यायालय को बंद कर देना चाहिए एवं यह देश रहने लायक नहीं बचा।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">मामाला निजी टेलीकॉम कम्पनियों का है, जिन्होंने सरकार को 1.47 लाख करोड़ रूपये बकाया चुकाना है, परंतु सरकार की हालत या नीयत पर ही यहां सवाल खड़ा हो रहा है कि जिन सरकारी अधिकारियों ने कम्पनियों से वसूली करनी है वही अधिकारी कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">यह देश का दुर्भाग्य है कि 1.47 लाख करोड़ रूपया जो सरकारी खजाने में जमा होना चाहिए, उसमें सरकारी अधिकारी ही रोड़ा अटका रहे हैं। यह बेहद दु:खद बात है कि एक ओर कालेधन पर काबू पाने के लिए सख्त सजाओं एवं जुर्माने की व्यवस्था की गई है, साथ ही हर रोज वाले काले धन को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है, वहीं देश का प्रशासन टेलीकॉम कम्पनियों से राजस्व वसूली में रोड़ा बन रहा है। प्रशासन में भ्रष्टाचार को बनाए रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार की ओर से किसी भी तरह की कार्रवाई की कोई खबर नहीं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय के तल्ख एवं गुस्से भरे शब्दों से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वभाविक है। उक्त घटना सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान या तेवरों पर सवाल खड़े कर रही है कि कानून केवल मध्यवर्ग या आम आदमी के लिए ही रह गया है? सरकारी खजाने का धन इस देश के लोगों का धन है परंतु इस देश में बड़े व्यवसायिक घराने सरकार व प्रशासन से मिलीभुक्त कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। राजस्व में वृद्धि करने के लिए सरकार एक तरफ विदेशी कम्पनियों, विदेशी सरकारों के सामने गिड़गिड़ाती है कि उसके यहां निवेश कीजिए।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री दुनिया भर में घूम-घूमकर निवेश करवाने में जुटे हुए हैं लेकिन देश के भीतर उच्चतम न्यायलय के सख्त आदेश के बाद भी निजी कम्पनियां देश का धन दबाकर बैठी हैं और उन्हें किसी की परवाह भी नहीं है। इतना ही नहीं यहां उच्चतम न्यायरलय तब भी बेबस नजर आया है, जब न्यायालय के आदेश राजनीतिक पार्टियों से उनके दागी सांसदों, विधायकों का ब्यौरा मांगते हैं। देश में न्यायालय के आदेश को नहीं मानना न्यायालय की अवमानना है। जो देश अपने ही कानूनों का सम्मान नहीं करता वह कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार एवं कालेधन पर काबू पाने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं की हैं, सरकार कम से कम उन घोषणाओं की ही शर्म कर ले, और देश के धन को बर्बाद करने वालों या डकार जाने वालों के खिलाफ गंभीरता से कठोर कार्रवाई करे।</h4>
<h4><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></h4>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/supreme-courts-pain-on-the-countrys-misery/article-13086</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/supreme-courts-pain-on-the-countrys-misery/article-13086</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Feb 2020 12:04:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/supreme-courts-pain-on-the-countrys-misery.jpeg"                         length="23528"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        