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                <title>Children Corner - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Children Corner RSS Feed</description>
                
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                <title>कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार</title>
                                    <description><![CDATA[जहां गलती करें, प्यार से उन्हें समझाएं ताकि उन्हें अहसास हो कि माता पिता ठीक कह रहे हैं अपनी मर्जी थोपे नहीं बल्कि उसकी भलाई बुराई से वाकिफ कराएं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/parents-become-teenagers-helpful-to-children/article-87064"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/parents-and-children.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Parents and Children: बच्चों को टीनएज में व्यवहार संबंधी कई समस्याएं आती हैं। पेरेंटस भी उस व्यवहार से एक हद के बाद परेशान हो जाते हैं। टीनएज में हार्मोन संबंधी बदलाव बच्चों को चिड़चिड़ा बना देते हैं। बच्चे स्वयं को बड़ा महसूस करते हैं। उन्हें लगता है माता-पिता को जो वे कह रहे हैं, वह सभी ठीक है। अब हम बड़े हैं। मां-बाप को हमारी बात माननी चाहिए जबकि वे अभी भी अपरिपक्व होते हैं। न तो वे इतने छोटे होते हैं कि हम उनकी बात को पूरी तरह टाल सकें या बातों में फुसला सकें, न ही इतने बड़े होते हैं कि हम उनकी हर बात मानें। ऐसे में शुरूआत होती है आपस में टकराव की। अगर पेरेंटस कुछ बातों पर ध्यान दें तो टीनएज बच्चों के साथ मधुर व्यवहार रखने में मदद मिल सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वयं को ढालें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की पसंद का ध्यान रखें। उनके खाने की पसंद का ध्यान रखें, खेलने व पहनने की पसंद का ध्यान रखें। अपनी सोच कि क्या बनना है, बच्चों को यह गेम खेलना चाहिए या इस प्रकार की ड्रेस पहननी चाहिए, उन पर न थोपें। बस उन्हें यह बताएं कि यह ठीक है या नहीं। फैसला उन पर छोड़ दें। उनकी पसंद को समझें और घर का वातावरण उसी के मुताबिक ढालने की कोशिश करें ताकि घर में शांत वातावरण बना रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>थोड़ी छूट दें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को भी स्पेस चाहिए, इसलिए उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए थोड़ा समय और छूट दें ताकि वे समाज में जगह बना सें। इसका अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें इतनी आजादी दे दें कि वे अपनी मर्जी के मालिक बन जाएं और बुरा भला न पहचानें। आजादी दें पर अपनी आंखें और कान खुले रखें। जहां गलती करें, प्यार से उन्हें समझाएं ताकि उन्हें अहसास हो कि माता पिता ठीक कह रहे हैं। अपनी मर्जी थोपे नहीं बल्कि उसकी भलाई बुराई से वाकिफ कराएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फैसले लेने का हक भी दें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चे जब बड़े होने लगते हैं तो वे उम्मीद करते हैं कि पेरेंटस उनके द्वारा लिए फैसलों की कद्र करें और उनकी भावनाओं को समझें। छोटे छोटे फैसले उन्हें लेने दें जिनसे उनका हौसला बढेगा और जीवन में कुछ कर पाने की उम्मीद भी बेहतर होगी। इनसे माता-पिता और बच्चों में मधुर संबंध भी बनेंगे। उनकी हर छोटी चीज पर हम अगर फैसला लेते हैं तो उनकी पर्सनेलिटी में निखार नहीं आ पाएगा, न ही वे इंडिपेंडेंट बन पाएंगे। आत्म विश्वास बढ़ने से उनका व्यक्तित्व निखरेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को प्यार और इज्जत दें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्यार और इज्जत दो ऐसे हथियार हैं जिनसे आप किसी भी रिश्ते में मजबूती ला सकते हैं। अगर हम ये हथियार बच्चों के साथ प्रयोग में लाएं तो बच्चे भी बदले में हमें वही देंगे जो हम उन्हें देते हैं। बच्चों को बात बात पर गुस्सा न करें, न ही उन्हें बहुत उपदेश दें। बच्चों से जिस व्यवहार की उपेक्षा आप करते हैं वैसा व्यवहार आप उनके साथ करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भरोसा करें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे तो विश्वास करें कि वे कुछ गलत नहीं करेंगे। बच्चों को कुछ आजादी दें कि वे लाइफ में आगे बढ़ें पर सही रास्ते अपना कर। माता-पिता का साथ हमेशा उनके साथ है, इसका भरोसा उन्हें दिलाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>माता-पिता आपस में न लड़ें:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के सामने माता-पिता को लड़ना नहीं चाहिए क्योंकि आपसी लड़ाई से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कभी कभी बच्चे इसका लाभ उठाते हैं। अगर आप दोनों बहस किए बिना, लड़े बिना गृहस्थी की गाड़ी को बढ़ाते हैं तो वह समझ जाएंगे कि हम इन्हें ब्लैकमेल नहीं कर सकते, न ही बुद्धू बना सकते हैं। जब आप अकेले हों तो आपसी गिले शिकवे तभी डिस्कस करें और हल ढूंढने का प्रयास करें। रिश्तेदारों की कमियां भी बच्चों के सामने डिस्कस न करें  <strong><em>-नीतू गुप्ता</em></strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Children Story: गोटू और मोटू" href="http://10.0.0.122:1245/gotu-and-motu-children-story/">Children Story: गोटू और मोटू</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 17:52:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Intelligent Puppy: मूर्ख भेड़िया और समझदार पिल्ला</title>
                                    <description><![CDATA[Intelligent Puppy: एक बार की बात है कि एक कुत्ते का पिल्ला अपने मालिक के घर के बाहर धूप में सोया पड़ा था। मालिक का घर जंगल के किनारे पर था। अत: वहां भेड़िया, गीदड़ और लकड़बग्घे जैसे चालाक जानवर आते रहते थे। यह बात उस नन्हे पिल्ले को मालूम नहीं थी। उसका मालिक कुछ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/silly-wolf-and-intelligent-puppy/article-87006"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/intelligent-puppy.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;">Intelligent Puppy: एक बार की बात है कि एक कुत्ते का पिल्ला अपने मालिक के घर के बाहर धूप में सोया पड़ा था। मालिक का घर जंगल के किनारे पर था। अत: वहां भेड़िया, गीदड़ और लकड़बग्घे जैसे चालाक जानवर आते रहते थे। यह बात उस नन्हे पिल्ले को मालूम नहीं थी। उसका मालिक कुछ दिन पहले ही उसे वहां लाया था। अभी उसकी आयु भी सिर्फ दो महीने थी। अचानक एक लोमड़ वहां आ निकला, उसने आराम से सोते पिल्ले को दबोच लिया। पिल्ला इस अकस्मात आक्रमण से भयभीत हो उठा। मगर वह बड़ी ही समझदार नस्ल का था। उसका पिता मिलिटरी में था और माँ पुलिस में जासूसी करती थी। Intelligent Puppy</h5>
<h5 style="text-align:justify;">संकट सिर पर आया देखकर भी वह घबराया नहीं और धैर्य से बोला- ‘लोमड़ भाई! अब तुमने मुझे पकड़ ही लिया है तो खा लो। मगर मेरी एक राय है अगर मानो तो। इसमें तुम्हारा ही लाभ है।’</h5>
<h5 style="text-align:justify;">अपने लाभ की बातर सुनकर लोमड़ ने पूछा-‘कैसा लाभ?’<br />
‘देखो भाई! मैं यहां नया-नया आया हूं, इसलिए अभी दुबला तथा निर्बल हूं। कुछ दिन खा-पीकर मुझे मोटा-ताजा हो जाने दीजिए। फिर आकर मुझे खा लेना। वैसे भी अभी मैं बच्चा हूं। मुझे खाकर भी शायद आज आपकी भूख न मिटे।’</h5>
<h5 style="text-align:justify;">लोमड़ पिल्ले की बातों में आ गया, उसे छोड़कर चला गया। पिल्ले ने अपने भाग्य को धन्यवाद दिया तथा असुरक्षित स्थान पर सोने की गलती फिर कभी न करने की कसम खाई। कुछ महीनों के बाद लोमड़ फिर उस घर के पास आकर उस पिल्ले को खोजने लगा। लेकिन अब वह पिल्ला कहां रहा था, अब तो वह बड़ा हो गया था और पहले से अधिक समझदार भी। उस समय वह मकान की छत पर सो रहा था। Intelligent Puppy</h5>
<h5 style="text-align:justify;">लोमड़ ने उससे कहा, ‘अपने वचन के अनुसार नीचे आकर मेरा आहार बन जाओ।’ ‘अरे जा रे मूर्ख! मृत्यु का भी वचन दिया है कभी किसी ने? जा अपनी मूर्खता पर आयु भर पछताता रह। अब मैं तेरे हाथ आने वाला नहीं है।’ कुत्ते ने उत्तर दिया। लोमड़ अपना-सा मुंह लेकर चला गया। सच है, समझदारी व सूझ−बूझ से मौत को भी टाला जा सकता है। Intelligent Puppy<br />
<strong>                                                                                                          साभार : विष्णु शर्मा (पंचतंत्र)</strong></h5>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="गधे के पेट में खाना" href="http://10.0.0.122:1245/food-in-donkeys-belly/">गधे के पेट में खाना</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 15:30:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आओ बच्चों बढ़ाएं ज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[अक्सर बच्चों में कुछ सीखने की उत्सुकता रहती है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ ऐसे सवाल, जो न सिर्फ आपकी बौद्विक क्षमता का परखेंगे बल्कि आपके ज्ञान में भी वृद्धि करेंगे। इनमें जहां इतिहास, खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी आपको हासिल होगी। प्रश्न 1. तिरंगे के तीन रंग किस चीज के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/increase-mind-power/article-87010"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/increase-mind-power.jpg" alt=""></a><br /><h5>अक्सर बच्चों में कुछ सीखने की उत्सुकता रहती है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ ऐसे सवाल, जो न सिर्फ आपकी बौद्विक क्षमता का परखेंगे बल्कि आपके ज्ञान में भी वृद्धि करेंगे। इनमें जहां इतिहास, खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी आपको हासिल होगी।</h5>
<h5><strong>प्रश्न 1. तिरंगे के तीन रंग किस चीज के प्रतीक होते हैं? </strong><br />
<strong>उत्तर : केसरिया- त्याग और बलिदान का</strong><br />
<strong>सफेद : शांति का </strong><br />
<strong>हरा : हरियाली का</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 2. तिरंगे को किसने डिजाइन किया?</strong><br />
<strong>उत्तर: पिंगली वैकेंया</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 3. मिसाइल मैन के नाम से कौन जाने जाते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 4. आजाद हिंद फौज के संस्थापक कौन थे?</strong><br />
<strong>उत्तर : नेताजी सुभाष चंद्र बोस</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 5. आजाद हिंद फौज की स्थापना कहां हुई थी?</strong><br />
<strong>उत्तर : सिंगापुर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 6. जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में भारत का कौन सा स्थान है?</strong><br />
<strong>उत्तर : दूसरा</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 7. मसालों की रानी किसे कहा जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर: इलायची</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 8. महाभारत किसने लिखी थी?</strong><br />
<strong>उत्तर : वेद व्यास</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 9. भगवान बुद्ध के बचपन का नाम क्या था?</strong><br />
<strong>उत्तर : सिद्धार्थ</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न :10. माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला कौन थी?</strong><br />
<strong>उत्तर : बछेंद्री पाल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 11. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई थी?</strong><br />
<strong>उत्तर : 1945</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 12. भांखड़ा नांगल बांध किस राज्य में है?</strong><br />
<strong>उत्तर : पंजाब</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 13. सबसे अधिक साक्षर राज्य कौन सा है?</strong><br />
<strong>उत्तर : केरल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 14. चारमीनार भारत के किस राज्य में स्थित है?</strong><br />
<strong>उत्तर : हैदराबाद</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 15. अभ्रक का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला देश है?</strong><br />
<strong>उत्तर : भारत</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 16. मसाले का उत्पादन सर्वाधिक किस राज्य में होता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : केरल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 17. भारत की संसद (पार्लियामेंट) किस राज्य में स्थित है?</strong><br />
<strong>उत्तर : दिल्ली</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 18. एंबुलेंस का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : चिकित्सीय आपातकाल के लिए (मेडिकल इमरजेंसी)</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 19. 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री कहां झंडा फहराते है?</strong><br />
<strong>उत्तर : लाल किले पर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 20. एलबीडब्ल्यू शब्द किस खेल में उपयोग किया जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : क्रिकेट</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 21. रेलगाड़ी को रोकने के लिए किस रंग का इस्तेमाल किया जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : लाल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 22. नासा किस देश में स्थित है?</strong><br />
<strong>उत्तर : अमेरिका</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 23. किस देश में मच्छर नहीं पाए जाते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर : फ्रांस</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 24. बारिश होने के बाद आसमान में क्या नजर आता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : इंद्रधनुष</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 25. कौन-सा देश कभी गुलाम नहीं हुआ?</strong><br />
<strong>उत्तर : नेपाल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 26. विश्व में देशों की संख्या कुल कितनी है?</strong><br />
<strong>उत्तर : 195</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 27. सबसे बड़े महासागर का नाम क्या है?</strong><br />
<strong>उत्तर : प्रशांत महासागर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 28. सबसे ज्यादा वेतन विश्व के किस देश के राष्ट्रपति को दिया जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : अमेरिका</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 29. भारत के राष्ट्रीय फूल का नाम क्या है?</strong><br />
<strong>उत्तर : कमल</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 30. जापान के किस शहर पर परमाणु बम गिराया गया था?</strong><br />
<strong>उत्तर : नागासाकी और हिरोशिमा पर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 31. जापान पर कब परमाणु बम गिराया गया था?</strong><br />
<strong>उत्तर : 1945</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 32. जन-गण-मन किसने लिखा था?</strong><br />
<strong>उत्तर : रवींद्र नाथ टैगोर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 33. राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के लेखक कौन हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर : बंकिम चंद्र चटर्जी</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 34. अमरनाथ किस राज्य में स्थित है?</strong><br />
<strong>उत्तर: जम्मू-कश्मीर</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 35. किसे उगते हुए सूरज का देश नाम से जाना जाता है?</strong><br />
<strong>उत्तर : जापान</strong></h5>
<h5><strong>प्रश्न 36. सबसे बड़ा देश कौन-सा है?</strong><br />
<strong>उत्तर : रूस</strong></h5>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/increase-mind-power/article-87010</link>
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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 15:21:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फास्टफूड का कीड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[मम्मी कमल के पीछे रोटी लेकर भाग रही थी। कमल मम्मी को चिढ़ाते हुए दौड़ रहा था। आज दो दिन हो गए थे कमल ने एक भी रोटी नहीं खाई थी। दरअसल कमल को फास्टफूडीया हो गया था। फास्टफूडिया का मतलब कि कमल को बस फास्टफूड ही पसन्द था। वो बाहर की चीजें ही लेता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/fast-food-habit/article-86999"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/fast-food.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">मम्मी कमल के पीछे रोटी लेकर भाग रही थी। कमल मम्मी को चिढ़ाते हुए दौड़ रहा था। आज दो दिन हो गए थे कमल ने एक भी रोटी नहीं खाई थी। दरअसल कमल को फास्टफूडीया हो गया था। फास्टफूडिया का मतलब कि कमल को बस फास्टफूड ही पसन्द था। वो बाहर की चीजें ही लेता था। घर पर बनी चीजें ना के बराबर ही खाता था।<br />
कमल के मम्मी-पापा उसे समझा-समझाकर थक चुके थे। लेकिन उसके समझ में कुछ भी नहीं आता। वो बस फास्टफूड ही खाता। चाऊमीन, मो-मो, वेजरोल, बर्गर, पिज्जा, गोलगप्पे ये सब कमल को बहुत पसंद थे। ज्यादा फास्टफूड खाने से उसका वजन बहुत बढ़ चुका था। उसके दोस्त उसका मजाक भी उड़ाते थे। कहते कम खाया कर मोटे, एक दिन फट जाएगा। ये सब सुनकर कमल को बहुत बुरा लगता था, लेकिन वो फास्टफूड देखकर खुद को रोक नहीं पाता था।<br />
स्कूल में फास्टफूड ले जाना बिल्कुल मना था। लेकिन कमल कई बार चोरी-छुपे फास्टफूड ले गया। दो बार तो पकड़ा भी गया। उसे जमकर डांट पड़ी। उसकी शिकायत घर पर भी की गई। मम्मी ने उसे घर पर भी जमकर डांटा। इस सबके बावजूद कमल पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।<br />
मम्मी कहती, अरे,बेटा कमल तुम ये बाहर का खाना छोड़ दो। नहीं तो बहुत दिक्कत हो जायेगी। तुम्हारा मोटापा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। मोटापे से कई बीमारियां होने लगती है।<br />
‘मुझे फास्टफूड ही पसंद है मां। ये घर का घास-फूस, सब्जी-रोटी मुझे बिल्कुल भी पसन्द नही है। तुम भी फास्टफूड खाने लगोगी तो ये सब भूल जाओगी।’ कमल उल्टा मम्मी को समझाते हुए कहने लगा।<br />
‘अब तुम मुझे समझाओगे मुझे क्या खाना है।’ मम्मी ने गुस्से में कहा।<br />
‘अरे मम्मी गुस्सा क्यों होती हो। मैं सच कह रहा हूं।’ कमल ने प्यार से कहा।<br />
मुझे नहीं खाना तेरा फास्टफूड। फास्टफूड से बस नुकसान ही हैं। उससे कोई भी फायदा नहीं है। रोटी-सब्जी, दाल-चावल हमारे लिए बहुत पौष्टिक होते हैं। हमें इसका सेवन करना चाहिए। मां ने समझाते हुए कहा।<br />
कमल मम्मी की बातें अनसुनी कर वहां से चला गया।<br />
एक दिन अचानक शाम के समय कमल के पेट में बहुत जोरों का दर्द उठा। वो जोर-जोर से रोने लगा, चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसके मम्मी और पापा उसके पास पहुंचे, और उससे पूछा, क्या हो गया है। क्यों चिल्ला रहे हो।<br />
कमल ने पेट दबाते हुए कहा, ‘ मम्मी-पापा मेरे पेट में बहुत जोरों का दर्द हो रहा है।’<br />
मम्मी और पापा दोनों कमल को तुरंत हॉस्पिटल ले गए। डॉक्टर साहब ने कमल को देखा। उसे कुछ दवाइयां दी और वो ठीक हो गया। सर मुझे क्या प्रॉब्लम हुई थी। कमल ने डाक्टर साहब से मासूमियत के साथ पूछा।<br />
तुम्हें एक बड़ी प्रॉब्लम है। तुम्हारे पेट में एक कीड़ा है। जो दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जिसकी वजह से तुम्हें पेट दर्द हो रहा था। डॉक्टर साहब ने बताया। कैसा कीड़ा। ये पेट में कैसे घुस गया।, कमल ने डरते हुए पूछा।<br />
तुम्हारे पेट के अंदर फास्टफूड का कीड़ा है। जो तुम्हारे हद से ज्यादा फास्टफूड खाने से पैदा हो गया है। ये तभी मरेगा जब तुम ये सब खाना छोड़ दोगे। क्या तुम्हें फास्टफूड के नुकसान के बारे में नहीं पता। डाक्टर साहब ने कहा।<br />
नहीं मुझे अच्छे से नहीं पता। कमल ने कहा।<br />
‘अरे बेटा ज्यादा फास्टफूड खाने से मोटापा बढ़ जाता है। इससे चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं। कोलेस्ट्रोल बढ़ सकता है। हार्ट की बीमारियां हो सकती हैं। दांतों में सड़न पैदा हो सकती है। इससे हमें डायबिटीज जैसी बीमारी भी घेर सकती है। डॉक्टर साहब ने बताया।<br />
ये सुनकर कमल घबरा गया, और बड़बड़ाया, अरे ये इतना नुकसान कर सकता है।<br />
डॉक्टर साहब ने हां में सर हिलाया। कमल ने वहीं पर संकल्प लिया कि वो अब कभी भी फास्टफूड नहीं खायेगा। जल्द से जल्द वो पेट में पल रहे फास्टफूड के कीड़े को मार देगा। कमल की बातों को सुनकर पास में खड़े मम्मी और पापा दोनों मुस्कुरा उठे।</h4>
<h3 style="text-align:justify;">लेखक : ललित शौर्य</h3>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/fast-food-habit/article-86999</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Apr 2024 17:21:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों के चुटकुले</title>
                                    <description><![CDATA[Jokes महिला : तुमने मेरे बेटे की पिटाई क्यों की? मोटी महिला : उसने मुझे मोटी भैंस कहा था। महिला : तो बहन, तुम्हें बेटे को पीटने के बजाय अपनी खुराक में कमी करनी चाहिए। माँ बेटे से : बेटे, घर में कायदे से रहना चाहिए। तुम्हें मेरी हर बात माननी चाहिए। बेटे ने सिर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-jokes/article-86996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/jokes.jpg" alt=""></a><br /><h2>Jokes</h2>
<h4>महिला : तुमने मेरे बेटे की पिटाई क्यों की?<br />
मोटी महिला : उसने मुझे मोटी भैंस कहा था।<br />
महिला : तो बहन, तुम्हें बेटे को पीटने के बजाय अपनी खुराक में कमी करनी चाहिए।</h4>
<h4>माँ बेटे से : बेटे, घर में कायदे से रहना चाहिए। तुम्हें मेरी हर बात माननी चाहिए।<br />
बेटे ने सिर हिलाते हुए कहा : मैं समझ गया मम्मी, जैसे पापा रहते हैं।</h4>
<h4>पिता पुत्र से : आज तुम स्कूल क्यों नहीं गए ?<br />
पुत्र : कल हम लोगों को स्कूल में तौला गया था। आज बेच दिया जाएगा। यही कारण है कि मैं आज स्कूल नहीं गया।</h4>
<h4>पिताजी डांटते हुए- राजू तुम्हें फूल तोड़ लाने को कहा था और तुम पूरी डाली सहित तोड़ लाए, जल्दी बोलो कि क्यों ?<br />
राजू- पिताजी, वहां लिखा था कि फूल तोड़ना मना है इसलिए मैं डाली सहित तोड़ लाया।</h4>
<h4>एक लड़के ने नई-नई साइकिल चलानी सीखी थी। वह साइकिल चलाते हुए पैडल से पैर उठाकर बोला : रवि, देख मेरे हाथ नहीं है। इतना कहते ही वह साइकिल से गिर गया। रवि उसके पास आकर बोला : राजू देख, अब तेरे दांत भी नहीं हैं।</h4>
<h4>राजू : अगर प्रिंसिपल ने अपने शब्द वापस न लिए तो मैं स्कूल छोड़ दूंगा।<br />
मोहन : क्या कहा था प्रिंसिपल ने?<br />
राजू : कहा था, स्कूल छोड़ दो।</h4>
<h4>-कुलदीप सलूजा</h4>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Nov 2023 17:50:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लघुकथा : बड़ी सोच</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार एक आदमी ने देखा कि एक गरीब फटेहाल बच्चा बड़ी उत्सुकता से उसकी महंगी ऑडी कार को निहार रहा था। गरीब बच्चे पर तरस खा कर अमीर आदमी ने उसे अपनी कार में बैठा कर घुमाने ले गया। लड़के ने कहा-‘‘साहब आपकी कार बहुत अच्छी है, यह तो बहुत कीमती होगी न…।’’ अमीर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/big-thinking-2/article-23504"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/big-thinking.jpg" alt=""></a><br /><p>एक बार एक आदमी ने देखा कि एक गरीब फटेहाल बच्चा बड़ी उत्सुकता से उसकी महंगी ऑडी कार को निहार रहा था। गरीब बच्चे पर तरस खा कर अमीर आदमी ने उसे अपनी कार में बैठा कर घुमाने ले गया।<br />
लड़के ने कहा-‘‘साहब आपकी कार बहुत अच्छी है, यह तो बहुत कीमती होगी न…।’’<br />
अमीर आदमी ने गर्व से कहा- ‘‘हां, यह लाखों रुपए की है।’’<br />
गरीब लड़का बोला-‘‘ इसे खरीदने के लिए तो आपने बहुत मेहनत की होगी?’’<br />
अमीर आदमी हंसकर बोला- ‘‘यह कार मुझे मेरे भाई ने उपहार में दी है।’’<br />
गरीब लड़के ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘‘वाह! आपके भाई कितने अच्छे हैं।’’<br />
अमीर आदमी ने कहा- ‘‘मुझे पता है कि तुम सोच रहे होंगे कि काश तुम्हारा भी कोई ऐसा भाई होता जो इतनी कीमती कार तुम्हे गिफ्ट देता!!’’<br />
गरीब लड़के की आंखों में अनोखी चमक थी,<br />
उसने कहा-‘‘नहीं साहब, मैं तो आपके भाई की तरह बनना चाहता हूं…’’<br />
<strong>सार : अपनी सोच हमेशा ऊंची रखो, दूसरों की अपेक्षाओं से कहीं अधिक ऊंची, तो तुम्हें बड़ा बनने से कोई रोक नहीं सकता।</strong></p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 May 2021 15:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समझदार बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों बहुत पुरानी बात है। मोहक वन नमक एक जंगल में एक नदी थी। वहीं किनारे एक जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था। जामुन के उस पेड़ पर बहुत ही मीठे जामुन लगते थे। नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था। एक दिन मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया। उसे देख […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/smart-monkey/article-14608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/smart-monkey.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">बच्चों बहुत पुरानी बात है। मोहक वन नमक एक जंगल में एक नदी थी। वहीं किनारे एक जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था। जामुन के उस पेड़ पर बहुत ही मीठे जामुन लगते थे। नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था। एक दिन मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया। उसे देख बन्दर ने आने का कारण पूछा तो मगरमच्छ अपने आने की वजह बताई। बन्दर बोला कि यहां बहुत ही मीठे जामुन लगते हैं और उसने कुछ जामुन मगरमछ को दिए।<br />
इसी कारण उसकी मित्रता मगरमच्छ के साथ हो गई। अब तो रोज वह बन्दर उस मगरमच्छ को खाने के लिए मीठे जामुन देता रहता था।<br />
मगरमच्छ ने एक दिन कुछ जामुन अपनी पत्नी को भी दिए।<br />
जामुन खाकर वह बोली, ‘‘रोज इतने मीठे फल खाने वाले का दिल भी खूब मीठा होगा।’’<br />
यह कह कर उसने अपने पति से कहा, ‘‘मुझे उस बन्दर का दिल चाहिए।’’<br />
और वो इसी जिद पर अड़ गई।<br />
मगरमच्छ उस बन्दर को अपना दोस्त मानता था और उसने ऐसा करने से मना कर दिया।<br />
नाराज पत्नी नहीं मानी और उसने बीमारी का बहाना किया और कहा, ‘‘जब तक बन्दर का कलेजा उसे नहीं मिलेगा वो ठीक नहीं हो पायेगी।’’<br />
अब मगरमच्छ ने पत्नी की जिद से मजबूर होकर एक चाल चली।<br />
उसने बन्दर से कहा कि तुम्हारी प्यारी सी भाभी (मगरमच्छ की पत्नी ) बन्दर से मिलना चाहती है। बन्दर आश्चर्यचकित होकर कहने लगा, ‘‘भला नदी में कैसे जायेगा?’’<br />
चालाक मगरमच्छ ने कहा, ‘‘वह उसकी पीठ पर बैठ जाये, और उसे सुरक्षित घर ले जाएगा।<br />
बेचारा बन्दर अपने मित्र की बात मान गया और भरोसा कर पेड़ से नदी में कूद गया और मगरमच्छ की पीठ पर सवार हो गया।<br />
जब वे नदी के बीच पहुंचे तो मगरमच्छ ने सोचा कि अब बन्दर को सही बात बताने में कोई नुक्सान नहीं। उसने बन्दर से कहा, ‘‘उसकी पत्नी बन्दर का मीठा दिल खाना चाहती है।’’<br />
यह सुन बन्दर को बहुत धक्का लगा और मानो उसका दिल टूट गया।<br />
समझदार बन्दर ने अपना धैर्य नहीं खोया और तपाक से बोला, ‘‘अरे मेरे प्यारे दोस्त, तुमने, तुमने मुझे यह पहले क्यों नहीं बताया? मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ में लटका रखा है। चलो मुझे वापस नदी के किनारे ले चलो, ताकि मैं अपना दिल लाकर अपनी भाभी को खिला सकूँ और उनकी इच्छा पूरी कर सकूं।’’<br />
बेवकूफ मगरमच्छ बन्दर की बात मान गया और पेड़ की और चल पड़ा।<br />
जैसे ही वह नदी-किनारे आया तो बन्दर ने तेजी से जामुन के पेड़ पर छलांग लगा दी।<br />
क्रोध में बंदर बोला, ‘‘तू मगरमच्छ नहीं गधा है, बेवकूफ दिल के बिना भी क्या कोई जिन्दा रह सकता है? चल भाग यहां से तेरी-मेरी दोस्ती खत्म, अब तुझे जामुन भी नहीं मिलेंगे खाने को।’’</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/smart-monkey/article-14608</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2020 14:08:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्ट एंड क्राफ्ट में बनें महारथी</title>
                                    <description><![CDATA[5-Minute Crafts: इस प्रसिद्ध यू-ट्यूब चैनल पर आपकों आर्ट एंड क्राफ्ट की ढेरों एक्टिविटिज के माध्यम से सीखने को बहुत मजेदार चीजे मिलेंगी। k4craft.com : इस साइट पर आपकों खुद के साथ-साथ बड़ों के लिए भी अनेक आइडियाज मिलेंगे। यानि अपने मम्मी-पापा के साथ भी क्राफ्ट में अपना हुनर निखार सकते हैं। Kids Art &amp; […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/art-and-crafts/article-14420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/art-and-crafts.jpg" alt=""></a><br /><h4><strong>5-Minute Crafts:</strong> <em>इस प्रसिद्ध यू-ट्यूब चैनल पर आपकों आर्ट एंड क्राफ्ट की ढेरों एक्टिविटिज के माध्यम से सीखने को बहुत मजेदार चीजे मिलेंगी।</em></h4>
<h4><strong>k4craft.com :</strong> <em>इस साइट पर आपकों खुद के साथ-साथ बड़ों के लिए भी अनेक आइडियाज मिलेंगे। यानि अपने मम्मी-पापा के साथ भी क्राफ्ट में अपना हुनर निखार सकते हैं।</em></h4>
<h4><strong>Kids Art &amp; Craft:</strong><em> इस फेसबुक पेज पर क्राफ्ट और आर्ट के बहुत से विकल्प मौजूद हैं।</em></h4>
<h4><strong>funology.com:</strong> <em>नेचर क्राफ्ट, रीसाइकल्ड क्राफ्ट जैसे कई तरह के क्राफ्टस आइडिया मिलेंगे।</em></h4>
<h4><strong>KidsArtnCrafts:</strong> <em>इस फेसबुक पेज से आप आसान और खूबसूरत आर्ट एंड क्राफ्ट सीख सकते हैं।</em></h4>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/art-and-crafts/article-14420</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2020 12:15:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हे आगन्तुक</title>
                                    <description><![CDATA[हे आगन्तुक हम नहीं बिछा सकते पलक-पांवडे तुम्हारे स्वागत के लिए इस वक्त मंदी के दौर से गुजर रहा है मेरा परिवार। हे आगन्तुक हम स्वागत कर सकते थे अगर न होता पुलवामा अटैक क्योंकि उसमें मरने वाले वीर मेरे अपने ही थे ये सच है कि वे अमर हैं, पर कभी लौटकर नहीं आएंगे। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/hey-visitor/article-13194"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/visitor.jpg" alt=""></a><br /><p>हे आगन्तुक<br />
हम नहीं बिछा सकते<br />
पलक-पांवडे<br />
तुम्हारे स्वागत के लिए<br />
इस वक्त मंदी के दौर से गुजर<br />
रहा है मेरा परिवार।</p>
<p>हे आगन्तुक<br />
हम स्वागत कर सकते थे<br />
अगर न होता पुलवामा अटैक<br />
क्योंकि उसमें मरने वाले वीर<br />
मेरे अपने ही थे<br />
ये सच है कि वे अमर हैं,<br />
पर कभी लौटकर नहीं आएंगे।</p>
<p>हे आगन्तुक<br />
मैं तुम्हारा स्वागत कैसे करूँ<br />
मेरे सामने खड़ी है एक दीवार<br />
जो करने नहीं देती तुम्हारा वैल्कम<br />
और ये दीवार है उस अहंकार की<br />
जो मुझे और आपको आगे बढ़ने नहीं देती।</p>
<p>हे आगन्तुक<br />
तुम अब लौट जाओ<br />
तुम देख ही रहे हो<br />
यहाँ अब नहीं हैं अहिंसा के पुजारी<br />
और नहीं हैं वो लोग जो गाते थे गीत<br />
वसुधैव कुटुंबकम का।</p>
<h4>दयाल जास्ट</h4>
<p> </p>
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<p><strong> </strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/hey-visitor/article-13194</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2020 13:28:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एहसान</title>
                                    <description><![CDATA[एक बहेलिया था। एक बार जंगल में उसने चिड़िया फंसाने के लिए अपना जाल फैलाया। थोड़ी देर बाद ही एक उकाब उसके जाल में फंस गया। वह उसे घर लाया और उसके पंख काट दिए। अब उकाब उड़ नहीं सकता था, बस उछल उछलकर घर के आस-पास ही घूमता रहता। उस बहेलिए के घर के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/help/article-13104"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/eagle.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">एक बहेलिया था। एक बार जंगल में उसने चिड़िया फंसाने के लिए अपना जाल फैलाया। थोड़ी देर बाद ही एक उकाब उसके जाल में फंस गया। वह उसे घर लाया और उसके पंख काट दिए। अब उकाब उड़ नहीं सकता था, बस उछल उछलकर घर के आस-पास ही घूमता रहता। उस बहेलिए के घर के पास ही एक शिकारी रहता था। उकाब की यह हालत देखकर उससे सहन नहीं हुआ। वह बहेलिए के पास गया और कहा- ‘मित्र, जहां तक मुझे मालूम है, तुम्हारे पास एक उकाब है, जिसके तुमने पंख काट दिए हैं। उकाब तो शिकारी पक्षी है। छोटे-छोटे जानवर खा कर अपना भरण-पोषण करता है। इसके लिए उसका उड़ना जरूरी है। मगर उसके पंख काटकर तुमने उसे अपंग बना दिया है। फिर भी क्या तुम उसे मुझे बेच दोगे?’ (Help)<br />
बहेलिए के लिए उकाब कोई काम का पक्षी तो था नहीं, अत: उसने उस शिकारी की बात मान ली और कुछ पैसों के बदले उकाब उसे दे दिया।<br />
शिकारी उकाब को अपने घर ले आया और उसकी दवा-दारू करने लगा। दो माह में उकाब के नए पंख निकल आए। वे पहले जैसे ही बड़े थे। अब वह उड़ सकता था।<br />
जब शिकारी को यह बात समझ में आ गई तो उसने उकाब को खुले आकाश में छोड़ दिया। उकाब ऊंचे आकाश में उड़ गया। शिकारी यह सब देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उकाब भी बहुत प्रसन्न था और शिकारी का बहुत कृतज्ञ था। अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उकाब शिकारी की मदद करने लगा। एक लोमड़ी, जो यह सब देख रही थी, उकाब से बोली-‘मित्र! जो तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकता उसे प्रसन्न करने से क्या लाभ?’<br />
इसके उत्तर में उकाब ने कहा-‘व्यक्ति को हर उस व्यक्ति का एहसान मानना चाहिए, जिसने उसकी सहायता की हो और ऐेसे व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिए जो हानि पहुंचा सकते हों।’</h4>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>निष्कर्ष : व्यक्ति को सदा सहायता (Help) करने वाले का कृतज्ञ रहना चाहिए।</strong></h3>
<p> </p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2020 10:32:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ये झोंपड़ियों के बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[Poor Children मैली झोंपड़ियों के हैं ये मैले-मैले बच्चे, उछल-कूदते, खिल-खिल हँसते हैं ये कितने अच्छे। मुझ जैसी इनकी दो आँखें मुझ जैसे दो हाथ, नहीं पढ़ा करते पर क्यों ये कभी हमारे साथ? नहीं हमारे साथ कभी ये जाते हैं स्कूल, क्यों इनके कपड़ों पर मम्मी इतनी ज्यादा धूल? (Poor Children) ढाबों में बरतन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/poor-children-of-slum-area/article-13103"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/poor-children.jpg" alt=""></a><br /><h2>Poor Children</h2>
<p>मैली झोंपड़ियों के हैं ये<br />
मैले-मैले बच्चे,<br />
उछल-कूदते, खिल-खिल हँसते<br />
हैं ये कितने अच्छे।<br />
मुझ जैसी इनकी दो आँखें<br />
मुझ जैसे दो हाथ,<br />
नहीं पढ़ा करते पर क्यों ये<br />
कभी हमारे साथ?<br />
नहीं हमारे साथ कभी ये<br />
जाते हैं स्कूल,<br />
क्यों इनके कपड़ों पर मम्मी<br />
इतनी ज्यादा धूल? (Poor Children)</p>
<p>ढाबों में बरतन मलते हैं<br />
या बोझा ढोते हैं,<br />
हम स्कूल में होते हैं तब<br />
ये चुप-चुप रोते हैं।<br />
मम्मी, किसने छीने,<br />
वरना ये भी खूब चमकते<br />
जैसे नए नगीने।</p>
<p>मम्मी, सोच लिया है पढ़कर<br />
इनको खूब पढ़ाऊँगा,<br />
ये पढ़कर आगे बढ़ जाएँ-<br />
इनको यही सिखाऊँगा।<br />
ये भी भारत के बच्चे हैं<br />
ये भारत की शान हैं,<br />
झोंपड़ियों के हैं तो क्या है,<br />
मन इन पर कुर्बान पर है!</p>
<h3>-प्रकाश मनु</h3>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/poor-children-of-slum-area/article-13103</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2020 10:07:42 +0530</pubDate>
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                            </item>

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