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                <title>Motivational - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Motivational: व्यवहार कैसे बनायें | Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational: सामाजिक प्राणी होने के नाते मानव अपनी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये समाज के अन्य सदस्यों से लेन देन करता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। गलत तो तब हो जाता है, जब लेन-देन की आदत ठीक न रखी जाए। प्रत्येक व्यक्ति को लेन-देन साफ रखना चाहिए। यह लेन-देन का कार्य एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/how-to-create-behavior/article-79221"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/motivational.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational: सामाजिक प्राणी होने के नाते मानव अपनी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये समाज के अन्य सदस्यों से लेन देन करता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। गलत तो तब हो जाता है, जब लेन-देन की आदत ठीक न रखी जाए। प्रत्येक व्यक्ति को लेन-देन साफ रखना चाहिए। यह लेन-देन का कार्य एक आलपिन से लेकर रुपयों-पैसों तक का हो सकता है, पर कुछ व्यक्ति लेने के मामले में आगे रहते हैं लेकिन जब लिया हुआ पुन: देना (लौटाना) पड़ता है तो हाथ खींच लेते हैं। ऐसी स्थिति में मधुर रिश्तों में भी कटुता आना स्वाभाविक है। हमें अपनी आम जिंदगी में कई ऐसे लोगों से भी सामना करना पड़ता है जो ‘जरा भाई साहब’, कहकर पैन वगैरह साइन करने के लिए मांगते हैं और काम निबटते ही जेब में रखकर चलते बनते हैं। दिखने में तो यह मामूली सी बात हो सकती है पर इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इसी तरह पेचकस (स्क्रू डाईवर), प्लास, अन्य औजार, मोटर साइकिल, टॉर्च, छाता वगैरह हमें एक दूसरे से मांगने ही पड़ते हैं। यदि इनको हम पुन: समय पर न लौटायें या खराब करके लौटायें तो इनका मालिक कितना दुखी होगा, यह अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/with-the-increasing-cold-in-north-india-winter-holidays-have-been-declared-in-schools/">Winter Vacation 2025: उत्तर भारत में बढ़ती सर्दी, स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित</a></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ आदमी मांगकर किताबें पढ़ने के शौकीन होते हैं। यह भी खराब आदत है। यदि कोई विशेष नोट्स या महंगी किताब वगैरा मांगनी ही पड़ जाएं तो हिफाजत के साथ उसे लौटाने में देर ना करें। पत्र-पत्रिकाओं को खरीद कर पढ़ने की आदत बनाएं। यदि पूर्ण सावधानी के बाद भी मांगी गई वस्तु खराब हो जाए या टूट-फूट जाए तो इसका पूरा मूल्य या रिपेयरिंग खर्च क्षमा- याचना सहित बिना मांगे दे देना चाहिए। इससे आपकी उज्ज्वल छवि सामने आएगी वरना लोग आपको कुछ भी देने में कतरायेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">शादी-ब्याह या किसी पार्टी वगैरह में विशेषकर हमें कई सामान मांग कर ही लाने पड़ते हैं। ऐसे व्यस्ततम मौकों पर भी सामानों को सही समय पर सुरक्षित रूप से पहुंचा दें तो अच्छा रहेगा। कुल मिलाकर लेन देन में जरा सी सावधानी आपकी कई समस्याएं दूर कर देगी। वैसे तो हमें दूसरों से कुछ भी मांगना ही नहीं चाहिए, फिर भी जरूरत में लेना ही पड़े तो सही समय पर व सही सलामत, सधन्यवाद लौटाने की आदत डालें।</p>
<h4>इन्सान को व्यवहार का सच्चा होना चाहिए</h4>
<p style="text-align:justify;">इन्सान को व्यवहार का सच्चा होना चाहिए। मान लीजिए कि आपको रुपयों की जरूरत है। आप किसी से ऋण के रूप में रुपए लेने जाते हैं। वो व्यक्ति आपको रुपए देता है और आपसे समय पूछता है कि कितने समय में वापिस कर दोगे। तब अगर आप वो रुपए 6 महीने में दे सकते हैं तो भी पहले ही आप 8 महीनों का समय मांग लें। इसके बाद जैसे ही आप पैसे वापिस देने जाएं, तो रुपए निर्धारित ब्याज सहित वापिस लौटाएं और उसका आभार व्यक्त करें। दूसरी तरफ जिस व्यक्ति ने रुपए दिए होते हैं, वह भी कम से कम ब्याज पर ऋण दे। जब व्यक्ति रुपए वापिस देने आता है, तब यदि व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर है, तो उससे केवल मूल ले लें और ब्याज न लें और उससे कहें कि भाई, तेरा काम चल गया, अब मुझे भी अपने रुपए वापिस मिल गए, ये ब्याज की रकम तू अपने किसी काम में लेना।<br />
-पूज्य गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां</p>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 11:22:06 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational Incident: ईमानदारी एक महान गुण</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/honesty-is-a-great-virtue/article-51298"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/boat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational Incident: नाव गंगा के इस पार खड़ी है। यात्रियों से लगभग भर चुकी है। रामनगर के लिए खुलने ही वाली है, बस एक-दो सवारी चाहिए। उसी की बगल में एक नवयुवक खड़ा है। नाविक उसे पहचानता है। बोलता है – ‘आ जाओ, खड़े क्यों हो, क्या रामनगर नहीं जाना है?’ नवयुवक ने कहा, ‘जाना है, लेकिन आज मैं तुम्हारी नाव से नहीं जा सकता।?’ क्यों भैया, रोज तो इसी नाव से आते-जाते हो, आज क्या बात हो गई? आज मेरे पास उतराई देने के लिए पैसे नहीं हैं। तुम जाओ। अरे! यह भी कोई बात हुई। आज नहीं, तो कल दे देना। Motivational Incident</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सोचा, बड़ी मुश्किल से तो माँ मेरी पढ़ाई का खर्च जुटाती हैं। कल भी यदि पैसे का प्रबन्ध नहीं हुआ, तो कहाँ से दूँगा? उसने नाविक से कहा, तुम ले जाओ नौका, मैं नहीं जाने वाला। वह अपनी किताब कापियाँ एक हाथ में ऊपर उठा लेता है और छपाक नदी में कूद जाता है। नाविक देखता ही रह गया। मुख से निकला- अजीब मनमौजी लड़का है। छप-छप करते नवयुवक गंगा नदी पार कर जाता है। रामनगर के तट पर अपनी किताबें रखकर कपड़े निचोड़ता है। भींगे कपड़े पहनकर वह घर पहुँचता है। माँ रामदुलारी इस हालत में अपने बेटे को देखकर चिंतित हो उठी। अरे! तुम्हारे कपड़े तो भीगे हैं? जल्दी उतारो।</p>
<p style="text-align:justify;">नवयुवक ने सारी बात बतलाते हुए कहा, तुम्ही बोलो माँ, अपनी मजबूरी मल्लाह को क्यों बतलाता? फिर वह बेचारा तो खुद गरीब आदमी है। उसकी नाव पर बिना उतराई दिए बैठना कहाँ तक उचित था? यही सोचकर मैं नाव पर नहीं चढ़ा। गंगा पार करके आया हूँ। माँ रामदुलारी ने अपने पुत्र को सीने से लगाते हुए कहा, ‘बेटा, तू जरूर एक दिन बड़ा आदमी बनेगा।’ वह नवयुवक अन्य कोई नहीं लाल बहादुर शास्त्री थे, जो देश के प्रधानमंत्री बने और 18 महीनों में ही राष्ट्र को प्रगति की राह दिखाई।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PM e-Bus Seva : देश के 100 शहरों में 10 हजार ई-बसें चलाने का केन्द्र का सही फैसला" href="http://10.0.0.122:1245/centers-right-decision-to-run-e-buses/">PM e-Bus Seva : देश के 100 शहरों में 10 हजार ई-बसें चलाने का केन्द्र का सही फैसला</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 15:51:24 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational incident: उदारता ने बदला मन</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational incident: फादर जोनाथन अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे। वह हर समय हर किसी की मदद के लिए तैयार रहते थे। एक दिन उनके घर से उनका चांदी का कीमती फूलदान गायब हो गया। उनकी पत्नी कैरोलिन ने सोचा कि अगर बाहर का कोई चोर होता तो वह जरूर ज्यादा चीजें ले जाता। यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/generosity-changed-the-mind/article-49849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/tree.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational incident: फादर जोनाथन अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे। वह हर समय हर किसी की मदद के लिए तैयार रहते थे। एक दिन उनके घर से उनका चांदी का कीमती फूलदान गायब हो गया। उनकी पत्नी कैरोलिन ने सोचा कि अगर बाहर का कोई चोर होता तो वह जरूर ज्यादा चीजें ले जाता। यह जरूर उनकी नौकरानी सामंथा का काम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कैरोलिन ने अपने मन की बात फादर को बताई पर उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कैरोलिन से इसे भूल जाने को कहा पर वह इस मामले को भूलने के लिए तैयार नहीं थीं। उन्होंने सामंथा से इस बारे में सख्ती से पूछताछ की पर उसने साफ कहा कि उसने चोरी नहीं की है। इसके बाद भी कैरोलिन का मन शांत नहीं हुआ। उन्होंने इस मामले को धर्म न्यायालय में ले जाने का फैसला किया ताकि धर्मगुरुओं के सामने सामंथा अपना गुनाह कबूल कर ले।</p>
<p style="text-align:justify;">कैरोलिन को तैयार होते देख फादर ने भी अपना चोगा उठाया और चर्च जाने के लिए तैयार होने लगे। उन्हें तैयार देख कैरोलिन ने कहा- आप रहने दीजिए। वहां सबसे निपटने के लिए मैं ही काफी हूं। इस पर फादर बोले- माना कि तुम्हें हर चीज की जानकारी है और तुम वहां ढंग से वाद-विवाद कर लोगी पर सामंथा तो अनपढ़ है और अव्यवहारिक भी। वह ऐसे मामलों में कभी पड़ी नहीं। मैं उसका पक्ष रखूंगा। अगर वह दोषी हुई तो उसे सजा मिलेगी और अगर निर्दोष हुई तो मैं उसे बचाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखूंगा। सामंथा के प्रति अपने पति के इस विश्वास को देखकर कैरोलिन ने अपना इरादा बदल दिया। Motivational incident</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Almond Tea Benefits: आश्चर्यजनक लेकिन सच, बादाम की चाय के लाभ हैं मस्त" href="http://10.0.0.122:1245/almond-tea-benefits/">Almond Tea Benefits: आश्चर्यजनक लेकिन सच, बादाम की चाय के लाभ हैं मस्त</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 15:58:26 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational: संत विनोबा भावे की पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational: संत विनोबा भावे (Vinoba Bhave) भूदान आंदोलन के माध्यम से गरीबों के कल्याण में लगे हुए थे। वह संपन्न लोगों के पास जाते और उनसे निर्धनों व बेसहारा व्यक्तियों को आर्थिक मदद देने का निवेदन करते। इसी सिलसिले में वह अलीगढ़ जिले के पिसावा गांव पहुंचे। वहां राजा श्यौदान सिंह का राज था। राजा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/saint-vinoba-bhave/article-49774"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/vinoba-bhave.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational: संत विनोबा भावे (Vinoba Bhave) भूदान आंदोलन के माध्यम से गरीबों के कल्याण में लगे हुए थे। वह संपन्न लोगों के पास जाते और उनसे निर्धनों व बेसहारा व्यक्तियों को आर्थिक मदद देने का निवेदन करते। इसी सिलसिले में वह अलीगढ़ जिले के पिसावा गांव पहुंचे। वहां राजा श्यौदान सिंह का राज था।</p>
<p style="text-align:justify;">राजा श्यौदान सिंह ने भव्य जनसभा में विनोबा जी का स्वागत किया। विनोबा जी ने राजा से कहा, ‘महाराज, आप मुझे गोद ले लीजिए।’ इस पर जनसभा में हंसी की लहर दौड़ गई। लेकिन राजा ने विनोबा की बात को अन्यथा न लेते हुए कहा, ‘मुझे स्वीकार है। मैं आपको विधिवत् गोद लेने की घोषणा करता हूं।’ यह सुनकर लोग दंग रह गए। इसके बाद विनोबा जी बोले, ‘पिताजी, अब आप मुझे अलग कर दीजिए। मैं आपका तीसरा पुत्र हूं। आप मुझे अपना भूमि का केवल छठवां भाग दे दीजिए।’ यह प्रस्ताव सुनकर भी सभी चकित रह गए। लेकिन राजा अपने वचन के पक्के थे। उन्होंने विनोबा जी के कथनानुसार उन्हें तुरंत लगभग दो हजार बीघा भूमि दे दी। Motivational</p>
<p style="text-align:justify;">वह भूमि लेने के बाद विनोबा जी ने उसके हिस्से कर उसे बेघर, निर्धन और बेसहारा लोगों में बांट दिया। जमीन पाने वाले जब विनोबा जी को दुआएं देने लगे तो विनोबा जी ने कहा, ‘यह भूमि आपको मेरे कारण नहीं बल्कि दानशील राजा श्यौदान सिंह के कारण मिली है। उन्हें दुआएं दीजिए।’ यह सुनकर अनेक लोगों ने राजा के निवास पर जाकर उन्हें धन्यवाद दिया। जब राजा को यह पता चला कि उनके द्वारा विनोबा जी को दान की गई भूमि बेघर और निर्धनों में बांट दी गई है, तो वह अत्यंत प्रसन्न हुए और जीवन भर लोगों के कल्याण में लगे रहे। Motivational</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="20 रुपये वाली पानी की बोतल की अनसुनी कहानी, असली कीमत जानकर होगी बड़ी हैरानी!" href="http://10.0.0.122:1245/you-will-be-surprised-to-know-the-real-cost-of-a-water-bottle/">20 रुपये वाली पानी की बोतल की अनसुनी कहानी, असली कीमत जानकर होगी बड़ी हैरानी!</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2023 18:15:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>&amp;#8216;यदि मन में लगन, उत्साह और एकाग्रता हो तो इंसान सब कुछ हासिल कर सकता है&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[उन दिनों सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) स्कूल में पढ़ते थे। वह सभी विषयों में तो बहुत तेज थे लेकिन बांग्ला भाषा पर उनकी पकड़ कम थी। एक दिन बांग्ला के अध्यापक ने विद्यार्थियों को एक निबंध लिखने के लिए दिया। सुभाष चूंकि बांग्ला में कमजोर थे, इसलिए उनके निबंध में अनेक कमियां निकलीं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/subhash-chandra-bose/article-49722"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/subhash-chandra-bosh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उन दिनों सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) स्कूल में पढ़ते थे। वह सभी विषयों में तो बहुत तेज थे लेकिन बांग्ला भाषा पर उनकी पकड़ कम थी। एक दिन बांग्ला के अध्यापक ने विद्यार्थियों को एक निबंध लिखने के लिए दिया। सुभाष चूंकि बांग्ला में कमजोर थे, इसलिए उनके निबंध में अनेक कमियां निकलीं। सभी विद्यार्थी उनका मजाक उड़ाने लगे। कक्षा का एक विद्यार्थी सुभाष से बोला, ‘वैसे तो तुम देशभक्त बनते हो मगर अपनी ही भाषा पर तुम्हारी पकड़ कमजोर है।’ सुभाष को यह बात चुभ गई। अब उन्होंने बांग्ला के व्याकरण का अध्ययन करना आरंभ कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दृढ़ संकल्प किया कि अब वे बांग्ला भाषा में केवल पास होने लायक अंक ही नहीं लाएंगे बल्कि उसमें अव्वल होंगे। कुछ समय बाद सुभाष ने बांग्ला में महारत हासिल कर ली। वार्षिक परीक्षाएं निकट थीं। अधिकतर विद्यार्थी बालक सुभाष को देखकर बोलते, ‘चाहे तुम कक्षा में प्रथम आ जाओ किंतु बांग्ला विषय में पास हुए बिना तुम सर्वप्रथम नहीं कहला सकते।’ वार्षिक परीक्षाएं हुईं। Subhash Chandra Bose</p>
<p style="text-align:justify;">परिणाम के दिन जब शिक्षक ने कक्षा में सर्वप्रथम आने वाले विद्यार्थी के रूप में सुभाष का नाम पुकारा तो उनसे ईर्ष्या करने वाला विद्यार्थी बोला, ‘भला यह कैसे संभव है? बांग्ला में तो यह मुश्किल से पास होता है। फिर यह सर्वप्रथम कैसे?’ इस पर शिक्षक मुस्करा कर बोले, ‘हैरानी तो इसी बात की है कि इस बार सुभाष ने सभी विषयों के साथ-साथ बांग्ला में भी सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।’ यह सुनकर सभी विद्यार्थी दंग रह गए। सुभाष अपना परिणाम प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों से बोले, ‘यदि मन में लगन, उत्साह और एकाग्रता हो तो इंसान सब कुछ हासिल कर सकता है।’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="PAN Card: अब नहीं चुरा सकते आप किसी की पहचान, मोदी सरकार ने किया ये प्रावधान!" href="http://10.0.0.122:1245/pan-card-update/">PAN Card: अब नहीं चुरा सकते आप किसी की पहचान, मोदी सरकार ने किया ये प्रावधान!</a></p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:06:02 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational : परम शांति अपने अंदर ही, मिलती है ध्यान से !</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational : सूफी फकीर बायजीद अपनी कुटिया में ध्यान में लीन थे। इस दौरान कोई उनसे मिलने नहीं आता था। मगर इस बात से अनजान एक अतिथि उनसे ध्यान का तरीका सीखने उनके पास आया और उन्हें पुकारने लगा। उसने बताया कि वह जानना चाहता है कि कैसे ध्यानमग्न हुआ जाए। कोई प्रतिक्रिया न मिलने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/meditation-brings-ultimate-peace-within/article-49548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/meditation.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational : सूफी फकीर बायजीद अपनी कुटिया में ध्यान में लीन थे। इस दौरान कोई उनसे मिलने नहीं आता था। मगर इस बात से अनजान एक अतिथि उनसे ध्यान का तरीका सीखने उनके पास आया और उन्हें पुकारने लगा। उसने बताया कि वह जानना चाहता है कि कैसे ध्यानमग्न हुआ जाए। कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर वह जोरों से दरवाजा पीटने लगा। उसे लगा शायद अंदर कोई न हों। तो उसने जोर से चिल्लाकर पूछा- अंदर कौन है? मगर कोई फायदा नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दरवाजा नहीं खुला। वह वहीं बैठ गया और प्रतीक्षा करने लगा। शाम के वक्त जब बायजीद बाहर निकले तो वह उलाहना देते हुए बोला- मैंने आपको बहुत पुकारा। कई बार आवाजें लगाई पर आपने तो कोई जवाब ही नहीं दिया। इस पर बायजीद मुस्कराते हुए बोले- मैं तो कुटिया के भीतर ही था। पर तुम्हारे प्रश्न ‘कौन है’ का जवाब खोजने के लिए मुझे अपने भीतर जाना पड़ा। सो उसी में देर हो गई। अतिथि ने कुछ नहीं कहा। तब तक वहां कई लोग जमा हो गए। बायजीद का प्रवचन शुरू हो गया। लेकिन थोड़ी ही देर के बाद जबर्दस्त आंधी-तूफान आया। अफरा-तफरी मच गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सब अपनी जान बचाने इधर-उधर दौड़े। वह अतिथि भी भागा। पर बायजीद को वहीं बैठे देख वापस लौट आया। वह फकीर के चरण पकड़ कर बोला- इस तूफान में सब भागे पर आप नहीं। ऐसा क्यों? फकीर ने कहा- जब सब बाहर की ओर भागे मैं भीतर चला गया, अपने ही ध्यान में। वहां कोई तूफान नहीं था। वहां परम शांति थी। अतिथि ने कहा- मुझे मिल गया ध्यान का तरीका। Motivational</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong><a title="Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी" href="http://10.0.0.122:1245/water-crisis-in-india/">Water Crisis: करोड़ों भारतीयों पर गंभीर जल संकट, होने वाली है पानी की कमी</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 14:58:21 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीयों के दीनबंधु (Deenbandhu) चार्ली फ्रियर एंड्रूज</title>
                                    <description><![CDATA[Deenbandhu: वर्ष 1904 में चार्ली फ्रियर एंड्रूज इंग्लैंड से कैंब्रिज विश्वविद्यालय मिशन की ओर से भारत भेजे गए थे। यहां आने के बाद उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया। इसके बाद उनका संपर्क गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर से हुआ। वह शांति निकेतन पहुंचे तथा हिंदी भाषा, शिक्षा और भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/charley-friar-andrews-deenbandhu-of-the-indians/article-49514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/charles-freer-andrews.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Deenbandhu: वर्ष 1904 में चार्ली फ्रियर एंड्रूज इंग्लैंड से कैंब्रिज विश्वविद्यालय मिशन की ओर से भारत भेजे गए थे। यहां आने के बाद उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया। इसके बाद उनका संपर्क गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर से हुआ। वह शांति निकेतन पहुंचे तथा हिंदी भाषा, शिक्षा और भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित हो गए। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि फिजी में कुलियों के रूप में ले जाए गए भारतीयों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस उत्पीड़न से दुखी होकर कई कुली तो आत्महत्या पर मजबूर हो रहे हैं। एंड्रूज तुरंत फिजी जा पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने अंग्रेज शासकों को चुनौती देते हुए कहा, ‘आप लोग गरीब श्रमिकों का उत्पीड़न-शोषण करके करुणामूर्ति ईसा मसीह को कलंकित कर रहे हो। Deenbandhu</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Manipur Violence : सुशासन के दौर में सुलगता मणिपुर" href="http://10.0.0.122:1245/manipur-smolders-in-the-era-of-good-governance/">Manipur Violence : सुशासन के दौर में सुलगता मणिपुर</a></p>
<p style="text-align:justify;">आपको इनका उत्पीड़न तुरंत बंद करना होगा। इस पर एक अंग्रेज बोला, ‘यदि हम श्रमिकों का उत्पीड़न करते रहे तो आप क्या करेंगे?’ एंड्रूज बोले, ‘मैं धरना दूंगा और श्रमिकों के उत्पीड़न के खिलाफ पूरे विश्व में आवाज उठाऊंगा।’ दूसरा अंग्रेज बोला, ‘यदि इतना होने पर भी श्रमिकों का उत्पीड़न नहीं रुक पाया तो आप क्या करेंगे?’ यह सुनकर एंड्रूज ने कहा, ‘मैं तब तक श्रमिकों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाता रहूंगा जब तक उनका उत्पीड़न पूरी तरह बंद नहीं हो जाता या मेरी मृत्यु नहीं हो जाती।’ अंग्रेज एंड्रूज की चुनौती देखकर घबरा गए। एंड्रूज ने शोषित भारतीय श्रमिकों की मुक्ति के लिए संघर्ष किया और अंतत: उन्हें सफलता मिली। फिजी में ही उन्हें सबसे पहले ‘दीनबंधु’ की उपाधि से अलंकृत किया गया था। वहां से भारत लौटकर दीनबंधु एंड्रूज ने अपना संपूर्ण जीवन श्रमिकों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।</p>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 15:42:07 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational : मुलायम, हृदय भेदी शस्त्र -अनोखे हथियार</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational : एक शक्तिशाली राजा थे- विनय सिंह। वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे, न ही किसी की योग्यता की कद्र करते थे। इसलिए उनके ही राज्य के अनेक लोग उनसे अप्रसन्न थे और अकसर हमला बोल देते थे। विनय सिंह इस बात से बेहद परेशान थे। एक दिन वह अपने राजगुरु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/soft-heart-piercing-weapon-unique-weapon/article-49410"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/raja-vinya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational : एक शक्तिशाली राजा थे- विनय सिंह। वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे, न ही किसी की योग्यता की कद्र करते थे। इसलिए उनके ही राज्य के अनेक लोग उनसे अप्रसन्न थे और अकसर हमला बोल देते थे। विनय सिंह इस बात से बेहद परेशान थे। एक दिन वह अपने राजगुरु को इस बारे में बताते हुए बोले, ‘गुरुजी, शत्रु हम पर कभी भी धावा बोल देते हैं। हमें इसका पता नहीं लग पाता। हैरानी तो इस बात की है कि हम पर हमला करने वाले हमारे ही राज्य के लोग हैं। हम उन पर कैसे वार करें?’ राजगुरु बोले, ‘पुत्र, तुम उन पर बिना देखे वार करो।’ Motivational</p>
<h3>राजा कुछ ही समय में प्रजा के प्रिय बन गए</h3>
<p style="text-align:justify;">विनय सिंह हैरानी से राजगुरु से बोले, ‘भला बिना देखे कैसे वार करूं? ऐसा तो कोई हथियार नहीं होता जो शत्रु को देखे बिना उस पर चलाया जाता हो।’ राजगुरु बोले, ‘तुम उनको ऐसे शस्त्र से मारो जो लोहे या किसी सख्त धातु से बना न होकर मुलायम हो और सीधा हृदय को बेधने वाला हो।’ अब तो राजा और बेचैन हो गए। वह बोले, ‘गुरुजी, भला ऐसा कौन सा शस्त्र है और कहां मिलता है? मैंने तो ऐसे किसी शस्त्र के बारे में नहीं सुना।’ राजगुरु हंसकर बोले, ‘वह शस्त्र है-यथाशक्ति सारी प्रजा को जीविका उपलब्ध कराना। Motivational</p>
<p style="text-align:justify;">जब प्रजा को रोजगार मिल जाता है तो उसकी अधिकतर समस्याएं हल हो जाती हैं। दूसरा शस्त्र है मीठा बोलना और मीठे बोल के अनुरूप ही काम करना। तीसरा शस्त्र है योग्य व्यक्तियों का सम्मान करना। ये तीनों शस्त्र लोहे या सख्त धातु के बने हुए नहीं हैं लेकिन लोगों के हृदय पर काफी प्रभाव डालते हैं। यदि इन शस्त्रों के माध्यम से तुम अपने विरोधियों को जीत लोगे तो वे तुम पर पीछे से प्रहार नहीं करेंगे और तुम्हारे वश में हो जाएंगे। राजा की आंखें खुल गईं। उन्होंने अपना व्यवहार बदला और कुछ ही समय में प्रजा के प्रिय बन गए। Motivational</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Titan Submarine: 6 दिन बाद मिली टाइटन पनडुब्बी, मलबे में तब्दील, टुकड़ों में मानव अवशेष भी बरामद" href="http://10.0.0.122:1245/titan-submarine-update-news/">Titan Submarine: 6 दिन बाद मिली टाइटन पनडुब्बी, मलबे में तब्दील, टुकड़ों में मानव अवशेष भी बरामद</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/inspiration/soft-heart-piercing-weapon-unique-weapon/article-49410</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 14:11:27 +0530</pubDate>
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                <title>Motivational: गुरु की विनम्रता रूहानी, मारे शर्म के शिष्य पानी-पानी</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational: गंगा के किनारे बने एक आश्रम में महर्षि मुद्गल अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। उन दिनों वहां मात्र दो शिष्य अध्ययन कर रहे थे। दोनों काफी परिश्रमी थे। वे गुरु का बहुत आदर करते थे। महर्षि उनके प्रति समान रूप से स्नेह रखते थे। आखिर वह समय भी आया, जब दोनों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-disciples-became-watery-in-front-of-the-humility-of-the-guru/article-49281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/rishi-mungil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational: गंगा के किनारे बने एक आश्रम में महर्षि मुद्गल अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। उन दिनों वहां मात्र दो शिष्य अध्ययन कर रहे थे। दोनों काफी परिश्रमी थे। वे गुरु का बहुत आदर करते थे। महर्षि उनके प्रति समान रूप से स्नेह रखते थे। आखिर वह समय भी आया, जब दोनों अपने-अपने विषय के पारंगत विद्वान बन गए। मगर इस कारण दोनों में अहंकार आ गया। वे स्वयं को एक-दूसरे से श्रेष्ठ समझने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन महर्षि स्नान कर पहुंचे तो देखा कि अभी आश्रम की सफाई भी नहीं हुई है और दोनों शिष्य सोकर भी नहीं उठे हैं। उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। महर्षि ने जब दोनों को जगाकर सफाई करने को कहा तो दोनों एक-दूसरे को सफाई का आदेश देने लगे। एक बोला-मैं पूर्ण विद्वान हूं। सफाई करना मेरा काम नहीं है। इस पर दूसरे ने जवाब दिया-मैं अपने विषय का विशेषज्ञ हूं। मुझे भी यह सब शोभा नहीं देता। महर्षि दोनों की बातें सुन रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा- ठीक कह रहे हो तुम लोग। तुम दोनों बहुत बड़े विद्वान हो और श्रेष्ठ भी। यह कार्य तुम दोनों के लिए उचित नहीं है। यह कार्य मेरे लिए ही ठीक है। उन्होंने झाड़ू उठाया और सफाई करने लगे। यह देखते ही दोनों शिष्य मारे शर्म के पानी-पानी हो गए। गुरु की विनम्रता के आगे उनका अहंकार पिघल गया। उनमें से एक ने आकर गुरु से झाड़ू ले लिया और दूसरा भी उसके साथ सफाई के काम में जुट गया। उस दिन से उनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया। Motivational</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana Politics: बीजेपी-जेजेपी गठबंधन पर रार, बढ़ी दोनों में तकरार" href="http://10.0.0.122:1245/haryana-politics-rar-on-bjp-jjp-alliance-dispute-between-both-increased/">Haryana Politics: बीजेपी-जेजेपी गठबंधन पर रार, बढ़ी दोनों में तकरार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2023 15:11:40 +0530</pubDate>
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                <title>&amp;#8230;जब अनोखी प्रतिस्पर्धा के लिए राजा ने पिटवा दिया ढिंढोरा</title>
                                    <description><![CDATA[Motivational : राजा रत्नसेन अपनी प्रजा के सुख-दुख को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। वह नियमित रूप से घूम-घूमकर प्रजा का हाल लेते थे। आम आदमी और राजसत्ता के बीच संवाद कायम करने के लिए कई तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता था। एक बार राजा को न जाने क्या सूझी कि उन्होंने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/unique-competition/article-49159"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/king.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Motivational : राजा रत्नसेन अपनी प्रजा के सुख-दुख को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। वह नियमित रूप से घूम-घूमकर प्रजा का हाल लेते थे। आम आदमी और राजसत्ता के बीच संवाद कायम करने के लिए कई तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता था। एक बार राजा को न जाने क्या सूझी कि उन्होंने राज्य में ढिंढोरा पिटवा दिया कि वे एक अनोखी प्रतियोगिता करने वाले हैं। इसमें जो कोई भी विजेता होगा उसे वे अपना उत्तराधिकारी बनाएंगे। इसमें जाति-धर्म व संप्रदाय का कोई बंधन नहीं होगा। राज्य के हर व्यक्ति को इसमें भाग लेने का अधिकार होगा। इससे हंगामा मच गया। हर तरह के लोगों में इसमें शामिल होने की होड़ लग गई। Motivational</p>
<p style="text-align:justify;">राजकुमार से लेकर आम व्यक्ति तक सभी इसके लिए चले आए। राजा ने सबसे पहले अपने राजकुंवर से प्रश्न किया, ‘ऐसा कौन सा वृक्ष राज्य के वन-उपवन अथवा परिसर में लगाया जाए जिस पर सफलता के ऐसे फल लगें जिन्हें खाकर राज्य का भाग्य परिवर्तन हो जाए?’ राजकुंवर सहित असंख्य लोगों ने इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास किया लेकिन कोई भी राजा को संतुष्ट न कर सका। Motivational</p>
<p style="text-align:justify;">अंत में ग्रामीणों की जमात से एक युवक आगे आया और उसने विनम्र स्वर में कहा, ‘महाराज! हमारे राज्य में कुछ और नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच के वृक्ष रोपे जाने की आवश्यकता है। उन्हीं पर सफलता के फल लग सकते हैं, जिन्हें खाकर राज्य की प्रजा दिन दोगुनी और रात चौगुनी प्रगति कर सकती है। उसके बाद ही राज्य का भाग्य परिवर्तन संभव है।’ यह सुनते ही राजा का चेहरा खिल उठा। उन्हें लगा कि इस राज्य की बागडोर वही थाम सकता है जिसकी ऐसी उत्कृष्ट सोच होगी। राजा ने उस युवक को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। Motivational</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2023 15:17:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>संघर्ष का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[कभी बाढ़ आ जाए, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाए। हर बार कुछ ना कुछ कारण से एक किसान (Farmer) की फसल खराब होती गई। एक दिन तंग आकर उसने परमात्मा से कहा-देखिए प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आप हमारे ऊपर रहम क्यों नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/importance-of-struggle/article-49121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/farmers.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कभी बाढ़ आ जाए, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाए। हर बार कुछ ना कुछ कारण से एक किसान (Farmer) की फसल खराब होती गई। एक दिन तंग आकर उसने परमात्मा से कहा-देखिए प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आप हमारे ऊपर रहम क्यों नहीं करते। एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिए, जैसा मैं चाहूँ वैसा मौसम हो, फिर आप देखना मैं कैसे अन्न के भंडार भर दूंगा। परमात्मा मुस्कराए और कहा-ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूंगा। Struggle</p>
<p style="text-align:justify;">अब, किसान ने गेहूं की फसल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी चाहा तो पानी मिला। तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की खुशी भी, क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी। किसान ने मन ही मन सोचा अब देखना हैरान कर देने वाली कैसी फसल होगी। फसल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फसल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा, एकदम से छाती पर हाथ रखकर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूँ का दाना नहीं था, सारी बालियां अन्दर से खाली थी, बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा-प्रभु ये क्या हुआ? तब परमात्मा बोले-ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का जरा सा भी मौका नहीं दिया। Struggle</p>
<p style="text-align:justify;">ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया, उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया, इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए। जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं, तब पौधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है, वो ही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है। सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने, गलने जैसी चुनौतियों से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है, उसे अनमोल बनाती है। किसान ने यह सुनकर तौबा की और परमात्मा से माफी मांगी। Motivational</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 15:43:41 +0530</pubDate>
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                <title>प्रेरक प्रसंग: विवेक से करें विरोधियों का हृदय परिवर्तन</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/change-the-heart-of-opponents-with-discretion/article-48807"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/tree.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बहुत पुरानी बात है जापान के एक गांव में बूढ़ा समुराई योद्धा (Samurai warrior) रहता था। दुनिया भर में वह जहां भी लड़ा, सभी को उसने हरा दिया। जब समुराई बूढ़ा हो गया तो एक विदेशी समुराई ने उससे युद्ध करने की इच्छा जाहिर की। बूढ़े समुराई ने उसे युद्ध न करने की सलाह दी, लेकिन उसने यु्द्ध के लिए हामी भर दी। युद्ध तय समय पर शुरू हुआ। विदेशी समुराई उस बूढ़े समुराई को अपमानित करने लगा। (Motivational Context)</p>
<p style="text-align:justify;">उसने उन्हें गुस्सा दिलाने के सारे प्रयास किए, लेकिन घंटों बाद भी उन्हें क्रोध नहीं आया। यह देखकर विदेशी समुराई ने पैरों से धूल उड़ा दी। इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी बूढ़े समुराई ने कुछ न कहा। उनका अपने मन पर पूरा नियंत्रण था। वह पहले की ही तरह शांत और धीर गंभीर बने रहे। विदेशी योद्धा अपनी हार मानते हुए चला गया। यह देखकर बूढ़े समुराई के शिष्य हैरान थे, उन्होंने पूछा, आपका इतना अपमान हुआ फिर भी आप चुप रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">तब उनके गुरु ने कहा, यदि कोई तुम्हें तोहफा दे और तुम उसे स्वीकार न करो तो वह किसका होगा? शिष्यों ने कहा, तोहफा देने वालों का ही होगा। गुरु बोले, मैंने भी उसकी गालियों को स्वीकार नहीं किया। तो वह उसके पास ही गईं। विवेक के प्रयोग से हम विरोधियों को भी सकारात्मक संदेश देकर उनका हृदय परिवर्तन सकते हैं। (Motivational Context)</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2023 15:46:25 +0530</pubDate>
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