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                <title>Natural Farming - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Natural Farming RSS Feed</description>
                
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                <title>प्राकृतिक खेती को देखने पहुंचे गुजरात के मुख्य सचिव व 33 जिलों के डीसी</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात की तर्ज पर हरियाणा में भी चलाएंगे जहरमुक्त प्राकृतिक खेती मुहिम : राज्यपाल कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। शुक्रवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को जानने के लिए गुजरात प्रदेश के मुख्य सचिव राजकुमार के अलावा 33 जिलों के उपायुक्तों का शिष्टमंडल पहुंचा। यहां उन्होंने प्राकृतिक खेती फार्म सहित गुरुकुल के विभिन्न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chief-secretary-of-gujarat-and-dc-of-thirty-three-districts-arrived-to-see-natural-farming/article-52125"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/kurukshetra-news.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">गुजरात की तर्ज पर हरियाणा में भी चलाएंगे जहरमुक्त प्राकृतिक खेती मुहिम : राज्यपाल</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)।</strong> शुक्रवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को जानने के लिए गुजरात प्रदेश के मुख्य सचिव राजकुमार के अलावा 33 जिलों के उपायुक्तों का शिष्टमंडल पहुंचा। यहां उन्होंने प्राकृतिक खेती फार्म सहित गुरुकुल के विभिन्न प्रकल्पों का अवलोकन किया। यहां गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हे प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से बताया। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा धान और गेंहू की फसल होती है और इन फसलों में पानी की खपत भी बहुत ज्यादा है, इसलिए हरियाणा के कई क्षेत्रों में जल-स्तर लगातार गिरता जा रहा है और कई क्षेत्र तो डार्क जोन में है। यदि समय रहते किसानों ने रासायनिक खेती छोडकर प्राकृतिक खेती को नहींं अपनाया तो आने वाले समय में यहां पीने का पानी भी उपलब्ध नहींं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती संवाद में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ.. हरिओम ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलू को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया, साथ ही गुरुकुल के फार्म पर प्राकृतिक खेती से धान, गेंहू, गन्ना व अन्य फसलों के उत्पादन का ब्यौरा अधिकारियों के समक्ष रखा। गुरुकुल से अधिकारियों का दल प्राकृतिक कृषि फार्म पर पहुंचा जहां ड्रेगन फ्रूट और सेब के बाग देखकर सभी आश्चर्य में पड़ गये क्योंकि ये दोनों फल यहां के मौसम के अनुकूल नहींं है फिर भी प्राकृतिक खेती की अनुपम शक्ति से यह करिश्मा गुरुकुल के फार्म पर सम्भव हुआ है। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;">धान की फसल में जहां किसान लगातार पानी भरकर रखते हैं, वहीं गुरुकुल के फार्म पर धान में भी अन्य फसलों की तरह ही सिंचाई की जाती है। फार्म पर सभी अतिथियों ने अमरूद का स्वाद चखा, साथ ही धान, गन्ना, सिंघाड़ा, तौरी, घीया व अन्य मिश्रिम फसलों का मुआयना किया। इसके बाद सभी अतिथिगण विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ब्रह्मसरोवर पर पहुंचे और इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल का भ्रमण किया। Kurukshetra News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सीएम मान ने नए भर्ती 710 पटवारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र" href="http://10.0.0.122:1245/more-than-three-times-increase-in-allowance-of-patwaris-in-punjab/">सीएम मान ने नए भर्ती 710 पटवारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chief-secretary-of-gujarat-and-dc-of-thirty-three-districts-arrived-to-see-natural-farming/article-52125</link>
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                <pubDate>Fri, 08 Sep 2023 19:33:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अब गेहूं में नहीं पड़ेगी रसायनों की जरूरत, ब्रह्मास्त्र व नीमास्त्र सहित 4 पदार्थ करेंगे पोषण</title>
                                    <description><![CDATA[गांव ख्योवाली में 4 किसानों ने लगाए प्राकृतिक खेती के प्लांट बुआई से लेकर कटाई तक नहीं होगा रसायनों का प्रयोग पूज्य गुरु जी कर चुके हैं ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित ओढां (राजू)। अब गेहूं में रसायनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थ आपकी फसल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-motivated-to-natural-farming/article-41661"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/natural-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>गांव ख्योवाली में 4 किसानों ने लगाए प्राकृतिक खेती के प्लांट</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बुआई से लेकर कटाई तक नहीं होगा रसायनों का प्रयोग </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी कर चुके हैं ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां (राजू)।</strong> अब गेहूं में रसायनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थ आपकी फसल का पोषण करेंगे। इससे न केवल भयानक बीमारियों पर काफी हद तक अंकुश लगेगा तो वहीं किसान भी आर्थिक व शारीरिक रूप से मजबूत होंगे। इसकी शुरुआत ओढां खंड में गांव ख्योवाली से हो चुकी है। दरअसल जहरमुक्त खेती छोड़कर प्राकृतिक ढंग से खेती अपनाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘कम लागत प्राकृतिक कृषि’ योजना शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस योजना को शुरुआती तौर पर ट्रायल के रूप में लिया गया है। विभाग का मानना है कि अगर ये योजना पूरी तरह से सफल हो जाती है तो किसान न केवल आर्थिक रूप से स्मृद्ध होंगे बल्कि जहरमुक्त अन्न खाने से भयानक बीमारियों से भी काफी हद तक बचा जा सकेगा। इस योजना की शुरुआत ओढां खंड में गांव ख्योवाली से हो चुकी है। जहां 4 जागरूक किसानों ने इस योजना को अपनाते हुए अपने खेतों मेंं ट्रायल के तौर पर लिया है। ये किसान अपने खेतों में गेहूं की फसल का उत्पादन योजना के तहत प्राकृतिक ढंग से करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने इस ट्रायल के तहत गेहूं की बुआई बगैर यूरिया, डीएपी, पोटाश, जिंक, खरपतवार नाशक दवा सहित अन्य छिड़काव के की है। बुआई से लेकर कटाई तक संपूर्ण कृषि क्रियाएं प्राकृतिक ढंग से ही प्रयोग में लाई जाएंगी। इसमें बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थ डालें जाएंगे। कृषि विभाग ओढां के सहायक तकनीक अधिकारी रमेश सहु ने बताया कि योजना के तहत 4 किसानों के यहां एक तरफ तो योजना के तहत प्राकृतिक ढंग से तो वहीं दूसरी तरफ आमतौर पर होने वाली रसायनिक खेती के तहत चैक प्लांट के रूप में गेहूं का उत्पादन किया जा रहा है। गेहूं के कटान के समय पैदावार की औसतन व क्वालिटी की तुलना होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">योजना के तहत प्लांट लगाने वाले जागरूक किसान पवन श्योराण, राधेराम शेरावत, सिद्धांत गोदारा व प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने इसे अपने खेतों में ट्रायल के तौर पर लिया है। अगर रसायनिक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती के तहत होने वाली पैदावार में बेहतर परिणाम मिला तो अगली बार इसी योजना के तहत ही खेती करेंगे। किसान पवन श्योराण ने बताया कि इस कार्य में थोड़ी मेहनत जरूर है, लेकिन अगर ये योजना सफल होती है तो किसानों को आर्थिक व शारीरिक दोनों रूप से लाभ मिलेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये मिलेगा अनुदान </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा इस योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है। जिसमें 4 खाली प्लास्टिक ड्रमों पर 3 हजार रुपये व एक देसी गाय खरीदने पर 25 हजार रुपये का अनुदान है। यानी कुल 28 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान है। कृषि विभाग द्वारा ओढां खंड में 20 एकड़ भूमि में प्राकृतिक प्लांट लगाने का लक्ष्य है। जिसमें गांव ख्योवाली में इसकी शुरुआत 4 किसानों के खेतों में हो चुकी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फसल का पोषण करेंगे ये 4 पदार्थ </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती में किसान बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थांे का प्रयोग करेंगे। इन पदार्थांे को किसान अति कम लागत पर घर पर ही तैयार कर सकते हैंं। बीजामृत में देसी गाय का गोबर व मूत्र, बुझा हुआ चूना तथा जीवामृत में देसी गाय का गोबर व मूत्र, गुड़, बेसन, पानी व पेड़ के नीचे की मिट्टी का इस्तेमाल होगा। वहीं नीमास्त्र में नीम के पत्ते, गौमूत्र व गोबर तथा पानी व ब्रह्मास्त्र में गौमूत्र, नीम के पत्तों का पाउडर, सफेद धतूरे के पत्तों का पाउडर, सीताफल के पत्तों का पाउडर, करंज, अमरूद, अरंडी व पपीते के पत्ते शामिल हैं। इन पदार्थांे का घोल फसल में पोषक तत्वों की पूर्ति करने के साथ-साथ अन्य बीमारियों पर भी नियंत्रण करेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र से हुई शुरुआत </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती की शुरुआत हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा की गई थी। जिसके तहत हिमाचल व गुजरात में काफी किसान इसे अपना चुके हैं। जिसके बाद इसे हरियाणा मेंं लाया गया है। हरियाणा में इसकी शुरुआत कुरुक्षेत्र से हुई। जहां पर गुरुकुल प्राकृतिक कृषि केंद्र शुरु किया गया है। यहां पर कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को 3 दिन का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पूज्य गुरु जी पहले कर चुके हैं जहरमुक्त खेती के लिए प्रेरित </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां रसायनिक खेती छोड़कर आॅर्गेनिक खेती अपनाने के लिए किसानों को पहले से ही प्रेरित करते आ रहे हैं। इसके अलावा पूज्य गुरु जी ये भी बता चुके हैं कि किस तरह से कम जगह में अधिक पैदावार उठाई जा सकती है। पूज्य गुरु जी ने बताया है कि रसायनों से की गई खेती न केवल मनुष्य को बल्कि पर्यावरण को भी खतरे में डालती है। इसलिए अगर किसान आॅर्गेनिक तरह से फसल का उत्पादन करें तो न केवल काफी हद तक बीमारियों से बचा जा सकेगा बल्कि किसान आर्थिक रूप से भी स्मृद्ध हो सकते हैं। पूज्य गुरु जी के खेती से संबंधित टिप्स अपनाकर अनेक किसान स्मृद्ध हो चुके हैं। पूज्य गुरु जी जब बीते दिनों यूपी रहे तो उन्होंने सोशल मीडिया पर खेती करते हुए एक पोस्ट शेयर की। जिसमें पूज्य गुरु जी ने किसानों को आॅर्गेनिक खेती बारे जागरूक भी किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ओढां खंड में प्राकृतिक कृषि की शुरुआत गांव ख्योवाली से हुई है। हमने 4 जागरूक किसानों के खेतों में रबी के ट्रायल प्लांट लगाए हैं। गेहूं की फसल पूरी तरह से रसायनों से मुक्त है। हम समय-समय पर देखभाल कर रहे हैं। ये प्लांट किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होंगे। किसान रसायनिक ढंग से खेती करने के आदी हैं। अगली बार किसानों मेंं काफी जागरूकता आएगी। हम इसके लिए जागरूकता शिविर लगाएंगे।<br />
<strong>– रमेश सहु, सहायक तकनीक अधिकारी (कृषि विभाग ओढां)।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2022 16:49:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को देसी गाय की खरीद पर मिलेगा 25 हजार रुपए का अनुदान</title>
                                    <description><![CDATA[कैथल (सच कहूँ/वर्मा)। हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में आजादी अमृत महोत्सव के तहत राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपए तक अनुदान देने और जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-will-get-a-grant-of-25-thousand-rupees-on-the-purchase-of-indigenous-cow/article-34991"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/cow.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैथल (सच कहूँ/वर्मा)।</strong> हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में आजादी अमृत महोत्सव के तहत राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपए तक अनुदान देने और जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। सरकार की इस योजना से किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ-साथ स्वदेशी गाय खरीदने में मदद मिलेगी। डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि देश में हरियाणा पहला राज्य होगा, जहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की पहल की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान पान को बदलना है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती का प्रदर्शन प्लांट लगाने वाले किसानों के लिए पोर्टल बनाया जाएगा। इस पर जमीन की पूरी जानकारी देने के साथ-साथ किसान स्वेच्छा से फसल विविधीकरण अपनाने के बारे में जानकारी देंगे। इस प्रकार विभाग के पास पूरी जानकारी होगी तो उसकी आसानी से मॉनिटरिंग की जा सकेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है प्राकृतिक खेती</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डीसी ने बताया कि प्राकृतिक खेती के तहत किसी भी तरीके के कृषि रसायन व उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है, बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर करती है। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रदेशभर में प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने पंजीकृत गोशालाओं को सस्ती दरों पर चारा मुहैया करवाने के लिए हरा चारा बिजाई योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत जो भी किसान गौशाला के आस-पास चारा उगाएगा, उसे हरियाणा सरकार की ओर से प्रति एकड़ दस हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी जो यह आर्थिक सहायता अधिकतम एक लाख रुपए है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 10:52:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती पर जोर दे रही है सरकार : तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि सरकार उन कृषि प्रथाओं (Natural Farming) को प्रोत्साहित कर रही है जो प्रकृति के अनुरूप काम करती हैं, उत्पादन की लागत को कम करती हैं और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली उपज और लाभ सुनिश्चित करती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/government-is-emphasizing-on-natural-farming-tomar/article-32745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/tomar.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि सरकार उन कृषि प्रथाओं (Natural Farming) को प्रोत्साहित कर रही है जो प्रकृति के अनुरूप काम करती हैं, उत्पादन की लागत को कम करती हैं और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली उपज और लाभ सुनिश्चित करती हैं। तोमर ने यहां अभिनव कृषि पर एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व पर भी जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि महामारी के दौरान पौष्टिक भोजन, अच्छे स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ी है। इस संबंध में उन्होंने पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में प्राकृतिक खेती की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बेहतर पोषण सुनिश्चित करने में मवेशियों और पशुओं के महत्व पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती में बदलाव से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और उपज में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से किसानों के काम को अनुकूलित करने और पर्यावरण को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे पानी के उपयोग में कमी आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और बड़े पैमाने पर लोगों, विशेषकर किसानों के साथ लाभ साझा करने का समय आ गया है। राज्यों के साझा अनुभव देश में नवीन कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए एक मजबूत रोडमैप बनाने में मदद करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यशाला में चार तकनीकी सत्र राज्यों में प्राकृतिक खेती पर एक पैनल चर्चा, मृदा स्वास्थ्य बहाली और जलवायु परिवर्तन शमन के लिए प्राकृतिक खेती, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना औल प्राकृतिक खेती (Natural Farming) में नवाचार थे। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आनलाइन शामिल हुए, और गाय आधारित प्राकृतिक खेती के महत्व और पारंपरिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा नदी के दोनों किनारों और 5,200 गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की राज्य की योजना का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने प्राकृतिक खेती पर अनुसंधान को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती की वर्तमान स्थिति, प्रगति और चुनौतियों के बारे में बताया। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की जरूरत है और वैज्ञानिक तरीकों की पहचान करना महत्वपूर्ण है ताकि किसानों को प्राकृतिक खेती और उच्च आय से प्रत्यक्ष लाभ का आश्वासन दिया जा सके।</p>
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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 20:52:32 +0530</pubDate>
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                <title>शून्य लागत प्राकृतिक खेती किसानों के लिए वरदान</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों एवं प्रयोगों से न केवल प्राकृतिक खेती एवं जीरो बजट खेती को बल मिल रहा है, भारतीय कृषि अनूठा एवं विलक्षण करते हुए भारत की अर्थ-व्यवस्था के लिये संबल बन रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/zero-cost-natural-farming-is-a-boon-for-farmers/article-13627"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/zero-cost-natural-farming-is-a-boon-for-farmers.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">शून्य लागत प्राकृतिक खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि वर्तमान में खेती के लिए रसायनों आदि की भारी कीमत चुकाने के लिए किसानों को कर्ज का सहारा लेना पड़ता है और कर्ज का यह बोझ बढ़ता ही जाता है। किसान रासायनिक खाद, कीटनाशक और पेस्टीसाइड के प्रयोग से न केवल कर्ज में डूब रहा है बल्कि खेतों में जहर की खेती कर रहे हैं। अनाज सब्जियों के माध्यम से यही जहर हमारे शरीर में जाता है।</h4>
<h6 style="text-align:justify;">विश्व के अन्य देशों की भांति भारत के लोगों ने भी पिछले कई सालों से पाश्चात्य अंधानुकरण के चलते न केवल अपने जीवन को बल्कि कृषि को अंधकारमय बना दिया है। इस मशीनी युग में खाद्यान्न पदार्थों को उगाने के लिए प्रयोग हो रही रासायनिक खाद और कीटनाशकों से खाद्य सामग्री भी जहरीली होने लगी है। देश में कृषि को बढ़ावा देने के नाम पर लंबे अर्से से प्रयोग हो रहे रसायनों से जहरीली हो रही धरती अब अपनी उपजाऊ शक्ति भी खोने लगी है। तथ्य है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत की कृषि संस्कृति को तंग तबाह किया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यहां के कृषि अनुसंधान केंद्रों की सूझबूझ को धता बताकर अपने हाइब्रिड बीज रासायनिक खाद और कीटनाशकों का व्यापार बढ़ाने के लिए डैने फैलाए हैं। किसान-जीवन को इस क्रूरता का शिकार बनाया है, परंपरागत बीज संरक्षण और उर्वरक तैयार करने की पद्धति को रोककर कृषि उपादानों के लिए उन्हें पराश्रित बनाया है। अमेरिका की वालमार्ट और मोसेंटो कंपनियों की विषाक्त सांसों से झुलसे हुए भारतीय कुटीर उद्योग और लघु व्यवसाय के कारण भारत की लोककला, पारंपरिक हुनर वगैरह तो आहत हुए ही है, यहां की संस्कृतियों पर भी इसका घातक हमला हुआ। अब कृषि कर्म को भी पंगु बनाने की निरंतर कोशिश चल रही है। ऐसे विषम एवं जटिल हालातों में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों एवं प्रयोगों से न केवल प्राकृतिक खेती एवं जीरो बजट खेती को बल मिल रहा है, भारतीय कृषि अनूठा एवं विलक्षण करते हुए भारत की अर्थ-व्यवस्था के लिये संबल बन रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">धरती को रसायनों से मुक्ति दिलाने और देश के नागरिकों को शुद्ध खाद्यान्न पदार्थ उपलब्ध करवाने की दृष्टि से शून्य लागत प्राकृतिक खेती एक बड़ा विकल्प बनकर उभरी है। आजादी बचाओ आंदोलन के संस्थापक स्व. राजीव दीक्षित ने 90 के दशक में देसी गाय को भारत के हरेक घर की आर्थिक समृद्धि, प्राकृतिक खेती एवं गो-संरक्षण का आधार बताते रहे हैं, इसी तरह प्राकृतिक खेती के सूत्रधार महाराष्ट्र के सुभाष पालेकर जीरो बजट खेती का अभियान चलाते हुए भारतीय कृषि को उन्नत बनाते रहे हैं, इन अभियानों को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत एक आंदोलन की तरह आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से हिमाचल प्रदेश के बाद अब गुजरात में कृषि की नयी फिजाएं आकार ले रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यपालों के सम्मेलन में उनके प्राकृतिक खेती एवं उन्नत जीवनशैली के प्रयासों की सराहना करते हुए देश के सभी राज्यों में इन्हें लागू करने को कहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश के बाद अब गुजरात के राज्यपाल के रूप में आचार्य देवव्रत कई ऐसे काम कर रहे हैं जिनकी बदौलत गुजरात में न केवल खेती एवं प्राकृतिक जीवन की दृष्टि से बल्कि अनेक क्षेत्रों में शुद्ध पर्यावरण, भारतीय संस्कृति एवं जीवनशैली के आदर्श मूल्यों को नये मुकाम हासिल हो रहे हैं। स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण, नशा निवारण, जल संरक्षण एवं साक्षरता, समरसता, प्राकृतिक कृषि एवं गोपालन और बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के महत्वपूर्ण कामों में उनकी सक्रियता प्रेरक एवं अनुकरणीय है। उनके द्वारा संचालित गुरुकुल कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में उन्होंने लम्बे समय तक प्राकृतिक जीवन, खेती एवं उन्नत जीवन के अनूठे एवं सफल प्रयोग किये। इन्हीं प्रयोग एवं प्रयासों को विभिन्न राज्यों के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने आगे बढ़ाया और प्राकृतिक खेती के प्रति प्रदेश के किसानों-बागवानों को प्रोत्साहित किया। जिसके चलते वर्तमान में हजारों किसान कृषि एवं बागवानी कर अपने जीवन को उन्नत बना रहे हैं। यही नहीं प्रदेश सरकारों ने भी इस प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में प्रावधान किये हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश के 30 हजार से अधिक किसान अब शून्य लागत प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारत में भी 50 लाख किसान इसे अपना चुके हैं। पूरे भारत में जैविक खेती अपनाने वाले सिक्किम राज्य ने भी अब शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है क्योंकि जैविक खेती से सिक्किम का खाद्यान्न उत्पादन बहुत कम हो गया है जबकि शून्य लागत प्राकृतिक खेती से उत्पादन ज्यादा होता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी आचार्य देवव्रत के रसायन मुक्त खेती के मंत्र को अपना लिया है। गोपालन व देशी नस्ल की गायों को अपनाने एवं गोबर एवं गोमूत्र से प्राकृतिक खेती के उनके अभियान के भी अनूठे परिणाम सामने आये हैं। क्योंकि केवल देसी गाय पर आधारित इस प्राकृतिक खेती को करने में कोई लागत नहीं आती है। किसान गाय के गोबर और मूत्र से ही खेत के लिए जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत को पूरा करता है। वहीं गाय के गोबर और मूत्र में लस्सी व गुड़ आदि मिलाकर किसान खेत में ही प्राकृतिक कीटनाशक भी तैयार कर सकता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दूसरा, जैविक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती काफी सरल और फायदेमंद है क्योंकि एक देसी गाय से लगभग 30 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा सकती है। जबकि जैविक खेती के लिए एक एकड़ क्षेत्र में करीब 20 पशुओं के गोबर की जरूरत पड़ती है। यह करिश्मा केवल और केवल जीरो बजट प्राकृतिक कृषि मॉडल से हुआ है जिसके लिये समूचे राष्ट्र के किसान आचार्य देवव्रत के ऋणि हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">शून्य लागत प्राकृतिक खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि वर्तमान में खेती के लिए रसायनों आदि की भारी कीमत चुकाने के लिए किसानों को कर्ज का सहारा लेना पड़ता है और कर्ज का यह बोझ बढ़ता ही रहा है। किसान रासायनिक खाद, कीटनाशक और पेस्टीसाइड के प्रयोग से न केवल कर्ज में डूब रहा है बल्कि खेतों में जहर की खेती कर रहे हैं। अनाज सब्जियों के माध्यम से यही जहर हमारे शरीर में जाता है। जिससे आज कैंसर, हार्ट अटैक, रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियां लगातार फैल रही हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यदि हमें अपने परिवार समाज को स्वस्थ रखना है तो हमें प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा। गाय से प्राप्त सप्ताह भर के गोबर एवं गौमूत्र से निर्मित घोल का खेत में छिड़काव खाद का काम करता है और भूमि की उर्वरकता का हृास भी नहीं होता है। इसके इस्तेमाल से एक ओर जहां गुणवत्तापूर्ण उपज होती है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन लागत लगभग शून्य रहती है। राजस्थान में सीकर जिले के एक प्रयोगधर्मी किसान कानसिंह कटराथल ने अपने खेत में प्राकृतिक खेती कर उत्साहवर्धक सफलता हासिल की है। श्री सिंह के मुताबिक इससे पहले वह रासायिक एवं जैविक खेती करता था, लेकिन देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र आधारित जीरो बजट वाली प्राकृतिक खेती कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आचार्य देवव्रत जीरो बजट प्राकृतिक खेती के प्रेरक एवं संरक्षक हैं, यह खेती की प्रक्रिया जैविक खेती से भिन्न है तथा ग्लोबल वार्मिंग और वायुमंडल में आने वाले बदलाव का मुकाबला एवं उसे रोकने में सक्षम है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला किसान कर्ज के झंझट से भी मुक्त रहता है वहीं उन्नत कृषि उत्पादों से आम जनजीवन को स्वस्थ जीवन प्रदत्त करता है।</h6>
<h6 style="text-align:right;"><em>ललित गर्ग</em></h6>
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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2020 22:43:57 +0530</pubDate>
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