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                <title>International day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पूज्य गुरु जी ने कोरोना काल में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को किया सेल्यूट</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को डॉक्टर्स डे पर बधाई दी। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हैप्पी डॉक्टर्स डे। आज का दिन उन डॉक्टरों के लिए, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके मरीजों की जान बचाई। आपजी ने फरमाया कि गाँवों में तो डॉक्टर को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/latest-video-of-saint-dr-msg-insan-on-instagram-2/article-35095"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/saint-dr.-msg-insan1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुक्रवार को डॉक्टर्स डे पर बधाई दी। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हैप्पी डॉक्टर्स डे। आज का दिन उन डॉक्टरों के लिए, जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके मरीजों की जान बचाई। आपजी ने फरमाया कि गाँवों में तो डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है और वास्तव में है। क्योंकि जब आदमी बेइंतहा दर्द में तड़प रहा होता है, परेशान हो रहा होता, जब उसे कहीं से रिलीफ मिल जाए तो उसके लिए, जिसने रिलीफ दी है वो भगवान का रूप बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो गाँवों में आम ही कहा जाता है कि यार वो डॉक्टर तो मेरे लिए भगवान है, उसने मेरी जान बचा दी। मेरे दर्द हो रहा था भयानक, उससे मुक्ति दिला दी। तो डॉक्टर अपने आप में एक भगवान के रूप की तरह माने जाते हैं। उन डॉक्टरों को हम सेल्यूट करते हैं, जिन्होंने कोविड-19 में लगातार सेवाएं दी और सेवाएं दे रहे हैं। इतना खतरा था, अपनी जान की परवाह ना करते हुए उन्होंने उस समय सेवाएं दी, उन सबको बहुत-बहुत सेल्यूट, भगवान उन्हें खुशियों से नवाजे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 15:23:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राष्ट्रीय प्रेस दिवस: सोशल मीडिया पर क्या बोले- उपराष्ट्रपति, जानें, इसके फायदे और नुक्सान</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया का प्रयोग जागरूकता बढ़ाने के लिए हो: नायडू नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया का प्रयोग समाज में एकता, सौहार्द और जागरूकता बढ़ाने के लिए होना चाहिए। नायडू ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर जारी एक संदेश में कहा कि जनता को सही, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/national-press-day-social-media-know-its-advantages-and-disadvantages/article-28412"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/national-press-day.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सोशल मीडिया का प्रयोग जागरूकता बढ़ाने के लिए हो: नायडू</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया का प्रयोग समाज में एकता, सौहार्द और जागरूकता बढ़ाने के लिए होना चाहिए। नायडू ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर जारी एक संदेश में कहा कि जनता को सही, निष्पक्ष, प्रमाणिक और सामयिक सूचना से शिक्षित करने में प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी भी है। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया से जुड़े सभी मित्रों को हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि मीडिया में झूठी और सनसनीखेज खबरों के बढ़ते चलन को रोका जाना चाहिए। सोशल मीडिया का प्रयोग समाज में एकता, सौहार्द और सजगता बढ़ाने में होना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया का विस्तार</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भारत में वर्ष 2019 तक 574 मिलियन सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्त्ता थे।</li>
<li style="text-align:justify;">इंटरनेट प्रयोग करने के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।</li>
<li style="text-align:justify;">एक अनुमान के अनुसार, दिसंबर 2020 तक भारत में लगभग 639 मिलियन सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">भारत के अधिकांश इंटरनेट उपयोगकर्त्ता मोबाइल फोन इंटरनेट उपयोगकर्त्ता हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में भारत में कुल डेटा (4जी डेटा उपभोग के साथ) ट्रैफिक में 47% की वृद्धि हुई है। देश भर में खपत होने वाले कुल डेटा ट्रैफिक में 4जी की भागीदारी 96% है जबकि 3जी डेटा ट्रैफिक में 30% की उच्चतम गिरावट दर्ज की गई।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया के लाभ</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सूचना का लोकतंत्रीकरण</li>
<li style="text-align:justify;">सोशल मीडिया ज्ञान और व्यापक स्तर पर संचार सुविधाओं का लोकतंत्रीकरण करता है।</li>
<li style="text-align:justify;">विश्व भर के अरबों लोगों ने अब सूचना को संरक्षित रखने और इसका प्रसार करने के पारंपरिक माध्यमों को चलन से लगभग बाहर कर दिया है। वे सिर्फ इसके उपभोक्ता ही नहीं सामग्री के निमार्ता और प्रसारकर्त्ता भी बन गए हैं।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चुनौतियाँ</strong></h4>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>द्वेषपूर्ण भाषण और अफवाहें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ समय से कई मामलों में हिंसा और जान-माल की क्षति के लिये नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहें जिम्मेदार रहे हैं। हाल ही का एक मामला है जब महाराष्ट्र के पालघर के गडचिंचल गाँव में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी गई। व्हाट्सएप मैसेज द्वारा यह अफवाह फैलाई गई कि क्षेत्र में तीन चोर चोरी कर रहे हैं, इस अफवाह के चलते गाँव के एक समूह ने तीनों यात्रियों को चोर समझकर उनकी हत्या कर दी थी। हस्तक्षेप करने वाले कई पुलिस कर्मियों पर भी गाँव वालों ने हमला कर दिया जिससे वे घायल हो गए। 2020 के दिल्ली दंगों में सोशल मीडिया पर हुए द्वेषपूर्ण भाषण की बड़ी भूमिका थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फेक न्यूज</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वर्ष 2019 माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 22 देशों में किये गए सर्वेक्षण के अनुसार, 64% से अधिक भारतीय फर्जी खबरों का सामना करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और व्हाट्सएप जैसी मैसेजिंग सेवाओं के माध्यम से प्रसारित एडिटेड इमेज, हेरा-फेरी वाले वीडियो और झूठे संदेशों की एक चौंका देने वाली संख्या मौजूद है जिससे गलत सूचनाओं और विश्वसनीय तथ्यों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आनलाइन ट्रोलिंग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ट्रोलिंग सोशल मीडिया का नया उप-उत्पाद है। कई बार लोग कानून अपने हाथ में ले लेते हैं, लोगों को ट्रोल करना और धमकाना शुरू कर देते हैं जो उनके विचारों या आख्यानों से सहमत नहीं होते हैं। इसने किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर हमला करने वाले गुमनाम ट्रोल को भी बढ़ावा दिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>महिला सुरक्षा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं को साइबर रेप और अन्य खतरों का सामना करना पड़ता है जो उनकी गरिमा को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। कभी-कभी उनकी तस्वीरें और वीडियो को साइबर पर लीक कर देने की धमकी दी जाती है। कभी-कभी उनकी तस्वीरें और वीडियो लीक हो जाते हैं जिसके कारण उन्हें साइबर अपराध के लिये मजबूर किया जाता है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Nov 2021 11:53:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर विशेष: माता-पिता को हेल्थ इंश्योरेंस में कवर करना है जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[आज के समय में बीमा एक बहुत आवश्यक आर्थिक प्रोडक्ट है। आपको समय रहते ही बीमा कवर लेना चाहिए। पर अकसर देखा गया है कि लोग इस पर कम ध्यान देते हैं। अधिकतर लोग अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद, विशेष रूप से 60 वर्ष की आयु में, अपने स्वास्थ्य बीमा के बारे में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/special-on-national-old-age-day-it-is-necessary-to-cover-parents-in-health-insurance/article-27351"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/old-age.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज के समय में बीमा एक बहुत आवश्यक आर्थिक प्रोडक्ट है। आपको समय रहते ही बीमा कवर लेना चाहिए। पर अकसर देखा गया है कि लोग इस पर कम ध्यान देते हैं। अधिकतर लोग अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद, विशेष रूप से 60 वर्ष की आयु में, अपने स्वास्थ्य बीमा के बारे में चिंता करना शुरू करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे फिर अपनी कंपनी के ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर नहीं किए जाते हैं। आम तौर पर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में 60 या 65 वर्ष की प्रवेश आयु पर एंट्री नहीं होती। इसलिए इस उम्र के बाद बीमा पॉलिसी का चयन करते समय, कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कोई कवर नहीं मिल पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज कई बीमा कंपनियां विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजाइन की गई स्वास्थ्य पॉलिसी की पेशकश करती हैं। इन पॉलिसी में कोई अधिक आयु वाला वरिष्ठ नागरिक (65-74 के बीच या कुछ पॉलिसी में 85 वर्ष की आयु तक) भी एंट्री कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को कंपनी द्वारा मिले ग्रुप हेल्थ पॉलिसी के तहत अपने वरिष्ठ नागरिक माता-पिता को शामिल करना चाहिए। ऐसा करने की पांच बड़ी वजह हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>महंगे प्रीमियम से बचाव</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जैसा कि आपको पता है कि कुछ पॉलिसियों में कोई अधिक आयु वाला वरिष्ठ नागरिक भी एंट्री कर सकता है। मगर सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के विपरीत, ये पॉलिसी सस्ती नहीं होती है। बीमाकर्ता इन पॉलिसियों के लिए अधिक प्रीमियम वसूलते हैं क्योंकि इस उम्र में लोगों को बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए जानकार सलाह देते हैं कि कंपनी से मिली ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत अपने माता-पिता को कवरेज प्रदान करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मेडिकल एग्जामिनेशन की जरूरत नहीं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आपको कंपनी की तरफ से दी गई बीमा योजनाओं के लिए किसी मेडिकल चेकअप की आवश्यकता नहीं होती है। डॉक्यूमेंटेशन के झंझट के बिना पूरे परिवार का पहले दिन से आॅटोमैटेड रूप से बीमा हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कम होता है प्रीमियम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में अदा किया जाने वाला प्रीमियम पर्सनल हेल्थ पॉलिसियों के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम से कम होता है। इससे अधिक निवेश और बचत की गुंजाइश रहती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इसे सबसे महत्वपूर्ण फायदों में से एक माना जाता है। किसी भी बीमारी के कवरेज के लिए कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं होती। आपके माता-पिता पहले दिन से ही कवर रहते हैं। उदारहण के लिए स्टैंडर्ड पॉलिसी में मोतियाबिंद के उपचार की न्यूनतम प्रतीक्षा अवधि 1 या 2 वर्ष है। हालांकि ग्रुप हेल्थ प्लान के तहत ये पहले दिन से ही कवर की जाती है। पहले से मौजूद बीमारियों के मामले में भी ऐसा ही है, जो पहले दिन से ही कवर की जाती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>टॉप-अप या सुपर टॉप-अप जोड़ना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">एम्प्लोयर बेस ग्रुप हेल्थ पॉलिसी के तहत उच्च बीमा राशि का आॅप्शन प्रदान करते हैं। वहीं कई एम्प्लोयर ग्रुप टॉप-अप या सुपर टॉप-अप पॉलिसियां आॅफर करते हैं। जानकार कहते हैं कि अगर कंपनी इस तरह के आॅप्सन प्रदान नहीं करती है, तो आप अपने माता-पिता के लिए रिटेल सुपर टॉप-अप पॉलिसियों के तहत कवर एड कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते वक्त ध्यान देने योग्य बातें</strong></h3>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1. पॉलिसी में क्या-क्या शामिल हैं देख लें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सीनियर सिटीजन को अधिक कवरेज, लचीलापन और सहायता की जरूरत होती है। इस लिहाज से उन्हें एक ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस चाहिए जिसमें बहुत सी सुविधाएं हों। हार्ट प्रॉब्लम, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के लिए पेमेंट की शर्त नहीं होनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2. पुरानी बीमारी को छुपायें नहीं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य बीमा कंपनियां पुरानी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कवरेज देना नहीं चाहती हैं। पुरानी बीमारियों का मतलब है कि इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले से ही व्यक्ति किसी बीमारी से पीड़ित है। ऐसी कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां हैं जो कवरेज दे सकती हैं यदि बीमारी बहुत गंभीर न हो। सीनियर सिटीजन के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते वक्त पुरानी बीमारियों का खुलासा जरूरी है जिससे क्लेम रिजेक्ट होने से बचा जा सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3. कवर रकम पर्याप्त होना चाहिए</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सीनियर सिटीजन को युवाओं की तुलना में स्वास्थ्य स्वास्थ्य बीमा की जरूरत अधिक रहती है। उनके लिए पर्याप्त कवरेज वाला हेल्थ इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी है। कुछ हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ कवरेज की अधिकतम रकम के लिए एक सीमा निर्धारित करती हैं। सीनियर सिटीजन के लिए पॉलिसी खरीदते समय सबसे पहले उनकी पुरानी बीमारियों और भावी जोखिमों का पता लगाने की कोशिश करें ताकि उनके लिए हेल्थ कवरेज की रकम का सही अंदाजा लगाया जा सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4. फ्लोटर पॉलिसी या इंडीविज्युअल पॉलिसी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फ्लोटर पॉलिसी या व्यक्तिगत पॉलिसी में से चुनने का फैसला करते समय सावधान रहना चाहिए। फ्लोटर पॉलिसी में सबसे अधिक आयु वाले व्यक्ति की उम्र के आधार पर प्रीमियम बनाया जाता है। पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति द्वारा फ्लोटर पॉलिसी के तहत बीमा का क्लेम किए जाने के बाद उस पॉलिसी के कवरेज की रकम उतनी घट जाती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>5. वेटिंग पीरियड का पता करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इंश्योरेंस लेने वाले व्यक्ति को वेटिंग पीरियड तक पुरानी बीमारियों के मामले में कवरेज पाने से रोकती है। इसके बाद पॉलिसी लेने वाला इंश्योरेंस कवरेज पाने के योग्य बनता है। सीनियर सिटीजन के लिए पहले से मौजूद बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड 1 से 4 साल तक की होती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी पॉलिसी लेने की कोशिश करें जिसमें पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड सबसे कम हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>6. तुलना जरूर करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इंश्योरेंस कंपनी से सीधे सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ना लें। इसमें बहुत ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है। इसमें को पेमेंट की शर्त भी हो सकती है। पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड की शर्त भी हो सकती है और आपको मेडिकल चेकअप भी कराने पड़ सकते हैं। कई बैंक अपने ग्राहकों को पॉलिसी बेचने के लिए खास हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट रखते हैं। ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के तहत आने वाली इन पॉलिसी में प्रीमियम बहुत कम होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>7. बैंक से पॉलिसी खरीदने में बरतें सावधानी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बैंक के माध्यम से हेल्थ पॉलिसी खरीदने से नुकसान भी हो सकता है। सिक्का ने कहा, बैंक और इंश्योरेंस कंपनी के बीच कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने पर आप कम दर पर पॉलिसी को रिन्यू नहीं करा पाएंगे। सीनियर सिटीजन को युवाओं की तुलना में हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत ज्यादा है। उन्हें इंश्योरेंस में पुरानी बीमारियों का खर्च, पॉलिसी लेने से 30 दिन के भीतर होने वाली बीमारियों का खर्च, चोट या नशे के इलाज का खर्च इत्यादि नहीं मिलता।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Oct 2021 14:59:45 +0530</pubDate>
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                <title>शांति के लिए अहिंसा को प्रोत्साहन की जरूरत : नायडू</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए आवश्यक शांति और अहिंसा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। नायडू ने अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर मंगलवार को यहां जारी एक संदेश में कहा कि मानवता के कल्याण के लिए शांति और अहिंसा पूर्व निर्धारित आदर्श […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/need-to-encourage-non-violence-for-peace/article-27048"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/countrymen-express-gratitude-to-soldiers-naidu.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए आवश्यक शांति और अहिंसा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। नायडू ने अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर मंगलवार को यहां जारी एक संदेश में कहा कि मानवता के कल्याण के लिए शांति और अहिंसा पूर्व निर्धारित आदर्श हैं। इसलिए इन्हें प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के मुख्य विषय वस्तु-सतत् और समान विश्व की पुन: खोज- यह याद दिलाती है कि कोविड-19 ने मानवता के समक्ष नई चुनौतियां पैदा की है। एक न्याय पूर्ण और सामान विश्व की दिशा में मिलकर काम किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श को याद करें। संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में यह अपेक्षित है कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को देशों के बीच न्यायसंगत सम्मानपूर्ण संबंधों के आधार पर बढ़ाया जाए। हमने सदैव विश्व शांति के पंचशील का पालन किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Sep 2021 10:48:19 +0530</pubDate>
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                <title>मजदूर दिवस पर विशेष: ये मेहनत की बूंदें, देश की बुनियाद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। एक मई को मजदूर दिवस है। लेकिन विश्व में मजदूरों के हालत बद से बदतर है। जिनके चेहरे पर हल्की-सी उदासी और आंखों में काम मिलने की आशा दिखती है। दरअसल वें ‘मजदूर’ हैं। बड़ी-बड़ी इमारतें, बांध और सड़कों, सभी को मजदूर अपने खून और पसीने से सींचता है। अगर कोई सही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/special-on-labor-day-these-drops-of-hard-work-the-foundation-of-the-country/article-23308"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> एक मई को मजदूर दिवस है। लेकिन विश्व में मजदूरों के हालत बद से बदतर है। जिनके चेहरे पर हल्की-सी उदासी और आंखों में काम मिलने की आशा दिखती है। दरअसल वें ‘मजदूर’ हैं। बड़ी-बड़ी इमारतें, बांध और सड़कों, सभी को मजदूर अपने खून और पसीने से सींचता है। अगर कोई सही मायने में देश का निर्माणकर्ता है तो वह मजदूर है। इतनी अहम् भूमिका निभाने वाले मजदूरों के हालात पूरे विश्व में कहीं भी ठीक नहीं हैं और उनकी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, जिस पर विश्व श्रम संगठन सैकड़ों बार चिंता जाहिर कर कर चुका है। मजदूरों के हालात पर चिंतन के लिए ही एक मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कैसे हुई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरूआत</h4>
<p style="text-align:justify;">मई दिवस यानि अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है, जब अमेरिका में हजारों मजदूरों ने एक साथ मिलकर 15 घंटे काम कराने के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। ये मजदूर यूनियनें 8 घंटे से ज्यादा समय तक काम कराने के विरोध में हड़ताल पर चली गई थीं। इसी हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम धमाका हुआ। यह बम किसने फेंका कोई पता न चल सका। इसके निष्कर्ष के तौर पर पुलिस ने मजदूरों पर गोलियां बरसा दी, जिसमें सात मजदूरों की जान चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">भरोसेमंद गवाहों ने तस्दीक की कि पिस्तौलों की सभी फलैशें गली के केन्द्र की तरफ से आर्इं जहां पुलिस खड़ी थी और भीड़ की तरफ से एक भी फ्लैश नहीं आई। इससे भी आगे वाली बात, प्राथमिक अखबारी रिपोर्टों में भीड़ की तरफ से गोलीबारी का कोई ज़िक्र नहीं। इसके बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए, तब से ही दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भारत में चेन्नई से हुआ आगाज</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत में एक मई का दिवस सबसे पहले चेन्नई (मद्रास) में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इसको मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इसकी शुरूआत भारती मजदूर किसान पार्टी के नेता कॉमरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। भारत में मद्रास के हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">यही वो मौका था, जब पहली बार लाल रंग का झंडा मजदूर दिवस के प्रतीक के तौर पर देश में इस्तेमाल किया गया, जिसका स्वरूप आज भी ठीक वही है। दिन भारत समेत दुनियाभर में मजदूरों ने संगठित होकर अपने साथ हो रहे अत्याचारों और शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की थी और तभी से लेकर अब तक इस दिन को भारत में भी मजदूरों के हक का दिन माना जाने लगा और विश्वभर की तरह भारत में भी इसे विशेष दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">देश की तरक्की कामगारों और किसानों पर निर्भर</h4>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करती है। उद्योगपति, मालिक या प्रबंधक समझने की बजाय अपने-आप को ट्रस्टी समझने लगे। लोकतन्त्रीय ढांचों में तो सरकार भी लोगों की तरफ से चुनी जाती है, जो राजनीतिक लोगों को अपने देश की बागडोर ट्रस्टी के रूप में सौंपते हैं। वह प्रबंध चलाने के लिए मजदूरों, कामगारों और किसानों की बेहतरी, भलाई और विकास, अमन और कानूनी व्यवस्था बनाए रखने के लिए वचनबद्ध होते हैं। मजदूरों और किसानों की बड़ी संख्या का राज प्रबंध में बड़ा योगदान है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का रोल औद्योगिक शान्ति, उद्योगपतियों और मजदूरों दरमियान सुखदायक, शांतमयी और पारिवारिक संबंध कायम करना, झगड़े और टकराव की सूरत में उनका समझौता और सुलह करवाने का प्रबंध करना और उन के मसलों को औद्योगिक ट्रिब्यूनल कायम कर कर निरपेक्षता और पारदर्शी ढंग से कुदरती न्याय के उसूल के सिद्धांत अनुसार इंसाफ प्रदान करना और उन की बेहतरी के लिए समय-समय से कानूनी और विवरण प्रणाली निर्धारित करना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास से मजदूर बने लाखों-करोड़ों के मालिक</h4>
<p style="text-align:justify;">बाड़मेर तेल और खनिजों के बूते आर्थिक उन्नति कर रहा है तो यहां के मेहनतकश लोगों ने भी खुद को इस ऊंचाई पर पहुंचाया है कि कल तक जिन्हें मजदूरी करते देखा था, आज सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचकर उदाहरण बन गए हैं। यहां के मजदूरों ने बाड़मेर के उत्पादों को सात समंदर पार पहुंचा दिया। ऐसे उदाहरण विरले ही मिलेंगे कि मजदूर इनकम टैक्स दे रहे हों और फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हों। कमाल तो यह भी है कि यहां मनरेगा में करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं और इसका 90 प्रतिशत कार्य महिलाएं कर रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">यहां मजदूर देते हैं इनकम टैक्स</h4>
<p style="text-align:justify;">बाड़मेर के एफसीआई गोदाम में कार्यरत मजदूर देश में अद्वितीय उदाहरण हैं। यहां 90 के दशक में लगे इन मजदूरों को नियमित कर दिया गया और साथ ही इनके साथ एक शर्त थी कि तनख्वाह के साथ अतिरिक्त भार उठाएंगे तो उन्हें इसके लिए प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दी जाएगी। ज्यादा बैग होने पर प्रति बोरी यह राशि दुगुनी और तिगुनी हो जाती है। निगम में गिनती के मजदूर लगे हुए हैं। नियमानुसार सारा अनाज खाली करवाने और चढ़ाने की जिम्मेदारी इनकी ही है। जिले में इतनी बड़ी मात्रा में अनाज आता है कि इन मजदूरों की मासिक आय 80 हजार से एक लाख रुपए तक पहुंच जाती है। अब ये मजदूर इनकम टैक्स दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मेरी आपत्ति मशीन से नहीं, मशीन के प्रति सनक को लेकर है। इसी सनक का नाम श्रम की बचत करने वाली मशीने हैं। हम उस सीमा तक श्रम की बचत करते जाएंगे, जब तक कि हजारों लोग बेरोजगार होकर भूखों मरने के लिए सड़कों पर नहीं फेंक दिए जाते।</strong><br />
–<strong>महात्मा गांधी</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 01 May 2021 09:49:16 +0530</pubDate>
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