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                <title>Amnesty International - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भीमा कोरेगांव कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए: एमनेस्टी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कोरोना महामारी के मद्देनजर भीमा कोरेगांव घटना के मामले में गिरफ्तार 11 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को फिलहाल रिहा करने और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने की सरकार से मांग की है। गौरतलब है कि आज ही के दिन गत वर्ष सुरेंद्र गाडलिंग, रोना विल्सन, सुधीर धवाले, शोमा सेन और महेश राउत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bhima-koregaon-activists-to-be-released-amnesty/article-15892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/amnesty.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कोरोना महामारी के मद्देनजर भीमा कोरेगांव घटना के मामले में गिरफ्तार 11 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को फिलहाल रिहा करने और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने की सरकार से मांग की है। गौरतलब है कि आज ही के दिन गत वर्ष सुरेंद्र गाडलिंग, रोना विल्सन, सुधीर धवाले, शोमा सेन और महेश राउत को पुणे पुलिस ने 2018 में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया था। उसके बाद से छह अन्य कार्यकर्ताओं – सुधा भारद्वाज, वरवारा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्वेस, आनंद तेलतुम्बडे और गौतम नवलखा को भी इस मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमनेस्टी ने शनिवार को यहां जारी विज्ञप्ति में कहा कि ये सभी 11 कार्यकर्ता दलितों और आदिवासियों सहित भारत के अत्यंत हाशिये के लोगों के अधिकारों की रक्षा हेतु अपने अथक कार्य के लिए जाने जाते हैं। एमनेस्टी इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा , “पिछले दो वर्ष से इन कार्यकर्ताओं को जिस पीड़ा से गुज़रना पड़ा है, वह इस बात का सबूत है कि कानूनी प्रक्रिया ही सजा सामान होती है। इसका सबूत एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जाना, पुणे पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच सौंपा जाना सरकार तथा मीडिया द्वारा इन कार्यकर्ताओं पर ‘देशद्रोही’ होने का आरोप लगाकर इन्हें बदनाम करने का अभियान चलाया जाना है।”</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2020 10:10:06 +0530</pubDate>
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                <title>कोरोनो के खिलाफ लड़ाई में गरीबों,वंचितों की उपेक्षा न हो : एमनेस्टी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में पलायन कर रहे लोगों के हालत पर गहरी चिंता | Amnesty International नई दिल्ली (एजेंसी)। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कोरोनो महामारी के डर से भारत में पलायन कर रहे लोगों के हालत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस महामारी से लड़ने के लिए भारत में 21 दिनों के लॉक डाउन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-poor-and-the-underprivileged-should-not-be-ignored-in-the-fight-against-coronavirus-amnesty-international/article-13965"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/2019_2largeimg07_feb_2019_090837817.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">भारत में पलायन कर रहे लोगों के हालत पर गहरी चिंता | Amnesty International</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कोरोनो महामारी के डर से भारत में पलायन कर रहे लोगों के हालत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस महामारी से लड़ने के लिए भारत में 21 दिनों के लॉक डाउन ने लाखों प्रवासी मजदूरों को और गहरे संकट में डाल दिया है और उन्हें जिंदा रहने के लिए जरूरी सेवाओं की खातिर जूझना पड़ रहा है। भारत मे एमनेस्टी के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि भारत सरकार की ओर से महामारी से लड़ने के लिए जो नीतियाँ और योजनाएँ अपनाई जा रही हैं, उनके जरिये गरीबों और हाशिए के समुदायों की कठिनाइयाँ बढ़ने की जगह कम होनी चाहिए।</p>
<h3>भारत एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा था,‘भारत एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है और बस एक गलत कदम की वजह से यह घातक वायरस जंगल की आग की तरह फैल सकता है और पूरे देश को खतरे में डाल सकता है। अगर हम लापरवाही करते रहे तो भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। कुमार ने कहा,‘यह आवश्यक है कि भारत इस महामारी से लड़ने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए लेकिन, यह भी उतना ही जरूरी है कि सबसे कमजोर समुदायों के हितों को महामारी से लड़ने की हर नीति के केंद्र में रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">लॉकडाउन का बुरा असर सबसे ज्यादा प्रवासी और देहाड़ी वाले मजदूरों और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस महामारी से निपटने के लिए कोई भी कार्रवाई तय करते वक्त, भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन समुदायों की जरूरतों और अनुभवों को नजरअंदाज न किया जाए।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2020 09:25:13 +0530</pubDate>
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