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                <title>Corona crisis - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Corona crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>Corona cases in INDIA | देश में 24 घंटे में कोरोना 21566 नए मामले</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश भर में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस (कोविड-19) के 21566 नए मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को यहां बताया कि सुबह सात बजे तक 200.91 करोड़ टीके दिये जा चुके हैं। इसमें पिछले 24 घंटे में दिए 29,12, 855 टीके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/corona-21566-new-cases-in-24-hours-in-the-country/article-35722"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/active-cases-below-five-lakh.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश भर में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस (कोविड-19) के 21566 नए मामले दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को यहां बताया कि सुबह सात बजे तक 200.91 करोड़ टीके दिये जा चुके हैं। इसमें पिछले 24 घंटे में दिए 29,12, 855 टीके भी शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोविड-19 संक्रमण के 21566 नए मामले सामने आने से कुल संक्रमितों की संख्या 48824185 तक पहुंच गयी है। देश में कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आने के साथ दैनिक संक्रमण दर 4.25 प्रतिशत हो गयी है और रिकवरी दर 98.46 प्रतिशत और मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 5,07,360 कोविड परीक्षण किये गये हैं और अब तक कुल 87.11 करोड़ कोविड परीक्षण किए जा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पश्चिम बंगाल में कोरोना के नए मामले बढ़े</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 24 घंटों में ओडिशा कोरोना के सक्रिय मामले सबसे अधिक बढ़े हैं। राज्य में 1122 सक्रिय मामले बढ़ने के साथ इनकी कुल संख्या बढ़कर 6754 हो गयी है और इससे निजात पाने वालों की संख्या 1286111 तक पहुंच गयी है। इस महामारी से अभी तक राज्य में 9130लोगों की जान जा चुकी है।<br />
पश्चिम बंगाल में कोरोना के सबसे ज्यादा 570 सक्रिय मामलों घटने से इनकी संख्या घटकर 28399 रह गई है। इससे निजात पाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 2027312 हो गयी है, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 21294 हो गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली में सक्रिय मामले में बढ़ोत्तरी</strong></p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय मामले 113 बढ़कर 2153 हो गये हैं। प्रदेश में इस जानलेवा वायरस को 573 और लोगों ने मात दी, जिसके बाद कोरोना से मुक्त होने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1917215 तक पहुंच गई। अभी तक इस महामारी से 26296 लोगों की मौत हो चुकी है।<br />
महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 153 घटकर 14636 रह गई है, जबकि 2471 और लोगों के स्वस्थ होने के बाद इससे निजात पाने वाले लोगों का संख्या बढ़कतर 7862431 तक पहुंच गयी, जबकि इस दौरान सात और लोगों की जान जाने से मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 148039 गया है।<br />
कर्नाटक में सक्रिय मामलों की संख्या 249 बढ़कर 7866 हो गयी गई है, जबकि 2912 और लोगों के स्वस्थ होने के बाद इससे निजात पाने वाले लोगों का आंकड़ा 3942060 तक पहुंच गया है।मृतकों का आंकड़ा 40131 पर स्थिर है।</p>
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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 11:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टोक्यो ओलंपिक खेलों का आयोजन संभव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ओलंपिक रद्द करने की याचिका पर चार लाख से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर (Tokyo Olympic Games) टोक्यो (एजेंसी)। कोरोना महामारी के कारण आगामी टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों को रद्द करने को लेकर लॉन्च की गई आॅनलाइन याचिका पर चार लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। जापान के एक प्रतिष्ठित वकील […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/it-is-not-possible-to-organize-tokyo-olympic-games/article-23943"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/tokyo-olympic.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>ओलंपिक रद्द करने की याचिका पर चार लाख से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर (Tokyo Olympic Games)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो (एजेंसी)।</strong> कोरोना महामारी के कारण आगामी टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों को रद्द करने को लेकर लॉन्च की गई आॅनलाइन याचिका पर चार लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। जापान के एक प्रतिष्ठित वकील एवं राजनेता केनजी उत्सुनोमिया ने पांच मई को यह आॅनलाइन याचिका पेश की थी। अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक , अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष एंड्रयू पार्सन्स, जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा, ओलंपिक मामलों के मंत्री तामायो मारुकावा, टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक आयोजन समिति के अध्यक्ष सेइको हाशिमोतो और टोक्यो के गवर्नर यूरिको कोइके के नाम लिखी गई इस याचिका में कहा गया है कि आयोजक वर्तमान में जबरदस्ती टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि टोक्यो और जापान के अन्य प्रांतों के साथ-साथ दुनिया भर के सभी देश जानलेवा वायरस के प्रसार को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>वर्तमान स्थिति चिंताजनक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">याचिका में यह भी कहा गया है कि अनगिनत स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सा संस्थानों और मूल्यवान चिकित्सा संसाधनों की मदद के बिना टोक्यो ओलंपिक खेलों का आयोजन संभव नहीं होगा। कई चिकित्सा पेशेवरों ने हालांकि पहले ही लोगों को सूचित किया है कि यहां अधिक चिकित्सा मांगों के लिए कोई जगह नहीं है। यह बहुत संभव है कि ओलंपिक का आयोजन सुपर-स्प्रेडर (तेजी से संक्रमण फैलना) होगा और तब स्थिति वर्तमान से भी ज्यादा खराब हो जाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुछ जापानी सर्वेक्षणों के मुताबिक जापान की अधिकतर लोग ओलंपिक रद्द करने के पक्ष में हैं। यहां तक कि टोक्यो ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों के आधिकारिक मीडिया पार्टनर में से एक जापानी समाचार पत्र असाही शिंबुन ने बुधवार को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कोरोना महामारी संबंधी खतरों और देश की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर दबाव का हवाला देते हुए जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा से ओलंपिक खेलों को रद्द करने का आग्रह किया है। टोक्यो सहित ओलंपिक की मेजबानी करने वाले जापान के अधिकतर प्रांतों में गुरुवार तक कोरोना संक्रमण के चलते आपातकाल जारी रहा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 May 2021 18:09:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना संकट: निशंक ने राज्यों के शिक्षा सचिवों से शिक्षा पर की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को राज्यों के शिक्षा सचिवों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोरोना जैसी महामारी से निपटने एवं इस महामारी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा की गई पहल और आगे के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की। डॉ निशंक ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/corona-crisis-nishank-discusses-education-with-state-education-secretaries/article-23697"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/education-minister.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को राज्यों के शिक्षा सचिवों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोरोना जैसी महामारी से निपटने एवं इस महामारी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा की गई पहल और आगे के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ निशंक ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि हमने इस महामारी का डट कर सामना किया है और चुनौतियों को अवसरों में बदला है। हमारी संरचित और व्यवस्थित योजना के कारण हम इस अव्यवस्थित समय के दौरान भी अपने छोटे बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में सक्षम रहे हैं। हमारे निरंतर और अथक प्रयासों के कारण, हमने अपने स्कूलों में नामांकित देश के 24 करोड बच्चों को शिक्षा प्रदान की है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल हमारी कड़ी मेहनत और सुनियोजित दृष्टिकोण के कारण ही संभव हुआ है कि हमने घरों को कक्षाओं में बदला और नियमित रूप से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की हैं। इसके साथ हमने एक उदाहरण स्थापित किया है जिसके कारण किसी भी विद्यार्थी के शैक्षणिक वर्ष का कोई नुकसान नहीं हुआ और न ही उसमें कोई अंतराल आया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">छात्रों की पढ़ाई का नुक्सान कम हो</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अन्य पहलों के बारे में भी विस्तृत चर्चा की और बताया कि हमने कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए समग्र शिक्षा के तहत कुल 5784.05 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। इसके अलावा उन्होनें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में भी विस्तार से सबको बताया। कोरोना की दूसरी लहर की वजह से आई समस्याओं के बारे में बात करते हुए डॉ. निशंक ने कहा, ‘चूंकि दूसरी लहर पूरे देश में है और चुनौतियां भी बड़ी हैं इस कारण हमें सहयोग और परामर्श के माध्यम से आगामी चुनौतियों के लिए तत्काल आधार पर योजना बनाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होनें बैठक में उपस्थित सभी शिक्षा सचिवों से आग्रह किया कि वे छात्रों की पढ़ाई के नुकसान को कम करने और छात्रों के लिए पढ़ाई के अवसरों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय निकायों के अपने समकक्ष सचिवों के साथ सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">माता-पिता बच्चों को आगे मार्गदर्शन के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए</h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ निशंक ने कहा, ‘कोविड़-19 की दूसरी लहर ने हमें लंबी अवधि के लिए स्कूलों को बंद करने हेतु मजबूर कर दिया है। हालांकि हम सबने निरंतर प्रयास करके पाठ्यपुस्तकों, असाइनमेंट, डिजिटल एक्सेस आदि के माध्यम से बच्चों की घर पर ही शिक्षा सुनिश्चित की है। इस सफल घरेलू शिक्षण कार्यक्रम की निरंतरता के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को पर्याप्त संसाधन (पाठ्यपुस्तकें, असाइनमेंट, वर्कशीट आदि) उपलब्ध होते रहे। सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ हमें आकांक्षी जिलों और दूरदराज के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां प्राय डिजिटल मोड या शिक्षक सुलभ नहीं हैं इसलिए हमें स्थानीय स्वयंसेवकों और माता-पिता को ई-सामग्री की व्याख्या करने और बच्चों को आगे मार्गदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सभी छात्रों को टैबलेट और नेट कनेक्शन उपलब्ध हो</h4>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा छात्रों को जोड़े रखने को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि डिजिटल शिक्षा सूचना का एकतरफा प्रवाह है, इसलिए हमें प्रत्येक कक्षा के लिए एक आकर्षक डिजिटल सामग्री बनाने की दिशा में काम करना चाहिए ताकि छात्रों का जुड़ाव डिजिटल शिक्षा से बना रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. निशंक ने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे एक ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें इस महामारी के दौरान राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के मध्य स्कूली शिक्षा की उत्तम पद्धतियों का समय-समय पर मिलान/तुलना और प्रसार हो सके। इस तरह के उदाहरण एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और उन्हें जिलों (क्षेत्र) की जरूरतों के अनुसार लागू करने में मददगार साबित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बैठक में राज्यों की तरफ से सुझाव दिया गया कि सभी छात्रों को टैबलेट एवं भारत नेट कनेक्शन उपलब्ध करवाए जाने चाहिए और बोर्ड परीक्षाएं करवाने के लिए राज्यों के साथ निर्णय लिए जाने चाहिए। इसके अलावा बैठक में उपस्थित शिक्षा अधिकारियों ने छात्रों के मानसिक विकास एवं उन्हें मनोवैज्ञानिक सहयोग देने के लिए मनोदर्पण एप के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 17 May 2021 17:12:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना संकट: ट्विटर ने भारत को दिए 15 मिलियन डॉलर</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज़ )। देश में कोरोना का कहर लगातार जारी है, कोरोना का दूसरी लहर तेजी से लोगों को संक्रमित कर रही है। ऐसे में सरकार इसे रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। भारत के कोरोना के कहर को देखते हुए कई देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, इसी क्रम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/corona-crisis-twitter-gives-15-million-to-india/article-23544"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/corona1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज़ )।</strong> देश में कोरोना का कहर लगातार जारी है, कोरोना का दूसरी लहर तेजी से लोगों को संक्रमित कर रही है। ऐसे में सरकार इसे रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। भारत के कोरोना के कहर को देखते हुए कई देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, इसी क्रम में अब ट्वीटर ने भी भारत को 15 मिलियन डॉलर दिए हैं। यह जानकारी ट्विटर के सीईओ जैसे पैट्रिक डोरसी ने ट्वीट कर दी है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">$15 million split between <a href="https://twitter.com/CARE?ref_src=twsrc%5Etfw">@CARE</a>, <a href="https://twitter.com/AIDINDIA?ref_src=twsrc%5Etfw">@AIDINDIA</a>, and <a href="https://twitter.com/sewausa?ref_src=twsrc%5Etfw">@sewausa</a> to help address the COVID-19 crisis in India. All tracked here: <a href="https://t.co/Db2YJiwcqc">https://t.co/Db2YJiwcqc</a> ??</p>
<p>— jack (@jack) <a href="https://twitter.com/jack/status/1391818212648570887?ref_src=twsrc%5Etfw">May 10, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;">तीन नौसैनिक पोत विदेशों से लेकर आए ऑक्सीजन</h4>
<p style="text-align:justify;">कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण देश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत नौसेना के तीन समुद्री पोत कतर और सिंगापुर से क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंक, सिलेंडर और अन्य जरूरी उपकरण लेकर आज स्वदेश पहुंचे। आईएनएस कोलकाता ने न्यू मंगलौर , आईएनएस त्रिकंद ने मुंबई और आईएनएस ऐरावत ने विशाखापत्तनम में लंगर डाला।</p>
<p style="text-align:justify;">तीनों नौसेना के उन नौ जलपोतों में शामिल हैं जो दक्षिण पूर्व एशिया और फारस की खाड़ी से तरल ऑक्सीजन और उससे जुड़े मेडिकल उपकरणों को मित्र देशों से लेकर आ रहे हैं। आईएनएस ऐरावत सिंगापुर से प्राप्त आठ क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंक, 4000 ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरणों को लेकर विशाखापत्तनम पहुंचा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 May 2021 11:43:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना संकट: सशस्त्र बल कर रहे हैं 600 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सशस्त्र बल कोरोना महामारी के खिलाफ देश भर में चलाए जा रहे अभियान के तहत सेवा निवृत हुए चिकित्साकर्मियों को वापस बुला रहे हैं जिससे 600 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नागरिक प्रशासन की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/corona-crisis-armed-forces-are-arranging-600-additional-doctors/article-23335"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/corona-in-haryana-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सशस्त्र बल कोरोना महामारी के खिलाफ देश भर में चलाए जा रहे अभियान के तहत सेवा निवृत हुए चिकित्साकर्मियों को वापस बुला रहे हैं जिससे 600 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नागरिक प्रशासन की मदद करने के लिए रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के प्रयासों की समीक्षा की। रक्षा मंत्री को बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में सेवानिवृत्त हुए लोगों को ड्यूटी पर बुलाने जैसे विशेष उपायों के जरिए लगभग 600 अतिरिक्त डॉक्टरों की व्यवस्था की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">नौसेना ने विभिन्न अस्पतालों में सहायता के लिए 200 बैटल फील्ड नर्सिंग सहायकों को तैनात किया है। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर 300 कैडेटों और कर्मचारियों को तैनात किया है। घर पर रह रहे रोगियों को परामर्श देने के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़े वरिष्ठ कर्मियों द्वारा संचालित एक टेली मेडिसिन सेवा जल्द ही शुरू होगी। सेना ने विभिन्न राज्यों में नागरिकों के लिए 720 से अधिक बिस्तर उपलब्ध कराए हैं। रक्षा मंत्री ने सेना को राज्य और जिला स्तरों पर स्थानीय प्रशासन के साथ संपूर्ण विवरण साझा करने का निर्देश दिया। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने सुझाव दिया कि स्थानीय सैन्य कमान को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सक्रिय रूप से जुटना होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">500 बिस्तरों वाला अस्पताल अगले दो-तीन दिनों में शुरू</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री को यह भी जानकारी दी गई कि डीआरडीओ द्वारा लखनऊ में स्थापित किया जा रहा 500 बिस्तरों वाला अस्पताल अगले दो-तीन दिनों में काम करना शुरू कर देगा। एक और अस्पताल वाराणसी में भी स्थापित किया जा रहा है, जिसे 5 मई तक पूरा किया जाना है। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने बताया कि पीएम केयर फंड के तहत निर्मित होने वाले 380 आॅक्सीजन पीएसए संयंत्रों में से पहले चार को अगले सप्ताह तक दिल्ली के अस्पतालों में लगाया जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">देश में 158 उड़ानें भरकर 2,271 टन क्षमता वाले 109 कंटेनरों की ढुलाई की</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों द्वारा विदेशों से और साथ ही देश के भीतर उपभोग और उत्पादन के स्थानों के बीच ऑक्सीजन कंटेनरों के परिवहन में प्रदान की जा रही सहायता की सराहना की। भरे हुए ऑक्सीजन कंटेनरों को लाने के लिए वायु सेना के परिवहन विमानों ने सिंगापुर, बैंकाक, दुबई और देश के भीतर से कई उड़ानें भरी और नौसेना ने चार जहाजों को – दो को मध्य – पूर्व और दो को दक्षिण – पूर्व एशिया – भेजा।</p>
<p style="text-align:justify;">वायु सेना ने आज 830 टन क्षमता वाले 47 ऑक्सीजन कंटेनरों की ढुलाई करने के लिए विदेशों से 28 उड़ानें भरी। देश में 158 उड़ानें भरकर 2,271 टन क्षमता वाले 109 कंटेनरों की ढुलाई की। नौसेना और वायु सेना ने अपने भंडारों में से विभिन्न नागरिक अस्पतालों को लगभग 500 पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति भी की है। बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर. के. एस. भदौरिया, थलसेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवाने डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी.सतीश रेड्डी और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल रजत दत्ता ने हिस्सा लिया।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 May 2021 09:25:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कोरोना संकट झेलते डॉक्टर एवं चिकित्साकर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजीकृत ऐलोपैथी डॉक्टरों की संख्या 11.59 लाख है, किंतु इनमें से केवल 9.27 लाख डॉक्टर ही नियमित सेवा देते हैं। सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों की जो श्रृंखला गांव तक है, उसमें चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थित की अनिवार्यता के साथ उपकरण व दवाओं की मात्रा भी सुनिश्चित हो। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/corona-crisis-facing-doctors-and-medical-workers/article-14129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/corona-crisis-facing-doctors-and-medical-workers.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>इटली में कोरोना वायरस से प्रभावित रोगियों का लगातार उपचार कर रहे 51 चिकित्सकों की मौत हो गई है। स्पेन में 12,298 चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कोविड-19 जांच पॉजीटिव आई है। भारत में भी मुंबई में एक डॉ. उस्मान की मौत हुई है और दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक और झांसी, इंदौर व भोपाल के चिकित्सक को कोरोना पॉजीटिव की चपेट में आने की खबर है। साफ है, यदि मरकज की तरह देशबंदी का उल्लंघन बड़े पैमाने पर होता है तो हमारे चिकित्साकर्मी खुद कोरोना की चपेट में आते जाएंगे।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">इंदौर की एक मुस्लिम बस्ती में जांच के लिए गए चिकित्सा दल पर लोगों ने पत्थर बरसाए और थूका भी। वहीं मरकज के जिन लोगों को दिल्ली के एक रेल भवन में उपचार के लिए रखा गया है, वहां इन लोगों ने थूकने के साथ नर्सों के साथ अश्लील हरकतें भी कीं। इस सब के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। हालांकि विपरीत परिस्थितियों में इलाज करना मुश्किल होगा, वैसे भी अस्पतालों में विशाणुओं से बचाव के सुरक्षा उपकरण पर्याप्त मात्रा में नहीं होने के बावजूद डॉक्टर जान हथेली पर रखकर इलाज में लगे हैं। यह विशाणु कितना घातक है, यह इस बात से भी पता चलता है कि चीन में फैले कोरोना वायरस की सबसे पहले जानकारी व इसकी भयावहता की चेतावनी देने वाले डॉ ली वेनलियांग की मौत हो गई है। चीन के वुहान केंद्रीय चिकित्सालय के नेत्र विशेषज्ञ वेनलियांग को लगातार काम करते रहने के कारण कोरोना ने चपेट में ले लिया था। वेनलियांग ने मरीजों में सात ऐसे मामले देखे थे, जिनमें सॉर्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण के लक्षण देखे थे और इसे मनुश्य के लिए खतरनाक बताने वाला चेतावनी से भरा एक वीडियो भी सार्वजनिक किया था। भारत में वैसे भी आबादी के अनुपात में चिकित्सकों की कमी हैं। बावजूद वे दिन-रात अपने कत्र्तव्य के पालन में जुटे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">फिलहाल इटली, स्पेन, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ईरान और चीन से कहीं ज्यादा अच्छी स्थिति में भारत केवल देशबंदी की वजह से है। वरना उन सब महाशक्तियों ने कोरोना के समक्ष घुटने टेक दिए हैं, जो चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों पर अभिमान करते थे। इटली, अमेरिका और स्पेन में 1000 तक लोग रोजाना काल के गाल में समा रहे हैं। ब्रिटेन के सरकारी अस्पताल कोरोना पीड़ित मरीजों से भरे पड़े है। अब ब्रिटेन के हालात इतने बद्तर हो गए है कि वहां पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) और वेंटीलेटरों की कमी आ बई है। एन-5 मास्क सहित इन उपकरणों की कमी भारत के अस्पतालों में भी है, लेकिन अब इस कमी से निपटने के लिए उन अकुशल आविश्कारकों को महत्व दिया जा रहा है, जिन्होंने अपनी कल्पना-शक्ति के बूते उत्तम गुणवत्ता के मास्क और पीपीई बनाने में सफलता हासिल कर ली है। तात्कालिक जरूरत की पूर्ति के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने भी अस्थाई स्वीकृति दे दी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल कोरोना वायरस संक्रमण से हमारे चिकित्सक और चिकित्साकर्मी सीधे जूझ रहे हैं। चूंकि ये सीधे रोगियों के संपर्क में आते है, इसलिए इनके लिए विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीवों से सुरक्षा करने वाले बायो सूट पहनने को दिए जाते हैं। इसे ही पीपीई अर्थात व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण कहा जाता है। हालांकि यह एक प्रकार का बरसात में उपयोग में लाए जाने वाले बरसाती जैसा होता है। यह विशेष प्रकार के फैब्रिक कपड़े से बनता है। इसका वाटरप्रूफ होना भी जरूरी होता है। पाली राजस्थान में व्यापारी कमलेश गुगलिया को जब जोधपुर के एम्स में बायोसूट कम होनी की जानकारी मिली तो उन्होंने छाते में उपयोग होने वाले वस्त्र से बायोसूट बना डाला। परीक्षण के बाद कुछ सुधारों की हिदायत देते हुए एम्स के अधीक्षक डॉ विनीत सुरेखा ने इन सूटों को खरीदने की मंजूरी दे दी। इसकी लागत महज 850 रुपए है। जबकि पीपीई बनाने वाली कंपनियां इस सूट को तीन से पांच हजार रुपए में बेचती हैं। इन्हीं कमलेश ने इस अस्पताल में बड़ी मात्रा में मास्क उपलब्ध कराए हैं। साफ है, यदि कमलेश जैसे अकुशल कल्पनाशीलों को चिकित्सा उपकरण बनाने की सुविधा मिल जाए तो हम स्थानीय स्तर पर ही कई उपकरणों का निर्माण कर सकते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इसी तरह अब वेंटीलेटरों की कमी की आपूर्ति ऑटो मोबाइल कंपनियों में इन्हें निर्मित कराकर पूरी की जा रही है। इसी तरह विशाणु विज्ञानी मीनल भोंसले ने कोरोना वायरस की परीक्षण किट बनाने में सफलता हासिल की है। यह किट आठ घंटे की बजाय केवल ढाई घंटे में ही जांच रिपोर्ट दे देगी। इसकी कीमत भी केवल 1200 रुपए होगी, जबकि इस किट को 4500 रुपए में भारत सरकार खरीद रही है। डीआरडीओ ने भी यह किट और वेंटीलेटर बनाने में सफलता हासिल कर लिया। इन उपायों के चलते डॉक्टरों को सुरक्षा और मरीज को जीवनदान तो मिलेगा लेकिन लगातार काम कर रहे चिकित्सा दल यदि जरा भी सावधानी बरतने में चूक जाते हैं तो वायरस उन्हें अपनी गिरफ्त में ले सकता है। हालांकि अब डीआरडीओ ने सभी तरह के सुरक्षा उपकरणों के निर्माण व उनकी आपूर्ति शुरू कर दी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कोरोना के इस भीषण संकट में सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तो दिन-रात रोगियों के उपचार में लगे हैं, लेकिन जिन निजी अस्पतालों और कॉलेजों को हम उपचार के लिए उच्च गुणवत्ता का मानते थे, उनमें से ज्यादातर ने तालाबंदी कर दी है। जिला और संभाग स्तर के अधिकांश निजी अस्पताल बंद हैं। हालांकि एमसीआई द्वारा जारी 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 10.41 लाख ऐलोपैथी डॉक्टर पंजीकृत हैं। शेष या तो निजी अस्पतालों में काम करते हैं या फिर निजी प्रेक्टिस करते हैं। इसके उलट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजीकृत ऐलोपैथी डॉक्टरों की संख्या 11.59 लाख है, किंतु इनमें से केवल 9.27 लाख डॉक्टर ही नियमित सेवा देते हैं। देश में फिलहाल 11082 की आबादी पर एक डॉक्टर का होना जरूरी है। लेकिन घनी आबादी वाले बिहार में 28,391 की जनसंख्या पर एक डॉक्टर है। उत्तर-प्रदेश, झारखंड, मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यदि देश की कुल 1.35 करोड़ आबादी का औसत अनुपात निकालें तब भी 1445 लोगों पर एक ऐलोपैथी डॉक्टर होना आवश्यक है। कोरोना महामारी के चलते स्पष्ट रूप से देखने में आ रहा है कि देश के ज्यादातर निजी चिकित्सालय बंद हैं, साथ ही जो ऐलोपैथी डॉक्टर निजी प्रेक्टिस करते हैं, उन्होंने भी फिलहाल रोगी के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारों को इस कोरोना संकट से सबक लेते हुए ऐसे कानूनी उपाय करने होंगे कि बढ़ते निजी चिकित्सालयों और निजी प्रैक्टिस पर लागम लगे तथा सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों की जो श्रृंखला गांव तक है, उसमें चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थित की अनिवार्यता के साथ उपकरण व दवाओं की मात्रा भी सुनिश्चित हो।</h6>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2020 20:06:12 +0530</pubDate>
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