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                <title>Cattle - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Cattle RSS Feed</description>
                
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                <title>गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं का रखें विशेष ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[टीकाकरण से दुग्ध उत्पादन पर नहीं पड़ता कोई स्थाई असर: डॉ. मनीष ओढां, (राजू)। गर्मी इंसानों के साथ-साथ मवेशियों पर भी पूरा असर डालती है। (Milch Animals) देखने में आता है कि गर्मी के मौसम में पशु की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। अगर तापमान में बढ़ोत्तरी होती है तो पशु के दुग्ध […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/take-special-care-of-milch-animals-in-the-summer-season/article-48356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/milk-product-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">टीकाकरण से दुग्ध उत्पादन पर नहीं पड़ता कोई स्थाई असर: डॉ. मनीष</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, (राजू)।</strong> गर्मी इंसानों के साथ-साथ मवेशियों पर भी पूरा असर डालती है। (Milch Animals) देखने में आता है कि गर्मी के मौसम में पशु की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। अगर तापमान में बढ़ोत्तरी होती है तो पशु के दुग्ध उत्पादन में औसतन 3 से 10 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। वहीं अधिक तापमान के कारण पशु हीट के लक्षण कम दिखाता है व उसकी गर्भधारण करने की क्षमता कम हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में पशुओं (Milch Animals) की किस तरह से देखभाल होनी चाहिए और क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इसके लिए सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां ने पशुपालन विभाग कालांवाली के वेटनरी सर्जन डॉ. मनीष कुमार से बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने टीकाकरण के बाद पशु के दुग्ध उत्पादन पर असर, बार-बार रिपीट होने की समस्या तथा प्रजनन संबंधी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मनीष के अनुसार अक्सर देखने में आता है कि दुधारू पशु (Milch Animals) अधिक गर्मी सहन नहीं कर पाते। जिसके चलते उनकी दुग्ध उत्पादन व प्रजनन क्षमता दोनों प्रभावित हो जाती है। जब तापमान 33 डिग्री से अधिक हो जाता है तो पशुओं के दुग्ध उत्पादन में 3 से 10 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है। इसके अलावा गर्मी में पशुओं की प्रजनन क्षमता और गर्भधारण की दर भी कम हो जाती है। अधिक तापमान के कारण पशु गर्भधारण के लिए हीट के लक्षण कम दिखाता है। जिसके परिणामस्वरूप पशु समय पर गर्भधारण नहीं कर पाता।</p>
<h3>दुग्ध काल के शुरू के दिनों में पशु नकारात्मक ऊर्जा में होता है | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">भैंस में ये समस्या अधिक देखी जाती है। डॉ. मनीष बताते हैं कि ताप नियमन एक प्रमुख जैविक प्रक्रिया है। जिसके द्वारा पशु अपने शरीर का तापमान विभिन्न मौसम में सामान्य बनाए रखते हैं। पशु का शरीर चया-पचयन क्रिया तथा आसपास के वातावरण से ऊष्मा प्राप्त करता है। जब वातावरण का तापमान पशु के शरीर के तापमान से कम होता है तब उसके शरीर से विकिरण ऊष्मा निकलकर वातावरण में मिल जाती है। इसके विपरीत जब वातावरण का तापमान पशु के शरीर के तापमान से अधिक होता है तब पशु विकिरण द्वारा वातावरण में अपने शरीर की ऊष्मा नहीं निकाल पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पशु शरीर द्वारा उत्पन्न ऊष्मा को कम करने की कोशिश करता है। जिससे पशु चारा खाना कम कर देता है और उसकी चयापचयन क्रिया कम हो जाती है। फलस्वरूप पशु की दुग्ध क्षमता घट जाती है। यदि उसके बाद भी पशु अपने शरीर के तापमान को बढ़ने से नहीं रोक पाता तो वह तापमान के दबाव (हीट स्ट्रेस) में आ जाता है। दुग्ध काल के शुरू के दिनों में पशु नकारात्मक ऊर्जा में होता है। तब ये दबाव और अधिक होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये है हीट स्ट्रेस के लक्षण :- | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर पशु कई दिनों तक हीट स्ट्रेस से ग्रस्त रहता है तो उसकी मृत्यु भी हो सकती है। हीट स्ट्रेस में आने यानी तापमान बढ़ने पर पशु में उपरोक्त लक्षण दिखाई देते हैं।<br />
पशु में बेचैनी रहने के साथ-साथ मुंह खोलकर सांस लेने लग जाता है।<br />
उसकी सक्रियता कम हो जाती है।<br />
दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है।<br />
पशु पानी की तरफ जाने लगता है।<br />
शरीर का तापमान बढ़ जाता है।<br />
पशु अपना आहार कम कर देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये हैं बचाव के तरीके :-</h3>
<p style="text-align:justify;">पशु को सूर्य की सीधी किरणों से बचाएं।<br />
छायादार वृक्षों के नीचे रखें।<br />
दिन में 3 से 4 बार नहलाएं।<br />
स्वच्छ पानी नियमित उपलब्ध रहे।<br />
पशु को आहार सुबह-शाम को ही डालें।<br />
जिस जगह पशु रखें वहां हो सके तो फव्वारा सिस्टम लगाएं ताकि पशु के आसपास का तापमान ठंडा रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पशु को उपयुक्त खनिज तत्व दें | Milch Animals</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. मनीष बताते हैं कि विभाग द्वारा पशुओं को मुंहखुर व गलघोटू से बचाने के लिए एक वर्ष में 2 बार संयुक्त टीकाकरण किया जाता है। अक्सर देखा जाता है कि पशुपालक दुधारू पशुओं को दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ने के चलते टीकाकरण से दूर रखते हैं। डॉ. मनीष ने बताया कि टीकाकरण से पशु के दुग्ध उत्पादन पर कोई स्थाई असर नहीं पड़ता। टीकाकरण के उपरांत 2 से 3 दिन तक थोड़ा-बहुत असर पड़ता है वो भी गर्मी के दिनों में। पशु के खानपान पर उचित ध्यान देने तथा कैल्सियम व गुड़ खिलाने से दुग्ध उत्पादन सामान्य हो जाता है। डॉ. मनीष ने पशुपालकों से आह्वान किया कि अपने पशुओं का टीकाकरण जरूर करवाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बार-बार रिपीट होना (फुरना) कोई स्थाई समस्या नहीं :-</h3>
<p style="text-align:justify;">देखा जाता है कि पशु में बार-बार रिपीट होने (फुरना) की समस्या आ जाती है। ऐसे में कई बार पशुपालक पशु को छोड़ देते हैं। लेकिन ये समस्या कोई स्थाई समस्या नहीं है। डॉ. मनीष के मुताबिक ये समस्या कई बार पशु का समय पर गर्भाधान न होने, खनिज तत्वों की कमी आने, बच्चेदानी के अंदर संक्रमण या हार्माेन का असंतुलन होने के कारण हो सकती है। पशु का इलाज करवाने से ये समस्या दूर हो जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जैर गिरने का इंतजार करें :-</h3>
<p style="text-align:justify;">कई बार पशु बयाने के तुरंत बाद जैर नहीं गिराता। इसके लिए करीब 24 घंटे का इंतजार जरूर करें। इसके अलावा 7-8 घंटे उपरांत जैर गिराने की दवा भी दी जा सकती है। डॉ. मनीष के मुताबिक हाथ से जैर निकलवाना अंतिम विकल्प होना चाहिए। क्योंकि हाथ से जैर निकालने से पशु की बच्चेदानी में संक्रमण हो जाता है। बाद में पशु नया गर्भधारण करने में लंबा समय ले लेता है। गर्भाधान के अंतिम चरण में अगर पशु का गर्भपात होता है तो पशुपालक को बड़ी ही सावधानी से मृत बच्चे एवं जैर को गड्ढा खोदकर दफना देना चाहिए। क्योंकि इससे पशुओं से मनुष्य में ब्रुसेलोसिस नामक बीमारी आने की संभावना उत्पन्न हो जाती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 15:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौवंश से भरा ट्रक सहित दो गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रक में लादी गई 7 गायों सहित 18 गौवंशों को गौशाला में भिजवाया रास्ते की रेकी कर रही पायलट गाड़ी हुई फरार अबोहर। (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा) गौवंश तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाही (Abohar News) करते हुए गौ प्रेमियों व बजरंग दल हिंदोस्तान की टीम ने फाजिल्का रोड़ गांव बुर्जमुहार के पास गौवंश से भरे एक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/two-arrested-along-with-a-truck-full-of-cattle/article-47120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/abohar-news-2-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ट्रक में लादी गई 7 गायों सहित 18 गौवंशों को गौशाला में भिजवाया</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>रास्ते की रेकी कर रही पायलट गाड़ी हुई फरार</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर। (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा)</strong> गौवंश तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाही (Abohar News) करते हुए गौ प्रेमियों व बजरंग दल हिंदोस्तान की टीम ने फाजिल्का रोड़ गांव बुर्जमुहार के पास गौवंश से भरे एक ट्रक को रोककर दो लोगों को हिरासत में लिया है। जबकि 18 गौवंशों को गांव सप्पांवाली की गौशाला में भिजवा दिया गया। थाना नं. 1 की पुलिस ने कार्रवाही शुरु कर दी। इस बारे में जानकारी देते हुए बजरंग दल हिंदोस्तान के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली कि बठिंडा के नजदीक गांव जंडवाला से एक ट्रक में लाद कर कुछ गौवंशों को ले जाया जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मोगा में गुरुद्वारा साहब कमेटी के पूर्व सचिव ने खुद को गोली से उड़ाया" href="http://10.0.0.122:1245/ex-secretary-of-gurdwara-sahib-committee-shoots-himself-in-moga/">मोगा में गुरुद्वारा साहब कमेटी के पूर्व सचिव ने खुद को गोली से उड़ाया</a></p>
<p style="text-align:justify;">जिस पर गौ-प्रेमियों ने उक्त ट्रक का पीछा किया और अबोहर के फाजिल्का रोड पर गांव बुर्जमुहार के पास जब उक्त ट्रक को रुकवाना चाहा तो ट्रक चालक ने ट्रक सहित वहां से भागने का प्रयास किया। जिस पर गौ-प्रेमियों ने शोर मचाया और मौके पर पहुंचे लोगों ने ट्रक को घेर कर उस पर पत्थर बाजी शुरु कर दी। वहीं सूचना मिलते ही थाना नं. 1 की पुलिस ने मौके पर पहुंच कर ट्रक चालक और परिचालक को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि ट्रक में लादी गई 7 गायों सहित 18 गौवंशों को सुरक्षित तरीके से ट्रक से उतार कर गांव सप्पांवाली की गौशाला में भिजवा दिया गया। (Abohar News) बलरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस ट्रक के आगे एक पायलट गाड़ी में सवार कुछ लोग रास्ते की रेकी करते हुए आगे-आगे चल रहे थे जो फरार हो गए। पता चला है कि ट्रक में लदी गायों को पंजाब से हरियाणा के रास्ते जम्मू-कश्मीर ले जाया जा रहा था।<b></b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/two-arrested-along-with-a-truck-full-of-cattle/article-47120</link>
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                <pubDate>Wed, 03 May 2023 19:41:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैटल फ्री शहर में पशुओं की भरमार, हादसों का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[रात्रि के समय सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं से हो सकता है हादसा नप ने नहीं शुरू किया पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान सरसा (सुनील वर्मा)। नगर परिषद ने कैटल फ्री शहर (Cattle free city ) में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान अभी शुरू नहीं किया है, जबकि सर्दी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cattle-free-city/article-39823"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/destitute-animals-causing-road-accidents.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>रात्रि के समय सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं से हो सकता है हादसा</strong></li>
<li><strong>नप ने नहीं शुरू किया पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान</strong></li>
</ul>
<p><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> नगर परिषद ने कैटल फ्री शहर <strong>(Cattle free city )</strong> में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान अभी शुरू नहीं किया है, जबकि सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। शहर में जगह जगह सड़कों पर रात्रि के समय बेसहारा पशु घूमते रहते हैं जिनके कारण कभी भी हादसा हो सकता है। शहर की सड़कों व बाजारों में करीब 1500 पशुओं की संख्या है। नगर परिषद द्वारा बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए पहले कई बार अभियान भी चलाया गया है। इसके बाद भी पशुओं की भरमार है। नगर परिषद द्वारा बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए ठेका दिया हुआ है।</p>
<h3><strong>– सड़कों पर नजर आते हैं दुधारू पशु | Cattle free city<br />
</strong></h3>
<p>शहर की सड़कों पर कई लोगों ने दुधारू पशुओं को भी छोड़ा हुआ है। सुबह शाम दूध दोहने के बाद इनको सड़कों पर छोड़ देते है। खास बात ये भी है कि इन दुधारू पशुओं का बीमा भी करवाया हुआ है। नगर परिषद द्वारा इन दुधारू पशुओं को सड़कों पर न छोडऩे की चेतावनी भी दी है। इसके बाद भी लोग बाज नहीं आ रहे हैं।</p>
<h3><strong>– रात्रि के समय होते रहते हैं हादसे</strong></h3>
<p>शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं के कारण हादसे भी होते रहते हैं। सड़कों पर रात्रि के समय बेसहारा पशु दिखाई नहीं देते हैं। क्योंकि कई जगह पर स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। वहीं पशुओं के रेडियम की बेल्ट भी गले में डाली हुई नहीं होती है। जिससे रात्रि के समय अंधेर में दिखाई नहीं देते हैं।</p>
<h3><strong>– इन जगह पर सबसे ज्यादा पशु</strong></h3>
<ul>
<li><strong> शहर में बेगू रोड पर जगदंबे पेपर मील के पास</strong></li>
<li><strong> बेगू रोड पर राजकीय गल्र्ज स्कूल के समीप</strong></li>
<li><strong> अनाज मंडी में राजकीय स्कूल के समीप</strong></li>
<li><strong> डबवाली रोड पर कई जगह</strong></li>
<li><strong> रानियां रोड पर सब्जी मंडी व अन्य जगह पर</strong></li>
<li><strong> गोशाला मोहल्ला में अनेक जगह पर</strong></li>
</ul>
<p>————————————————<br />
<em><strong>शहर में बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए समय समय पर पहले अभियान चलाए जाते रहे हैं। बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए ठेके पर दिया हुआ है। जल्द पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी बातचीत हो चुकी है। इस पर जल्द ही कार्य किया जाएगा। इसके बाद शहर में कहीं भी बेसहारा पशु नजर नहीं आएगा।</strong></em><br />
<em><strong>– पवन कुमार, उप सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, सरसा।</strong> </em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cattle-free-city/article-39823</link>
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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 20:18:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चिंताजनक : कोरोना के चलते आमजन के साथ-साथ जीव-जंतुओं की बढ़ी मुश्किलें</title>
                                    <description><![CDATA[संकट में हरियाणा के गोवंश, चारे को तरसे प्रदेश भर में बनी समस्या, सरकार भी बेबस चंडीगढ़(अश्वनी चावला/सच कहूँ)। कोरोना को लेकर लॉकडाउन के चलते अब हरियाणा में गोवंश संकट में आ गया है। सरकार व समाज सेवी संस्थाओं की मदद से इस मुश्किल घड़ी में इंसानों की भूख तो शांत हो रही है। लेकिन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/cattle-in-crisis-fodder-craves/article-14227"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/destitute-animals-causing-road-accidents.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">संकट में हरियाणा के गोवंश, चारे को तरसे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रदेश भर में बनी समस्या, सरकार भी बेबस</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अश्वनी चावला/सच कहूँ)।</strong> कोरोना को लेकर लॉकडाउन के चलते अब हरियाणा में गोवंश संकट में आ गया है। सरकार व समाज सेवी संस्थाओं की मदद से इस मुश्किल घड़ी में इंसानों की भूख तो शांत हो रही है। लेकिन पशुओं के लिए हरे चारा का प्रबंधन न होने के चलते गोवंश सहित पशुओं पर भूखमरी का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में सबसे ज्यादा संकट उन गौशाला के लिए पैदा हो रहा है, जिनके पास बड़ी संख्या में पशु हैं और पिछले कई सालों से इनकी सेवा कर रहे हैं। ऐसे समय में हरा चारा नहीं मिलने के चलते उनके पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है, जिसके सहारे वह प्रदेश से बाहर से चारा मंगवा सकते। इसी कारण प्रदेश में गोवंश के लिए यह खतरे की घंटी मानी जा रही है।</p>
<h3>लॉकडाउन के चलते नहीं मिल रहा हरा चारा</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं बताया जा रहा है कि प्रदेश की कुछ गौशाला में दो-तीन दिन का ही स्टॉक बचा हुआ है, ऐसे में कहीं से सप्लाई नहीं आने के चलते पशुओं के लिए हरा चारा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। जिस कारण उनकी तरफ से सरकार को भी गुहार लगानी शुरू कर दी गई है। परंतु इस समय प्रदेश सरकार भी असहाय नजर आ रही है, क्योंकि साधनों की कमी होने के चलते गौशाला में हरा चारा पहुंचाने में दिक्कत का सामना सरकार को करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से हरे चारे की स्टॉक में आ रही लगातार गिरावट को देखते हुए सभी जिलों की गौशालाओं के प्रबंधकों की तरफ से हर संभव कोशिश करते हुए इस संकट को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। परंतु गौशाला प्रबंधकों के यह प्रयास लॉकडाउन में कामयाब होते नजर नहीं आ रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रदेश में 400 के करीब गौशाला रजिस्ट्रर्ड</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में सरकार के पास लगभग 400 के करीब गौशाला रजिस्टर्ड हैं, जहां पर गोवंश की रक्षा करने के लिए काम किए जा रहे हैं। हालांकि समय-समय पर प्रदेश सरकार की तरफ से इन गौशालाओं को मदद की जाती रही है, परंतु इस समय चारा कहीं से नहीं मिलने के चलते इन 400 गौशाला में से ज्यादातर संकट के दौर से गुजर रहे हैं। इन रजिस्टर्ड गौशालाओं के प्रबंधक की तरफ से अपने नजदीक हरा चारा का इंतजाम करने की कोशिश की जा रही है, परंतु ज्यादातर रजिस्टर्ड गौशालाओं को चारा नहीं मिल पा रहा हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दानी सज्जन भी बना रहे हैं दूरी</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में गोवंश की रक्षा करने के लिए बड़े स्तर पर दानी सज्जनों का भी हाथ रहा है और ज्यादातर बड़े शहरों में दानी सज्जन दान देने के साथ-साथ रोजाना पशुओं को चारा खरीद कर डालने के लिए आते हैं, परंतु प्रदेश में करुणा के संकट के चलते दानी सज्जन भी अब दूरी बनाते नजर आ रहे हैं, जिस कारण गौशालाओं को आर्थिक मार भी पड़ रही है। इस समय में कारोबार बंद होने के चलते यह तक कारोबारी दान नहीं दे रहे हैं और हरा चारा डालने वाले भी आना बंद हो गया, इसी कारण लगभग सभी गौशालाओं की आर्थिक स्थिति भी डगमगा गई है।</p>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2020 11:07:10 +0530</pubDate>
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