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                <title>Online education - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ऑनलाइन शिक्षा: छात्रों के भविष्य को लेकर असमंजस</title>
                                    <description><![CDATA[जाखल (सच कहूँ/तरसेम सिंह)। भले ही हरियाणा में कोरोना का प्रकोप पहले से कम है, फिर भी हरियाणा शिक्षा विद्यालय बोर्ड ने सभी स्कूलों की गर्मी की छुट्टयिां फिलहाल 30 जून 15 जुलाई तक बढ़ाई हुई हैं। लेकिन अभी जुलाई में स्कूल खोलने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। क्योंकि अगस्त से अक्तूबर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/online-education-confusion-over-the-future-of-students/article-24970"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/online-education-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जाखल (सच कहूँ/तरसेम सिंह)।</strong> भले ही हरियाणा में कोरोना का प्रकोप पहले से कम है, फिर भी हरियाणा शिक्षा विद्यालय बोर्ड ने सभी स्कूलों की गर्मी की छुट्टयिां फिलहाल 30 जून 15 जुलाई तक बढ़ाई हुई हैं। लेकिन अभी जुलाई में स्कूल खोलने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। क्योंकि अगस्त से अक्तूबर के बीच कोरोना की थर्ड वेव का खतरा मंडरा रहा है तो दूसरी ओर 25 मार्च 2020 से बंद चल रहे स्कूलों के कारण बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। हालांकि सरकार द्वारा वर्चुअल आॅनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है और साथ में अभिभावकों से फीडबैक भी ली जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में भी अन्य राज्यों की तरह ही कोविड 19 महामारी के चलते लगभग डेढ़ साल से स्कूल बंद हैं। और आॅफ लाइन शिक्षण कार्य तकरीबन ठप है। 2021 साल की शुरूआत में फरवरी में कुछ दिन बड़े बच्चों के लिए स्कूलों को खोला गया था, लेकिन सेकेंड वेव की आहट के साथ ही फिर से बंद कर दिया गया। अभी हरियाणा सरकार अपना फैसला नहीं ले पाई कि यहां 15 जुलाई से ऑनलाइन क्लासेज ही चलेंगी या स्कूलों को खोला जाएगा। लेकिन जिस तरह कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बात हो रही है कि इसमें बच्चे ज्यादा शिकार होंगे। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां भी शायद 15 जुलाई से स्कूल नहीं खोले जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">वर्चुअल क्लास के जरिए बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल: सतपाल</h4>
<p style="text-align:justify;">जाखल के गांव शक्करपुरा के नरेंद्र मेमोरियल सेकेंडरी कन्या स्कूल के चेयरमैन सतपाल इन्सां ने कहा वर्चुअल क्लास के जरिए समझाना बहुत मुश्किल है। खासकर उन घरों के बच्चों को जिनके अभिभावक कम पढ़े लिखे हैं, उनके लिए ऑनलाइन शिक्षा बेकार साबित हो रही है। बच्चे पढ़ाई के बजाय मोबाइल फोन पर गेम खेलते रहते हैं और धीरे-धीरे वे इसके आदी होते जा रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावक भी नहीं समझ पा रहे हैं कि कैसे इन बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। इन बच्चों के भविष्य को लेकर कुछ सकारात्मक फैसलों की जरूरत है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऑनलाइन लर्निंग सही या गलत?</h4>
<p style="text-align:justify;">कोरोना के चक्कर में ब्लैक बोर्ड की जगह लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन ने ले ली है। बच्चों के साथ-साथ पेरेंट्स के लिए भी ये ऑनलाइन लर्निंग नई है। पिछले कुछ महीनों से पढ़ाई का यही पैटर्न चल रहा है। फिलहाल तो किसी को ये भी नहीं पता कि स्कूल कब खुलेंगे और बच्चे कब पहले की तरह नॉर्मल तरीके से अपनी पढ़ाई कर पाएंगे। ऐसे में ऑनलाइन क्लासेस ही बच्चों के भविष्य का आधार बना हुआ है। वर्चुअल एजुकेशन से काफी कुछ बदल गया है। क्लास रूम में पहले जहां एक-एक बच्चे को पर्सनली टेस्ट किया जाता था, वहीं आॅनलाइन लर्निंग में ये सब बदल गया है। बच्चे के शुरूआती सालों में लर्निंग बहुत जरूरी होती है और पेरेंट्स को यह समझना चाहिए कि बच्चे ऑनलाइन कितना सीख रहे हैं या कुछ उनकी समझ में आ भी रहा है या नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;">देश में बीते मार्च में शुरू हुआ लॉकडाउन का दौर तो थम चुका है, लेकिन कोरोना महामारी का खतरा अभी भी बरकरार है। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जो इससे अछूता हो। ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद बहुत से बच्चों की शिक्षा चरमरा गई है। कुछ ही बच्चे हैं, जो वर्चुअल क्लास का लाभ उठा पा रहे हैं। माना जा रहा है कि कोरोना का कभी भी पूर्ण अंत नहीं होगा। इसी के साथ जीना होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा व्यवस्था को कैसे पटरी पर लाया जाएगा?</span><br />
<strong>-हरी चंद गर्ग, अभिभावक।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;">आखिर कब तक स्कूल से दूर रहना पड़ेगा? वर्चुअल क्लास के सहारे कब तक पढ़ाई जारी रहेगी? इस व्यवस्था से अब बोरियत होने लगी है। इसमें पढ़ाई के दौरान कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खेलों से दूरी बन गई है। लगातार घर में कैद रहने की वजह से शारीरिक और मानसिक परेशानियों से भी दो चार होना पड़ रहा है। पूर्ण सावधानियों के साथ हम लोगों के लिए नियमित कक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए। कब तक भय के बीच जीना होगा?</span><br />
<strong>-हरमन दीप, छात्र सरकारी स्कूल चांदपुरा।</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jul 2021 11:28:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>महामारी को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा प्रबंध बढ़ाने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान 21 सितंबर से स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है लेकिन कई राज्य सरकारों को यह निर्णय गले नहीं उतर रहा। उन्हें दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल, पंजाब और यूपी सहित कई राज्यों ने स्कूल खोलने से इनकार कर दिया है। सुखद बात यह है कि फिलहाल इस मामले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/in-view-of-the-epidemic-online-education-will-have-to-be-increased/article-18599"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/shiksha-mitra-will-accelerate-online-education-2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान 21 सितंबर से स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है लेकिन कई राज्य सरकारों को यह निर्णय गले नहीं उतर रहा। उन्हें दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल, पंजाब और यूपी सहित कई राज्यों ने स्कूल खोलने से इनकार कर दिया है। सुखद बात यह है कि फिलहाल इस मामले को राजनीति रंग नहीं दिया गया। प्रत्येक राज्य की अलग-अलग समस्याएं व परिस्थितियां हैं, इसीलिए ऐसे निर्णय राज्यों पर छोड़ देने चाहिए। पाबंदी लगाना या हटाना, ऐसे में किसी भी हित को साधने का प्रयास नहीं करना चाहिए विशेष रूप से बच्चों के मामले में यह बड़ा संवेदनशील मुद्दा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चे मासूम और भोले होते हैं, वे अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख सकते। दूसरे राज्यों को इस मामले में पूरे विवेक से काम लेकर सही फैसला लेना चाहिए। हालांकि जिस प्रकार कोरोना मरीजों की गिनती बढ़ रही है, उसके अनुसार हालात चुनौतीपूर्ण भी हैं। भले ही स्वस्थ होने वाले मरीजों की गिनती बढ़ रही है, फिर भी महामारी के प्रकोप को अनदेखा नहीं किया जा सकता। देश में मरीजों की गिनती 53 लाख को पार कर चुकी है और तकरीबन एक लाख नए मरीज रोजाना संक्रमित हो रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकारों को आक्सीजन की उपलब्धता के साथ-साथ मेडिकल प्रबंधों में विस्तार करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अच्छी बात यह है कि भारत में रिकवरी रेट विश्व भर में सबसे ज्यादा है फिर भी नए मरीजों की गिनती बढ़ना चिंताजनक है। स्कूलों के मामले में बहुत प्रबंधकीय कौशल से काम करने की आवश्यकता है। निजी स्कूलों ने आॅनलाइन स्ट्डी के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को ज्यादा प्रभावित होने से बचाया भी है। सरकारी स्तर पर भी कुछ हद तक आनलाइन पढ़ाई के प्रयास जारी हैं। महामारी को देखते हुए लग रहा है कि आॅनलाइन पढ़ाई की दिशा में और कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। कोई भी फैसला जल्दबाजी में लेने की अपेक्षा उस पर गहराई से विचार होना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2020 09:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बच्चों का खेल नहीं है ऑनलाइन शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन यानी डिजीटल शिक्षा का हश्र सिर मुढ़ाते ही, ओले पड़ने की शक्ल में दिखाई देने लगा है। लॉकडाउन के बीच शुरू हुआ ऑनलाइन पढ़ाई का चलन स्कूली बच्चों पर भारी पड़ने लगा है। नतीजतन उन्हें कई-कई घंटे कंप्युटरए लैपटॉप और मोबाइल पर आंखें गढ़ानी और दिमाग पर जोर डालना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/online-education-is-not-childs-play/article-16835"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/online-education-is-not-childs-play.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>ऑनलाइन यानी डिजीटल शिक्षा का हश्र सिर मुढ़ाते ही, ओले पड़ने की शक्ल में दिखाई देने लगा है। लॉकडाउन के बीच शुरू हुआ ऑनलाइन पढ़ाई का चलन स्कूली बच्चों पर भारी पड़ने लगा है। नतीजतन उन्हें कई-कई घंटे कंप्युटरए लैपटॉप और मोबाइल पर आंखें गढ़ानी और दिमाग पर जोर डालना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थी अनावश्यक रूप से एकांगी और चिंतित दिखाई देने लगे हैं।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">अपने बच्चों में अचानक आए इन लक्षणों की शिकायत अनेक अभिभावकों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केंद्रीय विद्यालय संगठन को की हैं। अब बच्चों को इस मानसिक तनाव से उबारने के लिए मंत्रालय ने श्मानक क्रियाशील प्रक्रिया; स्टेंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसीजर अपनाने का निर्ण लिया है। संक्षिप्त में ‘एसओपी’ नाम से जानेए जाने वाले इस मंत्र का इस्तेमाल कंपनियों में विफलता को कम करते हुए दक्षता गुणवत्ताए प्रदर्शन और उत्पादन में वृद्धि व एकरूपता लाने के लिए किया जाता है। अब पहली बात तो यह कि बच्चों का मस्तिष्क कोई कारखाने की भट्टी नहीं है कि आप संख्या में वस्तु का उत्पादन बढ़ाने का काम कर रहे हों। विवेकानंद ने शिक्षा को जीवन के विकास का मंत्र बताते हुए कहा थाए श्मात्र सूचना प्राप्त करनाए पुस्तकों से सीखना या इच्छाओं पर बलपूर्वक रोक लगाकर यांत्रिक बना देना शिक्षा नहीं है। शिक्षा वह हैए जो मनुष्य को साहस और चरित्रवान बनाती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">देश में शिक्षा और शिक्षा पद्धति को लेकर एक विचित्र विरोधाभास और दुविधा की स्थिति बनी हुई है। एक आदर्श और गुणकारी शिक्षा व्यवस्था में कौन से तत्व शामिल होने चाहिएए इस संदर्भ में पिछले 72.73 साल में कोई एक निश्चित धारणा नहीं बन पाई है। फलत: इस अनिश्चितता का दंड हर नई पीढ़ी भोगती है। ऑनलाइन शिक्षा वर्तमान पीढ़ी को दंड के रूप में मानसिक प्रताड़ना झेलने का सबब बन रही है। मंत्रालय को अभिभावकों की जो थोक में शिकायतें मिली हैंए उनमें कहा है बच्चों को विद्यालयों की ओर से घंटों ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। होमवर्क भी उसी अनुपात में दिया जा रहा है। परिणामस्वरूप बच्चे दिन-दिन भर कंप्युटरए लैपटॉप और मोबाइल से चिपके रहते हैं। इस अनावश्यक व्यस्तता के चलते उनका व्यवहार बदल रहा है। उनमें चिढ़चिढ़ापन बढ़ रहा है। वे हठी और गुस्सैल भी हो रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मानसिक बोझिलता  से जुड़ा यह एकांगीपन निकट भविष्य में उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वे मानसिक अवसाद में आकर उल्टा-सीधा या कोई भयानक कदम भी उठा सकते हैं। कई बच्चे अश्लील कहानी पढ़ते सुनते या देखते भी अभिभावकों ने पकड़े हैं। अभी बहुत दिन नहीं हुएए जब दिल्ली में 27 मित्र छात्र-छात्राएं इंस्ट्राग्राम पर एक समूह बनाकर पोर्न फिल्में देखते हुए अपनी सहपाठी छात्राओं से दुष्कर्म की शड्यंत्रकारी योजना बनाते हुए पकड़े गए थे। शायद ऐसे ही मामलों की निगाह में उच्च न्यायालय दिल्ली के न्यायाधीश डीएन पटेल और हरिशंकर ने कहा है कि ऑनलाइन शिक्षा कोई बच्चों का खेल नहीं है।श् यह दलील लॉकडाउन के दौरान एक जनहित याचिका की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से सुनवाई करते हुए दी गई।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हालांकि कंपनियों ने इस दिशा में पहल पहले से ही कर दी है। नतीजतन कई ऑनलाइन प्रारूपों में ई-लर्निंग सामग्री बाजार में उपलब्ध है। वह भारत ही हैए जिसमें सबसे विशाल के-12 शिक्षा पद्धति एक दशक पहले विकसित हो चुकी है। इसे किंगरगार्डन और 12 वर्षीय बेसिक शिक्षा के नाम से जाना जाता है। के-12 शिक्षा स्वयंप्रभा के 32 चैनलों में से 12 चैनलों के जरिए स्कूलों में दी जाएगी। पीएम-ई-विद्या के तहत वन क्लास-वन चैनल योजना है। इसमें पहली कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के लिए अलग-अलग चैनल होंगे। रेडियो पर भी कक्षाएं चलाने की तैयारी की जा रही है जिससे दूर-दराज के अंतिम छोर पर रह रहे छात्रों को शिक्षा मिल सके।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यह सामग्री सीडी एप और सीबीएसई पाठ्यक्रम की वेबसाइटों पर उपलब्ध रहेगी। लेकिन अभी इसका प्रयोग सीमित है। दरअसल ऑफलाइन शिक्षा पद्धति में विद्यार्थी की बुद्धि की परख का परीक्षा एक तरीका हैए वहीं इस के-12 शिक्षा प्रणाली में भी है। महज पुस्तकों के पाठ्यक्रमों को डिजीटल प्रारूप में बदल दिया है। इसलिए यह प्रणाली भी विद्यार्थी के मनोविज्ञान व मनस्थिति को समझने में सक्षम नहीं है। दरअसलए प्रत्येक विद्यार्थी की बौद्धिक क्षमता और रुचियां भिन्न-भिन्न होती हैंए इसलिए पढ़ाई का एक पाठयक्रम और एक जैसा तरीका हरेक छात्र के बौद्धिक विकास का आधार नहीं हो सकता ।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल भारत में ही नहीं दुनिया में छात्र को पूर्व से सुनिश्चित कर दिए गए अध्ययन-अध्यापन तक ही संयमित रखा जाता है। आज का शिक्षक हो या फिर प्राध्यापकए वह भी विविधतापूर्ण अध्यनशीलता से दूर है। इसलिए शिक्षक और छात्र निर्धारित शिक्षा से आगे की बात सोच ही नहीं पाते। कमोवेश यही मानसिकता अभिभावकों की है। वे भी अपनी संतान को चिकित्साए अभियंता सरकारी अधिकारी या बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकर बना देने का लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं। जबकि किसानए सैनिक लेखक-पत्रकार और आदर्श मूल्यों के प्रवचनकर्ता भी देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए आवश्यक होते हैं। आधी-सदी बीतने के बाद यह वास्तविकता एक बार फिर से मुखर होकर स्थापित हुई है कि कोरोना संकट काल में अर्थव्यस्था को आधार केवल खेती-किसानी के बूते मिला है। जबकि बीते पचास सालों में सबसे ज्यादा तिरस्कार व अवमूल्यन इसी व्यवसाय का हुआ है। आज अपने बालक को अन्नदाता बनाने के बात शिक्षक और अभिभावक में से कोई नहीं करता।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन द्वार खोलने की बड़ी तैयारी है। लेकिन शिक्षा की स्थापित कर दी गईं विषमताएं और संकीर्णताएं तोड़ने का कोई उपाय नहीं है। क्या गुरू से दूर एक कोने में मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठे शिष्य के मन-मस्तिष्क में क्या है। यह जब ठीक से आज का शिक्षक नहीं समझ पर रहाए तो तकनीक कैसे समझेगी। क्योंकि तकनीकी शिक्षा में न तो मौलिकता है और न ही पहले से ही लोड कर दी शिक्षा से आगे जाने की क्षमता। गोया, कृत्रिम तरीके से दी गई शिक्षा नैसर्गिक या जिज्ञासु प्रतिभा का स्थान ले पाएगी या फिर नैसार्गिक शिक्षा को कुंठित करने का काम करेगी दरअसल किसी उपकरण ने भर दिए गए ज्ञान की एक सीमा होती है और वह तय कर दिए गए प्रोग्रामिंग के अनुसार चलती है। उसमें कोई लचीलापन नहीं होता। जबकि विद्यार्थी की बुद्धि के विकास का क्रमए कोई एक सीधी रेखा में नहीं चलता। ज्ञान नदी की धारा की तरह प्रवाहमान है। उसमें नए-नए रूप लेते और जीवन-मूल्यों को देखते हुए वैचारिक बदलाव आता है। सोच विसकीत होती है। यह बदलाव प्रतिभा के नैसर्गिक विकास का मूल-आधार है। दरअसल किसी उपकरण में सोच या विचार पनपाने की उर्वरा शक्ति नहीं होती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उपरोक्त कथन के सत्यापन के लिए दुनिया के अत्यंत सफल और आविष्कारक व्यक्ति बिल गेट्स की जीवनी पर दृष्टि डालते हैं। हम सब जानते हैं कि आज बिल दुनिया अमीरतम लोगों में से एक हैं। बिल ने उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में प्रवेश तो लिया था लेकिन शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे। वे कॉलेज से आकर अपने घर के गैरेज में घुस जाते थे और कोरे कागजों पर आड़ी-तिरछी लकीरें खींचकर किसी दार्शनिक के लहजे में धीर-गंभीर वैचारिक तल्लीनता में लग जाते थे। उनकी परेशान मां कभी स्कूल के कपड़े बदलने को आवाज लगातीं, तो कभी भोजन के लिए पुकारतीं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">लेकिन धुनी बिल अपनी ही धुन में रमा रहता। अंत में गैरेज की दहलीज पर आकर डपटते हुए मां पूछतीं, आखिर तूं कर क्या रहा है-बिल कहता, सोच रहा हूं मां! वात्सल्यमयी मां सहम गईं। अनुभव किया, बेटा अवसाद में आ रहा है, कहीं पगला न जा, सो मनोचिकित्सक को दिखाया। लेकिन बेटा अस्वस्थ होता, तब न कोई बीमारी निकलती बहरहाल मां हार गईं और बेटा आड़ी-तिरछी लकीरें खींचने में लगा रहा। इस गैरेज में कंप्युटर नहीं, लेकिन जिज्ञासा थी, सोच थी। आखिरकार, बिल की सोच ने आकार लिया और कंप्युटर की वृद्धि अर्थात सॉफ्टवेयर का आविष्कार कर डाला। मसलन वास्तविक बुद्धि ने कृत्रिम बुद्धि की सजीव रचना कर दी। लेकिन हम हैं कि ऑनलाइन शिक्षा के बहाने नैसर्गिक बृद्धि पर अंकुश लगाने के उपाय तलाश रहे हैं, डिजीटल शिक्षा से जुड़ा यह एक बड़ा प्रश्न है, जो विचारनीय है।</h6>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2020 21:20:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Online education : छोटी उम्र में बड़ी मुश्किलों को हरा रही प्रभजोत</title>
                                    <description><![CDATA[बठिंडा: पानी में र्इंट पर बैठकर आनलाइन परीक्षा दे रही छात्रा प्रभजोत कौर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/prabhjot-is-defeating-great-difficulties-at-a-young-age/article-16808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/prabhjot.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>माता-पिता के साथ धान लगवाने के साथ-साथ खेत में दे रही है आनलाइन परीक्षा</strong></h3>
<h3 style="text-align:center;"><strong>(Prabhjot online studies)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>पढ़ाई करने के अलावा खेत व घर में हाथ बंटाती हैं बूटा सिंह की बेटियां</strong></h4>
<h4></h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>सोशल मीडिया पर प्रभजोत की वायरल फोटो की लोगों ने खूब प्रशंसा की</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा (सच कहूँ/सुखजीत मान)।</strong> जिंदगी में कुछ भी सच हो सकता है। यदि आपके पास कुछ करने का जुनून है। सोशल मीडिया पर कल से घूम रही फोटो जिसमें धान की फसल लगाने के लिए पनीरी खोद रहे अपने माता-पिता के पास पानी में ही र्इंट पर बैठकर छात्रा आनलाइन परीक्षा दे रही है। (Prabhjot online studies)दिल तो इस बच्ची का भी करता होगा कि परीक्षा घर में बैठकर दे किंतु अपने माता-पिता की मदद करने की सोच उसे खेत तक खींच लाई।  पानी में र्इंट पर बैठकर आॅनलाइन परीक्षा दे रही यह बच्ची प्रभजोत कौर सरकारी माध्यमिक स्कूल घुमियारा (फरीदकोट) की आठवीं कक्षा की होनहार छात्रा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बूटा सिंह की होनहार बेटी की यह तस्वीर जहां उसकी मजबूरी को दिखा रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं उन विद्यार्थियों को भी सबक है जो संपूर्ण सुविधाओं के बावजदू शिक्षा से कन्नी कतराते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्ची के इस आस्था को सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब सलाम व सराहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">भले ही इस बच्ची के गांव की किसी को जानकारी नहीं थी।</li>
<li style="text-align:justify;">फिर भी उसका मनोबल बढ़ाने के लिए कई वरिष्ठ लेखकों ने अपनी कविश्री के माध्यम से सराहना की।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आत्मनिर्भर बनाना है सपना:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्ची के पिता बूटा सिंह का कहना है कि वह घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद वह अपनी बेटी को शिक्षा से वंचित नहीं रखना चाहता। उसने बताया कि मेरा सपना है कि मेरी बेटियां शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनें। खुद लिखने के शौकीन बूटा सिंह ने बेटियों के अधिकारों की बात करते हुए एक गीत लड़कियों को न मारो लोगो लड़कियों को न मारो लिखा है जिसके माध्यम से वह लोगों को बेटियों को भी बेटों के बराबर आदर सम्मान व शिक्षा मुहैवा करवाने की बात करता है। बूटा सिंह की तीन बेटियां हैं और तीनों खूब मेहनत कर रही हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वह घर की जिम्मेदारी के लिए हर काम में भी बराबर सहारा लगाती हैं और पढ़ाई भी करती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">बूटा सिंह पहले मैरिज पैलेस में काम करता था।</li>
<li style="text-align:justify;">करोना महामारी के कारण काम बंद हो गया तो वह खेत में मेहनत मजदूरी करने लगा।</li>
</ul>
<p style="text-align:right;"><strong>शिक्षा विभाग के जिला मीडिया संयोजक हरदीप सिद्धू ने बताया कि प्रभजोत कौर स्कूल की विभिन्न सरगर्मियों में अव्वल रहती है। उसकी दो होनहार बहनों में से अकाशदीप कौर सरकारी सैकेंडरी स्कूल मोरांवाली में नौवीं कक्षा और दूसरी बहन संत बाबा राम सिंह कालेज घुद्दूवाला फरीदकोट में बी-काम भाग तीसरा की छात्रा है। उनका भाई लखविन्दर सिंह सरकारी प्राथमिक स्कूल घुमियारा में पाँचवी कक्षा में पढ़ रहा है</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोई कसर नहीं रहने देंगे: अधिकारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जिला शिक्षा अधिकारी सैकेंडरी (फरीदकोट) परमिन्द्र सिंह बराड़, डिप्टी डीईओ प्रदीप जोडा और स्कूल के इंचार्ज हरवरिन्द्र सिंह सेखों का कहना है कि उन्हें गर्व है कि यह होनहार बेटियां उनके सरकारी स्कूल में पढ़ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इन बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए वह कोई कसर नहीं रहने देंगे।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2020 20:37:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑनलाइन  पढ़ रहे सरकारी स्कूलों के 50 हजार बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाईल से आॅनलाइन पढ़ाई करती छात्रा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/50-thousand-children-of-government-schools-studying-online/article-16571"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/online-education-in-haryana.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>शिक्षा अधिकारी रोजाना ले रहे बच्चों से पढ़ाई का फीडबैक</strong></h2>
<h3 style="text-align:center;">(Online Education in Haryana)</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>डीटीएच के तहत केबल नेटवर्क और फोन बना माध्यम</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>झज्जर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कोरोना वैश्विक महामारी में स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई के प्रति शिक्षा विभाग पूरी तरह से गंभीर है। झज्जर जिले के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले करीब 50 हजार बच्चे इन दिनों आॅनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 59 प्रतिशत बच्चे डीटीएच यानि केबल नेटवर्क से और शेष बच्चे मोबाइल के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। डीसी जितेंद्र कुमार ने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से शिक्षा विभाग के माध्यम से बच्चों को वैश्विक महामारी के दौर में पूरी गंभीरता से कदम उठाते हुए आॅनाइन शिक्षा प्रणाली को जारी रखा जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>डीटीएच के तहत केबल नेटवर्क और मोबाइल के माध्यम शिक्षा शुरू की गई </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डीसी जितेंद्र कुमार ने कहा कि शिक्षा अधिकारी रोजाना बच्चों से बातचीत करके उनके पढ़ाई का फीडबैक भी ले रहे हैं। अब सरकारी स्कूलों के बच्चे जीओ चैनल के माध्यम से भी पढ़ाई कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के चलते मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से लॉक डाउन लागू हो गया था, जिसके चलते बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया था। बच्चों के भविष्य को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने बच्चों को आॅनलाइन शिक्षित करने का निर्णय लिया। इसके लिए डीटीएच के तहत केबल नेटवर्क और मोबाइल के माध्यम शिक्षा शुरू की गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">केबल नेटवर्क पर बच्चे बैठकर शिक्षा हासिल करते हैं</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर जिन घरों में टीवी नहीं हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वहां पर बच्चे मोबाइल से शिक्षा हासिल कर रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रूहिल ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जिला में 525 राजकीय विद्यालयों के करीब 50 हजार बच्चे आॅन लाइन शिक्षा प्रणाली से जुड़े हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इनमें करीब 59 प्रतिशत बच्चे केबल नेटवर्क से और शेष मोबाइल से शिक्षा हासिल कर रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इनमें प्राइमरी, मिडिल, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी के बच्चे शामिल हैं।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हर शनिवार को होती है क्वीज</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आॅनलाइन शिक्षा के साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा क्वीज स्पर्धाएं भी करवाई जाती हंै। हर शनिवार को कक्षा 5वीं से 8वीं की हिंदी, गणित और परिवेश अध्ययन तथा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के बीच सार्इंस और गणित आदि विषयों की क्वीज प्रतियोगिता आयोजित करवाई जाती है। शिक्षा विभाग झज्जर अपने स्तर भी डेमो क्विज का आयोजन करवाता है, इसके लिए सुबह 10 से रात 10 बजे तक समय होता है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/50-thousand-children-of-government-schools-studying-online/article-16571</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2020 17:31:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब जियो चैनल की मदद से पढ़ेंगे बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना महामारी संक्रमण के दौरान बच्चों की पढ़ाई के प्रति शिक्षा विभाग पूरी तरह से गंभीर है। जिला के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 77 हजार बच्चे ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-children-will-study-with-the-help-of-jio-channel/article-16527"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/now-children-will-study-with-the-help-of-jio-channel.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े सरकारी स्कूलों के करीब 77 हजार बच्चे</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>लगातार निगरानी कर रहा शिक्षा विभाग</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>भिवानी सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन</strong>। कोरोना महामारी संक्रमण के दौरान बच्चों की पढ़ाई के प्रति शिक्षा विभाग पूरी तरह से गंभीर है। जिला के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 77 हजार बच्चे ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 60 प्रतिशत बच्चे डीटीएच यानि केबल नेटवर्क से और 40 प्रतिशत बच्चे मोबाईल के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा अधिकारी रोजाना बच्चों से बातचीत करके उनके पढ़ाई का फीडबैक ले रहे हैं। आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के बच्चे जीओ चैनल के माध्यम से भी पढ़ाई करेंगे, जिसके लिए सरकार का टाईएप हो चुका है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">लॉकडाउन के चलते उठाना पड़ा कदम</h4>
<h6 style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी संक्रमण के चलते मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से लॉकडाउन लागू हो गया था, जिसके चलते बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया था। इसके बाद जिला में 755 स्कूलों के करीब 77 हजार बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े हैं। इनमें करीब 60 प्रतिशत बच्चे केवल नेटवर्क से और 40 प्रतिशत बच्चे मोबाईल से शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इनमें प्राइमरी, मिडल, सैकेंडरी और सीनियर सैकेंडरी के बच्चे शामिल हैं।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">रोजाना 20 बच्चों से बात करते हैं अधिकारी</h4>
<h6 style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षण कार्य की प्रति दिन निगरानी भी की जाती है। बच्चों की पढ़ाई की मॉनीटरिंग के लिए शिक्षा अधिकारी प्रतिदिन 20-20 बच्चों से बातचीत करते हैं और उनको पढ़ाए जाने वाले सिलेबस का फीडबैक लेते हैं। स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह श्योराण भी प्रतिदिन 20 बच्चों से मोबाईल पर बात करते हैं। इसी प्रकार से खंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी और डीएमसी और डाईट से शिक्षा अधिकारी बच्चों को फोन करके उनसे फीडबैक लेते हैं। ऑनलाइन शिक्षा ही नहीं विभाग द्वारा क्वीज भी करवाई जाती है। हर शनिवार को कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा विद्यार्थियों के बीच साइंस, गणित और बॉयोलॉजी आदि विषयों की क्विज प्रतियोगिता आयोजित करवाई जाती है। उसी दिन शाम को क्विज का परिणाम घोषित किया जाता है। इसकी मुख्यालय को उसी दिन रिपोर्ट भी भेजी जा रही है। आने वाले समय में बच्चे जीओ चैनल के माध्यम से भी शिक्षा हासिल करेंगे। इसके लिए सरकार का जीओ चैनल से टाईअप हो चुका है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी</h4>
<h6 style="text-align:justify;">जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह श्योराण ने बताया कि सरकार एवं उपायुक्त अजय कुमार के निर्देशानुसार जिला में शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की पढ़ाई की पूरी गंभीरता से मॉनीटरिंग की जा रही है। जिन बच्चों के घरों में टीवी नहीं, उनको मोबाईल के माध्यम से तथा जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है, उनको कीपैड फोन के माध्यम से भी पढ़ाया जा रहा है। हर बच्चे की परेशानी को समझा जा रहा है। आने वाले समय मेंं बच्चे जीओ चैनल के माध्यम से भी शिक्षा हासिल करेंगे, इस पर सरकार का समझौता हो चुका है।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-children-will-study-with-the-help-of-jio-channel/article-16527</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2020 20:42:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीईआरटी किशोर मंच करवा रहा है नि:शुल्क ऑनलाइन क्लासेज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिभा निखार: सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है। सभी कक्षाएं केबल टीवी व फ्री डिश चैनल पर भी आयोजित करवाई जाएंगी। जिले में डिप्टी डीईओ बलजिंद्र भंगु को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-ncert-teen-forum-is-offering-free-online-classes/article-15276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/online-classes.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रतिभा निखार। 17 मई तक चलेंगी ऑनलाइन कक्षाएं, डिप्टी डीईओ हैं नोडल अधिकारी (Pathshala Kishore Manch)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा।</strong> राष्टÑीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद के दिशा निर्देशन में एनसीईआरटी किशोर मंच द्वारा लॉकडाउन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए 11 से आगामी 17 मई से ऑनलाइन क्लासेज उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ये कक्षाएं बच्चों को अलग-अलग चैनल पर टीचरों द्वारा अलग-अलग समयानुसार आयोजित की जा रही हैं जिनका बच्चों को काफी लाभ होगा। इसके लिए सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया गया है। सभी कक्षाएं केबल टीवी व फ्री डिश चैनल पर भी आयोजित करवाई जाएंगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिले में डिप्टी डीईओ बलजिंद्र भंगु को नोडल अधिकारी बनाया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके लिए सभी ब्लॉकों में व्हाट्सएप्प गु्रप बनाए गए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">सभी बीईओ व डीईओ इस बाबत रोजाना फीड बैक भी लेंगे।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>प्राइमरी कक्षा का शैड्यूल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">11 मई को कक्षा 4 चौथी विषय ईवीएस 10.30 से 11.15 तक, इसी दिन 11.15 से 12.00 तक कक्षा प्रथम व द्वितीय विषय अंग्रेजी, 12 मई को 10.30 से 11.15 तक कक्षा प्रथम व द्वितीय हिंदी विषय, इसी दिन 12.00 तक कक्षा दूसरी विषय गणित, 13 मई को 10.30 से 11.15 तक कक्षा चौथी विषय अंग्रेजी, इसी दिन 11.15 से 12 बजे तक कक्षा दूसरी विषय गणित, 14 मई को 10.30 से 11.15 तक कक्षा 5वीं विषय हिंदी, इसी दिन 11.15 से 12 बजे तक कक्षा तीसरी विषय गणित, 15 मई को 10.30 से 11.15 तक कक्षा चौथी विषय हिंदी, इसी दिन 11.15 से 12 बजे तक</p>
<p style="text-align:justify;">कक्षा चौथी विषय ईवीएस, 16 मई को 10.30 से 11.15 तक कक्षा चौथी विषय मनोविज्ञान, इसी दिन 11.15 से 12 बजे तक विषय विजुअल आर्ट कक्षा चौथी, 17 मई को कक्षा पांचवीं फिजिकल एजुकेशन 10.30 से 11.15 तक, इसी दिन 11.15 से 12 बजे तक कक्षा पांचवीं आईसीटी इनीटिएटिव की कक्षाएं लगाई जाएंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मिडल कक्षा का शैड्यूल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">11 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा 7वीं विषय साइंस, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक कक्षा 7वीं विषय हिंदी, 12 मई को 12 बजे से कक्षा छठी विषय सामाजिक विज्ञान, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक क्षा 8वीं विषय गणित, 13 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा छठी विषय अंग्रेजी, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक कक्षा छठी विषय साइंस, 14 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा 8वीं विषय गणित, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक कक्षा छठी विषय सामाजिक विज्ञान, 15 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा 6वीं विषय साइंस, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक कक्षा 6वीं विषय संस्कृत,</p>
<p style="text-align:justify;">16 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा छठी विषय ड्राइंग, इसी दिन 12.45 से 1.30 तक कक्षा छठी विषय फिजीकल एजुकेशन, 17 मई को 12 बजे से 12.45 तक कक्षा 7वीं विषय आईसीटी इनीटिएटिव की कक्षाएं लगाई जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये है एक सप्ताह का कक्षा दसवीं का शैड्यूल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">11 मई को कक्षा 11वीं अंग्रेजी विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन 9.45 से 10.30 तक दसवीं का सामाजिक विज्ञान विषय, 12 मई को कक्षा 11वीं साइंस विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन दसवीं गणित विषय 9.45 से 10.30 तक, 13 मई को कक्षा दसवीं हिंदी विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन 9.45 से 10.30 तक कक्षा 9वीं का विज्ञान विषय, 14 मई को दसवीं सामाजिक विज्ञान विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन 9.45 से 10.30 तक 9वीं कक्षा गणित विषय, 15 मई को कक्षा दसवीं उर्दू विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन 9.45 से 10.30 तक कक्षा दसवीं साइंस विषय, 16 मई को कक्षा 9वीं सामाजिक विज्ञान विषय 9 बजे से 9.45 तक,</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दिन दसवीं गणित विषय 9.45 से 10.30 तक, 17 मई को कक्षा दसवीं फिजिकल एजुकेशन विषय 9 बजे से 9.45 तक, इसी दिन कक्षा दसवीं विजुअल आर्ट विषय 9.45 से 10.30 तक स्वयंप्रभा चैनल पर आयोजित किया जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सीनियर सेकेंडरी का शैड्यूल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">11 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 11वीं विषय गणित, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 12वीं विषय गणित, 12 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 12वीं विषय गणित, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 12वीं विषय हिंदी, 13 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 11वीं विषय गणित, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 11वीं विषय उर्दू, 14 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 12वीं विषय गणित, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 12वीं विषय हिंदी, 15 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 11वीं विषय गणित, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 11वीं विषय अंग्रेजी, 16 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 11वीं विषय फिजिक्स, इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 11वीं विषय भूगोल,</p>
<p style="text-align:justify;">17 मई को 2.30 से 3.15 तक कक्षा 11वीं बॉयोलोजी व इसी दिन 3.15 से 4 बजे तक कक्षा 11वीं कक्षा का विषय आयोजित किया जाएगा।</p>
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                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2020 19:21:28 +0530</pubDate>
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                <title>3 मई तक आनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी</title>
                                    <description><![CDATA[ आनलाइन पढ़ाई: लॉक डाउन के दूसरे चरण में स्कूल ,कालेज, विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थान तथा कोचिंग संस्थान भी 3 मई तक पूरी तरह बन्द रहेंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/online-education-will-continue-till-3-may/article-14394"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/online-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कोरोना महामारी को देखते हुए देश के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थान पूर्णबन्दी के दूसरे चरण में तीन मई तक बन्द रहेंगे लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। (Online education ) गृह मंत्रालय द्वारा आज यहां नए सिरे से जारे दिशा निर्देश में यह जानकारी दी गई है। लॉक डाउन के दूसरे चरण में स्कूल ,कालेज, विश्वविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थान तथा कोचिंग संस्थान भी 3 मई तक पूरी तरह बन्द रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ़ रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर कहा है कि शैक्षणिक संस्थाओं के बन्द रहने के बावजूद ऑनलाइन क्लास जारी रहेंगी और इस तरह एकेडमिक सत्र को समय पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र शिक्षा के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करेंगे और इसके लिए दूरदर्शन एवं डीटीएच चैनल के जरिए पठन पाठन होगा। गौरतलब है कि यूजीसी ने शिक्षकों और छात्रों को ऑनलाइन क्लास लेने का निर्देश किया है और इसके लिए स्वयंम प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया किया जाएगा। छात्रों की डिजिटल पढ़ाई तक पहुंच बढ़ गई है और काफी संख्या में हिट्स मिल रहे हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2020 17:19:26 +0530</pubDate>
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