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                <title>Online study - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ऑनलाइन पढ़ाई कैसे करें मुख्यमंत्री जी!, महंगे इंटरनेट पैक और स्पीड भी लो</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम ने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि वे अनिश्चितता के इस समय में नई खोज करने की ओर बढ़ें। लेकिन प्रदेश के युवा खास तौर पर विद्यार्थी इस समय महंगे और स्लो इंटरनैट की समस्या से दो-चार हो रहा है, ऐसे में विद्यार्थी की ऑनलाइन पढ़ाई और इंटरनैट तकनीक के माध्यम से नई खोज और नए रास्ते ढूंढने में बाधाएं आ रही है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/how-to-study-online-chief-minister-take-expensive-internet-packs-and-speed-too/article-16419"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/how-to-study-online-chief-minister-take-expensive-internet-packs-and-speed-too.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">प्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षाविदों ने की सस्ता और तेज इंटरनेट मुहैया करवाने की मांग</h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़</strong>। गत दिवस प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थियों के साथ विचार सांझा करते हुए उन्हें देश का भावी कर्णधार बताया और कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान की आवश्यकता पर बल दिया है। सीएम ने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि वे अनिश्चितता के इस समय में नई खोज करने की ओर बढ़ें। लेकिन प्रदेश के युवा खास तौर पर विद्यार्थी इस समय महंगे और स्लो इंटरनैट की समस्या से दो-चार हो रहा है, ऐसे में विद्यार्थी की ऑनलाइन पढ़ाई और इंटरनैट तकनीक के माध्यम से नई खोज और नए रास्ते ढूंढने में बाधाएं आ रही है। बता दें कि प्रदेश में एयरटैल, आइडिया, जिओ, वोडाफोन और बीएसएनएल मुख्य तौर पर इंटरनैट सर्विस प्रोवाइडर हैं। लेकिन इन सभी टेलीकॉम कंपनियों में से जिओ और एयरटैल ही संतुष्टिजनक इंटरनैट सेवा मुहैया करवा रहे हैं। वहीं वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसी कंपनियां मोबाइल इंटरनैट स्पीड के मामले में काफी पीछे हैं। इंटरनैट की धीमी गति का खामियाज़ा सबसे ज्यादा छोटे शहरों और गांवों के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।</h6>
<h5 style="text-align:justify;">8 से 10 रुपए प्रति दिन के हिसाब से खर्च होता है 4 जी डेटा</h5>
<h6 style="text-align:justify;">प्रदेश में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और जिओ के 4-जी इंटरनेट पैक्स लगभग बराबर हैं और 8 से 10 रुपए प्रति दिन के हिसाब से 4जी इंटरनेट के लिए खर्च होते हैं। हालांकि सभी सर्विस प्रोवाइडर्स दिन का 1 से 3 जीबी डेटा प्रतिदिन के हिसाब से मुहैया करवाते हैं और यही प्लॉन एक आम व्यक्ति या विद्यार्थी लेता है। लॉकडाउन के इस दौर में विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए ज्यादा इंटरनेट की जरूरत  होती है, लेकिन डेटा यूज़ की सीमा के कारण वे मायूस हो रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हिसार की रहने वाली बारहवीं की छात्रा रश्मि कादयान का कहना है कि मौजूदा समय में पढ़ाई के लिए सरकार ऑनलाइन शिक्षा पर बल दे रही है लेकिन असल में इंटरनैट के महंगे डाटा पैक और इंटरनेट की स्पीड बड़ा इशू है। रश्मि का मानना है कि विद्यार्थी सैल्फ स्टडी इंटरनेट के माध्यम से अच्छी कर सकता है लेकिन आपकों एक विषय को अच्छे से समझने के लिए कुछ वीडियोज़ देखने पड़ते हैं, ऐसे में डाटा की सीमा सीमित होने के कारण कई बार विषय क्लीयर नहीं हो पाता फिर 24 घंटे का इंतजार करना पड़ता है। अंबाला के मुनीष गोयल जो कि बीसीए के फाइनल ईयर के विद्यार्थी हैं, उनका मानना है कि हमारा देश इंटरनेट स्पीड के मामले में पूरी दुनिया में 128वें नंबर पर है। आप यकींन करेंगे कि देश में 56 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं। यह एक आबादी बहुत से देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है, लेकिन इंटरनेट की स्पीड के मामले में हम बहुत पीछे हैं।</h6>
<h5 style="text-align:justify;">ऑनलाइन कक्षाओं का स्कोप अधिक, लेकिन इंटरनेट की कम गति बड़ा अवरोधक: प्रो. गुरदास</h5>
<h6 style="text-align:justify;">शिक्षाविद् प्रो. गुरदास सिंह इन्सां का कहना है कि सरकार इस मौजूदा समय में इंटरनेट की गति अच्छी मुहैया करवाकर न केवल हरियाणा बल्कि पूरे भारत को दुनिया की पहली कतार में लाकर खड़ा कर सकती है। प्रो. गुरदास का मानना है कि इंटरनैट की कमी के चलते ही छोटे कस्बों और गांवों के बच्चों तक मौजूदा समय में शिक्षा नहीं पहुंच पा रही, यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इंटरनैट सर्विस प्रोइवाइडर्स को इंटरनैट की स्पीड और बिना गतिरोध सर्विस के लिए तैयार करें तो देश और प्रदेश को नई ऊंचाइयां छूने से कोई रोक नहीं सकता।</h6>
<h5 style="text-align:justify;">जिओ की इंटरनैट स्पीड में हरियाणा से कहीं आगे और पूरे देश में टॉप पर है बिहार</h5>
<h6 style="text-align:justify;">देश में जिओ ने हालांकि 4-जी इंटरनेट लाकर इंटरनैट की दुनिया में नया आयाम पेश किया जिसकी देखा-देखी दूसरी कंपनियों को भी 4-जी इंटरनैट मुहैया करवाने पड़े। लेकिन हैरानीजनक तथ्य यह है कि मौजूदा समय में जिओ की इंटरनैट स्पीड बिहार में सबसे ज्यादा है। वहीं एयरटैल की स्पीड में आंधप्रदेश, वोडाफोन की स्पीड में ओडिसा, आइडिया की स्पीड में असम सबसे आगे है।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2020 21:37:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑनलाइन पढ़ाई बनी जी का जंजाल</title>
                                    <description><![CDATA[ गांव मेंं कई बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन हैं, लेकिन उनके घर में इंटरनेट की पूरी रेंज नहीं होती। जिसकी वजह से कनेक्शन ही नहीं जुड़ पाता ओर पढ़ाई नहीं हो पाती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/poor-people-have-neither-smart-phone-nor-internet-facility/article-14732"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/online-education-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">समस्या। गरीब लोगों के पास न स्मार्ट फोन और न इंटरनेट सुविधा</h2>
<h3 style="text-align:center;">(Online Education)</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>अध्यापकों का ज्यादातर समय बीत रहा वीडियो बनाने में</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> कोरोना के चलते प्रदेश में ऑनलाइन पढ़ाई का चलन शुरू हो गया है। यह ऑनलाइन शिक्षा बच्चों के लिए तो परेशानी बनी हुई है बल्कि अभिभावक भी अब परेशान हैं। बच्चों की मांग पर अभिभावक स्मार्ट फोन खरीदने पर मजबूर हो रहे हंै। (Online Education) ऐसे अभिभावकों को दिक्कत आ रही है, जो मजदूरी करके अपना तथा अपने परिवार का पालन करते थे। इस समय उनके सामने एक बड़ी समस्या स्मार्ट फोन खरीदने की भी आ गई है। जिसकी कीमत 10 से 20 हजार रुपये है। कोरोना के चलते प्रदेश की सरकार ने प्रदेश के सभी निजी व सरकारी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकार ने अध्यापकों को कहा था कि वे ऑनलाइन शिक्षा बच्चों को दे</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए अध्यापक लगे हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">उनके आगे समस्या यह आ रही है।</li>
<li style="text-align:justify;"> सरकारी तथा निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीबों के बच्चों के पास स्मार्ट फोन ही उपलब्ध नहीं हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे में शिक्षा उन तक कैसे पहुंचेगी?</li>
<li style="text-align:justify;">दूसरी सबसे बड़ी समस्या अध्यापकों के आगे इंटरनेट की आ रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे में अब इंटरनेट सुविधा भी महंगी हो गई।</li>
<li style="text-align:justify;">वाईफाई सुविधा के लिए कपंनियां उपभोक्ताओं से इंटरनेट के 1 वर्ष के एंडवास पैसे मांग रहे हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">अध्यापक सतीश कुमार ने बताया कि शिक्षा देने के लिए वे तैयार हैं, लेकिन गरीब बच्चों के पास न तो मोबाईल है न ही इंटरनेट। वे लोग अगर इंटरनेट व मोबाईल की व्यवस्था भी कर लेते हंै तो वहां पर इंटरनेट का कनेक्शन की रेंज कम होने के कारण बच्चे विडियो को डाऊनलोड ही नहीं कर पाते। इस समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पूरा पूरा दिन वे मोबाईल का कनेक्शन जोड़ने में लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अभिभावक संदीप कुमार ने बताया कि लॉकडाऊन चलते मोबाईल फोन खरीदना भी नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि मोबाईल खरीदना तो दूर अगर पुराने मोबाईल में भी कोई तकनीकी खामियां आती है तो उसे ठीक नहीं करवाया जा सकता है। ऐसे में शिक्षा आफत बन गई है। उन्होंने बताया कि वे लोग मेहनत मजदूरी करके अपने घर का गुजर बसर करते थे, लेकिन अब यह ऑनलाइन शिक्षा उनके लिए सिरदर्द बन गई है। उन्होंने बताया कि गांव में इंटरनेट की सुविधा नहीं है, लेकिन अध्यापक बार-बार आॅनलाईन शिक्षा देने की बात कहकर उन्हें स्मार्ट फोन खरीदने की नसीयत दे रहे हैं, जिसकी कीमत 10 हजार रुपए से ज्यादा है।</p>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2020 20:32:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ऑनलाइन पढ़ाई के शुरू होने से बच्चों ने अभिभावकों के हाथों से छीने ‘मोबाईल’</title>
                                    <description><![CDATA[यह भी सुनने में आया है कि कई विद्यार्थी स्कूल का काम नोट करने का बहाना बनाकर माता-पिता को मोबाईल चलाने का मौका नहीं देते। इस कारण अभिभावकों को कर्फ्यू के चलते घरों में समय बिताना मुश्किल हो रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/children-snatched-mobiles-from-parents-hands-as-online-education-began/article-14731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/online-education-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर/शेरपुर(सच कहूँ/रवी गुरमा)</strong>। सरकारी के साथ साथ प्राईवेट स्कूलों की ओर से ऑनलाइनपढ़ाई शुरू करवाने से बच्चों की ओर से कई कई घंटे मोबाइल का प्रयोग करने से जहांं उनकी आंंखों पर बुरा प्रभाव पड़ने लगा है, वहीं अभिभावकों के हाथों से भी मोबाइल चले गए हैं। (online education ) कई दूर दराज वाले क्षेत्रों में बच्चों को नैटवर्किंग की मुश्किल और इन्टरनेट डेटा जल्दी खत्म होने की मुश्किलों के साथ भी जूझना पड़ रहा है। तालाबन्दी के कारण बंद हुए अलग अलग स्कूलों की ओर से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए मोबाईलों के द्वारा काम भेजा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राईवेट स्कूल की अध्यापिका मनजीत कौर का कहना है कि बच्चों को रोजाना मोबाईलों के द्वारा काम भेजा जाता है परंतु कई बार माता-पिता यह भी शिकायत करते हैं कि आप काम बहुत अधिक देते हो एक और अध्यापिका का कहना था कि बच्चों को भेजी जाने वाली अधिकतर फाइलें जेपीजी फार्मट में होती हैं, जिस कारण कई बार नैटवर्किंग धीरे होने के कारण उनको डाऊनलोड करने में अधिक समय लग जाता है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2020 20:22:32 +0530</pubDate>
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