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                <title>खालिस्तानियों की हत्याओं के बाद, गुरपतवंत सिंह पन्नू गायब, मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Gurpatwant Pannu: विदेश में बैठे खालिस्तानियों की हत्याओं के बाद हड़कंप मच गया है। इसके बाद रिसिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू पिछले 48 घंटों से छिप गए हैं। छिपने से पहले पन्नू ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में पन्नू ने खालिस्तानी हरदीप निझर की हत्या के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/after-the-killings-of-khalistanis-gurpatwant-singh-pann-pannu-disappeared-created-a-stir/article-49115"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/gurpatwant-pannu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Gurpatwant Pannu: विदेश में बैठे खालिस्तानियों की हत्याओं के बाद हड़कंप मच गया है। इसके बाद रिसिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू पिछले 48 घंटों से छिप गए हैं। छिपने से पहले पन्नू ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में पन्नू ने खालिस्तानी हरदीप निझर की हत्या के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए प्रमुख अजीत डोभाल, सुमंत गोयल और एनआईए प्रमुख दिनकर गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पन्नू ने आरोप लगाया है कि भारतीय खुफिया एजेंसियों के स्लीपर सेल कनाडा में हैं और उन्हीं के द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया है। इसलिए निझर की हत्या पर अपना बयान जारी करने के बाद पन्नू छिप गया है। पन्नू देश की शीर्ष जांच एजेंसी एनआईए की हिटलिस्ट में हैं। वह निजहर के साथ मिलकर रेफरेंडम 2020 आंदोलन चला रहे थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Gurpatwant Pannu</h4>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि खालिस्तान समर्थक एक-एक कर मारे जा रहे हैं। पाकिस्तान में परमजीत सिंह पंजवड़, कनाडा में हरदीप निझर और ब्रिटेन में अवतार सिंह खांडा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इसके बाद पिछले 48 घंटों से पन्नू का फोन बंद है और उसका कोई पता नहीं चला है। सूत्रों के मुताबिक पन्नू ने एनआईए और भारतीय एजेंसियों से बचने के लिए यह कदम उठाया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 13:20:05 +0530</pubDate>
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                <title>बेनकाब खुफिया अधिकारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति कानून-सम्मत’</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने खुफिया अधिकारी के ‘बेनकाब होने या अयोग्यता और अक्षमता की स्थिति में उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने संबंधी नियम की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने शुक्रवार को पूर्व खुफिया अधिकारी ‘निशा प्रिया भाटिया’ की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/unlawful-intelligence-officer-mandatory-retirement-law/article-14741"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/law1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने खुफिया अधिकारी के ‘बेनकाब होने या अयोग्यता और अक्षमता की स्थिति में उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने संबंधी नियम की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने शुक्रवार को पूर्व खुफिया अधिकारी ‘निशा प्रिया भाटिया’ की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी गुप्तचर अधिकारी के बेकनाब हो जाने या कार्य योग्य नहीं रहने की वजह से उसे अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने संबंधी 35 साल पुराना नियम कानून-सम्मत है।</p>
<p style="text-align:justify;">निशा ने वर्ष 1975 के रिसर्च एंड अनालिसिस विंग (रॉ) के नियम 135 (भर्ती, कैडर एवं सेवाएं) के तहत अपनी अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती दी थी। नियम 135 में कहा गया है कि गुप्तचर संगठन का कोई भी अधिकारी अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जा सकता है अगर खुफिया अधिकारी के रूप में उसकी गोपनीयता खत्म हो गयी है या सुरक्षा कारणों से वह नौकरी करने योग्य नहीं रह गया है अथवा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान वह जख्मी या दिव्यांग हो गया हो।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि रॉ की पूर्व अधिकारी की तरफ से दो वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए आंतरिक समिति के गठन में देरी की गई। पीठ ने इसे लेकर में केंद्र को पूर्व महिला अधिकारी को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का भी आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुकूल कामकाजी माहौल किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान का बुनियादी अंग होता है। यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून इसलिए है ताकि न केवल वास्तविक अपराधों को तय किया जा सके, बल्कि महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह एवं भेदभावपूर्ण मामलों पर रोक लगाई जा सके।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2020 11:27:08 +0530</pubDate>
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