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                <title>Migrant Workers - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Migrant Workers RSS Feed</description>
                
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                <title>आओ जनाब आपको, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली ले चलूं</title>
                                    <description><![CDATA[अपने खर्चे पर प्रवासी मजदूरों को बुलाया जा रहा पंजाब-हरियाणा बिहार से रोजाना 15 से 20 बसें पहुंच रही हरियाणा-पंजाब, दिल्ली चंडीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबत किसी ने झेली वो यूपी-बिहार के प्रवासी मजदूर थे। जो अचानक से काम बंद होने के चलते अपने परिवार सहित कई कई हजार किलोमीटर पैदल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/come-let-me-take-you-to-haryana-punjab-and-delhi/article-26760"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/migrant-workers.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>अपने खर्चे पर प्रवासी मजदूरों को बुलाया जा रहा पंजाब-हरियाणा</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>बिहार से रोजाना 15 से 20 बसें पहुंच रही हरियाणा-पंजाब, दिल्ली</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)।</strong> लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबत किसी ने झेली वो यूपी-बिहार के प्रवासी मजदूर थे। जो अचानक से काम बंद होने के चलते अपने परिवार सहित कई कई हजार किलोमीटर पैदल ही अपने गाँवों लौटते दिखे। सरकार और अपने मालिकों की बेरुखी को अब पीछे छोड़ प्रवासी मजदूरों की चांदी फिर से लौट आई है। हरियाणा-पंजाब के किसान आंदोलन के चलते खेतों को समय नहीं दे पा रहे इसलिए अपने खर्च पर बिहार, यूपी और नेपाल से मजदूरों को लाया जा रहा है। बता दें कि किसान आंदोलन के कारण हरियाणा और पंजाब में मजदूरों की कमी हो गई है। वहीं दिल्ली में भी लेबर की जरूरत के चलते लेबर बुलाई जा रही है। इसी के साथ अब खेतों में धान की कटाई नजदीक होने, कुछ नरमें की चुगाई और मंडियों में काम के लिए पंजाब और हरियाणा के किसान बिहार और उत्तर प्रदेश गए मजदूरों को बसें भेजकर वापस बुलाना शुरू कर दिया है। वहीं बिहार से इन मजदूरों को लाने में एक बस का खर्चा एक लाख से ज्यादा का पड़ रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कोरोना टैस्ट भी करवा रहे किसान</h4>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार किसान मजदूरों को अपने निजी खर्चे पर बुला तो रहे ही हैं साथ में कोरोना टेस्ट भी करवा रहे हैं। बता दें कि पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली में कृषि कानून बिल के विरोध में प्रदर्शन में व्यस्त हैं। ऐसे में वहां की खेती प्रभावित हो रही है। इसी के चलते अब बिहार, यूपी और नेपाल से मजदूरों को विशेषतौर पंजाब और हरियाणा में लाया जा रहा है। बठिंडा के किसान तजिंदरपाल सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के चलते पिछले साल भी उनकी लेबर नहीं आई थी, ये फिक्स लेबर होती है जो हर फसल पर उनके यहां कटाई, बुआई के लिए आती है। पिछली बार लॉकडाउन के चलते दिक्कत हुई थी। लेकिन इस बार लेबर लौट रही है क्योंकि फसल की कटाई नजदीक है। आपको बता दें कि अकेले पंजाब में इस दफे 25 लाख हैक्टेयर से ज्यादा धान और 5 लाख हैक्टेयर से ज्यादा बासमती की रोपाई हुई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एजेंटों के द्वारा आ रहे मजदूर</h4>
<p style="text-align:justify;">सीतापुर के मजदूर रामबिस्वास के अनुसार स्थानीय एजेंट ने उन्हें 15 हजार रुपए प्रति महीना और रहना-खाना साथ में, का ऑफर दिया था, जिसके बाद उनके परिवार से 9 लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, पंजाब में धान कटाई के लिए आ रहे हैं। आपको बता दें कि बिहार में अब मजदूरों को हरियाणा-पंजाब भेजने के लिए ऐजेंट घूम रहे हैं। इनकी संख्या 100 से ज्यादा बताई जा रही है। ये लोग अपना ऑफिस खोल कर बैठे हैं और मजदूरों को पंजाब, हरियाणा भेज रहे हैं। एक एजेंट ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उन्हें पंजाब और हरियाणा में बैठे उनके साथियों से लेबर की डिमांड पता चलती है और वे यहां लोगों को ऑफर देते हैं, जिसके बाद स्थानीय लेबर को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली भेजा जाता है। बताया जा रहा है कि बिहार के मधुबनी, सीतामढ़ी, छपरा, पूर्णिया, मोतिहारी सहित अन्य जगहों के अलावा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, मिर्जापुर, जौनपुर सहित अन्य जिलों से मजदूरों को लाया जा रहा है। रोजाना 15 से 20 बसें पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के लिए मजदूरों को लेकर रवाना हो रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">स्थानीय मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर फर्क पड़ता है लेकिन रोजगार सभी को चाहिए: सेवेवाला</h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं इस विषय पर सच कहूँ से बातचीत में पंजाब खेत मजदूर यूनियन के राज्य जनरल सचिव लछमण सिंह सेवेवाला ने कहा कि बिल्कुल प्रवासी लेबर के आने से स्थानीय लेबर की डिमांड कम होती है और लेबर रेट पर भी फर्क पड़ता है, लेकिन प्रवासी मजदूर भी मजबूरी में इतनी दूर लेबर करने आते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति हमारे से भी खराब है और वे यहां भी लूट का शिकार होते हैं। दरअसल यहां के मजदूरों का प्रवासी मजदूरों से कोई झगड़ा नहीं है, अगर किसी का दोष है तो सरकारी नीतियों का है, जिसमें मजदूर बिल्कुल हाशिए पर हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Sep 2021 20:05:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रवासी श्रमिकों के पैसे खत्म हुए तो रोडवेज कर्मियों ने खाना खिलाकर टिकट कटवाई</title>
                                    <description><![CDATA[कई किलोमीटर भूखे व प्यासे बस स्टैंड पर पहुंचे थे। पैसे भी नहीं थे और टिकट कैसे लें, घर जाने से पहले ही सोचकर दुखी हो रहे थे। ऐसे में बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मियों ने उनको खाना खिलाया और अपने खर्च पर ही टिकट कटवाकर उनको बस से विदा किया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/when-the-money-from-the-migrant-workers-run-out-the-roadways-workers-fed-and-cut-the-tickets/article-15615"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/when-the-money-from-the-migrant-workers-run-out-the-roadways-workers-fed-and-cut-the-tickets.jpeg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>बस स्टैंड पर दिया खाना, मास्क और सेनेटाइजर</strong></h4>
<h4 style="text-align:center;">(Roadways workers fed the food and cut the ticket)</h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी/सच कहूँ न्यूज</strong>। साहब, इस संकट की घड़ी में यहां के लोगों का जो प्यार व हौंसला मिला है, वह ताउम्र नहीं भूलेंगे। कई किलोमीटर भूखे व प्यासे बस स्टैंड पर पहुंचे थे। पैसे भी नहीं थे और टिकट कैसे लें, घर जाने से पहले ही सोचकर दुखी हो रहे थे। ऐसे में बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मियों ने उनको खाना खिलाया और अपने खर्च पर ही टिकट कटवाकर उनको बस से विदा किया। ऐसी इज्जत तो अपने प्रदेश में भी नहीं मिली। संकट टला तो जरूर इस क्षेत्र में कार्य पर आएंगे। रोडवेज बसें चलने की सूचना पर दर्जनों प्रवासी श्रमिक कई किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टैंड पर भूखे-प्यासे पहुंचे थे। पैसे भी खत्म हो गए और टिकट भी नहीं कटवा पा रहे थे। ऐसे में रोडवेज कर्मियों ने एकजुट होते हुए उनको खाना खिलाया, मास्क दिए और अपने खर्च पर टिकट कटवाकर बसों में बैठाकर रवाना किया।</h6>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>खानपुर से पैदल चलकर पहुंचे बस स्टैंड</strong></h5>
<h6 style="text-align:justify;">श्रमिकों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि इस संकट की घड़ी में जब सब किनारा कर रहे हैं, ऐसे वक्त में रोडवेज कर्मचारी उनके लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं। इन्होंने हमारी जो इज्जत और मदद की है, ऐसी तो हमारे प्रदेश में भी कभी नहीं मिली। प्रवासी श्रमिक राजू, रामधन व जयप्रकाश ने बताया कि वे 18 लोग खानपुर से पैदल चलकर बस स्टैंड पर आए हैं। रास्ते में किसी ने लिफ्ट नहीं दी, जो कुछ कमाया था, वह खाने पर खर्च हो गया। अब उनके पास न तो खाना बचा और न ही पैसे। बस चलने की जानकारी मिली थी तो बस स्टैंड पर काफी चिंतित थे।</h6>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रोडवेज कर्मियों ने आपस में मिलकर इकट्ठा किए पैसे, फिर की मदद </strong></h5>
<h6 style="text-align:justify;">इस दौरान रोडवेज के कर्मचारियों ने उनको खाना खिलाकर टिकट के पैसे दिए हैं। हम उनका धन्यवाद करते हैं। रोडवेज कर्मचारी विजयपाल ने बताया कि डिपो महाप्रबंधक धनराज कुंडू द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि इस संकट की घड़ी में बस स्टैंड पर आने वाले प्रवासी श्रमिकों को खाना खिलाकर मास्क दिए जाएं। रोडवेज कर्मचारियों ने आपस में मिलकर चंदा एकत्रित करते हुए श्रमिकों को भोजने, मास्क, सेनेटाइजर उपलब्ध करवाए हैं। जिन श्रमिकों के पास पैसा नहीं था, उनकी टिकट कटवाकर बसों में बैठाया गया है। इस दौरान जो भी श्रमिक बस स्टैंड पर आएगा, भूखा नहीं रहेगा।</h6>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2020 18:09:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2800 प्रवासी श्रमिक बिहार और यूपी के गृह जिलों में भेजे</title>
                                    <description><![CDATA[ रोडवेज बस में रवाना होते प्रवासी मजदूर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>झज्जर (संजय भाटिया/सच कहूँ)।</strong> झज्जर जिले से रविवार को करीब 2800 प्रवासी श्रमिक अपने गृह जिलों के लिए बिहार व उत्तरप्रदेश के लिए रवाना हुए। उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने जिला से जाने वाले प्रवासी श्रमिकों को एक बार फिर से भविष्य में सुखद स्वास्थ्य के साथ वापिस काम पर लौटने के लिए प्रेरित किया। उपायुक्त ने कहा कि हरियाणा सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण से आज कोविड-19 के तहत चल रहे लॉद्दकडाउन में प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह जिलों में परिजनोंं के पास भेजने की व्यवस्था की गई है। उपायुक्त ने प्रवासी श्रमिकों को सुखद व स्वस्थ रहते हुए आर्थिक समृद्धि में भागीदार बने रहने का संदेश भी दिया।</p>
<h5>श्रमिक ट्रेन में झज्जर के 1109 प्रवासी श्रमिक अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं</h5>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त के मार्गदर्शन में झज्जर जिला मुख्यालय पर एसडीएम झज्जर शिखा की देखरेख में राजकीय बहुतकनीकी संस्थान परिसर व राजकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्रांगण से राज्य परिवहन की बसों के माध्यम से रोहतक रेलवे स्टेशन श्रमिकों को ले जाया गया। रोहतक से बिहार राज्य के अररिया जिला के लिए जाने वाली स्पेशल श्रमिक ट्रेन में झज्जर के 1109 प्रवासी श्रमिक अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। एसडीएम ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार की सांय को सभी को झज्जर मुख्यालय पर अस्थाई रूप से बनाए गए शैल्टर होम में रखा गया औा उनके स्वास्थ्य की जांच भी की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि रात्रि भोजन व सुबह के नाश्ते के बाद सभी को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बसों में मास्क पहनाकर, पानी की बोतल व बिस्कुट पैकेट देते हुए रोहतक के रास्ते रेलवे स्टेशन से बिहार के लिए रवाना किया जा रहा है। रविवार को ही झज्जर जिला से 45 रोडवेज बस से करीब 1750 प्रवासी श्रमिकों को उत्तरप्रदेश के सहारनपुर क्लस्टर के लिए भी रवाना किया गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/2800-migrant-workers-sent-to-home-districts-of-bihar-and-up/article-15203</link>
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                <pubDate>Sun, 10 May 2020 17:13:17 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा: 23 बसों से 700 प्रवासी श्रमिक को शामली भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[झज्जर में अपने घरों को रवाना होते प्रवासी मजदूरों को मास्क देते डीसी जितेंद्र कुमार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;">उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने किया प्रोत्साहित (Migrant Workers)</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>परिजनों से मिलकर सुखद अनुभव के साथ फिर वापिस आने की अपील</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>झज्जर (संजय भाटिया/सच कहूँ)।</strong> कोविड-19 वैश्विक महामारी के इस दौर में लॉकडाउन की स्थिति में हरियाणा सरकार की अतुलनीय पहल के चलते प्रवासी श्रमिकों को उनके घर नि:शुल्क पहुंचाने में झज्जर जिला उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। अन्य राज्यों के लिए ट्रेन अथवा बस के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को पहुंचाने के लिए झज्जर जिला प्रशासन की ओर से सार्थक कदम उठाए गए हैं। शनिवार को उपायुक्त जितेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में झज्जर जिला से हरियाणा राज्य परिवहन की 23 बसें करीब 700 कृषि कार्य से जुड़े प्रवासी श्रमिकों को लेकर उत्तर प्रदेश के शामली कलस्टर के 14 जिलों के रहने वाले श्रमिकों को लिए रवाना हुई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रवासी श्रमिक अपने परिजनों से मिलने को लेकर उत्साहित थे</h4>
<p style="text-align:justify;">उनके चेहरों पर हरियाणावासियों से निरंतर मिले सहयोग पर आभार भरी झलक भी साफ दिखाई दे रही थी। उपायुक्त ने बताया कि झज्जर जिला मुख्यालय से 7 बसें करीब 214 प्रवासी श्रमिकों को लेकर, मातनहेल खंड से 7 बसें करीब 210 प्रवासी श्रमिक, साल्हावास खंड से 3 बसें करीब 110 प्रवासी श्रमिकों के साथ, बादली खंड से 2 बसें 60 प्रवासी श्रमिकों, बहादुरगढ़ व बेरी से दो-दो बसें करीब 50-50 प्रवासी श्रमिकों को लेकर गंतव्य की ओर भेजी गई। उन्होंने बताया कि दो रोज पूर्व भी झज्जर से बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए करीब 150 प्रवासी श्रमिकों को भेजा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर एसडीएम झज्जर शिखा, तहसीलदार नरेंद्र दलाल, बीडीपीओ रामफल, नगरपालिका सचिव अरूण नांदल सहित बहादुरगढ़ में एसडीएम तरूण पावरिया, बेरी से एसडीएम डा.राहुल नरवाल, बादली में एसडीएम विशाल कुमार, साल्हावास में बीडीपीओ निशा व मातनहेल से बीडीपीओ अजित सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में रोडवेज बसें शामली के लिए भेजी गई।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/700-migrant-workers-from-23-buses-sent-to-shamli/article-15182</link>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2020 18:28:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शाह की ममता को चिट्ठी, प्रवासी श्रमिकों के घर पहुंचने में सहयोग करें</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल सरकार पर विभिन्न राज्यों में फंसे राज्य के श्रमिकों की वापसी की व्यवस्था करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस मामले में सहयोग करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार शाह ने बनर्जी को एक पत्र लिखकर कहा है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/shahs-letter-to-mamta-help-of-migrant-workers-to-reach-home/article-15171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/amitshah.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल सरकार पर विभिन्न राज्यों में फंसे राज्य के श्रमिकों की वापसी की व्यवस्था करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस मामले में सहयोग करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार शाह ने बनर्जी को एक पत्र लिखकर कहा है कि विभिन्न राज्यों में फंसे पश्चिम बंगाल के श्रमिक अपने गृह राज्य जाने के लिए बेचैन और परेशान हैं। केन्द्र सरकार फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों की उनके घर जाने में मदद कर रही है लेकिन उसे पश्चिम बंगाल सरकार से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने अब तक विभिन्न राज्यों के दो लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों की उनके राज्य में जाने में मदद की है।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ट्रेनों के राज्य में आने से संबंधित प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रही है। यह पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के साथ अन्याय है। इससे उनकी दिक्कतें और बढ जायेंगी। रिपोर्टों में भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के श्रमिक विभिन्न राज्यों में प्रशासन के लिए भी परेशानी का सबब बने हुए हैं और इन राज्यों ने केन्द्र सरकार से इन्हें उनके राज्यों में भेजने में सहयोग का अनुरोध किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2020 12:30:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>राहत की घोषणा के बावजूद मजदूरों का पलायन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले पंद्रह साल से राजधानी में मोटिया का काम कर रहे राजभर और त्रिलोकी ने बताया कि एक माह से अधिक से वे लॉक डाउन समाप्त करने का इंतजार कर रहे थे लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है और अब आगे इसके बढ़ने की संभावना है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/despite-the-declaration-of-relief-the-migration-of-workers-continues/article-14889"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/despite-the-declaration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> लॉकडाउन के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे मजदूरों को उनके घरों को भेजने की सरकार की घोषणा के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी से गुरुवार को भी इनका (प्रवासी मजदूरों का) पलायन जारी रहा। दिल्ली में एक दशक से अधिक से ट्रकों पर माल चढ़ने और उतारने का काम कर रहे इन मजदूरों को सरकारी घोषणा प्रभावित नहीं कर सकी और यहां बने रहने का उनका धैर्ए आज सुबह टूट गया जिसके बाद वे साइकिल से बिहार की यात्रा पर निकल पड़े। (Migrant Workers) दिल्ली के शालीमार बाग से छह मजदूरों का यह जत्था अहले सुबह पुलिस से आंख बचते हुए वजिराबाद-गाजियाबाद के रास्ते से दिल्ली की सीमा पार करने की ओर बढ़ रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस से भयभीत शालीमार गार्डन के पास छांव में आराम कर रहे इन मजदूरों ने बताया कि वे बिहार के बक्सर जाना चाहते हैं लेकिन पुलिस उन्हें रोक रही है। पिछले पंद्रह साल से राजधानी में मोटिया का काम कर रहे राजभर और त्रिलोकी ने बताया कि एक माह से अधिक से वे लॉक डाउन समाप्त करने का इंतजार कर रहे थे लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है और अब आगे इसके बढ़ने की संभावना है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उनके पास पैसे समाप्त हो गए हैं और मकान मालिक किराया चुकाने के लिए बार बार दबाव बना रहा था।</li>
<li style="text-align:justify;">मजदूरों ने बताया कि उन्हें जो भोजन दिया जा रहा है वह उनके लिए पर्याप्त नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">वे मेहनत मजदूरी करना चाहते हैं लेकिन कहीं काम करने की अनुमति नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">घर के लोगों का भी वापस लौटने के लिए दबाव है</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे में उनके पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।</li>
</ul>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2020 15:55:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रवासी श्रमिको की समस्या राज्य सुलझायें: राहुल, चिदंबरम</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा समस्या प्रवासी श्रमिकों को हो रही है और राज्यों को उनकी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को यहां जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि प्रवासी श्रमिकों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/state-should-solve-the-problem-of-migrant-workers-rahul-chidambaram/article-14768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/migrant-workers1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कांग्रेस ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा समस्या प्रवासी श्रमिकों को हो रही है और राज्यों को उनकी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को यहां जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि प्रवासी श्रमिकों की समस्या को सुलझाया जाना चाहिए और उन्हें वापस बुलाने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के हर क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों की अलग तरह की समस्या है और उनकी इस दिक्कत से राज्य ही बखूबी निपट सकते है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को इन श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिये मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करते हुए उन्हें वित्तीय सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2020 09:53:15 +0530</pubDate>
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