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                <title>UGC - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>UGC News: यूजीसी का बड़ा कदम! अधिक समावेशी बनेगी दिव्यांग छात्रों की शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाई, मूल्यांकन और परीक्षाओं में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों पर बल दे रहा है। आयोग का कहना है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को पर्याप्त तैयारी, निरंतर शैक्षणिक सहयोग, परीक्षा में अतिरिक्त समय तथा सुलभ मूल्यांकन व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे अन्य विद्यार्थियों के समान अवसर प्राप्त कर सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/ugc-news-big-step-of-ugc-education-of-disabled-students/article-87963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/ugc-guideline.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाई, मूल्यांकन और परीक्षाओं में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों पर बल दे रहा है। आयोग का कहना है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को पर्याप्त तैयारी, निरंतर शैक्षणिक सहयोग, परीक्षा में अतिरिक्त समय तथा सुलभ मूल्यांकन व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे अन्य विद्यार्थियों के समान अवसर प्राप्त कर सकें। UGC News</p>
<p style="text-align:justify;">यूजीसी के अनुसार, नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) की 2011 की रिपोर्ट में देश की कुल आबादी का 2.2 प्रतिशत हिस्सा दिव्यांग बताया गया था। यह आंकड़ा उस समय लागू दिव्यांगजन अधिकार कानून, 1995 के तहत मान्यता प्राप्त सात प्रकार की दिव्यांगताओं पर आधारित था। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगता की दर 2.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2 प्रतिशत दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में दिव्यांगता की दर 2.4 प्रतिशत जबकि महिलाओं में 1.9 प्रतिशत थी। </p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2.2 प्रतिशत दिव्यांग आबादी में से केवल 1.46 करोड़ लोग साक्षर थे। उच्च शिक्षा में दिव्यांग विद्यार्थियों की भागीदारी बेहद कम रही और कुल विद्यार्थियों में उनका नामांकन मात्र 0.56 प्रतिशत पाया गया। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों की शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने तथा महिलाओं की साक्षरता दर में सुधार के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रमों के शैक्षणिक पहलुओं पर दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य शिक्षण, मूल्यांकन और परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाना है। UGC News</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समानता और समावेशन को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है। नीति में खुली और दूरस्थ शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षा तथा तकनीक के व्यापक उपयोग के माध्यम से सभी विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर जोर दिया गया है। नीति के तहत अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों को निर्धारित अवधि के भीतर कई बार प्रवेश और निकास की सुविधा मिलती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इसके अंतर्गत प्रमाणपत्र के लिए 40, डिप्लोमा के लिए 84, स्नातक डिग्री के लिए 120 तथा ऑनर्स अथवा शोध डिग्री के लिए 160 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। यूजीसी का कहना है कि विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली विद्यार्थियों को अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम चुनने का अवसर प्रदान करती है। यह व्यवस्था दिव्यांग विद्यार्थियों सहित सभी विद्यार्थियों को मुख्य, वैकल्पिक तथा कौशल आधारित विषयों के चयन में लचीलापन देती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रणाली का उद्देश्य शिक्षा में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाना तथा विभिन्न संस्थानों के बीच क्रेडिट हस्तांतरण को आसान बनाना है। इसके साथ ही मूल्यांकन प्रणाली को भी विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों, पाठ्यभार और शिक्षण घंटों के आधार पर अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों, महिलाओं, भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">नई शिक्षा नीति में गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना, वंचित विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा का विस्तार तथा सभी शैक्षणिक ढांचे और अध्ययन सामग्री को दिव्यांग अनुकूल बनाने की सिफारिश की गई है। यूजीसी का मानना है कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसी समावेशी शिक्षण पद्धति विकसित करना आवश्यक है, जिससे दिव्यांग विद्यार्थियों सहित सभी शिक्षार्थियों को समान अवसर मिल सकें और वे देश के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। UGC News</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 15:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Manmohan]]></dc:creator>
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                <title>यूजीसी परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 अगस्त तक टली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने देश भर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितम्बर तक आयोजित करने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गत छह जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ugc-exam-hearing-in-supreme-court-postponed-till-10-august/article-17226"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/supreme-court-dismisses-the-charge-of-pick-and-choose-in-the-registry2.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने देश भर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितम्बर तक आयोजित करने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गत छह जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकतार्ओं के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई 10 अगस्त तक स्थगित कर दी। इस बीच मेहता ने कहा कि किसी विद्यार्थी को अभी फिलहाल यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि शीर्ष अदालत में मामला लंबित नहीं होने के कारण परीक्षा नहीं होगी और छात्रों को अपनी पढ़ाई की तैयारी जारी रखनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता यश दुबे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कई ऐसे विश्वविद्यालयों में आॅनलाइन परीक्षा के लिए जरूरी सुविधा नहीं है, इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि आॅफ लाइन का भी विकल्प है। इस पर श्री सिंघवी ने कहा, ‘लेकिन बहुत से लोग स्थानीय हालात या बीमारी के चलते आॅफलाइन परीक्षा नहीं दे पाएंगे। उन्हें बाद में परीक्षा देने का विकल्प देने से और भ्रम फैलेगा। इस पर फिर न्यायालय ने कहा कि यह तो छात्रों के हित में नजर आता है। इस बीच, न्यायालय ने महाराष्ट्र में राज्य आपदा प्रबंधन समिति की तरफ से लिये गए फैसले की कॉपी रिकॉर्ड पर रखने को कहा है और सुनवाई 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जानें, क्या है पूरा मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि यूजीसी ने गुरुवार को शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर करके कहा था कि 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर अधिसूचना का उद्देश्य विद्यार्थियों के अगले साल की पढ़ाई में विलम्ब होने से रोकना है। आयोग का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के तहत उन्हें बच्चों की उच्च शिक्षा के संदर्भ में नीतिगत फैसला लेने का अधिकार है। इसी अधिकार के तहत उन्होंने बच्चों के भविष्य की बेहतरी को देखते हुए ही 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने का निर्देश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग का कहना है कि अंतिम वर्ष महत्वपूर्ण होता है, जिसके परीक्षाफल के आधार पर छात्रों का आगे का भविष्य निर्भर करता है। इसलिए इसमें बिना परीक्षा के परिणाम घोषित नहीं किए जा सकते। उधर, आयोग के हलफनामा के बाद याचिकाकर्ताओं ने देर शाम जवाबी हलफनामा दायर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि आयोग उनकी शिकायतों पर सही तरीके से जवाब देने में असफल रहा है।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2020 14:56:31 +0530</pubDate>
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                <title>छात्रों की परीक्षाओं के बारे में जल्द ही निर्णय लेगा यूजीसी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कोरोना महामारी के कारण एक माह से लॉकडाउन में कॉलेज और विश्वविद्यालय के बन्द हो जाने को देखते हुए परीक्षाएं आयोजित करने दाखिले और नया सत्र शुरू करने के बारे में जल्द ही फैसला करेगा। यूजीसी ने इस बारे में रूपरेखा तैयार करने और विचार विमर्श के लिए दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ugc-will-decide-about-the-students-examination-soon/article-14770"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/exam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कोरोना महामारी के कारण एक माह से लॉकडाउन में कॉलेज और विश्वविद्यालय के बन्द हो जाने को देखते हुए परीक्षाएं आयोजित करने दाखिले और नया सत्र शुरू करने के बारे में जल्द ही फैसला करेगा। यूजीसी ने इस बारे में रूपरेखा तैयार करने और विचार विमर्श के लिए दो समितियों का गठन किया था, जिसने 24 तारीख को अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है । पहली समिति सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा के कुलपति आर सी कोहाड़ की अध्यक्षता में गठित की गई थी और दूसरी समिति इग्नू के कुलपति नागेश्वर राव की अध्यक्षता में गठित की गई थी । पहली समिति का काम लॉकडाउन को देखते हुए छात्रों की परीक्षा लेने, दाखिले तथा नए सत्र शुरू के बारे में सिफारिश देना था।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज और विश्वविद्यालय के बंद होने से की स्थिति में छात्रों से किसी तरह परीक्षाएं ली जाये ताकि अकादमिक सत्र में विलंब ना हो और समय पर नए सत्र की शुरुआत हो सके । दूसरी समिति का काम इस बारे में रिपोर्ट करना था कि लॉकडाउन को देखते हुए देशभर में किस तरह छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा की सुविधा दी जा सकती है। यूजीसी ने कल देर रात जारी अपने बयान में कहा है कि इन दोनों समितियों ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। अब यूजीसी की बैठक में इन रिपोर्टों पर विचार किया जाएगा और अगले सप्ताह कोई फैसला किया जाएगा तथा नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
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                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2020 10:32:01 +0530</pubDate>
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