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                <title>Paddy Sowing - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>धान की सीधी बिजाई कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना प्रगतिशील किसान करनवीर सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले तीन सालों दौरान धान की सीधी बिजाई के आए सार्थक नतीजे: करनवीर सिंह पटियाला(सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। पटियाला जिले के ब्लाकॅ नाभा के गाँव बौड़ां कलां का पढ़ा-लिखा प्रगतिशील किसान करनवीर सिंह जो कि कद्दू कर धान की फसल लगाने वाली परंपरा को तोड़कर लंबे समय से अपने खेतों में धान की सीधी बिजाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/farmer-karanvir-singh-became-a-source-of-inspiration-for-other-farmers-by-direct-sowing-of-paddy/article-33362"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/karnaveer.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>पिछले तीन सालों दौरान धान की सीधी बिजाई के आए सार्थक नतीजे: करनवीर सिंह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला(सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)।</strong> पटियाला जिले के ब्लाकॅ नाभा के गाँव बौड़ां कलां का पढ़ा-लिखा प्रगतिशील किसान करनवीर सिंह जो कि कद्दू कर धान की फसल लगाने वाली परंपरा को तोड़कर लंबे समय से अपने खेतों में धान की सीधी बिजाई कर दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन रहा है। धान की सीधी बिजाई के तजुर्बे सांझे करते करनवीर सिंह ने बताया कि पंजाब में पारंपरिक तरीके से धान की काश्त करने से जहां पानी का स्तर नीचे जा रहा है और हर साल बोर, ट्यूबवैल गहरे हो रहे हैं और वहीं ही किसानों पर यह अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ जहां धान की सीधी बिजाई की विधि अपनाकर पानी की बहुत बचत होती है और साथ ही लेबर और समय की भी बचत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">करनवीर सिंह के बताया कि उसने कृषि और किसान भलाई विभाग के सहयोग से पिछले तीन सालों से अपने 15 एकड़ खेतों में धान की सीधी बिजाई की है। इस विधि के साथ से जहां पानी की बचत होती है , वहीं धान को बीमारियों और कीड़े -मकौड़ों के हमले से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सीधी बिजाई करने से उत्पादन में भी विस्तार हुआ है और उत्पादन 32 क्विंटल से अधिक प्रति एकड़ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि कद्दू करके धान की फसल लगाने से जहां जमीन की पानी ग्रहण करने की क्षमता खत्म होती है, वहीं ही आगे वाली फसल गेहूँ को भी नुक्सान होता है। इस मौके मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. यशवंत राय ने कहा कि किसान धान की पारंपरिक कद्दू वाली बिजाई की जगह सीधी बिजाई की तकनीक अपनाकर मुख्य मंत्री भगवंत मान की ओर से ऐलानी प्रति एकड़ 1500 रुपए की सहायता राशि प्राप्त करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होेंने कहा कि पंजाब सरकार ने सीधी बिजाई की तकनीक से धान की लगवाई की शुरूआत 20 मई, 2022 से करने की छूट भी दी है। उन्होंने बताया कि जिले में 65000 हेक्टेयर क्षेत्रफल को धान की सीधी बिजाई तकनीक नीचे लाने के लिए जुगतबंदी की जा रही है। उन्होंने किसानों को सीधी बिजवाई करने की अपील करते कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए किसान कद्दू कर धान की फसल लगाने की पारपंरिक तकनीक को छोड़कर विशेषज्ञों द्वारा सुझायी नयी तकनीक का प्रयोग को प्राथमिकता दें।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 10:09:52 +0530</pubDate>
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                <title>धान की बुआई के लिए नई मशीन का विकास</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने छोटे किसानों को ध्यान में रखकर मजदूरों और पानी की बचत कर धान की बुआई करने वाली ऐसी मशीन का विकास किया है जिससे पैदावार में वृद्धि के साथ ही लागत खर्च में भारी कमी आती है। मानव और बैटरी चालित इस मशीन से सूखे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने छोटे किसानों को ध्यान में रखकर मजदूरों और पानी की बचत कर धान की बुआई करने वाली ऐसी मशीन का विकास किया है जिससे पैदावार में वृद्धि के साथ ही लागत खर्च में भारी कमी आती है। मानव और बैटरी चालित इस मशीन से सूखे खेत में धान की पंक्तियों में बुआई की जाती है जिससे परम्परागत रूप से की जानेवाली बुआई खर्च में प्रति एकड़ 3500 से 4000 रुपए तक की बचत होती है और उत्पादन भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ जाता है।</p>
<h3>मशीन से दो घंटे में डेढ़ एकड़ धान की बुआई</h3>
<p style="text-align:justify;">परम्परागत तरीके से धान लगाने के लिए पहले पौधशाला में इसके बिचड़े तैयार किए जाते हैं, फिर खेत को तैयार कर उसमें पानी जमा किया जाता है और इसके बाद मजदूर या मशीन से बिचड़े की खेत में रोपाई की जाती है। विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण कॉलेज के सहायक प्राध्यापक सुभाष चन्द्र ने बताया कि मात्र 27 किलो वजन की मशीन से दो आदमी दो घंटे में आधा एकड़ धान की बुआई कर सकते हैं । मोटर चालित मशीन से दो घंटे में डेढ़ एकड़ धान की बुआई की जा सकती है । इस मशीन से गेंहू की बुआई भी बेहतरीन तरीके से की जाती है ।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ चन्द्र ने बताया कि मानव चालित मशीन का मूल्य 12000 रुपए और मोटर चालित मशीन का मूल्य 70000 रुपए है। एक निजी बीज निर्माता कंपनी ने 528 मशीनों की खरीद की है और उसने इससे एक हाइब्रिड किस्म के धान की बुआई का प्रयोग किया जिसके दौरान परम्परागत विधि की तुलना में उसका उत्पादन 35 प्रतिशत तक बढ़ गया। खेतों की अच्छी तरह जुताई के बाद मशीन से धान की बुआई की जाती है । इससे उचित गहराई में बीज जाता है। बुआई के 24 घंटे के अंदर खेत की हल्की सिंचाई कर दी जाती है । इससे बीजों में जबरदस्त अंकुरण होता है तथा तेजी से जड़ों का विकास होता है जिससे इनमें बड़ी संख्या में किल्ले निकलते हैं और फसल की उपज बढ़ जाती है ।</p>
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<p> </p>
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                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2020 13:54:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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