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                <title>Lockdown 3 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>लॉकडाउन में सब्जी उत्पादक किसान बेहाल, खेतों में बहाई पकी पकाई फसलें, सरकार ने मदद न की तो कर लेंगे खुदकुशी </title>
                                    <description><![CDATA[ टमाटर की पकी-पकाई फसल पर ट्रैक्टर चलाते किसान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/if-the-government-did-not-help-you-would-commit-suicide/article-15409"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/tomato-growers-warning.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">धरने पर बैठे तोशाम क्षेत्र के टमाटर उत्पादक किसानों ने दी चेतावनी</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>बोले : मंडियों में लागत का चौथा हिस्सा भी नहीं मिलता</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला दिया। इस दौरान आमजन को भले थोड़ी परेशानी हो रही है, लेकिन अन्नदाता बेहाल हो गया है। भिवानी में टमाटर उत्पादक किसान इतने मजबूर हो चुके हैं कि अब वो अपनी पकी-पकाई टमाटर की फसल पर ट्रैक्टर चला रहे हैं। इनके खेतों में टमाटर व शिमला मिर्च के ढेर कूड़े के ढ़ेर बन चुके हैं। मुंह छुपाने को जगह ना मिलने पर ये धरने पर बैठे हैं और मदद ना मिलने पर जान देने की कह रहे हैं। किसान नेताओं ने सरकार से इन्हें बचाने के लिए प्रति एकड़ 70 हजार रुपए मुआवजा देने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिले के तोशाम क्षेत्र में रमेश नामक किसान ने साल 2007 में सरकार द्वारा बागवानी की बढ़ावे देने से प्रेरित होकर परंपरागत खेती छोड़ सब्जी उगानी शुरू की। रमेश से प्रभावित होकर आसपास के गांवों के किसान भी सब्जी उगाने लगे। आज इनके हजारों एकड़ में टमाटर व शिमला मिर्च के ढेर लगे हैं। आज इन ढेरियों की हकीकत और असलियत सुनकर सरकार का दिल पसीजे या ना पसीजे पर आपका दिल भी पसीजेगा और रोंगटे भी खड़े हो जाएंगे।</p>
<h4><strong>भावांतर योजना को बताया छलावा, बंद हो ये योजना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के सटे तोशाम क्षेत्र के इन किसानों ने बालू रेत के तपते टिलों में हजारों टन टमाटर व शिमला मिर्च का उत्पादन किया। लेकिन लॉकडाउन के चलते कुछ मंडियां बंद हो गई तो कुछ में इनके टमाटर कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं। कई बार तो कोई खरीदार ना मिलने पर वापस अपने खेत में लाकर डालना पड़ता है। टमाटर व शिमला मिर्च ना बिकने या कौड़ियों के भाव बिकने पर अनाथ अन्नदाता अब आंदोलन पर है। ये अपने खेतों में धरने पर बैठे हैं। देश के प्रगतिशिल किसान रमेश की बात करें तो इन्हें हर सरकार व विभाग से गोल्ड मैडल मिल चुके हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इन्हें किसानों के लिए बनने वाली पांच सदस्यीय कमेटी का सदस्य भी बनाया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">इनसे प्रभावित होकर आसपास के गांवों के किसानों ने परंपरागत खेती करना बंद किया था।</li>
<li style="text-align:justify;">पर आज रमेश खुद धरने पर है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">रमेश का कहना है कि जो किसान मुझ से प्रभावित हुए थे, आज वे उन्हें मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। रमेश ने बताया कि टमाटर के उत्पादन पर प्रति किलो चार रुपए और उसे तोड़ने, छटाई करने और मंडी तक पहुंचे में चार रुपये प्रति किलो मिलाकर 8 रुपये प्रति किलो खर्च आता है जबकि मंडियों में करीब दो रुपए किलो बिकता है और फिर वहीं टमाटर लोगों को दुकानों व रेहड़ियों पर 20 से 30 रुपये किलो मिलता है। साथ ही उन्होंने भावांतर योजना को किसानों के सत्यानाश की योजना बताते हुए इसे बंद करने की मांग की।</p>
<h4><strong>लॉकडाऊन में किसान पर बहुत बड़ी मार पड़ी है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं रोशन व सुरेश नामक किसान ने भी बताया कि टमाटर ने उन्हें बर्बाद कर दिया है। राजकुमार ने यहां तक कहा कि उसने 53 एकड़ में टमाटर की बुआई की और बिक्री न होने पर बर्बाद हो गया। अब घर वाले घर में नहीं घुसने देते। किसानों का कहना है कि अगली फसल की बुआई बिजाई कैसे करें, कैसे खाने के लिए गेहूं व तूड़ी खरीदें, कैसे बच्चों के स्कूल की फीस दें। इन किसानों का कहना है कि सरकार ने उनकी मदद नहीं कि तो खुदकुशी के लिए मजबूर हो जाएंगे।<br />
वहीं धरने पर पहुंचे किसान नेता कमल प्रधान ने कहा कि ये वो किसान हैं, जो सरकार की नीतियों से प्रभावित हुए थे। लेकिन लॉकडाऊन में इन पर बहुत बड़ी मार पड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कमल प्रधान ने सरकार से मांग की है कि पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो 20 लाख करोड़ रुपये का पैकज दिया है, उसमें किसानों को भी शामिल किया जाए और इन किसानों को भरपाई के तौर पर 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। अन्नदाता की इस हालत पर भले सरकार का दिल नापिघले, पर जिस फसल को किसान हजारों रुपये खर्च कर, दिन रात मेहनत कर, अपने बच्चों की तरह पालता है, उस पर ट्रैक्टर चलाते किसान का दिल जरूर रोता है। अब देखना होगा कि जिस बागवानी योजना को बढ़ावा देने की सरकार बात करती है, उसी की मार झेल रहे इन किसानों के आंसु पोछने कोई आएगा या नहीं।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2020 17:22:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉकडाऊन। सड़कों पर उतरे हजारों मजदूर, प्रशासन के फूले हाथ-पांव</title>
                                    <description><![CDATA[आज भुखमरी के शिकार मजदूरों को लंबा पैदल कूच कर फैक्ट्री के आगे धरना लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/started-picket-in-front-of-factory-gate-7-km-from-bhawanigarh/article-15378"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/workers-fury-demonstration.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">कर्फ्यू में वेतन न मिलने पर मजदूरों के गुस्से में आया उबाल, ‘सोशल डिस्टैंस’ की जमकर उड़ी धज्जियां</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर/भवानीगढ़(विजय सिंगला)।</strong> बठिंडा -चण्डीगढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित आईएएल फैक्ट्री में ठेकेदार अधीन काम करते अलग-अलग राज्य के अलग अलग सैंकड़ों मजदूरों ने कोरोना वायरस दौरान वेतन न मिलने व खाने का प्रबंध न होने के खिलाफ अपना संघर्ष तेज करते आज दूसरे दिन भवानीगढ़ से 7 किलोमीटर पैदल चल कर फैक्ट्री के गेट के आगे धरना शुरू कर दिया। मजदूरों के इस गुस्सा को देखते प्रशासन और पुलिस के हाथ पांव फूल गए।</p>
<p style="text-align:justify;">धरने को संबोधित करते हुए जमीन प्राप्ति संघर्ष समिति के नेता मुकेश मलौद, गुरमुक्ख सिंह, फैक्ट्री मजदूर राजेश कुमार, लवकुश कुमार, राम बाबू, सिवराज कुमार, मिथलेश कुमार, शिव प्रकाश कुमार, रमिन्दरा सिंह, विनय कुमार, प्रदीप कुमार और राहुल कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस के बचाव के लिए लगाए लॉकडाऊन दौरान मजदूरों को वेतन व बोनस देने से मैनेजमैंट ने जवाब दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मजदूरी बन्द होने के कारण वह अपने घर का खर्चा चलाने से बेबस हो गए हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मैनेजमैंट ने उनके खाने का भी कोई प्रबंध नहीं किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मजदूरों ने भवानीगढ़ में अपने क्वार्टरों के आगे रोष प्रदर्शन किया था, परन्तु मैनेजमैंट की ओर से मसला हल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आज भुखमरी के शिकार मजदूरों को लंबा पैदल कूच कर फैक्ट्री के आगे धरना लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसी दौरान एसडीएम व डीएसपी संगरूर सत्तपाल शर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी धरने वाली जगह पर पहुंच गई। मजदूरों ने प्रशासन के खिलाफ रोष जाहिर किया कि उनको अपने राज्यों में भेजने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान प्रशासन के प्रयासों से मजदूरों के सदस्यों के साथ फैक्ट्री के अधिकारियों की मीटिंग हुई, जिसमें मजदूरों को 5-5 हजार रुपए के कूपन देने और ओवरटाईम सोमवार से लागू करने का वायदा किया गया, परन्तु वेतन व अन्य मांगों पर सहमति न होने के कारण धरना जारी है।</p>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2020 19:44:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुग्राम से ट्रेन में 1424 प्रवासी लोगों को दरभंगा भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होते व ट्रेन में सवार श्रमिक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/1424-pravasi-gurugram-sent-to-darbhanga-by-train/article-15376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/gurugram-to-darbhanga.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">लॉकडाउन : दूर रास्तों में फंसे लोगों को घर पहुंचाने की कवायद तेज</h2>
<h3 style="text-align:center;">(Gurugram to Darbhanga)</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)।</strong> कोरोना महामारी के इस दौर में लॉकडाउन की स्थिति में हरियाणा सरकार द्वारा प्रवासी नागरिकों को उनके घर नि:शुल्क पहुंचाने में गुरुग्राम जिला से 6 स्पेशल ट्रेन अलग-अलग राज्यों के लिए चलाई जा चुकी हैं। जिनमें 8500 से ज्यादा प्रवासी नागरिकों को उनके घर भिजवाया जा चुका है। शनिवार को भी यहां रेलवे स्टेशन से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई, जिसमें 1424 यात्रियों को बिहार के दरभंगा के लिए रवाना किया गया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष तौर पर ध्यान रखा गया। जिले के रेलवे स्टेशन से बिहार के दरभंगा के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेन रवाना की गई। रेलवे स्टेशन पर प्रवासी नागरिकों को उनके गृह जिला में रवाना करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।</p>
<h4><strong>थर्मल स्कैनिंग और सोशल डिस्टेसिंग का रखा गया पूरा ख्याल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पुलिसकर्मियों से लेकर, सिविल डिफेंस सहित अन्य अधिकारियों की निगरानी में यह ट्रेन रवाना की गई। बिहार के दरभंगा के लिए यह ट्रेन सुबह 11 बजे रवाना हुई। रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों के प्रवेश से पूर्व उनकी थर्मल स्कैनिंग से स्वास्थ्य की जांच की गई और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया गया कि सभी श्रमिकों ने फेस मास्क पहने हों। प्रवासी श्रमिक अपने परिजनों से मिलने को लेकर उत्साहित थे, वहीं उनके चेहरों पर मौन संतुष्टि का भाव दिखाई दे रहा था। जाते हुए वे हरियाणा की संस्कृति और हरियाणा सरकार की ओर से की गई मदद के विचार अपने साथ जरूर लेकर गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला उपायुक्त अमित खत्री के मार्गदर्शन में बिहार के दरभंगा जाने वाले प्रवासी नागरिकों के सुखद भविष्य की कामना करते हुए उन्हें सुरक्षा कवच के रूप में मास्क, पानी की बोतल व बिस्कुट के पैकट देते हुए रवाना किया गया। उन्हें ट्रेन की टिकट नि:शुल्क उपलब्ध करवाई गई थी। श्रमिकों ने हरियाणा सरकार और गुरुग्राम प्रशासन का तालियां बजाते हुए आभार व्यक्त किया। आज रेलवे स्टेशन पर अक्षर फाउंडेशन द्वारा भी प्रवासी श्रमिकों के लिए एक हजार फूड पैकेट तैयार करवाए गए थे, जिसमें यात्रियों के लिये दही, रोटी, सब्जी व पानी की बोतलें थी।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2020 18:49:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विडंबना। पांव के छाले लिए बढ़ रहे मंजिल की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[ गुरुग्राम की सड़क से जाते प्रवासी मजदूर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/future-concerns-forced-migrant-workers-to-travel-on-foot/article-15375"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/migrant-workers-to-travel-o.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong> भविष्य की चिंता में पैदल ही पलायन करने को मजबूर हुए प्रवासी श्रमिक</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>बस एक ही अरमां, किसी तरह घर पहुंच जाएं</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजय मेहरा/सच कहूँ गुरुग्राम।</strong> बहुत छाले हैं उसके पांवों में, वह जरूर उसूलों पर चला होगा…। किसी शायर ने यह बहुत गहरी बात लिखी है। यह बात आज उन मजदूरों और उनके परिवारों पर सटीक बैठती है, जो अपने परिवार के भविष्य की चिंता लेकर और अपनों के बुलावे पर हिम्मत करके पैदल ही अपने घरों को निकले हुए हैं।  गुरुग्राम समेत देशभर में इनके ही मजबूत हाथों से गहरी जमीन से लेकर गगनचुम्बी इमारतें खड़ी हुई हैं। बंजर जमीन पर फसलें भी लहलहाई हैं। जिन हम फर्राटे भरते हैं, वे मजबूत सड़कें भी इनके हाथों से बनी हैं। बिना बाधा के निकलने को फ्लाईओवर भी इनके श्रम का परिणाम है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जहां दुनियाभर के लोगों का उपचार होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">वे अस्पताल भी इन्हीं लोगों के परिश्रम से बने हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">मतलब हर क्षेत्र में इनकी भागीदारी किसी न किसी रूप में रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">आज इनकी बदकिस्मती ही कही जाएगी कि ना तो वो अस्पताल ही इनके काम आ रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जो इनके स्वास्थ्य का ख्याल रख सकें।</li>
<li style="text-align:justify;">ना वो गगनचुंबी इमारतों में इन्हें शरण मिल रही है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सड़कें जरूर काम आर्इं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हां, एक बात जरूर है। सड़कें इनके काम आ रही हैं। जिन सड़कों पर चलते हुए ये अपने घरों की ओर बढ़ रहे हैं। उन सड़कों पर चलते हुए इनके पांव में छाले भी पड़ रहे हैं। बहुतों की गाड़ियों के रौंदे जाने से जान भी जा रही है। जिन सड़कों पर हम गाड़ियों में फर्राटा भर रहे हैं, वे सड़कें अपने निर्माणकर्ताओं के खून से लाल भी हो रही हैं। उनके शरीर की खाल से और भी प्लेन हो रही हैं। बड़ी गाड़ियों से रौंदे जाने पर तो इनका मांस भी खुर्चना पड़ता है। सरकार ने इनके लिए रेलगाड़ियां भी चलाई हैं, बसें भी चलाई हैं। व्यवस्था के नाम पर रजिस्ट्रेशन करने को कहा जा रहा है। ऐसे में इन लोगों के लिए कोई कुछ नहीं सोच रहा कि इन्हें रेल व बसें मुहैया क्यों नहीं हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पांवों में चप्पलें नहीं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पैदल ही अपने परिवारों को लेकर अपने घरों को जा रहे इन श्रमिकों, मजदूरों के पांवों में चप्पलें भले ही ना हो, छाले जरूर हैं। किसी तरह से छालों में पट्टी, पॉलिथीन आदि बांधकर ये सफर को सुहाना बनाने का प्रयास करते हैं। यह ठीक है कि इनके पांव के छाले सफर में बाधा नहीं बन सकते। क्योंकि ये हौंसले के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इन्हें पता है कि अगर छाले देख लिए, महसूस कर लिया तो अपनी मंजिल तक पहुंचना कठिन हो जाएगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को नहीं आने देते कोई दिक्कत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इनके बच्चे कभी पैदल चलते हुए थक जाते हैं तो उन्हें कंधे पर बिठा लेते हैं और सफर जारी रहता है। कोई ब्रिफकेस पर तो कोई अन्य जुगाड़ करके बच्चों को ले जा रहा है। 21वीं सदी में चंद्रयान लांच कर चुके हमारे देश में इन प्रवासियों की यह तस्वीर हमारी व्यवस्था, हमारे विकास को धत्ता बताती है।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/future-concerns-forced-migrant-workers-to-travel-on-foot/article-15375</link>
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                <pubDate>Sat, 16 May 2020 18:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा: भिवानी से पंचकूला के लिए चली पहली बस</title>
                                    <description><![CDATA[ बस में चढ़ने से पहले यात्रियों के सैनेटाईजर से हाथ धुलवाते।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/first-bus-from-bhiwani-to-panchkula/article-15340"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/bhiwani-to-panchkula.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">लॉकडाउन : घरों में कैद लोगों को हरियाणा सरकार ने दी थोड़ी राहत</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Bhiwani to Panchkula)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>यात्रियों से नहीं वसूला बढ़ा हुआ किराया : जीएम</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> कोरोना महामारी के चलते थमी रोड़वेज की बसें एक बार फिर सड़कों पर दौड़नी शुरू हो गई हैं। बात करें भिवानी की तो यहां से पंचकूला के लिए पहली बस सेवा शुरू की गई है। खास बात ये है कि इन बसों में बुकिंग केवल आॅॅनलाईन होगी। हर तरह की सावधानी बरतते हुए पहले दिन 16 यात्री पंचकूला के लिए रवाना हुए। लॉकडाउन में रोड़वेज का चक्का भी रूक गया था, लेकिन जिस प्रकार से सरकार द्वारा लॉकडाउन थ्री में राहत दी है, उसी के तहत रोड़वेज सेवा भी शुक्रवार से शुरू कर दी गई है। भिवानी से पहली बस सुबह 9 बजे पंचकूला के लिए चली। इस बस में बैठने के लिए और सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए 30 यात्रियों की जगह निर्धारित की गई थी। साथ ही यात्रा के लिए टिकट की बजाय आॅॅनलाइन बुकिंग की गई।</p>
<h4><strong>पहले दिन 16 यात्री पंचकूला के लिए हुए रवाना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जो यात्री यहां पहुंचे सबसे पहले उनकी आॅॅनलाइन टिकट चैक की गई। फिर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कर हाथों को सैनेटाइज कर बस में बैठाया गया। बस रवाना करने के लिए खुद जीएम रोड़वेज गुलाब सिंह दुहन मौके पर मौजूद रहे और हर व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पंचकूला के लिए एक बस आज चलाई गई है। जिसके लिए 18 लोगों ने आॅॅनलाइन बुकिंग करवाई थी, लेकिन दो ने रद्द करवा ली।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिसके चलते आज 16 यात्री पंचकूला के लिए रवाना हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">हर तरह की सावधानी बरतते हुए यात्रियों से किराया बढ़ा हुआ ना लेकर पहले वाला ही लिया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस संकट की घड़ी में हर कोई राहत चाहता है।</li>
</ul>
<h4><strong>सावधानियां बरतते हुए शुरू हुआ सफर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जैसे जैसे बुकिंग बढ़ेगी बस सेवा भी वैसी ही बढ़ा दी जाएगी। वहीं बस सेवा शुरू होने पर यात्री भी बेहद खुश दिखाई दिए। पंचकूला जा रहे यात्री शुभम ने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लगा बस सेवा शुरू होने पर। साथ ही कहा कि हर तरह की जो सावधानी हैं वो बरती जा रही हैं। इसी प्रकार सावधानी जारी रहनी चाहिए। हरियाणा रोड़वेज सेवा को मध्यम व गरीब वर्ग के लिए पूरे देश में सबसे सस्ती व सुरक्षित बस बेसा माना जाता है। लॉकडाउन के बाद भले ही आंशिक रूप से शुरू हुई हो, लेकिन इस सेवा के शुरू होने पर लगता है कि एक बार फिर जिवन पटरी पर लौटा है।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2020 17:46:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कल से फिर शुरू होगा प्रदेश में हरियाणा रोडवेज का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[आॅनलाइन बुकिंग: एक बस में केवल 30 सवारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। बस जहां से जिस जिले के लिए चलेगी, वहीं के बस अड्डे पर जाकर रूकेगी। इसके अलावा बीच में कहीं बस नहीं रूकेगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-roadways-journey-will-start-again-in-the-state-from-tomorrow/article-15306"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/haryana-roadways-journey.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> पहले चरण में चलेंगी 10 जिलों से बसें, केवल 30 सवारियों को होगी बस में चढ़ने की इजाजत (Haryana Roadways journey)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong> सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करना होगा जरूरी, गंतव्य स्थान से पहले नहीं रुकेंगी बसें</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> लॉकडाउन के तीसरे चरण के बीच हरियाणा में शुक्रवार से रोडवेज बसों का परिचालन शुरू होगा। हरियाणा रोडवेज की बसें एक बार फिर से सड़कों पर दौड़ती हुई दिखाई देंगी। पहले चरण में पंचकूला, अंबाला, महेंद्रगढ़, करनाल, सिरसा समेत कुछ जिलों में हर रोज दो से चार बसें तक चलाई जाएंगी। लोगों ने शारीरिक दूरी के नियम का पालन किया तो परिवहन व्यवस्था को सुचारू कर दिया जाएगा। वीरवार को बसों के टाइम टेबल और रूट तय कर दिए गए। फिलहाल 10 जिलों में बस सेवा शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बाबत जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने बताया कि सभी टिकटों की बुकिंग केवल आॅनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। एक बस में केवल 30 सवारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। बस जहां से जिस जिले के लिए चलेगी, वहीं के बस अड्डे पर जाकर रूकेगी। इसके अलावा बीच में कहीं बस नहीं रूकेगी। जिन-जिन जिलों में बसें चलाई जाएंगी, वहां बसों को सैनिटाइज करवाने का काम कर लिया गया है। रोडवेज बस अड्डों पर सोशल डिस्टेंसिंग के लिए पेंट से मार्किंग की जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:left;"><strong>इन जिलों में चलेगी बसें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पंचकूला: यहां से 9 बसें चलेंगी, एक बस पंचकूला-साहा-शाहाबाद-पिपली-करनाल फिर पंचकूला पहुंचेगी, दूसरी बस पंचकूला-अम्बाला कैंट-करनाल-रोहतक, तीसरी बस पंचकूला-रोहतक-चरखीदादरी-नारनौल, चौथी बस पंचकूला-रोहतक-रेवाड़ी, पांचवी बस पंचकूला-कैथल-हिसार, छठी बस पंचकूला-फतेहाबाद-सिरसा, 7वीं बस पंचकूला-कैथल-जींद-भिवानी, 8वीं बस पंचकूला-अम्बाला कैंट-पंचकूला, 9वीं बस पंचकूला-अम्बाला कैंट-पंचकूला जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अम्बाला: यहां 6 बसें चलेंगी, जो अम्बाला-करनाल-अम्बाला, अम्बाला-कैथल-अम्बाला और अम्बाला-पंचकूला-अम्बाला के रूट पर चलेंगी। तीनों रूट पर दो-दो बसों को अलग-अलग टाइम पर चलाने की व्यवस्था की गई है।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नारनौल: यहां से तीन बसें चलेंगी, जो नारनौल-चरखीदादरी-रोहतक-पंचकूला जाएगी। नारनौल-रेवाड़ी-नारनौल के बीच दो बसें चलाई जाएंगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रेवाड़ी: यहां से तीन बसें चलेंगी, जो रेवाड़ी-रोहतक-पंचकूला और दो बसें रेवाड़ी-नारनौल-रेवाड़ी के बीच चलेंगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कैथल: यहां से दो बसें चलेंगी, जो कैथल-अम्बाला-कैथल के रूट पर चलेंगी। जो सुबह 8.30 बजे और दोपहर 1.30 बजे चलेंगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>करनाल: यहां से दो बसें चलेंगी, जो करनाल-अम्बाला कैंट-करनाल के बीच चलेंगी। जो सुबह 8.30 बजे और दोपहर 1.30 बजे चलेंगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक: यहां से एक बस चलेगी, जो रोहतक-करनाल-अम्बाला कैंट-पंचकूला जाएगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सिरसा: यहां से एक बस चलेगी, जो सिरसा-फतेहाबाद-पंचकूला जाएगी।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी: यहां से एक बस चलेगी, जो भिवानी-जींद-कैथल से होते हुए पंचकूला पहुंचेगी। जिसका समय सुबह 9 बजे होगा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार: यहां से एक बस चलेगी, जो हिसार-कैथल से होते हुए पंचकूला पहुंचेगी। इसका समय भी सुबह 9 बजे रखा गया है।</strong></p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>टिकट केवल आॅनलाइन बुकिंग पर ही मिलेगी, सवारी की होगी थर्मल स्क्रीनिंग, मॉस्क पहनना होगा जरूरी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बस में कंडक्टर से टिकट नहीं मिलेगी, सवारी को पहले ही आॅनलाइन बुकिंग करनी होगी। आॅनलाइन पोर्टल https://ors.hartrans.gov.in/ के माध्यम से ही टिकट बुकिंग होगी। यात्रा के लिए मार्गों का विवरण व किराए से संबंधित जानकारी वेबसाइट पर दे दिया गया है। एक बस में 30 यात्रियों को ही बैठाया जाएगा। मास्क पहनना अनिवार्य होगा। आॅनलाइन बुक हुई कंफर्म टिकट देखकर ही बस अड्डे में एंट्री मिलेगी। बसों में टिकट नहीं मिलेगा। बस अड्डे में प्रवेश से पहले थर्मल स्क्रीनिंग होगी। बिना मास्क पहने यात्री को प्रवेश नहीं मिलेगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-roadways-journey-will-start-again-in-the-state-from-tomorrow/article-15306</link>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2020 19:24:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जालंधर से 1200 प्रवासी उन्नाव के लिए रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर सिटी: राज्य सरकार ने पहले चरण में भारतीय रेलवे द्वारा अपने प्रवासियों की परिवहन लागत को साझा करने के लिए 35 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/1200-migrant-laborers-leave-for-unnao-from-jalandhar/article-15302"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/migrant-laborers-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (एजेंसी)।</strong> पंजाब के जालंधर सिटी स्टेशन से गुरुवार को उत्तर प्रदेश के उन्नाव के लिए 32वीं श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से 1200 प्रवासी मजदूर अपने गृह नगर के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अब तक इन गाड़ियों को उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और अन्य सहित विभिन्न राज्यों में चलाने पर 2.02 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राज्य सरकार ट्रेनों में सवार होने वाले प्रवासियों के लिए खाना भी प्रदान कर रही है। (Migrant laborers)राज्य सरकार ने पहले चरण में भारतीय रेलवे द्वारा अपने प्रवासियों की परिवहन लागत को साझा करने के लिए 35 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। जालंधर प्रशासन को राज्य सरकार से यह धनराशि मिल गयी है जो रेलवे को सीधे पंजीकृत यात्रियों को टिकट प्रदान करने के लिए भुगतान किया जा रहा है ताकि प्रवासी अपने मूल राज्यों में मुफ्त जा सकें। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग की टीम ट्रेन में चढ़ने से पहले प्रत्एक प्रवासी मजदूर की स्क्रीनिंग कर रही है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2020 17:25:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रवासियों के सब्र का बांध टूटा, सड़क पर उतर बोले-‘हमें घर भेजो’</title>
                                    <description><![CDATA[ घर भेजे जाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते प्रवासी मजदूर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-migrants-lost-their-patience-they-came-on-the-road-and-said-send-us-home/article-15301"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/migrant-laborers-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">4 अप्रैल को हो चुका रजिस्ट्रेशन (Migrant laborers)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>जब भी कोई ट्रेन चलेगी तो इन्हें घर भेजा जाएगा : एसएचओ</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> भिवानी में वीरवार को लॉकडाऊन की मार और कोरोना का कहर झेल रहे प्रवासी मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया। इन प्रवासियों ने घर जाने के लिए अपनी बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन्होंने कहा कि ना रहने को है और ना खाने को। कहीं खाना मिलता है तो सोने को शमशान घाट मिलता है। हालांकि पुलिस ने अब इन्हें आश्रय स्थल में भेजा है और कहा है कि जब भी ट्रेन चलेगी इन्हें घर भेजा जाएगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">कोरोना महामारी प्रवासियों के लिए कोहराम बन रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरकार इन्हें घर भेजने के लिए ट्रेन चला रही और बसों को भी इनके राज्यों तक भेजा जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">बावजूद इसके अब भी अकेले भिवानी में हजारों प्रवासी हैं, जो घर जाने के लिए बेताब हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">और दर-दर भटक रहे हैं। इनके पास ना खाने को कुछ है, ना रहने को।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ऐसे ही कुछ प्रवासी लोगों का उस समय सब्र जवाब दे गया, जब इन्हें घर जाने का कोई रास्ता नहीं सुझा। इन्होंने बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अब गुस्सा प्रकट किया। इन प्रवासी मजदूरों ने बताया कि लॉकडाऊन के बाद उनके पास ना कोई काम है, ना पैसा। (Migrant laborers) ऐसे में ना कुछ खाने को बचा ना कुछ रहने को। इनका कहना है कि इनका रजिस्ट्रेशन 4 अप्रैल को हुआ था, लेकिन 8-10 दिन बाद भी घर नहीं भेजा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सूचना पाकर सिविल लाईन थाना प्रभारी विद्यानंद मौके पर पहुंचे और प्रवासियों को समझा-बुझाकर गुजरानी रोड़ स्थित आश्रय स्थल में भेजा। थाना प्रभारी विद्यानंद ने कहा कि इन सभी को आश्रय स्थल में खाने-पीने व रहने की व्यवस्था मिलेगी और जब भी कोई ट्रेन चलेगी इन्हें इनके घर भेजा जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-migrants-lost-their-patience-they-came-on-the-road-and-said-send-us-home/article-15301</link>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2020 17:12:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा: 800 प्रवासी मजदूरों को उत्तरप्रदेश के लिए किया रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[फोटो: सरसा: 02- डेरा सिकंदरपुर से रोडवेज की बसों से रवाना होते प्रवासी मजदूर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/800-migrant-laborers-left-for-uttar-pradesh/article-15275"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/migrant-laborers.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">खुशी। रवानगी से पूर्व सभी मजदूरों की स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई स्क्रीनिंग (Migrant Laborers )</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>एसडीएम व डीएसपी ने किया बसों को रवाना</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा।</strong> केंद्र सरकार की ओर से पूरे देशभर में प्रवासी मजदूरों को उनके प्रदेशों में घरों तक पहुंचाने के लिए चलाए गए अभियान की कड़ी में बुधवार को जिला सरसा प्रशासन ने भी रजिस्टर्ड किए गए करीब 800 उत्तरप्रदेश निवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए हरियाणा रोडवेज की बसों को यूपी के लिए रवाना किया। प्रशासन की ओर से एसडीएम सरसा जयवीर यादव व डीएसपी राजेश चेची के मार्गदर्शन में यूपी के इन प्रवासी मजदूर परिवारों को गांव सिकंदरपुर स्थित राधास्वामी सत्संगघर से रवाना किया गया।</p>
<h4>रोडवेज की 25 बसों से भेजा गया उत्तरप्रदेश</h4>
<p style="text-align:justify;">इनकी रवानगी से पूर्व सभी श्रमिकों की स्क्रीनिंग भी की गई। रवाना होने से पूर्व सभी श्रमिकों ने मिलकर हरियाणा सरकार व सरसा प्रशासन का आभार व्यक्त किया। काबिलेजिक्र है कि सरसा में विभिन्न खेत खलिहानों और अन्य श्रम से जुड़े कार्यों के लिए हजारों की संख्या में बिहार, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से श्रमिक अपने परिवारों सहित आए हुए हैं लॉकडाउन के बाद उनके पास न तो काम था और न ही पैसा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पुलिस उपाधीक्षक राजेश कुमार चेची ने बताया  हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">प्रशासन द्वारा यूपी से आए करीब 800 श्रमिकों को उनके घर भेजने की पूरी व्यवस्था की गई।</li>
<li style="text-align:justify;">हरियाणा रोडवेज की 25 बसों के माध्यम से यूपी स्थित बुलंदशहर पहुंचाने के लिए रवाना किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">इन 800 श्रमिकों को रोडवेज बसों में चढ़ाने के दौरान प्रशासन की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग की पूरी पालना करवाई गई।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">400 प्रवासी मजदूरों में से 96 श्रमिक 3 बसों में सरसा रवाना</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐलनाबाद (सच कहूँ/सुभाष)।</strong> स्थानीय प्रशासन ने सरकारी आदेशों की पालना करते हुए मंगलवार रात्रि को ऐलनाबाद में 400 प्रवासी मजदूरों में से 96 को 3 रोडवेज बसों में सरसा के लिए रवाना किया गया। सभी मजदूर ऐलनाबाद क्षेत्र में कृषि व मजदूरी का कार्य करते थे। तहसीलदार हरकेश गुप्ता ने बताया कि सरकार के आदेशानुसार श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच कर ऐलनाबाद से सरसा तक इन मजदूरों को भेजने के लिए तीन बसों की व्यवस्था की गई है और सरसा से आगे इनको जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज के नेतृत्व में आगे भेजने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गुप्ता ने बताया कि ऐलनाबाद में अलग-अलग राज्यों के करीब 400 प्रवासी मजदूर अलग-अलग कार्य करने के के लिए पहुंचे हुए थे। आज केवल उत्तर प्रदेश के 96 मजदूरों को ही यहां से भेजा गया है। इन सभी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा मुफ्त सुविधा प्रदान की गई है। इस अवसर पर पुलिस प्रशासन और पटवारी राजेंद्र जांगड़ा, मलकीत सिंह पटवारी, कुलदीप राय पटवारी व नगर पालिका से हेमंत कुमार मौके पर मौजूद रहे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2020 18:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशों से आए छात्र बोले&amp;#8230;या तो हमें अच्छी सुविधा दो, या घर भेज दो</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम के सेक्टर-21 स्थित कम्युनिटी सेंटर में बिना किसी सोशल डिस्टेंस के रह रहे विदेश से आए हरियाणवी छात्र।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">सेक्टर-21 कम्युनिटी सेंटर में हैं क्वारंटाइन</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Students from abroad)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>न सफाई और न नहाने की मिल रही सुविधा</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजय मेहरा/सच कहूँ गुरुग्राम।</strong> शुक्रवार को विदेशों से गुरुग्राम लाए गए छात्रों को यहां दुविधा हो रही है। जहां उन्हें क्वारंटाइन किया गया है, वहां न तो सफाई है और ना ही नहाने, धोने की सुविधा है। अब वे कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो वे विदेश में ही सही थे। यहां सुविधा के नाम पर महंगे होटलों में रहने को कहा जा रहा है, जो कि बहुत महंगे हैं। होटलों में रूम शेयर नहीं करने की शर्त भी रखी गई है, लेकिन यहां कम्युनिटी सेंटर में एक ही छत के नीचे 19 युवाओं को रखा जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">परेशान छात्र कह रहे हैं कि उन्हें अपने घर भेज दिया जाए।</li>
<li style="text-align:justify;">वे वहीं पर क्वारंटाइन हो जाएंगे।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">यहां सेक्टर-21 के कम्युनिटी सेंटर में विदेशों से लाकर क्वारंटाइन किए गए 19 हरियाणवी छात्रों में शामिल हिसार निवासी रोहित के अलावा अन्य जिलों से दीपक, अमित, लवप्रीत, रवि, केशव आदि ने कहा कि वे कल इंडिया यानी इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर दोपहर 12:30 बजे पहुंचे थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एयरपोर्ट पर जांच आदि होने के बाद गुरुग्राम के सेक्टर-21 कम्युनिटी सेंटर में करीब 02:30 बजे पहुंचे।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां पहुंचने के बाद जो अव्यवस्था थी, वह दुखद थी। यहां पर सफाई नहीं थी।</li>
<li style="text-align:justify;">नहाने के लिए पानी तक नहीं था।</li>
<li style="text-align:justify;">ना तो टॉयलेट में पानी और ना ही वॉश बेसिन में।</li>
<li style="text-align:justify;">उनका कहना है कि वे विदेश में ही सही थे।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां पर पहले से भी कुछ लोग रखे गए हैं।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">पैसे देकर रहने के लिए बताए ये नियम</h4>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित छात्रों का कहना है कि उन्हें तीन आॅप्शन यहां रहने को दिए गए थे। पहला तो यह कि फोर स्टार होटल में अगर ठहरना है तो वहां 4000 रुपए प्रति कमरे का किराया और टैक्स अलग से लगेगा। ओयो रूम लेकर रहना है तो 2500 रुपए और टैक्स अलग से। साथ ही शर्त रख दी कि एक कमरे में एक ही व्यक्ति रह सकता है। तीसरा यह सरकारी कम्युनिटी सेंटर था। उन्होंने कम्युनिटी सेंटर चुना।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अगर इतना खर्चा करना होता तो आते ही नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">छात्रों ने कहा कि अगर वे इतना खर्चा अगर करते तो फिर वापस क्यों आते। 70-80 हजार रुपए में तो उनके वहां पर भी दो महीने कट जाते। छात्रों ने सवाल उठाए कि अगर यहां एक साथ 19 को रखा जा रहा है तो फिर होटल, गेस्ट हाउस में कम से कम 2-3 छात्रों को तो साथ रहने की परमिशन दें। वे अपना खर्चा बांटकर कर लेंगे। लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही। वे अपनी सुरक्षा के लिए अपने देश लौटे हैं। यहां पर उनके लिए ना तो कोई सुरक्षा ही है और ना ही सुविधा। यहां चाय देने वाला भी मास्क, ग्लब्जपहनकर नहीं आता।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/students-from-abroad-said-either-give-us-good-facilities-or-send-us-home/article-15184</link>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2020 18:53:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिवानी से गयाजी के लिए स्पेशल ट्रेन कल</title>
                                    <description><![CDATA[लॉकडाऊन: 7 मई को भिवानी से श्रमिक स्पेशल के नाम से ट्रेन चलाई जाएगी, जो कि भिवानी से सीधी धार्मिक नगरी गयाजी जाएगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/special-train-from-bhiwani-to-gaya-tomorrow/article-15093"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/train.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">हिसार, रोहतक, अम्बाला से भी चलेंगी स्पेशल ट्रेन</h2>
<h3 style="text-align:center;">(Train from Bhiwani to Gaya)</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> लॉकडाऊन के दौरान भिवानी में फंसे बिहार के श्रमिकों के लिए अच्छी खबर है। वे जल्द ही अपने घर जा सकेंगे। प्रशासन उनके रजिस्ट्रेशन कर रहा है। 7 मई को भिवानी से श्रमिक स्पेशल के नाम से ट्रेन चलाई जाएगी, जो कि भिवानी से सीधी धार्मिक नगरी गयाजी जाएगी। कोरोना के चलते देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन कर दिया था। लॉकडाउन के कारण बिहार व यूपी के श्रमिक यहां फस गए थे। उन्हें भिवानी में रोका गया था। अब तक वे श्रमिक परेशान थे। परेशान हो भी क्यों न, क्योंकि उन लोगों ने जो मेहनत मजदूरी करके कमाया था, उन्हें जीवन यापन करने के लिए यही पर ही खर्च करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">मजदूरी करने वाले श्रमिक बार-बार मांग कर रहे थे कि उन्हें घर भेजा जाए। मजदूरों की इन्हीं मांग को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार से ट्रेन चलाने की अनुमति मांगी थी। भिवानी की रेलवे स्टेशन की एएसएम कामिनी चौहान ने बताया कि राज्य सरकार की मांग पर बीकानेर मंडल ने हरियाणा को 6 ट्रेन दी हैं। जो कि हिसार से एक ट्रेन चलेगी। वहीं भिवानी से 7 मई को ट्रेन गयाजी के लिए चलेगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अंबाला व रोहतक से भी ट्रेन चलाई जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि किसी को दिक्कत नही होने दी जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">ट्रेन में सोशल डिस्टनसिंग रखी जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही ट्रेन को सेनिटाइजर से धोया जाएगा।</li>
<li style="text-align:justify;">किसी प्रकार की किसी को दिक्कत नही होने दी जाएगी।</li>
</ul>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/special-train-from-bhiwani-to-gaya-tomorrow/article-15093</link>
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                <pubDate>Wed, 06 May 2020 18:01:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंडीगढ़ में कर्फ्यू हटा, लॉकडाउन रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[दुकानों में पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकेंगे। शहर में सभी को मास्क पहन कर चलना तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। चंडीगढ़ में प्रवेश करने पर वाहन चालकों की थर्मल स्कैनिंग की जाएगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (एजेंसी)।</strong> केंद्र शासित क्षेत्र चंडीगढ़ प्रशासन ने रविवार-सोमवार आधी रात से कर्फ्यू हटा लिया और शहर में अब केवल 17 मई तक लॉकडाउन रहेगा। प्रशासन ने रविवार देर शाम इस सम्बंध में फैसला लेने के बाद आदेश जारी किए। आदेशों में शहरवासियों को अनेक रियायतें दी गई हैं तथा शहर में फिर से आर्थिक गतिविधियां शुरू करने का फेसला लिया गया है। (Continuous Lockdown) आदेशों के तहत शहर में सोमवार से नॉन कंटेनमेंट जोन की सभी अंदरूनी मार्किट सुबह 10 बजे से सायं छह बजे तक आॅड-ईवन फामूर्ले के आधार पर खुली रहेंगी। इसी तरह आॅफिस, अस्पताल और डिस्पेंसरी जाने के लिये शहर में वाहन भी सुबह सात बजे से सायं सात बजे तक चल सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी और सीमित संख्या में कर्मचारियों के साथ निजी कार्यालय, अस्पताल और डिस्पेंसरी भी खुल जाएंगे। हालांकि सेक्टरों को विभाजित करने वाली सड़कों के किनारे, मध्य मार्ग और सैक्टर-17 की मार्किट, मॉल आदि बंद रहेंगे। शराब की दुकानें खुल जाएंगी लेकिन अहाते बंद रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर में पटेल मार्केट, कृष्णा मार्किट, सदर बाजार और पालिका बाजार समेत सभी प्रमुख बाजार, रेस्त्रां, बॉर, मिठाई की दुकानें, होटल, शॉपिंग कम्पलैक्स, मल्टीपलैक्स, स्वीट शॉप, अपनी मंडी, होटल, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सम्पर्क सेंटर और नाई के दुकानें एवं सैलून पहले की तरह ही बंद रहेंगे। हालांकि दवाईयों की दुकाने सभी सातों दिन पहले ही तरह खुली रहेंगी। खाने की आॅनलाइन डिलीवरी नहीं होगी</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/curfew-removed-in-chandigarh-lockdown-will-remain/article-15023</link>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2020 16:36:59 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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