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                <title>Epidemic - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Epidemic RSS Feed</description>
                
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                <title>महामारीमुक्त भविष्य के लिए चमगादड़ों को उनके प्राकृतिक प्रवासों में रहने देना होगा: अध्ययन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम चमगादड़ों को अकेला छोड़ दें और उन्हें उनके प्राकृतिक वास में ही रहने दें तो महामारी (Epidemic) की आशंका को कम कर सकते हैं। ‘द लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ’ पत्रिका में इस संबंध में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है। वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी (डब्ल्यूसीएस), यूएस के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bats-are-the-source-of-dangerous-virus/article-48597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/chamgadar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम चमगादड़ों को अकेला छोड़ दें और उन्हें उनके प्राकृतिक वास में ही रहने दें तो महामारी (Epidemic) की आशंका को कम कर सकते हैं। ‘द लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ’ पत्रिका में इस संबंध में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी (डब्ल्यूसीएस), यूएस के साथ मिलकर शोध करने वाले कॉरनेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शोधकतार्ओं ने कहा कि हम नहीं जानते कि चमगादड़ के वायरस का सटीक तरीके से कैसे पता लगाया जा सकता है जिसकी वजह से कोविड-19 महामारी आई और 2003 में सार्स कोरोना वायरस महामारी आई। (Epidemic)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="म्यांमार में भूकंप से दो लोगों की मौत" href="http://10.0.0.122:1245/earthquake-kills-two-in-myanmar/">म्यांमार में भूकंप से दो लोगों की मौत</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">इन खतरनाक वायरसों का स्त्रोत हैं चमगादड़ (Epidemic)</h3>
<p style="text-align:justify;">चमगादड़ों को रेबीज, मारबर्ग फिलोवायरस, हेंड्रा और निपाह पैरामाइक्सोवायरस, मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस) कोरोना वायरस जैसे विषाणुओं का स्रोत माना जाता है और फ्रूट बैट (एक प्रकार का चमगादड़) को इबोला वायरस का स्रोत माना जाता है। शोधकतार्ओं ने कहा कि यह विश्लेषण वैश्विक रूप से मानवता के मूल्य को रेखांकित करता है कि हम चमगादड़ों से डरें नहीं या उन्हें हटाने या मारने की कोशिश नहीं करें क्योंकि ये सभी गतिविधियां सिर्फ उन्हें तितर-बितर करने में ही मददगार होंगी और इससे उनके जहां-तहां प्रसारित होने में मदद मिलेगी। Epidemic</p>
<h3 style="text-align:justify;">खतरनाक वायरस पशुओं से आते हैं इंसानों में | (Epidemic)</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वास्तव में खतरनाक वायरस का पशुओं से मानव में संचरण होता है, ऐसे में मानवता ही एकमात्र वह जरिया है जिससे एक और महामारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। डब्ल्यूसीएस की अंतरराष्ट्रीय नीति की उपाध्यक्ष सुजैन लीबरमैन ने कहा, ‘‘आठ अरब लोगों की आबादी वाले विश्व में हम वन्यजीव एवं हमारे आस-पास के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अपने अंतरसंपर्क को अनदेखा नहीं कर सकते हैं। (Epidemic)</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हम पशुओं से होने वाली अगली महामारी नहीं चाहते हैं तो हमें निश्चित रूप से प्रकृति के साथ मानवीय रिश्ते में बदलाव लाना होगा और इसकी शुरूआत चमगादड़ों से की जा सकती है।’’ अध्ययन में प्रकृति विशेष रूप से वन्यजीव एवं खासकर चमगादड़ों के साथ टूटे रिश्ते को बदलने का आह्वान किया गया है। (Epidemic)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 14:56:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अब दुनिया पर इबोला जैसी महामारी का खतरा, 88% मृत्यु दर</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा (एजेंसी)। दुनिया के सामने अब एक और नई महामारी का खतरा बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपात चेतावनी जारी की है कि दुनिया भर में इबोला जैसी महामारी मारबर्ग का प्रकोप बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू ये है कि इस महामारी में संक्रमित लोगों के मरने की दर 88% तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/now-the-world-is-at-ri-of-an-epidemic-like-ebola-88-death-rate/article-25949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/ebola.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जिनेवा (एजेंसी)।</strong> दुनिया के सामने अब एक और नई महामारी का खतरा बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपात चेतावनी जारी की है कि दुनिया भर में इबोला जैसी महामारी मारबर्ग का प्रकोप बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू ये है कि इस महामारी में संक्रमित लोगों के मरने की दर 88% तक जा सकती है। मारबर्ग वायरस का केस पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी में मिला है और अब विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि वायरस काफी दूर तक फैल सकता है। अगर इससे बचना है तो इसको तत्काल खत्म करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मातशिदिसो मोइती कहते हैं कि मारबर्ग वायरस के फैलने की आशंका काफी दूर तक है। ऐसे में हमें इसे जल्द रोकना होगा। उन्होंने कहा कि हम गिनी के स्वास्थ्य अधिकारियों संग मिलकर काम कर रहे हैं, जिनके पास इबोला से जंग जीतने का अनुभव है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने पुष्टि की थी कि गिनी में मारबर्ग वायरस की चपेट में आने से जान गंवाने वाले व्यक्ति के संपर्क में चार लोग आए थे। उसने कहा कि पश्चिमी अफ्रीकी देश में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कर्मियों को नियुक्त किया गया है। गिनी में मारबर्ग वायरस का केस उस वक्त सामने आया है जब ये देश इबोला महामारी से मुक्त हुआ है। मारबर्ग के कुछ केस दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, केन्या, युगांडा और कांगो में भी सामने आए हैं। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं संभव हो पाया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 12:18:42 +0530</pubDate>
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                <title>आरोप लगाने के बजाये महामारी पर ध्यान दे अमेरिका : चीन</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। चीन के द्वारा कोरोना वायरस ‘कोविड 19’ को नियंत्रण में करने के संबंधित सवालों को दरकिनार करते हुए अमेरिका में चीन राजदूत सुई तीआंकी ने अमेरिकी सरकार को आरोप-प्रत्यारोप लगाने का खेल बंद कर महामारी से निपटने की सलाह दी है। शिन्हुआ के अनुसार तीआंकी ने मंगलवार को कहा कि चीन पर आरोप लगाना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/america-should-focus-on-epidemic-instead-of-accusing-china/article-15112"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/corona-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> चीन के द्वारा कोरोना वायरस ‘कोविड 19’ को नियंत्रण में करने के संबंधित सवालों को दरकिनार करते हुए अमेरिका में चीन राजदूत सुई तीआंकी ने अमेरिकी सरकार को आरोप-प्रत्यारोप लगाने का खेल बंद कर महामारी से निपटने की सलाह दी है। शिन्हुआ के अनुसार तीआंकी ने मंगलवार को कहा कि चीन पर आरोप लगाना सही नहीं होगा क्योंकि इससे महामारी के खिलाफ लड़ाई कमजोर होगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने में देरी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमेशा चीन को कोसने की प्रवृति राजनितिक लाभ के लिए की जाने वाली गंदी राजनीति है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस महामारी से चीन सबसे पहले पीड़ित होने वाला देश था इसलिए चीन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने का सवाल ही नहीं होता। राजदूत ने कहा कि यदि चीन को कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी तो अमेरिका को भी 2008 में हुए वित्तीय संकट के लिए भरपाई करनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2020 11:33:50 +0530</pubDate>
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