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                <title>Lychee - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बिहार से शाही लीची ब्रिटेन को की गई निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। बिहार से लजीज स्वाद वाले जीआई प्रमाणित शाही लीची की इस मौसम की पहली खेप ब्रिटेन को निर्यात की गई। शाही लीची के निर्यात के लिए पादप-स्वच्छता प्रमाणन पटना में नव स्थापित प्रमाणन सुविधा से जारी किया गया। इस फल को बिहार स्थित मुजफ्फरपुर के किसानों से प्राप्त किया गया और सिरा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/royal-lychee-exports-to-britain-from-bihar/article-23878"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/royal-lychee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> बिहार से लजीज स्वाद वाले जीआई प्रमाणित शाही लीची की इस मौसम की पहली खेप ब्रिटेन को निर्यात की गई। शाही लीची के निर्यात के लिए पादप-स्वच्छता प्रमाणन पटना में नव स्थापित प्रमाणन सुविधा से जारी किया गया। इस फल को बिहार स्थित मुजफ्फरपुर के किसानों से प्राप्त किया गया और सिरा इंटप्राइजेज इसका निर्यात कर रहा है। शाही लीची के निर्यात की सुविधा के लिए कृषि उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकरण (एपीडा) ने बिहार के कृषि विभाग सहित किसानों, निर्यातकों और आयातकों जैसे अन्य हितधारकों के साथ सहभागिता के साथ पहल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">शाही लीची के निर्यात के लिए कल आयोजित इस कार्यक्रम में एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु और बिहार के कृषि विभाग के मुख्य सचिव एन. सरवण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। लीची के जीवन की अवधि कम होने के चलते प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित उत्पादों के लिए निर्यात के अवसरों का पता लगाने की जरूरत है। बिहार से अन्य देशों को भी लीची का निर्यात करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चीन और जापान में इसे पसंद किया जाता है</h4>
<p style="text-align:justify;">जरदालू आम, कतरनी चावल और मगही पान के बाद साल 2018 में जीआई प्रमाणन प्राप्त करने वाला शाही लीची बिहार से चौथा कृषि उत्पाद था। शाही लीची के लिए जीआई पंजीकरण मुजफ्फरपुर स्थित लीची ग्रोअर्स एसोसिएशन आॅफ बिहार को दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, चंपारण, बेगूसराय जिले और आसपास के क्षेत्रों में शाही लीची की बागवानी के लिए अनुकूल जलवायु है। चीन के बाद भारत विश्व में लीची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लीची का पारदर्शी, स्वादिष्ट बीजचोल या खाने योग्य गुदा भारत में एक टेबल फ्रूट के रूप में लोकप्रिय है। वहीं चीन और जापान में इसे सूखे या डिब्बाबंद रूप में पसंद किया जाता है। बिहार लीची के उत्पादन मामले में अव्वल है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोड-मैप प्रदान करेगा</h4>
<p style="text-align:justify;">राज्य कृषि-निर्यात योजना तैयार करने में एपीडा, बिहार सरकार को सुविधा प्रदान कर रहा है, जो राज्य से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोड-मैप प्रदान करेगा। राज्य कृषि-निर्यात योजना को अंतिम रूप देने के बाद मखाना, आम, लीची और अन्य फलों एवं सब्जियों की निर्यात क्षमता का उपयोग किया जा सकता है। बिहार सरकार, एपीडा और अन्य एजेंसियों के सहयोग से सीमा शुल्क निकासी सुविधा, प्रयोगशाला परीक्षण सुविधा, पैक-हाउस और प्री-कूलिंग सुविधाएं, जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रयास कर रही है, जो राज्य की कृषि निर्यात क्षमता का उपयोग करेगा और इसे बढ़ावा देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार के कृषि विभाग के अनुसार इस अवसर पर एपीडा के अध्यक्ष ने कहा कि कोविड महामारी के समाप्त होने के बाद खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े व्यापार संघों के साथ मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर पटना में एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही एपिडा बिहार के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को फल एवं सब्जी के निर्यात के लिए प्रशिक्षण देगा। फलों और सब्जियों के सेल्फ लाइफ को बढ़ाने के लिए एपीडा राज्य में पैक हाउस बनाने में भी मदद करेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 May 2021 11:00:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अम्फान चक्रवात लीची के लिए वरदान</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। चक्रवात अम्फान के कारण कुछ राज्यो में भले ही बेहद तबाही मची है लेकिन यह लीची की फसल के लिए वरदान साबित हुई है। चक्रवात अम्फान के कारण हुई वर्षा से न केवल लीची का आकार बड़ा होगा बल्कि इसकी मिठास बढ़ेगी , गूदे की मात्रा बढ़ेगी तथा इसका लाल रंग और निखर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/amphan-cyclone-boon-for-lychee/article-22609"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/lychee-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> चक्रवात अम्फान के कारण कुछ राज्यो में भले ही बेहद तबाही मची है लेकिन यह लीची की फसल के लिए वरदान साबित हुई है। चक्रवात अम्फान के कारण हुई वर्षा से न केवल लीची का आकार बड़ा होगा बल्कि इसकी मिठास बढ़ेगी , गूदे की मात्रा बढ़ेगी तथा इसका लाल रंग और निखर कर सामने आयेगा। वर्षा होने से जमीन में आयी नमी और तापमान में आई गिरावट के कारण लीची की फसल को ये फायदे होंगे। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुज़फ़्फ़रपुर के निदेशक विशाल नाथ के अनुसार बिहार ,पश्चिम बंगाल तथा कुछ अन्य स्थानों में एक दो दिन के दौरान हुई वर्षा लीची के लिए वरदान बनकर उभरी है।</p>
<h3>वर्षा से शाही किस्म की लीची का आकार बड़ा होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक रुप से पक कर लीची बाजार में आने वाली है लेकिन उससे पहले हुई वर्षा से शाही किस्म की लीची का आकार बड़ा होगा , गूदे की मात्रा बढ़ेगी , मिठास और खटास बेहतरीन होगी तथा इसका लाल रंग और निखरेगा। डॉ विशाल नाथ के अनुसार हाल हाल तक लीची का औसत वजन जो 17.50 ग्राम था वह अब बढ़ कर 20 ग्राम से अधिक हो जाएगा तथा हरा युक्त लाल रंग गहरा लाल हो जाएगा । लीची की मिठास 18 डिग्री ब्रिक्स से बढ़ कर 19 से 22 डिग्री ब्रिक्स तक हो जाएगी तथा गूदा 10.5 ग्राम से बढ़ कर 14 ग्राम तक हो जाएगा ।</p>
<p style="text-align:justify;">अम्लता अभी 1.28 प्रतिशत है जो घटकर 0.5 प्रतिशत तक रह जाएगी तथा बीज का आकार 3.7 ग्राम से घटकर 2.8 ग्राम तक रह जाएगा। डॉ विशाल नाथ ने बताया कि लीची का लाल होना इसके परिपक्व होने का एकमात्र सूचकांक नहीं है । पिछले दिनों तेज धूप थी जिसके कारण भी कुछ स्थानों में लीची का रंग लाल हो गया था, इसका यह अर्थ नहीं है कि वह प्राकृतिक रुप से पक गया है । किसानों को लीची तोड़ने से अभी बचना चाहिए और बेहतर कीमत हासिल करनी चाहिए।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/40-basis-points-reduction-in-repo-rate-loan-expected-to-be-cheap/"><strong>यह भी पढ़े – रेपो दर में 40 आधार अंकों की कटाैती, ऋण सस्ते होने की उम्मीद</strong></a></p>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Apr 2021 13:19:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लीची रोग प्रतिरोधक, एक व्यक्ति खा सकता है नौ किलो लीची</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। लीची न केवल रोग प्रतिरोधक बल्कि कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर गुणवत्तापूर्ण फल है और कोई भी व्यक्ति एक दिन में नौ किलो तक लीची खा सकता है। लीची जो जल्दी ही देश के बाजारों में दस्तक देने वाली है , यह कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , विटामिन सी का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/lychee-increase-immunity-a-person-can-eat-nine-kilos-of-litchi/article-19344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/lychee-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> लीची न केवल रोग प्रतिरोधक बल्कि कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर गुणवत्तापूर्ण फल है और कोई भी व्यक्ति एक दिन में नौ किलो तक लीची खा सकता है। लीची जो जल्दी ही देश के बाजारों में दस्तक देने वाली है , यह कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , विटामिन सी का खजाना और कई अन्य पोषक तत्वों से परिपूर्ण है तथा इसका ए ई एस ( चमकी बुखार ) से कोई लेना देना नहीं है । भाभा परमाणु केंद्र मुंबई , राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्द्र पुणे और केंद्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुज़फ़्फ़रपुर ने लीची से चमकी बुखार को लेकर जो शोध किया है, उसमें इस बीमारी से उसका कोई संबंध नहीं बताया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक विशाल नाथ ने बताया , ” लीची के फल पौष्टिक होते हैं जो जग जाहिर है । लीची के गूदे में विटामिन सी , फाॅस्फोरस और ओमेगा 3 जैसे तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करते हैं जिससे मानव स्वस्थ होता है ।” डॉ विशाल नाथ ने बताया कि पिछले साल लीची को चमकी बुखार से दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से जोड़ा गया था जिससे किसानों और व्यापारियों को बहुत समस्या हुई थी । इसी के बाद संस्थान ने लीची से बीमारी को लेकर अनुसंधान कराया था ।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि लीची के गूदे का स्विस चूहे पर प्रयोग किया गया । भूखे और सामान्य चूहे को दस घंटे तक लीची का गूदा भरपेट खिलाया गया जिसके कारण उसमें हाइपोग्लासीमिया, भारहीनता अथवा वजन में कमी नहीं होने के साथ ही उसके सामान्य जीवन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं देखा गया । उसके लीवर , किडनी और दिमाग ठीक से कम कर रहे थे और उसमें कोई बदलाव नहीं देखा गया । चूहों को लीची खाने से कोई परेशानी नहीं हुई।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 20 Oct 2020 03:49:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शाही लीची तैयार, जल्द देगी बाजार में दस्तक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुजफ़्फरपुर ने कहा है कि शाही लीची अब अपने गुणवत्ता के अनुरूप तैयार हो गई है और किसानों को इसे तोड़कर बाजार में लाना शुरू कर देना चाहिए। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक विशाल नाथ ने गुरुवार को बताया कि शाही लीची में मिठास लगभग 20 डिग्री ब्रिक्स […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/royal-lychee-ready-it-will-soon-come-in-the-market/article-15706"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/royal-lychee.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुजफ़्फरपुर ने कहा है कि शाही लीची अब अपने गुणवत्ता के अनुरूप तैयार हो गई है और किसानों को इसे तोड़कर बाजार में लाना शुरू कर देना चाहिए। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक विशाल नाथ ने गुरुवार को बताया कि शाही लीची में मिठास लगभग 20 डिग्री ब्रिक्स और वजन 22 ग्राम हो गया है जो पेड़ से तोड़ने के लिए उपयुक्त है। लीची के आकार में एक-दो दिन में कुछ और वृद्धि हो सकती है लेकिन दूर दराज के बाजार के लिए इसे पेड़ से तोड़ा जा सकता है। डॉ विशाल नाथ कहा कि चाइना लीची की फसल भी अच्छी है और यह छह-सात जून तक पक कर तैयार हो जाएगी । जिन क्षेत्रों में पुरबा हवा चल रही है वहां के किसानों को कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2020 14:12:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना को टक्कर देने वाली लीची तैयार, जल्द देगी दस्तक</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कोरोना के विरूद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में कारगर लीची की गुणवत्तापूर्ण फसल न केवल तैयार है बल्कि जल्दी ही बाजार में दस्तक देगी। कार्बोहाइड्रेट , विटामिन , कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर लीची की फसल एक सप्ताह बाद देश के महानगरों समेत अन्य बाजारों में आ जाएगी। देश में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/lychee-ready-for-protect-from-corona/article-15270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/lychee-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कोरोना के विरूद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में कारगर लीची की गुणवत्तापूर्ण फसल न केवल तैयार है बल्कि जल्दी ही बाजार में दस्तक देगी। कार्बोहाइड्रेट , विटामिन , कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर लीची की फसल एक सप्ताह बाद देश के महानगरों समेत अन्य बाजारों में आ जाएगी। देश में पहली बार कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के मद्देनजर किसान इसके मूल्य को लेकर आशंकित है लेकिन प्रशासन और रेलवे इसके परिवहन को लेकर हर संभव कदम उठाने को तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुज़फ़्फ़रपुर के निदेशक विशाल नाथ ने बताया कि इस साल बार-बार वर्षा होने तथा तापमान के कम होने के कारण लीची की फसल के तैयार होने में 10 से 15 दिन की देर हो रही है। आम तौर पर 20 मई से लीची की फसल बाजार में आती थी लेकिन इस बार इसके 30 मई तक बाजार में आने की उम्मीद है। डॉ विशाल नाथ के अनुसार 100 ग्राम लीची में 16.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.5 ग्राम प्रोटीन , 171 मिलीग्राम पोटेशियम , 10 मिलीग्राम फास्फोरस , 71.5 मिलीग्राम विटामिन सी , पांच मिलीग्राम कैल्सियम , ओमेगा 3 और 6 ,आयरन , सोडियम तथा कई अन्य तत्व पाए जाते हैं।</p>
<h3>बिहार में सालाना करीब तीन लाख टन लीची का उत्पादन</h3>
<p style="text-align:justify;">बिहार में सालाना करीब तीन लाख टन लीची का उत्पादन होता है । इसमें से 40 प्रतिशत का खपत महानगरों में होता है जबकि 38 से 40 प्रतिशत का खपत राज्यों के बाजारों में होता है । कुछ लीची का निर्यात किया जाता है जबकि पांच छह प्रतिशत लीची का प्रसंस्करण किया जाता है। इस बार करीब 15 प्रतिशत लीची के प्रसंस्करण की योजना तैयार की गई है। लॉकडाउन के कारण परिवहन की समस्या है जिसके कारण किसान इसके अच्छे मूल्य को लेकर आशंकित है। प्रशासन ने किसानों की आशंका को ध्यान में रख कर निजी परिवहन एजेंसियों और रेलवे के साथ बैठक की है।</p>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2020 14:42:56 +0530</pubDate>
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