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                <title>sach kahoon special Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गोरीवाला के जीवनदास तनेजा ने दादी व माता-पिता के संस्कारों की बदौलत 30 साल तक बिना वेतन पढ़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[जीवनदास तनेजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। उपतहसील गोरीवाला के गांव गोदीकां से एक शिक्षक 30 मार्च को राजकीय विद्यालयों में लगभग 30 वर्ष का अवैतनिक कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। जिनका नाम है जीवनदास तनेजा। उन्होंने बिना किसी वेतन के उन सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/goriwalas-jeevandas-taneja-enters-the-india-book-of-records/article-82813"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/goriwala-jeevan-dass.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">जीवनदास तनेजा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज</h3>
<p style="text-align:justify;">गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। उपतहसील गोरीवाला के गांव गोदीकां से एक शिक्षक 30 मार्च को राजकीय विद्यालयों में लगभग 30 वर्ष का अवैतनिक कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। जिनका नाम है जीवनदास तनेजा। उन्होंने बिना किसी वेतन के उन सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित करने में अपना जीवन समर्पित किया, जहां अध्यापकों की कमी थी। उनकी इस सेवा के लिए उनका नाम जेम्स बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। शिक्षक का सपना बच्चों को शिक्षित करना था, जो अब अपने अंतिम चरण में है। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह सामाजिक कार्य उनकी दादी और माता-पिता के अच्छे संस्कारों के कारण संभव हो पाया। उनके माता-पिता हमेशा कहते थे कि पैसा जिंदगी के लिए जरूरी है, पर सब कुछ नहीं है; अगर संभव हो तो जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए। इसी सीख से प्रेरित होकर उन्होंने शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता वाले स्थानों पर पढ़ाने का संकल्प लिया। शुरूआत में यह कार्य थोड़ा मुश्किल था, लेकिन उनके परिवार, मां, पत्नी, बच्चों और मित्रों ने इसमें बहुत सहयोग किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसी ने सराहा तो किसी ने कहा कर रहा अपना समय खराब: जीवनदास | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">जीवनदास तनेता कहते हैं कि इन 30 सालों में मेरी कोशिश यह रही कि मेरे कारण बच्चों को पढ़ाई में कोई परेशानी न झेलनी पड़े और बिना किसी जरूरी कार्य कि मैं घर पर न रहूं। इन वर्षों में बहुत से बुद्धिजीवी, शिक्षाविद साथियों से मिलन हुआ। जिन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया, परंतु कुछ ऐसे साथी भी मिले जिन्होंने मुझे अपना समय व्यर्थ करने की बात भी कही। अधिकतर अध्यापक साथियों का व्यवहार बहुत ही मैत्रीपूर्ण और सराहनीय रहा। विभिन्न ग्राम पंचायत, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं, क्लब व अकेडमी, एसडीएम डबवाली, उपायुक्त द्वारा विशेष अवसरों पर सम्मानित किया गया। विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से भी मेरा मनोबल को बढ़ाया गया। जिसमें सच कहूं का विशेष सहयोग रहा। मेरा मनोबल उसे समय काफी प्रफुल्लित हुआ जब मेरा नाम इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स व जेम्स बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">साक्षरता मिशन के तहत लिया मुफ्त पढ़ाने का निर्णय | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">जीवनदास तनेजा ने 1986 में नेशनल कॉलेज सरसा से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान साक्षरता मिशन की शुरूआत हुई, जिसमें उन्होंने बिना किसी मेहनताना के हिस्सा लेकर अपना मिशन शुरू किया। वर्ष 1996 में, राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय गोरीवाला में अध्यापकों की कमी के कारण उन्हें पढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने इस विद्यालय में लगातार नौ वर्षों तक लड़कियों को शिक्षा दी। इसके बाद उन्होंने छह महीने राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय कालुआना में और फिर तीन महीने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल अहमदपुर दारेवाला में अपनी सेवाएं दीं।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल 2006 से 7 मई 2017 तक,उन्होंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला अहमदपुर दारेवाला में बच्चों को शिक्षा प्रदान की। 8 मई 2017 से, स्टाफ की कमी के कारण ग्राम पंचायत गोदिका के आग्रह पर,वे राजकीय प्राथमिक पाठशाला गोदिका में अवैतनिक सेवाएं दे रहे हैं। वे 20 मार्च 2026 को 62 वर्ष पूरे कर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त होंगे। 31 मार्च 2026 तक निरंतर जारी रहेंगी। दूरस्थ शिक्षा से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। Sirsa News</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:00:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sirsa : कभी लगते थे मेले, आज खुद अकेले!</title>
                                    <description><![CDATA[कभी धर्माथी सेठ नानक चंद ने करवाया था कुएं का निर्माण गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर रानियां से ऊंटों पर लेकर आते थे पीने का पानी ओढां, (राजू/सच कहूँ )। एक वो समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की (Sirsa News) बेहद किल्लत होती थी। जिसके चलते कुएं, बावड़ी व डिग्गियों सहित अन्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/sarsa/philanthropist-seth-nanak-chand-got-the-well-constructed/article-47768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/odhan-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कभी धर्माथी सेठ नानक चंद ने करवाया था कुएं का निर्माण</h3>
<ul>
<li><strong>गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर रानियां से ऊंटों पर लेकर आते थे पीने का पानी </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, (राजू/सच कहूँ )।</strong> एक वो समय था जब ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की (Sirsa News) बेहद किल्लत होती थी। जिसके चलते कुएं, बावड़ी व डिग्गियों सहित अन्य जलस्त्रोतों का निर्माण करवाया जाता था। सांझ-सवेरे इन जलस्त्रोतों पर अच्छी-खासी भीड़ उमड़ती थी और हंसी-ठिठोली का भी खूब दौर चलता था। लेकिन समय के साथ ही सब-कुछ लुप्त हो गया। आज खंडहर के रूप में खड़े ये जलस्त्रोत इतिहास की याद ताजा करवाते हैं, मानों ये कह रहे हैं कि कभी हमारा भी समय था।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आकाशीय गर्मी से प्रलय का खतरा ज्यादा" href="http://10.0.0.122:1245/there-is-a-high-ri-of-destruction-due-to-celestial-heat/">आकाशीय गर्मी से प्रलय का खतरा ज्यादा</a></p>
<p style="text-align:justify;">पाठकों को आज एक ऐसे एतिहासिक धरोहर से रू-ब-रू करवा रहे हैं जिस पर (Sirsa News) कभी सुबह-शाम मेले लगा करते थे। गांव नुहियांवाली में गांव के बाहरी छोर पर जोहड़ के किनारे खंडहर का रूप धारण किए खड़ा कुआं अपने आप में करीब 216 वर्ष पुराना इतिहास समेटे हुए है। गांव की युवा पीढ़ी भले ही इसके इतिहास से अनभिज्ञ है, लेकिन गांव के बडेÞ बुजुर्ग आज भी इसके इतिहास के बारे में चर्चा करते हैं। बुजुर्गांे के अनुसार गांव बसने के उपरान्त तकरीबन 10-12 साल बाद गांव के एक धर्माथी सेठ नानक चंद ने इसका निर्माण करवाया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गांव में यह इकलौता जलस्त्रोत था कुआं | Sirsa News</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव के बड़े बुजुर्गांे के अनुसार गांव बसने के बाद पेयजल किल्लत आड़े आई। ऐसे में गांव के लोग करीब 30 किलोमीटर दूर का सफर तय कर रानियां से ऊंटों पर पानी लाया करते थे। जिसके बाद गांव के धर्माथी सेठ नानक चंद ने धनराशि खर्च की तथा ग्रामीणों ने उसमें भरपूर सहयोग किया। बताया जाता है कि कुएं का जल पीने में मीठा होने के कारण आस-पड़ोस के गांवों के लोग भी यहां से ऊंटों पर मटके लादकर पानी भरने आया करते थे। कुएं से पानी निकालने के लिए बैलों व ऊंटों को जोड़कर चमड़े का बारा प्रयोग में लिया जाता था। बारे से पानी निकालकर बाहर बनाई गई दो बड़ी होद में डाला जाता था। एक बारा में तकरीबन 10 मटके पानी निकलता था। जिसके बाद लोग होद में लगी टूंटियों से पानी भरते।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव के कुछ बुजुर्गाें की मानें तो एक बार यहां गायों के झुंड को पानी नहीं पिलाने दिया गया, जिसके चलते इसका पानी तबदील हो गया। गांव में जलस्त्रोत बनने के बाद लोग धीरे-धीरे कुएं से किनारा करने लगे। इस समय भले ही पेयजल के अनेक संसाधन हैं लेकिन ये ऐतिहासिक कुआं खंडहर अवस्था में खड़ा आज भी अपनी याद ताजा करवा रहा है। गांव में कुछ अप्रिय घटनाओं के बाद इस कुएं को ऊपर से लोहे से सरिये लगाकर बंद कर दिया गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>सरसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 12:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब विद्यार्थी सीखेंगे कोडिंग और रोबोटिक्स, तैयार कर सकेंगे वेबसाइट</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा। जिला के सात राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में अध्ययनरत और गणित, अंग्रेजी विषयों और कंप्यूटरों में गहरी रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। क्योंकि अब इन स्कूलों में विद्यार्थियों को कोडिंग व रोबोटिक्स करना सिखाया जाएगा। ताकि विद्यार्थी अंकगणितीय बौद्धिक विकास के साथ ही गेम, एप्लीकेशन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/now-students-will-learn-coding-and-robotics-will-be-able-to-create-website/article-29331"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/students-will-learn-coding-and-robotics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा।</strong> जिला के सात राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में अध्ययनरत और गणित, अंग्रेजी विषयों और कंप्यूटरों में गहरी रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। क्योंकि अब इन स्कूलों में विद्यार्थियों को कोडिंग व रोबोटिक्स करना सिखाया जाएगा। ताकि विद्यार्थी अंकगणितीय बौद्धिक विकास के साथ ही गेम, एप्लीकेशन आदि खुद बना पाए। विद्यार्थी डिजिटल के दौर में बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के लिए कंप्यूटर की दुनिया में आगे बढ़ेंगे। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूलों में कक्षा छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कोडिंग व रोबोटिक्स सिखाने का फैसला लिया है। इससे पहले स्कूलों के शिक्षकों को गुरुग्राम में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">30-30 विद्यार्थियों के बनाए जाएंगे ग्रुप</h4>
<p style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति स्कूलों में कोडिंग व रोबोटिक्स सीखने के लिए 30-30 विद्यार्थियों के ग्रुप बनाए जाएंगे। इसके बाद प्रतिदिन एक से दो घंटे तक कोडिंग का कोर्स करवाया जाएगा। जिसका कंटेंट आनलाइन टीचर को दिया जाएग। कोडिंग को सरल भाषा में कंप्यूटर की भाषा भी कह सकते हैं। जो कुछ कंप्यूटर पर करते हैं। वह कोडिंग के माध्यम से होता है। कोडिंग का इस्तेमाल कर वेबसाइट, गेम या फिर एप तैयार कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को तकनीक के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी भी मिलती रहेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जिले में यहां है राजकीय माडल संस्कृति स्कूल</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अनाज मंडी, सरसा</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नाथूसरी चौपटा</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बप्पा</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, डबवाली</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ऐलनाबाद</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कालांवाली</li>
<li style="text-align:justify;">राजकीय माडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रानिया</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">‘‘राजकीय माडल संस्कृति स्कूलों में छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कोडिंग व रोबोटिक्स करना सिखाया जाएगा। यह गणित, अंग्रेजी व कंप्यूटर विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी को कोर्स करवाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों के एक एक अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>शशि सचदेवा, सहायक परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/now-students-will-learn-coding-and-robotics-will-be-able-to-create-website/article-29331</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Dec 2021 19:13:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गतौली के रूस्तम ने जीता कृषक रत्न अवार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[बना देश का प्रथम बुल, 11 करोड़ लग चुकी है कीमत मुर्राह नस्ल की ‘ए प्लस’ ग्रेड का झोटा है रूस्तम सच कहूँ/कर्मबीर,जुलाना। गतौली गांव के पुलिस कर्मचारी दलेल के रूस्तम झोटे ने हिमाचल के नौणी में आयोजित प्रतियोगिता में कृषक रत्न अवार्ड जीता है। यह प्रतियोगिता हिमाचल के सोलन जिले के नौणी में 18 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/rustom-of-gatauli-won-krishak-ratna-award/article-29305"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/krishak-ratna-award-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">बना देश का प्रथम बुल, 11 करोड़ लग चुकी है कीमत</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>मुर्राह नस्ल की ‘ए प्लस’ ग्रेड का झोटा है रूस्तम</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/कर्मबीर,जुलाना।</strong> गतौली गांव के पुलिस कर्मचारी दलेल के रूस्तम झोटे ने हिमाचल के नौणी में आयोजित प्रतियोगिता में कृषक रत्न अवार्ड जीता है। यह प्रतियोगिता हिमाचल के सोलन जिले के नौणी में 18 दिसंबर को आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में रूस्तम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और पंजाब के झोटे ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। इससे पहले भी रूस्तम वर्ष 2013-14 में लगातार ट्राफियां जीतकर चैंपियन रह चुका है। रूस्तम के विजेता बनने से गांव और आस-पास के क्षेत्र में खुशी का माहौल बना हुआ है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पुरूषोतम रूपाला ने प्रथम स्थान हासिल करने वाले रूस्तम के मालिक दलेल को सम्मानित किया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">यह है खुराक</h4>
<p style="text-align:justify;">5.5 फुट ऊंचाई व 14.9 की लंबाई वाले रूस्तम की प्रतिदिन खुराक 300 ग्राम घी, 3 किलोग्राम चना, आधा किलो मैथी, 100 ग्राम बादाम, 5 किलोग्राम दूध, साढ़े तीन किलोग्राम गाजर है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">500 रुपये से शुरू हुआ इनामों का सिलसिला</h4>
<p style="text-align:justify;">रूस्तम के बैठने के लिए मैट बिछा रखे हैं। रूस्तम ने ईनाम जीतने का सिलसिला गांव में ही कॉफ रैली में शुरू किया था। इस रैली में रूस्तम ने 500 रुपये जीते थे। इसके बाद रूस्तम का ट्राफी जीतने का सिलसिला जारी रहा। यह झोटा पिछले कुछ समय में अपने नाम कई ट्राफी व सम्मानित पत्र अपने नाम कर चुका है। वर्ष 2014 में झज्जर में हुई पशु चैंपियनशिप में पहला स्थान प्राप्त किया। इसी वर्ष में एडीआरआई अदंत में जो करनाल व हिसार में आयोजित हुई थी, प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा पिछले दिनों मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्राद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पशु प्रतियोगिता में दो दांत में टापर था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पूरा परिवार करता है पालन-पोषण</h4>
<p style="text-align:justify;">गांव गतौली के दलेल ने बताया कि वह कई सालों से मुर्राह नस्ल के पशु पालता है। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान द्वारा ही मुर्राह नस्ल के इस झोटे का नामकरण किया हुआ है। पूरा परिवार रूस्तम का पालन-पोषण अपने बच्चों से ज्यादा देख रेख से कर रहा है। दलेल ने बताया कि रूस्तम की कीमत 11 करोड़ लग चुकी है, लेकिन रूस्तम को बेचने से इंकार कर दिया। दलेल ने बताया कि रूस्तम की माँ अभी भी उसके पास है, जो 25.530 किलोग्राम दूध निकालने का रिकार्ड है।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Dec 2021 19:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को वाटर लोगिंग और सेम की समस्या से मिलेगा छुटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा सरकार ने बनाई योजना योजना का लाभ लेने के लिए करना होगा रजिस्ट्रेशन चंडीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में वाटर लोगिंग और जमीन में सेम की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत योजना बना ली गई है। इससे जुड़ा पोर्टल जनवरी महीने में लॉन्च किया जाएगा। दिसंबर महीने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/farmers-will-get-rid-of-the-problem-of-waterlogging-and-beans/article-29223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/farmers-will-get-rid-of-the-problems.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>हरियाणा सरकार ने बनाई योजना</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>योजना का लाभ लेने के लिए करना होगा रजिस्ट्रेशन</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)।</strong> मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में वाटर लोगिंग और जमीन में सेम की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत योजना बना ली गई है। इससे जुड़ा पोर्टल जनवरी महीने में लॉन्च किया जाएगा। दिसंबर महीने में इस योजना का स्वरूप सामने आ जाएगा। हरियाणा सरकार ने बड़े स्तर पर इस समस्या से निपटने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सवाल का जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेम या वाटर लोगिंग की समस्या प्रदेश के लिए नई नहीं है, इससे काफी जमीन प्रभावित है। करीब 4 से 5 लाख एकड़ जमीन में सेम व वाटर लोगिंग की समस्या है। प्रदेश सरकार ने सबसे पहले 1 लाख एकड़ जमीन से वाटर लोगिंग व सेम की समस्या से निपटने की योजना बना ली है। जनवरी महीने में पोर्टल के माध्यम से किसान आवेदन मांगे जाएंगे, जो किसान सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करेगा, वहां इस समस्या के समाधान के लिए काम शुरू किया जाएगा। पानी की निकासी पाईप, ड्रेन या वहां की मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक की जाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">खेतों की सिंचाई के लिए नालों का पुननिर्माण</h4>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि सरकार ने खेतों की सिंचाई के लिए पानी की खालों के सम्बन्ध में ‘‘नवनिर्माण/पुनर्वास/पुननिर्माण एवं खालों का विस्तार 2021’’ नामक नीति जारी की है। उन्होंने कहा कि खालों के पुनर्वास के लिए न्यूनतम आयु मानदंड बीस (20) वर्ष है (लागत का 1 प्रतिशत किसानों द्वारा वहन करने की शर्त के साथ) विशेष परिस्थितियों में 15 वर्ष से अधिक उम्र तथा 75 प्रतिशत से ज्यादा क्षतिग्रस्त हों गए हो ऐसे खालों के पुननिर्माण बारे भी (लागत का 25 प्रतिशत किसानों द्वारा वहन करने की शर्त के साथ) विचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त दोनों ही मामलों में किसानों को आउटलेट के सीसीए के न्यूनतम 30 प्रतिशत क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत कवर करने के लिए सहमति देनी होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">‘जमीन अधिग्रहण पर परिवार के एक आश्रित को नौकरी का प्रावधान’</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के सहकारिता मंत्री डा. बनवारी लाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित नीति के तहत अधिग्रहित की गई भूमि के मालिक के परिवार के एक आश्रित को नौकरी प्रदान करने का प्रावधान है। डा. बनवारी लाल शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान लगाए गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 19:44:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दर्शकों को लुभा रहे लकड़ी पर उभरे कला के ये रंग</title>
                                    <description><![CDATA[घर की साज-सज्जा को लगाएंगे चार-चाँद 500 से लेकर 12500 रुपये तक है सामान की कीमत सच कहूँ, देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में 2 दिसंबर से ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर लगे सरस और क्राफ्ट मेले में विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के हाथों की अदभुत शिल्पकला को देखने दर्शक खिंचे आ रहे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/these-colors-of-art-emerged-on-the-wood-enticing-the-audience/article-29033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/colors-of-art-emerged-on-the-wood.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>घर की साज-सज्जा को लगाएंगे चार-चाँद</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>500 से लेकर 12500 रुपये तक है सामान की कीमत</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ, देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र।</strong> अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में 2 दिसंबर से ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर लगे सरस और क्राफ्ट मेले में विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के हाथों की अदभुत शिल्पकला को देखने दर्शक खिंचे आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सहारनपुर (यूपी) से आए आशु ने बताया कि वे कुरुक्षेत्र-धर्मक्षेत्र की पावन धरा पर लगे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पिछले 12 साल से आ रहे हैं और वे अपने साथ लकड़ी से बने सुंदर-सुंदर फ्लावर पोर्ट, डायनिंग टेबल, कॉफी टेबल, टी टेबल, बाक्स स्टूल, शाल स्टूल, कुर्सी रोड आयरन, ड्रेसिंग टेबल, ज्वैलरी बाक्स इत्यादि का सामान लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि अद्भुत कारगिरी से बना यह सामान बहुत ही सुंदर और घर की सज्जा-सजावट के लिए है और लोग इस सामान की जमकर खरीददारी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सामान को बनाने के लिए वे इस लकड़ी को असम से मंगवाते हैं और इसके बाद उस लकड़ी को जलाने के बाद उस पर फिनिशंग का कार्य किया जाता है, जो कि अपने आप में हस्तकला की कहानी को ब्यां करता है। इस सामान को बनाने के लिए 2 से 3 आदमी कार्य करते हैं, मशीनें सिर्फ लकडी को काटने के लिए प्रयोग में लाई जाती है, लेकिन हाथों की अदभुत कला से जब इस सामान को अंतिम रूप दिया जाता है तो इसे देखने वाले पर्यटक आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस सामान की कीमत 500 से 12500 तक की है। इस सामान पर पालिश इत्यादि का कार्य भी हस्तशिल्प कला से ही किया जाता है। हथौड़ी और छैनी की ऐसी हस्तशिल्प कला ने यहां पर आने वाले सभी पर्यटकों के मन को मोह लिया है।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Dec 2021 21:06:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इटावा से आई मीना के हाथों की कारीगरी को देख हैरान हो रहे पर्यटक</title>
                                    <description><![CDATA[माला टूटी तो आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का आया आइडिया एक हजार महिलाओं को दे रही रोजगार सच कहूँ/ देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र। इंसान का शौक भी उसे हुनरमंद बना देता है और फिर उस हुनर से कामयाबी भी मिल जाती है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में यूपी के इटावा से आई मीना यादव इसका उदाहरण है। उनके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/tourists-are-surprised-to-see-the-workmanship-of-meenas-hand-from-etawah/article-28985"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/workmanship-of-meenas-hand.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>माला टूटी तो आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का आया आइडिया</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>एक हजार महिलाओं को दे रही रोजगार</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/ देवीलाल बारना, कुरुक्षेत्र।</strong> इंसान का शौक भी उसे हुनरमंद बना देता है और फिर उस हुनर से कामयाबी भी मिल जाती है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में यूपी के इटावा से आई मीना यादव इसका उदाहरण है। उनके हाथ से बनी आर्टिफिशियल ज्वैलरी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मीना यादव का आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का बचपन का शौक 55 साल की उम्र में भी कायम है, मगर अब उनका शौक एक कला बन चुका है। उस शौक से उत्पन्न कला के जरिए न केवल उन्हें पहचान मिली बल्कि अब वह 1000 परिवारों को रोजगार भी दे रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दो बार मिल चुका प्रादेशिक अवार्ड</h4>
<p style="text-align:justify;">इस कला के लिए यूपी सरकार उनको दो बार प्रादेशिक अवार्ड से सम्मानित भी कर चुकी है। अब उनका बेटा दीपक यादव उनके नक्शे कदम पर चलकर कामयाबी की सीढ़िया चढ़ रहा है। शिल्पकार मीना यादव बताती हैं कि बचपन में वह अपनी गुड्डे-गुड्डियों के लिए तरह तरह की मालाएं, बालियां, टॉप्स व अन्य तरह की आर्टिफिशियल ज्वेलरी घर में पड़े बेकार सामान से बनाती थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">22 साल की उम्र में जीवन ने लिया नया मोड़</h4>
<p style="text-align:justify;">अभी उनका बचपन खत्म भी नहीं हुआ था कि 13 साल की उम्र में उनके माता-पिता ने उनकी शादी कर दी थी। तब उन्हें गुड़िया-पटोले छोड़कर ससुराल में चूल्हा-चौका संभालना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच समय भी गुजरता रहा। इस दौरान 22 साल की उम्र में उनकी जिंदगी में ऐसी घटना हुई, जिसने उनके जीवन को खास बना दिया। दरअसल, हुआ यूं की जब उन्होंने एक स्थानीय मेले से अपने लिए 50 रुपये की मोतियों की एक माला खरीदी, जो घर आने पर टूट गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उस टूटी माला को देखकर उनका मन बहुत खिन्न हो गया और मीना उसी माला के मोतियों को समेट कर दूसरी माला बनाने में लीन हो गई। हालांकि उसे बनाने में बचपन के मुकाबले में कुछ ज्यादा समय लग गया। इसी दौरान उनको घर में पड़े बेकार सामान से आर्टिफिशियल कुछ सामान बनाकर उसे मार्केट में बेचने का सूझा। मीना ने बताया कि उन्होंने मार्केट से कुछ मोती लेकर उनकी माला, ब्रेसलेट, बालियां, टॉप्स व कुछ अन्य सामान बनाकर बेचना शुरू किया। उनकी कला के कद्रदान भी उनको मिलने लगे। यहां से उनके कारोबार की नींव पड़ गई। उसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे मेले में स्टॉल लगानी शुरू की, जहां उनकी कला को पहचान मिल गई। इसी बूते पर उनको उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से साल 2003-04 और 2007-08 में दो बार राज्य प्रादेशिक अवार्ड से नवाजा गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">50 से 400 तक का सामान और सभी हाथ से बना</h4>
<p style="text-align:justify;">मीना यादव ने बताया ने वह आठ साल से गीता महोत्सव में आ रही हैं। उनके स्टॉल पर सभी सामान हाथ से बना हुआ है। उनकी बनाई आर्टिफिशियल ज्वेलरी का डिजाइन भी सबसे अलग है, जो सिर्फ उनके पास ही है। उनके पास गीता महोत्सव में स्टॉल-22 पर मालाएं, बालियां, मंगलसूत्र, टॉप्स, बंदरवाल, छल्ले, ब्रेसलेट सहित अन्य सामान 50 से 400 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">महिलाओं को बना रही स्वावलम्बी</h4>
<p style="text-align:justify;">मीना यादव अब यह काम खुद नहीं कर रही हैं। हालांकि उनके बेटे काम करते हैं। उन्होंने महिलाओं का एक समूह बनाया हुआ है, जिसमे एक हजार महिलाएं काम करती हैं। मीना उनसे सामान खरीदकर आगे बेचती है, उनसे जुड़ी महिलाओं को आमदनी हो रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकारी नौकरी का मिला था ऑफर</h4>
<p style="text-align:justify;">मीना यादव ने बताया कि साल 2003 में उनको यूपी सरकार के एक विभाग में बतौर अधिकारी लगने का मौका मिला था, जिसे उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह कला और कारोबार से संतुष्ट है।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 20:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहे गंदगी के ढ़ेर</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ/सुभाष, ऐलनाबाद। पिछले ही दिनों नगर पालिका व शहर वासियों के लिए एक अच्छी खबर मिली थी कि स्वच्छता अभियान में नगर पालिका ऐलनाबाद 282 वें नम्बर से इस वर्ष 2021 में 146 वें नम्बर पर आया है। गौरतलब है कि इन आंकड़ों को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष थर्ड पार्टी के माध्यम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/heaps-of-dirt-sabotaging-the-cleanliness-campaign/article-28959"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/cleanliness-campaign-ellenabad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुभाष, ऐलनाबाद।</strong> पिछले ही दिनों नगर पालिका व शहर वासियों के लिए एक अच्छी खबर मिली थी कि स्वच्छता अभियान में नगर पालिका ऐलनाबाद 282 वें नम्बर से इस वर्ष 2021 में 146 वें नम्बर पर आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इन आंकड़ों को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष थर्ड पार्टी के माध्यम से भारत सरकार द्वारा सभी शहरों का स्वच्छ सर्वेक्षण करवाया जाता है। वैसा ही 2021 में भी करवाया गया था, जिसमें नगरपालिका ऐलनाबाद ने पिछले साल की अपेक्षा अपनी रैकिंग मे सुधार किया है। इस पर नगर पालिका सचिव गिरधारी लाल ने सभी शहरवासियों का तहदिल से आभार व्यक्त कर आगे भी सहयोग की अपेक्षा की थी। लेकिन अगर हम धरातल पर बात करें तो इसके विपरीत ही देखने को मिलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब यहां पर यह सवाल उठता है कि जब 2022 में भारत सरकार द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण करवाया जाएगा क्या तब भी ऐलनाबाद का आंकड़ा धरातल से हटकर कागजों में इसी तरह का रहेगा। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान शुरू किया गया था तब शुरू-शुरू में इसका रुझान देखने को मिला था। समय-समय पर लोगों को सफाई व्यवस्था के प्रति जागरूक करने का काम भी नपा द्वारा किया गया था। लेकिन इसके बावजूद अगर हम शहर ऐलनाबाद की धरातल की बात करें तो शहर के तलवाड़ा रोड बाल्मिकी चौक से लेकर नहर किनारे तक आपको दोनों तरफ कूड़े व रुड़ी के ढेर लगे हुए मिल सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कई बार सफाई कर्मचारियों को लगा चुके गुहार</h4>
<p style="text-align:justify;">निवर्तमान नगर पार्षद श्रवण कुमार ने उच्च अधिकारियों को अवगत करवाते हुए इस रोड की साफ सफाई करवाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने बताया कि गंदगी के ढेरों को उठाने और नियमित सफाई करने के लिए कई बार सफाई कर्मचारियों को कहा जा चुका है। इसके बावजूद कर्मचारी और अधिकारी अपनी धुन में ऐसे सवार हैं कि उन्हें लोगों की परेशानियों की तरफ कोई ध्यान नहीं है। जिस कारण लोगों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। ऐसे में कस्बे के लोगों ने उप मंडल प्रशासन से मांग की कि ऐलनाबाद नपा के सफाई दरोगा और सचिव को तलब कर सफाई व्यवस्था पर संज्ञान लिया जाए ताकि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;">लकड़ियों के ढेर से कर रखा है अतिक्रमण</h4>
<p style="text-align:justify;">यहां देखने वाली बात तो यह भी है कि इस रोड पर यहां के रहने वालों ने ही लकड़ियों के ढेर लगाकर अतिक्रमण कर रखा है। जैसे ही लकड़ी कटाई का सीजन आता है इस सीजन में ज्यादातर लोग लकड़ियां काटकर आगामी दिनों के लिए इस रोड के किनारे ढेर लगा देते हैं जो प्रत्येक वर्ष यहीं पर पड़ा रहता है। इससे कभी कभार रात के अंधेरे में लोगों को आने जाने में भी दिक्कत होती है और इससे एक्सीडेंट होने का भी खतरा बना रहता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या कहना था सचिव गिरधारी लाल का</h4>
<p style="text-align:justify;">इसके बारे में जब नगर पालिका सचिव गिरधारी लाल से बात की गई तब उन्होंने बताया कि इस रोड का जल्द ही भ्रमण किया जाएगा अगर पर्सनल तौर पर जिन्होंने अतिक्रमण कर रखा है या रुड़ी लगा रखी है उसको उठवा दिया जाएगा।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Dec 2021 18:29:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली एम्स में बालक अयांश को लगी 16 करोड़ रुपये की वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[बीमारी का पता लगने के एक साल के भीतर लगी वैक्सीन आठ माह की उम्र में पता चल गई थी बीमारी चाइल्ड न्यूरो सर्जन डा. शैफाली गुलाटी व उनकी टीम ने लगाई वैक्सीन रविवार तक एम्स में ही चिकित्सकों की निगरानी में रहेगा अयांश सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। आखिरकार बालक अयांश को 16 करोड़ रुपये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/child-ayansh-got-a-vaccine-worth-rs-16-crore-in-delhi-aiims/article-28887"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/ayansh-got-vaccine.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>बीमारी का पता लगने के एक साल के भीतर लगी वैक्सीन</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>आठ माह की उम्र में पता चल गई थी बीमारी</h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4>चाइल्ड न्यूरो सर्जन डा. शैफाली गुलाटी व उनकी टीम ने लगाई वैक्सीन</h4>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h4>रविवार तक एम्स में ही चिकित्सकों की निगरानी में रहेगा अयांश</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम।</strong> आखिरकार बालक अयांश को 16 करोड़ रुपये की वैक्सीन लग ही गई। अमेरिका से आई यह वैक्सीन शनिवार सुबह 10 बजे एम्स दिल्ली में लगाई गई। चिकित्सकों के दल ने कोरोना महामारी के बीच सभी ऐहतियात बरतते हुए वैक्सीन लगाई। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा लगा। रविवार तक अयांश चिकित्सकों की निगरानी में रहेगा। सोमवार को छुट्टी मिलेगी। वैक्सीन लगने के दौरान अयांश की मां वंदना उसे गोद में ही लिए बैठी रही। उनकी आंखों में बेटे के ठीक होने की उम्मीद साफ देखी जा सकती थी। बेटे की बीमारी को लेकर बार-बार भावुक होने वाली मां वंदना को पिता प्रवीण मदान ने सदा हिम्मत रखने को प्रेरित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने आंसुओं को छिपाकर वे परिवार में अपनी जिम्मेदारियों को सदा मजबूती से निभाते रहे। अयांश एसएमए (स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी) नामक बीमारी से ग्रस्त है। अयांश इस बीमारी से ग्रस्त है, इसका उनके माता-पिता वंदना मदान एवं प्रवीण मदान को तब पता चला, जब वह मात्र 8 महीने का था। अभी उसकी उम्र 20 माह है। अयांश को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में लेकर गए। जहां डॉ. विश्वस्वरूप एवं डा. रिचा ने अयांश की जांच की। कुछ टेस्ट भी कराए गए। तब पता चला कि अयांश एसएमए नामक गंभीर बीमारी से ग्रस्त है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्राउड फंडिंग से एकत्रित हुए 16 करोड़</h4>
<p style="text-align:justify;">16 करोड़ का जुगाड़ करने के लिए उन्होंने प्रयास शुरू किए। धन जुटाने को उन्होंने लकी ड्रा तक के कूपन भरे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने क्राउड फंडिंग (जनता से दान) से धन जुटाने का काम शुरू किया। देश-विदेश के नागरिकों को अपनी नेक कमाई से दान करने की गुहार लगानी शुरू की। मीडिया से रूबरू होते हुए अयांश के माता-पिता की आंखों में अश्रुधारा के बीच बेटे का जीवन बचाने का सपना लिए हर किसी की तरफ उम्मीद की निगाह से देखते रहे। अयांश के पिता प्रवीण जैन ने डा. नीलू गुगलानी (एमडी पैथॉलोजी) और डा. अषिता जैन का भी धन्यवाद किया है, जिन्होंने फंड जुटाने उनकी मदद की।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दो साल की उम्र तक ही लग सकती है यह दवा</h4>
<p style="text-align:justify;">यह दवा बच्चे की 2 साल की उम्र के भीतर ही लगनी जरूरी है। अयांश इस मामले में लकी ही कहा जाएगा कि उसे एक साल में यह दवा लग गई। क्योंकि 16 करोड़ रुपये जुटाना आसान नहीं था। एक बार फिर से वंदना एवं प्रवीण मदान ने देश-दुनिया के दानियों का धन्यवाद किया है। सोशल प्लेटफार्म पर अयांश के लिए दवा खरीदने की रकम एकत्रित करने को उन्होंने चौबीसों घंटे अभियान चलाया। दवा के लिए 16 करोड़ रुपये एकत्रित करने में लोगों ने दिल खोलकर दान दिया। किसी ने अपने बच्चों के नाम से तो किसी ने खुद के नाम से पैसे दिए। आखिरकार 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि इकट्ठी हुई। बिना देरी के अमेरिका में दवा निमार्ता कंपनी को 16 करोड़ रुपये डॉलर के रूप में भेज दिए गए। दो दिसम्बर को दवा दिल्ली एम्स पहुंची थी, जिसे चार दिसम्बर शनिवार को अयांश को लगा दिया गया।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Dec 2021 20:16:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम ने ली करवट, बढ़ी ठंड, दिनभर नहीं हुए सूर्य के दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[हल्की धुंध से खिले किसानों के चेहरे पश्चिमी विक्षोभ के कारण पांच दिसंबर रात्रि व छह दिसंबर को राज्य में बादलवाई व हवा व गरज चमक के साथ हो सकती है कहीं-कहीं हल्की बारिश सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा। मौसम में बदलाव होना शुरू हो गया और दिनभर आसमान में बादल छाये रहे। इससे सूर्य के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/weather-took-a-turn-increased-cold-did-not-see-the-sun-throughout-the-day/article-28799"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/weather-took-a-turn.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>हल्की धुंध से खिले किसानों के चेहरे</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>पश्चिमी विक्षोभ के कारण पांच दिसंबर रात्रि व छह दिसंबर को राज्य में बादलवाई व हवा व गरज चमक के साथ हो सकती है कहीं-कहीं हल्की बारिश</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा।</strong> मौसम में बदलाव होना शुरू हो गया और दिनभर आसमान में बादल छाये रहे। इससे सूर्य के भी दर्शन नहीं हुए। इसी के साथ ठंड का असर भी बढ़ गया है। बुधवार को आई हल्की धुंध की वजह से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, क्योंकि यह किसान की फसलों में संजीवनी का काम कर रही है। वहीं दूसरी ओर धुंध ने वाहनों की रफ्तार भी धीमी कर दी है। मौसम विज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में आने वाले समय में भी बदलाव होगा। पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण तीन दिसंबर रात्रि को कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी होने की संभावना है। इसके बाद पांच दिसंबर को एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है। जिसके आंशिक प्रभाव से पांच दिसंबर रात्रि व छह दिसंबर को राज्य में बादलवाई व हवा व गरज चमक के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश भी संभावित है। इस दौरान दिन के तापमान में हल्की गिरावट परन्तु रात्रि तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सुबह के समय छाई हल्की धुंध</h4>
<p style="text-align:justify;">ठंड का असर रात्रि के समय काफी बढ़ रहा है। इसी के साथ सुबह के समय हल्की धुंध भी छाने लगी है। जिससे सुबह के समय दृश्यता घट रही है। सूर्य निकलने के बाद ठंड का असर कम होने लगती है। बुधवार को अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री व न्यूनतम तापमान 10.0 डिग्री रहा। मंगलवार को अधिकतम तापमान अधिकतम तापमान 26.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री रहा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">6 दिसंबर तक रहेगा मौसम परिवर्तनशील</h4>
<p style="text-align:justify;">चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. मदनलाल खिचड़ ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण तीन दिसंबर रात्रि को कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी की संभावना है। इसी के साथ मौसम आमतौर पर 6 दिसंबर तक परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बाजारों में गर्म कपड़ों की बढ़ी बिक्री</h4>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों से ठंड बढ़ने पर ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों से सहारा ले रहे हैं। जिसको लेकर बाजारों में गर्म कपड़ों की बिक्री बढ़ रही है। शहर में रोड़ी बाजार, पालिका बाजार, मोहंता मार्केट, फैंशन कैंप बाजार व पीएनबी वाली गली बाजार में दिनभर गर्म कपड़ों की दुकानों में लोग खरीददारी करते हुए नजर आते हैं।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Dec 2021 20:40:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों के लिए फिर बनेगी ओवरटाइम पालिसी</title>
                                    <description><![CDATA[कई और मांगों पर भी बनी सहमति चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम पालिसी फिर बनेगी। परिचालकों का वेतनमान अपग्रेड करने के प्रस्ताव को वेतन विसंगति कमेटी और जोखिम भत्ता देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। जिन कर्मचारियों के सेलरी खाते एसबीआई, एचडीएफसी, पीएनबी व हरको बैंक में हैं, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/overtime-policy-will-be-made-again-for-roadways-employees-in-haryana/article-28768"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/overtime-policy.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कई और मांगों पर भी बनी सहमति</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम पालिसी फिर बनेगी। परिचालकों का वेतनमान अपग्रेड करने के प्रस्ताव को वेतन विसंगति कमेटी और जोखिम भत्ता देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। जिन कर्मचारियों के सेलरी खाते एसबीआई, एचडीएफसी, पीएनबी व हरको बैंक में हैं, हादसे में मौत पर आश्रितों को 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ के साथ मंगलवार को हुई बैठक में परिवहन महानिदेशक वीरेंद्र दहिया ने कई मांगों पर सहमति जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के बाद यूनियन के राज्य प्रधान इंद्र सिंह बधाना, महासचिव शरबत सिंह पूनिया और प्रेस प्रवक्ता श्रवण जांगड़ा ने बताया कि ढाई घंटे हुई बैठक में नीतिगत मांगों को लागू करने व निजीकरण पर रोक लगाने को लेकर महानिदेशक ने सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने वर्ष 1992 से 2003 के मध्य लगे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने व वर्ष 2016 में ठेके पर भर्ती चालकों को पक्का करने से मना कर दिया। कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान व कम किए गए राजपत्रित अवकाश को पहले की तरह देने की मांग नहीं मानी। महानिदेशक ने कोर्ट केस का निपटारा होने से पहले लिपिकों को पदोन्नति, बोनस की स्थाई नीति बनाकर एक माह के समान बोनस देने से मना कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">शरबत पूनिया ने बताया कि हेड वेल्डर व हेड ब्लैक स्मिथ की प्रमोशन की जाएगी। वर्ष 2016-17 के बोनस की फाइल वित्त विभाग में भेजी है। वर्ष 2017-18 व 2018-19 के बोनस की फाइल जल्द भेजने का आश्वासन दिया है। तबादला नीति में संशोधन कर तीन डिपो का आप्शन देकर नजदीक के डिपो में तबादला करने पर सहमति जताई है। एचईआरसी गुरुग्राम में कर्मचारियों को समय पर बकाया वेतन देने, मेडिकल बिलों के भुगतान व अन्य खर्च के लिए सरकार से विशेष पैकेज मांगने, अंबाला डिपो में आंदोलन के दौरान मृतक परिचालक जयभगवान के परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने, कर्मचारियों के दो वर्ष के वर्दी व जूतों के पैसे का भुगतान शीघ्र करने, कर्मशाला कर्मचारियों का रात्रि भत्ता बढ़ाने व साबुन का भुगतान करने पर सहमति बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">फतेहाबाद व पानीपत डिपो में हटाए गए चौकीदार व सफाई कर्मचारियों को फिर ड्यूटी पर लेने के लिए संबंधित महाप्रबंधक को आदेश दिया गया है। कर्मचारियों को प्रत्येक माह एक तारीख को वेतन देने, दुर्घटना में 70 प्रतिशत विकलांग होने पर रिटायरमेंट करने के बजाय ड्यूटी फ्री करने, हड़ताल व आंदोलन में हुई उत्पीड़न की कार्रवाई समाप्त करने, कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों को छोड़ने गए कर्मचारियों को यात्रा भत्ता देने का आश्वासन दिया गया है। महानिदेशक ने बताया कि 809 बसें खरीदने के आदेश दिए गए हैं।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 19:46:56 +0530</pubDate>
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                <title>निजी स्कूलों में नियम-134 ए के तहत 7315 सीटें, आवेदन 1800</title>
                                    <description><![CDATA[निजी स्कूलों नियम 134 ए के तहत आवेदन करने का बुधवार को अंतिम दिन रहा सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा। निजी स्कूलों में 7315 आरक्षित सीटों के लिए 1805 आवेदन हुए हैं। शिक्षा सत्र आधा बीत जाने के कारण निजी स्कूलों में दाखिला के लिए अभिभावक ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे है। शिक्षा विभाग ने इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/7315-seats-under-rule-134a-in-private-schools-application-1800/article-28612"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/rule134a.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>निजी स्कूलों नियम 134 ए के तहत आवेदन करने का बुधवार को अंतिम दिन रहा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा, सरसा।</strong> निजी स्कूलों में 7315 आरक्षित सीटों के लिए 1805 आवेदन हुए हैं। शिक्षा सत्र आधा बीत जाने के कारण निजी स्कूलों में दाखिला के लिए अभिभावक ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे है। शिक्षा विभाग ने इस बार पंजीकरण करने के लिए नियमों में बदलाव करते हुए जिस स्कूल में विद्यार्थी पढ़ रहा है उसमें आवेदन करने के लिए भी विकल्प दिया है। जबकि पहले दूसरे स्कूलों में ही आवेदन करना पड़ता था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पांच दिसंबर को ही एसेसमेंट परीक्षा</h4>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा विभाग ने नियम 134 ए के तहत दाखिला के लिए शेड्यूल जारी किया हुआ है। जिसके तहत अब नियम 134 ए में एसेसमेंट परीक्षा पांच दिसंबर को आयोजित होगी। इस परीक्षा का 10 दिसंबर को परिणाम घोषित होगा। इसके बाद दाखिला के लिए 13 दिसंबर को प्रथम ड्रा निकाला जाएगा। इस ड्रा में दाखिला मिलने वाले विद्यार्थियों को 15 से 24 दिसंबर तक दाखिला लेने के लिए समय मिलेगा। इसके बाद दूसरे ड्रा की सूचना दी जाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">किस कक्षा में कितनी सीटें</h4>
<p style="text-align:justify;">           <strong> कक्षा              सीटों की संख्या</strong></p>
<p style="text-align:justify;">           दूसरी कक्षा              918<br />
तीसरी कक्षा             912<br />
चौथी कक्षा               776<br />
पांचवीं कक्षा             722<br />
छठी कक्षा               685<br />
सातवीं कक्षा             578<br />
आठवीं कक्षा            618<br />
नौवीं कक्षा               602<br />
दसवीं कक्षा              620<br />
11वीं कक्षा              436<br />
12वीं कक्षा              448<br />
<strong>कुल                7315</strong></p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Nov 2021 21:22:47 +0530</pubDate>
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