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                <title>RTI - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>500 Rupees Notes: 500 के नोटों पर भी आरबीआई से आया बड़ा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। RBI Clarification on 500 Rupees Notes:500 के नोट पर बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। जानकारी के अनुसार 500 के नोट पर RBI ने बड़ा बयान जारी किया है। आरबीआई ने 500 के नोट गायब होने का खंडन किया है। आरबीआई ने कहा कि ऐसा RTI से मिली सूचना की गलत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/rbi-clarification-on-five-hundred-rupees/article-48969"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/5000.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> RBI Clarification on 500 Rupees Notes:500 के नोट पर बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। जानकारी के अनुसार 500 के नोट पर RBI ने बड़ा बयान जारी किया है। आरबीआई ने 500 के नोट गायब होने का खंडन किया है। आरबीआई ने कहा कि ऐसा RTI से मिली सूचना की गलत व्याख्या के कारण हुआ है। आरबीआई ने कहा की आरटीआई के तहत देश की तीन प्रिंटिंग प्रेस से 500 रुपये के नोटों को लेकर जो जानकारी दी गई, उसका अर्थ गलत निकाला गया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Clarification on Banknote <a href="https://t.co/PsATVk1hxw">pic.twitter.com/PsATVk1hxw</a></p>
<p>— ReserveBankOfIndia (@RBI) <a href="https://twitter.com/RBI/status/1670117727066017792?ref_src=twsrc%5Etfw">June 17, 2023</a></p></blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"> इससे पहले आरटीआई में यह कहा गया था | 500 Rupees Notes</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले आरटीआई ने 500 रुपये के नोटों पर सबसे बड़ा खुलासा करते हुए एक पूरी तरह से अलग मामला प्रकाश में लाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई को 1999-2010 के बीच लॉकर्स में जमा किए गए एडिशनल 339.95 मिलियन करेंसी नोटों से समस्या थी, जो सरकारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेसों के आउटपुट से अधिक थी। टकसालों ने नए डिजाइन किए गए 500 रुपये के 8,810.65 मिलियन नोट जारी किए, लेकिन आरबीआई को उनमें से केवल 7,260 मिलियन के नोट ही मिले। बाकी के नोट गायब पाए गए हैं। गायब हुए नोटों की कीमत 88,032.5 करोड़ रुपये है। वहीं  आरबीआई ने 500 के नोट गायब होने का खंडन किया है। आरबीआई ने कहा कि ऐसा आरटीआई से मिली सूचना की गलत व्याख्या के कारण हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Reserve Bank of India</h3>
<p style="text-align:justify;">द फ्री प्रेस जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी को नहीं पता है कि 1,760.65 मिलियन 500 रुपये के नोट कहां है। वो एक रहस्य बनकर रह गया है। इन नोटों में अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक नासिक मिंट में मुद्रित 210 मिलियन नोट शामिल हैं। गायब होने वाले नोटों की कीमत 88,032.5 करोड़ रुपये है। अनेक प्रयासों के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रवक्ता ने रिजर्व बैंक वॉल्ट से गायब होने वाले नोटों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। भारत अधिकृत नोट मुद्रण को तीन सरकारी मिंटों – भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण (पी) लिमिटेड, बेंगलुरु, करेंसी नोट प्रेस, नासिक, और बैंक नोट प्रेस, देवास में मुद्रित करता है और उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक वॉल्ट में भेजता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे की वितरण के लिए होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आरटीआई ने उठाया रहस्य से पर्दा | 500 Rupees Notes</h3>
<p style="text-align:justify;">आरटीआई के डेटा अधिकार के तहत जानकारी अधिग्रहण की गई जिसे एक्टिविस्ट मनोरंजन रॉय के द्वारा हासिल किया गया। नासिक करेंसी नोट प्रेस द्वारा 375.450 मिलियन नए डिजाइन के 500 रुपये के नोटों की मुद्रण की गई, लेकिन रिजर्व बैंक के रिकॉर्ड में केवल 345.000 मिलियन नोट मिले हैं, जो अप्रैल 2015 से दिसंबर 2016 तक मुद्रित किए गए थे। पिछले महीने एक अन्य आरटीआई के उत्तर में, नासिक करेंसी प्रेस नोट ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2015-2016 (अप्रैल 2015-मार्च 2016) के लिए 210 मिलियन रुपये के 500 नोट आरबीआई को आपूर्ति किए गए थे, जब रघुराम राजन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नेता प्रतिपक्ष का आरोप</h3>
<p style="text-align:justify;">नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में हजारों करोड़ के घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगाया है। 2016 में नोट फैक्ट्रियों में 88 हजार करोड़ के नोट छापे गए। हालांकि अजित पवार ने आरोप लगाया है कि यह सरकार के खजाने में नहीं पहुंचा है। उन्होंने यह आरोप एक अखबार के हवाले से लगाया है। अजित पवार ने यह भी मांग की है कि आरबीआई को इस पर सफाई देनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">जानिये आरबीआई ने इस पर क्या कहा….RBI</h4>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई ने अपने प्रेस रिलीज और ट्विटर पर किए गए पोस्ट में कहा है कि आरबीआई को इस बात की जानकारी मिली है कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में जो 500 रु. के नोट सिस्टम से गायब होने की खबर चल रही है-वो गलत है। प्रिटिंग प्रेस से मिली जानकारी को गलत तरीके से समझा गया है और ये जानना जरूरी है कि जो भी नोट प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं वो पूरी तरह सिक्योर होते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया की ओर से पूरे प्रोटोकॉल के साथ इन बैंक नोट्स के प्रोडक्शन, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन की मॉनिटरिंग की जाती है और इसके लिए मजबूत सिस्टम बना हुआ है। आरबीआई की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बैंक के चीफ जनरल मैनेजर योगश्वर दयाल की तरफ से लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी जानकारी के लिए सभी आरबीआई द्वारा प्रकाशित सूचना पर ही भरोसा करें।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jun 2023 11:55:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RTI में खुलासा: दो साल में 1.28 करोड़ की खरीदी दवाएं, भुगतान का रिकॉर्ड नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[नियमों को दरकिनार कर एक ही मेडिकल स्टोर से खरीदी दवाएं सरसा(सच कहूँ न्यूज)। भ्रष्टाचार रूपी दानव सरकार के सुशासन मुहैया करवाने के दावों की सरेआम हवा निकाल रहा है। एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बातें दोहरा रहे है, वहीं विभाग के अधिकारी व कर्मचारी है कि वो मुख्यमंत्री की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/revealed-in-rti-medicines-worth-1-28-crore-purchased-in-two-years-no-record-of-payment/article-37869"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/rti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>नियमों को दरकिनार कर एक ही मेडिकल स्टोर से खरीदी दवाएं</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा(सच कहूँ न्यूज)।</strong> भ्रष्टाचार रूपी दानव सरकार के सुशासन मुहैया करवाने के दावों की सरेआम हवा निकाल रहा है। एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बातें दोहरा रहे है, वहीं विभाग के अधिकारी व कर्मचारी है कि वो मुख्यमंत्री की बातों को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे है। ताजा मामले में स्वास्थ्य व गृह राज्य मंत्री अनिल विज के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा खरीद के नाम पर बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। जिसका खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता जितिन गोयल द्वारा दवाओं के संबंध में नागरिक अस्पताल से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरटीआई के जवाब में विभाग द्वारा शहर के शिव चौक पर स्थित गुलाटी मेडिकल स्टोर से पिछले करीब दो सालों में 1.28 करोड़ रुपए की दवाएं खरीद की गई, लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि विभाग के पास इन दवाओं की खरीद का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विभाग द्वारा सिर्फ और सिर्फ जुलाई 2019 से अक्तूबर 2021 तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 1.28 करोड़ रुपए की दवाआें के चैक का भुगतान गुलाटी मेडिकल स्टोर को किया दिखाया है, लेकिन दवाओं के बिल संबंधी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है, जोकि समझ से परे की बात है। विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की दवा खरीद करने के बाद भी उक्त मेडिकल स्टोर की दवाओं की लैब में कोई जांच रिपोर्ट नहीं करवाई, ताकि ये पता लगाया जा सके कि जो दवाएं खरीद की जा रही है, वो सही है या नहीं।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Sep 2022 08:36:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीआई के तहत जानकारी लेना हुआ आसान, अब घर बैठे ऐसे करें आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[यमुनानगर (सच कहूँ न्यूज)। आरटीआई (RTI) एक्ट के तहत जानकारी लेना अब आसान हो गया है। एक्ट के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए घर से ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सूचना के अधिकार के तहत लोगों को किसी भी तरह की जानकारी लेने के लिए दफ्तरों में जाकर आवेदन करने की जरूरत नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-easy-to-get-information-under-rti-now-apply-like-this-sitting-at-home/article-31773"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/rti.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आरटीआई (RTI) एक्ट के तहत जानकारी लेना अब आसान हो गया है। एक्ट के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए घर से ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सूचना के अधिकार के तहत लोगों को किसी भी तरह की जानकारी लेने के लिए दफ्तरों में जाकर आवेदन करने की जरूरत नहीं है। अब घर बैठे ही मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा डिजिटलाइजेशन को अपनाकर पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से आरटीआई सेवाओं को भी अब ऑनलाइन कर दिया है। लोगों को सीधी सेवाएं देने के लिए अनेक पोर्टल, वेबसाइट व साफ्टवेयर विकसित किए गए हैं। यह जानकारी डीसी पार्थ गुप्ता ने दी। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के माध्यम से विभागों में अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना भी आसान हो गया है। ई-आफिस कार्य प्रणाली में जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">आनलाइन सुविधा के शुरू होने से सरकारी कार्यालयों में लोगों की आवाजाही कम होगी। साथ ही लोगों को समय पर सूचना उपलब्ध होगी। इस सेवा के शुरू होने के बाद अब आरटीआई भी पेपर लेस सुविधा से जुड़ गई है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार द्वारा उठाया गया कदम है। अब लोग आरटीआई (RTI) के तहत किसी भी तरह की सूचना लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उसका जवाब भी तय समय में आनलाइन ही उपलब्ध करवा दिया जाएगा। पोर्टल का इस्तेमाल करने वाले आवेदक को पहले आरटीआइ हरियाणा डाटजीओवीडाट इन पोर्टल पर स्वयं का पंजीकरण करना होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ऐसे होगा पंजीकरण</h4>
<p style="text-align:justify;">पंजीकरण के समय फोटो आइडी होना आवश्यक है। जिसे पंजीकरण के समय पोर्टल पर अपलोड करना होगा। पोर्टल पर प्रथम अपील के रूप में एसपीआइओ द्वारा जानकारी डाली जाएगी। जिसके बाद द्वितीय अपील में राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय द्वारा सुनवाई की जाएगी। पोर्टल पर एप्लिकेशन की स्टेट्स रिपोर्ट देखने का भी विकल्प दिया गया है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 20:35:36 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीआई के तहत ऑनलाइन भी मिलेगी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[सीएम मनोहर लाल ने लॉन्च किया पोर्टल चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक से अधिक डिजिटलाइजेशन करने की मुहिम में सोमवार को एक और अध्याय उस समय जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने वालों के लिए पायलट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/information-will-also-be-available-online-under-rti/article-30247"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/rti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सीएम मनोहर लाल ने लॉन्च किया पोर्टल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक से अधिक डिजिटलाइजेशन करने की मुहिम में सोमवार को एक और अध्याय उस समय जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने वालों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ऑनलाइन आरटीआई(RTI) पोर्टल लांच किया। राज्य सूचना आयुक्त अरूण सांगवान ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि पोर्टल पर प्रथम अपील के रूप में एसपीआईओ द्वारा जानकारी डाली जाएगी तथा द्वितीय अपील के रूप में राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय द्वारा सुनवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि आरम्भ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस पोर्टल को मुख्य सचिव कार्यालय तथा हरियाणा राज्य सूचना आयुक्त कार्यालय से जोड़ा गया है। कोई भी व्यक्ति पोर्टल https://rtiharyana.gov.in/ पर लॉग इन कर अपना पंजीकरण कर सकता है तथा इसके लिए उसके मोबाइल पर ओटीपी आएगा। किसी भी विभाग से सूचना प्राप्त करने के लिए वह अपनी जानकारी इस (RTI)पोर्टल पर डाल सकता है और सम्बंधित विभाग के राज्य जन सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) द्वारा मांगी गई सूचना को ऑनलाइन ही पोर्टल पर अपलोड किया जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल से कहा कि जनता, विभाग व एसपीआईओ को किसी प्रकार कठिनाई न हो इसके लिए सूचना का अधिकार अधिनियम में जो भी संशोधन करने की आवश्यकता होगी उसके लिए केन्द्र सरकार को लिखा जाएगा।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jan 2022 19:25:40 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी सरकार में अब तक 18 आईपीएस को समयपूर्व किया गया सेवामुक्त, आरटीआई से खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले सात साल में अब तक 18 आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों को उनकी सेवानिवृत्ति से पूर्व सेवामुक्त किया है। वहीं इसी अवधि दौरान पांच आईपीएस अधिकारियों के विरूद्ध विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों में मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से स्वीकृति […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/18-ips-have-been-prematurely-retired-in-modi-government-revealed-by-rti/article-23725"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/rti.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले सात साल में अब तक 18 आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों को उनकी सेवानिवृत्ति से पूर्व सेवामुक्त किया है। वहीं इसी अवधि दौरान पांच आईपीएस अधिकारियों के विरूद्ध विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों में मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से स्वीकृति प्रदान की गयी है। वर्तमान में देश में 24 आईपीएस अधिकारी निलंबित (सस्पेंड) चल रहे हैं। यह खुलासा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत जुटाई जानकारी से किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय में इस वर्ष 10 फरवरी को एक आरटीआई याचिका दायर कर तीन बिन्दुओ पर जानकारी मांगी थी। एक, उन आईपीएस अधिकारियों की कुल संख्या, नाम और उनका राज्य कैडर, जिन्हे मई, 2014 से आज तक आईपीएस से समय पूर्व रिटायर किया या हटा दिया गया है अर्थात टर्मिनेट या बर्खास्त कर दिया गया है। दूसरे बिंदु में उन्होंने उन सारे आईपीएस अधिकारियों का विवरण मांगा जिनके विरुद्ध अदालती कार्यवाही चलाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से आवश्यक स्वीकृति प्रदान की गयी है। तीसरे बिंदु में उन सभी आईपीएस अधिकारियों बारे सूचना मांगी गयी जो वर्तमान में सेवा से सस्पेंड चल रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है पूरा मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">कुमार के अनुसार पहले (11 मार्च को) केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह जानकारी देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि मांगी गई सूचना में कोई जनहित नहीं है इसलिए आरटीआई कानून, 2005 की धारा 8 (1) (जे) के अंतर्गत सूचना नहीं दी जा सकती। उसके बाद उन्होंने गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को प्रथम अपील भी दायर कर दी जिसमें उन्होंने प्रश्न उठाया कि देश के दागी आईपीएस अधिकारियों के सम्बन्ध में सूचना माँगना और देना जनहित में क्यों नहीं है? वैसे भी आरटीआई कानून की धारा 8 (1) (जे) में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि जो सूचना संसद और विधानमंडल (विधानसभा और विधानपरिषद) को देने में इंकार नहीं किया जा सकता, उसे किसी व्यक्ति अर्थात आरटीआई आवेदनकर्ता को भी देने में इंकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार के अनुसार उन्होंने तर्क दिया कि मांगी गयी उक्त सूचना को अगर कोई सांसद (लोकसभा या राज्यसभा के प्रश्न काल के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री या गृह राज्य मंत्री से मांगता है, तो गृह मंत्री/गृह राज्यमंत्री को भी जवाब में यह सूचना सदन के पटल पर रखनी पड़ेगी। इस तरह आरटीआई याचिका के जवाब में भी ऐसी जानकारी देने से गृह मंत्रालय इंकार नहीं कर सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 May 2021 16:35:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीआई कार्यकर्ता को सूचना न देना पड़ा महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्टी डायरेक्टर पर 45 हजार 750 रुपये जुर्माना, सेलरी से कटेगा भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। राज्य सूचना आयोग ने हरियाणा सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय की डिप्टी डॉयरेक्टर इंद्रा बैनीवाल पर दो मामलों में सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने पर जुर्माना ठोका है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने प्रदेश भर में चल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/not-giving-information-to-rti-worker-was-costly/article-21626"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/not-giving-information-to-rti-worker-was-costly.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>डिप्टी डायरेक्टर पर 45 हजार 750 रुपये जुर्माना, सेलरी से कटेगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)</strong>। राज्य सूचना आयोग ने हरियाणा सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय की डिप्टी डॉयरेक्टर इंद्रा बैनीवाल पर दो मामलों में सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने पर जुर्माना ठोका है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने प्रदेश भर में चल रहे 3200 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को हर साल एक्सटेंशन दिए जाने संबंधी मामले में आरटीआई से सूचना मांगी थी, मगर दोनों ही मामलों में कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।  राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में 25 हजार व दूसरे मामले में 20 हजार 750 रुपये का जुर्माना ठोका है। डीडीओ को भी आदेश दिए हैं कि जुर्माना राशि उक्त अधिकारी की सैलरी से काटा जाएगा तथा 25 फरवरी तक सूचना उलब्ध कराए जाने के भी आदेश दिए हैं।</p>
<h4>प्रदेश के 3200 अस्थायी मान्यता वाले निजी स्कूलों को एक्सटेंशन देने पर मांगी थी जानकारी</h4>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने 9 नवंबर 2019 को हरियाणा सैकेंडरी शिक्षा निदेशालय से प्रदेशभर में चल रहे 3200 अस्थायी मान्यता वाले स्कूलों को एक्सटेंशन दिए जाने संबंधी जानकारी जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। निदेशालय ने निर्धारित अवधि में सूचना नहीं दी। इस पर 10 दिसंबर को प्रथम अपील की गई। इसी मामले में सूचना नहीं मिलने पर 7 मार्च 2020 को द्वितीय अपील लगाई। मगर फिर भी सूचना नहीं मिली। इसी मामले में 21 जुलाई को राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई की जानकारी कार्यकर्ता को उपलब्ध कराने के आदेश दिए। इसी मामले में आयोग ने 27 अक्तूबर को फिर से सुनवाई की।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना नहीं देने पर व्यक्तिगत पेश होने और सोकाज नोटिस दिया गया। मगर इसके बाद भी सूचना नहीं दी। सूचना आयोग ने 25 जनवरी को मामले में सुनवाई कर सूचना नहीं देने पर डिप्टी डायरेक्टर इंद्रा बैनीवाल पर 20750 रुपये जुर्माना ठोका। जुर्माना राशि डीडीओ द्वारा उक्त अधिकारी की सैलरी से काटे जाने के आदेश दिए।  इसी तरह दूसरे मामले में राज्य सूचना अधिकारी कम डिप्टी डॉयरेक्टर इंद्रा बैनीवाल पर सूचना उपलबध नहीं कराए जाने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। इस जुर्माना राशि को भी उनके वेतन से काटा जाएगा। आयोग ने 25 फरवरी तक हर हाल में सूचना देने के भी आदेश दिए हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Feb 2021 18:17:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेज छात्रों को आरटीआई से करवाया जाएगा परिचित</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने कॉलेजों को दिए निर्देश, विजेता छात्रों को मिलेगा नकद पुरस्कार (RTI) कॉलेजों में आरटीआई विषय पर होगी निबंध प्रतियोगिता सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। सूचना का अधिकार यानि आरटीआई के बारे में छात्रों को सजग और जागरूक करने के लिए राज्य सूचना आयोग ने पहल की है। देश व प्रदेश का नागरिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/college-students-will-be-provided-with-rti/article-21605"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/rti.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने कॉलेजों को दिए निर्देश, विजेता छात्रों को मिलेगा नकद पुरस्कार (RTI)</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>कॉलेजों में आरटीआई विषय पर होगी निबंध प्रतियोगिता</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा।</strong> सूचना का अधिकार यानि आरटीआई के बारे में छात्रों को सजग और जागरूक करने के लिए राज्य सूचना आयोग ने पहल की है। देश व प्रदेश का नागरिक आरटीआई का किस तरह से और कब फायदा उठा सकते है, आरटीआई क्या है तथा इसके फायदे क्या हैं। कुछ ऐसी ही जानकारी से लबरेज होंगे प्रदेश के सरकारी व एडिड कॉलेजों में पढ?े वाले विद्यार्थी। राज्य सूचना आयोग ने कॉलेजों में आरटीआई विषय पर प्रतियोगिता करवाने का निर्णय लिया है। इसके जरिये प्रदेशभर के कॉलजों में छात्र आरटीआई के बारे में जागरूक होंगे। इस संबंध में आयोग की ओर से मिले आदेशों के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी राजकीय और एडिड कॉलेजों के प्राचार्यो को इस संबंध में उचित दिशा-निर्देश जारी किए है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2005 में बना है सूचना का अधिकार अधिनियम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">देश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भारतीय संसद ने 2005 में एक अधिनियम लागू किया। जिसे हम सूचना का अधिकार यानि आरटीआई के नाम से जानते है। इस अधिनियम के तहत भारत के किसी भी नागरिक को ये अधिकार है कि वो जाकर किसी भी सरकारी विभाग से सवाल कर सकता है और हर तरह की जानकारी ले सकता है। इसके लिए नागरिक को सरकारी संस्थान में जाकर बस एक आवेदन देना होता है और आवेदन देने के बाद उसका संबंधित विभाग को 30 दिन के भीतर जवाब देना होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>निबंध प्रतियोगिता को लेकर नोडल अधिकारी नियुक्त</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेर्शानुसार राजकीय व एडिड कॉलेजों में आरटीआई विषय पर निबंध प्रतियोगिता करवाई जाएगी। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए युवा आरटीआई के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाएं और आरटीआई को लेकर जागरूक बनें। यही मकसद है। इसके लिए कॉलेजों को एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने के आदेश भी दिए गए है। ये नोडल अधिकारी प्रतियोगिता के बारे में छात्रों को जागरूक करेंगे। उन्हें भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही प्रतियोगिता के आयोजन की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। इस बारे में निदेशालय के साथ जानकारी सांझा करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विजेता को मिलेगा 2000 रुपए का नकद पुरस्कार</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद इसमें विजेता रहे प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। निदेशालय की आरे से सांझा की गई जानकारी के मुताबिक प्रतियोगिता के आयोजन के लिए आयोग को सरकार की ओर से एक लाख रुपए का फंड जारी किया गया है। इच्छुक कॉलेजों के छात्र इसमें के छात्र इसमें भाग लेंगे। वहीं पहले स्थान पर रहने वाले प्रतिभागी को 2 हजार रुपए का नकद पुरस्कार मिलेगा। इसके बाद दूसरा स्थान पाने वाले विजेताओं को 1500 रुपए और तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रतियोगी को एक हजार रुपए पुरस्कार के तौर पर मिलेंगे। 15 मार्च तक प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण करना होगा।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/college-students-will-be-provided-with-rti/article-21605</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Feb 2021 20:22:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्य सूचना आयोग बना जनता की जेब पर भारी बोझ!</title>
                                    <description><![CDATA[आरटीआई एक्ट को सुचारू रूप से चलाए जाने के लिए बनाए गए राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली इतनी ढीली रही कि आरटीआई का निपटान ही जनता की जेब पर भारी पड़ने लगा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/the-state-information-commission-became-a-heavy-burden-on-the-publics-pocket/article-16222"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/the-state-information-commission-became-a-heavy-burden-on-the-publics-pocket.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सूचना आयोग के मुख्य आयुक्त को 2.50 लाख प्रति माह और आयुक्तों को 2.25 लाख रुपए प्रति माह वेतन व अन्य भत्ते मिलते हैं</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>छह सालों में प्रत्येक आरटीआई का निपटान पड़ा 8 हजार 137 रुपए में</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5> सिर्फ 56 हजार 529 शिकायतों का हुआ निपटान</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>20 करोड़ रुपए से ज्यादा वेतन के रूप में हुए खर्च</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़</strong>। 2005 में सूचना का अधिकार आ जाने के बाद जनता के हाथ सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए बहुत बड़ा हथियार आ गया। आरटीआई की मदद से प्रदेश में बहुत बड़े खुलासे हुए और जनता के टैक्स के पैसे की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोगों पर नकेल कसी जाने लगी। लेकिन आरटीआई एक्ट को सुचारू रूप से चलाए जाने के लिए बनाए गए राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली इतनी ढीली रही कि आरटीआई का निपटान ही जनता की जेब पर भारी पड़ने लगा है। राज्य सरकार ने जनता के गाढ़े टैक्स की कमाई के करीबन 46.02 करोड़ रुपए पिछले छह सालों में सूचना आयोग पर खर्च किए हैं। वहीं सूचना आयोग ने केवल 56 हजार 529 आरटीआई सूचनाओं का निपटान किया है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">छह सालों में राज्य सूचना आयोग को आबंटित हुए 46.02 करोड़ रुपए</h4>
<h6 style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार 2014 में सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने राज्य सूचना आयोग को और मजबूती प्रदान करने के लिए 2013-14 के 3 करोड़ 85 लाख के बजट के मुकाबले 1.28 करोड़ रुपए बढ़ा कर 5.13 करोड़ रुपए बजट दिया। वहीं सबसे ज्यादा 2019-20 में 9 करोड़ 79 लाख रुपए का बजट राज्य सूचना आयोग को दिया गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वर्ष                 मुहैया बजट<br />
2014-15         5.13 करोड़ रुपए<br />
2015-16         6.92 करोड़ रुपए<br />
2016-17         6.99 करोड़ रुपए<br />
2017-18         8.44 करोड़ रुपए<br />
2018-19         8.75 करोड़ रुपए<br />
2019-20         9.79 करोड़ रुपए<br />
<strong>कुल </strong>               <strong>46.02 करोड़ रुपए</strong></h6>
<h4 style="text-align:justify;">हर महीने निपटी केवल 785 आरटीआई, आयोग पर खर्च हुए 63.8 लाख रु.</h4>
<h6 style="text-align:justify;">राज्य सूचना आयोग ने पिछले छह सालों में कुल 56 हजार 529 आरटीआई का निपटान किया है। जिसके हिसाब से हर महीने केवल 785 शिकायतों का निपटान हुआ है जबकि 46.2 करोड़ रुपए के हिसाब से हर महीने तकरीबन 63 लाख रुपए राज्य सूचना आयोग का खर्चा है। ऐसे में प्रदेश की जनता के लिए एक आरटीआई का निपटान 8 हजार 137 रुपए में पड़ा है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">3 हजार 792 आरटीआई अभी भी पैंडिंग</h4>
<h6 style="text-align:justify;">हैरानीजनक तथ्य है कि जैसे राज्य सूचना आयोग का बजट और स्टाफ साल-दर-साल बढ़ता गया, वैसे-वैसे आयोग के पास आरटीआई एप्लीकेशन्स की पैंडेंसी भी बढ़ती गई। सबसे ज्यादा 3 हजार 471 आरटीआई की पैंडेंसी 2019 में रही और कमाल बात यह भी रही कि 2019-20 के लिए अब तक का सबसे ज्यादा 9 करोड़ 79 लाख का बजट राज्य सूचना आयोग को मिला।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">साल         पैंडिंग आरटीआई<br />
2014       1498<br />
2015       1395<br />
2016       1574<br />
2017       1980<br />
2018       2601<br />
2019       3471<br />
2020       (मई तक) 3792</h6>
<h4 style="text-align:justify;">3 करोड़ 27 लाख रुपए जुर्माने के रूप में वसूले</h4>
<h6 style="text-align:justify;">आयोग ने पिछले छह सालों में आरटीआई में कोताही बरतने वाले अधिकारियों एवं अन्यों से 3 करोड़ 27 लाख 59 हजार 490 रुपए जुर्माने के रूप में वसूले। जबकि आयोग ने 50 लाख 28 हजार 100 रुपए मुआवजे के रूप में आरटीआई आवेदनकर्ताओं को भी मुहैया करवाए। वहीं कुल 1 हजार 333 शिकायतों में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए आयोग ने सिफारिश की।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">मुख्य आयुक्त के अलावा सात राज्य सूचना आयुक्त निभा रहे हैं भूमिका</h4>
<h6 style="text-align:justify;">राज्य सूचना आयोग में मुख्य आयुक्त के अलावा सात आयुक्त आयोग की बागडोर संभाले हुए हैं। राज्य सरकार इन आयुक्तों को भारी-भरकम वेतन से नवाज रही है और इनके भत्ते इत्यादि भी प्रदेश के मुख्य सचिव और अतिरिक्त सचिवों के बराबर हैं। मुख्य आयुक्त के लिए 2.50 लाख रुपए प्रति माह वेतन एवं अन्य भत्ते इसके अलावा आयुक्तों के लिए 2.25 लाख रुपए प्रति माह वेतन और अन्य भत्ते इत्यादि फिक्स हैं। वहीं इनके लिए सरकारी सुख-सुविधाओं को पूरा इंतजाम अलग से है। आयुक्तों के अलावा सचिव को 88 हजार 400 रुपए, सीनियर सचिव को 78 हजार 800, अंडर सेक्रेटरी को 67 हजार 700, रिसर्च कम कंसलटैंट को 44 हजार 900, सुपरइंटैडैंट को 44 हजार 900, अकाउंट आफिसर को 44 हजार 900, वहीं सभी आयुक्तों के लिए एक सेके्रटरी जिसे 47 हजार 600 रुपए, प्रोग्रामर को 35 हजार 400 एवं इनके अलावा अन्य असिसटैंट्स, स्टैनो, टाइपिस्ट, रीडर्स, क्लर्क, ड्राइवर, चपरासी इत्यादि हैं, जिनके वेतन हजारों में हैं एवं भत्ते अलग से सरकार द्वारा दिए जाते हैं।</h6>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/the-state-information-commission-became-a-heavy-burden-on-the-publics-pocket/article-16222</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2020 22:18:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीआई के दायरे में मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने वाला फैसला एक जरूरी संदेश भी दे रहा है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-office-of-the-chief-justice-under-the-purview-of-rti/article-11146"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/rti.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब से देश में मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार के तहत आएगा। कोर्ट ने अपने यहां की व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) कार्यालय को आरटीआई के तहत पब्लिक आॅफिस माना है। इसका आशय है कि अब आरटीआई के अंतर्गत अर्जी दाखिल करके मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर से सूचना मांंगी जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि पारदर्शिता से न्यायिक आजादी प्रभावित नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस संवैधानिक बेंच में जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं। इस 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने 4 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने जनवरी 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील की, जिसमें सीजेआई के दफ्तर को आरटीआई के तहत माना गया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने एक फैसला लिखा, जबकि न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना और न्यायमूर्ति धनजंय वाई चन्द्रचूड़ ने अलग निर्णय लिखे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कानून के ऊपर कोई नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायिक व्यवस्था के दो हिस्से: न्यायिक व्यवस्था के दो हिस्से हैं, एक न्यायपालिका और दूसरा न्यायपालिका का न्यायिक प्रशासन। न्यायपालिका पहले भी आरटीआई के अंतर्गत नहीं था और न अब होगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मूलत: न्यायिक प्रशासन पर लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस नवीनतम निर्णय से यह स्पष्ट हो गया हैं कि सीजेआई का कार्यालय भी प्रशासनिक मकसद से आरटीआई के अधीन हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में मुख्य तर्क यह रखा गया है कि ‘स्वतंत्र न्यायपालिका’ की अवधारणा को केशवानंद भारती मामले में ‘संविधान के आधारभूत ढांचा’ के अंतर्गत रखा गया। इस तरह स्वतंत्र न्यायपालिका में हस्तक्षेप किसी भी रुप में संभव नहीं हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के उपरोक्त तर्कों का खंडन कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना हैं कि पारदर्शिता ‘स्वतंत्र न्यायपालिका’ के लिए बाधा नहीं हैं। पारदर्शिता पूर्ण व्यवस्था स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणा को और भी सशक्त करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फैसला अनुच्छेद 124 के अंतर्गत: सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई दफ्तर को आरटीआई के अधीन करने का यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के अंंतर्गत लिया है। अनुच्छेद 124 मूलत: भारतीय सुप्रीम कोर्ट की स्थापना और गठन संबंधी प्रावधानों को विस्तार से स्पष्ट करता है। इसी अनुच्छेद के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई आॅफिस को ‘पब्लिक आॅफिस’ माना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर आरटीआई का प्रभाव: इस मामले के याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में सही लोगों की नियुक्ति के लिए जानकारियां सार्वजनिक करना सबसे अच्छा तरीका है। प्राय: सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम के गोपनीयता पर सवाल उठते रहते हैं। प्रशांत भूषण का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति और ट्रांसफर की प्रक्रिया रहस्यमय होती है। इसके बारे में अत्यंत कम लोगों को पता होता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया, लेकिन जब अपने यहाँ पारदर्शिता की बात आती है, तो अदालत का रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता है। प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति से लेकर तबादले जैसे कई मुद्दे हैं, जिसमें पारदर्शिता की काफी जरूरत है और इसके लिए सीजेआई कार्यालय को आरटीआई एक्ट के दायरे में आना होगा। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय को समझा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जजों की संपत्ति सार्वजनिक नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आरटीआई के अंतर्गत जजों की संपत्ति आदि सार्वजनिक नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके सार्वजनिक होने से जजों के राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयुक्तों को भी निर्देश दिया है कि जब वह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित आरटीआई आवेदनों पर विचार करें, तो निर्णय लेते समय‘ स्वतंत्र न्यायपालिका’ की अवधारणा और न्यायाधीशों की ‘निजता के अधिकार’ के बारे में गंभीरता से सोचे।</p>
<p style="text-align:justify;">आरटीआई को निगरानी के औजार के तरह प्रयोग नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूर्णत: स्पष्ट कर दिया कि वह सीजेआई के आॅफिस को आरटीआई के दायरे में ला रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरटीआई को सुप्रीम कोर्ट के निगरानी के औजार की तरह प्रयोग किया जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने मूलत: पारदर्शिता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के मध्य संतुलन बनाया है। यहीं कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में सूचना आयुक्तों को विशेष दिशा निर्देश भी दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्कर्ष: वास्तव में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दूरगामी प्रभाव वाला व व्यवस्था में पारदर्शिता कायम करने वाला है। पारदर्शी प्रशासन के पक्ष में यह भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी जीत है। हाल के दिनों में जिस प्रकार सूचना के अधिकार कानून में सरकार कटौती का प्रयास कर रही थी, वैसे में इस फैसले से आरटीआई एक्ट पुन: मजबूत होगा। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि पारदर्शिता से न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के महासचिव इससे सहमत नहीं हुए थे। परंतु अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर स्वीकृति की मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने आरटीआई को अपने यहाँ कई शर्तों के साथ लागू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कॉलेजियम द्वारा की जाने वाली जजों की नियुक्ति की सिफारिश के साथ सिर्फ नाम ही उजागर किए जाएंगे, कारण नहीं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कॉलेजियम के सभी फैसले सार्वजनिक होने से जजों की नियुक्ति, प्रौन्नति पब्लिक डिबेट बन जाएगी, जो न्यायपालिका के लिए उचित नहीं है। कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस निर्णय से कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता में अवश्य ही वृद्धि होगी। सीजेआई के आॅफिस को सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने वाला फैसला एक जरूरी संदेश भी दे रहा है कि लोकतंत्र में कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल देश में ‘विधि के शासन’ की अवधारणा को आगे बढ़ाता है, अपितु पारदर्शिता को भी उच्चतर स्तर पर पहुँचाता है।<br />
<strong><em>-राहुल लाल</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2019 21:06:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अधिकारियों की तंग-दिली का शिकार आरटीआई एक्ट, नहीं मिल रही जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[हर सरकारी विभाग जानकारी देने से कर रहा साफ इन्कार चंडीगढ़(अशवनी चावला)। पंजाब के सरकारी आधिकारियों की तंग दिली का शिकार आरटीआई एक्ट हो रहा है, पंजाब के सभी विभाग पहली बार में जानकारी देने की जगह पर कोई न कोई बहाना लगाते हुए जानकारी देने से साफ इन्कार करने में लगे हुए हैं, जिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rti-officials-negligence-making-act-weak/article-5028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/rti-act-.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हर सरकारी विभाग जानकारी देने से कर रहा साफ इन्कार</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अशवनी चावला)।</strong> पंजाब के सरकारी आधिकारियों की तंग दिली का शिकार आरटीआई एक्ट हो रहा है, पंजाब के सभी विभाग पहली बार में जानकारी देने की जगह पर कोई न कोई बहाना लगाते हुए जानकारी देने से साफ इन्कार करने में लगे हुए हैं, जिस कारण पंजाबियों को एक्ट के अंतर्गत जानकारी लेने के लिए चंडीगढ़ में स्थित सूचना आयोग के पास जाना पड़ रहा है।</p>
<h1 style="text-align:center;">एक्ट के अंतर्गत जानकारी नहीं देने के कारण रोजमर्रा की<br />
हो रही 20 से 22 शिकायतें</h1>
<p style="text-align:justify;">पिछले 2-3 सालों से सरकारी विभागों द्वारा जानकारी नहीं देने की रिवायत चलाने के कारण आयोग के पास शिकायतों का अंबार लग गया है। सूचना अधिकार आयोग के पास रोजमर्रा की 20 से 22 शिकायतें आ रही हैं और साल में यह संख्या 7 हजार तक पहुंच रही है। जानकारी अनुसार केंद्र सरकार द्वारा 2005 में सूचना अधिकार एक्ट पास करते हुए देश के हर नागरिक को सूचना लेने का अधिकार तो दे दिया गया था परंतु इस एक्ट के अंतर्गत आज भी पंजाब के लोगों को सरकारी बाबूओं द्वारा जानकारी नहीं दी जा रही है।</p>
<h1 style="text-align:center;">आयोग के पास लगा शिकायतों का अंबार, 2-2 माह<br />
बाद आता है नम्बर</h1>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में कोई भी सरकारी विभाग ऐसा नहीं है, जिसके खिलाफ सूचना नहीं देने के कारण चंडीगढ़ में स्थित पंजाब राज सूचना अधिकार आयोग के पास शिकायत न की गई हो। पिछले दो सालों से सरकारी बाबूओं द्वारा जानकारी नहीं देने के कारण रोजमर्रा की ही आयोग को 20 से 22 शिकायतें मिल रही हैं। जो कि साल के अंत तक शिकायतों की संख्या 7हजार से भी अधिक पहुंच रही है। सूचना आयोग में शिकायतों के लग रहे अंबार के कारण शिकायतकर्त्ता को भी मामले की सुनवाई के लिए तारीख भी 2-2 महीने तक की मिल रही है।</p>
<h1 style="text-align:center;">जुर्माना लगने के बावजूद भी अड़ियल रवैया अपना रहे अधिकारी</h1>
<p style="text-align:justify;">पंजाब राज सूचना आयोग द्वारा सरकारी बाबूओं के खिलाफ सख़्ती करते हुए 25 -25 हजार तक का जुर्माना लगाया गया है परन्तु सरकारी बाबूओं पर जूंतक नहीं सरक रही है व उनकी तरफ से जानकारी नहीं देने वाला अड़ियल रवैया अपनाया जा रहा है। सूचना आयोग द्वारा पिछले साल 2017-18 दौरान सूचना आयोग द्वारा 30 के लगभग सरकारी बाबूओं को 4 लाख 90 हजार रुपए का जुर्माना किया जा चुका है।</p>
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                <pubDate>Fri, 27 Jul 2018 08:14:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीआई में लापरवाही : एसपी-डीएसपी को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[29 जून को वीडियो कांफ्रेसिंग से होगी अगली सुनवाई ऐलनाबाद(सच-कहूँ न्यूज)। राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के एक मामले में डीएसपी व एसपी को नोटिस किया है। राज्य जनसूचना अधिकारी के रूप में डीएसपी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में पुलिस अधीक्षक अपना पक्ष रखेंगे। मामले की सुनवाई 29 जून को होगी। आयोग की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">29 जून को वीडियो कांफ्रेसिंग से होगी अगली सुनवाई</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐलनाबाद(सच-कहूँ न्यूज)।</strong> राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के एक मामले में डीएसपी व एसपी को नोटिस किया है। राज्य जनसूचना अधिकारी के रूप में डीएसपी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में पुलिस अधीक्षक अपना पक्ष रखेंगे। मामले की सुनवाई 29 जून को होगी। आयोग की ओर से मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए की जाएगी। आरटीआई एक्टिविस्ट सुरेंद्र सरदाना एडवोकेट की अपील पर आयोग ने नोटिस जारी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐलनाबाद निवासी सुरेंद्र सरदाना ने 26 दिसंबर 2016 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय से आरटीआई में कुछ जानकारी मांगी थी। मांगी गई जानकारी न मिलने पर उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रथम अपील 13 फरवरी को दाखिल की। इसके बावजूद उन्हें सूचना नहीं मिली। जिस पर सुरेंद्र सरदाना ने 6 अप्रैल 2017 को राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। अब 29 जून को मुख्य सूचना आयुक्त समीर माथुर मामले की सुनवाई करेंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या मांगा है आरटीआई में</h2>
<p style="text-align:justify;">सूचना का अधिकार जागृति मंच ऐलनाबाद के अध्यक्ष सुरेंद्र सरदाना एडवोकेट ने पुलिस विभाग से चालान काटने को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा कि पुलिस विभाग में किस रेंक के अधिकारी या कर्मचारी को वाहनों के चालान काटने की शक्ति प्राप्त है। ऐसी शक्ति किस एक्ट के तहत प्रदान की गई है। इसके साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई थी कि जब पुलिस कर्मियों द्वारा नाकेबंदी करके वाहनों के चालान काटे जाते हैं, तब क्या इसकी उच्चाधिकारियों से लिखित अनुमति ली जाती है या वे अपने स्तर पर ही नाकेबंदी करके चालान काटते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट संशोधित-2016 के तहत चालान काटने की शक्ति किन्हें प्राप्त है। आरटीआई में हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन की प्रति की मांग की गई थी जिसमें पुलिस को चालान काटने की शक्तियां मिली हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/notice-to-sp-dsp-negligence-in-rti/article-920</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 09:22:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीआई में लापरवाही पर हुड्डा आॅफिसर पर शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सूचना आयोग ने 6 जून को चंडीगढ़ कार्यालय में किया तलब समालखा (सच कहूँ न्यूज)। राज्य सूचना आयोग ने एस्टेट आॅफिसर हुड्डा फरीदाबाद को आरटीआई एक्ट की उल्लघंना का दोषी माना है। आयोग ने एसपी फरीदाबाद को जमान्ती वारन्ट भेज कर एस्टेट आॅफिसर हुड्डा फरीदाबाद को 6 जून को चंडीगढ़ पेश होने के आदेश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:center;">राज्य सूचना आयोग ने 6 जून को चंडीगढ़ कार्यालय में किया तलब</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>समालखा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राज्य सूचना आयोग ने एस्टेट आॅफिसर हुड्डा फरीदाबाद को आरटीआई एक्ट की उल्लघंना का दोषी माना है। आयोग ने एसपी फरीदाबाद को जमान्ती वारन्ट भेज कर एस्टेट आॅफिसर हुड्डा फरीदाबाद को 6 जून को चंडीगढ़ पेश होने के आदेश किए हैं। इसके साथ ही आॅफिसर पर 25 हजार रूपये जुर्माने का कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। इस संबंध में पीपी कपूर ने शिकायत दी थी। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि 16 मई 2016 को एस्टेट आॅफिसर फरीदाबाद को आरटीआई आवेदन भेजकर फरीदाबाद के औद्योगिक प्लाट बारे नौ बिन्दु की सूचनाएं मांगी थी।</p>
<h3>एक्ट की उल्लंघना पर जमानती वारंट जारी</h3>
<p style="text-align:justify;">लेकिन सिर्फ एक बिन्दु की सूचना सही दी, शेष सूचना भ्रामक व अधूरी दी। जिसके बाद उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं प्रशासक हुड्डा फरीदाबाद के 6 सितम्बर 2016 को शेष सूचनाएं सही व पूरी देने के लिखित आदेशों की भी एस्टेट आॅफिसर ने परवाह नहीं की। राज्य सूचना आयोग ने 9 मार्च को सुनवाई उपरांत एस्टेट आॅफिसर परुीदाबाद को दोषी मानते हुए 25 हजार रूपये का जुर्माने का नोटिस जारी करते हुए शेष सूचनाएं तीन सप्ताह में देने व 1 मई को चंडीगढ़ पेश होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए थे। लेकिन 1 मई को सुनवाई के दौरान एस्टेट आॅफिसर ना तो आयोग के समक्ष पेश हुए और ना ही कोई सूचना भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सूचना आयुक्त मेजर जनरल जेएस कुंडू ने एस्टेट आॅफिसर हुड्डा फरीदाबाद को 6 जून को 25 हजार जुर्माने के नोटिस का जवाब देने व आरटीआई आवेदन से सम्बंधित समस्त रिकार्ड सहित चंडीगढ़ तलब किया है।आदेश की प्रति जमानती वारन्ट सहित एसपी फरीदाबाद को भेजकर एस्टेट आॅफिसर फरीदाबाद की पेशी सुनिश्चित करने के निर्देश किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 09:02:39 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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