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                <title>WORLD SCHIZOPHRENIA DAY - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>विश्व स्क्रिजोफ्रेनिया दिवस पर विशेष : गुरुग्राम के 50% लोगों में कमजोरी ही बन गई मानसिक बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[वहीं 50 प्रतिशत लोग मानते हैं कि जो व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रुप से अपने को कमजोर मानते हंै वही मानसिक बीमारी है। इसके साथ ही 35 प्रतिशत लोग मानते है कि यह किसी बुरे कर्म का नतीजा है और 43 प्रतिशत मानते हैं कि मानसिक बीमार व्यक्ति किसी भी काम को करने के लिए फिट नहीं है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/world-schizophrenia-day/article-15590"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/world-schizophrenia-day.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>35 प्रतिशत लोग मानते है कि यह किसी बुरे कर्म का है नतीजा</strong></h2>
<h3 style="text-align:center;"><strong>(World Schizophrenia Day)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>एक सर्वे में आई यह बात सामने</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजय मेहरा/सच कहूँ गुरुग्राम।</strong> कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह में जारी किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि गुरुग्राम के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक लोग व्यक्तिगत कमजोरी को ही मानसिक बीमारी का मुख्य कारण मानते हैं। यह सर्वे गुरुग्राम के 400 लोगों पर किया गया। इस सर्वे को विश्व स्क्रिजोफ्रेनिया दिवस की पूर्व संध्या पर सांझा किया। स्क्रिजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रस्त होते हैं। जहां व्यक्ति भ्रम और मतिभ्रम (आवाजें सुनाई देना व स्वयं से करना) का अनुभव करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानसिक बीमारियों के प्रति जागरुकता के लिए हर साल 24 मई को विश्व स्क्रिजोफ्रेनिया दिवस मनाया जाता है। इस बार विश्व स्क्रिजोफ्रेनिया दिवस का विषय स्टीग्मा रीमूविंग (मानसिक बीमारी के कंलक को मिटाना) है। गुरुग्राम के शहरी क्षेत्र व चार गांव में मानसिक रोगों की जानकारी को लेकर 400 से अधिक लोगों पर सर्वे किया था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिसमें जाना गया कि लोग मानसिक बीमारी और उसके कारण व निदान के बारे में कितना जानते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस पर सामने आया कि 89 प्रतिशत लोगों ने मानसिक बीमारी के बारे में सुना है,</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन इन बीमारियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं 50 प्रतिशत लोग मानते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रुप से अपने को कमजोर मानते है वही मानसिक बीमारी है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही 35 प्रतिशत लोग मानते है कि यह किसी बुरे कर्म का नतीजा है और 43 प्रतिशत मानते हैं कि मानसिक बीमार व्यक्ति किसी भी काम को करने के लिए फिट नहीं है। संबध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) की ट्रस्टी रीता सेठ के मुताबिक यह सर्वे वर्ष 2018-19 से बीच किया गया जिसका रिपोर्ट अब जारी किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>समाज में कई तरह की रुढ़िवादी परम्पराएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हमारे समाज में कई तरह की रुढ़िवादी परम्पराएं चली आ रही हैं, जिसके कारण भी मानसिक बीमारी का पता आसानी से नहीं लगता हैं। इसीलिए मानसिक बीमारी के कलंक को मिटाने के लिए हर साल स्क्रिजोफेनिया दिवस मनाया जाता है। मनाने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि लोगों को मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा सके और इसके प्रति फैली भ्रांतियों से भी अवगत कराया जा सके। इस भाग दौड़ भरी लाइफ में व्यक्ति में बहुत तरह की मानसिक परेशानियां होती हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जो कभी-कभी जीवन में बहुत गहरा प्रभाव डालती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">अक्सर ऐसे मामले भी देखने को मिलते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जिनमें कई लोग मानसिक परेशानियों के चलते आत्महत्या तक कर लेते हैं।</li>
</ul>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2020 18:27:27 +0530</pubDate>
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