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                <title>Employment - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Employment RSS Feed</description>
                
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                <title>रोजगार और अर्थशास्त्र</title>
                                    <description><![CDATA[Employment And Economics: चीन की खस्ताहाल इकोनॉमी, अमेरिका से तनाव और कारोबार में चीनी सरकार के दखल के चलते एप्पल ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का फैसला किया है। एप्पल का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। चीन के मुकाबले एप्पल भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारीa कर रहा है। इस फैसले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/employment-and-economics/article-61625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/apple-flagship-store.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Employment And Economics: चीन की खस्ताहाल इकोनॉमी, अमेरिका से तनाव और कारोबार में चीनी सरकार के दखल के चलते एप्पल ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का फैसला किया है। एप्पल का भारत पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। चीन के मुकाबले एप्पल भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारीa कर रहा है। इस फैसले से करीब छह लाख भारतीयों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। Employment And Economics</p>
<p style="text-align:justify;">जिन देशों में बड़ी कंपनियां निवेश बढ़ाएंगी, वहां रोजगार बढ़ना भी तय है। बेशक देश में रोजगार की अपार संभावनाएं होती हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आर्थिक सिद्धांत और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। फिलहाल राजनीति और अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। राजनीतिक स्तर पर कई ऐसे फैसले लिए जाते हैं जो अस्थायी राजनीतिक लाभ देते हैं लेकिन लंबे समय में अर्थव्यवस्था की जड़ें कमजोर कर जाते हैं। Employment And Economics</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के बजाय आर्थिक नीतियों के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। मुफ्त बिजली की सुविधा जैसे फैसले कई राज्यों ने लिए हैं जो उनकी अर्थव्यवस्था के लिए समस्या बन गए हैं। कल्याणकारी योजनाएं और मुफ्त की रेवड़ियों में अंतर होता है। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो दुनिया भर की कंपनियां निवेश करेंगी। आर्थिक फैसलों को आर्थिक दृष्टि से ही देखा जाना चाहिए। Employment And Economics</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rivers: नदियों की जान निकाल रहे रेत माफिया" href="http://10.0.0.122:1245/sand-mafia-is-taking-the-life-out-of-rivers/">Rivers: नदियों की जान निकाल रहे रेत माफिया</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 15:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रोजगार कैसे प्राप्त करें, बेरोजगारी कैसे दूर करें, पूज्य गुरु के शानदार टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा। सच्चे, रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से अपने अमृतमयी वचनों की वर्षा करते हुए फरमाया कि मालिक के नाम में सुख है, आत्मिक शांति है, मालिक के नाम में तंदुरुस्ती है। मालिक के नाम में वो सब नियामतें हैं जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/msg-maha-rehmokaram-month/article-43479"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/unemployment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा।</strong> सच्चे, रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से अपने अमृतमयी वचनों की वर्षा करते हुए फरमाया कि मालिक के नाम में सुख है, आत्मिक शांति है, मालिक के नाम में तंदुरुस्ती है। मालिक के नाम में वो सब नियामतें हैं जो आपने कभी सोची भी नहीं होंगी। वो सब खुशियां हैं जिसकी आपने कभी कल्पना नहीं की होगी। क्योंकि राम, ओउम, हरि, अल्लाह, गॉड, ख़ुदा, रब्ब सब कुछ देने वाला है, सब कुछ बनाने वाला है, वो दया का सागर, रहमत का दाता है, अन्दर बाहर किसी को कोई कमी नहीं छोड़ता। पर आज का दौर बड़ा ही भयानक दौर है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कोई काम छोटा नहीं होता, शुरूआत तो कीजिये</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कोई भी बेरोजगार ना रहे अगर यह सोच ले कि मैंने कोई ना कोई अच्छा कर्म करना ही करना है। चाहे वो छोटी स्केल (स्तर) से शुरू करे या बड़े से। छोटा कुछ नहीं होता, आपने देखा होगा कि हमारे देश में जो धनाढ्यों में नंबर रखते हैं, वो भी किसी समय में बड़े गरीब हुआ करते थे और आज कहां से कहां पहुंच गए। तो उन्होंने छोटे से छोटा काम करने में भी संकोच नहीं किया। तो उसी तरह आप भी कर्मयोगी बनिये, जो हमारे पवित्र वेदों में बोला, ज्ञान योगी बनिये। कर्म करते जाइये।</p>
<p style="text-align:justify;">ये सभी धर्मों में है कि कर्म करना और ज्ञानयोगी होना बेहद जरूरी है। तो ज्ञान हासिल करो और कर्मयोगी बनकर आगे बढ़ते जाओ। शुरूआत चाहे दिहाड़ी-मजदूरी से क्यों ना करनी पड़े, चाहे आप कितने भी पढ़े लिखे क्यों न हों, बेरोजगारी से वो दिहाड़ी-मजदूरी हजारों गुणा ज्यादा अच्छी है। पर इगो भी तो कोई चीज होती है। मैंने इतनी डिग्रियां, मेरे पास ये-ये, फिर भी मुझे कुछ नहीं हासिल हो रहा, फिर भी नौकरी नहीं, मेरे साथ वाला ये हो गया, मेरे पीछे वाला, मेरे आगे वाला, उस चक्कर में मत पड़ो।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>असफल होने पर भी प्रयास करना मत छोड़ो</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हर कोई अपने कर्मों की और मेहनत की करके आगे बढ़ता है। कईयों के संचित कर्म बहुत अच्छे होते हैं, वो जिस चीज को भी हाथ डालते हैं, सोना बन जाता है। और कईयों के संचित कर्म इतने बुरे होते हैं कि सोने को हाथ डालें तो राख बन जाता है। पर इसका मतलब ये थोड़ा है कि आप हाथ डाला और राख बन गया और छोड़ दिया, जी नहीं, मेहनत करनी ना छोड़ो। हक-हलाल, कड़ा परिश्रम, हार्ड वर्क, दसां नहुंआ दी कीरत करते रहो। कोई भी काम मिल जाए, कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता। पता नहीं भगवान ने आपके लिए क्या छुपा कर रखा है? छोटा सा काम शुरू किया, क्या पता वो कब बड़ा हो जाए और आप तरक्की कर जाएं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Feb 2023 17:35:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहरी निकायों में 9 से लागू होगी इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में मिलेगी 100 दिन रोजगार की गारंटी श्रीगंगानगर/जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों को सम्बल प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारत सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की तर्ज पर राजस्थान में ह्यइंदिरा गांधी शहरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-to-launch-100-day-urban-employment-guarantee-scheme-on-9-september/article-37559"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/jobs-in-reputed-companies1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में मिलेगी 100 दिन रोजगार की गारंटी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर/जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों को सम्बल प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारत सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की तर्ज पर राजस्थान में ह्यइंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करने की अभिनव पहल की है। योजना 9 सितंबर से शुरू होगी। योजना में लगभग 2.25 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। योजना के तहत पंजीकरण और काम मांगने के लिए आवेदन की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई थी। मुख्यंमत्री ने राज्य बजट वर्ष 2022-23 में प्रदेश के शहरी निकायों में गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ह्यइंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजनाह्य लागू करने की घोषणा की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार निरंतर इस दिशा में प्रयास कर रही है कि प्रदेश के हर व्यक्ति को रोजगार मिले, हर परिवार खुशहाल हो। इसी क्रम में शहरी निकाय क्षेत्र में यह योजना लागू की जा रही है। केंद्र सरकार और अन्य राज्यों को भी ऐसी योजना शुरू करनी चाहिए, ताकि शहरी लोगों को भी रोजगार मिल सके। राजस्थान के 213 शहरी निकाय क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों को हर साल 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार 800 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह देश की इस तरह की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना है। इंदिरा गांधी शहरी गारंटी रोजगार गारंटी योजना में जन-आधार कार्ड धारक परिवार आवेदन कर सकता है। अभी तक 2.25 लाख से अधिक परिवार पंजीकृत हो चुके हैं। स्वायत शासन विभाग ने इन परिवारों के सदस्यों को रोजगार उपलध कराने के लिए कुल 9,593 कार्य चिन्हित किए हैं। रोजगार की मांग के लिए आवेदनकर्ता ई-मित्र से आवेदन कर सकता है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़े:-</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/cmho-dr-manmohan-gupta-arrived-to-inspect-the-houses-after-getting-dengue-patient/">डेंगू मरीज मिलने पर घरों का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमएचओ डॉ. मनमोहन गुप्ता</a></p>
<p style="text-align:justify;">रोजगार आवेदनकर्ता परिवार के नगर निकाय क्षेत्रा की सीमा के किसी भी वार्ड में उपलध कराया जाएगा। कार्यों के लिए भुगतान जनआधार से लिंक बैंक अकाउन्ट में 15 दिन में किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण कार्य, जल संरक्षण कार्य, स्वच्छता एवं सेनिटेशन कार्य, सम्पत्ति विरुपण रोकने से कार्य, कन्वर्जेन्स कार्य, सेवा कार्य, हेरिटेज संरक्षण से जुड़े कार्य, नगरीय निकायों व सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा/चारदीवारी/गार्ड इत्यादि कार्य, नगरीय निकाय क्षेत्र में पार्किंग विकास एवं प्रबंधन, बेसहारा पशुओं को पकडने, रखने व प्रबंधन से सम्बन्धी कार्य, राजीव गांधी सेवा केन्द्र की तर्ज पर मॉडल भवन निर्माण जैसे कार्य चिन्हित किये गये हैं। इस योजना से राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों को आर्थिक सम्बल मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 2.25 लाख से अधिक परिवारों को जॉब कार्ड जारी, 3 लाख से अधिक सदस्यों को मिल सकेगा काम, 43 हजार से अधिक परिवारों ने किया काम के लिए आवेदन और 63,500 से अधिक लोगों ने काम मांगा है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Sep 2022 20:08:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रोजगार के अवसरों में वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। देश के विनिर्माण, निर्माण, शिक्षा जैसे चयनित नौ उद्योग क्षेत्रों में अक्टूबर – दिसंबर 2021 के दौरान 314.54 लाख कामगार रोजगाररत रहे हैं जबकि इससे पिछले तिमाही में यह आंकड़ा लगभग 300 लाख कामगार का रहा था। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की गुरुवार को यहां जारी अक्टूबर-दिसंबर, 2021 तिमाही रोजगार सर्वेक्षण रिपोर्ट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/increase-in-employment-opportunities/article-32815"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/unemployment-in-haryana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> देश के विनिर्माण, निर्माण, शिक्षा जैसे चयनित नौ उद्योग क्षेत्रों में अक्टूबर – दिसंबर 2021 के दौरान 314.54 लाख कामगार रोजगाररत रहे हैं जबकि इससे पिछले तिमाही में यह आंकड़ा लगभग 300 लाख कामगार का रहा था। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की गुरुवार को यहां जारी अक्टूबर-दिसंबर, 2021 तिमाही रोजगार सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में 124 लाख, निर्माण क्षेत्र में 6.19 लाख, व्यापार में 16.81 लाख, परिवहन में 13.20 लाख, शिक्षा में 69.26 लाख, स्वास्थ्य क्षेत्र में 32.86 लाख, अस्थायी आवास एवं रेस्त्रां में 8.11 लाख, आईटी एवं बीपीओ में 34.57 लाख और वित्तीय सेवा क्षेत्र में 8.85 लाख कामगार कार्यरत हैं। इन गैर कृषि प्रमुख क्षेत्रों में 314.54 लाख कामगार रोजगाररत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा,‘ मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने संबंधित तिमाही रोजगार सर्वेक्षण (क्यूईएस) की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट को श्रम ब्यूरो ने तैयार किया है। सर्वेक्षण में ऐसे प्रतिष्ठानों से रोजगार आंकड़े जमा किये हैं, जहां 10 या उससे अधिक कामगार काम करते हैं और जो संगठित क्षेत्र से संबंधित हैं। छठीं आर्थिक जनगणना के अनुसार देश के कुल कामगारों में से 85 प्रतिशत कामगार 10 या उससे अधिक कामगारों वाली इकाइयों में काम करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार ‘विनिर्माण’ रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है, जहां कुल कामगारों में से लगभग 39 प्रतिशत कामगार काम करते हैं। इसके बाद शिक्षा क्षेत्र में 22 प्रतिशत कामगार कार्यरत हैं। सभी नौ उद्योग क्षेत्रों में लगभग 1.85 लाख रिक्त स्थानों की जानकारी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार 85.3 प्रतिशत नियमित कामगार हैं और 8.9 प्रतिशत ठेका मजदूर हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 14:38:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>21 की उम्र में युवाओं को रोजगार चाहिए, शराब नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[गोरीवाला(सच कहूँ/अनिल)। 21 साल की उम्र में युवाओं को शराब नहीं रोजगार चाहिए, जबकि सरकार अपनी नई आबकारी नीति में युवाओं को शराब पिला रही है। यह कहना है ग्रामीणों का। ग्रामीणों ने नई आबकारी नीति पर कटाक्ष किए और सरकार से इसे तुरंत वापस लिए जाने की मांग की ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/youth-at-the-age-of-21-need-employment-not-alcohol/article-31125"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/youth.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोरीवाला(सच कहूँ/अनिल)।</strong> 21 साल की उम्र में युवाओं को शराब नहीं रोजगार चाहिए, जबकि सरकार अपनी नई आबकारी नीति में युवाओं को शराब पिला रही है। यह कहना है ग्रामीणों का। ग्रामीणों ने नई आबकारी नीति पर कटाक्ष किए और सरकार से इसे तुरंत वापस लिए जाने की मांग की ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। शिक्षित ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा शराब का सेवन करने की आयु 25 से घटाकर 21 वर्ष करना सरासर अव्यवहारिक एवं अनुचित है। सरकार को शराब पीने की उम्र घटाने की बजाय शराब पीने पर पाबंदी लगानी चाहिये थी। वैसे भी आज का युवावर्ग नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। ऐसे में सरकार को तो सख्त पाबंदिया लगानी चाहिए थी,ताकि सख्त नियमों से युवा भटके नहीं और वे अपना भविष्य बेहतर बना सके। लोगों का कहना कि सरकार को इस फैसले को वापस लेना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। 21 वर्ष की आयु में ही युवा ही भटकते हैं अगर उन्हें सही राह दिखाया जाए तो उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है और नशे की तरफ भटके तो भविष्य खराब हो सकता है। शराब का सेवन करने की उम्र 21 वर्ष करना सही नहीं है, सरकार केवल अपना राजस्व बढ़ाना चाहती है उन्हें युवाओं के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। सरकार को यह निर्णय वापस लेना चाहिए युवा वर्ग पर ही देश का भविष्य टिका हुआ है नशा समाज के लिए बेहद घातक है।<br />
<strong>-विनोद कुमार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले से युवा पीढ़ी नशे की तरफ ज्यादा परिवृत्त होगी। इससे युवा वर्ग नशे की दलदल में धकेला जा रहा है। सरकार का यह निर्णय समाज हित में नहीं है। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और युवा वर्ग के हित को देखते हुए अच्छा फैसला लेना चाहिए। सरकार को केवल राजस्व की तरफ ही नहीं देखना चाहिए।<br />
<strong>-नछतर सिंह</strong></p>
<p style="text-align:justify;">युवा वर्ग पहले ही नशे की जकड़ में आ रहा है शराब पीने की उम्र 21 वर्ष करने से युवा वर्ग पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। युवाओं में ये उम्र पढ़ाई की होती है, पता नहीं सरकार ने क्या सोचकर यह ये फैसला लिया है। लगता है सरकार युवाओं को नशेड़ी बनाना चाहती है।<br />
<strong>-शीशपाल कैथ।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का यह फैसला उचित नहीं है, युवाओं को शराब नहीं कैरियर की दिशा रोजगार की जरूरत होती है। युवा पीढ़ी पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। समाज निर्माण में युवा वर्ग का अहम योगदान होता है। आज समाज को सुनहरे भविष्य की ओर ले जाने की जरूरत है। सरकार को यह निर्णय पर पु:न विचार करना चाहिए।<br />
<strong>-वेद प्रकाश</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 10:34:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोजगार के नाम पर ठगने वाली कंपनी के तीन कर्मचारी गिरफ्तार, एमडी फरार</title>
                                    <description><![CDATA[यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)। जगाधरी के हुड्डा सेक्टर-17 में कार्यालय बनाकर बेरोजगारों को अच्छा रोजगार(Employment) देने के नाम पर लाखों रुपये ठगने वाली हेडवे रन प्राइवेट कंपनी के तीन कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ में कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं और कंपनी के एमडी समेत नौ कर्मचारियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/three-employees-of-the-company-who-cheated-in-the-name-of-employment-arrested-md-absconding/article-30601"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/employment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपत राय)।</strong> जगाधरी के हुड्डा सेक्टर-17 में कार्यालय बनाकर बेरोजगारों को अच्छा रोजगार(Employment) देने के नाम पर लाखों रुपये ठगने वाली हेडवे रन प्राइवेट कंपनी के तीन कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ में कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं और कंपनी के एमडी समेत नौ कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की जांच कर रहे पुलिस की आर्थिक अन्वेषण शाखा के जांच अधिकारी जनक राज ने बताया कि सोनीपत निवासी पवन ने पुलिस को शिकायत दी थी कि जगाधरी के हुड्डा सेक्टर-17 में हेडवे रन प्राइवेट कंपनी का कार्यालय है। जिसमें बेरोजगार युवकों को अच्छा रोजगार(Employment) देने के बहाने के तीन दिन की ट्रेनिंग देकर उनसे लाखों रुपये लेकर ठगे जा रहे हैं। यही नहीं कंपनी ने अभी तक करनाल समेत अलग-अलग स्थानों पर अपने कार्यालय बनाकर बेरोजगारों से लाखों रुपये ठगे जा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब कंपनी द्वारा जगाधरी में कार्यालय बनाकर युवकों को सब्जबाग दिखाकर ठगा जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कंपनी के कार्यालय पर दबिश देकर वहां मौजूद तीन कर्मचारियों पंजाब के करतारपुर निवासी विकास, बठिंडा निवासी रणदीप व नरवाना निवासी संदीप मलिक को गिरफ्तार कर लिया। जबकि अन्य कर्मचारी मौके से फरार होने में सफल हो गए। पुलिस ने पकड़े गए आरोपितों की निशानदेही पर कंपनी के एमडी ड्टिावानी निवासी आनंद राठी समेत नौ कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि कंपनी के संचालक युवकों को झांसे में देकर प्रत्येक से तीन दिन की ट्रेनिंग देने के नाम पर 50-50 हजार रुपये लेकर ठगते थे। मामले में जांच की जा रही है कि आरोपितों ने अभी तक कितने युवकों से ठगी की है। कंपनी के एमडी की तलाश की जा रही है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Feb 2022 21:32:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोजगार के लिए प्रगतिशील निर्णय लिया जाना था आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र की एनडीए सरकार ने वर्ष 2022-23 के वित्तीय बजट में किसी भी वर्ग को कोई बड़ी राहत नहीं दी। व्यवसायिक क्षेत्र ने बजट को प्रभावशाली और आत्मनिर्भर भारत की दिशा वाला बजट बताया, विपक्षी दलों ने बजट को नकार दिया। वास्तव में कोविड महामारी में जिस प्रकार से उद्योग, बाजार और नौकरियों का संकट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/progressive-decision-had-to-be-taken-for-employment/article-30441"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/unemployment-in-haryana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र की एनडीए सरकार ने वर्ष 2022-23 के वित्तीय बजट में किसी भी वर्ग को कोई बड़ी राहत नहीं दी। व्यवसायिक क्षेत्र ने बजट को प्रभावशाली और आत्मनिर्भर भारत की दिशा वाला बजट बताया, विपक्षी दलों ने बजट को नकार दिया। वास्तव में कोविड महामारी में जिस प्रकार से उद्योग, बाजार और नौकरियों का संकट गहराया, बजट में उसके अनुरूप निर्णय नहीं लिए गए। मध्यम और छोटे उद्योगपति जिस प्रकार मंदी की चपेट में आए हैं, उन्हें राहत की उम्मीद थी जो नहीं मिली। नि:संदेह बजट लोग लुभावना नहीं लेकिन आम बजट जनता, मध्यम वर्ग और छोटे उद्योगपतियों को कोई तत्काल राहत नहीं दे सका जिसकी आवश्यकता थी। पहले कोविड महामारी और अब बढ़ती महंगाई जनता का कचूमर निकाल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई को लगाम लगाने के लिए प्रगतिशील निर्णय लिए जाने चाहिए थे। जहां तक मनरेगा के लिए 73000 करोड़ रुपये का सवाल है, यह भी विगत वर्ष की तरह 96000 करोड़ या इससे बढ़ाने की आवश्यकता थी। महंगाई के कारण बाजारों में मांग घटी है, जिससे छोटे उद्योगपति आधे कर्मचारियों के साथ काम चला रहे हैं। इन परिस्थितियों में बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया। यह आवश्यक है कि 80 लाख मकान बनाने के लक्ष्य से रोजगार में कुछ वृद्धि होगी लेकिन मध्यम वर्ग और कर्मचारी वर्ग को कोई राहत नहीं। यह बड़ा अटपटा है कि आरक्षण का हकदार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की आय सीमा आठ लाख रुपए है, दूसरी ओर ढाई लाख तक की आय वालों को आयकर टैक्स देना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि आठ लाख तक आय वाला व्यक्ति टैक्स देता है तब उसे आरक्षण का अधिकार कैसे मिला? बजट में गैर करदाताओं जैसे किसानों, मजदूरों और गरीबों को भी तुरंत राहत नहीं दी गई। पॉलिश किए हीरे सस्ते करना ज्यादा जरूरी नहीं था बल्कि कपड़ों, बूट, चप्पलों और मकान निर्माण सामग्री सस्ती की जानी चाहिए थी। सीमेंट और सरिया की कीमतें उछाल पर हैं। किसानों को सब्जियों और फलों की काश्त के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कोल्ड स्टोर खोलने की बड़ी योजना बनाई जा सकती थी। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की बदहाली को दूर करने के लिए प्रयास किए जा सकते थे। फ्री बांटने की रणनीति छोड़ी जा सकती है लेकिन आर्थिक मंदी दूर करने के लिए पैकेज आवश्यक था।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Feb 2022 09:59:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हजारों लोगों के लिए खुलेगी रोजगार की राह</title>
                                    <description><![CDATA[टेलीकॉम पीएलआई में 31 कंपनियों को मंजूरी चार सालों में 3345 करोड़ रुपये का करेंगी निवेश नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 31 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 16 एमएसएमई और 15 गैर-एमएसएमई (8 घरेलू और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-path-of-employment-will-open-for-thousands-of-people/article-27598"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/telecom.jpg" alt=""></a><br /><h4><strong>टेलीकॉम पीएलआई में 31 कंपनियों को मंजूरी</strong></h4>
<h4><strong>चार सालों में 3345 करोड़ रुपये का करेंगी निवेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> देश में दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 31 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 16 एमएसएमई और 15 गैर-एमएसएमई (8 घरेलू और 7 वैश्विक कंपनियां) कंपनियां हैं, जो अगले चार वर्षों में लगभग 3345 करोड़ रुपये के निवेश करेगी, जिससे 40 हजार से अधिक लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिल सकता है। लगभग 1.82 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित इंक्रीमेंटल उत्पादन और स्थानीय अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस स्कीम से नए उत्पादों के घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिस पर प्रतिबद्धित निवेश का 15 प्रतिशत निवेश किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दूसरे देशों में निर्भरता होगी कम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">संचार राज्य मंत्री देवूसिंह चौहान ने योजना की वीरवार को शुरूआत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को सफल बनाने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इससे भारत की टेलीकॉम और नेटवर्किंग उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी। दूरसंचार विभाग द्वारा पीएलआई स्कीम को 12,195 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय से इंक्रीमेंटल निवेश और कारोबार को प्रोत्साहित करके दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये कंपनियां हैं शामिल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पात्र एमएसएमई कंपनियों में कोरल टे.लि., एहूमे आईओटी प्रा.लि., एलकॉम इनोवेशन प्रा.लि., फ्रॉग सेलसैट लिमिटेड, जीडीएन इंटरप्राइजेज प्रा.लि., जीएक्स इंडिया प्रा.लि., लेखा वायरलेस सॉल्यूशंस प्रा.लि., पनाचे डिजिलाइफ लिमिटेड, प्रियाराज इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, सिक्स्थ एनर्जी टेक्नोलॉजीज प्रा.लि., स्काईक्वाड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एप्लायंसेज प्रा.लि., एसटीएल नेटवर्क लिमिटेड, सुरभि सैटकॉम प्रा.लि., सिनेग्रा ईएमएस लिमिटेड, सिस्ट्रोम टेक्नोलॉजीज प्रा.लि. और तियानयिन वर्ल्डटेक इंडिया प्रा.लि. शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">गैर-एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत पात्र घरेलू कंपनियों में आकाशस्था टेक्नोलॉजीज प्रा.लि., डिक्सन इलेक्ट्रो एप्लायंसेज प्रा.लि., एचएफसीएल टेक्नोलॉजीज प्रा.लि., आईटीआई लिमिटेड, नियोलिंक टेली कम्युनिकेशंस प्रा.लि., सिरमा टेक्नोलॉजी प्रा.लि., तेजस नेटवर्क लिमिटेड और वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज प्रा.लि. शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">गैर-एमएसएमई श्रेणी के अंतर्गत पात्र वैश्विक कंपनियों में कॉमस्कोप इंडिया प्रा.लि., फ्लेक्सट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजीज (इंडिया) प्रा.लि.. फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्रा.लि., जाबिल सर्किट इंडिया प्रा.लि., नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्रा.लि., राइजिंग स्टार्स हाई-टेक प्रा.लि. और सनमीना-एससीआई इंडिया प्रा.लि. शामिल है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/the-path-of-employment-will-open-for-thousands-of-people/article-27598</link>
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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 10:23:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रोजगार नहीं तो विकास का कोई मतलब नहीं : राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि देश के युवाओं के पास रोजगार है तो वहां विकास का मतलब होता है लेकिन यदि युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और रोजी-रोटी को तरस रहे हैं तो ऐसी विकास का कोई अर्थ नहीं होता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/there-is-no-point-in-development-if-there-is-no-employment-rahul/article-26744"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/rahul-gandhi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि देश के युवाओं के पास रोजगार है तो वहां विकास का मतलब होता है लेकिन यदि युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और रोजी-रोटी को तरस रहे हैं तो ऐसी विकास का कोई अर्थ नहीं होता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार युवाओं को रोजगार देने में विफल रही है और उसकी गलत नीतियों का खामियाजा करोड़ों युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। गांधी ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार का ‘विकास’ ऐसा कि रविवार-सोमवार का फर्क ही खत्म कर दिया, नौकरी ही नहीं है तो क्या संडे, क्या मंडे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">भाजपा सरकार का ‘विकास’ ऐसा कि रविवार-सोमवार का फ़र्क़ ही ख़त्म कर दिया…</p>
<p>नौकरी ही नहीं है तो क्या Sunday, क्या Monday!<a href="https://twitter.com/hashtag/SundayThoughts?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#SundayThoughts</a> <a href="https://t.co/ILyJS7axYZ">pic.twitter.com/ILyJS7axYZ</a></p>
<p>— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1436915247852531713?ref_src=twsrc%5Etfw">September 12, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Sep 2021 13:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आरक्षण नहीं रोजगार ही समस्या का हल</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्टÑ में मराठों के लिए जाति आधारित आरक्षण को रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि मराठे आर्थिक तौर पर पिछड़ी श्रेणी में नहीं आते बल्कि व समर्थ हैं। इस निर्णय से जाति आधारित आरक्षण का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। आरक्षण की मांग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/reservation-is-not-the-only-solution-employment-is-solution/article-23449"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्टÑ में मराठों के लिए जाति आधारित आरक्षण को रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि मराठे आर्थिक तौर पर पिछड़ी श्रेणी में नहीं आते बल्कि व समर्थ हैं। इस निर्णय से जाति आधारित आरक्षण का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। आरक्षण की मांग के बढ़ते चलन को देखते हुए पिछली व्यवस्था को समझने व सुधारने की जरूरत है, जो इस मांग की मुख्य वजह हैं। आधुनिक युग में बदल रहे आर्थिक सामाजिक मूल्यों ने प्राचीन व मध्यकालीन जात-पात की कुप्रथा को कमजोर किया है। लोकतांत्रिक राजव्यवस्था व मानववादी चिंतन ने समानता व भाईचारे की सद्भावना को आगे बढ़ाया है। इसके बावजूद समाज में जाति आधारित संगठनों की सक्रियता बढ़ रही है जो जाति की सामाजिक संस्कृति की पहचान को बरकरार रखने के लिए अपनी-अपनी बिरादरी को संगठित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जातिगत चेतना इस स्तर तक पहुंच गई है कि उच्च जाति के लोगों के लिए आरक्षण से रोजगार की मांग उठ रही है। इन संगठनों के इस तर्क में पूरा दम है कि बढ़ रही बेरोजगारी व महंगाई के कारण इन वर्गों की आबादी का बड़ा हिस्सा आर्थिक तौर पर कमजोर हो गया है। इन कमजोर लोगों के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं हासिल करने की भी क्षमता नहीं रही है और भुखमरी के चलते आत्महत्याओं का दौर जारी है। नि:संदेह आर्थिक तौर पर उच्च जाति के लिए आरक्षण आवश्यक होगा, लेकिन पूरी की पूरी जाति के लिए आरक्षण किसी भी तरह से उचित नहीं। यहां यदि सरकारें रोजगार के सही अवसर पैदा करें तब आरक्षण की जाति आधारित मांग भी कमजोर पड़ सकती है। दरअसल में जाति संगठनों की यह धारणा बन चुकी है कि जिस तरह वह अपनी एकता दिखाकर राजनीतिक पार्टियों पर प्रभाव जमा लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी तरह वह आरक्षण की मांग भी मनवा लेंगे। राजनेता भी वोटों के लिए जाति संगठनों को खुले दिल से वायदा करते हैं। इसका परिणाम यह है कि अब देश में जाति आरक्षण आंदोलन भी कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने लगे हैं। हरियाणा में जाट आंदोलन और राजस्थान का गुर्जर आंदोलन इसका उदाहरण हैं। आंध्र प्रदेश का कापू समाज सक्षम माना जाता है, वह भी आरक्षण की मांग कर चुका है। पटेल समाज की भी ऐसी ही मिसाल है। राजनीतिक दलों ने आरक्षण के थोक वायदे करते हुए सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण की 50 फीसदी व्यवस्था का भी ध्यान नहीं रखा, जिस कारण महाराष्टÑ, राजस्थान सहित कई राज्य सरकारों के निर्णय बीच में ही लटककर रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला एकतरफा कार्रवाई से हल होने वाला नहीं। इसके सभी पहलुओं पर समान ध्यान देने की आवश्यकता है। जहां केन्द्र व राज्य सरकारों को मिलकर रोजगार में बढ़ोतरी के लिए काम करना चाहिए, वहीं जाति संगठनों को आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यह भी जरूरी है कि जाति भावना मजबूत करने की बजाय संयुक्तवार्त्ता, समानता व मानववादी विचारधारा को मजबूत किया जाए। पहले ही देश ने हजारों वर्ष जाति-पाति के दर्द को झेला है, जाति रहित होने से ही मानवीय गरिमा बढ़ेगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 May 2021 09:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंजाब में रोजगार की नई चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब सरकार ने एक अप्रैल से महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा की शुरूआत की है। नि:संदेह इस निर्णय से आम मध्यम वर्ग व गरीब वर्ग की महिलाओं को राहत मिलेगी, जो यात्रा के भारी आर्थिक बोझ का सामना कर रही थीं लेकिन इस निर्णय से निजी बस ट्रांसपोर्ट्स पर संकट के बादल मंडराने लगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/new-employment-challenge-in-punjab/article-22719"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/punjab.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब सरकार ने एक अप्रैल से महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा की शुरूआत की है। नि:संदेह इस निर्णय से आम मध्यम वर्ग व गरीब वर्ग की महिलाओं को राहत मिलेगी, जो यात्रा के भारी आर्थिक बोझ का सामना कर रही थीं लेकिन इस निर्णय से निजी बस ट्रांसपोर्ट्स पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिससे पंजाब में एक और नई बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। चिंताजनक बात बस मालिकों के कारोबार की नहीं बल्कि उन ड्राईवरों-कंडक्टरों और सहायक स्टाफ की है जिनकी रोजी-रोटी ही इस पेशे से जुड़ी हुई है। पंजाब में एक लाख के करीब बस चालक-कंडक्टर और उनके परिवारों की आय का स्त्रोत निजी बसें हैं। वास्तव में निजी बसों का कारोबार तो पहले ही घाटे में चल रहा था। मध्यम वर्ग में अपनी गाड़ियां खरीदने के चलने से बसों में सीटें खाली ही पड़ी रहती थी, अधिकतर बसों के कंडक्टर सवारियों को किराये में छूट देने का लालच देकर बसों में लेकर जाते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तेल के दाम बढ़ने से बसों का किराया बढ़ा तो तीन-चार सवारियों को बस की अपेक्षा टैक्सी या निजी गाड़ी सस्ती पड़ती है। कोई भी व्यक्ति महिलाओं को फ्री यात्रा के खिलाफ नहीं लेकिन जब बात पंजाब में रोजगार की आती है तब बेरोजगार होने वाले ड्राईवरों व कंडक्टरों को लेकर सरकार के पास रोजगार का कौन सा विकल्प है, फिलहाल इसका कोई जवाब नहीं। सरकार ने यह निर्णय उस बुरे दौर में लिया है जब पहले ही कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था का पहिया मुश्किल से घूम रहा है। कहीं-कहीं राज्य सरकारों ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए दोबारा सख्त पाबंदियां लगाई हैं, दूसरी तरफ पंजाब में निजी बसों के ड्राईवरों-कंडक्टरों के सामने एक बड़ा संकट बन गया है। कोरोना काल में आवश्यकता तो इस बात की है कि रोजगार बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परिस्थितियों में निजी बसों के ड्राईवर-कंडक्टरों के रोजगार का प्रबंध भी जरूरी है। फिर भी सरकार ने यदि जनता को राहत दी है तब इसके नकारात्मक पहलुओं पर भी विचार होना चाहिए। वैसे भी राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी व फ्री सेवा देने के फैसले कम ही बदले जाते रहे हैं। सत्तापक्ष में पार्टी कोई भी हो, वह पिछली सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने वाले निर्णय को कम ही पलटती है। राहत किराया कम कर भी दी जा सकती है फिर भी यदि सरकार ने निर्णय लिया है तो अब निजी बसों के ड्राईवरों-कंडक्टरों के रोजगार को लेकर सरकार को पूरी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/new-employment-challenge-in-punjab/article-22719</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Apr 2021 09:49:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक समान रोजगार की हो व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी नौकरियों के बढ़ते वेतनमान के चलते युवाओं में सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए सरकारों ने लगातार सरकारी नौकरियों में परीक्षा शुल्क को बढ़ा दिया है। सरकारी नौकरियों में बढ़ते परीक्षा शुल्क का मुख्य कारण सरकारी नौकरियों का बढ़ता आकर्षण होता है। इसको समझने के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/arrangements-for-equal-employment/article-22462"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/employment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरकारी नौकरियों के बढ़ते वेतनमान के चलते युवाओं में सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसको देखते हुए सरकारों ने लगातार सरकारी नौकरियों में परीक्षा शुल्क को बढ़ा दिया है। सरकारी नौकरियों में बढ़ते परीक्षा शुल्क का मुख्य कारण सरकारी नौकरियों का बढ़ता आकर्षण होता है। इसको समझने के लिए एक बार उत्तर प्रदेश सचिवालय में चपरासी भर्ती के लिए आए आवेदन पत्रों को याद करना चाहिए। 368 चपरासी के पदों की भर्ती के लिए तब 23 लाख लोगों ने आवेदन किया। चपरासी की भर्ती के लिए योग्यता 5वीं पास रखी गई। जिन लोगों ने आवेदन किया उनमें से 2 लाख से ज्यादा स्नातक और स्नातकोत्तर थे। 255 लोगों ने पीएचडी कर रखी थी। 20 लाख लोग कक्षा 12वीं पास थे। केवल 53 हजार लोग ऐसे थे जो 5वीं कक्षा तक ही पढ़े थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पटियाला में चपरासी के 11 पदों के लिए हजारों युवा परीक्षा देने के लिए पहुंचे। एक पद के लिए करीब छह हजार 250 लोगों ने आवेदन किया। चपरासी की नौकरी करने के लिए पहले कोई आवेदन नहीं करता था। अब चपरासी की नौकरी के लिए भी लोग तैयार हैं। सरकारी नौकरी को पाने के लिए लोग केवल महंगी परीक्षा फीस ही देने को तैयार नहीं होते बल्कि वे रिश्वत भी देने को तैयार रहते हैं। सरकारी नौकरियों की भर्ती में होने वाली गड़बड़ियों की मुख्य वजह रिश्वत ही होती है। लेखपाल की नौकरी के लिए 6 से 9 लाख रूपए की रिश्वत लोग देने को तैयार हो जाते हैं। इसी तरह दारोगा भर्ती में 10 से 15 लाख रूपए तक रिश्वत की मांग पहुंच जाती है। रिश्वत के इस पैसे को जुटाने के लिए लोग घर की जमीन, खेत और गहने तक बेचने से पीछे नहीं हटते। चपरासी और लेखपाल की भर्ती के बाद जितना वेतन सरकार से मिलता है उसके मुकाबले रिश्वत की रकम बहुत ज्यादा होती है। इसके बाद भी लोग तैयार रहते हैं। कितने लोग तो रिश्वत बिचौलियों को देकर फंस जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे बहुत से मामले प्रकाश में आते हैं जिनमें लोग शिकायत दर्ज कराते हैं कि सरकारी नौकरी के लिए उनके साथ ठगी की गई। सरकारी नौकरी के आकर्षण की मूल वजह ज्यादा वेतन और कम काम है। इसके अलावा रिश्वत पाने की संभावनाएं बहुत रहती हैं। सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा फीस लेने वाले तर्क देते हैं कि परीक्षाओं का आयोजन कराने में खर्च होता है, इसके लिए फीस ली जाती है। उनकी इस बात में दम हो सकता है। जब खर्च से अधिक फीस ली जाए तो महंगी परीक्षा फीस पर सवाल उठने लगते हैं। जरूरत इस बात की है कि परीक्षा की ऐसी व्यवस्था हो जिसके आयोजन में कम से कम फीस ली जाए। कोशिश हो कि छात्र को अपने शहर में ही परीक्षा देने का मौका मिले। उसे दूसरे शहर न जाना पड़े। इससे सरकार और परीक्षा इंतजाम करने वाली संस्थाओं का मुनाफा खत्म हो सकता है। देश में बेरोजगारों की दिनोंदिन बढ़ती समस्या को देखते हुए ऐसे प्रबंध करने जरूरी हो गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">परीक्षा में नया सिस्टम बनाना होगा जिसमें गड़बड़ी की संभावनाएं कम हों। परीक्षा देने में सरलता हो। प्राइवेट क्षेत्र के रोजगार में लोगों को सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहां भी वेतन और तरक्की को लेकर चाटुकारिता और जीहुजूरी चलने लगी है। ऐसे में लोग प्राइवेट जॉब की जगह किसी भी तरह से सरकारी जॉब पाने के लिए भागते रहते हैं। देश के सरकारी क्षेत्र से भ्रष्टाचार खत्म कर काम के अनुसार वेतन की नीति लागू हो। निजी क्षेत्र में कर्मचारियों के शोषण पर लगाम लगे तब यहां देश में समानता आएगी वहीं लोग सरकारी नौकरी का मोह त्याग वक्त रहते अपना रोजगार शुरू करने लगेंगे।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/arrangements-for-equal-employment/article-22462</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Mar 2021 10:53:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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