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                <title>Children Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Picnic: पिकनिक बच्चों को प्यारी: पिकनिक बच्चों को प्यारी</title>
                                    <description><![CDATA[पिकनिक बच्चों को प्यारी पापा मानों बात हमारी, पिकनिक की कर लो तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-love-picnic/article-16475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/picnic.jpg" alt=""></a><br /><p>पिकनिक बच्चों को प्यारी<br />पापा मानों बात हमारी,<br />पिकनिक की कर लो तैयारी।<br />बोर हो गये पढ़ते-पढ़ते,<br />ढ़ोते बस्ता भारी-भारी।।<br />आफिस का मत करो बहाना,<br />कल संडे छुट्टी सरकारी।<br />मम्मी तुम भी अभी बना लो,<br />खाने-पीने की चीजें सारी।<br />लेटेंगे हम नरम घास पर,<br />छुपम-छुपाई भी खेलेंगे।<br />तितली-फूलों को मीत बना,<br />खुशियां सारी मन भर लेंगे।।<br />पार्क में झूला हम झूलेंगे,<br />नहीं करेंगे मारामारी।<br />शाम ढले वापस आएंगे,<br />ले पिकनिक की यादें सारी।।<br />कुछ नया सीखने का अवसर,<br />पिकनिक सब बच्चों को प्यारी।<br />मिलजुल कर रहना सिखलाती,<br />यह खुली पाठशाला प्यारी।।<br /><strong>-आसिया फारूकी, </strong><strong>शिक्षिका, फतेहपुर </strong><strong>( उ. प्र.)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Story: लालच बुरी बला है</title>
                                    <description><![CDATA[Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/greed-is-bad-story/article-87077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/greed-is-bad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी पत्नी बोली, ‘तुम क्यों जानवरों की तबाही और बरबादी के लिए रोज इस तरह प्रार्थना करते हो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी रोज लालच के कारण तबाह और बरबाद हो जाओ।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘मेरी पत्नी होकर तुम मेरा बुरा सोचती हो,’ सियार ने गुस्से से कहा, ‘कैसी पत्नी हो तुम। आखिर मैं किसके लिए पैसे कमाता हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘जानवरों का खून चूसचूस कर जमा करने के लिए’, सियार की पत्नी ने दो टूक उत्तर दिया, ‘गरीब, लाचार, और बेबस जानवरों को सूद पर कर्ज दे दे कर तुम सेठ तो बन गए हो, लेकिन पैसे का लालच अभी भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ रहा है।’ खैरातीलाल सियार सूद ब्याज पर पैसे देने का काम करता था। वह एक नंबर का लालची और जालिम था। एक बार जो उसके चंगुल में फंस जाता था, वह जीवनभर उसके कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब और लाचार जानवरों का खून चूस चूस कर उसने खूब पैसा जमा कर लिया था। उसके पास जितना पैसा आता जा रहा था, उसकी पैसे की भूख उतनी ही बढ़ती जा रही थी। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">सियार अपने पैसे बैंक में जमा नहीं करता था। वह सोचता था कि बैंक में पैसे जमा करने से एक दिन लुटेरे उसका भी पैसा लूट कर ले जाएंगे। आए दिन बैंक लूट की खबर अखबार में पढ़कर वह ऐसा सोचता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वह अपना पैसा बहुत हिफाजत के साथ घड़े में डालकर जमीन में गाड़ कर रखता था। पैसे रखने की जानकारी वह अपनी पत्नी को भी नहीं होने देता था। वह सोचता था कि पत्नी पैसे देख लेगी तो खाने-पीने में खर्च कर देगी।<br />
इतना पैसा होने के बावजूद वह रूखा-सूखा खा कर गुजारा करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन सियार घड़े में पैसे रखकर अपने घर में ही जमीन में गाड़ रहा था कि तभी उसकी पत्नी ने उसे देख लिया।<br />
वह उसे धिक्कारती हुई बोली, झ्तुम तो हमेशा कहते हो कि पैसे मेरे लिए कमाते हो लेकिन मुझे कभी अच्छा खाना नहीं देते। स्वयं भी रूखा सूखा खाते हो और मुझे भी खिलाते हो, रूखासूखा खा-खा कर मैं तो सूख कर कांटा हो गई हूं।’<br />
झ्अरी भाग्यवान,’ सियार ने पत्नी को प्यार से पुचकारते हुए कहा, ‘एक बार भगवान मेरी प्रार्थना सुन ले तो मैं तुम्हें सिर्फ अच्छा खाना ही नहीं दूंगा बल्कि अच्छे कपड़े और गहनों से भी लाद दूंगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">रात का समय था। पैसे का घड़ा जमीन में गाड़कर वह सोने चला गया मगर आज उसे नींद नहीं आ रही थी। वह सोच रहा था कि अगर वह सो गया तो उसकी पत्नी कहीं पैसे का घड़ा निकाल न ले।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी जब गहरी नींद में सो गई तो वह उठा और कुछ सोचकर पैसे का घड़ा जमीन से निकाला और उसे लेकर नदी के किनारे चल दिया। नदी के किनारे उसकी जमीन थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनसान रात में नदी किनारे पहुंच कर उसने अपनी जमीन में एक गड्डा खोदा और उसमें घड़ा गाड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">‘किसी को पता नहीं चलेगा कि यहां घड़ा गाड़ा हुआ है’, यह सोचकर वह निश्चिंत होकर अपने घर में जा कर सो गया।<br />
संयोग से उसी रात खूब मूसलाधार बारिश हुई। इतनी बारिश हुई कि नदी में बाढ़ आ गई। सियार ने जहां अपना घड़ा गाड़ा था, वह स्थान पानी की तेज धार से कटकर नदी में विलीन हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सियार को जब पता चला तो वह दौड़ा-दौड़ा वहां गया, वहां का दृश्य देखकर वह दहाड़ें मार-मार कर रोने लगा। उसकी दशा पागलों जैसी हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी ने जब उससे इस तरह रोने का कारण पूछा तो उसने रोते हुए सारी बात बताई, ‘हाय, मैं तो लुट गया, बरबाद हो गया। कंगाल हो गया मैं तो’।</p>
<p style="text-align:justify;">वह दोनों हाथों से अपना सिर धुनने लगा। Children’s Story</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 16:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Story: रोकी का कारनामा</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Story: कुत्तों को वफादारी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इंसानों से इसकी बहुत अच्छी बनती है। घर में लोग इसे बड़े ही प्यार से रखते हैं। इसके अलावा कुत्ते कई कामों में इंसानों की सहायता करते हैं। कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं। लेब्राडोर रिट्रिवर, गोल्डेन रिट्रिवर, जर्मन पॉइंटर, जर्मन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/dogs-are-considered-a-symbol-of-loyalty/article-64650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/children-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Story: कुत्तों को वफादारी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इंसानों से इसकी बहुत अच्छी बनती है। घर में लोग इसे बड़े ही प्यार से रखते हैं। इसके अलावा कुत्ते कई कामों में इंसानों की सहायता करते हैं। कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं। लेब्राडोर रिट्रिवर, गोल्डेन रिट्रिवर, जर्मन पॉइंटर, जर्मन शेफर्ड व डोबरमैन आदि। इनकी सहायता सुरक्षा के लिए तो ली ही जाती है। साथ ही अनेक कार्यों में भी ये मनुष्यों की सहायता करते हैं। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">विस्फोटक पदार्थ खोजने में, शिकार करने में, खेती के काम में, जानवरों की रखवाली में, ये बड़े सहायक होते हैं। इन्हें प्रशिक्षित करके इनकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है और इनसे कई काम लिये जा सकते हैं। कुछ ही दिनों पहले अहमदाबाद में पुलिस के कुत्ते ने किसान के घर से चोरी हुए एक करोड़ रुपये बरामद करवाए। उसकी कहानी बड़ी रोचक है।</p>
<p style="text-align:justify;">हुआ यूं कि एक किसान को एक पुरातात्विक स्थल के बगल में जमीन बेचने से एक करोड़ रुपये मिले। उसने इन रुपयों को एक थैली में डालकर अपने कच्चे घर में रख लिए और कुछ काम से बाहर चला गया। पड़ोस के दो चोरों को इस बात की जानकारी थी। चोर उसके रुपयों को गायब करने की फिराक में थे। चोरों ने किसान के घर में घुसकर रुपयों को चुरा लिया और चोरों ने सोचा कि जब मामला शांत हो जायेगा, तब इन रुपयों से ऐश किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान जब काम से वापिस आया तो परेशान हो गया। क्या करता बेचारा? पुलिस के पास शिकायत लेकर ही तो जाता? जब किसान पुलिस के पास पैसे के चोरी हो जाने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो पुलिस ने उस किसान की सारी बात सुनी। पुलिस वाले रोकी नाम के डोबरमैन प्रजाति के कुत्ते को लेकर किसान के घर गये। रोकी पर पुलिसवालों को बहुत भरोसा था। पहले भी कई मामलों में उसने चोरों को पकड़ा था। रोकी ने घर की एक-एक चीजों को सूंघा और फिर पुलिसवालों को इशारा किया कि चलो बाहर और फिर पेन्नी आगे-आगे और पुलिसे पीछे-पीछे। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">चोरों को नहीं पता था कि रोकी उनकी करतूत को पकड़ लेगा। बिल्कुल निश्चिंत होकर वे आराम फरमा रहे थे। रोकी उस स्थान पर जाकर भौंकने लगा, जहां थैलों को छिपाया गया था। पुलिस को देखते ही चोरों के होश उड़ गये। इस प्रकार किसान के रुपये मिल गये और चोर पकड़े गये। पुलिसवालों ने जब रोकी की पीठ सहलाई तो उसने बड़ी अदा से अपना सिर घुमाया मानो कह रहा हो यह तो मेरे बायें हाथ का खेल है। Children Story</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="स्विमिंग विजेता मुकुल दहिया का गांव में पहुंचने पर भव्य स्वागत" href="http://10.0.0.122:1245/swimming-winner-mukul-dahiya-got-a-grand-welcome-on-reaching-the-village/">स्विमिंग विजेता मुकुल दहिया का गांव में पहुंचने पर भव्य स्वागत</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/dogs-are-considered-a-symbol-of-loyalty/article-64650</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Nov 2024 16:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Arrogant Crow: घमंडी कौवा</title>
                                    <description><![CDATA[यह तय हुआ कि प्रतियोगिता दो चरणों में होगी, पहले चरण में कौवा अपने करतब दिखायेगा और हंस को भी वही करके दिखाना होगा और दूसरे चरण में कौवे को हंस के करतब दोहराने होंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-egoist-crow/article-87015"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/crow.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Arrogant Crow: हंसों का एक झुण्ड समुद्र तट के ऊपर से गुजर रहा था, उसी जगह एक कौवा भी मौज मस्ती कर रहा था। उसने हंसों को उपेक्षा भरी नजरों से देखा ‘तुम लोग कितनी अच्छी उड़ान भर लेते हो !’ कौवा मजाक के लहजे में बोला, ‘तुम लोग और कर ही क्या सकते हो बस अपना पंख फड़फड़ा कर उड़ान भर सकते हो !!! क्या तुम मेरी तरह फूर्ती से उड़ सकते हो ??? मेरी तरह हवा में कलाबाजियां दिखा सकते हो ? नहीं, तुम तो ठीक से जानते भी नहीं कि उड़ना किसे कहते हैं !’ कौवे की बात सुनकर एक वृद्ध हंस बोला, ‘ये अच्छी बात है कि तुम ये सब कर लेते हो, लेकिन तुम्हे इस बात पर घमंड नहीं करना चाहिए।’ ‘मैं घमंड, ‘वमंड नहीं जानता, अगर तुम में से कोई भी मेरा मुकाबला कर सकत है तो सामने आये और मुझे हरा कर दिखाए।’</p>
<p style="text-align:justify;">एक युवा नर हंस ने कौवे की चुनौती स्वीकार कर ली। यह तय हुआ कि प्रतियोगिता दो चरणों में होगी, पहले चरण में कौवा अपने करतब दिखायेगा और हंस को भी वही करके दिखाना होगा और दूसरे चरण में कौवे को हंस के करतब दोहराने होंगे। प्रतियोगिता शुरू हुई, पहले चरण की शुरूआत कौवे ने की और एक से बढ़कर एक कलाबजिया दिखाने लगा, वह कभी गोल-गोल चक्कर खाता तो कभी जमीन छूते हुए ऊपर उड़ जाता। वहीं हंस उसके मुकाबले कुछ खास नहीं कर पाया। कौवा अब और भी बढ़-चढ़ कर बोलने लगा, ‘मैं तो पहले ही कह रहा था कि तुम लोगों को और कुछ भी नहीं आता..ही.. ही ही… Arrogant Crow</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार" href="http://10.0.0.122:1245/parents-become-teenagers-helpful-to-children/">कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-egoist-crow/article-87015</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Nov 2024 17:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Chanda aur Suraj Story: चंदा और सूरज</title>
                                    <description><![CDATA[Chanda aur Suraj Story: सूरज बहुत सुन्दर लड़का था और चंदा एक सुन्दर लड़की। दोनों को एक दूसरे से प्रेम हो गया सो उन्होंने विवाह कर लिया। उनके एक लड़की हुई जो मां की तरह सुन्दर पिताजी की तरह हंसमुख थी। दोनों उसे अत्यधिक प्यार करते। उन्होंने उसका नाम पृथ्वी रखा। सारे तारे पृथ्वी को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/chanda-aur-suraj/article-87069"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/chanda-aur-suraj.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Chanda aur Suraj Story: सूरज बहुत सुन्दर लड़का था और चंदा एक सुन्दर लड़की। दोनों को एक दूसरे से प्रेम हो गया सो उन्होंने विवाह कर लिया। उनके एक लड़की हुई जो मां की तरह सुन्दर पिताजी की तरह हंसमुख थी। दोनों उसे अत्यधिक प्यार करते। उन्होंने उसका नाम पृथ्वी रखा। सारे तारे पृथ्वी को पाकर बहुत खुश हुए। वे उसके स्वागत के लिये और झिलमिलाते हुए चमकने लगे। चंदा और सूरज को अपनी बेटी पृथ्वी पर बहुत गर्व था। वे अपनी नन्हीं बेटी को तनिक भी आंखों से ओझल नहीं होने देते। दिन और रात सावधानी से उनकी देखभाल करते। वे पृथ्वी से इतना प्यार करने लगे कि वे यह भी भूल गए कि वे एक दूसरे से कितना प्यार करते थे। वे एक दूसरे से दूर छिटकते गए। उनमें झगड़े होने लगे। इससे पहले कि वे एक-दूसरे की सूरत भी न देखना चाहने की स्थिति में आएं, उन्होंने अलग हो जाना तय किया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अलग होने की व्यवस्था आसानी से हो गई पर पृथ्वी का क्या हो? दोनों में से एक भी अपनी प्यारी बेटी एक दूसरे को देने को राजी नहीं था। उन्होंने तारों से निवेदन किया कि वे निर्णय करें कि उन दोनों में से कौन पृथ्वी की देखभाल के लिये श्रेष्ठ रहेगा पर ऐसा निर्णय बहुत मुश्किल था। तारे यह तय न कर सके। अन्त में उन्होंने कहा कि सूरज और चंदा एक दूसरे के विरूद्ध दौड़ें। दौड़ में जीतने वाले के पास पृथ्वी रहेगी। दौड़ का दिन आया। चंदा की हवाओं से हमेशा दोस्ती रही थी। उसने हवाओं से पूछा कि क्या वे उसकी दौड़ जीतने में मदद करेंगी? क्योंकि उसने पृथ्वी को न छोड़ने का निश्चय किया था, हवाओं ने मदद की हामी भरी। बादल यह बात सुन रहे थे। उन्हें यह उचित नहीं लगा कि सूरज को लड़ने के लिये अकेला छोड़ दिया जाए और चंदा की मदद की जाए। सो बादलों ने पूरी दौड़ को सावधानी से देखकर कोई ऐसा रास्ता निकालना तय किया जिसे सूरज की मदद हो सके। Chanda aur Suraj Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">तारों ने दौड़ का चक्र तय किया। सूरज और चंदा ने एक साथ दौड़ना शुरू किया पर हवाएं चांद से पीछे बहुत तेजी से चली इसलिए चंदा सूरज से तेजी से दौड़ने लगी और उससे आगे निकल गई। उसने जीतने के लिए अपनी गति और तेज कर दी। पर बादल यह देख रहे थे। उन्होंने तारों को ढक लिया ताकि चंदा यह न देख सके कि कहां से मुड़ना है और वह तेज गति से दौड़ता हुआ चक्र से बाहर चला गया किन्तु जब सूरज मोड़ पर आया तो बादल तितर-बितर होकर हट गये। तब चंदा यह देख सकी कि वह रास्ते से कहां हट गई है पर तब तक तो सूरज काफी आगे निकल गया था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बहरहाल हवाओं ने चंदा की फिर मदद की और वह फिर से रास्ता पकड़ने में सफल रही और दौड़ का अन्त फिर यह हुआ कि चंदा और सूरज दोनों अंतिम रेखा पर बिलकुल एक साथ पहुंचे और बराबर रहे और इस तरह यद्यपि तारों ने दोनों के बीच का मामला सुलझाने की कोशिश की थी पर वे असफल रहे क्योंकि दोनों दौड़ में बराबर रहे। तो यही न्यायोचित होगा कि ये पृथ्वी को आपस में बांट लें और उन्होंने समय का विभाजन कर कहा कि सूरज दिन के समय पृथ्वी की देखभाल करेगा, साथ रहेगा जबकि चंदा रात के समय पृथ्वी को देखेगा, साथ रहेगा। या तो वे दोनों यह निर्णय मानें या पृथ्वी को छोड़ दें और भूल जायें। सूरज चांद दोनों इस पर सहमत हो गये। दोनों के बीच हुआ वह करार आज तक चला आ रहा है। सूरज दिन में पृथ्वी को देखता है, चांद रात में देखभाल करता है।</h6>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Love Animals: पशुओं से प्यार" href="http://10.0.0.122:1245/love-animals/">Love Animals: पशुओं से प्यार</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 15:18:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Toys: बच्चों की काल्पनिक दुनिया है, खिलौने</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Toys: बच्चे के जीवन में खेल का समय अत्यंत ही आनंद उठाने वाला होता है। खेल के क्रियाकलापों में खिलौने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये खिलौने सिर्फ नाममात्र के लिए खेल की वस्तुएँ नहीं होतीं। बल्कि वे बच्चे के जीवन के कार्यों की पूर्ति करते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए बड़ी संख्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-imaginary-world-is-toys/article-63730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/childrens-toys.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Toys: बच्चे के जीवन में खेल का समय अत्यंत ही आनंद उठाने वाला होता है। खेल के क्रियाकलापों में खिलौने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये खिलौने सिर्फ नाममात्र के लिए खेल की वस्तुएँ नहीं होतीं। बल्कि वे बच्चे के जीवन के कार्यों की पूर्ति करते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए बड़ी संख्या में भिन्न-भिन्न प्रकार के खिलौने उपलब्ध होते हैं। ये खिलौने बच्चे के अपने छोटे से संसार का सृजन करने में सहायता देते हैं, जो विविध प्रकार के व्यक्तियों, व्यवसायों और क्रियाकलापों में बाहर की बड़ी दुनिया को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसमें प्रौढ़ व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में व्यस्त लगे रहते हैं। इसलिए, बच्चों के विकास के लिए सही किस्म के खिलौने का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कुशाग्र होती है बुद्धि</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चा अपने आसपास के लोगों, खिलौनों, घर और प्रकृति की हर चीज को निहारता है और उस से खेलता है। बच्चे के शारीरिक और बौद्धिक विकास के बारे में थोड़ी-सी भी जानकारी और समझ से माता-पिता बच्चे को सही उम्र में सही खिलौने व उचित वातावरण दे कर उस के विकास को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं। पहले बच्चे घर में रुई, कपड़े और मिट्टी के खिलौनों से खेलते थे, पर आज इलेक्ट्रोनिक खिलौनों का युग है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में महंगे से महंगे खिलौने उपलब्ध हैं, लेकिन खिलौनों के महत्त्व एवं उपयोगिता को उन की कीमत से नहीं आंका जा सकता। खिलौनों से खेलकर बच्चे की बुद्धि कुशाग्र होती है, कल्पनाशक्ति बढ़ती है, शरीर तंदुरुस्त होता है, जिस से उस की योग्यता बढ़ती है। अच्छे खिलौने बच्चों की कार्यक्षमता, कार्यकुशलता और रचनात्मकता को बढ़ाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लाइटिंग वाले खिलौने बच्चों को करते हैं अपनी और आकर्षित</h3>
<p style="text-align:justify;">आपके बच्चे को अगर खिलौने में गाड़ी मोटर ज्यादा पसंद है। इस खिलौने को आप उसके लिए खरीद सकते हैं। यह प्लास्टिक से बना हुआ जम्बो जेसीबी भी है। इसके ट्रंकि डिजाइन और मोटे ग्रिप वाले टायर बच्चों को खूब लुभाता है। दूसरा प्लास्टिक से बना हुआ एरोप्लेन है। इसमें लगा हुआ कलरफुल एलइडी लाइट बच्चों को खूब लुभाते है। इस प्लेन में रियलिस्टिक इंजन साउंड मिलता है, जिससे बच्चों को इसे चलाने में मजा आता है। यह बैटरी आॅपरेटेड खिलौना है। तीसरा प्लास्टिक से बने हुए ड्रैगनफ्लाई हेलीकॉप्टर हैं। इसमें आपको 14 पीस कलरफुल हेलीकॉप्टर मिलता है। छोटे बच्चों को यह खिलौना बहुत ही अच्छा लगता है और उनके लिए सेफ भी होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बढ़ेगी इमेजिनेशन पावर | Children’s Toys</h3>
<p style="text-align:justify;">आप अगर अपने बच्चे को ऐसा खिलौना खरीदकर देना चाहते हैं, जिससे खेलने के साथ उसका मानसिक विकास भी हो सके तो यह एजुकेशनल बिल्डिंग ब्लॉक्स अच्छा आॅप्शन है। इसमें 120 पीस कलरफुल बिल्डिंग ब्लॉक्स मिलते हैं, जिससे आपके बच्चों का इमेजिनेशन पावर बढ़ाता है और वह क्रिएटिव होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जानवरों से होता है खास लगाव</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को जानवरों से बहुत लगाव होता है। अगर आपके बच्चे को भी एनिमल टॉयज पसंद आते हैं तो इस पूरे सेट को आप खरीद सकते हैं। इसमें 6 पीस प्लास्टिक के हाथी, घोड़ा, शेर, चीता, जेब्रा, जिराफ का कॉन्बो मिलता है। यह देखने में बहुत ही अच्छा है और ओरिजिनल दिखता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेल के लिए सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चा शिशु हो या बच्चा, माता-पिता के लिए यह सलाह है कि वे बच्चे के ऊपर गहरी नजर रखे। अपने बच्चों को खेलता हुआ देखने के अति उत्साह में अक्सर माता-पिता कुछ अनहोने खतरों से बेखबर रहते हैं, जो खेल के दौरान घटित हो सकते हैं। अत: बच्चों के लिए खेल के समय को सुरक्षित एवं आनंददायक बनाने के लिए आवश्यक सावधानियों का बरतना अत्यंत अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को रसोईघर, स्टोव, हीटरों, बायलरों, ज्वलनशील सामग्रियों और आग लगने के संभाव्य क्षेत्रों से दूर रखें, क्योंकि इनसे आग लगने की दुर्घटनाएं घट सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को दम-घोंटू और धुंधले व मलिन स्थानों पर खेलने न दें, क्योंकि वहाँ दम घुटने का खतरा हो सकता है।<br />
ल्ल बच्चों को बाल्टियों, पोखरों और पानी के टबों से दूर रखें, क्योंकि वहां उनके पानी में गिरकर डूबने का खतरा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को खुली बावडियों, खुली मोरियों, भीगे फर्श, छतों से ऊपर खलने से रोकें, क्योंकि वे स्थल खतरे से खाली नहीं होते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन खिलौने से रखें दूर | Children’s Toys</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के खिलौने महंगे और पेचीदा नहीं होने चाहिए। कृपया यह याद रखें कि उन्हें दिए गए हर खिलौने को शिशु चुभाएंगे, पीटेंगे, खींचेंगे, मरोडेंगे। अत: यह सुझाव है कि ऐसे खिलौनों को बच्चों से दूर ही रखें जो उनके लिए घातक साबित हो सकते हैं, ऐसे खिलौने हैं-<br />
<strong>-तेजधार, नोकदार और किरचदार</strong><br />
<strong>                                                                            -इनमें सीसा होता है, सीसा आधारित पेंट्स होते है।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार" href="http://10.0.0.122:1245/parents-become-teenagers-helpful-to-children/">कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-imaginary-world-is-toys/article-63730</link>
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                <pubDate>Sun, 27 Oct 2024 14:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Gadhe ka Gana: गधे का गाना</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Story: किसी गांव में एक गधा अपने मालिक धोबी के साथ रहता था। उसका मालिक धोबी दिनभर गधे से खूब काम करवाता और रात को उसे खुला छोड़ देता जिससे वह मनभर और पेट भर के घास चरता था। गधा घास खाने के लिए रात के समय अपने मालिक के घर के आस-पास के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/donkeys-song-kids-story/article-63477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/gadhe-ka-gana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Story: किसी गांव में एक गधा अपने मालिक धोबी के साथ रहता था। उसका मालिक धोबी दिनभर गधे से खूब काम करवाता और रात को उसे खुला छोड़ देता जिससे वह मनभर और पेट भर के घास चरता था। गधा घास खाने के लिए रात के समय अपने मालिक के घर के आस-पास के खेतों में ही जाया करता था। लेकिन एक दिन उसकी मुलाकात एक लोमड़ी से हुई। लोमड़ी भी खाने की तलाश में इधर-उधर घूमते घूमते गधे के पास आ पहुंची थी। गधे और लोमड़ी दोनों की बातें हुई और इस प्रकार दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">गधा लोमड़ी के साथ पूरी रात घास चरता था और भोर होते ही अपने धोबी मालिक के पास वापस आ जाता था। एक दिन रात को लोमड़ी ने गधे से कहा ‘गधा मामा यहां पास के ही खेत में ढेर सारे फल लगे हैं यदि आप वहां पर जाकर वह सारे फलों का आनंद लेते हैं तो वह किसी नाइट डिनर से कम नहीं होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">गधा लोमड़ी की बातें मान लेते है और कहता है ठीक है भांजे चलो हम दोनों चलते हैं आज उसी खेत में। गधा लोमड़ी दोनों उस खेत में जाते हैं गधा खूब खाता है रसीले फल फूल खाकर गधा एकदम फूल जाता है और लोमड़ी से कहता है भांजे आज की रात इतनी सुहावनी है पूर्णिमा की रात है ऐसे में मुझे गाना गाने का मन कर रहा है। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">लोमड़ी गधे की बात सुनकर उसे गाना गाने से मना करता है और कहता है मामा यदि आप इतनी रात को इस खेत में गाना गाएंगे तो खेत का मालिक किसान यहां आ जाएगा और हमें पकड़ लेगा। लेकिन गधा तो अपनी अहंकार में डूबा था और उसे गाना गाने का धुन सवार थी। गधा लोमड़ी से बोलता है अरे तू क्या जाने कि गाना क्या होता है संगीत क्या होता है। लोमड़ी गधे की इस बात को सुनकर वह समझ जाती है कि गधा बिना गाना गाए नहीं रहेगा तो उसने गधे से कहा मामा कोई बात नहीं आप गाना गाओ लेकिन मैं थोड़ी दूर जाकर उस झाड़ी में छुपकर किसानों के आने की खबर आपको दूंगी और गधा इस प्रकार मान जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब गधा गाना गाना शुरू करता है तो उसकी आवाज सुनकर सभी किसानों की नींद खुल जाती है और वह अपनी लाठी लेकर गधे के पास आ पहुंचते हैं और उसकी खूब मरम्मत करते हैं। अब गधा गाना गाना भूल गया और गिरते पड़ते खेत से बाहर आने लगा। लोमड़ी उसका मजाक उड़ाते हुए बोली, क्या हुआ मामा मैं आपसे पहले ही बोली थी कि इतनी रात को गाना मत गाओ वरना किसान आ जाएंगे और यह क्या वह आए ही क्या, वह तो आपको खूब सारा पुरस्कार भी देकरचले गए। ऐसा कह कर वह खूब हंसने लगी। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">कहानी से सीख: अभी जो कुछ भी करते हैं उसका एक सही समय और एक उचित स्थान होता है और यदि इसके विपरीत यदि कोई कार्य किया जाता है तो उसका परिणाम बहुत बुरा होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Imd Alert: इस सप्ताह कैसा रहेगा मौसम का मिजाज, आईएमडी ने जारी किया मौसम बुलेटिन…" href="http://10.0.0.122:1245/imd-issues-weather-bulletin/">Imd Alert: इस सप्ताह कैसा रहेगा मौसम का मिजाज, आईएमडी ने जारी किया मौसम बुलेटिन…</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Oct 2024 16:50:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Children Story: अकबर का तोता</title>
                                    <description><![CDATA[Akbar And Birbal Story: बहुत समय पहले की बात है। एक बार अकबर बाजार में भ्रमण पर निकले थे। वहां उन्होंने एक तोता देखा, जो बहुत ही प्यारा था। उसके मालिक ने उसे बहुत अच्छी बातें सिखाई थीं। अकबर यही देखकर खुश हो गए। उन्होंने उस तोते को खरीदने का फैसला कर लिया। तोते को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-of-akbar-and-birbal/article-87025"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/akbar-and-birbal-story.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Akbar And Birbal Story: बहुत समय पहले की बात है। एक बार अकबर बाजार में भ्रमण पर निकले थे। वहां उन्होंने एक तोता देखा, जो बहुत ही प्यारा था। उसके मालिक ने उसे बहुत अच्छी बातें सिखाई थीं। अकबर यही देखकर खुश हो गए। उन्होंने उस तोते को खरीदने का फैसला कर लिया। तोते को खरीदने के बदले अकबर ने मालिक को अच्छी कीमत दी। वो उस तोते को राजमहल लेकर आए। यहां पर तोते को लाने के बाद अकबर ने उसे बहुत अच्छे से रखने का फैसला किया। अब अकबर जब भी उससे कोई बात पूछते, तो वह उस बात का तुरंत जवाब दे देता था। अकबर बहुत खुश हो जाते थे। वह तोता दिनों-दिन उनके लिए जान से भी प्यारा हो गया था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने महल में उसके रहने के लिए शाही व्यवस्था करने का आदेश दिया। उन्होंने अपने सेवकों को कहा, ‘इस तोते का खास ख्याल रखा जाए। तोते को किसी भी प्रकार की तकलीफ नहीं होनी चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘यह तोता किसी भी हालत में मरना तो बिल्कुल भी नहीं चाहिए। अगर किसी ने तोते के मरने की खबर उनको दी, तो वह उसको फांसी दे देंगे।’ महल में तोते के रहने का खास ख्याल रखा जाने लगा। फिर एक दिन अचानक अकबर का प्यारा तोता मर गया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अब महल के सेवकों में हड़कंप मच गया कि आखिर अकबर को यह बात कौन बताएगा, क्योंकि अकबर ने कहा था कि जो भी तोते की मौत की खबर उन्हें देगा, वह उसकी जान ले लेंगे। अब सेवक परेशान थे। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने फैसला किया कि यह बात बीरबल को बताई जाए। सभी ने बीरबल को सारी बात बताई। यह भी बताया कि बादशाह अकबर मौत की खबर देने वाले को मौत की सजा देंगे। यह सुनकर बीरबल, बादशाह अकबर को यह खबर सुनाने को राजी हो गए। वो महल में अकबर को यह जानकरी देने के लिए चल पड़े।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बीरबल ने अकबर के पास जाकर कहा, ‘महाराज एक दुखद खबर है।’ अकबर ने पूछा, ‘बताओ क्या हुआ?’ बीरबल ने कहा, ‘महाराज आपका प्यारा तोता, न तो कुछ खा रहा है, न तो कुछ पी रहा है, न तो कुछ बोल रहा है, न आंखें खोल रहा है और न ही कोई हरकत कर रहा है और न ही.।’ अकबर गुस्से में आकर बोले, ‘न ही क्या? सीधा-सीधा क्यों नहीं बोलते कि वो मर गया है।’ बीरबल ने कहा, ‘हां महाराज, लेकिन ये बात मैंने नहीं आपने कही है। इसलिए, मेरी जान बक्श दीजिए।’ अकबर भी कुछ न बोल सके। इस तरह बीरबल ने बड़ी सूझबूझ से अपनी और अपने सेवकों की जान बचा ली।</h6>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 15:25:05 +0530</pubDate>
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                <title>लघू कथा: पीलू गया शहर</title>
                                    <description><![CDATA[Children Story: एक था पीलू ततैया। वह लालची था उसे जब भी कुछ खाने की चीज दिखाई देती वह उस पर टूट पड़ता। एक दिन उड़ते-उड़ते पीलू ततैया शहर जा पहुंचा। वहां मंडी में गुड़ के बड़े-बड़े ढेर लगे थे। उन पर बहुत से ततैये बैठे मजे से गुड़ का स्वाद ले रहे थे। Children […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/laghu-katha-pilu-gaya-city/article-87066"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/pilu-gaya-city-1.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Children Story: एक था पीलू ततैया। वह लालची था उसे जब भी कुछ खाने की चीज दिखाई देती वह उस पर टूट पड़ता। एक दिन उड़ते-उड़ते पीलू ततैया शहर जा पहुंचा। वहां मंडी में गुड़ के बड़े-बड़े ढेर लगे थे। उन पर बहुत से ततैये बैठे मजे से गुड़ का स्वाद ले रहे थे। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पीलू भी वही एक ढेर पर जा बैठी। गुड़ खाने के चक्कर में उसे ध्यान ही रहा कि अब दिन छिपने वाला है। वहां बैठे सभी ततैये तो अपने-अपने छत्तों की ओर उड़ चले। बस पीलू आंख मीचे गुड़ खाने में लगा रहा। सेठ जी के नौकर ने दुकान बन्द करने की तैयारी शुरू कर दी। उसने गुड़ के बोरी में भरा तो पीलू उसी बोरे में बंद हो गया। उधर पीलू के पापा नीटू ततैये और उसकी मम्मी टिन्नी ततैये ने सारे जंगल में पीलू को आवाज लगाई पीलू उ उ ओ पीलू उ उ पीलू बेटा….।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">किंतु पीलू नहीं मिला। मिलता भी भला कैसे? वो तो सेठ जी की दुकान पर गुड़ के बोरे में बंद था। नीटू और टिन्नी सारी रात पीलू के न मिलने की वजह से परेशान रहे। उन्होंने अगली सुबह फिर पीलू की तलाश शुरू की। उन दोनों को परेशान देख सीलू बंदर ने पूछा-क्या बात हैं नीटू-टिन्नी, तुम परेशान क्यों हो? हमारा पीलू बेटा नहीं मिल रहा, सीलू भैया, दोनों ने एक साथ कहा। सीलू बंदर बोला-कल मैंने उसे शहर की तरफ जाते देखा था। हो सकता है शहर में ही कहीं हो। तुम उसे शहर जाकर ढूंढना। नीटू ततैया और टिन्नी ततैन शहर की ओर उड़ चले। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मंडी में उन्हें एक गुड़ का ढेर के पास पीलू रोता हुआ मिला। क्या हुआ बेटा? उन्होंने पूछा। मेरी एक टांग टूट गयी है मां, रोते हुए पीलू बोला, रात मैं गुड़ के बोरे में बंद हो गया था मां, सारी रात बाहर निकलने की कोशिश की पर निकल न सका। सुबह सेठ जी के नौकर ने गुड़ की बोरी पटड़ी पर पलटी तो गुड़ गिरने से मेरी टांग टूट गयी। ओह मां, बहुत दर्द है। नीटू और टिन्नी ने पीलू को उठा लिया। जंगल ले जाकर उसे चिन्नी चिड़िया के अस्पताल में भर्ती करवा दिया। चिन्नी ने उसकी टांग पर प्लास्टर चढ़ा दिया। नर्स मुनमुन मैना ने पीलू को समझाया, पीलू तुम शहर जाकर गुड़ का लालच न करते तो तुम्हारी टांग नहीं टूटती और तुम्हें अस्पताल नहीं आना पड़ता। हां, सिस्टर मुनमुन, गलती मेरी थी। मैंने लालच किया। अब लालच नहीं करूंगा। पीलू ने वादा किया। एक महीने बाद पीलू का प्लास्टर काटा गया। अब पीलू ने लालच करना छोड़ दिया। Children Stor                                                         –  <em><strong>अनिल शर्मा</strong></em></h6>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Fishes Story: तीन मछलियां" href="http://10.0.0.122:1245/three-fishes-story/">Fishes Story: तीन मछलियां</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Oct 2024 15:55:41 +0530</pubDate>
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                <title>नाना जी का उपहार</title>
                                    <description><![CDATA[Children Story: सुबह की गाड़ी से जौनी के नानाजी आने वाले थे। जौनी अपने पापा के साथ नानाजी को लेने स्टेशन गया। गाड़ी ठीक समय पर आ पहुंची। जौनी और उस के पापा, नानाजी को ढूंढने लगे। तभी जौनी को दूर फर्स्ट क्लास के डब्बे के दरवाजे पर नानाजी खड़े दिखाई दिए। नानाजी, नानाजी, चिल्लाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-maternal-grandfather-given-gift/article-87014"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/focus-on-childrens-education-and-sports.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Children Story: सुबह की गाड़ी से जौनी के नानाजी आने वाले थे। जौनी अपने पापा के साथ नानाजी को लेने स्टेशन गया। गाड़ी ठीक समय पर आ पहुंची। जौनी और उस के पापा, नानाजी को ढूंढने लगे। तभी जौनी को दूर फर्स्ट क्लास के डब्बे के दरवाजे पर नानाजी खड़े दिखाई दिए। नानाजी, नानाजी, चिल्लाता हुआ जौनी डब्बे के पास दौड़ा-दौड़ा गया। नानाजी उसे देख कर हंसते हुए डब्बे से उतरे। उस ने उत्सुकता से नानाजी के हाथों की तरफ देखा। उन के बाएं हाथ में एक बैग था और दाहिने हाथ में एक छड़ी। इस से पहले जब वह 4 बार आए थे, तब उन के दाहिने हाथ में उस के लिए उपहारों का पैकेट था। शायद नानाजी उपहार गाड़ी में भूल आए हैं, यह सोच कर उस ने पूछा, ‘नानाजी, आप का और सामान कहां है? और सामान? मेरे पास तो सिर्फ यही सामान है, बैग और छड़ी, नानाजी ने हंस कर कहा। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जौनी का मुंह उतर गया। तब तक उस के पापा भी वहां आ पहुंचे। तीनोंं टैक्सी में सवार हो गए। सारे रास्ते जौनी अपने को धीरज बंधाता रहा, ‘शायद नानाजी उपहार बैग में रखकर लाए होंगे और घर पहुंचते ही दे देंगे। उस के नानाजी खाली हाथ आएं, यह कैसे हो सकता है। लेकिन नानाजी तो घर आने के बाद भी चुप रहे। जौनी रह रह कर नानाजी के इस अनोखे बरताव पर सोचता रहा, ‘आज तक नानाजी उस के लिए कुछ न कुछ उपहार लाते रहे। फिर इस बार क्या हुआ?  वह नानाजी के पास जा कर बोला, ‘अब मैं अच्छा बच्चा बन गया हूं। आप को यहां से गए 5 महीने हो गए हैं न। मैं सिरदर्द का बहाना कर के घर में कभी नहीं बैठा हूं। रोज स्कूल जाता हूं। ‘शाबाश’ नानाजी ने हंस कर कहा। ‘फिर आप मुझ से गुस्सा क्यों हैं?’</h6>
<h6 style="text-align:justify;">‘यह तो ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली बात हुई। गुस्सा तो मुझ से तुम हो और पूछ रहे हो कि मैं क्यों गुस्सा हूं? सुबह टैक्सी में तुम चुप क्यों थे?’ जौनी की समझ में न आया कि अब क्या कहे। वह सोचने लगा, ‘अगर नानाजी उस से गुस्सा नहीं हैं तो उपहार जरूर लाए होंगे। क्यों न उन से पूछ लिया जाए। उस ने धीरे से उन के पास जाकर कहा, ‘नानाजी’ ‘कहो कहो, क्या बात है? तभी मम्मी कमरे में आ गई। जौनी को चुप होना पड़ा क्योंकि उन्होंने कह रखा था कि किसी से उपहार मांगना बुरी बात है। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नानाजी के आने की खुशी में मम्मी ने खीर बनाई थी। खाना खा कर जौनी नानाजी के कमरे में आ गया। वह उन के आने से पहले ही बैग खोल कर देखना चाहता था कि उस के लिए खिलौने बैग में हैं या नहीं। वह बैग को उठा कर देखने ही लगा था कि नानाजी कमरे में आ गए और बोले, ‘अच्छा, तो नन्हे पहलवान की ताकत की परीक्षा हो रही है। उठाओ उठाओ, जरा हम भी देखें, तुम बैग कितना ऊपर उठा सकते हो? जौनी ने बैग को सिर की ऊंचाई तक उठा कर कहा ‘‘यह देखो नानाजी, हल्का लग रहा है। क्या यह खाली है?’’ नानाजी हंसे, ‘हां, एक धोती और एक कुर्त्ता ही तो है इस में।’ जौनी रोआंसा हो गया। शाम को नानाजी उसे पार्क ले गए। वहां उस के बहुत से दोस्त भी आए हुए थे। मैची उसे देखते ही दौड़ी आई। दोनों एक झूले पर बैठ गए। मैची जौनी के नानाजी को पहचानती थी और यह भी जानती थी कि वह इस बार जौनी के लिए बंदूक और हवाई जहाज लाने वाले हैं। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उस ने पूछा, ‘क्यों जौनी, कैसी है तुम्हारी बंदूक? ‘बंदूक वंदूक कुछ नहीं लाए, नानाजी’ जौनी ने कहा ‘शायद भूल गए हैं।’ ‘तुम ने पूछा नहीं कि क्यों नहीं लाए? नहीं, किसी से उपहार मांगना ठीक है क्या? नानाजी एक पेड़ की ओट से सारी बातें सुन रहे थे। कुछ देर बाद जौनी और उस के नानाजी घर आ गए। जौनी सोने चला गया। उस की समझ में नहीं आ रहा था कि नानाजी एकदम भुलक्कड़ कैसे हो गए। सुबह जौनी उठा तो बहुत उदास था। नानाजी आंगन में बैठे थे। वह उन्हें ‘बायबाय’ कर के स्कूल जाने ही वाला था कि नानाजी ने पुकार कर कहा, ‘जौनी, अलमारी में एक बड़ा पैकेट रखा है। जाओ, उसे ले आओ। जौनी दौड़ादौड़ा अलमारी से पैकेट निकाल लाया। वह बहुत खुश हो रहा था लेकिन उसे संदेह भी हो रहा था कि शायद पैकेट में कुछ और ही न हो। Children Story</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नानाजी ने कहा, ‘पैकेट खोलो। जौनी ने जब पैकेट खोला तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा। पैकेट में पीले और लाल रंग का छोटा सा हवाई जहाज और एक बंदूक थी। यह कैसे हो सकता था, ‘नानाजी ठठा कर हंस पड़े, ‘मैं तो तेरी परीक्षा ले रहा था। ‘कौन सी परीक्षा? ‘तेरे सब्र और शिष्टाचार की। मैं देखना चाहता था कि उपहार न देने पर तुम गंवार बच्चों की तरह फटे मुंह उपहार तो नहीं मांगते।  ‘तो क्या मैं परीक्षा में पास हूं।’ ‘हां, इस के लिए मैं तुम्हें एक और उपहार दूंगा।’ ‘लेकिन नानाजी, क्या आप को मालूम है कि आप की इस परीक्षा के कारण मैंने कल का दिन कितनी बेचैनी से काटा?’ ‘हां, मालूम है। मैं तेरी हरेक हरकत गौर से देख रहा था।  फिर नानाजी ने हवाई जहाज में चाबी भरी। हवाई जहाज ऊपर हवा में उड़ कर वापस जमीन पर उतर आया। ‘यह रहा डबल उपहार, ‘नानाजी ने कहा। जौनी ने खुशी से ताली बजा दी। Children Story</h6>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/special-presentation-on-mothers-day-by-sachkahoon/"><strong>यह भी पढ़े-</strong> मां अलग-अलग रूप में निभाती है अपने किरदार, बेटा चाहे कितना भी बड़ा हो पर मां के लिए तो बच्चा ही रहता है</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Sep 2024 17:42:03 +0530</pubDate>
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                <title>Bird&amp;#8217;s Nest: चिड़िया का घोंसला</title>
                                    <description><![CDATA[Bird’s Nest: इस बार गर्मी की छुट्टियों में रेनू अपनी सहेलियों के साथ खेलने के बजाय सारा दिन पार्क में बैठी छोटे-छोटे पक्षियों को घोंसला बनाते देखती रहती। पार्क में तरह-तरह के पक्षी आते थे – गौरैया, कबूतर, कठफोड़वा, लवा और बुलबुल। रेनू किसी भी पक्षी को देखते ही पहचान जाती थी, क्योंकि उस की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/birds-nest-story/article-62231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/birds-nest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Bird’s Nest: इस बार गर्मी की छुट्टियों में रेनू अपनी सहेलियों के साथ खेलने के बजाय सारा दिन पार्क में बैठी छोटे-छोटे पक्षियों को घोंसला बनाते देखती रहती।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्क में तरह-तरह के पक्षी आते थे – गौरैया, कबूतर, कठफोड़वा, लवा और बुलबुल। रेनू किसी भी पक्षी को देखते ही पहचान जाती थी, क्योंकि उस की मैम ने उसे सभी पक्षियों के सुंदर चित्र दिखाए थे और कहा था कि इन छुट्टियों में तुम सब पक्षियों की आदतें गौर से देखना और गरमी की छुट्टियों के बाद जब स्कूल खुलेगा तब तुम सब को पक्षियों पर एक लेख लिखने के लिए दिया जाएगा। सब से अच्छे लेख पर जो किताब इनाम में दी जाने वाली थी, वह भी बच्चों को दिखाई गई थी। मैम ने उन्हें जानवरों और पक्षियों की कहानियों वाली उस किताब के रंगीन चित्र भी दिखाए थे और कहानियां भी पढ़ कर सुनाई थी। रेनू को वह किताब इतनी पसंद आई थी कि उस ने मन ही मन यह निश्चय कर लिया था कि जैसे भी हो वह इस किताब को पाने के लिए मेहनत करेगी और इसलिए रेनू अपनी छुट्टियां खेलने के बजाय पार्क में बैठ कर पक्षियों की आदतों को जानने में गुजार रही थी। Bird’s Nest</p>
<p style="text-align:justify;">रेनू देखती कि पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए कितने धैर्य से छांटछांट कर पुराणी सुतली, घास, पत्तियां और घोंसले को आरामदेह बनाने के लिए पंख आदि जमा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनू का जी चाहता, कितना अच्छा होता कि मैं भी इन पक्षियों की कुछ मदद कर सकती। अचानक रेनू को एक खयाल आया। इन दिनों ज्यादातर पक्षियों ने अपने घोंसले बना लिए थे, फिर भी कुछ पक्षी ऐसे थे जिन के घोंसले अभी तक तैयार नहीं हुए थे। कुछ शरारती लड़कों ने पत्थर मार कर इन के घोंसले नष्ट कर दिए थे। रेनू ने उन्हें गुस्सा कर रोकना चाहा। रेनू ने सोचा-क्यों न मैं अपने हाथों से एक घोंसला बनाकर बगीचे के किसी पेड़ पर लटका दूं। हो सकता है कोई पक्षी वहां रहने आ जाए, आह, कितना अच्छा लगेगा जब पक्षी वहां अंडे देंगे और कुछ दिनों में घोंसला छोटे-छोटे पक्षियों से भर जाएगा। पक्षियों की चहचहाहट से मेरे बगीचे में रौनक आ जाएगी, यह सोच कर रेनू बहुत खुश हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो रेनू को अपने आप गुस्सा आ रहा था कि इतनी अच्छी बात उसे पहले क्यों नहीं सूझी ? कुछ मिनटों का ही तो काम होगा और बस घोंसला तैयार हो जायेगा। पक्षियों के चोंच से बने घोंसलों के मुकाबले मेरा यह घोंसला ज्यादा सफाई से बना हुआ होगा, रेनू ने सोचा। अगले दिन रेनू की मां यह देख कर बड़ी हैरान हुई कि रेनू सारा दिन तिनके, कागज आदि ही बुनती रही। कहां तो रेनू ने सोचा था कि घोंसला बनाना तो कुछ मिनटों का ही काम है और कहां रेनू की सारी शाम घोंसला बनाते- बनाते गुजर गई। Bird’s Nest</p>
<p style="text-align:justify;">घोंसला को टिकाने के लिए रेनू ने बांस की कुछ तीलियां भी लगाई थी। अब वे तीलियां टिक नहीं रही थी। बेचारी रेनू ने धागे की पूरी रील लगा दी। तब कहीं जा कर घोंसला इधर-उधर से बंध कर तैयार हुआ, पर घोंसला अजीब ऊबड़-खाबड़ सा बना था। यह तो पक्षियों को बहुत चुभेगा, यह सोच कर रेनू मां के पास गई और बोली, मां, यह घोंसला अंदर से कितना सख्त है, इसे जरा नरम बना दो न। मां ने एक छोटी कटोरी ली और घोंसले के अंदर उसे गोलमोल घुमा कर काफी हद तक उसे आरामदेह बना दिया। ऊबड़खाबड़ तिनके और कागज बैठ गए थे। अब एक छोटा सा घोंसला तैयार था जो न गोल कहा जा सकता था, न चौरस और न लंबा। चिड़ियाँ चोंच से घोंसला बनाती हैं, पर कितने सलीके और सफाई से बनाती हैं। हाथों से तो कभी ऐसे घोंसला बनाए ही नहीं जा सकते। सुबह रेनू ने बड़ी शान से वह घोंसला बगीचे के एक पेड़ पर लटका दिया और खुद कुछ दूरी पर खड़ी इंतजार करती रही कि कोई पक्षी आकर उसे अपना घर बना ले।</p>
<p style="text-align:justify;">पर जब काफी समय गुजर गया और कोई पक्षी न आया तो रेनू बड़ी निराशा हुई। अचानक उस ने देखा लवा पक्षियों के एक जोड़े ने, जो घोंसला के ऊपर मंडरा रहा था, चोंच मारमार कर घोंसला तोड़फोड़ डाला। ‘शैतान, पक्षी ‘ गुस्से से रेनू बड़बड़ाई। रेनू की आवाज सुनकर उसकी मां वहां आ गई। मां, देखो न, उन्हें मेरा घोंसला पसंद नहीं आया, रेनू ने सुबकते हुए कहा। मां भी वहीं खड़ी हो कर पक्षियों की हरकतें देखने लंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक मां जोर से हंस पड़ी, देखो, रेनू, ये पक्षी पहले घोंसले से तिनके चुनचुन कर एक नया घोंसला तैयार कर रहे हैं। हो सकता है ये लोग और किसी के बनाए घोंसलों में रहना पसंद न करते हों। मां, मैं जो लेख लिखूंगी न, उस में यह बात भी जरूर लिखूंगी, रेनू बोली। रेनू, पक्षियों ने घोंसला चाहे जिस कारण तोड़ा हो, पर वे तुम्हारा बड़ा एहसान मान रहे होंगे कि तुम ने घोंसला बनाने का सारा सामान एक जगह जमा कर रखा है, मां ने कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">मां, तुम ने एक बात पर गौर किया ? रेनू ने मां से कहा, यह लवा अपना घोंसला झाड़ियों के अंदर बनाती है। हाँ, रेनू, अभी तक तो मैं ने यही देखा सुना था कि लवा अपना घोंसला पेड़ पर या घरों के रोशनदानों आदि में बनाती है। आज पहली बार मैं यह तरीका देख रही हूँ। रेनू सारा दिन बगीचे में बैठी लवा पक्षियों को काम में जुटे देखती रहती। रेनू की मौजूदगी का पक्षी भी बुरा नहीं मानते थे। शायद उन्हें पता था कि वह उन की मित्र है। जल्दी ही घोंसला छोटे-छोटे लवा पक्षियों से भर गया। इसी बीच रेनू को लवा पक्षी की एक और दिलचस्प आदत का पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर पक्षी उड़ते हुए आते हैं और सीधे अपने घोंसले पर ही उतरते हैं, पर लवा कभी ऐसा नहीं करती। वह हमेशा अपने घोंसले से थोड़ी दूरी पर उतरती है और फिर फुदकफुदक कर और थोड़ा इधर-उधर घूम कर अपने घोंसले में जाती है। शायद वह नहीं चाहती कि किसी को उसके घोंसले की जगह पता चले।</p>
<p style="text-align:justify;">छुट्टियों के बाद जब लेख प्रतियोगिता हुई तो रेनू को प्रथम पुरस्कार मिला। इनाम वाली किताब हाथ में पकड़े रेनू अपनी सहेलियों को बता रही थी, तुम्हें पता है, मैं ने एक नहीं दो इनाम जीते हैं। एक तो यह किताब और दूसरा अपने बगीचे में छोटे-छोटे लवा पक्षियों से भरा घोंसला। Bird’s Nest</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 15:31:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बुरी संगति का असर</title>
                                    <description><![CDATA[Children Story: उदयपुर नाम का एक गांव था जहाँ सभी लोग मिलजुल कर रहते थे। उसी गाँव के पास रतनपुर नाम का गाँव था जिसमें राजू और अर्जुन नाम के दो मित्र रहते थे। राजू लालची और ठगी इंसान था और अर्जुन बहुत ही ईमानदार था। अर्जुन यह सब जानता था लेकिन किसी के सामने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-about-the-effects-of-bad-company/article-61949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/children-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children Story: उदयपुर नाम का एक गांव था जहाँ सभी लोग मिलजुल कर रहते थे। उसी गाँव के पास रतनपुर नाम का गाँव था जिसमें राजू और अर्जुन नाम के दो मित्र रहते थे। राजू लालची और ठगी इंसान था और अर्जुन बहुत ही ईमानदार था। अर्जुन यह सब जानता था लेकिन किसी के सामने कह नही सकता था क्योंकि वह बहुत गरीब था और उसका कहीं काम भी नही लगा था जिसकी वजह से वह पूरी तरह राजू पर निर्भर था। राजू ने भी उसे कभी बोझ नही समझा और अर्जुन की सारी जरुरतों को पूरा करता था। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन राजू ने उदयपुर में ठगी करने की योजना बनाई। वह उस गाँव में गया और जब वहां से वापस आया तो उसके पास इतना सारा सामान था जितना की उसने कभी देखा भी नहीं था। इतना सामन देखकर उसके मन में लालच आ गया और उसने उस गाँव में दोबारा जाने की सोची पर इस बार उसने अर्जुन को भी अपने साथ जाने को कहा लेकिन अर्जुन ने मना कर दिया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">फिर राजू अकेले ही योजना बनाकर उस गांव में दोबारा पहुँच गया और पहले की तरह इस बार भी खूब सामान ठग लिया। घर वापस आकर उसके मन में फिर सवाल उठा की मैं और भी सामान ला सकता था। उसके मन का लालच खत्म ही नही हो रहा था और वह सोच रहा था कि अर्जुन अगर उसके साथ चलता तो वे दोनों बहुत सारा सामान ले आयंगे तो पहले की तरह उसने अर्जुन से फिर अपने साथ जाने के लिए दबाब डाला और कहा इस बार जो भी सामान हाथ लगेगा उसे आपस में आधा-आधा बाँट लेंगे इस बार अर्जुन मान गया क्योंकि इतना सारा सामान देखकर अर्जुन के मन में भी लालच आ गया और उसके मन में भी बईमानी आ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर उदयपुर गाँव में भी बहुत हल्ला मचा हुआ था की दो दिन से उनका इतना सामान कहाँ गायब हो गया। तभी गाँव के कुछ लोगों ने मिलकर योजना बनाई की अब जब भी वह ठग आएगा हम सब मिलकर उसे पकड़ लेंगे। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">रात हुई दोनों दोस्त ठगी के लिए चल दिए। राजू ने उसे सब समझाया ताकि वह कोई गलती ना करे उधर उदयपुर गांव के लोग भी छुपकर उनपर नजर रखे हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजू को कुछ दूर चलकर ही पता चल गया की कोई उन पर नजर रख रहा है पर अर्जुन बेचारे को इस बारे में नहीं पता था। वह तो पहले से ही डरा और घबराया हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">राजू ने चालाकी दिखाई और अर्जुन से कहा की तू दीवार कूदकर घर के अंदर घुस जा, मैं पीछे आता हूँ। बेचारा अर्जुन जैसे ही दीवार कूदकर घर में घुसा राजू वहाँ से भाग गया और जल्दी से अपने घर का सारा सामान लेकर गांव छोड़कर चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहाँ उदयपुर में बेचारा अर्जुन अंदर घुस गया पर जब बहुत देर तक राजू अंदर नही आया। उसे समझ नही आ रहा था किअब वह करे तो क्या करें? वह बहुत डरा हुआ था। उस घर में अँधेरा बहुत था जब उसने आगे बढ़ने को कदम बढ़ाया तो उसके पैर से बर्तन टकरा गए। बर्तनों के गिरने की आवाज सुनते ही सारे गाँव वाले उस घर के बाहर आ गए और उसे पकड़ लिया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">अर्जुन बहुत घबराया हुआ था। वह बोल रहा था कि उसने कुछ नहीं किया और माफी मांगने लगा पर गांव वालों ने उसे माफ नहीं किया। वह बार बार कहता रहा की आज पहली बार मैंने ऐसा करने की कोशिश की थी मुझे माफ कर दो आज के बाद में कभी ऐसा नही करूँगा पर गांव वालों ने उसकी एक ना सुनी और जो जुर्म उसने किया भी नही था उसका दंड उसे दे दिया गया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कहानी की सीख-:</strong> कभी-कभी हमारी दोस्ती ऐसे लोगों से हो जाती हैं जो की बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते और हमें गलत काम करने के लिए प्ररित करते हैं। लेकिन हमें कभी ऐसे लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि हम जैसे लोगों के साथ रहते हैं एक दिन हम भी वैसे ही हो जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा अच्छे लोगों से दोस्ती करनी चाहिए।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 16:26:38 +0530</pubDate>
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