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                <title>Children Story - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Children Story RSS Feed</description>
                
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                <title>Picnic: पिकनिक बच्चों को प्यारी: पिकनिक बच्चों को प्यारी</title>
                                    <description><![CDATA[पिकनिक बच्चों को प्यारी पापा मानों बात हमारी, पिकनिक की कर लो तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-love-picnic/article-16475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/picnic.jpg" alt=""></a><br /><p>पिकनिक बच्चों को प्यारी<br />पापा मानों बात हमारी,<br />पिकनिक की कर लो तैयारी।<br />बोर हो गये पढ़ते-पढ़ते,<br />ढ़ोते बस्ता भारी-भारी।।<br />आफिस का मत करो बहाना,<br />कल संडे छुट्टी सरकारी।<br />मम्मी तुम भी अभी बना लो,<br />खाने-पीने की चीजें सारी।<br />लेटेंगे हम नरम घास पर,<br />छुपम-छुपाई भी खेलेंगे।<br />तितली-फूलों को मीत बना,<br />खुशियां सारी मन भर लेंगे।।<br />पार्क में झूला हम झूलेंगे,<br />नहीं करेंगे मारामारी।<br />शाम ढले वापस आएंगे,<br />ले पिकनिक की यादें सारी।।<br />कुछ नया सीखने का अवसर,<br />पिकनिक सब बच्चों को प्यारी।<br />मिलजुल कर रहना सिखलाती,<br />यह खुली पाठशाला प्यारी।।<br /><strong>-आसिया फारूकी, </strong><strong>शिक्षिका, फतेहपुर </strong><strong>( उ. प्र.)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-love-picnic/article-16475</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Story: रोकी का कारनामा</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Story: कुत्तों को वफादारी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इंसानों से इसकी बहुत अच्छी बनती है। घर में लोग इसे बड़े ही प्यार से रखते हैं। इसके अलावा कुत्ते कई कामों में इंसानों की सहायता करते हैं। कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं। लेब्राडोर रिट्रिवर, गोल्डेन रिट्रिवर, जर्मन पॉइंटर, जर्मन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/dogs-are-considered-a-symbol-of-loyalty/article-64650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/children-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Story: कुत्तों को वफादारी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इंसानों से इसकी बहुत अच्छी बनती है। घर में लोग इसे बड़े ही प्यार से रखते हैं। इसके अलावा कुत्ते कई कामों में इंसानों की सहायता करते हैं। कुत्तों की कई प्रजातियां होती हैं। लेब्राडोर रिट्रिवर, गोल्डेन रिट्रिवर, जर्मन पॉइंटर, जर्मन शेफर्ड व डोबरमैन आदि। इनकी सहायता सुरक्षा के लिए तो ली ही जाती है। साथ ही अनेक कार्यों में भी ये मनुष्यों की सहायता करते हैं। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">विस्फोटक पदार्थ खोजने में, शिकार करने में, खेती के काम में, जानवरों की रखवाली में, ये बड़े सहायक होते हैं। इन्हें प्रशिक्षित करके इनकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है और इनसे कई काम लिये जा सकते हैं। कुछ ही दिनों पहले अहमदाबाद में पुलिस के कुत्ते ने किसान के घर से चोरी हुए एक करोड़ रुपये बरामद करवाए। उसकी कहानी बड़ी रोचक है।</p>
<p style="text-align:justify;">हुआ यूं कि एक किसान को एक पुरातात्विक स्थल के बगल में जमीन बेचने से एक करोड़ रुपये मिले। उसने इन रुपयों को एक थैली में डालकर अपने कच्चे घर में रख लिए और कुछ काम से बाहर चला गया। पड़ोस के दो चोरों को इस बात की जानकारी थी। चोर उसके रुपयों को गायब करने की फिराक में थे। चोरों ने किसान के घर में घुसकर रुपयों को चुरा लिया और चोरों ने सोचा कि जब मामला शांत हो जायेगा, तब इन रुपयों से ऐश किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान जब काम से वापिस आया तो परेशान हो गया। क्या करता बेचारा? पुलिस के पास शिकायत लेकर ही तो जाता? जब किसान पुलिस के पास पैसे के चोरी हो जाने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो पुलिस ने उस किसान की सारी बात सुनी। पुलिस वाले रोकी नाम के डोबरमैन प्रजाति के कुत्ते को लेकर किसान के घर गये। रोकी पर पुलिसवालों को बहुत भरोसा था। पहले भी कई मामलों में उसने चोरों को पकड़ा था। रोकी ने घर की एक-एक चीजों को सूंघा और फिर पुलिसवालों को इशारा किया कि चलो बाहर और फिर पेन्नी आगे-आगे और पुलिसे पीछे-पीछे। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">चोरों को नहीं पता था कि रोकी उनकी करतूत को पकड़ लेगा। बिल्कुल निश्चिंत होकर वे आराम फरमा रहे थे। रोकी उस स्थान पर जाकर भौंकने लगा, जहां थैलों को छिपाया गया था। पुलिस को देखते ही चोरों के होश उड़ गये। इस प्रकार किसान के रुपये मिल गये और चोर पकड़े गये। पुलिसवालों ने जब रोकी की पीठ सहलाई तो उसने बड़ी अदा से अपना सिर घुमाया मानो कह रहा हो यह तो मेरे बायें हाथ का खेल है। Children Story</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="स्विमिंग विजेता मुकुल दहिया का गांव में पहुंचने पर भव्य स्वागत" href="http://10.0.0.122:1245/swimming-winner-mukul-dahiya-got-a-grand-welcome-on-reaching-the-village/">स्विमिंग विजेता मुकुल दहिया का गांव में पहुंचने पर भव्य स्वागत</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/dogs-are-considered-a-symbol-of-loyalty/article-64650</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Nov 2024 16:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Toys: बच्चों की काल्पनिक दुनिया है, खिलौने</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Toys: बच्चे के जीवन में खेल का समय अत्यंत ही आनंद उठाने वाला होता है। खेल के क्रियाकलापों में खिलौने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये खिलौने सिर्फ नाममात्र के लिए खेल की वस्तुएँ नहीं होतीं। बल्कि वे बच्चे के जीवन के कार्यों की पूर्ति करते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए बड़ी संख्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-imaginary-world-is-toys/article-63730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/childrens-toys.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Toys: बच्चे के जीवन में खेल का समय अत्यंत ही आनंद उठाने वाला होता है। खेल के क्रियाकलापों में खिलौने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ये खिलौने सिर्फ नाममात्र के लिए खेल की वस्तुएँ नहीं होतीं। बल्कि वे बच्चे के जीवन के कार्यों की पूर्ति करते हैं। विभिन्न उद्देश्यों के लिए बड़ी संख्या में भिन्न-भिन्न प्रकार के खिलौने उपलब्ध होते हैं। ये खिलौने बच्चे के अपने छोटे से संसार का सृजन करने में सहायता देते हैं, जो विविध प्रकार के व्यक्तियों, व्यवसायों और क्रियाकलापों में बाहर की बड़ी दुनिया को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसमें प्रौढ़ व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में व्यस्त लगे रहते हैं। इसलिए, बच्चों के विकास के लिए सही किस्म के खिलौने का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कुशाग्र होती है बुद्धि</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चा अपने आसपास के लोगों, खिलौनों, घर और प्रकृति की हर चीज को निहारता है और उस से खेलता है। बच्चे के शारीरिक और बौद्धिक विकास के बारे में थोड़ी-सी भी जानकारी और समझ से माता-पिता बच्चे को सही उम्र में सही खिलौने व उचित वातावरण दे कर उस के विकास को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं। पहले बच्चे घर में रुई, कपड़े और मिट्टी के खिलौनों से खेलते थे, पर आज इलेक्ट्रोनिक खिलौनों का युग है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में महंगे से महंगे खिलौने उपलब्ध हैं, लेकिन खिलौनों के महत्त्व एवं उपयोगिता को उन की कीमत से नहीं आंका जा सकता। खिलौनों से खेलकर बच्चे की बुद्धि कुशाग्र होती है, कल्पनाशक्ति बढ़ती है, शरीर तंदुरुस्त होता है, जिस से उस की योग्यता बढ़ती है। अच्छे खिलौने बच्चों की कार्यक्षमता, कार्यकुशलता और रचनात्मकता को बढ़ाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लाइटिंग वाले खिलौने बच्चों को करते हैं अपनी और आकर्षित</h3>
<p style="text-align:justify;">आपके बच्चे को अगर खिलौने में गाड़ी मोटर ज्यादा पसंद है। इस खिलौने को आप उसके लिए खरीद सकते हैं। यह प्लास्टिक से बना हुआ जम्बो जेसीबी भी है। इसके ट्रंकि डिजाइन और मोटे ग्रिप वाले टायर बच्चों को खूब लुभाता है। दूसरा प्लास्टिक से बना हुआ एरोप्लेन है। इसमें लगा हुआ कलरफुल एलइडी लाइट बच्चों को खूब लुभाते है। इस प्लेन में रियलिस्टिक इंजन साउंड मिलता है, जिससे बच्चों को इसे चलाने में मजा आता है। यह बैटरी आॅपरेटेड खिलौना है। तीसरा प्लास्टिक से बने हुए ड्रैगनफ्लाई हेलीकॉप्टर हैं। इसमें आपको 14 पीस कलरफुल हेलीकॉप्टर मिलता है। छोटे बच्चों को यह खिलौना बहुत ही अच्छा लगता है और उनके लिए सेफ भी होता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बढ़ेगी इमेजिनेशन पावर | Children’s Toys</h3>
<p style="text-align:justify;">आप अगर अपने बच्चे को ऐसा खिलौना खरीदकर देना चाहते हैं, जिससे खेलने के साथ उसका मानसिक विकास भी हो सके तो यह एजुकेशनल बिल्डिंग ब्लॉक्स अच्छा आॅप्शन है। इसमें 120 पीस कलरफुल बिल्डिंग ब्लॉक्स मिलते हैं, जिससे आपके बच्चों का इमेजिनेशन पावर बढ़ाता है और वह क्रिएटिव होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जानवरों से होता है खास लगाव</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को जानवरों से बहुत लगाव होता है। अगर आपके बच्चे को भी एनिमल टॉयज पसंद आते हैं तो इस पूरे सेट को आप खरीद सकते हैं। इसमें 6 पीस प्लास्टिक के हाथी, घोड़ा, शेर, चीता, जेब्रा, जिराफ का कॉन्बो मिलता है। यह देखने में बहुत ही अच्छा है और ओरिजिनल दिखता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खेल के लिए सावधानियां</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चा शिशु हो या बच्चा, माता-पिता के लिए यह सलाह है कि वे बच्चे के ऊपर गहरी नजर रखे। अपने बच्चों को खेलता हुआ देखने के अति उत्साह में अक्सर माता-पिता कुछ अनहोने खतरों से बेखबर रहते हैं, जो खेल के दौरान घटित हो सकते हैं। अत: बच्चों के लिए खेल के समय को सुरक्षित एवं आनंददायक बनाने के लिए आवश्यक सावधानियों का बरतना अत्यंत अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को रसोईघर, स्टोव, हीटरों, बायलरों, ज्वलनशील सामग्रियों और आग लगने के संभाव्य क्षेत्रों से दूर रखें, क्योंकि इनसे आग लगने की दुर्घटनाएं घट सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को दम-घोंटू और धुंधले व मलिन स्थानों पर खेलने न दें, क्योंकि वहाँ दम घुटने का खतरा हो सकता है।<br />
ल्ल बच्चों को बाल्टियों, पोखरों और पानी के टबों से दूर रखें, क्योंकि वहां उनके पानी में गिरकर डूबने का खतरा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को खुली बावडियों, खुली मोरियों, भीगे फर्श, छतों से ऊपर खलने से रोकें, क्योंकि वे स्थल खतरे से खाली नहीं होते।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन खिलौने से रखें दूर | Children’s Toys</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के खिलौने महंगे और पेचीदा नहीं होने चाहिए। कृपया यह याद रखें कि उन्हें दिए गए हर खिलौने को शिशु चुभाएंगे, पीटेंगे, खींचेंगे, मरोडेंगे। अत: यह सुझाव है कि ऐसे खिलौनों को बच्चों से दूर ही रखें जो उनके लिए घातक साबित हो सकते हैं, ऐसे खिलौने हैं-<br />
<strong>-तेजधार, नोकदार और किरचदार</strong><br />
<strong>                                                                            -इनमें सीसा होता है, सीसा आधारित पेंट्स होते है।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार" href="http://10.0.0.122:1245/parents-become-teenagers-helpful-to-children/">कहानी: पेरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Oct 2024 14:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Gadhe ka Gana: गधे का गाना</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Story: किसी गांव में एक गधा अपने मालिक धोबी के साथ रहता था। उसका मालिक धोबी दिनभर गधे से खूब काम करवाता और रात को उसे खुला छोड़ देता जिससे वह मनभर और पेट भर के घास चरता था। गधा घास खाने के लिए रात के समय अपने मालिक के घर के आस-पास के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/donkeys-song-kids-story/article-63477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/gadhe-ka-gana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Story: किसी गांव में एक गधा अपने मालिक धोबी के साथ रहता था। उसका मालिक धोबी दिनभर गधे से खूब काम करवाता और रात को उसे खुला छोड़ देता जिससे वह मनभर और पेट भर के घास चरता था। गधा घास खाने के लिए रात के समय अपने मालिक के घर के आस-पास के खेतों में ही जाया करता था। लेकिन एक दिन उसकी मुलाकात एक लोमड़ी से हुई। लोमड़ी भी खाने की तलाश में इधर-उधर घूमते घूमते गधे के पास आ पहुंची थी। गधे और लोमड़ी दोनों की बातें हुई और इस प्रकार दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">गधा लोमड़ी के साथ पूरी रात घास चरता था और भोर होते ही अपने धोबी मालिक के पास वापस आ जाता था। एक दिन रात को लोमड़ी ने गधे से कहा ‘गधा मामा यहां पास के ही खेत में ढेर सारे फल लगे हैं यदि आप वहां पर जाकर वह सारे फलों का आनंद लेते हैं तो वह किसी नाइट डिनर से कम नहीं होगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">गधा लोमड़ी की बातें मान लेते है और कहता है ठीक है भांजे चलो हम दोनों चलते हैं आज उसी खेत में। गधा लोमड़ी दोनों उस खेत में जाते हैं गधा खूब खाता है रसीले फल फूल खाकर गधा एकदम फूल जाता है और लोमड़ी से कहता है भांजे आज की रात इतनी सुहावनी है पूर्णिमा की रात है ऐसे में मुझे गाना गाने का मन कर रहा है। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">लोमड़ी गधे की बात सुनकर उसे गाना गाने से मना करता है और कहता है मामा यदि आप इतनी रात को इस खेत में गाना गाएंगे तो खेत का मालिक किसान यहां आ जाएगा और हमें पकड़ लेगा। लेकिन गधा तो अपनी अहंकार में डूबा था और उसे गाना गाने का धुन सवार थी। गधा लोमड़ी से बोलता है अरे तू क्या जाने कि गाना क्या होता है संगीत क्या होता है। लोमड़ी गधे की इस बात को सुनकर वह समझ जाती है कि गधा बिना गाना गाए नहीं रहेगा तो उसने गधे से कहा मामा कोई बात नहीं आप गाना गाओ लेकिन मैं थोड़ी दूर जाकर उस झाड़ी में छुपकर किसानों के आने की खबर आपको दूंगी और गधा इस प्रकार मान जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब गधा गाना गाना शुरू करता है तो उसकी आवाज सुनकर सभी किसानों की नींद खुल जाती है और वह अपनी लाठी लेकर गधे के पास आ पहुंचते हैं और उसकी खूब मरम्मत करते हैं। अब गधा गाना गाना भूल गया और गिरते पड़ते खेत से बाहर आने लगा। लोमड़ी उसका मजाक उड़ाते हुए बोली, क्या हुआ मामा मैं आपसे पहले ही बोली थी कि इतनी रात को गाना मत गाओ वरना किसान आ जाएंगे और यह क्या वह आए ही क्या, वह तो आपको खूब सारा पुरस्कार भी देकरचले गए। ऐसा कह कर वह खूब हंसने लगी। Gadhe ka Gana</p>
<p style="text-align:justify;">कहानी से सीख: अभी जो कुछ भी करते हैं उसका एक सही समय और एक उचित स्थान होता है और यदि इसके विपरीत यदि कोई कार्य किया जाता है तो उसका परिणाम बहुत बुरा होता है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Imd Alert: इस सप्ताह कैसा रहेगा मौसम का मिजाज, आईएमडी ने जारी किया मौसम बुलेटिन…" href="http://10.0.0.122:1245/imd-issues-weather-bulletin/">Imd Alert: इस सप्ताह कैसा रहेगा मौसम का मिजाज, आईएमडी ने जारी किया मौसम बुलेटिन…</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/donkeys-song-kids-story/article-63477</link>
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                <pubDate>Sun, 20 Oct 2024 16:50:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Bird&amp;#8217;s Nest: चिड़िया का घोंसला</title>
                                    <description><![CDATA[Bird’s Nest: इस बार गर्मी की छुट्टियों में रेनू अपनी सहेलियों के साथ खेलने के बजाय सारा दिन पार्क में बैठी छोटे-छोटे पक्षियों को घोंसला बनाते देखती रहती। पार्क में तरह-तरह के पक्षी आते थे – गौरैया, कबूतर, कठफोड़वा, लवा और बुलबुल। रेनू किसी भी पक्षी को देखते ही पहचान जाती थी, क्योंकि उस की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/birds-nest-story/article-62231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/birds-nest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Bird’s Nest: इस बार गर्मी की छुट्टियों में रेनू अपनी सहेलियों के साथ खेलने के बजाय सारा दिन पार्क में बैठी छोटे-छोटे पक्षियों को घोंसला बनाते देखती रहती।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्क में तरह-तरह के पक्षी आते थे – गौरैया, कबूतर, कठफोड़वा, लवा और बुलबुल। रेनू किसी भी पक्षी को देखते ही पहचान जाती थी, क्योंकि उस की मैम ने उसे सभी पक्षियों के सुंदर चित्र दिखाए थे और कहा था कि इन छुट्टियों में तुम सब पक्षियों की आदतें गौर से देखना और गरमी की छुट्टियों के बाद जब स्कूल खुलेगा तब तुम सब को पक्षियों पर एक लेख लिखने के लिए दिया जाएगा। सब से अच्छे लेख पर जो किताब इनाम में दी जाने वाली थी, वह भी बच्चों को दिखाई गई थी। मैम ने उन्हें जानवरों और पक्षियों की कहानियों वाली उस किताब के रंगीन चित्र भी दिखाए थे और कहानियां भी पढ़ कर सुनाई थी। रेनू को वह किताब इतनी पसंद आई थी कि उस ने मन ही मन यह निश्चय कर लिया था कि जैसे भी हो वह इस किताब को पाने के लिए मेहनत करेगी और इसलिए रेनू अपनी छुट्टियां खेलने के बजाय पार्क में बैठ कर पक्षियों की आदतों को जानने में गुजार रही थी। Bird’s Nest</p>
<p style="text-align:justify;">रेनू देखती कि पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए कितने धैर्य से छांटछांट कर पुराणी सुतली, घास, पत्तियां और घोंसले को आरामदेह बनाने के लिए पंख आदि जमा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनू का जी चाहता, कितना अच्छा होता कि मैं भी इन पक्षियों की कुछ मदद कर सकती। अचानक रेनू को एक खयाल आया। इन दिनों ज्यादातर पक्षियों ने अपने घोंसले बना लिए थे, फिर भी कुछ पक्षी ऐसे थे जिन के घोंसले अभी तक तैयार नहीं हुए थे। कुछ शरारती लड़कों ने पत्थर मार कर इन के घोंसले नष्ट कर दिए थे। रेनू ने उन्हें गुस्सा कर रोकना चाहा। रेनू ने सोचा-क्यों न मैं अपने हाथों से एक घोंसला बनाकर बगीचे के किसी पेड़ पर लटका दूं। हो सकता है कोई पक्षी वहां रहने आ जाए, आह, कितना अच्छा लगेगा जब पक्षी वहां अंडे देंगे और कुछ दिनों में घोंसला छोटे-छोटे पक्षियों से भर जाएगा। पक्षियों की चहचहाहट से मेरे बगीचे में रौनक आ जाएगी, यह सोच कर रेनू बहुत खुश हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो रेनू को अपने आप गुस्सा आ रहा था कि इतनी अच्छी बात उसे पहले क्यों नहीं सूझी ? कुछ मिनटों का ही तो काम होगा और बस घोंसला तैयार हो जायेगा। पक्षियों के चोंच से बने घोंसलों के मुकाबले मेरा यह घोंसला ज्यादा सफाई से बना हुआ होगा, रेनू ने सोचा। अगले दिन रेनू की मां यह देख कर बड़ी हैरान हुई कि रेनू सारा दिन तिनके, कागज आदि ही बुनती रही। कहां तो रेनू ने सोचा था कि घोंसला बनाना तो कुछ मिनटों का ही काम है और कहां रेनू की सारी शाम घोंसला बनाते- बनाते गुजर गई। Bird’s Nest</p>
<p style="text-align:justify;">घोंसला को टिकाने के लिए रेनू ने बांस की कुछ तीलियां भी लगाई थी। अब वे तीलियां टिक नहीं रही थी। बेचारी रेनू ने धागे की पूरी रील लगा दी। तब कहीं जा कर घोंसला इधर-उधर से बंध कर तैयार हुआ, पर घोंसला अजीब ऊबड़-खाबड़ सा बना था। यह तो पक्षियों को बहुत चुभेगा, यह सोच कर रेनू मां के पास गई और बोली, मां, यह घोंसला अंदर से कितना सख्त है, इसे जरा नरम बना दो न। मां ने एक छोटी कटोरी ली और घोंसले के अंदर उसे गोलमोल घुमा कर काफी हद तक उसे आरामदेह बना दिया। ऊबड़खाबड़ तिनके और कागज बैठ गए थे। अब एक छोटा सा घोंसला तैयार था जो न गोल कहा जा सकता था, न चौरस और न लंबा। चिड़ियाँ चोंच से घोंसला बनाती हैं, पर कितने सलीके और सफाई से बनाती हैं। हाथों से तो कभी ऐसे घोंसला बनाए ही नहीं जा सकते। सुबह रेनू ने बड़ी शान से वह घोंसला बगीचे के एक पेड़ पर लटका दिया और खुद कुछ दूरी पर खड़ी इंतजार करती रही कि कोई पक्षी आकर उसे अपना घर बना ले।</p>
<p style="text-align:justify;">पर जब काफी समय गुजर गया और कोई पक्षी न आया तो रेनू बड़ी निराशा हुई। अचानक उस ने देखा लवा पक्षियों के एक जोड़े ने, जो घोंसला के ऊपर मंडरा रहा था, चोंच मारमार कर घोंसला तोड़फोड़ डाला। ‘शैतान, पक्षी ‘ गुस्से से रेनू बड़बड़ाई। रेनू की आवाज सुनकर उसकी मां वहां आ गई। मां, देखो न, उन्हें मेरा घोंसला पसंद नहीं आया, रेनू ने सुबकते हुए कहा। मां भी वहीं खड़ी हो कर पक्षियों की हरकतें देखने लंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक मां जोर से हंस पड़ी, देखो, रेनू, ये पक्षी पहले घोंसले से तिनके चुनचुन कर एक नया घोंसला तैयार कर रहे हैं। हो सकता है ये लोग और किसी के बनाए घोंसलों में रहना पसंद न करते हों। मां, मैं जो लेख लिखूंगी न, उस में यह बात भी जरूर लिखूंगी, रेनू बोली। रेनू, पक्षियों ने घोंसला चाहे जिस कारण तोड़ा हो, पर वे तुम्हारा बड़ा एहसान मान रहे होंगे कि तुम ने घोंसला बनाने का सारा सामान एक जगह जमा कर रखा है, मां ने कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">मां, तुम ने एक बात पर गौर किया ? रेनू ने मां से कहा, यह लवा अपना घोंसला झाड़ियों के अंदर बनाती है। हाँ, रेनू, अभी तक तो मैं ने यही देखा सुना था कि लवा अपना घोंसला पेड़ पर या घरों के रोशनदानों आदि में बनाती है। आज पहली बार मैं यह तरीका देख रही हूँ। रेनू सारा दिन बगीचे में बैठी लवा पक्षियों को काम में जुटे देखती रहती। रेनू की मौजूदगी का पक्षी भी बुरा नहीं मानते थे। शायद उन्हें पता था कि वह उन की मित्र है। जल्दी ही घोंसला छोटे-छोटे लवा पक्षियों से भर गया। इसी बीच रेनू को लवा पक्षी की एक और दिलचस्प आदत का पता चला।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर पक्षी उड़ते हुए आते हैं और सीधे अपने घोंसले पर ही उतरते हैं, पर लवा कभी ऐसा नहीं करती। वह हमेशा अपने घोंसले से थोड़ी दूरी पर उतरती है और फिर फुदकफुदक कर और थोड़ा इधर-उधर घूम कर अपने घोंसले में जाती है। शायद वह नहीं चाहती कि किसी को उसके घोंसले की जगह पता चले।</p>
<p style="text-align:justify;">छुट्टियों के बाद जब लेख प्रतियोगिता हुई तो रेनू को प्रथम पुरस्कार मिला। इनाम वाली किताब हाथ में पकड़े रेनू अपनी सहेलियों को बता रही थी, तुम्हें पता है, मैं ने एक नहीं दो इनाम जीते हैं। एक तो यह किताब और दूसरा अपने बगीचे में छोटे-छोटे लवा पक्षियों से भरा घोंसला। Bird’s Nest</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Sep 2024 15:31:06 +0530</pubDate>
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                <title>बुरी संगति का असर</title>
                                    <description><![CDATA[Children Story: उदयपुर नाम का एक गांव था जहाँ सभी लोग मिलजुल कर रहते थे। उसी गाँव के पास रतनपुर नाम का गाँव था जिसमें राजू और अर्जुन नाम के दो मित्र रहते थे। राजू लालची और ठगी इंसान था और अर्जुन बहुत ही ईमानदार था। अर्जुन यह सब जानता था लेकिन किसी के सामने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/children-story-about-the-effects-of-bad-company/article-61949"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/children-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children Story: उदयपुर नाम का एक गांव था जहाँ सभी लोग मिलजुल कर रहते थे। उसी गाँव के पास रतनपुर नाम का गाँव था जिसमें राजू और अर्जुन नाम के दो मित्र रहते थे। राजू लालची और ठगी इंसान था और अर्जुन बहुत ही ईमानदार था। अर्जुन यह सब जानता था लेकिन किसी के सामने कह नही सकता था क्योंकि वह बहुत गरीब था और उसका कहीं काम भी नही लगा था जिसकी वजह से वह पूरी तरह राजू पर निर्भर था। राजू ने भी उसे कभी बोझ नही समझा और अर्जुन की सारी जरुरतों को पूरा करता था। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन राजू ने उदयपुर में ठगी करने की योजना बनाई। वह उस गाँव में गया और जब वहां से वापस आया तो उसके पास इतना सारा सामान था जितना की उसने कभी देखा भी नहीं था। इतना सामन देखकर उसके मन में लालच आ गया और उसने उस गाँव में दोबारा जाने की सोची पर इस बार उसने अर्जुन को भी अपने साथ जाने को कहा लेकिन अर्जुन ने मना कर दिया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">फिर राजू अकेले ही योजना बनाकर उस गांव में दोबारा पहुँच गया और पहले की तरह इस बार भी खूब सामान ठग लिया। घर वापस आकर उसके मन में फिर सवाल उठा की मैं और भी सामान ला सकता था। उसके मन का लालच खत्म ही नही हो रहा था और वह सोच रहा था कि अर्जुन अगर उसके साथ चलता तो वे दोनों बहुत सारा सामान ले आयंगे तो पहले की तरह उसने अर्जुन से फिर अपने साथ जाने के लिए दबाब डाला और कहा इस बार जो भी सामान हाथ लगेगा उसे आपस में आधा-आधा बाँट लेंगे इस बार अर्जुन मान गया क्योंकि इतना सारा सामान देखकर अर्जुन के मन में भी लालच आ गया और उसके मन में भी बईमानी आ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर उदयपुर गाँव में भी बहुत हल्ला मचा हुआ था की दो दिन से उनका इतना सामान कहाँ गायब हो गया। तभी गाँव के कुछ लोगों ने मिलकर योजना बनाई की अब जब भी वह ठग आएगा हम सब मिलकर उसे पकड़ लेंगे। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">रात हुई दोनों दोस्त ठगी के लिए चल दिए। राजू ने उसे सब समझाया ताकि वह कोई गलती ना करे उधर उदयपुर गांव के लोग भी छुपकर उनपर नजर रखे हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">राजू को कुछ दूर चलकर ही पता चल गया की कोई उन पर नजर रख रहा है पर अर्जुन बेचारे को इस बारे में नहीं पता था। वह तो पहले से ही डरा और घबराया हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">राजू ने चालाकी दिखाई और अर्जुन से कहा की तू दीवार कूदकर घर के अंदर घुस जा, मैं पीछे आता हूँ। बेचारा अर्जुन जैसे ही दीवार कूदकर घर में घुसा राजू वहाँ से भाग गया और जल्दी से अपने घर का सारा सामान लेकर गांव छोड़कर चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहाँ उदयपुर में बेचारा अर्जुन अंदर घुस गया पर जब बहुत देर तक राजू अंदर नही आया। उसे समझ नही आ रहा था किअब वह करे तो क्या करें? वह बहुत डरा हुआ था। उस घर में अँधेरा बहुत था जब उसने आगे बढ़ने को कदम बढ़ाया तो उसके पैर से बर्तन टकरा गए। बर्तनों के गिरने की आवाज सुनते ही सारे गाँव वाले उस घर के बाहर आ गए और उसे पकड़ लिया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;">अर्जुन बहुत घबराया हुआ था। वह बोल रहा था कि उसने कुछ नहीं किया और माफी मांगने लगा पर गांव वालों ने उसे माफ नहीं किया। वह बार बार कहता रहा की आज पहली बार मैंने ऐसा करने की कोशिश की थी मुझे माफ कर दो आज के बाद में कभी ऐसा नही करूँगा पर गांव वालों ने उसकी एक ना सुनी और जो जुर्म उसने किया भी नही था उसका दंड उसे दे दिया गया। Children Story</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कहानी की सीख-:</strong> कभी-कभी हमारी दोस्ती ऐसे लोगों से हो जाती हैं जो की बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते और हमें गलत काम करने के लिए प्ररित करते हैं। लेकिन हमें कभी ऐसे लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि हम जैसे लोगों के साथ रहते हैं एक दिन हम भी वैसे ही हो जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा अच्छे लोगों से दोस्ती करनी चाहिए।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Internet: जंगल में आया इंटरनेट" href="http://10.0.0.122:1245/internet-came-into-the-jungle-children-story/">Internet: जंगल में आया इंटरनेट</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 16:26:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>चुहिया ने हाथी से पाँव दबवाए</title>
                                    <description><![CDATA[लैला ख़्वाजा बानो Children’s Story: एक थी चिड़िया और एक थी चुहिया। चिड़िया बोली, ‘‘चलो बहन आज जरा जंगल की सैर कर आएँ।’’ चुहिया ने कहा, ‘‘अच्छा बहन चलो।’’ चुहिया जमीन पर चली और चिड़िया हवा में उड़ने लगी। रास्ते में मिला एक हाथी। चुहिया उसके पैर तले दब गई तो बेचारी चिड़िया अपनी बहन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-story-of-the-mouse-and-the-elephant/article-61475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/elephant-and-sparrow-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लैला ख़्वाजा बानो</strong><br />
Children’s Story: एक थी चिड़िया और एक थी चुहिया। चिड़िया बोली, ‘‘चलो बहन आज जरा जंगल की सैर कर आएँ।’’ चुहिया ने कहा, ‘‘अच्छा बहन चलो।’’ चुहिया जमीन पर चली और चिड़िया हवा में उड़ने लगी। रास्ते में मिला एक हाथी। चुहिया उसके पैर तले दब गई तो बेचारी चिड़िया अपनी बहन के लिए रोने लगी। लेकिन जब हाथी ने पाँव उठाया तो सख़्त-जान चुहिया उछल कर भागी और चिड़िया को रोते देखा तो कहा, ‘‘बहन, तू क्यों रोती है?’’ चिड़िया ने कहा, ‘‘तेरे दबने और मरने के गम में।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">चुहिया बोली, ‘‘मरें मेरे दुश्मन, मैंने तो हाथी से जरा पाँव दबवाए थे।’’</h3>
<p style="text-align:justify;">आगे आया दरिया, चिड़िया तो उड़ कर पार हो गई और चुहिया गोते खाने लगी और बहुत मुश्किल से पार हुई। चिड़िया किनारे पर बैठी चुहिया के लिए रो रही थी। चुहिया आई तो बोली, ‘‘रोती क्यों है? मैं तो जरा नहाने को ठहर गई थी।’’ फिर आया कांटों का जंगल, चिड़िया तो उड़ कर निकल गई। मगर चुहिया कांटों से लहू-लुहान हो गई। चिड़िया फिर रोने लगी, तो चुहिया ने कहा, ‘‘रो मत, मैंने तो जरा नाक-कान छिदवाए हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">चिड़िया ने कहा, ‘‘अरी तू बड़ी बातूनी है। दुख सहती है और बे-हयाई से उसकी तारीफ करती है।’’ चुहिया ने कहा, ‘‘दीवानी, दुख में यूँ ही सब्र आया है।’’ Children’s Story</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Rajasthan Railway: राजस्थान के इन जिलों के लिए खुशखबरी, बिछाई जाएगी 2 नई रेल लाइन, बनेंगे 9 नए स्टेशन" href="http://10.0.0.122:1245/good-news-for-these-districts-of-rajasthan-2-new-railway-lines-will-be-laid-9-new-stations-will-be-built/">Rajasthan Railway: राजस्थान के इन जिलों के लिए खुशखबरी, बिछाई जाएगी 2 नई रेल लाइन, बनेंगे 9 नए स्टेश…</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Aug 2024 14:57:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Internet: जंगल में आया इंटरनेट</title>
                                    <description><![CDATA[Internet: हरे-भरे जंगल में चारों ओर एक ही चर्चा थी- जंगल में इंटरनेट आया है। सब इसी बारे में बात कर रहे थे। हालाँकि आधे से ज्यादा जानवरों को यह पता नहीं था कि इंटरनेट कौन से नए जानवर का नाम है। फिर भी वे यह पता लगाने की कोशिश लगातार कर रहे थे कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/internet-came-into-the-jungle-children-story/article-61197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/children-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Internet: हरे-भरे जंगल में चारों ओर एक ही चर्चा थी- जंगल में इंटरनेट आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सब इसी बारे में बात कर रहे थे। हालाँकि आधे से ज्यादा जानवरों को यह पता नहीं था कि इंटरनेट कौन से नए जानवर का नाम है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी वे यह पता लगाने की कोशिश लगातार कर रहे थे कि यह नया जानवर खतरनाक तो नहीं है।<br />
अनेक सवाल थे उनके मन में। कैसा दीखता<br />
होगा यह इंटरनेट?<br />
उसकी पूँछ होगी या नहीं ? अरे नहीं भाई, यह जानवर का नाम नहीं है।<br />
तो फिर क्या है ?<br />
यह एक चिड़िया का नाम है। ओह, अच्छा-अच्छा, चिड़िया होती है यह!</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह की बातें पूरे जंगल में हो रही थी। शाम को राजा शेर ने सभी जानवरों को अपनी गुफा के सामने बुलाया है। तब वे हमको इस इंटरनेट से मिलवाएँगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वे एक-दूसरे को बता रहे थे। शाम को ठीक 6 बजे सभी जानवर, पक्षी और जंगल के बाकी सब प्राणी शेर की गुफा के सामने इकट्ठे हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">राजा शेर एक अजीब-सी चीज के साथ बाहर निकले।</p>
<p style="text-align:justify;">ये क्या है ? फिर फुसफुसाहट होने लगी। तब शेर ने कहा, दोस्तों, यह है कंप्यूटर।</p>
<p style="text-align:justify;">कंप्यूटर ? और एक जानवर ? सबने सोचा। यह एक मशीन है और इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए हमारे पास कंप्यूटर होना बहुत जरूरी है। शेर ने कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट के माध्यम से हम दूर-दूर रहने वाले अपने दोस्तों और संबंधियों से घर बैठे बात कर सकते हैं।<br />
उन्हें हम पत्र भी भेज सकते हैं। पत्र भेजने के इस तरीका को ई-मेल कहते हैं।<br />
यदि हम पत्र डाक विभाग के माध्यम से भेजते हैं तो उसे पहुँचने में दो-तीन दिन लगते हैं, लेकिन ई-मेल भेजने में बस कुछ सेकंड ही लगते हैं और सबसे बढ़िया बात है कि इसमें खर्चा न के बराबर आता है। शेर समझा रहा था। और क्या फायदे हैं इंटरनेट के? जानवरों ने उत्सुकता से पूछा।<br />
बहुत से फायदे हैं। आप किसी भी समय दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाली घटनाओं के बारे में जान सकते हो। हर तरह की जानकारी इसमें है। शेर ने बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">वाह, ये तो कमाल की वस्तु है। सबने कहा। लेकिन कोई था जो इस सबसे खुश नहीं था और वह था कबूतर, खबरी।<br />
इतने वर्षों से वही था, जो सारे समाचार और पत्र दूर-दूर के जंगलों तक पहुँचता था। पर उसे लग रहा था कि अब उसकी कोई जरूरत नहीं थी। वह बहुत उदास था। Internet</p>
<p style="text-align:justify;">उसने शेर से इस बारे में बात की। शेर ने कहा, देखो खबरी तुमने सबकी बहुत सेवा की है। लेकिन जंगल की तरक्की के लिए कंप्यूटर को जंगल में लाना बहुत जरूरी था। तुम किसी और काम के बारे में सोचों। कबूतर उदास मन से अपने घर लौट गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगल में धीरे-धीरे सभी ने कंप्यूटर सीखना शुरू कर दिया। महीने ऐसे ही बीत गए। सब जानवर आजकल ई-मेल भेजने लगे थे। Internet</p>
<p style="text-align:justify;">इसीलिए खबरी के लिए ज्यादा काम नहीं होता था। बच्चे किताबों से ज्यादा इंटरनेट पर पढ़ाई करना चाहते थे। पूरा जंगल जैसे कंप्यूटर पर निर्भर हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन बहुत तेज बारिश हुई। तेज हवा चली और बहुत सारे पेड़ टूट गए। उस गड़बड़ में जंगल के कम्प्यूटरों का इंटरनेट से संबंध टूट गया।<br />
जंगल के जानवर न तो किसी को ई-मेल भेज पा रहे थे और न ही उनके बच्चे ठीक से पढ़ाई कर पा रहे थे।<br />
जानवर अब तक इतने आलसी हो चुके थे कि पत्र लिखना उन्हें अच्छा ही नहीं लगता था। तभी एक दुर्घटना हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">हिरन का बच्चा दौड़ रहा था, वह एक पेड़ से टकराया और उसके सर पर गहरी चोट लगी।<br />
जंगल के डॉक्टर साहब उल्लू जी किसी का इलाज करने दूसरे जंगल में गए हुए थे। समस्या थी कि उन्हें कैसे बुलाया जाए। इससे पहले तो उन्हें ई-मेल भेजकर सन्देश दे दिया जाता था। लेकिन अभी तो सारी व्यवस्था टूटी हुई थी। हिरन के माता-पिता रोते हुए राजा शेर के पास पहुँचे। राजा भी असहाय था, करे तो क्या करे ?</p>
<p style="text-align:justify;">तब खबरी ने कहा, मैं बुलाकर लाऊँगा डॉक्टर को। आखिर पहले भी तो मैं ही यह सब काम करता था।<br />
सबको बहुत तसल्ली हुई की खबरी आज भी उनकी मदद करने को तैयार था। तो खबरी उड़ा और कुछ ही देर बाद डॉक्टर उल्लू जी वहाँ पहुंच गए।</p>
<p style="text-align:justify;">खबरी के कारण ही हिरन के बच्चे की जान बच पाई। अब खबरी की बारी थी सबको समझाने की। वह बोला, मैं मानता हूँ कि जंगल का विकास जरूरी है, लेकिन हमें अपने पुराने तरीकों को भूलना नहीं चाहिए। हम सभी टी. वी. में समाचार सुनते हैं, लेकिन अखवार में समाचार पढ़ने का मजा ही कुछ और है। ऐसे ही कंप्यूटर का प्रयोग करें, लेकिन हमें उस पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। क्योंकि मशीन तो मशीन ही होती है, क्यों ठीक कहा न मैंने ?<br />
जवाब में सबने बस ‘हाँ’ में सिर हिलाया। वे समझ गए थे अपनी गलती को। Internet</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Aug 2024 10:07:23 +0530</pubDate>
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                <title>अकबर के साले व बीरबल की योग्यता</title>
                                    <description><![CDATA[Akbar and Birbal: दरबार में बीरबल से जलने वाले बहुत लोग थे, जिनमें से एक बादशाह के साले मियाँ भी थे। ये बार-बार बीरबल से होड़ करते और हमेशा मात खाते लेकिन बेगम का भाई होने की वजह से बादशाह इन्हें कुछ कह भी नहीं सकते थे। बीरबल की गैरमौजूदगी में एक बार साले साहब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/akbar-and-birbal-story/article-60694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/akbar-and-birbal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Akbar and Birbal: दरबार में बीरबल से जलने वाले बहुत लोग थे, जिनमें से एक बादशाह के साले मियाँ भी थे। ये बार-बार बीरबल से होड़ करते और हमेशा मात खाते लेकिन बेगम का भाई होने की वजह से बादशाह इन्हें कुछ कह भी नहीं सकते थे। बीरबल की गैरमौजूदगी में एक बार साले साहब बादशाह से बोले कि वो दीवान पद के सही दावेदार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए बादशाह ने भी अपने साले साहब की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए कहा, ‘‘अच्छा तो ये पता करो कि क्या हमारे महल के पीछे किसी कुतिया ने बच्चे दिए हैं? क्योंकि हमें आज सुबह से ही कुछ पिल्लों की आवाजें आ रही हैं। बादशाह की बात सुनकर साले साहब महल के पीछे की ओर देखने चले गए। और कुछ देर बाद आकर बताया। Akbar and Birbal</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘हुजूर, आपका अंदाजा बिलकुल सही था।’’बादशाह अकबर ने पूछा, ‘‘कितने बच्चे हैं?’’साले साहब बोले, ‘‘हुजूर, मैंने गिने नहीं थे।’’‘‘जाओ गिनकर आओ, फिर बताओ।’’ साले साहब ने आकर बताया हुजूर! पांच बच्चे हैं। बादशाह ने फिर पूछा, ‘‘ कितने नर बच्चे हैं और कितने मादा।’’ साले साहब बोले, ‘‘हुजूर, आपने गिनकर आने को कहा था तो मैं गिनकर चला आया।’’ बादशाह – ‘‘जाओ, पता करके बताओ।’’ साले साहब देखने चले गए और आकर बोले, ‘‘ तीन नर और दो मादा हैं हुजूर।’’ बादशाह ने पूछा, ‘‘ नर पिल्लै किस रंग के हैं?’’ साले साहब ने फिर नकारते हुए कहा – देखा नहीं। मैं अभी देखकर आता हूँ। अब बादशाह ने गुस्से में कहा, ‘‘रहने दो, अब तुम बैठ जाओ।’’</p>
<p style="text-align:justify;">साले साहब जाकर अपनी जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद बीरबल भी दरबार में आ गया। तब बादशाह ने बीरबल से वही बात कही, ‘‘जाओ पता करके आओ हमारे महल के पीछे किसी कुतिया ने बच्चे दिए हैं क्या’’? बादशाह अकबर का हुक्म सुनकर बीरबल महल के पीछे चला गया। और कुछ देर बाद महल में वापस आकर बोला, ‘‘ जी हुजूर, आपने बिल्कुल सही कहा था। कुतिया ने बच्चे दिए हैं।’’ बादशाह बोले, ‘‘कितने बच्चे हैं।’’ ‘‘हुजूर, पाँच बच्चे हैं।’’ ‘‘उनमें कितने नर और कितने मादा?’’,</p>
<p style="text-align:justify;">बादशाह ने पूछा। ‘‘तीन नर और दो मादा है।’’, हुजूर बादशाह अकबर – ‘‘नर बच्चे किस रंग के है?’’ बीरबल – ‘‘दो काले और एक बादामी रंग का हैं।’’ बादशाह अकबर के सभी सवालों के जवाब देने के बाद बीरबल अपने स्थान पर जाकर बैठ गया। फिर बादशाह ने अपने साले की तरफ देखा जो कि सिर झुकाए चुपचाप बैठा था। बादशाह ने पूछा, ‘‘साले साहब क्या अब तुम्हें कुछ कहना हैं? ’’ साले साहब के पास बोलने के लिए अब कोई जवाब न था वह सिर झुकाए अपने स्थान पर बैठा रहा। Akbar and Birbal</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Post Office RD Scheme : रोजाना जमा करें 50 रुपये, मैच्योरिटी पर पाएं इतने लाख रुपये, पढ़ें और पाएं पूरी जानकारी" href="http://10.0.0.122:1245/deposit-50-rupees-daily-you-will-get-so-many-lakh-rupees-on-maturity-read-and-get-complete-information/">Post Office RD Scheme : रोजाना जमा करें 50 रुपये, मैच्योरिटी पर पाएं इतने लाख रुपये, पढ़ें और पाएं पूरी जानकारी</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 16:05:44 +0530</pubDate>
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                <title>परेशानियां और उसका हल</title>
                                    <description><![CDATA[Story: राजस्थान के एक गाँव में रहने वाला एक व्यक्ति हमेशा किसी ना किसी समस्या से परेशान रहता था और इस कारण अपने जीवन से बहुत दु:खी था। एक दिन उसे कहीं से जानकारी प्राप्त हुई कि एक साधू अपने काफिले के साथ उसके गाँव में पधारे हैं। उसने तय किया कि वह साधू से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/problems-and-their-solutions-story/article-54769"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Story: राजस्थान के एक गाँव में रहने वाला एक व्यक्ति हमेशा किसी ना किसी समस्या से परेशान रहता था और इस कारण अपने जीवन से बहुत दु:खी था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन उसे कहीं से जानकारी प्राप्त हुई कि एक साधू अपने काफिले के साथ उसके गाँव में पधारे हैं। उसने तय किया कि वह साधू से मिलेगा और अपने जीवन की समस्याओं के समाधान का उपाय पूछेगा। शाम को वह उस स्थान पर पहुँचा, जहाँ साधू रुके हुए थे। कुछ समय प्रतीक्षा करने के उपरांत उसे साधू से मिलने का अवसर प्राप्त हो गया। वह उन्हें प्रणाम कर बोला, ‘हे महात्मा जी! मैं अपने जीवन में एक के बाद एक आ रही समस्याओं से बहुत परेशान हूँ।</p>
<p style="text-align:justify;">एक से छुटकारा मिलता नहीं कि दूसरी सामने खड़ी हो जाती है। घर की समस्या, काम की समस्या, स्वास्थ्य की समस्या और जाने कितनी ही समस्यायें। ऐसा लगता है कि मेरा पूरा जीवन समस्याओं से घिरा हुआ है। कृपा करके कुछ ऐसा उपाय बतायें कि मेरे जीवन की सारी समस्यायें खत्म हो जाये और मैं शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पूरी बात सुनने के बाद साधू मुस्कुराये और बोले, ‘बेटा! मैं तुम्हारी समस्या समझ गया हूँ। उन्हें हल करने के उपाय मैं तुम्हें कल बताऊंगा। इस बीच तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो।’ व्यक्ति तैयार हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">साधू बोले, ‘बेटा, मेरे काफिले में 100 ऊँट है। मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम उनकी रखवाली करो। जब सभी 100 ऊँट बैठ जायें, तब तुम सो जाना।’</p>
<p style="text-align:justify;">यह कहकर साधू अपने तंबू में सोने चले गए। व्यक्ति ऊँटों की देखभाल करने चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अगली सुबह साधू ने उसे बुलाकर पूछा, ‘बेटा! तुम्हें रात को नींद तो अच्छी आई ना?’</p>
<p style="text-align:justify;">‘कहाँ साधू जी? पूरी रात मैं एक पल के लिए भी सो न सका। मैंने बहुत प्रयास किया कि सभी ऊँट एक साथ बैठ जायें, ताकि मैं चैन से सो सकूं। किंतु मेरा प्रयास सफल न हो सका। कुछ ऊँट तो स्वत: बैठ गए। कुछ मेरे बहुत प्रयास करने पर भी नहीं बैठे। कुछ बैठ भी गए, तो दूसरे उठ खड़े हुए। इस तरह पूरी रात बीत गई।’ व्यक्ति ने उत्तर दिया। Story</p>
<p style="text-align:justify;">साधू मुस्कुराये और बोले, ‘यदि मैं गलत नहीं हूँ, तो तुम्हारे साथ कल रात यह हुआ?</p>
<p style="text-align:justify;">कई ऊँट खुद-ब-खुद बैठ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">कईयों को तुमने अपने प्रयासों से बैठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">कई तुम्हारे बहुत प्रयासों के बाद भी नहीं बैठे। बाद में तुमने देखा कि वे उनमें से कुछ अपने आप ही बैठ गए।’<br />
‘बिल्कुल ऐसा ही हुआ साधू जी।’ व्यक्ति तत्परता से बोला।</p>
<p style="text-align:justify;">तब साधू ने उसे समझाते हुए कहा, ‘क्या तुम समझ पाए कि जीवन की समस्यायें इसी तरह है : कुछ समस्यायें अपने आप ही हल हो जाती हैं। कुछ प्रयास करने के बाद हल होती है। कुछ प्रयास करने के बाद भी हल नहीं होती। उन समस्याओं को समय पर छोड़ दो। सही समय आने पर वे अपने आप ही हल हो जायेंगी। कल रात तुमने अनुभव किया होगा कि चाहे तुम कितना भी प्रयास क्यों न कर लो। तुम एक साथ सारे ऊँटों को नहीं बैठा सकते। तुम एक को बैठाते हो, तो दूसरा खड़ा हो जाता है। दूसरे को बैठाते हो, तो तीसरा खड़ा हो जाता है। Story</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन की समस्याएं इन ऊँटों की तरह ही हैं। एक समस्या हल होती नहीं कि दूसरी खड़ी हो जाती है। समस्यायें जीवन का हिस्सा है और हमेशा रहेंगी। कभी ये कम हैं, तो कभी ज्यादा। बदलाव तुम्हें स्वयं में लाना है और हर समय इनमें उलझे रहने के स्थान पर इन्हें एक तरफ रखकर जीवन में आगे बढ़ना है।’ व्यक्ति को साधू की बात समझ में आ गई और उसने निश्चय किया कि आगे से वह कभी अपनी समस्याओं को खुद पर हावी होने नहीं देगा। चाहे सुख हो या दु:ख जीवन में आगे बढ़ता चला जायेगा। Story</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="दादा जी की छड़ी" href="http://10.0.0.122:1245/grandfathers-stick-childrens-story/">दादा जी की छड़ी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Nov 2023 15:45:17 +0530</pubDate>
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                <title>दादा जी की छड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[दादू आज आप प्रात: भ्रमण के लिए क्यों नहीं गये, कानू के मासूमियत भरे प्रश्न से दादाजी की आंखें डबडबा गई अपने नन्हे पोते की बात सुनकर उनकी आंखों से आंसू छलक आए, अरे तू है न ‘पोता, मेरा छड़ी’ कहकर गले से लगा लिया। अरे यह क्या आपकी छड़ी तो टूट गयी है दादा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/grandfathers-stick-childrens-story/article-54521"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/grandfathers-stick.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दादू आज आप प्रात:</strong> भ्रमण के लिए क्यों नहीं गये, कानू के मासूमियत भरे प्रश्न से दादाजी की आंखें डबडबा गई अपने नन्हे पोते की बात सुनकर उनकी आंखों से आंसू छलक आए, अरे तू है न ‘पोता, मेरा छड़ी’ कहकर गले से लगा लिया। अरे यह क्या आपकी छड़ी तो टूट गयी है दादा जी कोई नहीं मैं पापा से कहूंगा वे नई छड़ी ला देंगे। रहने दो बेटा तुम कुछ मत कहना, दादा जी के मना करने के बावजूद, कानू ने अपने पिताजी को सारी बात बतायी। कानू की मां भी वहीं थी। वह बोली- इनका खर्च भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। Grandfather’s Stick</p>
<p style="text-align:justify;">कभी इनका चश्मा टूट जाता तो कभी इनकी छड़ी, पैसे जैसे पेड़ से टपकते हैं न, जो हाथ लगाया तोड़ लिया। मां की बात सुन कानू ने सोचा- अब दादाजी बिना छड़ी के कभी बाहर नहीं जा पायेंगे। एक दिन कानू ने टीवी पर फेवीक्विक का विज्ञापन देखा। मां ने उसने पांच रुपये आइसक्रीम खाने के लिए मांगे। कानू उस पैसे से किराने की दुकान पर गया और बोला अंकल जी आपके पास फेवीक्विक है? दुकानदार बोला हा बेटा जी है। कानू ने फिर दोबारा पूछा अंकल जी क्या इससे वाकई सभी चीजें चिपक जाती है? हाँ बेटा जी यह पांच रुपये का सामान बड़े काम की चीज है। यह सुनकर कानू खुश हो गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">खुशी-खुशी झूमता हुआ वह घर को गया | Grandfather’s Stick</h3>
<p style="text-align:justify;">घर में दादाजी के छड़ी के दो टुकड़ों को वह फेवीक्विक से चिपकाने का प्रयास करने लगा। छड़ी तो नहीं चिपकी, लेकिन उसके हाथों की उंगलिया बुरी तरह चिपक गयीं। अब कानू रोने लगा,</p>
<p style="text-align:justify;">दादा जी मेरे हाथों की उंगलियां। क्या हुआ कानू, दादाजी समझ गये। वे धीरे-धीरे लड़खड़ाते हुए कदमों से बहुरानी के पास गये। आवाज लगाया बहु-औ- बहु, थोड़ा गर्म पानी चाहिए, कानू की उंगलियां चिपक गई है। इतना सुनते ही कानू की मां दौड़ी अपने लाल के पास आयी और मां बोली- तुम्हें क्या जरूरत थी ऐसा करने की?</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बताया तो था। आपको पता है कि दादाजी कितने बाहर से चाहर नहीं गये कहते हुए उसकी आंखों से आंसू निकल आये। मां ने फफक कर कानू को गले से लगा लिया। अगले दिन बाऊजी बाऊजी कहते हुए, उनको कानू की मां आवाज लगा रही थी। क्या हुआ बहु? कानू के दादा से कानू की मां ने कहा मुझे माफ कीजियेगा और ये रही आपकी नयी छड़ी। कानू अपनी दादाजी की हाथों में नई छड़ी देख काफी खुश हुआ। कानू उछलते हुए बोला- अब दादाजी पहले की तरह हर दिन प्रात: भ्रमण को जायेंगे। Grandfather’s Stick</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Cow Dung lamp Diya: अमेरिका को रोशन करेंगे जयपुर के दीये" href="http://10.0.0.122:1245/jaipur-lamps-will-illuminate-america/">Cow Dung lamp Diya: अमेरिका को रोशन करेंगे जयपुर के दीये</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/grandfathers-stick-childrens-story/article-54521</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 17:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मेल आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[Story of Email ID:- एक बार की बात है, अमेरिका में एक व्यक्ति जो कम पढ़ा लिखा था, नौकरी के लिए एक दफ्तर में गया। काम था साफ-सफाई का। इंटरव्यू के बाद उसे एक-दो काम करने को कहा गया। लड़का गरीब था और उसे नौकरी की जरुरत भी थी तो उसने बड़ी ही लगन से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-of-email-id/article-52420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/story-of-email-id.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Story of Email ID:- एक बार की बात है, अमेरिका में एक व्यक्ति जो कम पढ़ा लिखा था, नौकरी के लिए एक दफ्तर में गया। काम था साफ-सफाई का। इंटरव्यू के बाद उसे एक-दो काम करने को कहा गया। लड़का गरीब था और उसे नौकरी की जरुरत भी थी तो उसने बड़ी ही लगन से वो काम किए। Mail Id</p>
<p style="text-align:justify;">काम देखने के बाद मालिक ने कहा, ‘शाबाश! मुझे तुम्हारा काम बहुत पसंद आया। मैं तुम्हें ये नौकरी देता हूँ। तुम अपनी ई-मेल आईडी मुझे दो, मैं तुम्हें अपॉइंटमेंट लैटर भेज देता हूँ।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘लेकिन सर, मैंने तो ईमेल आईडी बनाई नहीं।’ ‘क्यों? आजकल तो सब ई-मेल आईडी बनाकर रखते हैं, इसके बिना तो काम ही नहीं चलता।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘सर मैं बहुत ही गरीब परिवार से हूं और कंप्यूटर चलाने की मेरी औकात नहीं है। कृपया मुझे इस नौकरी पर रख लीजिये।’ ‘देखो, मैं मानता हूँ कि तुम इस नौकरी के काबिल हो लेकिन हम जॉइनिंग ईमेल से ही करवाते हैं। इसलिए तुम जा सकते हो।’ इतना सुन लड़का निराश होकर वहां से निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">रास्ते में चलते-चलते उसने देखा कि एक औरत सब्जी वाले से टमाटर के बारे में पूछ रही थी और उसके पास टमाटर नहीं थे। औरत बूढ़ी थी और बाजार जा नहीं सकती थी। तभी उसे एक ख्याल आया। उसने अपनी जेब में हाथ डाला तो उसने देखा कि उसके पास 10 रुपए बचे थे। वह तुरंत बाजार गया और 10 रुपए के टमाटर ले आया। उसने वो टमाटर उस बूढ़ी औरत को बेच दिए। कुछ मुनाफा हुआ देख वह दोबारा बाजार गया और कुछ टमाटर और ले आया। उन टमाटरों को लेकर वह घर-घर गया और उन्हें बेचने की कोशिश की। 2-4 घर घूमने के बाद एक घर में किसी ने टमाटर खरीद लिए। जब उसने ये देखा कि एक बार टमाटर बेचने में उसे 15 रुपए का फायदा हुआ है, तो वह दोबारा गया और फिर से उन टमाटरों को बेच दिया। Story of Email ID</p>
<p style="text-align:justify;">उस दिन उसने अगले दिन टमाटर खरीदने के लिए थोड़े पैसे बचा लिए और बाकी के पैसों से खाने का इंतजाम किया। अगले दिन और उस दिन के बाद कुछ और दिनों तक वह इसी तरह टमाटर बेचता रहा। उसका काम काफी बढ़ चुका था। और आगे-आगे यह बढ़ता ही जा रहा था। टमाटर लाने के लिए पहले वह किराये पर गाड़ी लाने लगा। पैसे इकट्ठे कर उसने अपनी गाड़ी ली। ज्यादा पैसे हो जाने पर उसने एक और गाड़ी ली और उसके लिए ड्राईवर भी रख लिया। ये कोई किस्मत का खेल नहीं था। यह सब उस लड़के की सूझ-बूझ और हिम्मत का परिचय था। कुछ ही सालों में उसने टमाटर के व्यापार से बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर लिया था। अब वह एक संपन्न व्यक्ति बन चुका था।</p>
<p style="text-align:justify;">थोड़े ही दिनों में उसकी शादी हो गयी। शादी किए कुछ वर्षों बाद ही उसके घर में बच्चों की किलकारियां गूंजने लगीं। अब उसे किसी भी चीज की परेशानी नहीं थी। सब चीजों से जब वह बेफिक्र हुआ तो उसने सोचा कि अब उसे अपना बीमा करवा लेना चाहिए। इससे यदि उसे कुछ हो गया तो भविष्य में उसके परिवारवालों को आर्थिक तौर पर कोई परेशानी न हो। बीमा करवाने के लिए उसने बीमा एजेंट को फोन किया। Email ID</p>
<p style="text-align:justify;">अगले दिन बीमा एजेंट उस व्यक्ति के पास आया। फॉर्म भरते समय सब कुछ भरने के बाद एक कॉलम खाली रह गया। यह कॉलम था ईमेल आईडी का। उस एजेंट ने पूछा, ‘सर आपकी ईमेल आईडी क्या है ?’</p>
<p style="text-align:justify;">‘सॉरी, मेरी कोई ईमेल आईडी नहीं है।’ एजेंट को लगा कि वो मजाक कर रहा है। ‘सर क्या मजाक कर रहें हैं आप भी…’<br />
‘नहीं, मैंने कोई मजाक नहीं किया। सचमुच मेरी कोई ईमेल आईडी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">‘सर आपको पता है अगर आपने ईमेल आईडी का उपयोग किया होता तो आपका व्यापार और कितना आगे बढ़ सकता था। आपको पता है आज आप क्या होते ?’</p>
<p style="text-align:justify;">‘एक कंपनी में मामूली सफाई वाला, इस उत्तर से वो एजेंट स्तब्ध रह गया। उसे कुछ समझ नहीं आया तब उस व्यक्ति ने उसे अपनी कहानी सुनाई। जिसे सुन एजेंट को ये एहसास हुआ कि इंसान के अन्दर इच्छा हो तो वो कुछ भी हासिल कर सकता है और इसके लिए जरूरी नहीं कि उसके पास सभी साधन मौजूद हो। Email ID</p>
<p style="text-align:justify;">दोस्तो, ऐसे ही परिस्थितियां हमारे जीवन में भी कई बार आती हैं। तब हमें लगता है कि काश अगर ये चीज हमारे पास होती तो आज हम कहीं और होते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। हो सकता है वो चीज भगवान ने हमें इसलिए न दी हो कि हम उससे ज्यादा प्राप्त करने के काबिल हों। परन्तु हम ज्यादा पाने का प्रयास न करके मौके तलाशते रहते हैं, जो हमें आगे बढ़ा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार खुद कोशिश तो करो अपना नजरिया बदलकर तो देखो उस विचार को अपने मन में तो लाओ छोड़ दो रोना उस चीज के लिए जो तुम्हारे पास नहीं है और बदल दो दुनिया को उन चीजों से जो तुम्हारे पास है। अगर तुम आज हार नहीं मानोगे तो आने वाला कल तुम्हारा होगा और यदि तुमने आज हार मान ली तो आने वाला कल कभी नहीं आ पाएगा। हालातों को दोष देना छोड़िये, कदम बढ़ाइये। ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनकी जिंदगी सफर में होती है छोड़ देते हैं जो कारवां अक्सर किस्मतें उन्हीं की सोती हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">सब चीजों से जब वह बेफिक्र हुआ तो उसने सोचा कि अब उसे अपना बीमा करवा लेना चाहिए। इससे यदि उसे कुछ हो गया तो भविष्य में उसके परिवारवालों को आर्थिक तौर पर कोई परेशानी न हो। Email ID</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Film City: उदयपुर में फिल्म सिटी की मांग" href="http://10.0.0.122:1245/demand-for-film-city-in-udaipur/">Film City: उदयपुर में फिल्म सिटी की मांग</a></p>
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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 15:56:35 +0530</pubDate>
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