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                <title>IIT delhi - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>IIT Delhi: लोकेशन मांगने वाले मोबाइल ऐप से रहें सावधान! &amp;#8221;निजी जानकारी लीक होने का खतरा&amp;#8221;</title>
                                    <description><![CDATA[Mobile App Fraud: नई दिल्ली। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी महत्वपूर्ण जांच सामने रखी है, जो मोबाइल ऐप्स से जुड़ी गोपनीयता चिंताओं को और गंभीर बना देती है। अध्ययन के अनुसार, वे ऐप्स जो उपयोगकर्ताओं से “सटीक लोकेशन” की अनुमति मांगते हैं, वे केवल स्थान की जानकारी ही नहीं, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/beware-of-mobile-apps-that-ask-for-your-location-personal-information-is-at-risk-of-leakage/article-77523"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/mobile-app-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Mobile App Fraud: नई दिल्ली। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी महत्वपूर्ण जांच सामने रखी है, जो मोबाइल ऐप्स से जुड़ी गोपनीयता चिंताओं को और गंभीर बना देती है। अध्ययन के अनुसार, वे ऐप्स जो उपयोगकर्ताओं से “सटीक लोकेशन” की अनुमति मांगते हैं, वे केवल स्थान की जानकारी ही नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की गतिविधियों, आसपास के वातावरण और यहां तक कि उनके कमरे की संरचना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी जान सकते हैं। IIT Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल ACM Transactions on Sensor Networks में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में “एंड्रोकॉन” नामक एक तकनीकी मॉडल का विश्लेषण किया गया, जिसने यह दर्शाया कि एंड्रॉयड सिस्टम में उपलब्ध सूक्ष्म जीपीएस डेटा किसी छुपे हुए सेंसर की तरह काम कर सकता है। इस डेटा के आधार पर ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन या मोशन सेंसर का उपयोग किए बिना भी व्यक्ति की स्थिति और उसके आस-पास के माहौल का अनुमान लगा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शोध बताता है कि डॉपलर शिफ्ट, सिग्नल की शक्ति और मल्टीपाथ इंटरफेरेंस जैसे कुल नौ जीपीएस मापदंडों की व्याख्या करके यह तकनीक यह पता लगा सकती है कि व्यक्ति बैठा है, खड़ा है, लेटा है, यात्रा कर रहा है, पार्क में है या किसी भीड़ भरे स्थान पर मौजूद है। शोध दल, जिसका नेतृत्व एम.टेक छात्र सोहम नाग ने किया, ने यह भी बताया कि इस तकनीक से यह तक समझा जा सकता है कि कोई कमरा भरा हुआ है या खाली। IIT Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">कच्चे जीपीएस संकेतों को स्पष्ट जानकारी में बदलने के लिए, शोध टीम ने परंपरागत सिग्नल प्रोसेसिंग और आधुनिक मशीन लर्निंग तकनीकों का संयोजन किया। परिणामों के अनुसार, यह प्रणाली मानवीय गतिविधियों की पहचान में 87 प्रतिशत तक और आसपास के माहौल का पता लगाने में करीब 99 प्रतिशत तक सटीक पाई गई।</p>
<h3>यह शोध मोबाइल जीपीएस के एक ऐसे पक्ष को सामने लाता है</h3>
<p style="text-align:justify;">स्टडी में यह भी सामने आया कि सिर्फ जीपीएस पैटर्न और उपयोगकर्ता की आवाजाही की दिशा देखकर यह तकनीक 4 मीटर से भी कम त्रुटि के साथ किसी भवन का फ्लोर प्लान तैयार कर सकती है, जिसमें कमरे, लिफ्ट और सीढ़ियों जैसी संरचनाओं की पहचान भी शामिल है। IIT Delhi News</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईटी दिल्ली के कंप्यूटर साइंस विभाग की प्रोफेसर स्मृति आर. सारंगी ने कहा कि यह शोध मोबाइल जीपीएस के एक ऐसे पक्ष को सामने लाता है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है — एक मौन परंतु अत्यंत शक्तिशाली माध्यम, जो उपयोगकर्ता के परिवेश को महसूस कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सटीक लोकेशन की अनुमति किसी ऐप को दी जाती है, तो वह ऐप उपयोगकर्ता की जानकारी या अनुमति के बिना ही अत्यधिक संवेदनशील डेटा प्राप्त कर सकता है। इसलिए, यह खोज न केवल नई तकनीकी संभावनाओं को उजागर करती है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और गोपनीयता की गंभीर चुनौती भी प्रस्तुत करती है। IIT Delhi News</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 14:12:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अब चिंटल्स पैराडिसो का जी-टावर रहने के लिए असुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[(Gurugram News) | जिलाधीश ने दिए टावर खाली करने के आदेश डी-टावर में हादसा होने के बाद ई-एफ टावर भी पाए गए थे सुरक्षित अब जी-टावर की भी रिपोर्ट में इसे असुरक्षित करार दिया गया गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। यहां सेक्टर-109 स्थित चिंटल्स पैराडिसो (Chintels Paradiso) सोसायटी में अब जी-टावर को भी असुरक्षित घोषित किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/chintels-paradiso-tower-now-unsafe-to-live-in/article-48819"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/13gurp01.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">(Gurugram News) | जिलाधीश ने दिए टावर खाली करने के आदेश</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>डी-टावर में हादसा होने के बाद ई-एफ टावर भी पाए गए थे सुरक्षित</li>
<li>अब जी-टावर की भी रिपोर्ट में इसे असुरक्षित करार दिया गया</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)।</strong> यहां सेक्टर-109 स्थित चिंटल्स पैराडिसो (Chintels Paradiso) सोसायटी में अब जी-टावर को भी असुरक्षित घोषित किया गया है। आईआईटी दिल्ली द्वारा जारी स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट में टावर-जी को इंसानों के रहने के लिए असुरक्षित बताया गया है। लोगों को जल्द से जल्द टावर खाली करने के निर्देश जिलाधीश की ओर से दिए गए हैं। जिलाधीश एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव ने धारा 144 लगाने के साथ-साथ टावर-जी में रहने वाले निवासियों को अगले 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने के आदेश दिए हैं। इस कार्य के लिए डीटीपी (ई) को नोडल अधिकारी एवं ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (Chintels Paradiso)</p>
<h3 style="text-align:justify;">इससे पहले डी, ई व एफ टावर असुरक्षित घोषित | (Chintels Paradiso)</h3>
<p style="text-align:justify;">टावर-जी से पहले यहां तीन अन्य टावर को भी असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसकी शुरूआत हुई थी फरवरी 2022 में डी-टावर के भीतर छत का लेंटर गिरने से। 18 मंजिला डी-टावर की छठी मंजिल से लेंटर गिरने से नीचे तक के लेंटर गिर गए थे। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी। काफी विवादों के बीच आईआईटी दिल्ली की टीम ने नवंबर 2022 में टावर-डी की गहनता से जांच करके रिपोर्ट में इसे रहने के लिए असुरक्षित बताया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया कि इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट में क्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है, जिससे निर्माण में इस्तेमाल होने वाला स्टील और कंक्रीट नष्ट हो गया। इस मामले में सीबीआई जांच भी शुरू की गई, जिसमें सीबीआई ने चिंटल्स पैराडिसो के मालिक अशोक सोलोमन के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर की शिकायत पर नया केस गुरुग्राम पुलिस ने भी दर्ज किया। यह केस चिंटल्स के एमडी अजय सोलोमन, स्ट्रक्टर इंजीनियर, डिजाइन कंसल्टेंट समेत सात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया। (Gurugram News)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="प्रेरक प्रसंग: विवेक से करें विरोधियों का हृदय परिवर्तन" href="http://10.0.0.122:1245/change-the-heart-of-opponents-with-discretion/">प्रेरक प्रसंग: विवेक से करें विरोधियों का हृदय परिवर्तन</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2023 17:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआईटी, दिल्ली ने आत्मनिर्भर भारत निर्माण की दिशा में उठाया कदम</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली ने आत्मनिर्भर भारत निर्माण की दिशा में कदम उठाते हुए अगले साल से 200 शोध कार्यों को पेटेंट कराने का लक्ष्य रखा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iit-delhi-took-steps-towards-building-self-reliant-india/article-16001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/iit-delhi-took-steps-towards-building-self-reliant-india.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">(Indian Institute of technology Delhi)</h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली ने आत्मनिर्भर भारत निर्माण की दिशा में कदम उठाते हुए अगले साल से 200 शोध कार्यों को पेटेंट कराने का लक्ष्य रखा है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक राम गोपाल राव ने बताया कि उनके संस्थान ने पिछले कुछ वर्षों में शोध एवं अनुसंधान कार्य पर 350 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और स्टार्टअप शुरू करने की दिशा में सबसे उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष तक हम शोध एवं अनुसंधान कार्यों के 150 पेटेंट कराते थे लेकिन अगले साल से हमने 200 पेटेंट कराने का लक्ष्य रखा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">राव ने यह भी कहा कि आज संस्थान का हर दूसरा छात्र उद्यमी बनने की दिशा में काम कर रहा है और स्टार्टअप खोल रहा है तथा संस्थान ने 200 उद्योगों के साथ भी साझेदारी की है। उन्होंने कहा, “हमने देश में कोरोना संकट को देखते हुए बड़ी संख्या में पीपीई किट, टेस्टिंग किट, मास्क और अन्य उपकरण बनाएं और इस दिशा में अभी भी कार्य चल रहा है। हम लोग हर चुनौतियों का मुकाबला करने और समाधान निकलने पर काम कर रहे हैं। हमने उन्नत भारत अभियान में भी बड़ी भूमिका निभाई और इस तरह आत्म निर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं।”</h6>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/iit-delhi-took-steps-towards-building-self-reliant-india/article-16001</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2020 12:13:02 +0530</pubDate>
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