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                <title>Farmaer friend Policy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>किसान मित्र नियुक्त करने की नीति पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उठाए सवाल, बोले-</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार की तरफ से 17 हजार किसान मित्र नियुक्त करने के ऐलान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को खुद किसानों की मित्र बनना चाहिए।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhupendra-singh-hooda-raised-question-on-the-policy-of-appointing-a-farmer-friend/article-16058"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/bhupendra-singh-hooda-raised-question-on-the-policy-of-appointing-a-farmer-friend.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">‘किसान विरोधी नीतियों पर मंथन करे सरकार’</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>नई-नई शब्दावली गढ़ने से बाज आने की दी सलाह</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़</strong>। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार की तरफ से 17 हजार किसान मित्र नियुक्त करने के ऐलान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को खुद किसानों की मित्र बनना चाहिए। लेकिन अगर सरकार ही किसानों के विरोधी बन बैठी हो तो फिर किसान मित्र नियुक्त करने का क्या फायदा? सरकार को नई-नई शब्दावली गढ़ने की बजाय अपनी किसान विरोधी नीतियों पर मंथन करना चाहिए। तमाम महकमों, मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को किसानों के मित्र की तरह काम करना चाहिए। लेकिन लगता है कि सरकार ऐसा कर पाने में विफल रही है। इसीलिए अलग से किसान मित्र नियुक्त करने पड़ रहे हैं। लेकिन सरकार की नीयत और नीति देखकर लगता है कि इससे भी किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करें</h4>
<h6 style="text-align:justify;">सचमुच में आज सरकार से किसान को राहत और प्रोत्साहन की जरुरत है। अगर सरकार किसानों की हमदर्द मित्र बनना चाहती है तो उसे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, फसल के उचित रेट देने, कृषि की लागत कम करने, खेती उपकरणों से टैक्स हटाने, डीजल के रेट कम करने जोकि रोज बढ़ रहे हैं और कर्ज माफी की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">घोटालों पर डाला जा रहा पर्दा</h4>
<h6 style="text-align:justify;">बहरहाल सरकार नए-नए घोटाले जैसे धान खरीद का घोटाला, चना खरीद घोटाला, सरसों खरीद घोटाला, गन्ना तोल घोटाला आदि पर पर्दा डालने का काम कर रही है। किसान को राहत और प्रोत्साहन देने की बजाय सरकार लगातार खेती को महंगी करने, फसल की खरीद रोकने और किसानों पर बंदिशें थोपने पर लगी है। फिर भी खुद को किसान हमदर्द दिखाने के लिए उसका पूरा जोर नए-नए जुमले और नई-नई शब्दावली गढ़ने पर रहता है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">एफपीओ नकारा साबित</h4>
<h6 style="text-align:justify;">पहले भी सरकार की तरफ से एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन), मास्टर ट्रेनर और मॉडरेटर बनाए गए थे। उनसे भी किसानों को कोई लाभ नहीं पहुंच रहा। बीजेपी ने पिछले कार्यकाल में अधिकारियों पर विश्वास न करके अपने चहेतों को एडजस्ट करने के लिए, प्रदेश से बाहरियों को सुशासन सहयोगी भी नियुक्त किया था। लेकिन पूरी व्यवस्था में न कहीं उनका सहयोग नजर आया और न ही प्रदेश में कहीं सुशासन देखने को मिला।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">चहेतों को लाभ देने की बजाय युवाओं को रोजगार दें</h4>
<h6 style="text-align:justify;">नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर तमाम विफलताओं के बावजूद सरकार किसान मित्र बनाना ही चाहती है तो उसे वॉलिंटियर नियुक्त करने की बजाय एचएयू से कृषि की पढ़ाई करने वाले बेरोजगार युवाओं को नियुक्ति देनी चाहिए। इससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और वो अपनी दक्षता के मुताबिक कृषि क्षेत्र में अपना योगदान भी दे पाएंगे। अपने चहेतों को एडजस्ट करने की बजाय सरकार को इनकी भर्ती के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2020 19:02:03 +0530</pubDate>
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